अपनी हॉट सिस्टर को ब्लैकमेल करके चोदा

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मेरा नाम रघुवेंद्र तिवारी है। मैं उत्तर प्रदेश के एक छोटे से कस्बे में रहता हूँ। मेरी उम्र जब यह घटना घटी तब 24 साल थी। मेरी हाइट 5 फीट 10 इंच है, जो कि एक अच्छी खासी हाइट है।

मेरा शरीर एथलेटिक बिल्ड का है और मैं रोज़ाना व्यायाम करता हूँ।

मेरे लंड का आकार 5.5 इंच का है, जो कि पूरी तरह से कामुक और मोटा है, और किसी भी औरत को संतुष्टि देने के लिए काफी है।

मेरी बहन अभिलाषा… यह नाम लेते ही मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है।

वह मुझसे 5 साल छोटी है। जब वह छोटी थी, तो मैं उसे अपनी साइकिल पर आगे बिठाकर स्कूल ले जाता था।

उस समय वह बस एक छोटी सी बच्ची थी, लेकिन जैसे-जैसे वह बड़ी होती गई, मेरे दिल में उसके लिए कुछ और ही भाव पैदा होने लगे।

मैं याद करता हूँ वो दिन जब मैं साइकिल पर उसे लेकर जाता था। वह मेरी गोद में बैठी होती थी और मैं उसे अपने हाथों से घेरे रखता था।

उसके बाल हवा में उड़ते थे और उसकी खुशबू मेरे नाक में भर जाती थी।

तब मुझे इस बात का एहसास नहीं था, लेकिन आज जब मैं पीछे देखता हूँ तो समझता हूँ कि उस समय से ही मेरे मन में उसके लिए कुछ खास था।

फिर देखते ही देखते वह जवान हो गई। और क्या खूबसूरत हो गई! वह बिल्कुल ही कटरीना कैफ की तरह दिखने लगी थी।

उसका गोरा रंग, उसकी हरी-हरी आँखें, और उसकी वो मुस्कान… किसी का भी दिल जीत सकती थी।

वह बहुत अपना ख्याल रखती थी। रोज़ाना वह उठकर योगा करती, व्यायाम करती, और अपनी डाइट का पूरा ध्यान रखती थी।

उसे फिल्में बहुत पसंद थीं। वह हर नई फिल्म देखती और उसमें दिखाए गए फैशन और स्टाइल को फॉलो करती।

उसने अपने बाल लंबे रखे थे जो उसकी कमर तक आते थे। उसकी स्किन इतनी स्मूथ और सॉफ्ट थी कि छूने का मन करता था।

जब वह 19 साल की हुई, तो वह एकदम मस्त माल बन चुकी थी।

उसका फिगर 34-30-36 का हो गया था। उसके स्तन इतने सुंदर और उभारे हुए थे कि किसी भी लड़के का मन उन्हें छूने को करता।

उसके निप्पल हल्के गुलाबी रंग के थे और जब वह कपड़े पहनती तो उनका उभार साफ दिखाई देता था।

उसकी कमर इतनी पतली थी कि हाथ रखने पर पूरा हाथ उसे घेर लेता।

और उसके हिप्स… वाह! क्या कहने! इतने गोल और उभारे हुए कि किसी का भी मन मोह लें।

मैंने देखा कि कैसे लड़के उसे घूरते थे। स्कूल के लड़के, गली के लड़के, और यहाँ तक कि बड़े-बड़े मर्द भी उसे देखकर मुड़-मुड़कर देखते।

मेरे मन में भी उसके लिए गंदे विचार आने लगे। मैं उसे पेलना चाहता था, उसकी बुर में अपना लंड डालना चाहता था, उसके दूधों को दबाना चाहता था, लेकिन वह मेरी बहन थी।

यह सोचकर मैं अपने मन को रोकने की कोशिश करता, लेकिन कामुकता कहाँ सुनती है।

रात को जब मैं सोता, तो मुझे उसके सपने आते। मैं कल्पना करता कि मैं उसे नंगा कर रहा हूँ, उसके दूधों को चूस रहा हूँ, उसकी बुर को चाट रहा हूँ, और उसमें अपना लंड डाल रहा हूँ।

