मेरे बेटे ने अपने 7 दोस्तों को बुलाकर मुझे गैंगबैंग में चुदवाया

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मैंने अपने बेटे अक्षय से कहा, “बेटा, अगर तुम सच में मुझे खुश करना चाहते हो तो अपने सभी दोस्तों को बुलाओ। मैं एक साथ कई लंड लेना चाहती हूँ। मेरी बुर एक लंड से संतुष्ट नहीं होती। मुझे कम से कम 7-8 लंड एक साथ चाहिए।”

अगर आपने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पढ़े की कैसे बेटे ने मुझे नौकर से चुदवाते देखकर ग्रुप में चोदा

अक्षय ने कहा, “माँ, मैंने पहले से ही सोच रखा है। मेरे 7 दोस्त हैं जो तुम्हें देखकर पागल हो जाते हैं। मैं उन्हें इस रविवार को बुलाता हूँ। पापा तो बाहर गए हुए हैं और दो दिन बाद लौटेंगे। हमारे पास पूरा समय है।”

“हाँ बेटा, यही सही मौका है। लेकिन कमरे की तैयारी अच्छे से करनी होगी। मैं नहीं चाहती कि बिस्तर पर चुदाई हो, मुझे फर्श पर चुदवाना है। मुझे अलग-अलग जगहों पर चुदवाना है,” मैंने कहा।

“माँ, चिंता मत करो। मैं बड़े वाले कमरे को तैयार करवा देता हूँ। उसमें टाइल्स वाला फर्श है और हम 3-3 फीट के 4 फोम वाले मोटे-मोटे गद्दे बिछवा देंगे। इससे हम चारों तरफ से चुदाई कर सकेंगे,” अक्षय बोला।

“और बेटा, कमरे में अच्छी खुशबू भी होनी चाहिए। मुझे गुलाब और लैवेंडर की खुशबू बहुत पसंद है। पूरे कमरे में स्प्रे करवा देना,” मैंने कहा।

“ठीक है माँ। और एक कुर्सी और एक मजबूत मेज भी रखवा देता हूँ ताकि हम उन पर भी तुम्हें चोद सकें। तुम्हें टेबल पर लेटाकर चोदने का मुझे बहुत शौक है,” अक्षय ने कहा।

“हाँ बेटा, मुझे भी वो पोजीशन पसंद है। जब मैं मेज पर लेटी रहती हूँ और तुम मेरी टांगें फैलाकर चोदते हो तो बहुत मजा आता है,” मैंने कहा।

रविवार का दिन आ गया। सुबह से ही मैं बहुत उत्साहित थी। मैंने अपने शरीर को बिल्कुल साफ किया।

पूरे शरीर पर वैक्सिंग करवाई। बालों को सेट किया। नाखूनों को नेल पॉलिश लगाई। मैं पूरी तरह से तैयार थी।

दोपहर लगभग 2 बजे अक्षय के दोस्त आने लगे। पहले राहुल आया, फिर विकास, फिर सूरज, फिर अमित, फिर नीरज, फिर पंकज और अंत में रोहित।

ये सभी 22-23 साल के जवान लड़के थे। सभी का बदन हट्टा-कट्टा और सेहतमंद था। अक्षय को मिलाकर कुल 8 लोग हो गए।

जब वे सब बड़े कमरे में पहुँचे तो उनकी आँखें खुली रह गईं। कमरा बिल्कुल परफेक्ट फ़क रूम की तरह तैयार था।

टाइल्स वाले फर्श पर 4 मोटे फोम के गद्दे बिछे हुए थे। कमरे में गुलाब और लैवेंडर की मधुर खुशबू फैली हुई थी।

एक तरफ एक मजबूत लकड़ी की कुर्सी और एक भारी मेज रखी हुई थी।

राहुल बोला, “यार अक्षय, यह कमरा तो बिल्कुल सेक्स डेन जैसा लग रहा है। क्या तैयारी की है तूने!”

विकास ने कहा, “हाँ भाई, यहाँ तो पूरा ऑर्गी होगी। तेरी माँ सच में यहाँ आएगी?”

“हाँ सब आएगी। और वो खुद यह सब करवा रही है। वो एक साथ 8 लंड लेना चाहती है,” अक्षय बोला।

सूरज ने कहा, “मुझे तो यकीन नहीं हो रहा। 44 साल की औरत इतनी चुदासी हो सकती है?”

