spa therapist ki chudai kahani
समुद्र तट पर एक रात, एक फ़ोटोग्राफ़र और एक स्पा थेरेपिस्ट के बीच जो हुआ, वो सिर्फ़ शारीरिक मिलन नहीं था, बल्कि दो अकेली आत्माओं का मिलन था। जानिए कैसे एक बारिश की शाम ने दो ज़िंदगियों को हमेशा के लिए बदल दिया, और क्यों बबीता ने नरेन्द्र के साथ चले जाने का फ़ैसला किया। यह कहानी प्यार, वासना और नई शुरुआत की है।
गोवा के एक शानदार बीच रिज़ॉर्ट में शाम ढल रही थी। नरेन्द्र, जो एक प्रसिद्ध फ़ैशन फ़ोटोग्राफ़र था, वहाँ एक मैगज़ीन के लिए फ़ोटोशूट करने आया था।
उसकी उम्र तीस साल थी, हाइट पाँच फुट दस इंच, और रंग गेहरा गेहरा।
उसके बाल हल्की लहरदार थे और आँखों में वो चमक जो किसी भी औरत को एक नज़र में अपना दीवाना बना दे।
बबीता उसी रिज़ॉर्ट में स्पा थेरेपिस्ट के तौर पर काम करती थी।
उम्र अठाईस साल, हाइट पाँच फुट चार इंच, रंग दूध जैसा सफ़ेद।
उसके बाल कमर तक लंबे थे, और उसकी शक्ल इतनी खूबसूरत कि रिज़ॉर्ट के हर मेहमान की नज़र उस पर ठहर जाती।
उसके स्तन ३४ (सी) के गोल-गोल, कमर पतली २८ इंच की, और कूल्हे ३६ इंच के भरे-पूरे थे।
वो एक विधवा थी, पति की मौत को तीन साल हो चुके थे, और अब वो अपनी ज़िंदगी में नया अर्थ ढूँढ रही थी।
नरेन्द्र और बबीता की पहली मुलाकात रिज़ॉर्ट के लॉबी में हुई। नरेन्द्र अपने कैमरे के साथ आया था और बबीता वहाँ किसी मेहमान का इंतज़ार कर रही थी।
उनकी आँखें मिलीं और दोनों ने एक-दूसरे को देखा। नरेन्द्र को लगा जैसे किसी ने उसके सीने में करंट दौड़ा दिया हो।
बबीता भी उसे देखती रही, उसके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान थी जो उसके होंठों को और भी रसीला बना रही थी।
अगले कुछ दिनों में वो अक्सर एक-दूसरे से मिलते। कभी नाश्ते के वक़्त, कभी शाम की सैर में।
नरेन्द्र को बबीता की मौजूदगी में एक अजीब सा सुकून मिलता।
वो उससे बात करते हुए उसकी आँखों में खो जाता, और बबीता भी उसकी बातों में खो जाती।
वो फ़ोटोग्राफ़ी के बारे में बताता, वो अपने स्पा के काम के बारे में। धीरे-धीरे उनकी बातें व्यक्तिगत होने लगीं।
एक शाम, बारिश हो रही थी। नरेन्द्र बालकनी में बैठा समुद्र देख रहा था। बबीता वहाँ आई, उसने कहा, “यहाँ अकेले बैठे हो?”
“तुम्हारे सिवा यहाँ कोई नहीं है जिससे बात करूँ,” नरेन्द्र ने कहा।
बबीता ने मुस्कुराते हुए उसके पास की कुर्सी पर बैठने की इजाज़त माँगी। वो बैठ गई।
बारिश की फुहारें उन पर आ रही थीं। नरेन्द्र ने उसका हाथ पकड़ लिया।
बबीता ने विरोध नहीं किया, बल्कि उसका हाथ और मज़बूती से पकड़ लिया। उनकी उँगलियाँ एक-दूसरे में गुँथी हुई थीं।
“मैं तुमसे कुछ कहना चाहता हूँ,” नरेन्द्र ने धीरे से कहा।
“कहो,” बबीता ने आँखें झुकाते हुए कहा।
“तुम्हें देखते ही मेरा दिल कुछ अजीब सा हो जाता है। मैं सोचता हूँ कि तुम्हें छू लूँ, तुम्हें अपनी बाहों में भर लूँ।”
बबीता ने सिर उठाया। उसकी आँखों में आँसू थे, पर वो खुशी के थे। “मैं भी यही महसूस करती हूँ। तीन साल बाद किसी ने मुझे इतना ख़ास महसूस कराया है।”
नरेन्द्र ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया और धीरे से उसके माथे पर चूमा।
फिर उसकी आँखों पर, फिर गालों पर। बबीता साँसें तेज़ करने लगी।
नरेन्द्र ने उसके होंठों को छुआ, और फिर धीरे-धीरे उन्हें चूमने लगा।
वो पहले धीरे-धीरे चूमता रहा, फिर होंठों को काटने लगा। बबीता भी पूरा साथ दे रही थी, उसने अपने हाथ उसके बालों में फेर दिए।
वो लगभग बीस मिनट तक एक-दूसरे के होंठ चूसते रहे।
नरेन्द्र का हाथ बबीता की पीठ पर था, फिर धीरे से उसकी कमर पर आ गया। बबीता ने कसकर उसे पकड़ लिया।
नरेन्द्र ने उसे उठाया और अपने कमरे में ले गया। कमरे में जाते ही उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और बबीता को दीवार से सटा दिया।
“आज मैं तुम्हें अपना बना लूँ?” नरेन्द्र ने पूछा।
