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कुछ महीने पहले दीवाली का त्योहार था। हमारे पूरे खानदान का जमावड़ा हुआ था हमारे पैतृक घर में जो एक छोटे से कस्बे में था।
घर तीन मंजिला था और पूरे परिवार के सदस्य आए हुए थे – चाचा, चाची, मामा, मामी, फुआ, फूफा, और उनके बच्चे। मैं, प्रिया, 19 साल की थी और मेरे ममेरे भाई, आदित्य, 20 साल का था।
हम दोनों बचपन से ही एक-दूसरे के बहुत करीब थे।
दीवाली की रात को पटाखे फोड़ने, मिठाइयां खाने और पूजा-पाठ के बाद सब थककर सो गए थे। घर में इतने लोग थे कि सोने की जगह नहीं थी। नीचे के कमरों में बड़े-बुजुर्ग सो रहे थे। दूसरी मंजिल पर चाचा-चाची और उनके बच्चे थे। मैं और मेरी मम्मी-पापा तीसरी मंजिल पर जाने वाले थे लेकिन वहां पापा के एक दोस्त का परिवार आ गया जो अचानक आए थे।
मम्मी ने मुझसे कहा, “प्रिया, तुम छत पर चली जाओ। वहां मोंटी पर जगह बना लो। मैं और तुम्हारे पापा बरामदे में सो लेंगे।”
मैंने कहा, “ठीक है मम्मी।”
मैं छत की तरफ गई। सीढ़ियां लकड़ी की थीं और पुरानी होने के कारण थोड़ी आवाज करती थीं। जब मैं छत पर पहुंची तो देखा कि वहां पहले से ही कोई था। अंधेरे में मैंने पहचाना – यह तो आदित्य भैया थे।
“भैया, आप यहां?” मैंने पूछा।
“हां प्रिया, मुझे भी कोई जगह नहीं मिली। नीचे सब जगह भरी हुई है। तुम भी यहीं सोने आई हो?” उसने पूछा।
“हां, मम्मी ने कहा छत पर चली जा।”
“ठीक है, आओ। मैंने यहां मोंटी पर बिछावन बिछा रखा है। तुम एक तरफ सो जाओ, मैं दूसरी तरफ।”
मोंटी पर दो गद्दे थे और बीच में एक कंबल बिछा हुआ था। मैंने अपना गद्दा एक तरफ रखा और आदित्य भैया ने अपना दूसरी तरफ। बीच में करीब दो-ढाई फीट की जगह थी। छत पर हल्की-हल्की ठंडी हवा चल रही थी। आसमान में तारे चमक रहे थे। दूर से पटाखों की आवाजें आ रही थीं लेकिन हमारे घर के आस-पास शांति थी।
मैंने कंबल ओढ़ लिया और सोने की कोशिश करने लगी। लेकिन नींद नहीं आ रही थी। शायद पटाखों की आवाजों से या फिर नई जगह की वजह से।
“भैया, आप सो गए?” मैंने धीमी आवाज में पूछा।
“नहीं प्रिया, नींद नहीं आ रही। तुम्हें भी नहीं आ रही?” उसने जवाब दिया।
“नहीं आ रही।”
“तो बातें करते हैं। बताओ, कॉलेज में क्या चल रहा है? कोई बॉयफ्रेंड बना लिया?” उसने मजाक में पूछा।
“भैया!” मैंने शरमाते हुआ कहा।
“अरे क्या हुआ? अब तो बड़ी हो गई हो। 19 साल की हो। मेरे कॉलेज में तो लड़कियां 18-19 साल में ही…”
“क्या?” मैंने पूछा।
“कुछ नहीं,” उसने कहा।
“नहीं बताओ ना। आप भी तो मेरे भाई जैसे हो। मम्मी-पापा से जो नहीं कह सकती, आपसे तो कह सकती हूं।”
“ठीक है। मेरे कॉलेज में लड़कियां इस उम्र में सेक्स करती हैं।”
मैं चुप रही। यह सुनकर मेरे दिल की धड़कन तेज हो गई। मैंने कभी किसी से इन बातों पर खुलकर बात नहीं की थी।
“तुमने कभी…?” उसने पूछा।
“नहीं भैया,” मैंने कहा, “लेकिन…”
“क्या?”
“कुछ नहीं।”
“बताओ ना प्रिया। हम दोनों अकेले हैं। कोई नहीं सुन रहा।”
“बस मैंने सोचा है कभी-कभी… कैसा होता होगा…”
“किसके बारे में?”
“सेक्स के बारे में।”
आदित्य भैया थोड़ा पास खिसक आए। अब हमारे बीच एक फीट से भी कम दूरी थी।
“तो क्या कभी किसी लड़के को पसंद किया?” उसने पूछा।
“एक को किया था। पर वो…”
“क्या?”