“तुम लोग देखना, मेरी माँ क्या चीज है। वो तो रंडियों की रानी है,” अक्षय ने कहा।

अमित बोला, “यार, मेरा तो लंड अभी से खड़ा हो गया है। सोचो जब वो आएगी तो क्या हाल होगा?”

“सब अपने-अपने लंड तैयार रखो। आज मेरी माँ को ऐसी चुदाई देनी है कि वो याद रखे,” अक्षय बोला।

मैं अपने कमरे में तैयार हो रही थी। मैंने एक बेहद सेक्सी लाल रंग की बेबी डॉल लिंगरी पहनी थी।

यह पूरी तरह से पारदर्शी लेस वाली थी। ऊपर से यह डीप वी-नेक थी जो मेरे बड़े-बड़े स्तनों को आधा बाहर दिखा रही थी। मेरे निप्पल लगभग दिखाई दे रहे थे।

यह बेबी डॉल पीछे से पूरी तरह से खुली थी, केवल दो रिबन से बंधी हुई थी जिसे खींचने से पूरी खुल जाती।

इसकी लंबाई मेरी जांघों के मध्य तक थी।

साथ में मैंने मैचिंग लाल रंग की पैंटी पहनी थी जो बहुत छोटी थी और मेरी बुर को लगभग पूरी तरह से नंगा रख रही थी। बस एक पतली सी डोरी मेरी बुर के बीच से गई थी।

मैंने अपने बालों को खुला छोड़ा था और गालों पर हल्का मेकअप किया था। होंठों पर लाल लिपस्टिक लगाई थी।

गले में एक पतली सी चेन थी। पैरों में लाल रंग की हाई हील्स के सैंडल पहने थे।

मैंने आईने में खुद को देखा। मैं सच में बहुत खूबसूरत लग रही थी।

मेरा फिगर 36-32-38 था – 36 इंच के भारी-भरकम मेरी चूचियां जो लिंगरी से बाहर निकलने को तरस रहे थे, 32 इंच की पतली कमर और 38 इंच के चौड़े कूल्हे। मेरी जांघें मोटी और मांसल थीं जो हर मर्द को पागल कर देती थीं।

मैं कमरे में प्रवेश की। जैसे ही मैं अंदर आई, सभी 8 लड़के मुझे देखकर पत्थर की मूरत बन गए।

उनकी आँखें मेरे शरीर पर टिक गईं। कुछ देर तक पूरी शांति रही, कोई कुछ नहीं बोल पाया।

फिर राहुल ने ताली बजाई और कहा, “वाह! क्या माल है! अक्षय, तेरी माँ तो सच में बहुत खूबसूरत है।”

विकास बोला, “उफ! यह लिंगरी! यह बदन! ये चूचियां! मुझे तो पागल कर रही है।”

सूरज ने कहा, “उर्मिला आंटी, आप तो 25 साल की लड़की लग रही हैं। क्या फिगर है आपका! 36-32-38, यह तो परफेक्ट फिगर है।”

अमित बोला, “आंटी, आपके स्तन देखकर मेरा तो दिमाग खराब हो रहा है। कितने बड़े और सुडौल हैं। वो निप्पल कितने गुलाबी लग रहे हैं लाल लिंगरी में।”

नीरज ने कहा, “आंटी, आपकी कमर तो बिल्कुल पतली है और कूल्हे कितने मोटे हैं। मुझे तो आपकी गांड देखकर ही समझ आ गया कि आप कितनी चुदासी हैं।”

पंकज बोला, “यार, यह जांघें देखो! कितनी मोटी और मांसल हैं! इन जांघों के बीच में चुदाई करने में क्या मजा आएगा!”

