mature aunty sex kahani
मेच्योर आंटी सेक्स कहानी में मैंने अपनी मम्मी की सहेली को ही पटा रखा था और चोदता था. एक बार हमें कहीं घूमने का प्रोग्राम बनाया और आंटी को होटल के बगीचे में चोदा.
हैलो फ्रेंड्स, मैं संजय आपको अपनी विधवा मां की सेक्स कहानी लिख रहा था.
कहानी के पहले भाग मेरे दोस्त ने मेरी मम्मी को पटा लिया में अब तक आपने पढ़ लिया था कि मां को एक ऐसे मर्द से प्यार हो गया था जो मेरे ऑफिस का ही मेरा साथी था.
उन दोनों में किसी सोशल मीडिया प्लेटफार्म से दोस्ती हुई थी और अब वे दोनों चैट के माध्यम से एक दूसरे से काफी गहरे जुड़ गए थे.
उनमें सेक्स चैट भी होने लगी थी.
मुझे मालूम चल गया था तो मैंने इसे मां की शारीरिक भूख का हिस्सा मानते हुए उन दोनों को मिलाने का तय करते हुए बाहर घूमने जाने की योजना बनाई.
अब आगे मेच्योर आंटी सेक्स कहानी:
हम सब घूमने के लिए तैयार हुए.
मेरा प्लान परवान चढ़ने लगा था.
मैंने सविता आंटी से कह कर मां से कुणाल का फोन नंबर लेने का ड्रामा किया था ताकि मां को यह न लगे कि मैं कुणाल को पहले से जानता हूँ.
अब मैंने कुणाल से बात की.
मैंने कुणाल से कहा- यार, थोड़ा सजेस्ट कर कहां चलें घूमने?
वह बोला- कोई हिल साइड प्लेस पर चलते हैं, वहां रिलैक्स और चिल हो जाएगा.
मैंने बोला- ओके.
मैंने मां से पूछा कि कहां चलना है तो वे बोलीं- कहीं भी चलो.
मैंने बोला- अपने उस दोस्त से पूछ लो.
तो वे बोलीं- मैंने बात की है, वह बोला कोई हिल स्टेशन चलते हैं.
मैंने कहा- ठीक है, हिल स्टेशन ही चलते हैं.
हम लोग शनिवार को निकले. मैं, मां और सविता, तीनों साथ गए तो स्टेशन में कुणाल मिल गया.
मां ने नेवी ब्लू साड़ी और ब्लैक टाइट ब्लाउज पहना था, जिसमें से उनकी व्हाइट ब्रा की स्ट्रैप दिख रही थी.
सविता आंटी ने पीले रंग का सूट और व्हाइट लेगिंग्स पहनी थी.
मैंने सिर्फ एक हाफ पैंट और टी-शर्ट पहनी थी … और कुणाल ने भी हाफ पैंट और शर्ट पहनी हुई थी.
हम सब ट्रेन से गए और रात भर बातें कीं. कुणाल पूरी तरह से मां पर लाइन मार रहा था और बीच-बीच में उन्हें आंख मार रहा था.
मैं सविता आंटी के पास बैठा था और मां कुणाल के पास.
हम सब एकदम अनजान बनकर मिल रहे थे.
रविवार रात को हम उस पहाड़ी जगह पहुंच गए.
सबसे बड़ा ‘ट्विस्ट और टर्न’ यहां हुआ, जो होटल मैंने बुक किया था, उसमें सिर्फ एक ही कमरा उपलब्ध था.
जब मैंने बुक किया था … तब दो किए थे, लेकिन जब वहां पहुंचे तो होटल मैनेजर बोला- रविवार है और कस्टमर बहुत आए हैं, इसलिए एक ही कमरा मिलेगा … या दूसरे होटल में एक और कमरा मिल सकता है.
मां और सविता दोनों बोलीं- नहीं, एक ही कमरा ले लो .. अलग-अलग होटल नहीं जाएंगे.
मैंने सविता को इशारा किया तो सविता मेरे पास आई.
मैंने धीरे से कहा- यहां हम लोग क्यों आए हैं? साथ सोने के लिए न!
वह बोली- देखो, आपकी मम्मी को मैं मैनेज कर लूँगी.
मैंने ओके बोल दिया.
फिर हम कमरे में गए और फ्रेश हुए.
उसके बाद मैंने सबसे पूछा कि जिस-जिस को पीना है, वह बोल दे.