“वो बस मुझे यूज़ करना चाहता था। मैंने मना कर दिया तो वो दूसरी लड़की के पास चला गया।”
“कमीना,” आदित्य ने कहा, “अगर मैं वहां होता तो उसे…”
“क्या करते?”
“उसे बताता कि मेरी बहन के साथ ऐसा बर्ताव नहीं करते।”
मुझे अच्छा लगा। मैंने कहा, “थैंक्स भैया।”
“वैसे प्रिया, तुम बहुत सुंदर हो। कोई भी लड़का तुम्हें पसंद करेगा।”
“सच में?”
“हां। तुम्हारी आंखें… और तुम्हारे बाल…”
वो मेरी तरफ देख रहा था। अंधेरे में भी मैं उसकी आंखों की चमक देख सकती थी।
“भैया, आपकी कोई गर्लफ्रेंड है?” मैंने पूछा।
“थी एक। पर अब नहीं है।”
“क्यों?”
“वो… वो बस फिजिकल रिलेशन चाहती थी। कोई भावनाएं नहीं थीं।”
“मतलब?”
“मतलब वो सिर्फ सेक्स करना चाहती थी। रिलेशनशिप नहीं।”
“ओह।”
“हां। तो मैंने उसे छोड़ दिया।”
“लेकिन लड़के तो यही चाहते हैं ना?”
“सब नहीं प्रिया। कुछ लड़के सच्चा प्यार भी करते हैं।”
“आप भी?” मैंने पूछा।
“मैं… मैं तो…”
“क्या?”
“मैं तो किसी से प्यार करता हूं पर कह नहीं सकता।”
“क्यों?”
“क्योंकि वो… वो मेरे बहुत करीब है। और यह गलत होगा।”
मेरा दिल तेजी से धड़कने लगा। कहीं वो…?
“कौन है वो भैया?” मैंने पूछा।
“नहीं बता सकता प्रिया।”
“प्लीज़। मैं किसी को नहीं बताऊंगी। वादा करती हूं।”
आदित्य ने एक गहरी सांस ली। फिर उसने कहा, “तुम हो वो।”
मैं चौंक गई। मेरे कानों में गूंज रहा था – “तुम हो वो।”
“भैया…”
“मुझे पता है यह गलत है। तुम मेरी ममेरी बहन हो। लेकिन मैं तुम्हें बचपन से ही… जब से हम समझदार हुए हैं… मैं तुम्हें अलग नजर से देखता हूं।”
मैं कुछ नहीं बोल पा रही थी। मेरे मन में भी कुछ था जो मैंने कभी स्वीकार नहीं किया था। आदित्य भैया हमेशा से मेरे पसंदीदा रिश्तेदार थे। जब भी वो आते थे, मैं खुश हो जाती थी। जब वो मुझे छूते थे, मुझे अलग सा महसूस होता था।
“प्रिया, तुम चुप क्यों हो? क्या तुम मुझे बुरा समझ रही हो?” उसने पूछा।
“नहीं भैया,” मैंने धीमी आवाज में कहा, “मैं… मैं भी…”
“क्या?”
“मैं भी आपको…”
मैंने अपना वाक्य पूरा नहीं किया। आदित्य ने मेरा हाथ पकड़ लिया। उसका हाथ गर्म था। मैंने भी उसका हाथ कसकर पकड़ लिया।
“प्रिया, अगर तुम मना करो तो मैं कुछ नहीं करूंगा। लेकिन अगर तुम भी…”
मैंने उसकी बात बीच में ही रोक दी। मैंने अपना चेहरा उसकी तरफ किया और अपने होंठ उसके होंठों पर रख दिए।
वो पहले तो चौंका, फिर उसने भी मुझे किस करना शुरू कर दिया। हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे। उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली और मैंने भी अपनी जीभ उससे लड़ाई की।
करीब पांच मिनट तक हम एक-दूसरे को किस करते रहे। फिर उसने मुझे अपनी बांहों में भर लिया। मैं उसकी छाती से लग गई। उसने धीरे से मेरे बालों को सहलाया।
“प्रिया, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूं,” उसने कहा।
“मैं भी भैया,” मैंने कहा।
“भैया मत कहो। आदित्य कहो।”
“आदित्य,” मैंने धीमी आवाज में कहा।
उसने मेरा चेहरा उठाया और फिर से किस किया। इस बार और गहरा, और जोशीला। उसने अपना हाथ मेरी कमर पर रखा और फिर धीरे-धीरे ऊपर बढ़ाया। मैंने नाइटी पहनी हुई थी। उसने मेरी नाइटी के ऊपर से ही मेरे स्तनों को सहलाना शुरू किया।
“उम्माह…” मेरी सांसें तेज हो गईं।
“क्या हुआ? अच्छा लग रहा है?” उसने पूछा।
“हां,” मैंने कहा।
उसने मेरी नाइटी ऊपर उठाई। मैंने नीचे ब्रा नहीं पहनी थी। उसने मेरे स्तनों को देखा और कहा, “कितने सुंदर हैं तुम्हारे।”
फिर वो झुककर मेरे एक निप्पल को मुंह में ले लिया। वो उसे चूसने लगा, काटने लगा। मैं आहें भरने लगी। दूसरे हाथ से वो दूसरे स्तन को दबा रहा था।
“आह… आदित्य… और जोर से…”
वो और जोर से चूसने लगा। मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ रहा था। मैंने अपने हाथ उसके बालों में फेर दिए और उसका मुझ में दबा दिया।
करीब दस मिनट तक वो मेरे स्तनों से खेलता रहा। फिर उसने नीचे का हाथ बढ़ाया। मैंने पैंटी पहनी हुई थी। उसने मेरी पैंटी के ऊपर से ही मेरी चूत को सहलाया।
“ओह… गीली हो गई हो तुम,” उसने कहा।
“हां,” मैंने शर्माते हुए कहा।
“मैं देखूं?”