रोहित ने कहा, “उर्मिला आंटी, आप सच में एक सेक्स गॉडेस हैं। मैंने आज तक इतनी खूबसूरत औरत नहीं देखी।”

अक्षय ने मेरे पास आकर कहा, “माँ, तुम सच में बहुत खूबसूरत लग रही हो। तुम्हारी यह लिंगरी तुम पर बिल्कुल जच रही है। तुम्हारे यह स्तन कितने बड़े हैं, बिल्कुल तरबूज जैसे। और यह निपल्स, कितने कड़े और गुलाबी हैं।”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “धन्यवाद बेटा। मैंने सिर्फ तुम्हारे लिए यह सब किया है। मैं चाहती हूँ कि तुम और तुम्हारे दोस्त मुझे पूरी तरह से चोदकर संतुष्ट करो।”

“हाँ माँ, हम 8 लोग मिलकर तुम्हें ऐसी चुदाई देंगे कि तुम्हें कभी और लंड की जरूरत नहीं पड़ेगी,” अक्षय बोला।

अक्षय ने इशारा किया और सभी 8 लड़के मेरे चारों ओर इकट्ठा हो गए।

मैं कमरे के बीच में खड़ी थी और वे सभी मुझे घेर कर खड़े हो गए।

मैंने अपनी आँखें बंद कर लीं और उनके स्पर्श का इंतजार करने लगी।

पहले राहुल ने मेरे कंधों पर हाथ रखा। उसके हाथ गरम और भारी थे।

फिर विकास ने मेरी कमर को छुआ। सूरज मेरे पीछे आ गया और उसने मेरी गांड पर हाथ रख दिया।

अमित ने मेरे स्तनों को पकड़ लिया। नीरज मेरे बालों को सूंघने लगा। पंकज ने मेरे पेट पर हाथ फेरना शुरू किया।

रोहित ने मेरी जांघों को सहलाना शुरू किया।

“ओह हाँ… सबको छुओ… मेरे पूरे शरीर को छुओ… मुझे सहलाओ,” मैंने आँखें बंद करके कहा।

अक्षय ने मेरे गालों पर किस किया। उसके होंठ नरम थे। फिर उसने मेरे गर्दन पर किस करना शुरू किया।

राहुल ने मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए और जोर से चूमना शुरू कर दिया। वह अपनी जीभ मेरे मुँह में डालकर मेरी जीभ से खेलने लगा।

विकास ने मेरी बेबी डॉल के ऊपर से ही मेरे स्तनों को दबाना शुरू कर दिया।

वह जोर-जोर से मेरे दूध दबा रहा था। मेरे निप्पल कड़े हो गए और लिंगरी के ऊपर से ही दिखने लगे।

“अहहह… और दबाओ… मेरे दूध दबाओ… मेरे निप्पलों को मसलो,” मैंने कहा।

सूरज पीछे से मेरी गांड को सहला रहा था। उसने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी गांड के छेद पर उंगली रगड़नी शुरू कर दी। मुझे बहुत मजा आ रहा था।

अमित ने मेरी बेबी डॉल को ऊपर उठाया और मेरे पेट पर किस करना शुरू कर दिया।

वह मेरी नाभि में जीभ घुसा रहा था। नीरज मेरे पीठ पर किस कर रहा था, मेरी रीढ़ की हड्डी पर जीभ फेर रहा था।

पंकज ने मेरी जांघों को चूमना शुरू किया। वह धीरे-धीरे ऊपर की ओर बढ़ रहा था।

रोहित ने मेरे पैरों को सहलाना शुरू किया और मेरी एड़ियों पर किस किया।

अक्षय ने मेरे कानों में फुसफुसाते हुए कहा, “माँ, कैसा लग रहा है? 8 लोग एक साथ तुम्हें छू रहे हैं?”

“बहुत मजा आ रहा है बेटा… मुझे ऐसे ही चाहिए… और छुओ… मेरे सब अंगों को छुओ,” मैंने कहा।

राहुल ने मेरी बेबी डॉल के स्ट्रैप्स नीचे किए और मेरे स्तन बाहर निकल आए।

वह देखते ही पागल हो गया। उसने तुरंत मेरे एक स्तन को पकड़ा और निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा।

“ओह हाँ… चूसो… मेरे दूध चूसो… मेरे निप्पलों को काटो,” मैं चीखी।

विकास ने दूसरा स्तन पकड़ लिया और वो भी चूसने लगा।

दोनों लड़के एक-एक करके मेरे दोनों स्तनों को चूस रहे थे। मेरे निप्पलों को अपने दाँतों से काट रहे थे। मुझे बहुत मजा आ रहा था।

सूरज ने मेरी पैंटी नीचे खींची और मेरी बुर दिखने लगी। वह बहुत गीली थी और पानी से तर थी। सूरज ने अपनी उंगली मेरी बुर में डाल दी।

