chachi ki chudai ki hot story
रोहन अपनी चाची अंजली के प्रति यौन आकर्षण रखता है और छत पर एक रात उनके साथ शारीरिक संबंध बनाता है।
यह एक असली कहानी है मेरी चाची के साथ मेरे पहले अनुभव की। मेरा नाम रोहन है और मैं 22 साल का हूँ।
मैं कुछ दिनों से अपनी चाची के ही चक्कर में रहता था।
मैं यह जानना चाहता था कि कब वह घर में से निकलें और मैं उन्हें देखूँ।
और जब वह बाहर पेशाब करने जातीं, तो मैं चोरी से देखता था।
कई बार तो मैंने उन्हें पेशाब करते देखा था।
मैं उनकी गोरी-गोरी गांड देखता, और गांड देखकर मूठ मारता। ऐसे ही चल रही थी मेरी जिंदगी।
कई बार तो मैंने अपने मोबाइल से उनकी गांड की फोटो खींची थी, जब वह पेशाब करने जातीं।
फिर उनकी गांड देखकर रात में मूठ मारता और मन ही मन यह सोचता कि काश यह गांड मारने को मिल जाए तो क्या मजा आएगा।
उनकी गांड एकदम शीशे जैसी चमक जाती जब मैं उन्हें पेशाब करते देखता चोरी से।
मेरी चाची का नाम अंजली है और वह 35 साल की हैं। उनका बदन बेहद गोरा है और उनके स्तन बड़े-बड़े हैं।
फिर एक दिन तो ऐसा लगा चाची ने मुझे देख लिया। लेकिन उन्होंने नहीं देखा था मुझे।
वह जब नहा के आती थीं तो उनकी पैंटी वहीं मोरी में टांग देती थीं।
और कभी-कभी तो पैंटी बिना धोए ऐसे ही बाल्टी में साड़ी के साथ रख देती थीं।
मैं मौका देखकर चोरी से जाके उनकी पैंटी अपने लंड पे रखकर मूठ मारता था।
जब वह पैंटी उतारके रख के जाती थीं, तो मैं देखता उनकी पैंटी में सफेद-सफेद चूत का रस लगा रहता था।
मैं तो उसे चाट लेता था। फिर पैंटी को लंड में फंसाके मूठ मारता था। फिर मैं उनकी पैंटी वहीं बाल्टी में रखके चला जाता था।
उन्हें यह सब पता भी नहीं चलता था। कभी-कभी उनके नहाने से पहले ही उनकी पैंटी में मूठ मार देता था।
फिर उनकी पैंटी जहां रहती वहीं रख देता। उनकी काले रंग की पैंटी में बहुत हिलाया हूँ अपना लंड।
मैं अपनी चाची का बदन बता देता हूँ। उनका शरीर बहुत गोरा है।
उनकी चूची बड़ी-बड़ी हैं। कोई भी उनकी चूची देखके गरम हो जाए।
उनकी चूची का साइज 36″ होगा मेरे खयाल से, और उनकी मोटी-मोटी गांड क्या कयामत लगती है।
मेरी चाची के 2 बच्चे हैं। कोई उन्हें देखके नहीं बता सकता वह 2 बच्चों की माँ है।
उनका चेहरा बिल्कुल गोरा है। मेरा उन्हें देखके मन करता है उनके होंठों और गालों को खा जाऊं।
क्या माल लगती है मेरी चाची। उनके होंठ मोटे-मोटे हैं और गुलाबी रंग के हैं।
जब साड़ी पहनती थीं तो उनकी नाभि दिखती थी। उनकी नाभि देखके मैं कितनी बार हिला देता था।
नाभि एकदम गहरी खाई की तरह लगती है। उनकी नाभि में ही चाहे कोई शराब डालके पी ले, इतनी गहरी है नाभि।
गोरा-गोरा बदन देखके तो किसी का भी लंड खड़ा हो जाए। उनके बाल लंबे और काले हैं जो उनकी कमर तक आते हैं।
उनकी आंखें बड़ी-बड़ी और काली हैं जो किसी को भी अपनी ओर आकर्षित कर लें।
उनकी गांड की तो बात मत करो। ऐसी गदराई गांड को देख तो लंड हिल जाए किसी का भी।
