uncle bhatiji chudai story
26 साल की नेहा अपने पिता के दोस्त सुरेश अंकल के साथ एक अनैतिक रिश्ते में बंध जाती है, जिससे उसकी जिंदगी बदल जाती है।
मेरा नाम नेहा है और मेरी उम्र 26 साल है। मैं एक मल्टीनेशनल कंपनी में एचआर मैनेजर के पद पर काम करती हूं।
मेरे पिता का नाम राजीव है और वह एक सरकारी अफसर हैं। मेरी माता का नाम सीमा है और वह एक गृहिणी हैं।
मेरे एक छोटे भाई का नाम करन है जो अभी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहा है।
हमारे परिवार में एक और रिश्ता है जो हमारे लिए बेहद खास है।
मेरे पिता के बचपन के दोस्त सुरेश अंकल। सुरेश अंकल और मेरे पिता एक ही गांव में पले-बढ़े हैं और उनकी दोस्ती बचपन की है।
सुरेश अंकल एक सफल बिजनेसमैन हैं और उनकी कई फैक्ट्रियां हैं। उनकी उम्र 52 साल है लेकिन वह बेहद फिट और हैंडसम हैं।
सुरेश अंकल की शादी 25 साल पहले हुई थी लेकिन उनकी पत्नी का 10 साल पहले एक एक्सीडेंट में निधन हो गया था।
उनके कोई बच्चे नहीं हैं और वह अकेले रहते हैं। मेरे पिता और सुरेश अंकल की दोस्ती इतनी गहरी है कि वह हमारे घर का एक सदस्य माने जाते हैं।
हम उन्हें अंकल कहकर बुलाते हैं और वह हम सबको बेहद प्यार करते हैं।
मैं बचपन से ही सुरेश अंकल को पसंद करती थी। वह जब भी हमारे घर आते, मेरे लिए तोहफे लाते और मुझे गोद में बिठाकर कहानियां सुनाते।
जैसे-जैसे मैं बड़ी हुई, मेरी पसंद एक अलग रूप लेने लगी।
मैंने देखा कि सुरेश अंकल बेहद आकर्षक हैं – उनकी लंबाई 6 फुट है, उनका बदन मजबूत है, और उनकी मुस्कान में एक अलग ही जादू है।
मेरी शादी नहीं हुई है और मैं अकेली रहती हूं। मेरे माता-पिता मेरे लिए रिश्ते ढूंढ रहे हैं लेकिन मैंने अभी तक किसी को हां नहीं कही।
कहीं न कहीं मेरे मन में सुरेश अंकल के लिए एक अलग ही भावना थी जो मैं खुद से भी छिपाती थी।
एक बार की बात है। मेरे पिता को किसी ऑफिशियल काम से विदेश जाना पड़ा।
मेरी मां भी अपनी बहन के यहां गई हुई थीं। मेरा भाई करन अपने दोस्तों के साथ गोवा घूमने गया था। घर पर सिर्फ मैं अकेली थी।
उसी समय सुरेश अंकल का फोन आया। उन्होंने पूछा कि सब कैसे हैं। मैंने उन्हें बताया कि सब लोग बाहर गए हैं और मैं अकेली हूं।
उन्होंने कहा कि वह शाम को मिलने आएंगे क्योंकि उन्हें मेरे पिता से कुछ जरूरी कागजात लेने थे।
शाम को जब सुरेश अंकल आए, तो मैंने उनका स्वागत किया।
उन्होंने उस दिन एक हल्के ग्रे रंग का सूट पहना था जो उन पर बेहद फब रहा था। उनकी मूंछें सफेद हो चुकी थीं लेकिन वह उन्हें और भी आकर्षक बना रही थीं।
“कहां हैं राजीव?” उन्होंने पूछा।
“अंकल, पापा तो विदेश गए हैं। मैंने आपको फोन पर तो बताया था,” मैंने कहा।
“अरे हां, मैं तो भूल ही गया। फिर मैं कल आता हूं,” उन्होंने कहा।
“नहीं अंकल, रुक जाइए। खाना खाकर जाइए। आप अकेले घर जाकर क्या करेंगे?” मैंने कहा।
उन्होंने मुझे देखा और फिर मान गए। “ठीक है नेहा, लेकिन तुम्हें तकलीफ होगी,” उन्होंने कहा।
“कोई तकलीफ नहीं अंकल। आप बैठिए, मैं खाना लगाती हूं,” मैंने कहा।
