biwi kamukata sex kahani
“हाय दोस्तों, मैं प्रिया। आज मैं अपनी जिंदगी के उस हिस्से को बयां करने जा रही हूं जिसने मेरी सोच बदल दी। मेरी उम्र अब 45 साल है, यह कहानी तब की है जब मैं 25 साल की थी और मेरा देवर अर्जुन 18 साल का था।”
प्रिया अपने ससुराल वापस आ चुकी थी। उसके पति राहुल कोलकाता में एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करते थे। वो साल में सिर्फ एक बार दिवाली पर ही आते थे। प्रिया का बेटा रोहन अभी सिर्फ दो साल का था। घर में प्रिया, उसका बेटा, और देवर अर्जुन रहते थे। अर्जुन कॉलेज में पहले साल का छात्र था और उसी गांव के स्कूल से पढ़ाई कर रहा था।
प्रिया के ससुराल का मकान बड़ा था—पुरानी जमींदारी हवेली जैसा। ऊपर वाले हिस्से में प्रिया और उसके पति का कमरा था, नीचे अर्जुन का। लेकिन राहुल के न होने की वजह से अर्जुन अक्सर ऊपर आ जाता था—कभी टीवी देखने, कभी खाना खाने, और कभी बस यूं ही।
प्रिया एक दिन अपनी मां से फोन पर बात कर रही थी। उसकी मां ने कहा, “बेटा, अर्जुन अब बड़ा हो गया है। उसे अच्छे से खाना देना, उसकी देखभाल करना। वो तुम्हारे पति की जगह तुम्हारा ख्याल रख सकता है।”
प्रिया ने समझा नहीं कि मां क्या कहना चाह रही है। लेकिन धीरे-धीरे उसने महसूस किया कि अर्जुन उसे कैसे देखता है। जब वो साड़ी पहनकर घर में चलती, अर्जुन की नजरें उस पर टिक जातीं। वो अब 18 साल का जवान लड़का था, और प्रिया 25 साल की खूबसूरत औरत।
एक रात की बात है। प्रिया का बेटा रोहन बुखार से परेशान था। रात के दो बजे रोहन रोने लगा। प्रिया घबरा गई। अर्जुन दौड़कर ऊपर आया। उसने कहा, “भाभी, चिंता मत करो। मैं यहां हूं।”
अर्जुन ने रोहन को गोद में लिया, उसे दवाई दिलाई, और झुलाते-झुलाते सुला दिया। प्रिया उसे देखती रही। उसे अचानक महसूस हुआ कि घर में एक मर्द का होना कितना जरूरी है। और अर्जुन अब एक मर्द बन चुका था।
रोहन के सो जाने के बाद अर्जुन ने कहा, “भाभी, अगर आपको कोई दिक्कत हो तो मुझे बता देना। मैं नीचे ही सो रहा हूं।”
प्रिया ने कहा, “रुको, अर्जुन। आज यहीं सो जाओ। अकेले मत रहो। अगर रोहन फिर उठा तो मुझे डर लगेगा।”
अर्जुन ठीक है कहकर बिस्तर के दूसरे किनारे पर लेट गया। प्रिया बीच में, रोहन को अपनी गोद में रखकर सो रही थी।
अगले दिन सुबह प्रिया जब उठी तो देखा अर्जुन उसकी तरफ मुंह करके सो रहा था। उसकी नजर अर्जुन के चेहरे पर गई—वो कितना हैंडसम लग रहा था। उसकी नींद खुली तो प्रिया को देखकर शरमा गया।
“सुबह हो गई, भाभी?”
“हां, तुम नहा लो। मैं चाय बनाती हूं।”
धीरे-धीरे यह रूटीन बन गया। अर्जुन अक्सर रात को ऊपर आकर सो जाता। प्रिया को भी उसकी मौजूदगी अच्छी लगने लगी। वो अकेलेपन में डूबी जिंदगी में एक रोशनी सी लगने लगा था।
एक हफ्ते बाद, रोहन अपनी नानी के घर गया था। प्रिया घर में अकेली थी। शाम को अर्जुन कॉलेज से आया तो देखा प्रिया रसोई में काम कर रही थी। उसने साड़ी पहनी हुई थी—हल्की नीली रंग की।
“भाभी, आज रोहन नहीं है?”
“नहीं, वो मां के पास गया है। तीन दिन बाद आएगा।”
अर्जुन चुप हो गया। प्रिया ने महसूस किया कि घर में एक अजीब सी खामोशी है। दोनों को एक-दूसरे की मौजूदगी का एहसास हो रहा था, लेकिन कोई बात नहीं कर रहा था।
रात को खाना खाने के बाद अर्जुन ऊपर नहीं गया। वो नीचे बैठा टीवी देख रहा था। प्रिया आकर उसके पास बैठी।
“क्या देख रहे हो?”