“उई माँ… कितनी गीली है आंटी… पूरी तरह से तरस रही है लंड के लिए,” सूरज बोला।

“हाँ… मेरी बुर तरस रही है… जल्दी से अपने लंड डालो,” मैंने कहा।

सभी 8 लड़कों ने अपने कपड़े उतारने शुरू किए। एक-एक करके वे सभी नंगे हो गए।

जब मैंने उनके लंड देखे तो मेरी आँखें फटी रह गईं। सभी के लंड बहुत बड़े और मोटे थे।

राहुल का लंड 9 इंच का था और बहुत मोटा। विकास का 8.5 इंच का था लेकिन उसकी मोटाई ज्यादा थी।

सूरज का लंड 10 इंच का था और थोड़ा मुड़ा हुआ। अमित का 11 इंच का विशाल लंड था जो देखकर मेरी सांसें फूल गईं।

नीरज का 9.5 इंच का था, पंकज का 8 इंच का, रोहित का 10.5 इंच का और अक्षय का 8 इंच का।

“ओह माँ… इतने बड़े-बड़े लंड… सभी 8 इंच से बड़े… कितने मोटे हैं… मैं तो मंत्रमुग्ध हो गई,” मैंने कहा।

“हाँ माँ, यह सब तुम्हारे लिए हैं। आज तुम इन सबका आनंद लो,” अक्षय बोला।

मैं नीचे बैठ गई। सभी 8 लोग मेरे चारों ओर खड़े हो गए और अपने लंड मेरे चेहरे के सामने कर दिए।

मैं एक-एक करके सभी के लंड देखने लगी। सभी इतने कड़क और गरम लग रहे थे।

मैंने पहले अपने बेटे अक्षय का लंड पकड़ा और उसे चूसना शुरू किया।

मैं उसके लंड के सुपारे को जीभ से चाट रही थी। फिर मैंने उसे पूरा मुँह में ले लिया और अंदर-बाहर करने लगी।

“अहहह… माँ… क्या मुँह है तुम्हारा… बहुत मजा आ रहा है,” अक्षय बोला।

फिर मैंने राहुल का लंड पकड़ा। उसका लंड बहुत मोटा था।

मैंने उसे चूसना शुरू किया और साथ में उसके अंडकोशों को भी सहलाया। विकास का लंड मेरे हाथ में था और मैं उसे हिला रही थी।

मैंने सूरज के लंड को भी मुँह में लिया। वह मुड़ा हुआ था इसलिए मुँह में लेने में थोड़ी दिक्कत हो रही थी लेकिन मैंने पूरा ले लिया।

अमित का 11 इंच का लंड बहुत बड़ा था। मैंने केवल उसका सुपारा ही मुँह में ले पाई। वह बहुत मोटा था।

“आंटी, मेरा लंड बड़ा है ना? ले पाओगी अपनी बुर में?” अमित ने पूछा।

“हाँ… ले लूंगी… तुम्हारा यह 11 इंच का लंड भी मेरी बुर में समा जाएगा… मेरी बुर बहुत लचीली है,” मैंने कहा।

मैं नीरज और पंकज के लंड को हाथों में लेकर हिला रही थी और रोहित के लंड को चूस रही थी।

इस प्रकार मैं एक साथ 5 लंडों को संभाल रही थी। बाकी लोग अपने लंड हिला रहे थे और मेरे शरीर को देख रहे थे।

“ओह हाँ… सबके लंड बहुत अच्छे हैं… मुझे सबका वीर्य चाहिए… मैं सबका पीऊंगी,” मैंने कहा।

राहुल ने कहा, “रुको आंटी, पहले हम तुम्हें चोदेंगे फिर वीर्य देंगे।”

हम सब फर्श पर बिछे गद्दों पर आ गए। राहुल सबसे पहले एक गद्दे पर लेट गया। उसका 9 इंच का लंड हवा में खड़ा था।

मैं उसके ऊपर आकर बैठ गई और अपनी बुर को उसके लंड पर रखा। फिर मैंने एक जोरदार झटका दिया और उसका पूरा लंड मेरी बुर में समा गया।

“उई माँ… कितना बड़ा है तुम्हारा लंड राहुल… मेरी बुर भर गई,” मैंने कहा।

जैसे ही मैं राहुल के ऊपर बैठी, विकास पीछे आ गया। उसने अपने लंड पर थूक लगाया और मेरी गांड के छेद पर रगड़ा।