उनकी गांड इतनी मोटी है कि साड़ी में भी उसका आकार साफ दिखाई देता है।
जब वह चलती हैं तो उनकी गांड इतनी हिलती है कि मन करता है पीछे से जाकर पकड़ लूं।
यह तो हो गई उनकी बात। अब शुरू करते हैं कैसे मैंने उन्हें पेला।
वैसे तो मैं अपनी चाची को बहुत दिन से चोदना चाहता था। उन्हें याद करके कई बार मैंने हिलाया था।
उन्हें नहाते वक्त, साड़ी बदलते वक्त, देख-देखके मेरा लंड खड़ा ही हो जाता था। फिर एक दिन—
जब रोज शाम होती तो वह छत पर चली जाती थीं। वहीं छत पर लेट जाती थीं चटाई बिछाके।
मैं भी जाता था छत पर अपनी खाट पर लेटने के लिए। चाची लेटी थीं चटाई पे, और फोन पे बात कर रही थीं।
उस दिन मेरी खाट नहीं थी छत पे। मैंने देखा चाची लेटी थीं, और बात कर रही थीं।
मैं भी गया छत पर चटाई पे बैठ गया, और वह बात करने में मस्त थीं। छत पर बिल्कुल अंधेरा था।
उन्हें पता चला मैं आके बैठा था उनकी चटाई पे।
मैं अपना फोन चला रहा था, और मैं धीरे-धीरे सरकते-सरकते उनके पास चला गया और उनका शरीर मेरी बॉडी से छूने लगा।
वह बात कर रही थीं फोन पे, और मैं धीरे-धीरे उन्हें छूने लगा।
उन्हें शायद पता चल गया होगा मैं उन्हें छूने लगा था, लेकिन उन्होंने कुछ बोला नहीं।
वह फोन पे बात करती रही थीं, और मैं उनके पैर की तरफ चला गया।
फिर मैंने पहले पैर को छुआ और वहीं अपना हाथ रखे रखा पैर पे।
जब उनकी तरफ से कोई हलचल नहीं हुई, तो मैं और आगे बढ़ गया और धीरे-धीरे और ऊपर चला गया।
मैं उनके पेट की तरफ चला गया, और फिर उनकी कमर पे धीरे से हाथ रखा।
जब मैंने देखा वह कुछ नहीं बोल रही थीं, फिर मेरा मन और करने लगा कि और आगे बढ़ूं।
फिर धीरे-धीरे मेरा हाथ उनकी कमर पे चला गया।
उसके बाद मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी गांड पे रख दिया।
पहले तो रखा रहा हाथ उनकी गांड पे कुछ टाइम। जब वह कुछ नहीं बोलीं, तो मैं धीरे-धीरे गांड पे हाथ फेरने लगा।
जब मैंने देखा वह कुछ नहीं बोल रही थीं, तो मैं अपना हाथ उनकी गांड पे चलाने लगा।
मुझे लग रहा था, वह अब गरम होने लगी थीं।
शायद फोन पे किसी से बात नहीं कर रही थीं, बस ऐसे ही दिखा रही थीं मुझे कि बात कर रही थीं फोन पे।
जब वह कुछ नहीं बोलीं तो मैं उनकी साड़ी खींचने लगा, और उनकी साड़ी खींचके ऊपर कर दी।
मैंने देखा उन्होंने पैंटी भी नहीं पहनी थी।
उनकी गांड क्या मस्त थी यार, मेरा तो दिमाग खराब हो गया। मन कर रहा था अभी उनकी गांड में अपना लंड डाल दूं।
लेकिन ऐसे तुरंत नहीं करना था। फिर मैं गांड को सहलाता रहा।
उनकी गांड बहुत बड़ी थी यार। मेरा मन कर रहा था जीभ लगाके चाट लूं।
फिर मैं धीरे से अपना हाथ उनकी बुर की तरफ ले गया।
जैसे ही मेरा हाथ उनकी बुर पे गया, तो वह थोड़ी हिल गईं। फिर मैंने उनकी बुर पे अपना हाथ लगा ही दिया।
मुझे पता चला कि उनकी बुर गीली हो गई थी। फिर मैंने उनकी बुर में एक उंगली डाल दी अपनी।
जैसे ही मेरी उंगली गई, वह चिहुक गईं। उनके मुंह से आह निकल गई।