“कुछ नहीं, भाभी। बस यूं ही।”
प्रिया ने नोटिस किया कि अर्जुन उससे आंख मिलाने से कतरा रहा था। उसे समझ आया कि लड़के के मन में क्या चल रहा है। उसे भी कुछ हो रहा था, लेकिन वो खुद को रोक रही थी।
“अर्जुन, तुम ऊपर आकर सो जाओ। अकेले मन नहीं लग रहा।”
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा। उसकी आंखों में कुछ था—एक लालसा, एक चाह, एक डर भी।
“भाभी, क्या सही है?”
“क्या मतलब?”
“मतलब… मैं और आप… अकेले…”
प्रिया ने उसका हाथ पकड़ा। “आओ।”
ऊपर के कमरे में, प्रिया ने दरवाजा बंद किया। अर्जुन खड़ा था, उसका दिल तेजी से धड़क रहा था। प्रिया ने उसके कंधे पर हाथ रखा।
“अर्जुन, तुम अब बड़े हो गए हो। मैं जानती हूं तुम मुझे कैसे देखते हो।”
“भाभी, मैं…”
“शhh… कुछ मत कहो।”
प्रिया ने अपनी साड़ी का पल्लू गिरा दिया। अर्जुन की सांसें तेज हो गईं। उसने कभी सोचा नहीं था कि यह सच में होगा।
“क्या तुम मेरी देखभाल करोगे? जैसे एक पति करता है?”
अर्जुन ने हां में सिर हिलाया। उसका हाथ कांप रहा था। प्रिया ने उसका हाथ पकड़कर अपनी कमर पर रखा।
“डरो मत।”
उस रात, दोनों ने एक-दूसरे को जाना। अर्जुन पहली बार किसी औरत के करीब आया था, और प्रिया को पहली बार किसी ने इतनी लगन से चूमा था। राहुल तो हमेशा जल्दी में रहते थे, लेकिन अर्जुन… अर्जुन ने हर पल को महसूस किया।
अगले दिन सुबह, प्रिया उठी तो अर्जुन उसके बगल में सो रहा था। उसने अर्जुन के बालों में हाथ फेरा। उसे लगा कि उसकी जिंदगी बदलने वाली है।
लेकिन उसे नहीं पता था कि आगे क्या होने वाला था…
अगले दिन सुबह जब अर्जुन की आंख खुली, तो वो प्रिया को अपनी बांहों में पाकर चौंक गया। एक पल के लिए उसे लगा कि यह कोई सपना था, लेकिन प्रिया की गर्म सांसें उसकी छाती पर महसूस हो रही थीं। यह सच था।
“भाभी… उठो,” अर्जुन ने धीरे से कहा।
प्रिया ने आंखें खोलीं और अर्जुन को देखकर मुस्कुराई। “कितने बजे हैं?”
“साढ़े आठ। मुझे कॉलेज जाना है।”
प्रिया ने उसका चेहरा अपने हाथों में लिया। “पहले नहा लो, फिर मैं तुम्हारे लिए नाश्ता बनाती हूं।”
अर्जुन उठा, लेकिन प्रिया ने उसका हाथ पकड़ लिया। “एक मिनट रुको।” उसने अर्जुन को अपनी ओर खींचा और उसके होठों पर एक लंबा चुंबन दिया। “जाओ।”
अर्जुन नहाने चला गया। प्रिया बिस्तर पर लेटी रही, छत की तरफ देख रही थी। उसे समझ नहीं आ रहा था कि कल रात जो हुआ, वो सही था या गलत। लेकिन उसके शरीर ने जो अनुभव किया था, वो उसे बहुत समय बाद मिला था।
दोपहर को जब अर्जुन कॉलेज से लौटा, तो प्रिया ने उसके लिए खास खाना बनाया था। दोनों ने साथ में खाना खाया, लेकिन दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी थी। शायद दोनों यही सोच रहे थे कि आगे क्या होगा।
शाम को प्रिया ने अर्जुन से कहा, “आज रात को तुम ऊपर ही सोना।”
अर्जुन ने उसकी तरफ देखा। “भाभी, अगर किसी को पता चल गया तो?”