ये सब सोचकर मैं मुठ मारता और अपने आप को शांत करता।

मैंने एक प्लान बनाया। मैंने सोचा कि अगर मुझे उसे अपनी बनाना है, तो मुझे उसे अपने जाल में फँसाना होगा।

मैंने उस पर धीरे-धीरे अपना प्रभाव डालना शुरू किया।

मैं उसकी हर बात मानता, उसकी हर इच्छा पूरी करता, और उसे यह एहसास दिलाता कि मैं ही उसका सबसे अच्छा दोस्त और रक्षक हूँ।

जब वह कभी उदास होती, तो मैं उसे हंसाता। जब वह किसी परीक्षा में पास होती, तो मैं उसे तोहफे देता।

जब वह बीमार होती, तो मैं उसकी दवाई का पूरा ध्यान रखता। धीरे-धीरे वह मुझ पर निर्भर होने लगी।

वह मुझसे अपनी हर बात शेयर करती – स्कूल में क्या हुआ, किस लड़के ने उसे प्रपोज़ किया, उसे क्या पसंद है, क्या नहीं।

एक दिन पिताजी ने अभिलाषा को किसी लड़के के साथ देख लिया।

वह लड़का उसके साथ स्कूल के पास खड़ा था और उससे बात कर रहा था।

पिताजी ने उसे बहुत डांटा और यहाँ तक कह दिया कि वह उसे स्कूल नहीं भेजेंगे।

अभिलाषा रो रही थी और डरी हुई थी। उस समय मैंने बीच-बचाव किया।

मैंने पिताजी से कहा कि वह लड़का बस रास्ता पूछ रहा था और अभिलाषा बेकसूर है।

मैंने पिताजी को मनाया और उन्हें विश्वास दिलाया कि अभिलाषा एक अच्छी लड़की है।

उस रात अभिलाषा ने मुझे धन्यवाद दिया। उसकी आँखों में मेरे लिए सम्मान और प्यार साफ दिखाई दे रहा था।

उसने मुझे गले लगाया और कहा, “भैया, आप मेरे सबसे अच्छे दोस्त हो।”

मुझे लगा कि मेरा प्लान काम कर रहा है। लेकिन मैंने जल्दबाज़ी नहीं की। मैंने इंतज़ार किया सही मौके का।

वह मौका तब आया जब एक दिन मैंने उसे एक लड़के के साथ देखा। वह लड़का उसके साथ एक गली में खड़ा था और उसने अभिलाषा के दूधों को पकड़ रखा था।

वह उसे मज़े ले रहा था और अभिलाषा भी उसे रोक नहीं रही थी। वह लड़का उसके दूधों को दबा रहा था और उसके निप्पलों को मसल रहा था।

अभिलाषा के मुँह से हल्की-हल्की सिसकियाँ निकल रही थीं।

मैंने छुपकर यह सब देखा और अपने फोन से उसकी एक वीडियो बना ली।

यह वीडियो मेरे लिए एक हथियार बन गया। मैंने सोचा कि अब मैं इसे ब्लैकमेल करके उसे अपनी बना सकता हूँ।

मैंने कुछ दिन इंतज़ार किया। फिर एक रात जब घर में कोई नहीं था – पिताजी किसी रिश्तेदारी में गए थे और माँ भी साथ गई थीं – मैंने उसे वह वीडियो दिखाया।

अभिलाषा घबरा गई। उसका चेहरा पीला पड़ गया।

उसने मुझसे विनती की, “भैया, प्लीज़, यह वीडियो किसी को मत दिखाना। अगर पापा ने देख लिया तो वह मुझे मार डालेंगे।”

मैंने कहा, “मैं उसे नहीं दिखाऊँगा, लेकिन तुम्हें मेरी एक शर्त माननी होगी।”

उसने पूछा, “क्या शर्त है?”