मैंने खाना बनाया और उनके साथ बैठकर खाया। खाने के बाद हम लिविंग रूम में बैठे और बातचीत करने लगे।
वह मेरे भविष्य के बारे में पूछ रहे थे और मैं उनसे उनका बिजनेस के बारे में पूछ रही थी।
“नेहा, तुम्हारी शादी क्यों नहीं हो रही? कोई लड़का पसंद नहीं आया?” उन्होंने पूछा।
“नहीं अंकल, अभी तक कोई ऐसा नहीं मिला जिसे मैं पसंद कर सकूं,” मैंने कहा।
“कैसा लड़का चाहिए तुम्हें? बताओ, मैं ढूंढता हूं,” उन्होंने कहा।
“वैसा जो मुझे समझे, मेरी केयर करे, और जिसके साथ मुझे सुरक्षित महसूस हो,” मैंने कहा।
“यह तो मैं भी कर सकता हूं,” उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा।
मैं उनकी आंखों में देखने लगी। उनकी आंखों में कुछ अलग था आज। एक चमक, एक प्यास।
“अंकल, आप क्या कह रहे हैं?” मैंने पूछा।
वह चुप रहे। फिर उन्होंने मेरा हाथ पकड़ा।
“नेहा, मैं जानता हूं यह गलत है। लेकिन मैं तुम्हें बचपन से पसंद करता हूं। जब से तुम बड़ी हुई हो, मेरे मन में तुम्हारे लिए एक अलग ही भावना है,” उन्होंने कहा।
मैं स्तब्ध रह गई। मैंने कभी सोचा नहीं था कि सुरेश अंकल भी मुझे वैसे ही देखते हैं जैसे मैं उन्हें देखती हूं।
“अंकल, यह…” मैंने कहना चाहा।
“मैं जानता हूं यह अच्छा नहीं है। मैं तुम्हारे पिता का दोस्त हूं, तुम्हारे अंकल हूं। लेकिन मैं अपने दिल की बात छिपा नहीं सकता,” उन्होंने कहा।
मैं उनकी आंखों में देख रही थी। वह सच कह रहे थे। उनकी आंखों में मेरे लिए प्यार और प्यास दोनों थे।
“मुझे भी अंकल,” मैंने धीमी आवाज में कहा।
उन्होंने मुझे हैरानी से देखा। “क्या?”
“मैंने भी हमेशा आपको पसंद किया है। आप मेरे सपनों में आते हैं,” मैंने कहा।
वह मेरे करीब आए और मुझे गले लगा लिया। मैं भी उन्हें कसकर पकड़ ली।
हम दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। फिर उन्होंने धीरे से मेरे होठों पर चुंबन किया।
उनके चुंबन में एक अनुभव का जादू था। वह जानते थे कि किसी औरत को कैसे छुआ जाए।
उनकी जीभ मेरे मुंह में घुसी और मेरी जीभ से खेलने लगी। मैं भी उनका पूरा साथ दे रही थी।
हम लगभग 10 मिनट तक एक-दूसरे को चूसते रहे। फिर उन्होंने मुझे खड़ा किया और मेरे कपड़े खोलने शुरू किए।
“आज मैं तुम्हें अपना बनाऊंगा नेहा,” उन्होंने कहा।
“हां अंकल, आज मैं पूरी तरह आपकी हूं,” मैंने कहा।
उन्होंने मेरी कुर्ती उतारी। अंदर मैंने एक काले रंग की ब्रा पहनी थी।
उन्होंने मेरी ब्रा के ऊपर से ही मेरे स्तनों को दबाना शुरू कर दिया।
“कितने सुंदर स्तन हैं तुम्हारे,” उन्होंने कहा।
फिर उन्होंने मेरी ब्रा खोल दी और मेरे स्तन बाहर आ गए।
वह उन्हें देखते रहे और फिर एक स्तन का निप्पल अपने मुंह में ले लिया।
“ओहhhhh अंकल,” मैंने सिसकी।
वह मेरे स्तनों को चूसने लगे। वह पहले एक फिर दूसरा चूस रहे थे। मेरे निप्पल कड़े हो चुके थे और मुझे बेहद मजा आ रहा था।
“अंकल, बहुत अच्छा लग रहा है,” मैंने कहा।
“आज तुम्हें पूरा मजा दूंगा,” उन्होंने कहा।
फिर वह नीचे बैठ गए और मेरी लेगिंग उतारने लगे। उन्होंने मेरी लेगिंग और फिर पैंटी उतार दी। अब मैं नीचे से पूरी नंगी थी।