मैं, कुणाल और सविता पीने के लिए रेडी हुए.
मेरी मां पूनम बोलीं- मैं नहीं पीती.
उन्होंने शायद पहले कभी शराब पी भी नहीं थी.
उन्हें मेरे पीने पर कोई आपत्ति भी नहीं थी.
हम सब बात कर रहे थे और ड्रिंक्स चल रही थीं.
मैं वहां एकदम अनजान बना हुआ था जैसे कोई किसी को जानता ही न हो.
फिर मैं बोला- मैं अभी आता हूँ.
कुणाल ने पूछा- कहां जा रहे हो?
मैंने कहा- कुछ नहीं, बस एक गैस की टैबलेट लेकर आता हूँ.
सविता ने मुझे देखा और मैंने उसे आंख मारी.
सविता तुरंत समझ गई कि मैं असल में क्या लेने जा रहा हूँ
कुणाल बोला- मैं भी चलता हूँ.
मैंने पूछा- तुम क्या करोगे?
तो वह बोला- ऐसे ही चलता हूँ.
मैंने कहा- ठीक है, चलो.
हम दोनों होटल से बाहर निकल गए.
रास्ते में मैंने कुणाल से पूछा- यार, कैसी है तेरी वाली?
मैंने अपनी मां के लिए पूछा था.
कुणाल ने जवाब दिया- वैसे तो बहुत अच्छी है मुझे वह भी पसंद करती है, ऐसा उसने बोला.
मैंने कुणाल से कहा- वह तो तुमको पसंद करती ही है, तुम बोलो … अगर सब ठीक रहा तो सेक्स में क्या दिक्कत है?
वह हां में सर हिलाने लगा.
फिर मैंने चुटकी लेते हुए पूछा- अगर तुम दोनों के बीच में आज ही कुछ हो जाए, तब कैसा रहेगा?
कुणाल बोला- भाई, मेरा तो आज बहुत मन है कि पूनम (मेरी मां) के साथ कुछ करूँ, लेकिन रूम ही नहीं है!
मैंने उसे समझाया- आज कुछ नहीं करना, थोड़ा सब्र रख.
वह बोला- देखते हैं.
ऐसे ही बात करते-करते हम फार्मेसी पहुंचे.
वहां जाकर मैंने बोला- सेक्स टैबलेट्स के तीन पैक और दो बड़े पैकेट कंडोम के ले लिए.
इतना सारा सामान देख कर कुणाल चौंक कर बोला- आज क्या पूरा बेड तोड़ देगा क्या?
मैंने हंसते हुए कहा- नहीं यार, सविता को कंडोम पसंद नहीं है, फिर भी इमरजेंसी के लिए ले लिया. औरत लोगों के ड्रामे का पता नहीं चलता, ऐन मौके पर मूड खराब कर देती हैं.
कुणाल बोला- बात तो सही है.
हम दोनों हंसने लगे.
फिर हम वापस रूम में गए और पीना शुरू किया.
थोड़ी देर पीने के बाद, सविता ने थोड़ी सी ड्रिंक मम्मी को दी और ज़िद करने लगी- कुछ नहीं होता, पी लो ना!
मम्मी ने मेरी तरफ देखा तो मैंने भी कह दिया- पी लो ना!
तभी कुणाल बीच में बोला- पूनम, थोड़ी ही पीना.
मम्मी को कुणाल का यह केयरिंग नेचर अच्छा लग रहा था तो उन्होंने थोड़ी सी पी ली.
थोड़ी देर में मम्मी को नशा चढ़ने लगा और वे इधर-उधर की बातें करने लगीं.
तभी सविता बोली- मैं तो नीचे सोऊंगी.
तो पूनम (मम्मी) ने कहा- कोई बात नहीं, मैं ऊपर सो जाऊंगी.
अंत में यह तय हुआ कि मम्मी नीचे सोएंगी और सविता (मेरी गर्लफ्रेंड) ऊपर सोएगी.
खाना खाने के बाद मैं और सविता बेड पर आ गए.
कुणाल बोला- मैं भी नीचे ही सोऊंगा, मुझे वॉमिट (उल्टी) जैसा महसूस हो रहा है.
मैं समझ रहा था कि वह झूठ बोल रहा था, उसे कोई उल्टी नहीं आ रही थी.
मम्मी ने लाल नाइटी पहनी थी, जिसके अन्दर सफ़ेद ब्रा और ब्राउन पैंटी थी.