मैंने उसे कहा, “तुम मुझे अपना शरीर दिखाओगी और मेरे साथ वो सब करोगी जो मैं चाहता हूँ।”

पहले तो वह मना करने लगी। उसने कहा, “भैया, यह गलत है। हम भाई-बहन हैं।”

लेकिन जब मैंने वीडियो दिखाने की धमकी दी, तो वह मान गई। उसकी आँखों में आँसू थे और वह रो रही थी, लेकिन उसे मजबूरन मानना पड़ा।

हमारे घर की छत पर एक कमरा था जिसमें पुराना सामान रखा हुआ था – पुराना बिस्तर, अलमारी, और कुछ डिब्बे।

वहाँ कोई नहीं आता था। मैंने उसे उसी रात वहाँ आने के लिए कहा।

रात के 11 बजे थे। घर में सब सो चुके थे। मैं छत पर गया और उस कमरे में इंतज़ार करने लगा।

कमरे में एक पुराना बल्ब जल रहा था जिसकी हल्की रोशनी में सब कुछ पीला-पीला दिख रहा था।

बाहर चाँद पूरा था और उसकी रोशनी कमरे की खिड़की से आ रही थी।

कुछ ही देर में अभिलाषा भी वहाँ आ गई। वह एक सफेद रंग की नाइटी पहने हुए थी जो उसके शरीर पर बहुत सुंदर लग रही थी।

उसके बाल खुले हुए थे और उसके चेहरे पर शर्मिंदगी साफ झलक रही थी। वह नीचे नज़रें किए खड़ी थी और उसके हाथ कांप रहे थे।

मैंने कमरे का दरवाज़ा बंद कर दिया और उसे अपनी बाहों में भर लिया। वह कांप रही थी।

मैंने उसके कान में फुसफुसाते हुए कहा, “डरो मत, मैं तुम्हें बहुत प्यार करता हूँ। मैं तुम्हें दर्द नहीं दूँगा, सिर्फ प्यार करूँगा।”

मैंने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होठों पर एक हल्का सा चुम्बन किया।

वह पहले तो पीछे हटी, लेकिन फिर रुक गई। मैंने उसके होठों को चूसना शुरू किया।

उसके होठ इतने सॉफ्ट और मीठे थे कि मैं बस चूसता ही रह गया।

फिर मैंने उसकी नाइटी के ऊपर से ही उसके दूधों को सहलाना शुरू कर दिया।

वह मेरे हाथों को रोकने की कोशिश करती रही, लेकिन मैंने उसे धीरे से कहा, “अगर तुमने मना किया तो मैं वीडियो दिखा दूँगा।”

यह सुनकर वह चुप हो गई। मैंने उसकी नाइटी के बटन खोलने शुरू किए। एक-एक करके सारे बटन खोल दिए।

अब उसकी नाइटी खुली हुई थी और अंदर उसने सफेद रंग की ब्रा पहनी हुई थी जो उसके दूधों को बड़े ही सुंदर ढंग से समेटे हुए थी।

मैंने उसकी नाइटी उतारी। अब वह सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।

उसका शरीर चाँदनी रात में बिल्कुल एक अप्सरा की तरह चमक रहा था।

उसकी त्वचा इतनी गोरी और चमकदार थी कि मैं उसे देखता ही रह गया।

मैंने उसकी ब्रा के पीछे का हुक खोला और उसके दूध आज़ाद हो गए। उसके स्तन इतने सुंदर और गोल थे कि मैं उन्हें देखता ही रह गया।

वह थोड़े नीचे की ओर झुके हुए थे लेकिन बिल्कुल सख्त और उभारे हुए थे। उसके निपल्स हल्के गुलाबी रंग के थे और थोड़े कड़े भी हो चुके थे ठंड की वजह से।

मैंने उसके दूधों को अपने हाथों में लिया और उन्हें दबाना शुरू किया।

वह इतने सॉफ्ट और मुलायम थे कि मेरे हाथ उनमें डूब से गए। मैंने उन्हें धीरे-धीरे दबाया और सहलाया। वह हल्की सी सिसकियाँ भर रही थी।

मैंने उसके एक निप्पल को अपने मुँह में लिया और चूसने लगा। वह मज़े से कराह उठी।

मैंने अपनी जीभ से उसके निप्पल को चटकाया और उसे काटा भी थोड़ा सा।

वह “आह…” की आवाज़ निकाली। मैंने दूसरे निपल्स को भी वैसे ही चूसा और काटा। उसके दोनों निप्पल अब कड़े हो चुके थे और लाल हो गए थे।