उन्होंने मेरी चूत को देखा। “कितनी सुंदर चूत है तुम्हारी,” उन्होंने कहा और उस पर चुंबन किया।
फिर उन्होंने अपनी जीभ निकाली और मेरी चूत को चाटना शुरू कर दिया।
“वावू… अंकल… यह क्या कर रहे हैं,” मैंने कहा।
“तुम्हें स्वर्ग का आनंद दे रहा हूं,” उन्होंने कहा और चाटना जारी रखा।
उनकी जीभ मेरी चूत में घुस रही थी। वह मेरी क्लिटोरिस को चाट रहे थे और मैं कांप रही थी। मैंने उनका सिर अपनी चूत पर दबा दिया।
“ऊह आह… बहुत मजा आ रहा है… और जोर से अंकल,” मैं चीखने लगी।
वह मेरी चूत को जोर-जोर से चाट रहे थे। मेरी चूत से पानी निकलने लगा था और वह उसे पी रहे थे।
कुछ ही देर में मैं झड़ गई। उन्होंने मेरा सारा रस पिया और खड़े हो गए।
“अब मेरी बारी,” उन्होंने कहा और अपने कपड़े उतारने शुरू किए।
उन्होंने अपना सूट उतारा। उनका बदन बेहद मजबूत था।
उनकी छाती पर बाल थे और पेट एकदम फिट था। फिर उन्होंने अपना लोअर उतारा।
अंदर उन्होंने एक बॉक्सर पहना था जिसमें से उनका लंड तनकर खड़ा था।
उन्होंने बॉक्सर उतारा और उनका लंड बाहर आ गया।
वह लंड देखकर मेरी आंखें चौड़ी हो गईं। वह लगभग 8 इंच लंबा और बहुत मोटा था।
उसकी नसें साफ दिख रही थीं और वह बेहद कड़ा था।
“कितना बड़ा है अंकल,” मैंने कहा।
“तुम्हारे लिए है यह,” उन्होंने कहा।
“मैं इसे चूसना चाहती हूं,” मैंने कहा।
“आओ बेटी,” उन्होंने कहा।
मैं घुटनों के बल बैठ गई और उनके लंड को हाथ में लिया। वह गर्म और कड़ा था।
मैंने उसे अपने मुंह में लिया और चूसना शुरू कर दिया।
“वाह नेहा मेरी जान … बहुत अच्छा कर रही हो,” उन्होंने कहा और मेरे सिर को पकड़कर अपने लंड पर दबाने लगे।
मैं उनके लंड को गहरे तक अपने मुंह में ले रही थी।
उनका लंड मेरे गले तक जा रहा था और मैं उसे जीभ से चाट भी रही थी।
“क्या मुंह है तुम्हारा… बहुत मजा आ रहा है,” वह कहने लगे।
मैं लगभग 15 मिनट तक उनका लंड चूसती रही। फिर उन्होंने मुझे खड़ा किया और सोफे पर बैठने लगे।
“आओ, मेरे ऊपर बैठो,” उन्होंने कहा।
मैं उनके ऊपर बैठ गई। उन्होंने अपना लंड मेरी चूत के मुहाने पर रखा।
“तुम खुद डालो,” उन्होंने कहा।
मैंने धीरे-धीरे नीचे बैठना शुरू किया और उनका लंड मेरी चूत में घुस गया।
“अरे अंकल… बहुत बड़ा है आपका लंड,” मैंने कहा।
“पूरा ले लो अपने अंदर,” उन्होंने कहा।
मैंने पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया। वह मेरे गहरे तक जा चुका था। फिर मैं ऊपर-नीचे होने लगी।
“ऊह आह पेलते रहीये अंकल … बहुत मजा आ रहा है, आज मुझे अपनी रंडी बना लीजिये, मुझे कुतिया बनके पेलिए” मैं कहने लगी।
“और तेज करो,” उन्होंने कहा।
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मैं उनके ऊपर उछल-उछल कर उनका लंड अपनी चूत में ले रही थी। वह भी नीचे से धक्के मार रहे थे।
पच पच पच की आवाजें कमरे में गूंज रही थीं। मेरे स्तन उछल रहे थे और वह उन्हें पकड़कर दबा रहे थे।
“क्या चूत है तुम्हारी… इतनी टाइट,” वह कहने लगे।
“आपका लंड भी बहुत मोटा है अंकल,” मैंने कहा।
