मेरी विधवा मां और मेरे दोस्त के यौन सम्बन्ध- 1

widow lady x kahani

यह विडो लेडी X कहानी मेरी मां की शारीरिक भूख की है, जब मैंने पिता जी के स्वर्ग जाने के दो साल बाद मां ने मेरे ऑफिस के बन्दे से दोस्ती कर ली. मुझे पता लगा तो …

हाय दोस्तो, मेरा नाम संजय है और मैं कोलकाता का रहने वाला हूँ.
मेरी उम्र अभी 27 साल है, हाइट 5 फुट 10 इंच की है और रंग एकदम गोरा है.
मेरे लंड का साइज 8 इंच है हालांकि मैंने इसे कभी नापा नहीं है.

मेरे घर में मैं और मेरी मां रहते हैं.
मेरे पापा नहीं हैं, पापा की डेथ आज से 4 साल पहले प्रेशर स्ट्रोक से हो गई थी.

तब से मैं और मेरी मां, दोनों अकेले ही घर पर रहते हैं.

यह मेरी पहली और सच्ची सेक्स कहानी है. यह यह विडो लेडी X कहानी आज से एक साल पहले उस वक्त की है जब मेरी अपनी मां मेरे सामने किसी और से कैसे चुदीं. यह सब मैंने आपसे बोलकर अपना मन हल्का करना का सही जरिया समझा, इसी लिए आप सबको खुल कर बता रहा हूँ.

मैं एक ऑफिस में छोटी पोस्ट पर काम करता हूँ.

मुझे आंटी या भाभी बहुत पसंद हैं.
मेरी गर्लफ्रेंड भी एक आंटी ही है, एकदम सिंपल घर पर रहने वाली, जिसकी उम्र 42 साल है और वह एक बच्चे की मां है.

वह मुझे बहुत खुश रखती है और मैं उसे बहुत ज़्यादा खुश रखता हूँ. वह मेरे ठीक बगल वाले घर में रहती है.
उसका हसबैंड आर्मी में है, तो वह जम्मू में पोस्टिंग पर रहता है.

वह आंटी मेरी मां की दोस्त है, इसीलिए घर भी आती रहती है.
मां को पता नहीं है कि मैं उनकी इस सहेली की लेता रहता हूँ.

अब मैं अपनी मम्मी के बारे में बताता हूँ जो पापा के जाने के बाद अकेली रह गई थीं.
वे एक बहुत सिंपल सी रहने वाली हाउसवाइफ हैं और घर हो या बाहर, साड़ी ही पहनती हैं.

वे दिखने सिंपल जरूर हैं मगर उनका फिगर 36-30-38 का है.
उनकी गांड और चूची का साइज़ तो एकदम सही और परफेक्ट है.

कोई भी देखेगा तो पक्का एक बार तो मुठ मार ही लेगा.
पहले मैंने कभी गलत सोचा भी नहीं था और न ही मां को उस नज़र से देखा था.
लेकिन जब से मां ने पापा के साथ अपने बहुत सेक्स करने की बात को मेरी गर्लफ्रेंड आंटी को बताई थी, तब से मैं उन्हें कुछ अलग नजर से देखने लगा था.

मेरी गर्लफ्रेंड आंटी, मेरी मां की सहेली है तो मां उसे अपनी बातें बिंदास बताने लगी थीं.

मां से उनकी वासना भरी बात सुनकर मेरी गर्लफ्रेंड आंटी मुझे बता देती थी कि तेरे पापा तेरी मम्मी को बहुत खुश रखते थे और वे उन्हें रोजाना सेक्स की खुशी देते थे.

पापा के भगवान के पास जाने से दो साल पहले से बीमार रहने लगे थे, तो वे कभी-कभी ही मम्मी के साथ सेक्स करते थे.
यह बात मम्मी ने खुद ही आंटी (मेरी गर्लफ्रेंड) को बोली थी.

यह बात एक साल पहले की है, जब मैं जॉब में लगा था.
पापा भी नहीं थे और घर में कुछ करने को भी नहीं था, तो मां सारा दिन फोन चलाती थीं.