सविता ने एक टॉप और शॉर्ट्स पहना था और अन्दर सिर्फ पिंक ब्रा थी.
मैंने और कुणाल ने भी सिर्फ शॉर्ट्स और वेस्ट (बनियान) पहनी थी.
मैंने और सविता ने एक ब्लैंकेट लिया और दूसरा एक्स्ट्रा ब्लैंकेट नीचे पूनम और कुणाल ने ले लिया.
लाइट बंद थी और बस नाइट लैंप जल रहा था.
मैंने धीरे-धीरे सविता को किस करना और गले लगाना शुरू किया.
कमरे में एकदम सन्नाटा था.
तभी मैंने देखा कि नीचे कुणाल और मम्मी के बीच भी खुसुर-फुसुर चल रही है.
वे एकदम धीरे बात कर रहे थे जो सुनाई नहीं दे रही थी.
मैंने सविता को किस करते हुए उसके बूब्स दबाना शुरू किया तो सविता के मुँह से ‘उफ़्फ़… उफ़्फ़…’ निकलने लगा.
वैसे भी थोड़ी-थोड़ी सबने पी रखी थी, तो सबका मूड बना हुआ था.
तभी सविता धीरे से फुसफुसाई- धीरे … पूनम सुन लेगी!
थोड़ी देर दबाने के बाद सविता बोली- रुको तो!
तभी मुझे नीचे से किसी के चूमने की और ‘उफ़-उफ़’ की आवाज़ें सुनाई दीं.
सविता ने मुझे नीचे की तरफ इशारा किया और बोली- आज यह बहुत अच्छा लगेगा तुम्हारी मम्मी की चुदाई होने वाली है!
मैंने पूछा- तुमको कैसे पता?
वह बोली- जब तुम सिगरेट पीने बाहर गए थे, तब कुणाल ने उनसे बोला था कि आज पूरी रात सोने नहीं देगा. इन दोनों का चुदाई करने का मन तो था, लेकिन जगह नहीं होने के कारण मुझे लगा था कि आज ये लोग सो जाएंगे.
मैं चुप रहा.
सविता ने फिर पूछा- लेकिन आवाज़ सुनाई दे रही थी ना तुमको?
मैंने कहा- छोड़ो, हम लोग यहां फोकस करते हैं!
मैंने उसे टैबलेट दिखाई और बोला- अगर यह खा लूँगा, तो मुझे पूरा कमरा चाहिए होगा!
सविता बोली- संजय, आज ऐसे ही कर लो. नीचे वह लोग भी हैं. लेकिन बाद में दूसरा कमरा लेकर जो करना, जैसा करना … कर लेना. अभी नीचे तुम्हारी मम्मी हैं, आवाज़ आ गई तो उन्हें पता चल जाएगा कि हमारे बीच कुछ हो रहा है.
मैंने कहा- ठीक है बेबी, इधर आओ!
फिर मैं धीरे-धीरे उसकी चूचियां दबाने लगा और उसे किस करने लगा.
मैंने उसका टॉप निकाल कर साइड में रख दिया और ब्रा के ऊपर से ही उसके निप्पल को चूमने लगा.
सविता के निप्पल एकदम कड़क हो गए थे.
मैंने एक तरफ से उसकी चूची बाहर निकाली और चूमने लगा.
तभी नीचे से मम्मी की ‘आह… आह… उफ़… उफ़…’ की आवाज़ें आने लगी थीं.
तभी दो मिनट बाद कुणाल की आवाज़ आई- संजय, सो गया क्या?
मैंने जवाब दिया- बोलो कुणाल, क्या हुआ?
उसने कहा- चलो, सिगरेट पीकर आते हैं.
हम दोनों कमरे से बाहर गए.
कमरे में मेरी मां (पूनम) और मेरी गर्लफ्रेंड सविता थी.
जब हम बाहर निकले, तो मैंने देखा कि कुणाल के बाल पूरे बिखरे हुए थे और मैं सिर्फ ट्राउजर में था.
कुणाल बोला- तेरा तो पूरा काम हो रहा है न!
मैंने कहा- तुम लोग कमरे में हो, इसीलिए धीरे-धीरे हो रहा है … और तुम्हारा?
मैंने कुणाल से पूछा तो कुणाल बोला- मान ही नहीं रही थी, फिर थोड़ा मनाया तो मान गई.
