husband cuckold fantasy
मेरा नाम अर्जुन है और मेरी पत्नी का नाम सारा है।
हमारी शादी को दो साल हो चुके हैं और हम दिल्ली में रहते हैं।
सारा की उम्र 22 साल है और मैं 25 साल का हूँ, लेकिन लोग अक्सर हमें कॉलेज के छात्र-छात्रा समझ लेते हैं।
सारा दिखने में बेहद मासूम है – गोल चेहरा, बड़ी-बड़ी आंखें, और एक ऐसी मुस्कान जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेती है।
लेकिन यह मासूमियत सिर्फ़ चेहरे तक सीमित है।
उसका शरीर बिल्कुल परिपक्व महिला का है।
सारा की हाइट 5’4″ है, लेकिन उसके शरीर के अनुपात इतने परफेक्ट हैं कि वो किसी भी पोशाक में बेहद सेक्सी लगती है।
उसके स्तनों का साइज़ 34C है – गोल, उभरे हुए, और हमेशा ऐसे लगता है जैसे ब्लाउज़ उन्हें कसकर पकड़े हुए है।
उसकी कमर 26 इंच की है और नितंब… ओह उसके नितंब! 36 इंच के वो दो गोल गुब्बारे जब वो चलती है तो ऐसे लगता है जैसे साड़ी या जींस उन पर नाच रही हो।
मुझे यह बात हमेशा से बेहद उत्तेजित करती है कि दूसरे पुरुष मेरी पत्नी को देखें, उसके बारे में सोचें, उसे घूरें। यह एक अजीब सी कामुकता है जो मुझे शुरू से ही रही है।
शायद यह इसलिए है क्योंकि मुझे पता है कि सारा सिर्फ़ मेरी है, लेकिन दूसरों की नज़रों में उसे देखना… यह अलग ही रोमांच है।
हम अक्सर शाम को कनॉट प्लेस या साउथ एक्सटेंशन की मार्केट में घूमने जाते हैं।
मैं जानबूझकर सारा को ऐसी पोशाकें पहनने के लिए कहता हूँ जो थोड़ी उत्तेजक हों लेकिन पूरी तरह से अश्लील न हों।
उसे साड़ियाँ बेहद पसंद हैं, खासकर वो लो कट वाले ब्लाउज़ जो उसकी गोरी पीठ और क्लीवेज़ को ठीक से ढकते-ढकते झलकाते हैं।
एक शनिवार की शाम थी। हम साउथ एक्सटेंशन के एक बड़े शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में थे।
सारा ने उस दिन एक नीली सिल्क की साड़ी पहनी थी जिसका ब्लाउज़ बहुत ही गहरा कट वाला था।
पीछे से तो पूरा खुला था, सिर्फ़ दो डोरियाँ कंधों पर थीं। जब वो आईने के सामने तैयार हो रही थी, तो मैंने कहा कि ब्रा मत पहनो।
“अर्जुन, तुम पागल हो गए हो?” उसने शर्माते हुए कहा।
“प्लीज़ सारा, तुम्हें पता है मुझे कितना मज़ा आता है। और वैसे भी, ब्लाउज़ ऐसा है कि कोई नोटिस नहीं करेगा… जब तक तुम जानबूझकर कुछ न करो।”
वो मान गई। वो हमेशा मेरी खुशी के लिए कुछ भी करने को तैयार रहती है।
जब हम मॉल में घूम रहे थे, तो मैं जानबूझकर थोड़ी दूरी पर चलता रहा।
मैंने देखा कि कैसे हर उम्र के पुरुष – युवा लड़के, मध्यम आयु वर्ग के पति, और बुज़ुर्ग भी – सारा को घूर रहे थे।
वो जब किसी दुकान पर रुकती और झुककर कुछ देखती, तो उसके ब्लाउज़ से उसके गोरे स्तनों का ऊपरी हिस्सा साफ़ दिखता। वो सफेद थे, बिल्कुल दूध जैसे, और बीच में वो गहरी लाइन…
मेरा दिल धड़क रहा था। मेरे हाथ कांप रहे थे। और सबसे बेहतर बात यह थी कि सारा भी इससे अछूती नहीं थी।
मैंने देखा कि उसके गाल थोड़े लाल हो गए थे, और वो जानबूझकर कभी-कभी अपने बालों को ठीक करने के लिए अपने हाथ ऊपर उठाती जिससे उसकी कमर और नितंब और भी अच्छी तरह साड़ी में सजकर दिखते।
शाम के 7 बज चुके थे और हमारी कार पार्किंग में खड़ी थी। हमने बहुत शॉपिंग की थी और थक भी गए थे।
