garam sali ki chudai
एक देवरानी की बेरहम चुदाई – जब ससुराल में सब काम पर गए और घर में बचे सिर्फ़ जीजू और छोटी साली, तो दोनों ने प्यार और वासना की सीमाएं तोड़ दीं। पढ़िए कि कैसे एक मासूम मुलाकात बदल गई जंगली जवानी के मज़े में…
दोस्तों, मेरा नाम किशोर है। मैं मुंबई का रहने वाला हूँ और एक प्राइवेट कंपनी में मैनेजर के पद पर काम करता हूँ।
मेरी हाइट 5.8 इंच है और मैं जिम जाता हूँ इसलिए मेरा बदन काफी फिट रहता है। मेरी शादी को दो साल हो चुके हैं।
मेरी बीवी का नाम प्रिया है और वह एक बहुत ही सीधी-सादी लड़की है।
लेकिन आज मैं आपको अपनी देवरानी यानी साली के बारे में बताने जा रहा हूँ जिसका नाम है संस्कृति।
संस्कृति मेरी सबसे छोटी साली है और अभी कॉलेज में पढ़ती है। उसकी उम्र 21 साल है और वह ऐसी खूबसूरत है कि कोई भी उसे देखकर मदहोश हो जाए।
मैं पहली बार जब अपने ससुराल गया था तभी से संस्कृति मुझे अपनी तरफ़ खींचती थी।
उसके बड़े-बड़े होंठ, गोरा बदन, और वो कमर जिसे देखकर हर मर्द की नीयत खराब हो जाए।
वह जब भी घर में घूमती थी तो उसके कदम ऐसे थिरकते थे जैसे कोई हिरन चल रहा हो।
मैं हमेशा उसे चोरी-छिपे देखता रहता था और वह भी मुझे पकड़ लेती थी, फिर शरमाते हुए मुस्कुरा देती थी।
धीरे-धीरे हमारे बीच एक अजीब सा रिश्ता बनने लगा।
वह मुझसे खुलकर बातें करने लगी, मेरे साथ सेल्फी लेने लगी, और कभी-कभी तो इतनी पास आ जाती कि उसकी साँसें मेरे गालों पर महसूस होतीं।
मैं समझ गया था कि इस लड़की के मन में भी वही चल रहा है जो मेरे मन में।
उसकी आँखों में वो लालसा साफ़ दिखती थी, वो चाहती थी कि मैं उसे छूँ, उसे अपना बनाऊँ।
एक बार की बात है, मेरी सास का बर्थडे था और हम सब ससुराल गए हुए थे।
उस दिन घर का माहौल कुछ अलग था।
मेरी सास और ससुर किसी रिश्तेदारी में गए थे, मेरा साला यानी प्रिया का भाई अपने दोस्तों के साथ बाहर गया था, और मेरी बीवी प्रिया को अचानक एक ज़रूरी काम से ऑफिस जाना पड़ा।
वह कहने लगी कि शाम तक आ जाऊँगी।
अब घर में बचे थे सिर्फ़ मैं और संस्कृति।
वह अपने कमरे में पढ़ाई कर रही थी और मैं बैठक में बैठकर टीवी देख रहा था।
लेकिन मेरा ध्यान कहीं और था। मैं सोच रहा था कि आज ये मौका हाथ से नहीं जाना चाहिए।
मैंने सोचा कि क्यों न आज इस खूबसूरत साली को अपनी बाहों में भर लूँ।
कुछ देर बाद संस्कृति पानी लेने के बहाने बैठक में आई।
उसने आज हल्की गुलाबी रंग की नाइटी पहनी हुई थी जो उसके गोरे बदन पर बेहद खूबसूरत लग रही थी।
वह जब झुककर ग्लास रखने लगी तो उसकी नाइटी का गहरा कट उसके मम्मे दिखा रहा था। मेरा लंड तो उसी पल खड़ा हो गया।
मैंने उसे आवाज़ दी, “संस्कृति, इधर आओ ना, बैठो मेरे पास।”
वह शरमाते हुए मेरे पास आकर सोफे पर बैठ गई। मैंने उससे पूछा, “क्या पढ़ाई कर रही हो?”