मैंने कहा- तो कर ले न!
उसने जवाब दिया- पूनम बोली कि बिना कंडोम के नहीं करेगी.
मुझे तो अभी खुद चुदाई का मन था.
मैंने सोचा कि जैसे भी हो, यह भी लड़का है और मेरी मां भी औरत है, मन तो होगा ही.
दोनों एक साथ सोए हुए हैं, कोई उपाय नहीं है.
फिर मैंने कहा- उस समय ही फार्मेसी से ले लेना चाहिए था!
तब कुणाल बोला- तुम्हारे पास एक्स्ट्रा है तो मुझे एक पैकेट कंडोम और एक विगोरा दे दो.
मैंने कहा- कुणाल, वह तुमसे उम्र में बड़ी हैं!
तो वह बोला- मुझे कोई दिक्कत नहीं है और उसे भी कोई दिक्कत नहीं है. तू बस सामान दे, आज पूरी रात करने का मन है!
फिर मैंने कहा- एक काम कर, मैं सविता को बाहर बुला लेता हूँ और थोड़ा देर के लिए कमरा फ्री कर देता हूँ.
वह मुझे देखने लगा कि बाहर क्यों?
मैं बोला- मैं इधर गार्डन में एक राउंड मार लेता हूँ, तब तक जो करना है कर लेना लेकिन देखो भाई, जो भी करना आराम से करना!
वह बोला- ओके.
फिर मैंने उसको एक टेबलेट दी और एक पैकेट कंडोम दे दिया.
वह अन्दर चला गया.
मैंने सविता को आवाज़ लगाई, तो वह बोली- मैं आती हूँ.
फिर सविता कपड़े पहन कर बाहर आई.
सविता बोली- क्या हुआ? बाहर क्यों?
मैंने बोला- चलो, थोड़ी देर इधर गार्डन में राउंड मारते हैं.
हम लोग कमरे से बाहर निकले, कमरा लॉक नहीं था.
मैं और सविता बात कर रहे थे, तभी हमने देखा कि वहां कोई भी नहीं है. मैंने सोचा क्यों न इस मौके का फायदा उठा लिया जाए.
मैंने सविता से कहा- बेबी यहां खुली जगह में कैसा रहेगा?
सविता बोली- नहीं कोई आ जाएगा.
मैंने कहा- कोई नहीं आने वाला.
हम दोनों एक दीवार के पीछे आ गए और आराम से किसिंग करने लगे.
सविता का भी पूरा मूड बन गया था.
मैंने सविता का टॉप ऊपर करके उसकी चूचियों को ऊपर से दबाना शुरू किया.
हम दोनों का मूड एकदम हाई हो गया था.
सविता की चीख निकल रही थी- आह… आह…’
मैंने अपना हाथ सविता के मुँह पर रखा.
मैंने अपनी पैंट नीचे की, मेरा लंड एकदम टाइट हो गया था.
सविता बोली- आराम से करना!
मैंने उसे खड़ी करके, नीचे झुकाया और उसे घोड़ी बना दिया.
फिर उसकी ब्रा को पीछे से पकड़ लिया.
उसकी चूत पर एक भी बाल नहीं था, साली चिकनी करके आई थी.
मैंने एक उंगली लगाकर देखा तो चूत पूरी गीली हो गई थी.
सविता बोली- डालो ना!
लेकिन मुझे उससे ब्लो-जॉब करवाना था तो मैंने लंड चूसने के लिए कहा.
सविता बोली- चुसाई रूम में कर दूँगी, अभी छोड़ो, इधर सीधे पेल दो!
वह इतनी जोश में लग रही थी जैसे मैं उसको नहीं, वह मुझे चोद देगी.
मैंने भी बिना सोचे लंड पर थूक लगाया और उसकी चूत पर रखकर एक धक्का दे मारा.
मेरा पूरा लंड अन्दर चला गया, उसकी हल्की सी आह निकली और वह लंड से चुत की चुदाई करवाने का मजा लेने लगी.
जैसे-जैसे मैं उसकी चुत में धक्का देकर लंड पेल रहा था, सविता भी ‘आह… आह… उईईई… आह…’ कर रही थी.
मैं बिना बोले, बिना रुके 30 मिनट तक नॉन-स्टॉप धक्के मारता रहा.
सविता दो बार झड़ गई थी.
अब मेरा भी होने वाला था, तो मैंने स्पीड बढ़ा दी.