लेकिन मेरे अंदर एक अजीब सी बेचैनी थी। मैंने सारा से कहा, “थोड़ी देर कार में बैठते हैं, फिर चलेंगे।”
हमारी कार एक कोने में खड़ी थी, पीछे एक खाली दीवार थी और बगल में एक बड़ा पिलर था जिससे हमें आंशिक रूप से छिपाया हुआ था।
लेकिन सामने से कोई भी आता तो अंदर साफ़ देख सकता था। कार का शीशा हल्का टिंटेड था लेकिन रात में लाइट जलने पर अंदर सब कुछ दिखता था।
मैंने ड्राइवर सीट पर बैठकर सारा को अपनी तरफ़ खींचा। वो मेरे बगल में आकर बैठ गई। मैंने उसके होंठों पर चूमा और धीरे से उसके ब्लाउज़ में हाथ डाल दिया।
“अर्जुन, यहाँ नहीं… कोई देख लेगा,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
“तो देखने दो,” मैंने कहा, “तुम्हें पता है ना मुझे कैसा लगता है।”
वो शर्मा गई लेकिन मना नहीं किया। मैंने उसके स्तनों को सहलाना शुरू किया।
वो गर्म हो चुकी थी। मैंने उसके निप्पलों को दबाया जो पहले से ही कड़े हो चुके थे। साड़ी के पारदर्शी कपड़े से वो साफ़ झलक रहे थे।
तभी मेरी नज़र एक आदमी पर पड़ी। वो 40-45 साल का लग रहा था, सूट-बूट में, शायद किसी ऑफिस से आ रहा था।
उसने हमारी कार को देखा और रुक गया। वो शायद सोच रहा था कि अंदर क्या हो रहा है। मैंने जानबूझकर कार की लाइट ऑन कर दी ताकि वो थोड़ा साफ़ देख सके।
सारा ने मुझे घूरा, “तुमने लाइट क्यों जलाई?”
“ताकि तुम्हारी खूबसूरती सब देख सकें,” मैंने कहा और उसके ब्लाउज़ के हुक खोलने लगा।
“अर्जुन, नहीं… प्लीज़…” वो घबराई लेकिन मैंने उसका ब्लाउज़ खोल दिया।
उसके गोरे स्तन बाहर आ गए, निप्पल कड़े और गुलाबी। मैंने उसे पीछे की सीट पर धकेल दिया और खुद भी पीछे आ गया।
वो आदमी अब और पास आ गया था। वो कार के पास से गुज़र रहा था और अंदर झांक रहा था।
सारा ने अपने हाथों से अपने स्तन ढकने की कोशिश की लेकिन मैंने उसके हाथ हटा दिए।
“देखो सारा, वो आदमी तुम्हें देख रहा है,” मैंने उसके कान में फुसफुसाया, “वो तुम्हारे स्तन देख रहा है। उसे पसंद आ रहे हैं।”
सारा ने उस आदमी की तरफ़ देखा और शर्म से उसका चेहरा लाल हो गया।
लेकिन मैंने देखा कि उसने अपने हाथ हटा लिए थे। वो उस आदमी को अपने नंगे स्तन दिखा रही थी।
वो आदमी रुक गया। वो साफ़ देख सकता था। मेरा लंड पैंट में तनकर फाड़ने को तैयार हो रहा था।
मैंने सारा की साड़ी उठाई और उसकी जांघों पर हाथ फेरने लगा।
“अर्जुन…” वो मेरी तरफ़ मुड़ी और मुझे किस करने लगी। वो भी अब गर्म हो चुकी थी।
मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाना शुरू किया।
वो गीली थी। मैंने उसकी पैंटी एक तरफ़ सरकाई और अपनी उंगली अंदर डाल दी।
“आह…” उसकी सिसकी निकली।
वो आदमी अब कार के बिल्कुल पास खड़ा था। वो झुककर अंदर देख रहा था।
मैंने सारा को कहा, “उसे देखो… वो तुम्हारी चूत देखना चाहता है।”
सारा ने अपनी टांगें थोड़ी फैलाईं।
वो आदमी अब साफ़ देख सकता था – उसकी गोरी जांघें, उसकी चूत के बाल, और मेरी उंगली जो अंदर-बाहर हो रही थी।
मैंने कार की खिड़की थोड़ी नीचे की। वो आदमी झुका और बोला, “सॉरी सर, लेकिन… क्या मैं…”
मैंने पूछा, “क्या आपको मेरी पत्नी पसंद आ रही है?”
