hindi xxx sex kahani
40 साल की प्रिया, जिसके पति विदेश में रहते हैं, एक भूखे युवक समीर को मदद के बदले अपनी शारीरिक भूख मिटाने का मौका देती है।
मित्रों, मेरा नाम प्रिया है। मैं 40 साल की एक शादीशुदा महिला हूं।
मेरी शादी को 7 साल हो गए हैं और मेरे एक बेटा है जो अभी 5 साल का है और बोर्डिंग स्कूल में पढ़ता है।
मेरे पति विक्रम लंदन में एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में सीनियर मैनेजर के पद पर काम करते हैं।
उनकी नौकरी की मजबूरी के चलते वह साल में सिर्फ एक बार ही भारत आ पाते हैं और वह भी केवल 10-15 दिन के लिए।
शादी के पहले दो साल तो मैंने लंदन में ही रहा, लेकिन बेटे के स्कूल की पढ़ाई और ससुराल के बुजुर्गों की देखभाल के कारण मुझे भारत में ही रहना पड़ा।
अब मैं अकेले अपने बड़े से बंगले में रहती हूं, जो दिल्ली के एक पॉश इलाके में है।
मेरे सास-ससुर पिछले साल ही गुजर गए हैं, इसलिए अब मैं पूरी तरह अकेली हूं।
मैं दिखने में ठीक-ठाक हूं। मेरा रंग गोरा है, जिस्म भी एकदम सुडौल है। मेरे स्तन 38 इंच के हैं और मेरी गांड बेहद मोटी और गोल है।
मैंने हेयर रिमूवल ट्रीटमेंट करवा रखा है इसलिए मेरी बॉडी पर बाल ना के बराबर हैं।
मेरी चूत भी एकदम साफ रहती है और वह गुलाबी रंग की है। मेरी चूचियों का रंग मक्खन जैसा है और निप्पल हल्के भूरे रंग के हैं।
मुझे टाइट साड़ी पहनना पसंद है और उसके अंदर टाइट पैंटी और ब्रा।
मेरे पति का लंड 5 इंच का है जो मेरे लिए काफी है, लेकिन उनके ना होने के कारण मेरी शारीरिक भूख बढ़ती ही जा रही है।
मैं अपने दोस्तों के साथ अक्सर मजाक-मस्ती करती हूं और अपनी इच्छाओं के बारे में खुलकर बात करती हूं, लेकिन असल जिंदगी में मैं बहुत संयमित हूं।
मेरे पति जब भी आते हैं, वह मुझे पूरा प्यार देते हैं और रात-रात भर मेरी चूत और गांड की जमकर चुदाई करते हैं।
लेकिन जब वे नहीं होते, तो मैं एक प्यासी औरत बनकर रह जाती हूं जिसकी कोई देखभाल नहीं करता।
मेरे घर के आसपास कई लड़के मुझे घूरते हैं। कुछ तो बहुत ही बेशर्म होकर मेरी गांड और स्तनों को घूरते हैं।
लेकिन मैं उन्हें कोई भाव नहीं देती क्योंकि वह सब मेरी कॉलोनी के ही रहने वाले हैं और मैं अपनी इज्जत बचाना चाहती हूं।
यह बात दो महीने पहले की है। मैं एक दिन अपने बैंक के काम से बाहर निकली थी।
मुझे कुछ जरूरी कागजात जमा करने थे। दोपहर का समय था और गर्मी बेहद तेज थी।
मैंने सोचा कि पहले कुछ खा लेती हूं फिर घर जाऊंगी।
मैं एक रेस्टोरेंट में गई और वहां लंच किया। खाना खत्म करके जब मैं बाहर निकली तो मुझे अचानक पेशाब लगी।