कभी रील्स देखना, कभी फैमिली मेंबर से बात करना, तो कभी कुछ.

उस आंटी को मेरी गर्लफ्रेंड बने हुए 17 महीने हो गए थे.
वह अक्सर मम्मी के पास आती थी, तभी वह मुझे अच्छी लगने लगी और हमारी बात होने लगी.

तब उसने बोला कि वह मुझे पसंद करती है और मुझे भी वह अच्छी लगती थी. लेकिन मम्मी को इस बारे में कुछ नहीं पता था.
मुझे जब भी उसके साथ सेक्स करने का मन होता, तो मैं कभी उसके घर चला जाता या कभी अपने घर पर ही कर लेता था, जब मम्मी घर पर नहीं होती थीं.

जैसा मैंने बताया, मैं ऑफिस में काम करता हूँ और वहां काम करते हुए मुझे अब 2 साल हो गए थे.

एक दिन मैंने देखा कि मेरे ऑफिस का मेरा एक सीनियर दोस्त फेसबुक चैट यूज़ कर रहा है और बहुत खुश हो रहा था.
उससे मेरी खुली खुली बातें होने लगी थीं.

मैंने उससे मज़ाक मज़ाक में बोल दिया- यार मुझे भी दिखा दो, किसकी लेने की प्लानिंग कर रहा है?
वह बोला- नहीं भाई मेरी किस्मत कहां ऐसी!

मैंने भी उसे फ़ोर्स नहीं किया और बात को आगे नहीं छेड़ा.
मैंने सोचा कि इसकी पर्सनल लाइफ है, क्यों टांग घुसेड़ूँ!

मुझे पता भी नहीं था कि वह कौन है.
वह दोस्त भी मुझसे कुछ साल बड़ा ही था.

फिर शाम को मैं घर गया.
मम्मी ने दरवाज़ा खोला और बोलीं- जब रेडी हो जाओ तो बोल देना, खाना लगा दूँगी.

पहले मम्मी ने कभी ऐसा बिहेव नहीं किया था.
हमेशा ऑफिस से आने के बाद वे मुझसे बात करती थीं और फिर हम साथ खाना खाते थे.

उस दिन मम्मी के चेहरे पर एक अलग ही स्माइल थी और वे फोन में बिजी थीं.
मुझे खाने के लिए इस तरह का अटपटा सा कह कर वे सीधी अपने कमरे में चली गईं.

फिर कुछ समय बाद जब मैं फ्रेश हुआ, तो मैंने मां को आवाज़ लगाई.
वे आईं, उन्होंने खाना लगा दिया और खाना खाने लगीं.
मैंने देखा कि उस वक्त भी वे लगातार फोन पर ही बिजी थीं.

तब मैंने मज़ाक में बोला- कहां बिजी हो मम्मी? आज तो मेरे ऊपर ध्यान ही नहीं है!
तो वे बोलीं- कुछ नहीं … बस ऐसे ही.

मुझे थोड़ा-थोड़ा डाउट हुआ कि मम्मी किससे बात कर रही हैं, लेकिन मैंने ज़्यादा नहीं सोचा.
मैंने सोचा कि अगर नहीं बताया तो मत बताने दो, कुछ देख कर हंस रही होंगी.

फिर हमने खाना खत्म किया.
मम्मी के हाथ से फोन साइड ही नहीं हो रहा था, जैसे फोन हाथ से चिपक गया हो.

मैं और मम्मी दोनों अलग-अलग कमरों में सोते थे.
मैं अपने कमरे में गया, बेड पर लेटा और सो गया.

सुबह उठा, रेडी हुआ, मम्मी ने टिफिन दिया और मैं ऑफिस चला गया.
मम्मी भी अपने काम में बिजी हो गईं.

ऑफिस गया तो देखा कि वह मेरा दोस्त भी फोन में ही बिजी रहने लगा है.
अब डेली का यही होने लगा.

एक हफ्ते तक ऐसा ही चला.

फिर एक हफ्ते के बाद एक दिन मैंने देखा कि मम्मी किसी लड़के से बात कर रही हैं और फोन में देख कर खूब हंस रही हैं.
रात को भी यही हुआ, तब भी मैंने उनसे कुछ नहीं बोला.

