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ट्रेन में हुई उस रात के बाद भाई-बहन के बीच की दूरी खत्म हो चुकी थी। जब मौका मिला, तो किशोर ने आलिया को एक रोमांटिक होटल में ले जाकर उसकी हर ख्वाहिश पूरी की… वो भी ऐसे अंदाज़ में कि दोनों की साँसें रुक सी गईं।
ट्रेन यात्रा के बाद से ही आलिया और मेरे बीच कुछ बदल सा गया था।
{अगर आपने वह कहानी नहीं पढ़ी है तो पहले उसको पढ़ले की कैसे मेरी छोटी बहन ने ट्रेन में मेरा लंड चूसा}
जब भी हम घर में अकेले होते, हमारी नज़रें एक-दूसरे को खोजतीं।
कभी रसोई में, कभी बाथरूम के बाहर, कभी सोफे पर बैठे… वो मुझे ऐसे देखती जैसे किसी भूखी शेरनी अपने शिकार को देखती है।
मैं भी उसके उभरे हुए चूचियों को, उसकी गोल गांड को घूर-घूर कर देखता।
एक दिन जब मैं बाथरूम से नहाकर बाहर आया, तो आलिया वहीं खड़ी थी।
उसने मुझे रोक लिया और फुसफुसाते हुए कहा, “किकू… वो रात याद है? मैं… मैं और चाहती हूँ।”
मेरा दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा।
मैंने उसे पास खींचा और कान में कहा, “पागल हो गई है? माँ-पापा घर पर हैं।”
“तो क्या हुआ?” उसने शरारती अंदाज़ में कहा, “कल वो दोनों नानी के यहाँ जा रहे हैं दोपहर को। घर खाली रहेगा।”
मैंने उसकी गांड पर हाथ फेरते हुए कहा, “नहीं बेबी, घर पर रिस्क नहीं ले सकते। कोई आ भी सकता है। मैं एक काम करता हूँ…”
अगले दिन जब माँ-पापा चले गए, मैंने आलिया को तैयार होने को कहा।
उसने एक गुलाबी रंग की साड़ी पहनी थी जिसमें उसकी नाभि दिख रही थी और ब्लाउज इतना कटा हुआ था कि उसके चूचियों का आधा हिस्सा बाहर झाँक रहा था।
मैंने उसे बाइक पर बिठाया और एक दूर के इलाके में स्थित एक अच्छे होटल की तरफ निकल पड़ा।
रास्ते में मैंने ऑनलाइन एक लक्जरी रूम बुक कर लिया था – वो भी नाम बदलकर, ताकि किसी को पता न चले कि भाई-बहन यहाँ आए हैं।
होटल पहुँचने पर मैंने आलिया को सीधे लिफ्ट में ले जाकर ऊपर चलने को कहा।
रिसेप्शन वाले को लगा हम कोई कपल हैं।
रूम नंबर 302 में जैसे ही दरवाज़ा खुला, आलिया की आँखें चौड़ी हो गईं।
मैंने पहले ही फोन पर मैनेजर से कहा था कि रूम को रोमांटिक तरीके से सजाया जाए।
पूरे कमरे में लाल और गुलाबी गुलाब के फूल बिखरे हुए थे, बेड पर हार्ट शेप में गुलाब की पंखुड़ियाँ थीं, हल्की सी पर्पल लाइटिंग थी और एयर में इत्र की महक।
शीशे के सामने शैंपेन की बोतल रखी थी।
दरवाज़ा बंद होते ही आलिया बेकाबू हो गई।
उसने अपनी साड़ी का पल्लू फेंका और मेरी पैंट पर हाथ मारते हुए फुसफुसाई, “बहुत दिन से इसे अपने अंदर महसूस करना चाहती थी… आज नहीं रुक सकती।”
वो घुटनों के बल बैठ गई और मेरी पैंट खोलने लगी।
उसकी बेचैनी देखकर मेरा लंड पहले से ही खड़ा था।
जैसे ही उसने मेरी पैंट नीचे की, मेरा 7 इंच का मोटा लंड सीधा उसके चेहरे पर मारा।
उसने तुरंत उसे पकड़ा और अपने मुँह में भर लिया।
वो इतनी तेज़ी से चूस रही थी जैसे कई दिनों से भूखी हो।
“चूस मेरी जान… और गहरा ले…” मैंने उसके बाल पकड़ते हुए कहा।
वो “उम्म… उम्म…” की आवाजें निकाल रही थी, उसकी जीभ लंड के नीचे वाले हिस्से को चाट रही थी, टोपे को चूम रही थी।
मैंने उसे उठाया और बेड पर लिटा दिया।
उसकी साड़ी ऊपर उठाई और पैंटी उतार दिए।
उसकी चिकनी, गोरी जांघें देखकर मेरा लंड और भी ज़्यादा कड़क गया।
मैं उसकी जांघों पर किस करता हुआ ऊपर चढ़ा।
उसकी गुलाबी पैंटी उतारी तो एकदम साफ़ शेव किया हुआ चूत दिखा।
वो गीला हो चुका था, चमक रहा था। मैंने अपनी जीभ उसकी चूत की दरार पर फेरी।