फिर मैं समझ गया आज मेरा काम बन गया था, अब और आगे काम किया जाए।
मैं अपनी उंगली बुर में डालके आगे-पीछे करने लगा। फिर मैं दो उंगलियां डालने की कोशिश की वैसे ही।
उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया, फिर छोड़ भी दिया। मुझे लगा दो उंगली डालने से उन्हें दर्द हो रहा था।
फिर मैं एक ही डालके आगे-पीछे करने लगा, और वह धीरे-धीरे से आह-आह कर रही थीं।
अब मेरे से रहा नहीं गया। मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया था।
चाची एकदम गरम हो गई थीं। उनके मुंह से आह-आह की आवाज निकलने लगी।
मैं अब उनके ऊपर की ओर चला गया। फिर मैंने उनके होंठों पे अपने होंठ लगा दिए।
अब वह बिल्कुल गरम हो गई थीं। मैंने अपने हाथों से उनकी ब्रा खोल दी।
उनकी बड़ी-बड़ी चूची मेरे हाथों में नहीं आ रही थीं। मैंने उन्हें पूरी नंगी कर दिया।
अब वह बिना कपड़ों के हो गई थीं। मैं तो बस हाफ पैंट में था। मेरा लंड कड़क हो गया था लोहे की तरह।
मैंने चाची का हाथ पकड़के अपने लंड पे रख दिया।
जैसे ही उनका हाथ मेरे लंड पे लगा, उन्होंने अपना हाथ हटा लिया। फिर वह धीरे से बोलीं:
“बाप रे, इतना बड़ा है तुम्हारा लंड?”
मैं बोला:
“क्या हुआ चाची?”
वह बोलीं:
“तुम्हारा बहुत बड़ा है। मुझे नहीं करवाना।”
यह सुनकर मैं बोला:
“कुछ नहीं होगा चाची।”
चाची कुछ टाइम मनाने के बाद तैयार हुईं। उन्हें मैंने अब गरम करना शुरू किया।
छत पर बिल्कुल अंधेरा था, और सब घरवाले नीचे घर पे टीवी देखने में मस्त थे, और मैं चाची छत पे लगे थे।
फिर मैंने अचानक से चाची की बुर पे अपना मुंह रख दिया।
जैसे ही मेरा मुंह उनकी बुर पे लगा, चाची चिहुक गईं। वह बोलीं:
“क्या कर रहे हो? यह मत करो।”
लेकिन मैं नहीं माना, और बुर पे अपनी जीभ चलाने लगा।
जैसे ही मेरी जीभ उनकी बुर में गई, वैसे ही वह आह-आह करने लगीं और मेरा सिर पकड़के अपनी बुर पे दबाने लगीं।
लगभग 5 मिनट के बाद चाची की बुर पानी छोड़ दिया। जैसे ही वह पानी छोड़ने लगीं, वह चिल्लाने लगीं:
“आह आह, ऐसा मत करो।”
लेकिन मैं नहीं माना, और अपना काम जारी रखा। मैं उनकी बुर का सब पानी चाट गया। अब चाची को मैंने बोला:
“मेरे लंड पे किस करो।”
पहले तो उन्होंने मुझे मना किया। लेकिन फिर मेरे बार-बार बोलने पे वह तैयार हो गईं।
जब किस कर रही थीं तब उनका मुंह खुला। तो मैंने अचानक से अपना लंड उनके मुंह में डाल दिया।
चाची डर गईं कि इतना बड़ा लंड चला गया उनके गले तक।
वह मुझे धक्का देने लगीं, लेकिन मैंने उनका सिर पकड़के दबाए रखा।
उनकी आंखों में पानी आ गया। अब वह मना करने लगीं:
“अब कुछ मत करो।”
फिर मैंने सोचा ज्यादा हो गया तो मेरा काम बिगड़ जाएगा।
और फिर से मैंने साड़ी उठाके बुर पे मुंह लगा दिया। अब मैं जल्दी-जल्दी जीभ चलाने लगा।
धीरे-धीरे वह फिर गरम हो गईं। चाची जब ज्यादा गरम हो गईं तो बोलने लगीं:
“डाल दो अपना लंड मेरी बुर में।”
मैं बोला:
“इतना बड़ा मेरा लंड है, सह लोगी कि नहीं?”
