maa randi bankar chudwayi
नमस्ते दोस्तों, मैं आदित्य फिर से हाजिर हूं अपनी कहानी के अगले भाग के साथ।
जैसा कि मैंने पिछली कहानी में बताया था, मैंने अपनी माँ को विकास अंकल के साथ चुदाई करते देखा था और उस रात मैंने सोच लिया था कि अब मुझे भी मौका चाहिए।
यह कहानी उसके अगले दिन की है जब विकास अंकल फिर से हमारे घर आए थे।
माँ ने उन्हें रात को रुकने के लिए कहा था और मैं जानता था कि आज फिर से वो दोनों मजे करने वाले हैं।
लेकिन आज मेरा भी प्लान था।
शाम को जब अंकल आए तो मैंने देखा कि माँ ने फिर से वो ही लाल साड़ी पहनी हुई थी जो उन्होंने कल पहनी थी।
उनके बूब्स ब्लाउज में फटने को थे और मंगलसूत्र उनके गले में चमक रहा था।
वो इतनी सेक्सी लग रही थीं कि मेरा लंड खड़ा हो गया।
अंकल और माँ ने डिनर किया और मैंने भी साथ में खाया।
खाते वक्त मैंने देखा कि अंकल माँ के पैर के नीचे से हाथ फेर रहे थे और माँ मुस्कुरा रही थीं।
मुझे पता था कि ये दोनों जल्दी ही एक दूसरे के पास जाना चाहते हैं।
डिनर के बाद मैंने कहा – “मैं अपने रूम में जा रहा हूं, सोने के लिए।”
माँ ने कहा – “ठीक है बेटा, जल्दी सो जाओ।”
मैंने अपने रूम में जाकर दरवाजा बंद कर लिया लेकिन मैं सोने नहीं गया।
मैंने दरवाजे की दरार से झांकना शुरू किया।
थोड़ी देर बाद माँ और अंकल माँ के बेडरूम में चले गए।
मैं धीरे से अपने रूम से निकला और माँ के रूम के दरवाजे के पास जाकर कान लगाया।
अंदर से आवाजें आ रही थीं। मैंने दरवाजे की दरार से झांका तो देखा कि अंकल माँ को किस कर रहे हैं और माँ भी पूरा साथ दे रही हैं।
मैंने सोचा कि आज मौका है।
मैंने धीरे से दरवाजा खोला और अंदर चला गया।
माँ और अंकल इतने बिजी थे कि उन्हें पता ही नहीं चला।
मैंने कहा – “मम्मी, यह क्या हो रहा है?”
माँ और अंकल एकदम से अलग हो गए।
माँ का चेहरा सफेद पड़ गया।
वो बोलीं – “बेटा, तुम यहां कैसे? मैंने सोचा था तुम सो रहे हो।”
मैंने कहा – “मैंने सब देख लिया है मम्मी। कल रात भी मैंने देखा था और आज भी देख रहा हूं।”
माँ रोने लगीं – “बेटा, प्लीज किसी को मत बताना। मजबूरी में यह सब कर रही हूं। तुम्हारे पापा मुझे खुश नहीं कर पाते इसलिए…”
मैंने कहा – “मम्मी, मैं कुछ नहीं बताऊंगा। लेकिन मुझे भी शामिल होना है।”
यह सुनकर माँ और अंकल दोनों हैरान रह गए।
माँ बोलीं – “क्या बकवास कर रहा है तू? मैं तेरी माँ हूं।”
मैंने कहा – “हां मम्मी, इसीलिए तो। मैंने देखा है कि पापा तुम्हें खुश नहीं कर पाते। मैं तुम्हें खुश करना चाहता हूं। और वैसे भी, अंकल के साथ तो तुम कर ही रही हो, मेरे साथ क्यों नहीं?”
