मेरी ही चूत चोदने लगा मेरा बेटा

maa ki chut choda beta

मेरा नाम सुनीता है। मैं एक हाउसवाइफ हूँ, और मेरी उम्र 42 साल है।

मेरा फिगर 38-30-44 है, और मैं 36DD की ब्रा पहनती हूँ।

मेरी हाइट 5 फीट 6 इंच है, गोरा रंग और भरा हुआ बदन, जिससे मैं अपनी उम्र से कम लगती हूँ।

मेरे पति रमेश मुझसे उम्र में 15 साल बड़े हैं और अपने बिजनेस में हमेशा डूबे रहते हैं। उनका ध्यान घर पर कम ही रहता है।

हमारा परिवार पैसे वाला है, और हमारा घर पुणे के एक रईस इलाके में है।

ये कहानी मेरी और मेरे सौतेले बेटे राघव की है।

राघव 20 साल का है, 6 फीट लंबा, गोरा, और मस्कुलर बॉडी वाला जवान लड़का है।

उसकी गहरी काली आँखें और आकर्षक चेहरा उसे और भी हसीन बनाता है।

राघव मेरे पति की पहली पत्नी का बेटा है, जिसकी मृत्यु 10 साल पहले हो गई थी। मैंने रमेश से 8 साल पहले शादी की थी, तब राघव सिर्फ 12 साल का था।

राघव हमेशा घर पर ही रहता था, लेकिन एक इंजीनियरिंग कोर्स के लिए उसे हैदराबाद जाना पड़ा।

हमने सोचा कि हमारे पास पैसा है, तो क्यों ना एक छोटा सा फ्लैट किराए पर ले लें, ताकि वो अपनी पढ़ाई अच्छे से कर सके।

हमने एक छोटा सा वन-रूम फ्लैट लिया, जिसमें एक छोटा किचन और बाथरूम था। बेड नहीं था, तो हम जमीन पर गद्दा बिछाते थे।

मैंने राघव से कहा, “बेटा, मैं हर शनिवार-रविवार तुझसे मिलने आऊँगी। तेरा खाने-पीने का सामान भरूँगी। बाकी दिन एक लड़का तेरे लिए खाना बनाकर रखेगा, और वीकेंड पर मैं तेरे लिए खाना बनाऊँगी।”

राघव ने हल्का सा मुस्कुराते हुए कहा, “ठीक है, सुनीता माँ!”

दरअसल, मैं नहीं चाहती थी कि राघव मुझसे ज्यादा दूर रहे। मुझे उसकी बहुत फिक्र थी।

मेरे पति को कोई परवाह नहीं थी, वो तो अपने बिजनेस में व्यस्त रहते थे।

उन्होंने आसानी से मुझे हैदराबाद जाने की इजाजत दे दी। हैदराबाद की गर्मी तो जैसे आग उगलती थी।

हमने एक छोटा सा कूलर लिया था, लेकिन वो गर्मी में बस नाम का था।

मैं जब राघव के फ्लैट पर जाती, तो फ्री ही रहती। गर्मी इतनी थी कि मैं घर में अक्सर सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज में रहती, या कभी गाउन के नीचे कुछ नहीं पहनती थी।

कपड़े पहनने का मन ही नहीं करता था। समय के साथ मेरी और राघव की दोस्ती बहुत गहरी हो गई।

उसे मेरा आना-जाना पसंद था। हम साथ में घूमने जाते, शॉपिंग करते, मूवी देखते।

जब मैं वहाँ होती, राघव कहीं और नहीं जाता, मेरे पास ही रहता।

हमारी दोस्ती इतनी बढ़ गई थी कि मैं उसके सामने साड़ी बदल लेती, कपड़े उतार लेती।

मुझे लगता था, वो मेरा बेटा है, इसमें क्या बुराई? लेकिन राघव की नजरें कभी-कभी कुछ और कहती थीं।

उसकी आँखों में एक अजीब सी चमक थी, जो मुझे थोड़ा बेचैन करती थी।

राघव जब मैं किचन में खाना बनाती, तो किसी ना किसी बहाने मेरे पास आता। हमारा किचन छोटा सा था, एक तंग पासेज जैसा।