“किसे पता चलेगा? इस घर में तो सिर्फ हम दोनों हैं। और रोहन तो तीन दिन बाद आएगा।”
उस रात, अंधेरे कमरे में, दोनों ने फिर एक-दूसरे को पाया। इस बार कोई जल्दबाजी नहीं थी। अर्जुन अब थोड़ा आत्मविश्वास से भरा हुआ था। उसने प्रिया को अपने हिसाब से प्यार किया—उसके हर अंग को छुआ, हर कोने को चूमा।
प्रिया ने महसूस किया कि अर्जुन सीख रहा था। वो उसकी हर प्रतिक्रिया को देखता, उसकी हर सांस को सुनता। राहुल कभी ऐसा नहीं करते थे—वो हमेशा अपनी संतुष्टि में लगे रहते थे।
“तुम बहुत अच्छे हो, अर्जुन,” प्रिया ने धीरे से कहा।
“भाभी, मैं… मैं आपसे प्यार करने लगा हूं,” अर्जुन ने कहा।
प्रिया चौंक गई। उसने सोचा था कि यह सिर्फ शारीरिक आकर्षण है, लेकिन अर्जुन के शब्दों में वो गहराई महसूस कर रही थी।
“अर्जुन, समझो… मैं तुम्हारी भाभी हूं। तुम्हारे भाई की पत्नी। यह रिश्ता… यह इतना आसान नहीं है।”
“मुझे पता है। लेकिन मैं क्या करूं? मैं आपके बिना नहीं रह सकता।”
प्रिया ने उसे अपनी बांहों में भर लिया। “चलो, अभी सो जाओ। कल बात करेंगे।”
अगले दो दिन, दोनों के बीच वही सिलसिला जारी रहा। दिन में अर्जुन कॉलेज जाता, शाम को लौटता, और रात को प्रिया के कमरे में। दोनों एक-दूसरे में खो जाते—जैसे दुनिया से बाहर कोई दूसरी दुनिया हो।
तीसरे दिन, रोहन के आने से पहले, प्रिया ने अर्जुन से गंभीरता से बात की।
“सुनो, रोहन आ रहा है। अब हमें सावधान रहना होगा। कोई भी गलती और सब खत्म हो जाएगा।”
“मैं समझता हूं, भाभी,” अर्जुन ने कहा। “लेकिन मैं अब नीचे नहीं सो सकता। मैं आपके बिना…”
“शhh… मैं जानती हूं। लेकिन हमें इंतजार करना होगा। सही मौके का।”
शाम को रोहन आ गया। घर में फिर से बच्चे की किलकारियां गूंजने लगीं। अर्जुन वापस नीचे अपने कमरे में चला गया, लेकिन अब हर रात उसकी आंखों में नींद नहीं होती थी। वो प्रिया को याद करता, उसकी खुशबू याद करता।
प्रिया भी परेशान थी। रोहन के होते हुए वो अर्जुन के पास नहीं जा सकती थी। लेकिन उसका दिल उसे खींचता था।
एक हफ्ते बाद, रोहन फिर से बीमार पड़ गया। उसे बुखार था। प्रिया ने उसे दवाई दी और सुला दिया। रात के ग्यारह बजे थे। प्रिया सो नहीं पा रही थी। उसने सोचा, शायद अर्जुन भी जाग रहा होगा।
वो धीरे से नीचे उतरी। अर्जुन का कमरा अंधेरा था, लेकिन दरवाजा खुला था। उसने अंदर झांका—अर्जुन बिस्तर पर लेटा था, लेकिन उसकी आंखें खुली थीं।
“भाभी?” अर्जुन ने धीरे से पुकारा।
“क्या तुम सो नहीं रहे?” प्रिया ने पूछा।
“आपके बिना कैसे सोऊं?”
प्रिया अंदर आ गई। उसने दरवाजा बंद किया। “सिर्फ आज रात। फिर नहीं। रोहन बीमार है, मुझे ऊपर जाना होगा।”
अर्जुन ने उसे अपनी ओर खींचा। उस रात, दोनों ने जल्दी में, लेकिन गहरे जज्बात के साथ एक-दूसरे को पाया। प्रिया ने अर्जुन से कहा, “मुझे जाना होगा।”
“एक मिनट रुको,” अर्जुन ने कहा। “मैं भी आऊं ऊपर? मैं रोहन को देख लूंगा। आप थकी होंगी।”
प्रिया ने सोचा। अगर अर्जुन ऊपर आ जाए, तो वो उसके पास रह सकती है। “ठीक है। लेकिन चुपचाप।”
ऊपर के कमरे में, रोहन सो रहा था। प्रिया और अर्जुन बिस्तर के दूसरे किनारे पर लेट गए। अर्जुन ने प्रिया को अपनी बांहों में लिया। “भाभी, मैं आपको खोना नहीं चाहता।”
“मैं भी नहीं,” प्रिया ने धीरे से कहा।
अगली सुबह, रोहन उठा तो अर्जुन को अपने पास देखकर खुश हो गया। “चाचू!”
अर्जुन ने उसे गोद में उठाया। प्रिया उन्हें देखकर मुस्कुराई। उसे लगा कि शायद यह रिश्ता ऐसे ही चल सकता है—छुपकर, लेकिन प्यार से।
लेकिन उसे नहीं पता था कि उसके पति राहुल का फोन आने वाला था, और वो दिवाली पर घर आ रहे थे…
NEXT PART: पति को मूर्ख बना देवर से चुदवाया-2
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Pingback: पति को मूर्ख बना देवर से चुदवाया-2 - Antahvasna