मैंने उसके दूधों को बारी-बारी से चूसा और दबाया। वह अब गर्म होने लगी थी। उसकी साँसें तेज़ हो गई थीं और उसका चेहरा लाल हो गया था।

फिर मैंने उसकी पैंटी उतारी। उसने सफेद रंग की लेस वाली पैंटी पहनी हुई थी जो बहुत सेक्सी लग रही थी।

मैंने उसे नीचे खींचा और उसकी बुर सामने आ गई। उसकी बुर बिल्कुल साफ शेव की हुई थी और बहुत ही सुंदर दिख रही थी।

उसकी बुर के होठ गुलाबी थे और बीच में उसकी चूत का छेद दिखाई दे रहा था।

मैंने उसकी बुर को चाटना शुरू किया। वह पहले तो शर्मा रही थी और अपने हाथों से अपना चेहरा छुपा रही थी, लेकिन फिर उसे भी मज़ा आने लगा।

मैंने अपनी जीभ उसकी बुर के होठों पर फिराई और उसे चाटा।

वह अपनी कमर उठा-उठाकर मेरे मुँह से अपनी बुर चटवा रही थी।

मैंने अपनी जीभ उसकी बुर में डाली और अंदर-बाहर करने लगा। उसकी बुर का स्वाद इतना मीठा था कि मैं बस चाटता ही रहा।

उसकी चूत का रस बहने लगा था जो मैं चाट चाट कर पी रहा था। वह अब ज़ोर-ज़ोर से साँसें ले रही थी और आहें भर रही थी।

“आह… भैया… बहुत मज़ा आ रहा है… और चाटो… हाँ… वहीं…” वह बड़बड़ा रही थी।

मैंने उसकी बुर को अच्छी तरह से चाटा और उसे गीला कर दिया।

अब उसकी बुर पूरी तरह से तर हो चुकी थी और मेरे लंड को लेने के लिए तैयार थी।

फिर मैंने उसे अपना लंड चूसने के लिए कहा।

पहले तो वह मना करती रही, “भैया, यह गलत है… मैं नहीं कर सकती…”

लेकिन मैंने ज़ोर दिया तो वह मान गई। उसने मेरे पैंट के ऊपर से ही मेरे लंड को सहलाना शुरू किया।

मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था और पैंट में तम्बू बनाए हुए था।

फिर मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरी शर्ट, फिर पैंट, और फिर अंडरवियर।

मेरा 5.5 इंच का लंड उसके सामने आ गया। वह मेरे लंड को देखकर डर गई।

वह काफी मोटा और अच्छा लंबा था कि उसे देखकर वह पीछे हट गई।

मैंने उसे प्यार से समझाया, “डरो मत, यह तुम्हें बहुत मज़ा देगा। इसे पकड़ो और चूसो।”

मैंने उसके मुँह में अपना लंड दे दिया। पहले तो वह अनाड़ी थी और सिर्फ ऊपर-ऊपर चूस रही थी, लेकिन फिर मैंने उसे सिखाया कि कैसे चूसना है।

“जीभ से चटकाओ, और अंदर लो… हाँ… ऐसे ही…”

वह धीरे-धीरे सीखने लगी। उसने मेरे लंड को अपने मुँह में पूरा ले लिया और चूसने लगी।

उसके मुँह की गर्मी और नमी से मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। वह मेरे लंड को जीभ से चटकाती और फिर अंदर-बाहर करती।

मैंने उसके सिर को पकड़ा और अपना लंड उसके मुँह में आगे-पीछे करने लगा।

वह भी मज़े से चूसने लगी। मेरा लंड अब पूरा कड़क हो चुका था और उसके मुँह में फँस-फँस कर आ रहा था।

अब मैं उसे चोदने के लिए तैयार था। मैंने उसे पुराने बिस्तर पर लिटाया जो कमरे में रखा हुआ था।

उसने अपने पैर फैलाए और उसकी बुर अब पूरी तरह से गीली हो चुकी थी।

उसकी बुर का छेद खुला हुआ था और अंदर गुलाबी गुफा दिख रही थी।

मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी बुर के मुँह पर रख दिया।

फिर मैंने एक ज़ोर का धक्का लगाया और मेरा आधा लंड उसकी बुर में घुस गया।

वह दर्द से चीख उठी, “आह… भैया… बहुत दर्द हो रहा है… निकालो… प्लीज़…”