वो जानबूझकर मेरे करीब आता, मुझे हल्का-हल्का छूता।

कभी उसका हाथ मेरी कमर पर लगता, तो कभी मेरे कंधे पर। मैं इसे नजरअंदाज करती, लेकिन मेरे मन में एक अजीब सा एहसास जागने लगा था।

उसकी हरकतें अब मासूम नहीं लगती थीं। एक शनिवार की दोपहर थी।

गर्मी अपने चरम पर थी, जैसे पूरा कमरा भट्टी बन गया हो।

मैंने राघव से कहा, “बेटा, ये गर्मी तो मार डालेगी! सोच रही हूँ, नहा लूँ।”

राघव गद्दे पर लेटा था, मोबाइल में कुछ देख रहा था। उसने कहा, “हाँ सुनीता माँ, नहा लो।”

मैं बाथरूम चली गई। दोपहर के करीब ढाई बजे थे।

नहाते वक्त मैंने सोचा, मैं तो राघव के सामने कपड़े बदल ही लेती हूँ, तो आज टॉवल में ही क्यों ना रहूँ?

गर्मी इतनी थी कि कुछ और पहनने का मन नहीं था। मैंने शॉवर लिया, एक टॉवल से बदन पोंछा, और दूसरा पतला, ट्रांसपेरेंट टॉवल अपने बदन पर लपेट लिया।

मेरे बाल गीले थे, और टॉवल इतना पतला था कि मेरे उरोज और निप्पल साफ दिख रहे थे।

मैं बाल पोंछते हुए बाहर आई। राघव मुझे देख रहा था।

उसकी आँखों में वासना की चमक थी, जो मैंने पहले कभी इतनी साफ नहीं देखी थी।

मैंने जानबूझकर उसकी नजरों को नजरअंदाज किया और बाल पोंछने लगी।

तभी राघव गद्दे से उठा और मेरे पास आया। उसने मुझे कसकर पकड़ लिया।

मैं चौंक गई और बोली, “औच! राघव, ये क्या कर रहा है? छोड़ मुझे!”

लेकिन राघव ने मेरी बात अनसुनी की और मेरे होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसने मुझे इतनी जोर से किस किया कि मेरे होश उड़ गए।

उसकी जीभ मेरे मुँह में थी, और वो मेरे होंठों को चूस रहा था।

मैंने उसे धक्का देने की कोशिश की, “छोड़ मुझे, राघव! ये गलत है, मैं तेरी माँ हूँ!”

राघव ने मेरी कमर को और कसकर पकड़ा और कहा, “नहीं सुनीता माँ, बस थोड़ी देर… तू कितनी मस्त लग रही है!”

उसी वक्त मेरा टॉवल नीचे गिर गया। मैं पूरी नंगी थी।

राघव ने कब अपनी शॉर्ट्स और अंडरवियर उतार दिया, मुझे पता ही नहीं चला।

उसका मोटा, 8 इंच लंबा लंड मेरे सामने था, पूरी तरह खड़ा और उत्तेजित।

मैं उसे रोकना चाहती थी, लेकिन मेरे शरीर में एक अजीब सी गर्मी दौड़ रही थी।

मेरे मन में डर था, लेकिन मेरी चूत में एक सनसनाहट थी।

राघव ने मुझे कसकर पकड़ा और अपना लंड मेरी चूत के मुँह पर रखा।

उसने हल्का सा धक्का दिया, और उसका सुपारा मेरी चूत में घुस गया।

“आह्ह!” मैं दर्द से सिसकारी। उसका लंड मोटा था, और मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर गया।

वो मुझे खड़े-खड़े चोदने लगा। “फट-फट-फट” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं।

मैंने कहा, “राघव… नहीं… ये गलत है… आह्ह!” लेकिन राघव रुका नहीं।

उसने मेरे उरोज को जोर-जोर से दबाना शुरू किया। मेरी चुचियाँ उसके हाथों में मसल रही थीं।