वह बोलीं:
“डालो, जो होगा देखा जाएगा। अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है।”
फिर मैंने भी लंड को बुर पे सेट किया। तभी वह बोलीं:
“धीरे से डालना।”
मैं कुछ नहीं बोला, और मैंने सीधा जोर से पेल दिया। मेरा आधा लंड अंदर गया, और वह जोर से चिल्लाईं:
“मर गई मैं, निकालो लंड अपना। बहुत बड़ा है लंड तुम्हारा।”
मैं बोला:
“अभी तो बस आधा ही गया है।”
वह रोने लगीं और बोलीं:
“मैं मर जाऊंगी, छोड़ दो मुझे नहीं करवाना।”
लेकिन मैं अब नहीं मानने वाला था।
फिर मैं थोड़ा रुका, और उनकी चूची दबाने लगा, और किस करने लगा।
चूची को मुंह में लेके पीने लगा। उनकी बड़ी-बड़ी चूची लाल हो गईं।
इससे थोड़ा उन्हें आराम मिला।
जब मैंने देखा वह अब आहें भर रही थीं, और उन्हें अब अच्छा लग रहा था, फिर मैंने अपना लंड थोड़ा पीछे लिया, और पूरी ताकत के साथ पेल दिया। चाची की तो हालत खराब हो गई।
वह कुछ बोल नहीं पा रही थीं। आंखें ऊपर चढ़ गईं उनकी।
बेहोशी जैसी हालत हो गई थी। मैं रुका नहीं, और जोर-जोर से पेलता रहा।
फिर अचानक से चाची रोने लगीं। वह रो रही थीं, और मैं पेलता रहा।
कुछ टाइम के बाद वह शांत हुईं। जब मेरा लंड थोड़ा बुर के अंदर जगह बना लिया, तब उन्हें थोड़ा मजा आने लगा।
तब वह आह-आह करने लगीं। मैंने देखा बुर से खून आ गया। लेकिन मैंने उन्हें बताया नहीं। मैं बस उन्हें पेलता रहा।
15 मिनट में चाची की बुर जवाब दे दी। चाची झड़ गईं, और उनकी बुर से पानी बहने लगा। चाची बोलीं:
“बस करो, अब मत करो।”
लेकिन मैं कहां रुकने वाला था। मेरा अभी नहीं निकला था पानी।
तो मैं पेलता रहा। अब मेरा निकलने वाला था। चाची बोलीं:
“बाहर निकालना अपना पानी।”
लेकिन मैं पेलते-पेलते रुका ही नहीं, और सब वीर्य उनकी बुर में निकाल दिया। चाची बोलीं:
“नहीं-नहीं”
लेकिन मैं उनकी बुर में ही झड़ गया।
मैं उनके ऊपर लेट गया। मेरा लंड सिकुड़ गया था। फिर चाची मुझे धक्का देकर साइड किया।
उनकी बुर को देखा तो एकदम हालत खराब हो गई थी। बुर का भोंडा बन गया था।
चाची खड़ी नहीं हो पा रही थीं बराबर। मैंने पकड़के खड़ा किया उन्हें।
वह जब चलने लगीं तो चल भी नहीं पा रही थीं। मैंने उन्हें खाट पे पकड़के बैठाया।
थोड़ा टाइम वह बैठीं, तब थोड़ा चलने लायक हुईं।
वह सीढ़ी से उतर रही थीं तो उन्हें दर्द हो रहा था।
उन्हें पीछे से देखा तो उनकी गांड मारने का मन करने लगा। चाची ने बताया था उनकी गांड में आज तक लंड नहीं गया था।
मैंने सोचा अपने मन में, बुर चोदने में इतना दर्द से चिल्ला रही थीं, गांड मार लिया तो क्या हाल होगा चाची का?
यही सब मैं सोच रहा था खाट पे बैठके, और चाची नीचे चली गईं खाना खाने।
फिर उनकी मैंने गांड मारी नीचे घर में, वह कहानी इसके आगे लिखूंगा दोस्तों।
कैसी लगी यह मेरी असली कहानी कमेंट करके जरूर बताना।
मिलते हैं दूसरी कहानी में, असली और मजेदार कहानी में, नमस्कार।
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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Nice story 🙂🙂💜