मैंने हां में सिर हिलाया। उसने मेरी पैंटी नीचे खींची। मैंने अपने पैर थोड़े फैला दिए। उसने मेरी चूत को छुआ।
“कितनी सुंदर है तुम्हारी चूत,” उसने कहा, “और कितनी गीली।”
फिर उसने अपनी एक उंगली अंदर डाली। मैंने कराहते हुए कहा, “आह… धीरे…”
“दर्द हो रहा है?”
“थोड़ा… लेकिन अच्छा लग रहा है।”
वो उंगली अंदर-बाहर करने लगा। मैं पागल हो रही थी। फिर उसने दो उंगलियां डाल दीं।
“आह… हां… और अंदर…”
वो मेरी चूत में उंगलियां करने लगा और ऊपर से मेरे स्तन चूसने लगा। मैंने अपने मुंह पर हाथ रख लिया क्योंकि मुझे चीखने का मन हो रहा था लेकिन नीचे लोग सो रहे थे।
“मैं झड़ने वाली हूं,” मैंने कहा।
“झड़ो मेरी जान,” उसने कहा।
और मैं झड़ गई। मेरी चूत से पानी निकलकर उसकी हथेली पर गिरा। उसने अपनी उंगलियां चाटीं और कहा, “तुम्हारा स्वाद बहुत अच्छा है।”
अब मेरी बारी थी। मैंने उसे लेटाया और उसके कपड़े खोलने लगी। उसने शॉर्ट्स और टी-शर्ट पहनी हुई थी। मैंने उसकी टी-शर्ट ऊपर उठाई। उसकी छाती पर हल्के-हल्के बाल थे। मैंने उसकी छाती पर चूमी की। फिर मैं नीचे बढ़ी और उसकी शॉर्ट्स खोली।
उसके अंदर अंडरवियर था। वो तनकर खड़ा था। मैंने अंडरवियर के ऊपर से ही उसे सहलाया। वो कराहने लगा।
“प्रिया… अंदर निकालो…”
मैंने उसका अंडरवियर नीचे खींचा और उसका लंड बाहर आ गया। वो करीब 7 इंच का था, मोटा और एकदम कड़ा। मैंने उसे हाथ में लिया। वो गर्म था, कड़ा था, और कांप रहा था।
“कितना बड़ा है,” मैंने कहा।
“तुम्हारे लिए है,” उसने कहा।
मैंने उसे हिलाना शुरू किया। वो आंखें बंद करके मज़े ले रहा था। फिर मैंने झुककर उसके लंड पर चूमी की। वो चौंका।
“प्रिया… तुम…”
“चुप रहो,” मैंने कहा और उसका लंड मुंह में ले लिया।
मैं उसे चूसने लगी। पहले धीरे-धीरे, फिर तेज़। वो अपने हाथों से मेरे सिर को दबाने लगा और अपने कूल्हे उठा-उठाकर मेरे मुंह में लंड पेलने लगा।
“आह… प्रिया… बहुत अच्छा लग रहा है…”
मैं लगभग 15 मिनट तक उसका लंड चूसती रही। फिर उसने मुझे रोका।
“अब और नहीं… नहीं तो मैं झड़ जाऊंगा… और मैं तुम्हें अंदर लेना चाहता हूं…”
मैंने उसे देखा। वो मुझे लेटा देना चाहता था। मैं लेट गई। उसने मेरे पैर फैलाए और मेरी चूत पर अपना लंड रखा।
“दर्द होगा थोड़ा,” उसने कहा, “पहली बार है ना?”