वो मेरे निप्पल को चूसने लगा, उन्हें हल्के से काटने लगा।

“आह्ह… राघव… धीरे… दर्द हो रहा है!” मैं कराह रही थी।

उसने कहा, “सुनीता माँ, तेरे बूब्स कितने मस्त हैं! मोटे-मोटे… I love you!” उसके शब्दों में जुनून था।

वो मेरी चुचियों को चूसता, दबाता, और साथ ही अपना लंड मेरी चूत में अंदर-बाहर करता।

“आह्ह… ओह्ह… राघव… आह्ह!” मेरी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं।

मेरे मन में ग्लानि थी, लेकिन मेरा शरीर उसका साथ दे रहा था।

मेरी चूत गीली हो चुकी थी, और हर धक्के के साथ मुझे मजा आ रहा था।

तभी राघव ने कहा, “चल सुनीता माँ, बाथरूम में!”

उसने अपना लंड मेरी चूत से निकाले बिना मुझे बाथरूम की तरफ खींच लिया।

उसने शॉवर चालू किया, और ठंडा पानी हमारे बदन पर पड़ने लगा।

वो मुझे दीवार के सहारे खड़ा करके मेरी चूत में धक्के मारने लगा।

“फट-फट-फट” की आवाजें और तेज हो गई थीं। मैंने शॉवर का रॉड पकड़ लिया और अपने हाथ ऊपर कर लिए।

मेरी चुचियाँ उछल रही थीं, और राघव उन्हें देखकर और जंगली हो रहा था।

उसने मेरी चूत को जोर-जोर से चोदा, और मैं सिसकार रही थी, “आह्ह… ओह्ह… राघव… धीरे… आह्ह!”

तभी उसका ध्यान बाथरूम के छोटे स्टूल पर गया। उसने स्टूल उठाया और मेरा एक पैर उस पर रख दिया।

अब मेरी चूत और खुल गई थी। उसने फिर से अपना लंड मेरी चूत में घुसाया और तेज-तेज धक्के मारने लगा।

“आह्ह… राघव… मेरी चूत फट जाएगी… आह्ह!” मैं चीख रही थी, लेकिन दर्द के साथ-साथ मजा भी आ रहा था।

करीब 20 मिनट तक वो मुझे ऐसे ही चोदता रहा। उसका लंड मेरी चूत को रगड़ रहा था, और मेरी चूत पूरी गीली थी।

तभी उसने मुझे कसकर पकड़ा और रुक गया। मैंने महसूस किया कि उसका गर्म पानी मेरी चूत में भरने लगा।

उसने अपनी सारी मलाई मेरी चूत में छोड़ दी। “आह्ह… राघव… ओह्ह…” मैं सिसकारी।

हम दोनों कुछ देर वैसे ही खड़े रहे, साँसें तेज थीं, और हमारा बदन पसीने और पानी से भीगा हुआ था।

शाम को 6 बजे राघव ने कहा, “सुनीता माँ, चल बाहर घूमने चलते हैं।”

हम बाहर गए, शॉपिंग की, मूवी देखी, और खाना खाया। रात करीब 12:30 बजे हम फ्लैट पर लौटे। इस दौरान हम दोनों में कोई बात नहीं हुई।

मेरे मन में एक तनाव था। जो हुआ, वो गलत था, लेकिन मेरे शरीर को उसका मजा भी आया था।

मैं अपने आप से जूझ रही थी। मैं बाथरूम गई और शॉवर लिया।

ठंडा पानी मेरे बदन पर पड़ रहा था, लेकिन मेरे मन में गर्मी थी।

मैं बाहर आई और गद्दे पर लेट गई।

मैंने सिर्फ एक चादर ओढ़ी थी, और उसके नीचे मैं पूरी नंगी थी।

किचन का लाइट ऑन था, बाकी सारी लाइट्स ऑफ थीं।

राघव भी नहाकर आया। वो सिर्फ टॉवल में था। उसने मुझे देखा, और मैंने उसे।

उसकी नजर मेरी चादर पर गई, और वो समझ गया कि मैं नंगी हूँ।

राघव ने मेरे सामने अपना टॉवल उतार दिया। उसका मोटा, लंबा लंड फिर से खड़ा था, और मेरे सामने झूल रहा था।