मैंने उसके मुँह पर हाथ रखा और धीरे से कहा, “थोड़ी देर में मज़ा आएगा… बस रुकी रहो…”

मैंने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। पहले आधा लंड अंदर-बाहर करता रहा।

उसकी बुर इतनी टाइट थी कि मेरा लंड उसमें कसकर फँसा हुआ था। वह दर्द से कराह रही थी लेकिन फिर उसे भी मज़ा आने लगा।

कुछ ही देर में वह मेरे साथ साथ देने लगी। वह अपनी कमर उठा-उठाकर मेरे धक्कों का जवाब दे रही थी।

मैंने उसकी दोनों टाँगों को अपने कंधों पर रखा और ज़ोर-ज़ोर से उसकी बुर में अपना लंड पेलने लगा।

“आह… हाँ… भैया… और ज़ोर से… चोदो मुझे… मेरी बुर फाड़ दो…” वह अब पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और चिल्ला-चिल्लाकर चुदवा रही थी।

मैंने उसे कई पोज़िशन में चोदा। पहले मिशनरी पोज़िशन में – उसके पैर फैलाकर ऊपर से धक्के लगाए।

फिर उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी बुर में लंड डाला। उसके हिप्स इतने गोल और सुंदर थे कि मैं उन्हें पकड़कर धक्के लगा रहा था।

“आह… भैया… पीछे से बहुत अच्छा लग रहा है… और ज़ोर से चोदो…” वह चीख रही थी।

फिर मैंने उसे अपनी गोद में बिठाया और नीचे से धक्के लगाए।

उसके दूध मेरे सामने थे जिन्हें मैं चूसता रहा और नीचे से उसकी बुर चोदता रहा।

लगभग आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं झड़ने वाला था। मैंने उससे पूछा, “कहाँ झाड़ूँ?”

उसने कहा, “बाहर निकालो… अंदर मत छोड़ना…”

लेकिन मैंने उसकी बुर में ही अपना सारा वीर्य छोड़ दिया।

मैंने एक ज़ोर का धक्का लगाया और मेरा लंड उसकी बुर की गहराई में जाकर फँस गया।

फिर मैंने अपना गरम वीर्य उसकी बुर में छोड़ दिया।

वह गर्म पानी उसकी बुर में जाकर वह और भी गर्म हो गई।

वह मज़े से कराह उठी, “आह… भैया… आपने अपना सब कुछ मेरी बुर में छोड़ दिया…”

मैंने अपना लंड उसकी बुर में ही रखा और उसके ऊपर लेट गया। हम दोनों थककर एक-दूसरे से लिपटकर लेट गए।

उसकी बुर से मेरा वीर्य और उसकी चूत का रस मिलकर बाहर बह रहा था।

मैंने उसे कहा, “मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ। यह हमारा रहस्य रहेगा। कोई नहीं जानेगा।”

उसने भी मुझे गले लगा लिया और कहा, “मुझे भी मज़ा आया भैया। आपने मुझे बहुत खुश किया।”

उस रात के बाद हम दोनों की बहन-भाई की रिश्ते में एक नई कामुकता आ गई थी।

हम अक्सर उस छत के कमरे में मिलते और एक-दूसरे की जिस्म की भूख मिटाते।

मैंने उसे और भी तरीके सिखाए। कभी मैं उसके दूधों को चूसता, कभी उसकी बुर चाटता, और कभी उसे घोड़ी बनाकर चोदता।

वह भी सीख गई थी कि कैसे लंड चूसना है और कैसे मज़े देना है।

हमारा यह रिश्ता सिर्फ शारीरिक नहीं था, बल्कि भावनात्मक भी था। हम एक-दूसरे से प्यार करते थे। वह मेरी थी और मैं उसका था।

और इस तरह मेरी बहन अभिलाषा और मेरे बीच एक खूबसूरत रिश्ता बना जो शारीरिक आवश्यकता और प्यार दोनों से भरा हुआ था।

हमने उस छत के कमरे में कई रातें बिताईं जहाँ मैंने उसके दूधों को चूसा, उसकी बुर चाटी, और उसे अपने 5.5 इंच के लंड से चोदकर संतुष्टि दी।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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