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एक अमीर औरत जो अपने बड़े से बंगले में एक अनोखा धंधा चलाती है, जहाँ वो अनुभवहीन युवकों को सेक्स की शिक्षा देती है। जानिए कैसे एक मासूम लड़के को उसने अपनी रंडी बनाया और उसे चोदने की कला सिखाई, और क्यों वो अब उसी लड़के के लंड का दीवाना हो गई है। यह कहानी वासना, सिखाई और गहरे संबंधों की है।
मेरा नाम सुरेन्द्र है और मैं इस शहर का सबसे बड़ा ठेकेदार हूँ। मेरी उम्र पैंतालीस साल है और मैंने करोड़ों की दौलत कमाई है।
लेकिन मेरी असली दिलचस्पी औरतों में है। मैंने अपने लिए एक खास घर बनाया है जहाँ मैं अमीरों के बेटों को सेक्स की शिक्षा देता हूँ।
यह घर शहर के बाहर एक बड़े बंगले में है।
यहाँ सिमरन नाम की एक औरत रहती है जो पैंतालीस साल की है और बहुत ही खूबसूरत है।
उसके स्तन बड़े और गोल हैं, कमर पतली और गांड बहुत भरी हुई है।
वो इस घर की मालकिन है और यहाँ आने वाले युवकों को सेक्स की शिक्षा देती है।
एक दिन संदीप नाम का एक लड़का आया। वो अठारह साल का था और बहुत ही मासूम दिखता था।
गोरा रंग, दुबला-पतला बदन, और आँखों में वो मासूमियत जो किसी भी औरत को उसकी तरफ खींच ले।
उसके पिता ने मुझे पैसे दिए थे कि मैं उसे सेक्स की शिक्षा दूँ क्योंकि वो शादी के लायक हो चुका था लेकिन उसे सेक्स के बारे में कुछ नहीं पता था।
सिमरन ने संदीप को देखते ही मुझसे कहा, “यह तो बहुत ही मस्त माल है। इसे तो मैं खुद सिखाऊँगी।”
मैंने कहा, “ठीक है सिमरन, यह लड़का तुम्हारा है। इसे रंडी बनाकर छोड़ना।”
संदीप को एक कमरे में ले जाया गया। सिमरन ने उसके सामने अपनी ब्रा और पैंटी रख दी।
संदीप ने उसे देखकर पूछा, “यह क्या है?”
“तुम्हारी माँ ऐसा नहीं पहनती?” सिमरन ने पूछा।
“हाँ पहनती है,” संदीप ने कहा।
“तो फिर यह भी वही है जो तुम्हारी माँ पहनती है। लेकिन आज मैं तुम्हें कुछ और दिखाऊँगी,” सिमरन ने कहा और अपना मोबाइल निकालकर पोर्न मूवी लगा दी।
संदीप ने पहली बार पोर्न देखी। उसका लंड खड़ा होने लगा।
सिमरन ने यह नोटिस किया और उसके पास आकर बैठ गई।
“कैसा लग रहा है?” सिमरन ने पूछा।
“अच्छा लग रहा है दीदी,” संदीप ने शर्माते हुए कहा।
सिमरन ने उसके होठों पर चूमा दिया। संदीप का बदन काँप उठा।
फिर सिमरन ने उसका शर्ट खोला और उसकी गर्दन पर चूमने लगी। संदीप की गर्दन पूरी लाल हो गई।
“दीदी, मुझे कुछ हो रहा है,” संदीप ने कहा।
“क्या हो रहा है?” सिमरन ने पूछा।
“मुझे पेशाब आ रही है,” संदीप ने कहा।
सिमरन समझ गई कि यह पेशाब नहीं बल्कि वीर्य है।
उसने जल्दी से संदीप की पैंट खोली और उसका लंड बाहर निकाला। वो साढ़े छह इंच का था और बहुत मोटा।
सिमरन ने उसे हाथ में लिया और सहलाया। तभी संदीप का वीर्य निकल गया।
“अरे यह तो पेशाब नहीं था,” संदीप ने हैरान होकर कहा।
“नहीं यह तुम्हारा माल था। तुम झड़ गए हो,” सिमरन ने कहा और उसके लंड को अपने मुँह में लेकर साफ करने लगी।
“उम्म… म्म… ह्ह…” सिमरन उसके लंड को चूस रही थी।
संदीप को बहुत मज़ा आ रहा था। उसने पहली बार किसी औरत का मुँह अपने लंड पर महसूस किया था।
सिमरन उसके लंड को चूसे जा रही थी और कभी-कभी उसके नीचे के अंडकोशों को भी चाटती।
“दीदी, यह क्या कर रही हो?” संदीप ने पूछा।
“तुम्हारा लंड चूस रही हूँ रंडी के बच्चे। अब चुपचाप खड़ा रह और मज़े ले,” सिमरन ने कहा।
कुछ देर बाद संदीप का लंड फिर से खड़ा हो गया।
सिमरन ने अपने कपड़े उतार दिए। उसके बड़े-बड़े दूध बाहर आ गए। उसके निप्पल गुलाबी और कड़े थे।
“अब इन्हें चूसो,” सिमरन ने कहा।
संदीप ने उसके स्तनों को पकड़ा और चूसने लगा।
वो मोबाइल में चल रही पोर्न मूवी देख रहा था और वैसे ही सिमरन के साथ कर रहा था।
“ज़ोर से चूसो साले, काटो इन निप्पल्स को,” सिमरन ने कहा।
संदीप ने ज़ोर से उसके निप्पलों को काट लिया। सिमरन को दर्द हुआ लेकिन मज़ा भी आया।
“आहह… हाँ… ऐसे ही… और ज़ोर से…” सिमरन कराही।