उसने किचन का लाइट ऑफ किया, और कमरे में अंधेरा छा गया। वो मेरी चादर में घुस गया।

मैं कुछ समझ पाती, उसने मेरी चूत में अपनी उंगली डाल दी।

“आह्ह…” मैं सिसकारी। उसने मेरी चूत को सहलाना शुरू किया, और मेरी साँसें तेज हो गईं।

उसने मेरी चुचियों को दबाना शुरू किया, मेरे निप्पल को चूसा, और मेरे कान में कहा, “सुनीता माँ, तू कितनी मस्त है… तेरी चूत कितनी रसीली है!”

थोड़ी देर बाद उसने मुझे उल्टा कर दिया। मेरी गांड अब उसकी तरफ थी।

उसने मेरे पेट के नीचे तकिया रखा, जिससे मेरी गांड और ऊपर उठ गई।

मैं समझ गई कि वो मेरी गांड मारना चाहता है। उसने मेरी गांड के छेद पर थूका और अपनी उंगली से उसे चिपचिपा कर दिया।

फिर उसने अपने लंड का सुपारा मेरी गांड पर रखा और एक जोरदार झटका मारा।

उसका आधा लंड मेरी गांड में घुस गया। “आह्ह… राघव… नहीं… दर्द हो रहा है!” मैं चीखी।

लेकिन वो रुका नहीं। वो जनवरों की तरह मेरी गांड मारने लगा। “फट-फट-फट” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं।

उसने एक हाथ मेरी चूत में डाला और दूसरा मेरे मुँह में। मैं चिल्ला भी नहीं सकती थी।

उसका लंड मेरी गांड को चीर रहा था। “आह्ह… राघव… धीरे… मेरी गांड फट जाएगी!” मैं कराह रही थी।

उसने कहा, “सुनीता माँ, तेरी गांड कितनी टाइट है… मजा आ रहा है!” करीब 20 मिनट तक वो मेरी गांड मारता रहा।

दर्द के साथ-साथ एक अजीब सा मजा भी आ रहा था।

फिर उसने अपना सारा पानी मेरी गांड में छोड़ दिया। “आह्ह… ओह्ह…” मैं सिसकारी।

उस रात उसने मेरी गांड चार बार मारी। हर बार वो और जंगली हो रहा था। मैं दर्द से कराह रही थी, लेकिन मेरा शरीर उसका साथ दे रहा था।

“आह्ह… राघव… बस कर… आह्ह!” मैं बार-बार कह रही थी, लेकिन वो रुका नहीं।

सुबह जब मैं उठी, तो मेरी हालत खराब थी। मेरी चूत और गांड में दर्द था, और मैं दोपहर तक बमुश्किल चल पा रही थी।

राघव ने मुझे स्टेशन ड्रॉप करने से पहले फिर से मेरी चूत चोदी।

उसने मुझे गद्दे पर लिटाया, मेरी टाँगें फैलाईं, और अपना मोटा लंड मेरी चूत में घुसा दिया।

“आह्ह… राघव… धीरे… आह्ह!” मैं सिसकार रही थी, और वो मुझे जोर-जोर से चोद रहा था।

उसने फिर से मेरी चूत में अपना पानी छोड़ दिया। अब मैं हर शनिवार का इंतजार करती हूँ।

मैं चाहती हूँ कि जल्दी से राघव के पास जाऊँ और उससे अपनी गांड और चूत चुदवाऊँ।

हर बार मैं सबसे पहले अपनी गांड चुदवाती हूँ, क्योंकि अब मुझे उसका मजा कुछ ज्यादा ही आने लगा है।

पिछले शनिवार तो और भी ज्यादा खास था। मैंने नीले रंग की लैंगरी पहनी थी जो राघव ने मेरे लिए ऑनलाइन मंगवाई थी।

वो मुझे देखकर पागल हो गया। उसने मुझे दीवार से सटाकर खड़ा किया और पीछे से मेरी गांड मारना शुरू कर दिया।

फिर उसने मुझे घुटनों के बल बिठाया और अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया। “चूस सुनीता माँ, अच्छे से चूस!” उसने आदेश दिया।