आसपास कोई शौचालय नहीं था। मैंने देखा कि पास में एक पुरानी इमारत है जो कि तोड़ने के लिए चिह्नित की गई थी।
वहां आसपास कोई नहीं था।
मैं उस इमारत में घुस गई। अंदर अंधेरा था और धूल मिट्टी से भरा हुआ था।
मैंने एक कोने में जाकर अपनी साड़ी उठाई और पेशाब करने लगी।
पेशाब करते समय मुझे अजीब सी आवाज सुनाई दी। मैंने देखा कि एक कोने में कुछ हिल रहा है।
मैं डर गई और जल्दी से खड़ी हो गई। मैंने उस तरफ देखा तो एक लड़का वहां लेटा हुआ था।
वह बेहद कमजोर और गंदा लग रहा था। उसके कपड़े फटे हुए थे और उसकी हालत बेहद खराब थी।
मैं उसके पास गई। वह एक युवा लड़का था, लगभग 20-22 साल का।
उसका चेहरा गोरा था लेकिन धूल मिट्टी से सना हुआ था।
उसके फटे हुए कपड़ों से उसका शरीर दिखाई दे रहा था।
मेरी नजर उसके नीचे के हिस्से पर गई जहां से उसका लंड झांक रहा था।
मैं हैरान रह गई। उसका लंड लुंज-पुंज हालत में भी बेहद बड़ा दिख रहा था।
मैंने सोचा कि अगर यह तन जाए तो कितना बड़ा होगा। उसका लंड गोरा था और मोटा भी काफी था।
मेरे अंदर की औरत जाग गई और मेरी चूत में एक अजीब सी खुजली होने लगी।
मैंने उस लड़के को जगाने की कोशिश की। उसने धीरे से आंखें खोलीं। उसकी आंखें बेहद खूबसूरत थीं और नीले रंग की थीं।
“कौन हो तुम?” मैंने पूछा।
वह कुछ बोलने की कोशिश की लेकिन उसकी आवाज नहीं निकली।
उसने अपने सूखे होंठों पर जीभ फिराई। मुझे समझ आ गया कि यह बेहद भूखा और प्यासा है।
मैंने अपने बैग में से पानी की बोतल निकाली और उसके मुंह में डाली।
उसने पानी पीना शुरू किया। फिर मैंने अपने लंच में से बची हुई एक रोटी और सब्जी निकाली और उसे खिलाई।
खाना खाने के बाद उसमें थोड़ी ताकत आई और वह बोल सका।
उसने बताया कि उसका नाम समीर है और वह यूपी का रहने वाला है।
वह दिल्ली काम की तलाश में आया था लेकिन उसे कोई काम नहीं मिला और वह दो दिनों से भूखा था।
मैं उसकी बात सुन रही थी लेकिन मेरी नजरें उसके लंड पर ही टिकी हुई थीं।
उसके फटे हुए पैंट से उसका लंड आधा बाहर निकला हुआ था और वह देखने में बेहद आकर्षक लग रहा था।
“समीर, तुम्हारी हालत बहुत खराब है। मैं तुम्हारी मदद कर सकती हूं,” मैंने कहा।
“मैडम, प्लीज मेरी मदद करो। मैं बहुत परेशान हूं,” उसने कहा।
मैंने सोचा कि यह सही मौका है।
मैं इससे अपनी शारीरिक भूख मिटा सकती हूं और इसकी भी मदद हो जाएगी।
“समीर, मैं तुम्हें खाना दे सकती हूं, पैसे दे सकती हूं, लेकिन उसके बदले में तुम्हें मेरी एक शर्त माननी होगी,” मैंने कहा।
“क्या शर्त मैडम?” उसने पूछा।
“तुम्हें मुझे खुश करना होगा। मैं जो कहूं वो करना होगा,” मैंने कहा।