फिर उसने एक धक्का मारा और उसका 8.5 इंच का मोटा लंड मेरी गांड में घुस गया।

“ओह… बहुत दर्द हो रहा है… लेकिन मजा भी आ रहा है… और डालो… पूरा डालो,” मैं चीखी।

अब मेरी बुर और गांड दोनों भरी हुई थीं। सूरज और अमित मेरे दोनों हाथों में अपने लंड पकड़ा दिए।

नीरज मेरे सामने आया और उसने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया।

“चूसो आंटी… मेरा लंड चूसो… अपनी रंडी माँ बनकर चूसो,” नीरज बोला।

मैं नीरज के लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी। साथ में मैं सूरज और अमित के लंड हिला रही थी।

अब मैं एक साथ 5 लंडों का आनंद ले रही थी – बुर में एक, गांड में एक, मुँह में एक और दो हाथों में।

“ओह हाँ… यही चाहिए था मुझे… एक साथ 5 लंड… मैं बहुत खुश हूँ,” मैंने मुँह में लंड रखकर भी कहा।

राहुल और विकास एक साथ धक्के मार रहे थे। जब राहुल अंदर धकेलता तो विकास बाहर खींचता।

इससे मुझे दोहरा मजा आ रहा था। मेरी बुर और गांड एक साथ भरी हुई थीं।

“ओह माँ… कितनी टाइट बुर है… और गांड भी… बहुत मजा आ रहा है,” राहुल बोला।

“हाँ… यह रंडी बहुत मजा दे रही है… मेरी तो जान निकल रही है,” विकास बोला।

कुछ देर बाद उन्होंने पोजीशन बदली। अब अमित नीचे लेट गया और मैं उसके 11 इंच के लंड पर बैठ गई।

वह लंड बहुत बड़ा था और मेरी बुर को पूरी तरह से भर रहा था। अक्षय पीछे से मेरी गांड में अपना लंड डाल दिया।

“ओह बेटा… तुम्हारा लंड भी बहुत अच्छा है… मुझे बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।

“हाँ माँ… ले मेरा लंड… और अमित का भी… दोनों ले… रंडी माँ,” अक्षय बोला।

रोहित और पंकज मेरे हाथों में आ गए। नीरज ने मेरे मुँह में अपना लंड डाल दिया। फिर से 5 लंड एक साथ।

सभी लड़के बारी-बारी से स्वैप कर रहे थे। हर कोई मेरी बुर, गांड और मुँह चोद रहा था।

मैं लगातार 5 लंडों से भरी हुई थी। मेरे शरीर में हर जगह लंड थे।

अक्षय ने कहा, “माँ, अब मेज पर चोदते हैं। मुझे तुम्हें मेज पर लेटाकर चोदना है।”

“हाँ बेटा… मुझे भी वो पोजीशन पसंद है,” मैंने कहा।

मैं मेज पर लेट गई। मेरी टांगें मेज के किनारे से बाहर लटक रही थीं।

अक्षय आया और उसने मेरी टांगें फैलाई और अपना लंड मेरी बुर में डाल दिया। वह मेज के सामने खड़े होकर मुझे चोदने लगा।

“ओह हाँ बेटा… और तेज चोदो… मेरी बुर को फाड़ दो,” मैं चीखी।

राहुल मेज के पास आया और उसने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया।

अब मैं नीचे से अक्षय से चुद रही थी और ऊपर से राहुल का लंड चूस रही थी।

फिर विकास ने कुर्सी पर बैठने को कहा। मैं कुर्सी पर बैठ गई और पीछे से विकास ने अपना लंड मेरी गांड में डाल दिया।

सूरज मेरे सामने खड़ा हो गया और मैं उसका लंड चूसने लगी। अमित और नीरज ने अपने लंड मेरे हाथों में पकड़ा दिए।

“ओह… क्या मजा है… हर जगह लंड ही लंड… मैं बहुत खुश हूँ,” मैंने कहा।

रोहित और पंकज ने एक नई पोजीशन सोची। वे दोनों खड़े हो गए। रोहित ने मुझे अपनी गोद में उठा लिया।

उसका 10.5 इंच का लंड मेरी बुर में था। फिर पंकज पीछे आया और उसने अपना 8 इंच का लंड मेरी गांड में डाल दिया।

अब मैं हवा में थी, दोनों लड़कों के बीच कसी हुई थी। वे दोनों एक साथ धक्के मार रहे थे।