मैंने उसका लंड चूसना शुरू किया। वो मेरे सिर को पकड़कर अपना लंड मेरे गले तक घुसा रहा था।

“आह्ह… क्या मुँह है तेरा… बहुत मस्त है!” वो कराह रहा था।

करीब 15 मिनट तक वो मेरा मुँह चोदता रहा, फिर उसने अपना पानी मेरे मुँह में छोड़ दिया। मैंने सब कुछ पी लिया।

उसके बाद उसने मुझे डॉगी स्टाइल में बिठाया और मेरी गांड मारी।

फिर मुझे लिटाकर मेरी चूत चोदी। वो पूरे 2 घंटे तक मुझे चोदता रहा, बीच-बीच में पोजीशन बदलता रहा।

कभी मुझे ऊपर बिठाकर, कभी पीछे से, कभी खड़े-खड़े। उसने मेरी हर छेद को अपने लंड से भर दिया।

अब तो मैं राघव की रंडी बन चुकी हूँ। मैं उसके लिए कुछ भी कर सकती हूँ।

हर शनिवार जब मैं उसके पास जाती हूँ, तो वो मुझे अपने दोस्तों के सामने भी नंगा कर देता है।

उसके दोस्त नीलेश और सुनील भी मुझे चोद चुके हैं। तीनों मिलकर मुझे एक साथ चोदते हैं। एक मेरे मुँह में, एक मेरी चूत में, और एक मेरी गांड में।

पिछले हफ्ते तो उन्होंने मुझे पूरे 4 घंटे तक चोदा। मेरी हर छेद से पानी निकल रहा था।

मैं बेहोश हो गई थी। जब मुझे होश आया, तो राघव मेरी चूत चूस रहा था।

“उठो सुनीता माँ, अभी तो खत्म नहीं हुआ!” उसने कहा और फिर से मुझे चोदना शुरू कर दिया।

मैंने सोचा था कि ये सब गलत है, लेकिन अब मुझे इसमें कोई बुराई नहीं लगती।

राघव मुझे बहुत प्यार करता है, और मैं भी उससे बहुत प्यार करती हूँ। हमारा ये रिश्ता हम दोनों के लिए बहुत खास है।

मेरे पति रमेश को इसका कोई पता नहीं है, और ना ही उन्हें पता चलना चाहिए।

वो तो अपने बिजनेस में इतने व्यस्त हैं कि उन्हें मेरी कोई परवाह नहीं है।

राघव ने मुझे वीडियो कॉल पर भी नंगा देखना शुरू कर दिया है।

जब वो अपने हॉस्टल में होता है, तो मुझे वीडियो कॉल करता है और मैं उसके सामने अपने कपड़े उतार देती हूँ।

वो अपना लंड हिलाता है, और मैं अपनी चूत में उंगली करती हूँ। हम दोनों एक-दूसरे को देखकर खुश होते हैं।

कल रात राघव ने मुझे मैसेज किया कि वो अगले हफ्ते अपने दोस्त सलमान और शाहरुख को भी मेरे साथ चोदवाना चाहता है।

मैंने हाँ कर दी। अब मैं उन 5 लड़कों के साथ चुदवाऊँगी।

मुझे इस बात की बहुत उत्सुकता है। राघव ने मुझे एक सेक्सी ड्रेस भी भेजी है जो मुझे उनके सामने पहननी है।

वो ड्रेस इतनी छोटी है कि मेरी चूत और गांड साफ दिखेगी।

मैं हर रोज राघव के मैसेज का इंतजार करती हूँ।

वो मुझे अपने लंड की फोटो भेजता है, और मैं अपनी चूत की फोटो भेजती हूँ।

हम दोनों एक-दूसरे के लिए पागल हैं।

ये रिश्ता हमेशा ऐसे ही चलता रहे, यही मेरी दुआ है।

मैं राघव की हमेशा रहूँगी, चाहे कुछ भी हो जाए।

वो मेरा बेटा है, और मैं उसकी रंडी हूँ।

यही हमारी जिंदगी है, और इसमें हम बहुत खुश हैं।

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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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