वह बोली, “हाँ जीजू, थोड़ा सा काम है।”
मैंने उसका हाथ पकड़ लिया और बोला, “संस्कृति, तुम मुझसे इतना शर्माती क्यों हो? मैं तुम्हारा जीजू हूँ, अपना समझो।”
वह मेरी तरफ़ देखने लगी और उसकी साँसें तेज़ हो गईं।
मैंने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए।
वह पहले तो हिचकिचाई, लेकिन फिर वो भी मेरा साथ देने लगी। हम दोनों एक-दूसरे को किस करने लगे, जीभ से चूसने लगे।
मैंने उसे अपनी गोद में बिठा लिया और उसकी नाइटी के ऊपर से ही उसके मम्मे दबाने लगा।
वह आह आह करने लगी। फिर मैंने उसे उठाया और अपने कमरे में ले गया जो नीचे ग्राउंड फ्लोर पर था। वहाँ कोई नहीं आता था।
कमरे में ले जाकर मैंने दरवाज़ा बंद कर दिया और उसे बिस्तर पर लिटा दिया।
वह मुझे प्यासी नज़रों से देख रही थी। मैंने उसकी नाइटी उतार दी।
अंदर उसने काली रंग की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी जो उसके गोरे बदन पर बेहद सेक्सी लग रही थी।
मैंने उसकी ब्रा के ऊपर से ही उसके मम्मे चूसने शुरू कर दिए।
वह मेरे बालों में हाथ फिराने लगी और मुझे और पास खींचने लगी। फिर मैंने उसकी ब्रा खोल दी।
उसके चूचे देखकर मैं तो पागल हो गया। एकदम गोल-गोल, गुलाबी निप्पल वाले, 32 साइज़ के मस्त मम्मे थे।
मैं उन्हें ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा, काटने लगा। वह कराहने लगी, “आह जीजू, बहुत मज़ा आ रहा है।”
फिर मैंने नीचे उसकी पैंटी उतार दी। उसकी चूत एकदम साफ़ शेव की हुई थी, गुलाबी रंग की, एकदम चिकनी।
मैंने उसकी टांगें फैलाई और उसकी चूत पर अपनी जीभ फेरने लगा।
वह पागल होने लगी, “ऊई जीजू, ये क्या कर रहे हो, बहुत गुदगुदी हो रही है।”
मैंने उसकी चूत में जीभ डालकर चाटना शुरू कर दिया। वह काँपने लगी, उसने मेरे सिर को अपनी चूत पर दबा लिया।
मैं उसकी चूत के अंदर-बाहर जीभ करने लगा, उसकी क्लिटरिस को चूसने लगा।
कुछ ही देर में वह झड़ गई और उसका पानी मेरे मुँह में भर गया।
अब मैंने अपने कपड़े उतार दिए। मेरा लंड 7 इंच लंबा और काफी मोटा था।
उसे देखकर वह थोड़ा डर गई। मैंने उसे कहा, “डरो मत, बहुत मज़ा आएगा।”
मैंने उसे बिस्तर पर घुटनों के बल बैठने को कहा। वह डॉगी स्टाइल में आ गई।
मैंने उसकी गांड के छेद पर अपनी उंगली फेरी और थूक लगाकर उसे अंदर डाल दी। वह चीखी, “ऊई, क्या कर रहे हो जीजू?”