“आह… हाँ… और करो…” आलिया कराही। मैंने उसकी चूत के होठों को चूमा, फिर जीभ अंदर डाली।
वो मचलने लगी, अपनी गांड उठा-उठा कर मेरे मुँह में देने लगी।
मैं उसकी क्लिटoris को चूस रहा था, कभी जीभ से चाटता, कभी दाँतों से हल्का काटता।
“भैया… बहुत मज़ा आ रहा है… चूसो इसे…” वो बड़बड़ा रही थी।
फिर मैं ऊपर चढ़ा और उसकी ब्लाउज खोल दी।
काली ब्रा के अंदर से मैंने उसके दोनों चूचियाँ बाहर निकाले।
वो कितने सुंदर थे – गोल, गुलाबी निप्पल वाले।
मैंने एक को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया, दूसरे को हाथ से मसल रहा था।
“चूसो… और ज़ोर से चूसो मेरे दूध…” आलिया मेरे सिर को अपने चूचियों पर दबा रही थी।
मैं बारी-बारी से दोनों चूस रहा था, निप्पलों को काट रहा था, वो दर्द और मज़े से कराह रही थी।
अब मैं बेकाबू हो चुका था।
मैंने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर रखा और धीरे से अंदर डालने लगा।
वो तड़पी, “आह… धीरे… बहुत मोटा है…”
“रुक जा मेरी रंडी बहन… अभी आदत डाल ले…” मैंने गाली देते हुए कहा और एक ज़ोर का झटका दिया।
मेरा आधा लंड अंदर घुस गया। आलिया चीखी, “माँ… बहुत दर्द हो रहा है…”
“चुप कर साली… अभी तो आधा ही गया है…” मैंने उसके मुँह पर हाथ रखा और फिर से झटका दिया।
पूरा लंड अंदर समा गया। वो तड़प रही थी, आँखों में आँसू थे, लेकिन मुँह से आवाजें निकल रही थीं, “हाँ… और पेलो… पूरी चूत फाड़ दो अपनी इस रंडी बहन की…”
मैंने उसके पैर अपने कंधों पर रखे और ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू किया।
बेड की चादरें क्रिंकल हो रही थीं, कमरे में थप-थप की आवाज गूँज रही थी।
“ले मेरी जान… ले अपने भाई का लंड… कैसा लग रहा है तेरी भाई का मोटा लौड़ा?” मैं गंदी-गंदी बातें करते हुए उसे चोद रहा था।
“बहुत अच्छा लग रहा है… और ज़ोर से चोदो… अपनी बहन को रंडी बनाकर चोदो…” आलिया भी अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी।
वो अपनी गांड उठा-उठा कर मेरा साथ दे रही थी।
मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से लंड डालकर चोदना शुरू किया।
उसकी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी।
मैं उसके बाल पकड़कर खींचता और ज़ोर से झटके देता।
“आह… हाँ… मारो… मेरी चूत फाड़ दो…” वो चीख रही थी।
फिर मैंने उसे लिटाया और उसके ऊपर आ गया। उसकी टांगें मेरी कमर पर लपेटी हुई थीं।
मैं धीमी गति से अंदर-बाहर कर रहा था, उसके होंठ चूस रहा था।
हम दोनों की साँसें एक दूसरे के मुँह में मिल रही थीं। “किशोर… मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” आलिया काँपते हुए बोली।
“रुक जा मेरी जान… मैं भी…” मैंने कहा और स्पीड बढ़ा दी। हम दोनों एक साथ झड़े।
मेरा गर्म पानी उसकी चूत में भर गया और उसकी चूत ने भी मेरे लंड पर अपना रस छोड़ दिया।
मैं उसी के ऊपर गिर गया, थक कर, पसीने से तर।
कुछ देर बाद जब हमारी साँसें सामान्य हुईं, तो आलिया ने मुझे गले लगाया और कहा, “ये रात हमेशा याद रहेगी…”
मैंने उसके माथे पर चूमा और कहा, “अब तो शुरुआत है मेरी जान… अभी तो बहुत कुछ बाकी है।”
हम दोनों शाम तक उसी होटल रूम में रहे, बार-बार एक-दूसरे को प्यार करते रहे।
जब घर लौटे, तो हमारे चेहरे पर एक अजीब सी मुस्कान थी… एक ऐसी रात की याद जो हमेशा के लिए हमारे दिलों में बस गई।
अगली कहानी में पढ़ें की कैसे मैंने आलिया की गैंगबैंग की इच्छा पूरी की….
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Very nice and enjoyment story