फिर सिमरन ने संदीप का सिर अपनी बुर की तरफ धकेल दिया।
संदीप ने उसकी बुर को सूँघा और फिर जीभ लगाई।
“चाटो इसे साले रंडी के बच्चे, चाटो मेरी बुर को,” सिमरन ने कहा।
संदीप ने उसकी बुर की दरार में जीभ डाल दी। वो ऊपर-नीचे कर रहा था और सिमरन पागल हो रही थी।
“आहह… और ज़ोर से चाटो… मैं झड़ने वाली हूँ…” सिमरन चिल्लाई।
संदीप ने उसकी क्लिटोरिस को चूसा और सिमरन झड़ गई।
उसकी बुर से पानी निकलकर संदीप के मुँह में आया।
“अब मेरी बारी है रंडी,” मैंने कमरे में प्रवेश किया।
मैंने अपने कपड़े उतार दिए और मेरा नौ इंच का लंड बाहर निकल आया। सिमरन ने मुझे देखकर मुस्कुराया।
“आ जाओ सुरेन्द्र, आज इस लड़के को सिखाना है कि कैसे चोदते हैं,” सिमरन ने कहा।
मैंने संदीप से कहा, “देख लोडू, मैं कैसे इस रंडी को चोदता हूँ। तुम्हें भी ऐसे ही चोदना है।”
मैंने सिमरन को घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी बुर में लंड पेल दिया।
“आहह… मर गई… इतना बड़ा…” सिमरन चीखी।
मैंने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाए। पूरा कमरा “पच पच” की आवाज़ों से गूँज उठा।
“देख रहा है लोडू, ऐसे चोदते हैं रंडी को,” मैंने संदीप से कहा।
संदीप देख रहा था और उसका लंड फिर से खड़ा हो गया था।
“अब तेरी बारी है,” मैंने कहा और सिमरन को लिटा दिया।
संदीप ने सिमरन के पैर फैलाए और अपने लंड का सुपड़ा उसकी बुर के मुँह पर रखा।
एक ही धक्के में आधा लंड अंदर चला गया।
“आहह… धीरे… दर्द हो रहा है…” सिमरन ने कहा।
“चुप कर रंडी, अब तू इस लड़के की रंडी बनेगी,” मैंने कहा।
संदीप ने एक और धक्का दिया और पूरा लंड अंदर समा गया। फिर वो धीरे-धीरे धक्के लगाने लगा।
“ज़ोर से मार साले, रंडी को ऐसे ही चोदते हैं,” मैंने उसे प्रोत्साहित किया।
संदीप ने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। सिमरन की बुर अब खून से लथपथ हो रही थी लेकिन वो मज़े ले रही थी।
“आहह… हाँ… और ज़ोर से चोदो… फाड़ दो मेरी बुर को…” सिमरन चिल्ला रही थी।
मैंने अपना लंड सिमरन के मुँह में डाल दिया।
अब वो दोनों छेदों में लंड ले रही थी। मुँह में मेरा और बुर में संदीप का।
“उम्म… म्म… ह्ह…” सिमरन मुँह भरवां कराह रही थी।
हम दोनों एक साथ धक्के लगा रहे थे। जब मैं अंदर जाता तो संदीप बाहर निकलता। सिमरन पूरी तरह से भरी हुई थी।
“मैं झड़ने वाला हूँ…” संदीप ने कहा।
“अंदर ही डाल दे साले, इस रंडी को प्रेग्नेंट कर दे,” मैंने कहा।
संदीप ने और तेज़ धक्के लगाए और सिमरन की बुर में ही झड़ गया। उसका गरम वीर्य सिमरन की बुर को भर गया।
फिर मैंने भी अपना लंड उसके मुँह से निकाला और उसकी गांड में डाल दिया।
“आहह… मर गई… गांड में…” सिमरन चीखी।
मैंने उसकी गांड ज़ोर-ज़ोर से मारी और पंद्रह मिनट बाद उसकी गांड में ही झड़ गया।
हम तीनों थककर बिस्तर पर पड़े रहे। संदीप ने सिमरन से पूछा, “दीदी, कैसा लगा?”
“बहुत मज़ा आया साले, तू तो पैदाइशी रंडी है। अब से तू मेरा खास लौंडा है और मैं तुझे रोज़ चोदूँगी,” सिमरन ने कहा।
मैंने भी कहा, “हाँ लोडू, अब से यहीं रहेगा और हम दोनों की रंडी बनेगा।”
संदीप ने हाँ में सिर हिलाया। उसे भी यह नई ज़िंदगी बहुत पसंद आई थी।
उस दिन के बाद संदीप हमारे घर का हिस्सा बन गया।
वो रोज़ सिमरन को चोदता था और कभी-कभी मैं भी शामिल हो जाता था।
सिमरन को संदीप का लंड बहुत पसंद आया था और वो उससे प्रेग्नेंट होना चाहती थी।
कुछ महीनों बाद सिमरन प्रेग्नेंट हो गई।
उसने बच्चा रखने का फैसला किया और संदीप को उसका बाप बनने की खुशी मिली।
अब हमारा घर एक पूरी तरह से रंडी खाना बन चुका था जहाँ अमीरों के बेटों को सेक्स की शिक्षा दी जाती थी।
सिमरन अब और भी खूबसूरत लगती थी और उसके दूध और भी बड़े हो गए थे।
हम तीनों एक खुशहाल परिवार थे और इस नई ज़िंदगी से बहुत खुश थे।
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