“हाँ, बना लो। पूरी तरह से,” बबीता ने कहा, उसकी आवाज़ काँप रही थी।
नरेन्द्र ने उसके कपड़ों को उतारना शुरू किया। पहले उसका कुर्ता, फिर सलवार।
बबीता ने भी उसकी शर्ट और ट्राउज़र उतार दी। अब बबीता सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थी, और नरेन्द्र अंडरवियर में।
उसका लंड तनकर खड़ा हो गया था, जो अंडरवियर से बाहर निकलने को बेकरार था।
नरेन्द्र ने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर आ गया। उसने बबीता के गले पर, कंधों पर, हाथों पर चूमना शुरू किया।
फिर वो उसके स्तनों पर आया। उसने ब्रा को धीरे से हटाया। बबीता के गोल-गोल स्तन बाहर आ गए, जिनके सिरे गुलाबी और कड़े हो चुके थे।
नरेन्द्र ने एक स्तन को मुँह में लिया और चूसने लगा। वो उसे काटता, चाटता, और फिर चूसता।
बबीता की साँसें तेज़ हो गईं, वो “आह… हाँ… और ज़ोर से…” कहने लगी। नरेन्द्र ने दूसरे स्तन को हाथ से मसलना शुरू किया, उसके निप्पल को उँगलियों से कुचलता रहा।
फिर वो नीचे बढ़ा। बबीता की पैंटी उतारी। उसकी चूत पूरी तरह से चिकनी थी, क्योंकि वो हमेशा वैक्स करवाती थी। नरेन्द्र ने उसकी जाँघों पर चूमना शुरू किया, फिर धीरे से उसकी चूत पर जीभ लगाई।
“ओह माँ… यह क्या कर रहे हो…” बबीता चीखी।
नरेन्द्र ने उसकी चूत को चाटना शुरू कर दिया। वो उसकी चूत की दरार में जीभ घुसा रहा था, कभी ऊपर, कभी नीचे।
बबीता पागल हो रही थी, उसने बिस्तर की चादर को कसकर पकड़ लिया। नरेन्द्र ने अपनी दो उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं और अंदर-बाहर करने लगा।
“आह… हाँ… और तेज़… मैं झड़ने वाली हूँ…” बबीता कराही।
कुछ ही देर में बबीता झड़ गई, उसकी चूत से रस बाहर निकल आया जिसे नरेन्द्र ने चाट लिया।
अब बबीता की बारी थी। उसने नरेन्द्र को लिटाया और उसका अंडरवियर उतार दिया।
उसका लंड लगभग सात इंच लंबा और काफ़ी मोटा था। बबीता ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगी। फिर उसने उसे अपने मुँह में ले लिया।
वो उसके लंड को चूसने लगी, कभी ऊपर, कभी नीचे। नरेन्द्र के मुँह से “आह… बबीता… तुम बहुत अच्छा कर रही हो…” निकलने लगा। बबीता ने उसके अंडकोशों को भी चूमा और फिर वापस लंड पर आ गई।
लगभग पंद्रह मिनट तक मुँह चुदाई के बाद नरेन्द्र ने कहा, “अब मैं तुम्हें चोदना चाहता हूँ।”
बबीता ने कहा, “हाँ, लेकिन धीरे से शुरू करना। मुझे डर लग रहा है, यह काफ़ी बड़ा है।”
नरेन्द्र ने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके पैरों को फैलाया।
उसने अपने लंड का सुपड़ा उसकी चूत के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का दिया। सुपड़ा अंदर चला गया, लेकिन बबीता दर्द से चीख उठी।
“दर्द हो रहा है?” नरेन्द्र ने पूछा।
“थोड़ा… लेकिन चोदो… मुझे सहना है,” बबीता ने कहा।
नरेन्द्र ने उसके होंठ चूमे और एक ज़ोरदार धक्का दिया। आधा लंड अंदर घुस गया।
बबीता की आँखों से आँसू निकल आए, लेकिन वो खुश थी। नरेन्द्र थोड़ी देर वहीं रुका, फिर धीरे-धीरे अंदर-बाहर करने लगा।
कुछ देर बाद बबीता को मज़ा आने लगा। वो भी अपनी कमर उठा-उठा कर साथ देने लगी। “और ज़ोर से… हाँ… ऐसे ही… चोदो मुझे…” वो चिल्लाने लगी।
नरेन्द्र ने उसके पैरों को अपने कंधों पर रखा और ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने लगा।
पूरा कमरा “पच पच” की आवाज़ों से गूँज उठा। बबीता के स्तन उछल-उछल कर नाच रहे थे, नरेन्द्र ने उन्हें बीच-बीच में मसलना और काटना जारी रखा।
“मैं झड़ने वाला हूँ…” नरेन्द्र ने कहा।
“अंदर ही डाल दो… आज मेरा सेफ़ दिन है…” बबीता ने कहा।
नरेन्द्र ने कुछ और ज़ोरदार धक्के लगाए और फिर अपना सारा वीर्य उसकी चूत में ही छोड़ दिया।
वो थक कर उसके ऊपर गिर पड़ा। दोनों की साँसें तेज़ चल रही थीं।
थोड़ी देर बाद नरेन्द्र ने उसे कहा, “अब एक बार और?”