“हां,” मैंने कहा, “लेकिन पहले मैंने…”
“क्या?”
“कुछ नहीं… बस आराम से डालो।”
उसने धीरे से धक्का दिया। उसका लंड का सिरा अंदर चला गया। मुझे दर्द हुआ लेकिन अच्छा भी लगा। फिर उसने एक जोरदार धक्का दिया और आधा लंड अंदर घुसा दिया।
“आह…” मैंने कराही।
“दर्द हो रहा है?” उसने पूछा।
“थोड़ा… पर रुको मत… और अंदर डालो…”
उसने एक और धक्का दिया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। मेरी चूत पूरी तरह भर गई थी। वो मेरे ऊपर झुक गया और मुझे किस करने लगा। फिर वो धीरे-धीरे झटके लगाने लगा।
“फच… फच…” की आवाज़ आ रही थी। मेरी चूत गीली थी इसलिए लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।
“कैसा लग रहा है?” उसने पूछा।
“बहुत अच्छा… और तेज़ करो…”
वो तेज़ हो गया। वो मेरे दोनों पैर अपने कंधों पर रखकर चोदने लगा। मैंने अपने मुंह पर हाथ रखा था क्योंकि मुझे चीखना था। वो जोर-जोर से झटके लगा रहा था और मेरी चूत को चोद रहा था।
“तुम्हारी चूत बहुत टाइट है प्रिया… बहुत मज़ा आ रहा है…”
“मुझे भी… आह… हां… और जोर से…”
वो पागलों की तरह मुझे चोद रहा था। मेरी चूत से पानी निकल रहा था जो उसके लंड पर लगकर और भी चिकना कर रहा था। करीब 20 मिनट तक वो मुझे इसी तरह चोदता रहा।
फिर उसने मुझे घुमाकर कुत्ते की तरह कर दिया। मैंने अपने हाथ आगे रखे और कूल्हे हवा में उठा दिए। उसने मेरे नितंबों को चौड़ा किया और मेरी चूत में फिर से लंड डाल दिया।
“आह… यह पोजीशन और भी अच्छी है…” मैंने कहा।
“हां… तुम्हारी चूत और भी अंदर से टाइट लग रही है…”
वो मेरे नितंबों पर थप्पड़ मारते हुए चोद रहा था। मेरे नितंब लाल हो गए थे लेकिन मुझे मज़ा आ रहा था। फिर उसने अपनी एक उंगली मेरी गांड के छेद पर रखी।
“यहां भी डालूं?” उसने पूछा।
“नहीं… अभी नहीं… बाद में…”
“ठीक है।”
वो फिर से मेरी चूत चोदने लगा। इस बार और तेज़, और जोर से। मेरी चूत फच-फच की आवाजें कर रही थीं। मैं झड़ने वाली थी।
“मैं झड़ने वाली हूं आदित्य…”
“मैं भी… एक साथ…”
और हम दोनों एक साथ झड़ गए। उसने अपना गरम वीर्य मेरी चूत में ही छोड़ दिया। मैंने महसूस किया कि उसका लंड कांप रहा है और मेरी चूत में गर्म तरल भर रहा है।
वो मेरे ऊपर गिर गया। हम दोनों सांसें ले रहे थे। करीब पांच मिनट बाद उसने अपना लंड बाहर निकाला। मेरी चूत से हम दोनों का मिश्रित रस बहकर नीचे गद्दे पर गिरा।
हम दोनों एक-दूसरे से लिपटकर लेटे रहे। उसने मुझे किस किया और कहा, “मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं प्रिया।”
“लेकिन हम रिश्तेदार हैं…”
“ममेरे भाई-बहन शादी कर सकते हैं। कानून अनुमति देता है।”
“सच में?”
“हां। और मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकता।”
मैंने उसे गले लगा लिया। हमने फिर से किस किया और उस रात दो बार और चुदाई की। सुबह जब उठे तो हम दोनों बहुत खुश थे। हमने तय किया कि हम अपने परिवार को धीरे-धीरे इस बारे में बताएंगे।
उस दिन के बाद से हम दोनों एक-दूसरे के हो गए। जब भी मौका मिलता, हम चुदाई करते। और आज, दो साल बाद, हमारी शादी होने वाली है। हमारे परिवार ने मंजूरी दे दी है। क्योंकि वो देख चुके हैं कि हम एक-दूसरे के लिए कितने परफेक्ट हैं।
प्यार को कोई रिश्ता नहीं रोक सकता। ना दूरी, ना उम्र, और ना ही खून का रिश्ता। जब दिल मिलते हैं, तो सब कुछ मिल जाता है।
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