वह समझ नहीं पाया लेकिन उसे भूख लगी थी इसलिए उसने हां कर दी।
मैंने आसपास देखा। कोई नहीं था। इमारत पूरी तरह सुनसान थी।
मैंने एक कमरे में जहां थोड़ी रोशनी आ रही थी वहां जाने का फैसला किया।
मैंने समीर को उस कमरे में ले गई। वहां एक पुराना सोफा पड़ा था।
मैंने उसे बैठने के लिए कहा और फिर मैंने दरवाजा बंद कर दिया।
“समीर, मैं तुम्हें सब कुछ समझाती हूं। मेरे पति विदेश में रहते हैं और मैं अकेली हूं। मुझे शारीरिक सुख की बहुत जरूरत है। अगर तुम मुझे खुश करोगे तो मैं तुम्हारी पूरी मदद करूंगी,” मैंने कहा।
वह अभी भी समझ नहीं पाया था। मैंने अपनी साड़ी उठाई और अपनी पैंटी उतार दी।
मेरी चूत साफ शेव की हुई थी और गीली हो चुकी थी।
“देखो समीर, मेरी चूत को। यह तुम्हें खाना देगी। तुम्हें इसे चाटना है, चूसना है, जब तक मैं खुश नहीं हो जाती,” मैंने कहा।
समीर की आंखें चौड़ी हो गईं। उसने कभी ऐसा नहीं सोचा था।
लेकिन वह एक जवान लड़का था और उसके अंदर भी शारीरिक उत्तेजना थी।
“मैडम, मैंने कभी ऐसा नहीं किया,” उसने शर्माते हुए कहा।
“कोई बात नहीं, मैं सिखाती हूं। आओ,” मैंने कहा और अपनी चूत उसके मुंह के पास ले आई।
मैंने उसका चेहरा पकड़ा और अपनी चूत पर रख दिया।
“अब जीभ निकालो और चाटो,” मैंने आदेश दिया।
समीर ने धीरे से अपनी जीभ निकाली और मेरी चूत पर लगाई। जैसे ही उसकी जीभ मेरी चूत को छुई, मैं सिहर उठी।
वह किसी पालतू कुत्ते की तरह मेरी चूत पर अपना मुँह लगा कर चाट रहा था.
“ओहhhhh… हां समीर, ऐसे ही चाटो,” मैंने कहा।
समीर धीरे-धीरे मेरी चूत को चाटने लगा।
उसकी जीभ मेरी चूत की दरार में घूम रही थी। मैं बेहद उत्तेजित हो चुकी थी।
“और अंदर डालो जीभ, पूरी अंदर,” मैंने कहा।
समीर ने अपनी जीभ मेरी चूत के छेद में डाल दी और अंदर-बाहर करने लगा।
मैं बेहद मजे में थी। उसकी जीभ गर्म और नरम थी।
“ओहhhhh… बहुत अच्छा लग रहा है समीर… और जोर से चाटो,” मैं कहने लगी।
समीर भी अब पूरी लगन से मेरी चूत चाट रहा था। वह मेरी क्लिटोरिस को भी चाट रहा था जिससे मुझे बेहद मजा आ रहा था।
मैंने अपने दोनों पैर फैला दिए और उसका चेहरा अपनी चूत पर दबा दिया। “पूरा मुंह लगाओ और चूसो, आह … चाट ले और खा ले … जितना खाना है खा ले,” मैंने कहा।
समीर ने अपना पूरा मुंह मेरी चूत पर लगा दिया और चूसने लगा। वह मेरी चूत को जोर-जोर से चूस रहा था और मैं आसमान में उड़ रही थी।
“ओहhhhh साले और तेज़ी से चाट … बहुत मजा आ रहा है… और जोर से समीर,” मैं चीखने लगी।
मेरे मुँह से सिसकारियां भी निकल रही थीं- ऊओ प्लीज बस कर दो … आआ ऊऊओ नहीं यार आह आह नहीं … ओह गॉड!