बबीता ने मुस्कुराते हुए कहा, “मेरा मन भी नहीं भरा है।”
इस बार बबीता ने कुत्ते की पोज़िशन बनाई। वो घुटनों और हाथों के बल बिस्तर पर आ गई, उसका गोल-गोल कूल्हा हवा में था।
नरेन्द्र ने उसके कूल्हों को सहलाया और फिर उसकी चूत पर अपना लंड रखकर एक ही धक्के में पूरा अंदर घुसा दिया।
“आह… माँ… यह तो पहले से भी गहरा जा रहा है…” बबीता चीखी।
नरेन्द्र ने उसके बाल पकड़े और पीछे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए।
बबीता के मुँह से “आह… हाँ… चोदो… और तेज़… मेरी चूत फाड़ दो…” की आवाज़ें निकल रही थीं।
नरेन्द्र ने उसकी पीठ पर चूमे, फिर उसके कूल्हों को सहलाते हुए चोदना जारी रखा।
वो एक हाथ से उसके स्तनों को भी मसल रहा था। बबीता पूरी तरह से पागल हो चुकी थी, वो बस “हाँ… हाँ… और ज़ोर से…” कहती जा रही थी।
लगभग बीस मिनट तक इस पोज़िशन में चुदाई के बाद, नरेन्द्र ने उसे लिटाया और मिशनरी पोज़िशन में फिर से चोदना शुरू कर दिया।
इस बार वो और भी तेज़ था। बबीता ने अपने पैरों को उसकी कमर के चारों ओर लपेट लिया, जिससे उसका लंड और भी गहरा जा रहा था।
“मैं फिर से झड़ने वाली हूँ… साथ में… आह…” बबीता चिल्लाई।
“मैं भी…” नरेन्द्र ने कहा।
दोनों एक साथ झड़ गए। नरेन्द्र ने अपना वीर्य उसकी चूत में भर दिया, और बबीता भी काँपती हुई झड़ गई।
वो दोनों एक-दूसरे की बाहों में बंधे हुए पड़े रहे, पसीने से लथपथ, साँसें तेज़।
रात भर उन्होंने तीन बार और चुदाई की, हर बार नई पोज़िशन में।
कभी बबीता ऊपर बैठकर कूदती, कभी वो दोनों एक-दूसरे के मुँह में आकर एक साथ चोदते। सुबह होने तक वो दोनों पूरी तरह से थक चुके थे, लेकिन उनकी आँखों में एक-दूसरे के लिए प्यार और वासना दोनों थे।
अगली सुबह जब नरेन्द्र जाने लगा, तो बबीता ने उसे एक खत दिया।
उसमें लिखा था, “तुमने मेरी ज़िंदगी में वो रंग भरे जो मैं भूल चुकी थी। मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।”
नरेन्द्र ने उसे अपनी बाहों में भर लिया और कहा, “मैं भी तुम्हारे बिना नहीं रह सकता। आओ, मेरे साथ चलो।”
बबीता ने मुस्कुराते हुए हाँ कर दी।
उनकी यह रात सिर्फ़ शुरुआत थी एक नए सफ़र की, जहाँ वासना और प्यार दोनों एक-दूसरे में घुल-मिलकर एक नई कहानी लिखने वाले थे।
- पापा के सामने माँ के साथ गैंग-बैंग चुदाई
- चाची को ब्लैकमेल करके चोदा
- मामा को माँ को चोदते हुए देखा फिर मैं भी
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Very 🙂 👍👍👍