मैंने कहा, “आज तेरी गांड भी मारूँगा, पहले तेल ला।”
वह उठकर कमरे से बाहर गई और तेल की शीशी ले आई।
मैंने अपने लंड पर तेल लगाया और उसकी गांड के छेद पर भी तेल लगाया।
फिर मैंने उसकी गांड में एक उंगली डाली, फिर दो उंगलियाँ। वह दर्द से कराह रही थी लेकिन मज़े भी ले रही थी।
अब मैंने अपने लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर रखा और धीरे से धक्का दिया।
वह चीखने लगी, “बहुत दर्द हो रहा है जीजू, निकाल लो प्लीज़।”
मैंने उसकी कमर पकड़ी और एक ज़ोरदार धक्का दिया। मेरा आधा लंड उसकी गांड में घुस गया।
वह रोने लगी, लेकिन मैंने उसे चुप कराते हुए धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू कर दिए।
कुछ देर बाद उसे मज़ा आने लगा और वह भी पीछे से धक्के देने लगी।
मैंने उसकी गांड 10 मिनट तक मारी और फिर लंड बाहर निकालकर उसकी चूत में डाल दिया।
वह पहली बार चूत में लंड ले रही थी इसलिए थोड़ा दर्द हुआ लेकिन वह सहन कर ली।
मैंने उसे नीचे लिटाया और उसके ऊपर चढ़कर चोदना शुरू कर दिया।
मैंने उसकी टांगें अपने कंधों पर रखीं और गहरे-गहरे धक्के लगाने लगा।
वह आह आह करके मज़े ले रही थी। फिर मैंने उसे उल्टा किया और पीछे से चोदने लगा। उसकी गांड और चूत दोनों का मज़ा लिया।
करीब आधे घंटे तक मैंने उसे अलग-अलग पोजीशन में चोदा।
फिर मैंने उसे अपने लंड पर बिठाया और वह ऊपर-नीचे उछलने लगी। उसके मम्मे मेरे मुँह के सामने थे, मैं उन्हें चूसता जा रहा था।
अब मेरा निकलने वाला था। मैंने उससे पूछा, “कहाँ निकालूँ?”
वह बोली, “अपनी साली की चूत में ही निकाल दो जीजू, मैं आपका बच्चा पैदा करना चाहती हूँ।”
यह सुनकर मैं और भी ज़्यादा उत्तेजित हो गया और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा।
कुछ ही देर में मैं उसकी चूत में ही झड़ गया। मेरा गरम गरम माल उसकी चूत में भर गया।
वह मेरे ऊपर गिर गई और मुझे चूमने लगी। हम दोनों एक-दूसरे से लिपटे रहे।
फिर हम बाथरूम में गए और एक-दूसरे को साफ़ किया।
जब शाम को मेरी बीवी आई तो हम दोनों सामान्य होकर बैठे थे।
लेकिन अब हमारे बीच एक गहरा रिश्ता बन चुका था। संस्कृति अब मेरी चोदने वाली साली बन चुकी थी।
उस दिन के बाद हम जब भी मौका मिलता, चुदाई का मज़ा लेते।
एक बार तो मैंने उसे अपने ऑफिस में भी बुलाया और वहाँ भी जमकर चोदा।
अब तो वह मेरी रखैल बन चुकी है और मैं जब चाहता हूँ, उसे चोदता हूँ।
हम दोनों की यह चुदाई वाली रिश्तेदारी अब भी जारी है और हम दोनों इसमें बहुत खुश हैं।
तो दोस्तों, यह थी मेरी साली संस्कृति की चुदाई की कहानी।
आशा करता हूँ आपको पसंद आई होगी।
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Very nice 🙂🙂👍
agr kushinagar(UP) mein kisi ladki ko chodwana hai to mujhe message kare. mere land ki size 6.4 inch hai
Very nice ………………..👌👌
Beautiful ❤️ story. I enjoyed reading.
Saali to aadhi ghar wali hoti hi hai. Aachha kiya jo aapne apani saali ka itna khyal rakha. Mujhe bhi aise land chahiye lekin relation mein koi hai hi nhi.
Me hu na mujhe apna jiju maan lo