मेरी चूत से पानी निकलने लगा था और समीर उसे पी रहा था। उसे मेरी चूत का स्वाद बेहद पसंद आ रहा था।
“कैसा लग रहा है समीर? मेरी चूत का स्वाद कैसा है?” मैंने पूछा।
“बहुत अच्छा मैडम, मैंने कभी सोचा नहीं था कि ऐसा भी हो सकता है,” उसने कहा।
“अब मैं झड़ने वाली हूं, पूरा पी लेना मेरा रस,” मैंने कहा।
कुछ ही देर में मैं झड़ गई। मेरा पानी समीर के मुंह में भर गया और उसने सब कुछ पी लिया।
मैं थककर सोफे पर गिर पड़ी। लेकिन मेरा मन अभी भी नहीं भरा था।
मैंने देखा कि समीर का लंड पूरी तरह तनकर खड़ा हो गया था।
उसके फटे हुए पैंट से वह बाहर निकला हुआ था और वह देखने में बेहद आकर्षक लग रहा था।
“समीर, तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है,” मैंने कहा।
“मैडम, वो…” वह शर्मा गया।
“कोई बात नहीं, अब मैं इसकी देखभाल करती हूं,” मैंने कहा और उसके पास जाकर बैठ गई।
मैंने उसके फटे हुए पैंट को पूरी तरह उतार दिया। उसका लंड बाहर आ गया। वह लगभग 9 इंच लंबा और 3 इंच मोटा था।
उसका सिर काले रंग का हो चुका था और वह तनकर खड़ा था।
“वाह, क्या लंड है तुम्हारा समीर,” मैंने कहा और उसे हाथ में ले लिया।
वह गर्म और कड़ा था। मैंने उसे सहलाना शुरू कर दिया। समीर मदहोश होने लगा।
“मैडम, प्लीज…” वह कहने लगा।
“चुप रहो, मजे लो,” मैंने कहा और उसके लंड को अपने मुंह में ले लिया।
मैं उसके लंड को चूसने लगी। वह इतना बड़ा था कि मेरे मुंह में आधा ही आ पा रहा था।
मैं उसे जीभ से चाट भी रही थी और हाथ से सहला भी रही थी।
“ओहhhhh… मैडम, बहुत मजा आ रहा है,” समीर कहने लगा।
मैं लगभग 10 मिनट तक उसका लंड चूसती रही।
फिर मैं खड़ी हो गई और अपने कपड़े पूरी तरह उतार दिए। अब मैं बिल्कुल नंगी थी।
मैं भी एक जवान लौंडे के लंड से चुदने की लालसा में चुदासी होने लगी और अति जोश में आ गई.
“समीर, अब मैं तुमसे चुदवाना चाहती हूं। तुम मुझे चोदोगे?” मैंने पूछा।
“जी मैडम, लेकिन मैंने कभी किसी औरत के साथ…” वह शर्माते हुए बोला।
“कोई बात नहीं, मैं सिखाती हूं। आओ,” मैंने कहा और सोफे पर लेट गई।
मैंने अपने पैर फैला दिए। मेरी चूत फिर से गीली हो चुकी थी और उसमें से पानी निकल रहा था।
“आओ समीर, अपना लंड मेरी चूत में डालो,” मैंने कहा।
समीर मेरे पास आया और उसने अपना लंड मेरी चूत के मुहाने पर रखा।
“अब धीरे से अंदर डालो,” मैंने कहा।
समीर ने धीरे से धक्का मारा और उसके लंड का सिरा मेरी चूत में घुस गया।
“ओहhhhh… बहुत बड़ा है,” मैंने कहा।
“धीरे-धीरे लूंगा मैडम,” उसने कहा।
समीर ने धीरे-धीरे अपना पूरा लंड मेरी चूत में डाल दिया। वह मेरे गहरे तक जा चुका था।
मेरी चूत फटने लगी थी लेकिन मजा भी बेहद आ रहा था।
“अब धक्के मारो,” मैंने कहा।
समीर ने धक्के मारने शुरू किए। वह धीरे-धीरे अपना लंड अंदर-बाहर कर रहा था।
“ओहhhhh… बहुत अच्छा लग रहा है… और जोर से समीर,” मैं कहने लगी।