वो घबरा गया, “जी… मतलब… सॉरी…”
“अंदर आ जाइए,” मैंने कहा।
सारा ने मुझे घूरा, “अर्जुन, तुम पागल हो?”
“एक बार सिर्फ़,” मैंने कहा, “मैं देखना चाहता हूँ…”
वो आदमी हिचकिचाया लेकिन कार का दरवाज़ा खोलकर अंदर बैठ गया।
वो पीछे की सीट पर सारा के बगल में था। मैंने आगे की सीट पर बैठकर पीछे मुड़कर देखा।
“आपका नाम क्या है?” मैंने पूछा।
“रमेश,” उसने कहा।
“रमेश जी, यह मेरी पत्नी सारा है। आज उसका जन्मदिन है और मैं उसे एक तोहफ़ा देना चाहता हूँ,” मैंने कहा।
“क्या तोहफ़ा?” रमेश ने पूछा।
“आप,” मैंने कहा, “आप उसे छुएं… जहाँ चाहें।”
सारा ने मुझे देखा, उसकी आंखें हैरानी और उत्तेजना से भरी थीं।
रमेश ने हिचकिचाते हुए अपना हाथ बढ़ाया और सारा के स्तन को छुआ।
“कसकर पकड़िए,” मैंने कहा।
रमेश ने सारा के स्तन को कसकर पकड़ लिया। वो उसे मसलने लगा।
सारा की आंखें बंद हो गईं और वो कराहने लगी।
रमेश ने दूसरा हाथ भी बढ़ाया और दोनों स्तनों को पकड़कर दबाने लगा।
“कैसे हैं मेरी पत्नी के स्तन?” मैंने पूछा।
“बहुत… बहुत सुंदर,” रमेश ने कहा, “बहुत मुलायम।”
“चूसिए,” मैंने कहा।
रमेश ने झुककर सारा के एक निप्पल को मुँह में ले लिया।
वो ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगा। सारा ने उसका सिर अपने स्तन पर दबा दिया। वो आहें भर रही थी।
मैंने अपना लंड बाहर निकाल लिया और हिलाने लगा।
यह देखना बेहद उत्तेजक था – मेरी पत्नी, एक अजनबी के मुँह में अपने स्तन, और मैं यह सब देख रहा हूँ।
रमेश ने सारा की साड़ी पूरी तरह ऊपर उठा दी। वो अब सिर्फ़ पैंटी में थी नीचे से। उसने उसकी जांघों पर हाथ फेरा और धीरे से उसकी पैंटी नीचे खींची।
“प्लीज़…” सारा ने कहा लेकिन वो रुकी नहीं।
रमेश ने सारा की चूत को देखा। वो गीली थी, गुलाबी फाँकें खुली हुई थीं। उसने अपनी उंगली उस पर रखी और फिर अंदर डाल दी।
“आह… हां…” सारा ने कराहते हुए कहा।
रमेश ने उंगली अंदर-बाहर करनी शुरू की। फिर वो झुका और अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी। वो चाटने लगा, कभी ऊपर क्लिट पर, कभी नीचे छेद पर।
“ओह गॉड… अर्जुन… यह… बहुत अच्छा है…” सारा बड़बड़ा रही थी।
रमेश ने अपनी जीभ अंदर डाल दी। वो उसकी चूत को अंदर से चाट रहा था। सारा पागल होकर अपने नितंब उठा-उठाकर उसके मुँह पर दबा रही थी।
मैंने देखा कि रमेश ने अपना लंड निकाल लिया था। वो करीब 6 इंच का था, मोटा और कड़ा। वो अपने हाथ से उसे हिला रहा था।
“चोदिए उसे,” मैंने कहा।