सविता की कामुक आवाज़ें सुनकर मुझे और जोश आ रहा था.
मैंने पूछा- सविता निकलने वाला है, कहां दूँ?
वह बोली- मेरे मुँह में!
जैसे ही मैंने लंड निकाला, वह अपने घुटनों के बल बैठ गई.
मैंने सीधे पिचकारी उसके मुँह पर मारी थोड़ा पानी उसके चेहरे पर लगा और थोड़ा मुँह के अन्दर गया.
फिर हमने अपने कपड़े ठीक किए.
सविता के मुँह पर मेरा पानी लगा हुआ था और वहां साफ करने के लिए कुछ नहीं था, पानी भी नहीं था.
तब सविता ने अपनी ब्रा खोली और उससे अपना चेहरा साफ किया.
उसने सिर्फ ऊपर टॉप पहन लिया और ब्रा मुझे दे दी.
वह बोली- इसे पॉकेट में रख लो.
वैसे, मैं और सविता मेरे घर में या उसके घर में, जब भी मौका मिलता है, यह सब करते रहते हैं तो यह सब मेरे लिए नया नहीं था.
फिर हम थोड़ी देर वहीं बैठे रहे.
मैंने सविता को हग किया.
वहां कोई भी नहीं था और रात के 12:30 बज गए थे.
मैंने एक सिगरेट जलाई और पूछा- कैसा लगा?
सविता बोली- मज़ा आया यार, ऐसे छुप छुप कर सेक्स करने का अलग ही मज़ा है!
मैं हंस दिया.
फिर वह बोली- पूनम को भी चुदने का बहुत मन था.
मैंने पूछा- क्या उन्होंने तुमसे कुछ बोला?
सविता बोली- जब तुम सिगरेट पीने कुणाल के साथ बाहर गए थे, तब वह मेरे पास बेड पर थी.
मैंने सविता को सवालिया नजरों से देखा.
सविता- वह बोली थी कि तुम अच्छे हो, वह तुम्हें पसंद करती है. वह अभी कुणाल के साथ सेक्स करने के लिए बोल रही थी, पर तुम सामने रहते तो वह कैसे करती.
मैंने कहा- फिर?
सविता- फिर मैंने पूनम से कहा कि मैं संजय से बात कर लूँगी कि बाहर राउंड मारने चलते हैं. अभी मैं कुछ कहती कि तभी तुम आ गए और खुद ही बोल पड़े.
मैं हंस दिया.
फिर सविता ने मुझसे पूछा- एक चीज़ पूछूँ?
मैंने कहा- पूछो.
वह बोली- तुम्हारी मम्मी अन्दर हैं, तुम्हें पता भी है? तुम्हें कुछ अजीब सा नहीं लग रहा या गुस्सा नहीं आ रहा है?
मैंने बोला- गुस्सा क्यों आएगा? वह मेरी मां होने से पहले एक औरत हैं और उनका भी मन होता होगा. मैं बेटा हूँ तो क्या हुआ, क्या वे अपना मन मार देंगी? उनका भी हक है जिंदगी जीने का!
यह सुनकर सविता ने मुझे एक टाइट हग दिया और बोली- मुझे बहुत अच्छा लगता है तुम्हारे साथ … तुम्हारी सोच एक महिला की जरूरतों को लेकर कितनी पॉजिटिव है.
मैंने धुआँ उड़ाते हुए कहा- चलो कमरे में चलते हैं, अब तक तो उनका भी सेक्स हो गया होगा.
हम जैसे ही कमरे की तरफ गए, तो कमरे से ‘आह्ह्ह … आह … आह्ह्ह!’ की आवाज़ें आ रही थीं.
मम्मी ने दरवाज़ा बंद नहीं किया था.
जैसे ही मैंने दरवाज़े को छुआ, वह खुला ही था.
मेरी सीधी नज़र बेड के पास गई, जहां मैं सोया था.
वहां कुणाल पूरा नंगा होकर मम्मी को घोड़ी बनाकर उनकी जमकर चुदाई कर रहा था.
मैंने तुरंत दरवाज़ा वापस बंद किया और सविता और मैं वापस बाहर आ गए.
हम बाहर जाकर बैठ गए.
दोस्तो, मुझे उम्मीद है कि आपको मेरी विधवा मां की वासना पूर्ति वाली यह मेच्योर आंटी सेक्स कहानी पढ़ने में मजा दे रही होगी.
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