समीर ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। अब वह जोर-जोर से धक्के मार रहा था। पच पच पच की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं।
“क्या चूत है मैडम… इतनी टाइट,” समीर कहने लगा।
“तुम्हारा लंड भी बहुत मोटा है समीर,” मैंने कहा।
समीर ने मेरे पैर अपने कंधों पर रखे और और जोर से धक्के मारने लगा। उसका लंड मेरी चूत के सबसे अंदर तक जा रहा था।
“ओहhhhh… मैं झड़ने वाली हूं समीर,” मैंने कहा।
“मैं भी मैडम,” उसने कहा।
“अंदर ही निकाल दो, प्लीज,” मैंने कहा।
समीर ने जोर से धक्के मारे और मेरी चूत में ही अपना वीर्य निकाल दिया। वह इतना ज्यादा था कि मेरी चूत भरकर बाहर बहने लगा।
थककर हम दोनों सोफे पर गिर पड़े। मैंने समीर को अपनी बाहों में भर लिया।
“कैसा लगा समीर?” मैंने पूछा।
“बहुत अच्छा मैडम, यह मेरा पहला अनुभव था,” उसने कहा।
“मुझे भी बहुत मजा आया। अब तुम मेरे साथ रहोगे। मैं तुम्हारी पूरी देखभाल करूंगी,” मैंने कहा।
समीर खुश हो गया। मैंने उसे अपने घर ले जाने का फैसला किया। मैंने उसे नए कपड़े दिलाए और फिर उसे अपने बंगले में ले आई।
मेरे घर में एक नौकरानी भी है जो दिन में आती है और काम करके चली जाती है। मैंने समीर से कहा कि वह मेरे रिश्तेदार का बेटा है और कुछ दिनों के लिए यहीं रहेगा।
रात को जब नौकरानी चली गई, तो मैं और समीर अकेले थे। मैंने उसे अपने बेडरूम में बुलाया।
“समीर, अब हम दोनों अकेले हैं। आज रात तुम मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करोगे,” मैंने कहा।
“जी मैडम,” उसने कहा।
मैंने उस दिन एक लाल रंग की ट्रांसपेरेंट नाइटी पहनी थी जो उस पर बेहद खूबसूरत लग रही थी। अंदर मैंने कुछ नहीं पहना था।
समीर मुझे देखकर मंत्रमुग्ध हो गया। “मैडम, आप बहुत खूबसूरत हैं।”
“अब से मुझे प्रिया कहो,” मैंने कहा।
“जी प्रिया जी,” उसने कहा।
मैंने उसे अपने पास बुलाया और उसे चूमने लगी। हम दोनों एक-दूसरे को गहरे चुंबन देने लगे। फिर मैंने उसके कपड़े उतार दिए।
उसका लंड फिर से तनकर खड़ा हो गया था। मैंने उसे बेड पर लेटने के लिए कहा और फिर मैं उसके ऊपर आ गई।
“आज मैं तुम्हारे ऊपर बैठकर तुमसे चुदवाऊंगी,” मैंने कहा।
मैंने अपनी चूत उसके लंड के मुहाने पर रखा और धीरे से नीचे बैठना शुरू किया। उसका लंड मेरी चूत में घुस गया।
“ओहhhhh… बहुत बड़ा है,” मैंने कहा।
मैंने पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया और फिर ऊपर-नीचे होने लगी। मैं उसके ऊपर उछल-उछल कर उसका लंड ले रही थी।
“ओहhhhh… बहुत मजा आ रहा है समीर,” मैं कहने लगी।
“मुझे भी बहुत मजा आ रहा है प्रिया जी,” उसने कहा।
मैं लगातार उसके ऊपर उछल रही थी। मेरे स्तन उछल रहे थे और समीर उन्हें पकड़कर दबा रहा था।
“क्या स्तन हैं तुम्हारे प्रिया जी,” उसने कहा।
“तुम्हें पसंद आए?” मैंने पूछा।
“बहुत,” उसने कहा और एक स्तन का निप्पल अपने मुंह में ले लिया।