रमेश ने सारा को घुमाकर कार की सीट पर घुटनों के बल कर दिया। उसका नितंब हवा में था। रमेश ने उसके नितंबों को चौड़ा किया और उसकी चूत पर अपना लंड रखा।
“धीरे से,” मैंने कहा, “वो बहुत टाइट है।”
रमेश ने धीरे से धक्का दिया। उसका लंड आधा अंदर चला गया। सारा ने कराहते हुए कहा, “आह… और अंदर… पूरा डालो…”
रमेश ने एक जोरदार धक्का दिया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। फिर वो झटके लगाने लगा। “फच… फच… फच…” की आवाज़ कार में गूंज रही थी।
सारा अपने सिर को सीट पर दबाए हुए थी और मुँह से आहें निकाल रही थी। रमेश ने उसके बाल पकड़े और उसका सिर पीछे खींचा। अब वो उसे कुत्ते की तरह चोद रहा था।
मैंने देखा कि सारा का एक हाथ अपनी चूत की तरफ़ था – वो अपनी क्लिट रगड़ रही थी। वो झड़ने वाली थी।
“मैं… मैं झड़ने वाली हूँ…” उसने कहा।
“रुकिए मत,” मैंने रमेश से कहा, “और तेज़…”
रमेश ने ज़ोर-ज़ोर से झटके लगाने शुरू किए। कार हिल रही थी। सारा चीखी और झड़ गई। उसकी चूत से पानी निकलकर रमेश के लंड पर गिरा।
रमेश ने अपना लंड बाहर निकाला और सारा की गांड के छेद पर रखा।
“नहीं… वहाँ नहीं…” सारा ने कहा लेकिन रमेश ने एक जोरदार धक्का दिया और उसका लंड आधा अंदर चला गया।
“आह… दर्द…” सारा चीखी।
रमेश ने उसके मुँह पर हाथ रखा और पूरा लंड अंदर घुसा दिया। फिर वो उसकी गांड चोदने लगा। सारा पहले तो दर्द से कराह रही थी लेकिन फिर उसे भी मज़ा आने लगा।
“हां… और तेज़… मारो…” वो कहने लगी।
मैंने देखा कि रमेश का चेहरा तन गया था। वो झड़ने वाला था। उसने अपना लंड बाहर निकाला और सारा की गांड में ही झड़ गया। वो कांपते हुए उसके ऊपर गिर गया।
कुछ देर बाद रमेश ने अपने कपड़े ठीक किए और कार से बाहर निकल गया। उसने मुझे धन्यवाद कहा और चला गया।
सारा थकी हुई सीट पर पड़ी थी। उसकी चूत और गांड दोनों से वीर्य टपक रहा था। मैंने झुककर उसकी चूत चाटी, उसमें भरा हुआ रस और रमेश का वीर्य मिला हुआ था।
फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत में डाला और उसे चोदा। वो दूसरी बार झड़ी और मैं भी उसके अंदर झड़ गया।
घर पहुँचने पर हम दोनों बहुत थके हुए थे लेकिन बेहद खुश थे।
सारा ने मुझे कसकर गले लगाया और कहा, “आज रात बहुत खास थी अर्जुन… तुमसे प्यार है।”
मैंने भी उसे कहा, “मुझे भी सारा… और यह सिर्फ़ शुरुआत है…”
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
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