रोहित नीचे से ऊपर की ओर धक्के मार रहा था और पंकज पीछे से आगे की ओर।

“ओह माँ… यह तो बहुत ही मजेदार है… दो लंड एक साथ… मेरी बुर और गांड दोनों भरी हुई हैं,” मैं चीख रही थी।

“हाँ आंटी… ले दोनों लंड… अपनी बुर और गांड में ले… रंडी… साली,” रोहित गाली दे रहा था।

“हाँ मैं रंडी हूँ… तुम सबकी रंडी हूँ… मुझे चोदो… मत रुको,” मैंने कहा।

बाकी लोग हमारे चारों ओर खड़े थे और अपने लंड हिला रहे थे। वे मुझे देखकर बहुत उत्तेजित हो रहे थे।

लगभग एक घंटे की लगातार चुदाई के बाद सभी लड़के झड़ने वाले थे। अक्षय ने कहा, “माँ, अब हम सब झड़ने वाले हैं। तुम हम सबका वीर्य पीयोगी?”

“हाँ बेटा… मैं सबका वीर्य पीऊंगी… मुझे तुम सबका पानी चाहिए… मेरे मुँह में निकालो,” मैंने कहा।

मैं नीचे बैठ गई और सभी 8 लोग मेरे चारों ओर खड़े हो गए। उन्होंने अपने लंड हिलाने शुरू किए।

पहले राहुल झड़ा। उसने अपना वीर्य सीधे मेरे मुँह में निकाला। वह गर्म और गाढ़ा था। मैंने उसे पी लिया।

फिर विकास झड़ा। उसका वीर्य भी मैंने पिया। सूरज ने अपना वीर्य मेरे चेहरे पर निकाल दिया।

अमित ने भी मेरे मुँह में निकाला। नीरज और पंकज ने भी मेरे मुँह में अपना वीर्य दिया।

रोहित ने मेरे चुचियों पर अपना वीर्य निकाल दिया। उसका गाढ़ा वीर्य मेरे दूध पर गिरा और निप्पलों से बहने लगा।

अक्षय ने भी अपना वीर्य मेरे दूध पर निकाल दिया।

मैंने मुँह में जो वीर्य था उसे पी लिया और फिर अपने हाथों से स्तनों पर लगे वीर्य को चाटकर खा गई।

मैंने सभी 8 लोगों का वीर्य पिया और चाटकर साफ किया।

“ओह… क्या स्वाद है… तुम सबका वीर्य बहुत अच्छा है… मुझे बहुत मजा आया,” मैंने कहा।

“माँ, तुम सच में एक रंडी हो… तुमने 8 लोगों का वीर्य पी लिया,” अक्षय बोला।

“हाँ बेटा… मैं तुम सबकी रंडी हूँ… मुझे यह सब बहुत पसंद है,” मैंने कहा।

हम सभी थककर गद्दों पर लेट गए। मैं 8 लोगों के बीच में थी। सभी मेरे शरीर को सहला रहे थे।

मैं उन सभकी दीवानी हो गई थी और वे सभी मेरी बुर, गांड, मुँह और शरीर के दीवाने हो गए थे।

कुछ दिनों बाद अक्षय ने मुझसे कहा, “माँ, हमारे यहाँ रसोई में 3 शेफ काम करते हैं – राजू, गोविंद और मोहन। वे सभी तुम्हें देखकर पागल होते हैं। वे रोज तुम्हारी गांड और स्तनों को घूरते हैं। क्या तुम उन्हें भी मौका दोगी?”

मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “बेटा, मेरी बुर तो हमेशा तैयार रहती है। बुला लो उन तीनों को भी। रसोई में ही चुदाई करेंगे। मुझे किचन टेबल पर लेटाकर चोदने का शौक है। वे तीनों मिलकर मुझे चोदेंगे और मैं उन तीनों का वीर्य पीऊंगी।”

“ठीक है माँ, मैं कल उन्हें रसोई में बुला लेता हूँ। हम चारों मिलकर तुम्हें रसोई में ही चोदेंगे,” अक्षय बोला।

मैंने सोचा… कल रसोई में क्या होगा… 3 शेफ और मेरा बेटा… कुल 4 लंड… रसोई की मेज पर… गैस स्टोव के पास… मेरी बुर फिर से तड़पने लगी…

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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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