अगली सुबह मैंने उनका फोन देखा, तो पता चला कि वह मेरे उसी ऑफिस वाले दोस्त से बात करती हैं.
यह देखकर मेरा माथा पूरा खराब हो गया था.

मैंने सोचा कि आज ऑफिस जाकर उसको बोलूँगा.

मैं उसके पास गया और बोला- कैसे हो कुणाल?
तो वह बोला- अच्छा हूँ संजय!

मैंने पूछा- जिससे बात कर रहा था, उसके साथ क्या इरादा है?
तो वह बोला- कौन?

मैंने उससे झूठ बोला कि उसने मुझे अपने बारे में सब बताया है.
वह मुझे देखने लगा.

मैंने कहा- तूने दिखाया था ना कि कोई है, जिससे तू फेसबुक पर बात करता है!
वह बोला- ओह पूनम के बारे में?

मेरी मम्मी का नाम पूनम है.

मैंने कहा- हां कहां रहती हैं ये पूनम जी?
उसने बोला- यहीं रहती है. घर पर एक बेटा है जो ऑफिस में काम करता है, हस्बैंड है नहीं… लेकिन मस्त है … मुझे उससे बात करने में बहुत अच्छा लगता है.

मैंने- तो फिर, उसके बाद आगे कुछ बात हुई?
कुणाल- उसने बोला कि वह बहुत शर्मीली किस्म की है, लेकिन मुझे लगता है कि उसका भी कुछ कुछ मन है.

मैंने कहा- तो उससे मिला क्या?
कुणाल बोला- नहीं यार, मैं तो उससे मिलने के लिए तैयार हूँ, लेकिन वह बोली कि घर में नहीं मिल सकती.

मैंने कहा- मेरे पास एक आइडिया है. मेरी जीएफ और तुम्हारी पूनम कहीं बाहर जाने का प्लान करें, लेकिन पूनम को यह मत बताना कि मैं कौन हूँ!
कुणाल- ओके बना प्लान!
मैंने कहा- ठीक है यार, मैं प्लान करता हूँ और सोचता हूँ.

मैं ऑफिस से रात को घर गया.

रात को देखा कि मम्मी किसी से ‘फुस-फुस’ करके बात कर रही थीं.
वे कुणाल से बात कर रही थीं.
मम्मी के कमरे से फुस-फुस आवाज में भी उसका नाम एक दो बार सुनाई दे गया था.

फिर मुझे नींद आ गई.

सुबह उठा तो देखा मम्मी किचन में ब्रेकफास्ट रेडी कर रही थीं.

मैंने कहा- मां, गुड मॉर्निंग!
वे स्माइल के साथ बोलीं- गुड मॉर्निंग बेटा!

फिर मैंने कहा- आजकल तो पूरा बिजी रहती हो फोन में!
तो वे बोलीं- ऐसे ही कुछ पुराने दोस्त हैं, तो बात कर लेती हूँ.

लेकिन मुझे तो पता था कि वह दोस्त कौन है.
सामने से मैंने ‘अच्छा’ बोला और रेडी होने चला गया.

फिर हम लोग ब्रेकफास्ट करने एक साथ बैठे और जब ब्रेकफास्ट शुरू किया, तब मैंने बात छेड़ी.

मैंने कहा- मां, एक बात बोलूँ?
मां- हां, बोलो ना बेटा!

मैंने कहा- मां, हम लोग कहीं बाहर जाने का प्लान करें?
मां- कहां चलें? मन तो मेरा भी है!

मैंने कहा- एक-दो दिन के लिए कहीं बाहर चलते हैं, मूड फ्रेश हो जाएगा.
मां बोलीं- हां चल सकते हैं, लेकिन साथ में कोई और भी हो तो अच्छा लगेगा, ग्रुप जैसा फ़ील होगा!

मैंने कहा- ओके मां तुम तुम्हारे उस दोस्त को बुला सकती हो और सविता (मेरी जीएफ) आंटी को भी बोल दो. हम लोग चार लोग साथ कहीं बाहर जा सकते हैं.
मां खुश होती हुई बोलीं- ठीक है, मैं बात करूँगी सविता से.