हम दोनों पसीने-पसीने हो चुके थे। मैं लगातार उनके ऊपर उछल रही थी और वह मेरे स्तनों को चूस रहे थे।
“मैं झड़ने वाला हूं,” उन्होंने कहा।
“मैं भी अंकल,” मैंने कहा।
“अंदर ही निकाल दूं?” उन्होंने पूछा।
“हां अंकल, अंदर ही डाल दो अपना सारा वीर्य,” मैंने कहा।
उन्होंने जोर से धक्के मारे और मेरे अंदर ही अपना वीर्य निकाल दिया। मैं भी उसी समय झड़ गई। मैं उनके वीर्य को अपने अंदर महसूस कर रही थी। वह गर्म था और मुझे बेहद अच्छा लग रहा था।
थककर हम दोनों सोफे पर गिर पड़े। मैं उनके ऊपर ही लेटी हुई थी। उन्होंने मेरे बालों में हाथ फेरा।
“कैसा लगा?” उन्होंने पूछा।
“अद्भुत अंकल। यह मेरा सबसे बेहतरीन अनुभव था,” मैंने कहा।
“अब तुम मेरी हो नेहा,” उन्होंने कहा।
“हां अंकल, मैं हमेशा आपकी रहूंगी,” मैंने कहा।
उस रात के बाद मैं और सुरेश अंकल एक-दूसरे के हो गए।
वह अक्सर मेरे घर आते और हम एक-दूसरे से प्यार करते। मेरे माता-पिता और भाई को इस बात का कोई अंदेशा नहीं था।
लेकिन एक दिन ऐसा हुआ जिसने सब कुछ बदल दिया। मेरे पिता को सुरेश अंकल और मेरे रिश्ते के बारे में पता चल गया। यह कैसे हुआ, यह एक अलग कहानी है।
मेरे पिता ने सुरेश अंकल से दोस्ती तोड़ ली और उन्हें घर आने से मना कर दिया।
लेकिन मैं और सुरेश अंकल अब एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे।
सुरेश अंकल ने मुझे अपने घर बुला लिया। उन्होंने कहा कि अगर मैं उनसे सच्चा प्यार करती हूं तो मुझे उनके साथ रहना होगा।
मैंने अपने माता-पिता को बताया कि मैं सुरेश अंकल के साथ रहना चाहती हूं।
मेरे माता-पिता ने मुझे घर से निकाल दिया। उन्होंने कहा कि मैंने उनका सिर शर्म से झुका दिया है।
मैंने अपने भाई करन से भी बात की लेकिन वह भी मेरे पक्ष में नहीं था।
मैं सुरेश अंकल के घर चली गई। उन्होंने मुझे अपनी रखैल के रूप में अपने घर में रखा।
हालांकि उन्होंने मुझे शादी का वादा किया था लेकिन समाज के डर से वह शादी नहीं कर सके।
मैं अब उनके घर में रहती हूं। मैं उनकी रखैल बन चुकी हूं।
हम दोनों एक साथ रहते हैं, एक साथ सोते हैं। वह मुझे हर तरह की सुविधा देते हैं और मैं उन्हें हर तरह की खुशी देती हूं।
रात में जब सब सो जाते हैं, हम एक-दूसरे को चोदते हैं। वह मेरी चूत और गांड दोनों में अपना लंड डालते हैं और मुझे संतुष्ट करते हैं।
मैं खुश हूं अपनी इस जिंदगी से। हां, मैंने अपना परिवार खो दिया है, लेकिन मुझे सुरेश अंकल का प्यार मिला है जो मेरे लिए सब कुछ है।
मेरे माता-पिता अब भी मुझे माफ नहीं कर पाए हैं।
लेकिन मुझे उम्मीद है कि एक दिन वह समझेंगे कि प्यार क्या होता है।
मैं सुरेश अंकल की रखैल बनकर खुश हूं क्योंकि यह रिश्ता सच्चा है, भले ही समाज इसे गलत माने।
और इस तरह मेरी कहानी खत्म होती है। एक कहानी जो प्यार की है, समर्पण की है, और एक रिश्ते की जो सीमाओं को तोड़कर बना है।
मैं नेहा, आज भी सुरेश अंकल की रखैल हूं और हमेशा रहूंगी।
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Bahut hi achhi kahani hai