माँ कुछ बोल नहीं पाईं।
अंकल ने कहा – “पूजा जी, लड़का सही कह रहा है। वैसे भी हम तीनों मिलकर मजे कर सकते हैं। कोई बाहर वाला नहीं है, सब अपने हैं।”
माँ ने शर्माते हुए कहा – “लेकिन यह सही नहीं है। वो मेरा बेटा है।”
अंकल ने कहा – “और तुम मेरी दोस्त की पत्नी हो, फिर भी तो हम कर रहे हैं। एक बार करके देखो, अगर मजा ना आए तो बंद कर देना।”
माँ ने सोचा और फिर हां कर दी।
मेरे अंदर खुशी की लहर दौड़ गई।
मैंने तुरंत अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरी तरह खड़ा था, करीब 7 इंच का और मोटा।
माँ ने मेरे लंड को देखा और कहा – “वाह बेटा, तुम तो अपने पापा से भी बड़े हो।”
मैंने कहा – “मम्मी, आज मैं तुम्हें वो मजा दूंगा जो पापा कभी नहीं दे पाए।”
मैंने माँ के पास गया और उनके होंठ चूमने लगा।
माँ पहले तो हिचकिचाई लेकिन फिर वो भी मेरे होंठों से लिपट गईं।
हम माँ-बेटे एक दूसरे को किस कर रहे थे।
मेरे हाथ माँ के बूब्स पर थे और मैं उन्हें दबा रहा था।
अंकल ने कहा – “चलो, आज हम तीनों मिलकर मजे करते हैं।”
मैंने माँ की साड़ी खोलनी शुरू की।
धीरे-धीरे मैंने उनका ब्लाउज भी खोल दिया।
अब माँ बस ब्रा और पेटीकोट में थीं।
उनके बूब्स ब्रा से बाहर आने को तड़प रहे थे।
मैंने पीछे से अंकल को इशारा किया।
अंकल आगए और माँ के पीछे खड़े हो गए।
अब मैं आगे था और अंकल पीछे।
मैं माँ के बूब्स चूस रहा था और अंकल उनकी गांड दबा रहे थे।
माँ “आह… आह…” की आवाजें निकाल रही थीं।
मैंने उनकी ब्रा खोल दी और उनके बूब्स बाहर निकाल लिए।
वो कितने सुंदर थे – गोरे, बड़े, और निप्पल गुलाबी।
मैंने एक बूब मुंह में ले लिया और जोर-जोर से चूसने लगा।
अंकल ने माँ का पेटीकोट उतार दिया और पैंटी भी खोल दी।
अब माँ पूरी नंगी थीं। अंकल ने अपना लंड बाहर निकाला और माँ की गांड के छेद पर रख दिया।
माँ बोलीं – “पहले बेटे से करवा लूं, फिर तुम्हारा लूंगी।”
अंकल ने कहा – “ठीक है।”
मैंने माँ को बेड पर लिटाया और उनकी टांगें फैला दीं।
उनकी चूत गीली हो चुकी थी।
मैंने अपने लंड को उनकी चूत पर सटाया और धीरे से अंदर डाला।
“आह… बेटा…” माँ ने आवाज निकाली।
मैंने धीरे-धीरे अंदर-बाहर करना शुरू किया।
माँ की चूत इतनी टाइट थी कि मेरा लंड जकड़ा जा रहा था।
मैंने स्पीड बढ़ा दी और जोर-जोर से धक्के मारने लगा।
माँ चिल्ला रही थीं – “आह… हां बेटा… और जोर से… मारो… चोदो अपनी माँ को…”
यह सुनकर मुझे और जोश आ गया।
मैंने पूरी ताकत से उन्हें चोदना शुरू कर दिया।
घपा-घप की आवाज पूरे रूम में गूंज रही थी।
10 मिनट तक मैंने माँ की चूत मारी और फिर मैंने अपना माल उनकी चूत में ही छोड़ दिया। माँ भी झड़ गईं।
फिर अंकल ने कहा – “अब मेरी बारी।”
अंकल ने माँ को घोड़ी बनाया और उनकी चूत में अपना लंड डाल दिया।
मैं आगे खड़ा था और माँ मेरा लंड चूस रही थीं।
अब माँ दोनों तरफ से ले रही थीं – आगे से मेरा लंड मुंह में और पीछे से अंकल की चूत में।
अंकल जोर-जोर से धक्के मार रहे थे और माँ मेरा लंड चूस रही थीं।
यह नजारा बहुत सेक्सी था। 15 मिनट तक यह चलता रहा और फिर अंकल ने अपना माल माँ की चूत में छोड़ दिया।
हम तीनों थककर बेड पर लेट गए। माँ ने कहा – “आज जिंदगी में पहली बार इतना मजा आया है। दो-दो लंड एक साथ।”
मैंने कहा – “मम्मी, अब रोज यही होगा। मैं और अंकल दोनों तुम्हें खुश रखेंगे।”
माँ मुस्कुराईं और हम दोनों को किस किया।
इसके बाद हम तीनों ने बहुत मजे किए।
माँ की चूत, गांड, और मुंह – तीनों छेद हमने भरे।
रात भर माँ को चोदते रहे और सुबह जब उठे तो फिर से एक राउंड किया।
अब यह हमारा रोज का काम है।
जब भी पापा बाहर जाते हैं, हम तीनों मिलकर मजे करते हैं।
माँ अब बहुत खुश हैं और कभी शिकायत नहीं करतीं।
उम्मीद है आपको पसंद आया होगा।
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Nice story