मैं उठा और ऑफिस जाने के लिए निकल गया.
ऑफिस पहुंचा तो मैंने कुणाल को पास बुलाया- यार बाहर चलें? तुम्हारी उस पूनम को बोलो कि वह भी चले, लेकिन पूनम को बताना मत कि तुम मुझे जानते हो. उनसे जब बात करो तो एकदम अनजान के जैसे बात करना!

उसने बोला- क्यों ऐसा करना? क्या तुम जानते हो पूनम को?
मैंने कहा- नहीं, मेरी जो आंटी जीएफ है, वह पूनम को जानती है. उन दोनों का प्लान है बाहर घूमने का. मेरी जीएफ ने मुझे साथ चलने को बोला और मैंने उसे कहा कि पूनम को भी बोलो किसी को साथ लेकर आने के लिए. अगर पता चल जाएगा कि हम दोनों एक-दूसरे को जानते हैं, तो अच्छा नहीं लगेगा!

वह बोला- ठीक है, तो ट्रिप ऑन!
मैंने कहा- हां, और पूनम से बात हो तो बोल देना!

मैं घर गया, मम्मी ने गेट ओपन किया. मम्मी बहुत खुश थीं.
मैंने कहा- क्या बात है मां पूरी खुश लग रही हो!

मां बोलीं- सविता मान गई और मेरा जो फ्रेंड है, वह ऑफिस से घर जाएगा, तब रात को बोलेगा.
मैंने कहा- चलो अच्छा है, तो ट्रिप ऑन है?

उन्होंने स्माइल करते हुए कहा- हां.
मैंने कहा- मां, एक चीज़ है. वह तुम्हारा जो भी दोस्त है, मुझे उससे कोई दिक्कत नहीं, पर उसको बताना नहीं है कि मैं कौन हूँ.

मां बोलीं- पूछा तो क्या बोलूँगी?
मैंने कहा- अगर वह तुमसे अकेले में पूछे कि यह कौन है, तो बोल देना कि सविता का बॉयफ्रेंड है बस ऐसा बोल देना.

मां बोलीं- तू सविता का बॉयफ्रेंड थोड़ी है?
मैंने कहा- सिर्फ बोलने में तो कुछ नहीं होगा.

मां बोलीं- ओके.
‘घर से निकलने के बाद मुझे भूल जाना. वहां जाएंगे तो मूड फ्रेश करेंगे’ यह कहते हुए मैंने थोड़ी सी स्माइल दी.
मां शर्माती हुई बोलीं- बहुत बड़ा हो गया है तू, बदमाश!

मैंने उन्हें खुश होते देखा तो कुछ और आगे बढ़ कर कह दिया कि मां इसमें गलत क्या है? आखिर आपको भी तो मर्द की जरूरत होती ही होगी. मुझे कोई आपत्ति नहीं होगी, यदि आप किसी के साथ सेक्स करेंगी.
मां सेक्स शब्द सुनकर चुप थीं और मेरी तरफ ही देख रही थीं.

मैं आगे बोला- मां मैं बहुत प्रेक्टिकल बात कर रहा हूँ … इसमें कोई गलत नहीं है. भले ही दुनिया की नजरों में ये संबंध गलत हों लेकिन तब भी ऐसे संबंध होते आए हैं और होते रहेंगे. मैं आपको गलत नहीं मानूँगा और आप प्लीज अपनी जिंदगी अपने मुताबिक जिएं, तो भला इसमें मुझे क्या दिक्कत हो सकती है?

मेरे यह कहते ही मेरी मां मुझसे लिपट कर रोने लगीं. मैंने भी उन्हें अपने साथ चिपका लिया और उनके दिल का गुबार निकल जाने दिया.
दोस्तो, अगले भागों में आपको मेरी मां की वासना से लबरेज सेक्स कहानी का मजा पढ़ने को मिलेगा.

यह विडो लेडी X कहानी का अगला भाग: मेरी विधवा मां और मेरे दोस्त के यौन सम्बन्ध- 2

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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