मैं उछलते हुए भी उसे अपना स्तन चूसने दे रही थी। यह बेहद अद्भुत अनुभव था।
लगभग 20 मिनट तक मैं उसके ऊपर उछलती रही। फिर मैं थक गई और उसने मुझे नीचे लेटा दिया।
“अब मेरी बारी प्रिया जी,” उसने कहा और मेरे पैर फैला दिए।
समीर ने जोर-जोर से धक्के मारने शुरू कर दिए। वह मेरी चूत में अपना लंड पूरी ताकत से डाल रहा था।
“ओहhhhh… और जोर से समीर… फाड़ दो मेरी चूत,” मैं चीखने लगी।
समीर पूरी गति से मुझे चोद रहा था। उसका लंड मेरी चूत में आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था क्योंकि वह पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
“मैं झड़ने वाला हूं प्रिया जी,” उसने कहा।
“अंदर ही निकाल दो समीर,” मैंने कहा।
उसने जोर से धक्के मारे और मेरी चूत में ही अपना वीर्य निकाल दिया।
हम दोनों थककर बेड पर गिर पड़े। मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया।
“समीर, आज से तुम मेरे हो। मैं तुम्हें अपने घर में रखूंगी और तुम मेरी देखभाल करोगे,” मैंने कहा।
“जी प्रिया जी, मैं हमेशा आपकी सेवा करूंगा,” उसने कहा।
उस रात के बाद समीर मेरे घर में ही रहने लगा। मैंने उसे एक अलग कमरा दिया लेकिन रात को वह मेरे साथ ही सोता था।
हम दोनों रोज रात को सेक्स करते। समीर मेरी चूत और गांड दोनों में अपना लंड डालता और मुझे पूरी तरह से संतुष्ट करता।
मुझे अब कभी अकेलापन नहीं महसूस होता था। समीर मेरे लिए सब कुछ था – वह मेरा प्रेमी था, मेरा दोस्त था, और मेरा साथी था।
मेरे पति जब भी आते, मैं समीर को कहीं और भेज देती और फिर अपने पति के साथ समय बिताती।
लेकिन जब वे चले जाते, तो समीर वापस आ जाता।
यह रिश्ता हम दोनों के लिए बेहद खास था। मैं उसे पैसे देती, उसे अच्छे कपड़े पहनाती, और वह मुझे शारीरिक सुख देता।
एक दिन मैंने सोचा कि क्यों ना मैं अपनी एक सहेली से भी समीर को मिलवाऊं।
मेरी सहेली राधा भी शादीशुदा थी और उसके पति भी अक्सर बाहर रहते थे।
मैंने राधा को अपने घर बुलाया और समीर से मिलवाया। राधा समीर को देखकर बेहद प्रभावित हुई।
हम तीनों ने साथ में डिनर किया और फिर मैंने राधा से पूछा कि क्या वह समीर के साथ सेक्स करना चाहेगी।
राधा ने शुरू में हिचकिचाया लेकिन फिर मान गई।
हम तीनों ने मिलकर बेहद मजे किए।
समीर ने पहले मुझे चोदा, फिर राधा को, और फिर हम दोनों को एक साथ।
यह सब चलता रहा। समीर अब मेरे लिए एक अनमोल खजाना था जो मेरी हर इच्छा को पूरा करता था।
मैं उससे बेहद प्यार करती थी और वह भी मुझसे।
और इस तरह मेरी कहानी चलती रही।
एक अकेली औरत जिसने अपनी शारीरिक भूख मिटाने के लिए एक युवा लड़के को अपनाया और दोनों ने मिलकर खुशियों की दुनिया बसाई।
- नौकरानी की कोमल बुर चोदा
- मेरी ही चूत चोदने लगा मेरा बेटा
- अमीर राधा बीस लंडों से चुदवाई
- विधवा भाभी का देवर ने चोदकर इलाज़ किया
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