virgin couple sex kahani
वर्जिन कपल सेक्स कहानी में एक लड़का अपनी क्लासमेट लड़की के साथ एक कमरे में था. लड़की सेक्स करना चाह रही थी लेकिन लड़का कुछ अनाड़ी सा था.
फ्रेंड्स, मैं आपको अपने साथ तैराकी करने वाली लड़की लावण्या की चुदाई की सेक्स कहानी सुना रहा था.
कहानी के पहले भाग
पहली बार जवान लड़की को गले लगाया
में अब तक आपने पढ़ा था कि रात को लावण्या ने मुझे सब कुछ सिखाने का वादा कर लिया था.
अब आगे वर्जिन कपल सेक्स कहानी:
लावण्या मुझसे बोली- पहले कमरे के पर्दे लगाओ और बाहर जाकर देख लो कि सब सेफ है या नहीं.
मैंने पर्दे लगे और बाहर आ गया.
मैंने इधर उधर देखते हुए अपने कमरे में जाकर उधर की लाइट बंद कर दी, फिर मैं वापस लावण्या के कमरे में आ गया.
आज मुझे बहुत ज्ञान प्राप्त होने वाला था … यह सोच सोच कर मेरा मन मुदित था.
कमरे में पहुंचते ही लावण्या ने कहा- चलो अब कपड़े उतारो.
मैं शर्माया तो उसने खुद के भी कपड़े उतार दिए.
हम दोनों ही अपने अंदरूनी वस्त्रों में थे.
उसकी काया बहुत चिकनी, सांवली और खिलाड़ी होने के कारण बहुत मजबूत भी थी, एक ग्राम भी चर्बी नहीं थी, लंबे और मांसल हाथ, केले के पेड़ के तने सी जांघें, सपाट पेट और गहरी नाभि.
उसने घूमकर दिखाया और पूछा कि मैं कैसी लग रही हूँ.
जब वह घूमी तो उसके नितंब देखकर मैं रोमांचित हो उठा.
एकदम हीरोइन लग रही थी.
उसने बताया कि जब लड़कियां बड़ी होने लगती हैं तो उनके नितंब बड़े और ज़रा चौड़े होने लगते हैं ताकि बच्चे को गर्भ में जगह मिले.
उसने हाथ उठाकर बताया कि देखो कैसे बाल आने लगते हैं बगल में …
और हंसती हुई बोली- कहीं और बाल नहीं आए?
मैंने कहा- मुझे भी बगल में आने लगे हैं और सीने पर भी.
लावण्या बहुत खूबसूरत लग रही थी और पहली बार उसमें मुझे एक लड़की नहीं, एक स्त्री दिखाई पड़ी.
वह हंसती हुई बोली- और कहीं बाल नहीं आए?
मैंने शर्माते हुए कहा- आए तो हैं, पर मैं दिखा नहीं सकता.
वह बोली- चलो, हम दोनों एक-दूसरे को दिखाते हैं.
मैंने कहा- ओके तुम शुरू करो!
उसने मुझे अपने पास खींचकर कहा- टॉस करते हैं, जो हारेगा वह पहले दिखाएगा.
मेरी बदकिस्मत, मैं हार गया.
मैंने आंखें बंद कर लीं और चड्डी नीचे गिरा दी.
मेरा लंड देखकर लावण्या हंसने लगी.
मुझे लगा शायद मेरा छोटा रह गया तो मैंने पूछा- क्यों हंस रही हो?
लावण्या बोली- इतना बड़ा है तुम्हारा और कितने बाल आ गए हैं.
पता नहीं, उसके बड़ा कहने से मेरे अन्दर एक अजीब सा आत्मविश्वास पैदा हुआ.
मैंने कहा- अब तुम दिखाओ.
लावण्या ने लजाते हुए अपनी पैंटी उतारी, पर मुझे कुछ दिखाई ही नहीं दिया.
मैंने कहा- किताबों में देखे चित्र जैसा तो कुछ नहीं है, बस एक दरार सी है और इतने घुँघराले बाल क्यों हैं?
वह हंसने लगी और बोली- बेटा लाल, लड़कियों का सब छुपा हुआ होता है … शरीर भी और मन भी. बस कोई अपना मिले तभी खुलकर बताती है.
उसकी ये बात मैंने जीवन भर नहीं भूली.
मैं लावण्या के पास गया और घुटनों के बल बैठ गया.
उसे देख कर मैंने पूछा- छू सकता हूँ?
वह फिर से हंसती हुई बोली- हां छू भी सकते हो और जो चाहे कर सकते हो!
मैंने पहले उसकी जांघों को छुआ और कहा- थोड़ा पैर फैला लो.
उसने पैर फैला लिए.
मुझे तब भी कुछ समझ नहीं आया और मैंने कहा- मुझे खोल कर देखना है.
वह मुझे खींचकर बिस्तर पर ले गई और बोली- देखो, मुझे अच्छे से और मन में बसा लो अब … खोल कर पेल कर जैसे देखना है सब देखो!
वर्जिन कपल में सेक्स की आग बराबर लगने लगी थी.
मेरा लंड भी अब बड़ा होने लगा था.
मैंने उंगली से उसकी चुत की फाँकों को अलग अलग किया और देखा कि अन्दर एक जोड़ी होंठ और भी हैं.
मैंने उनको भी फैला दिया और देखा अन्दर सब गुलाबी-गुलाबी है.
लावण्या के मुँह से हल्की सिसकारी निकली और उसने कहा- धीरे करो!
उसने भी नीचे हाथ डाल दिया और मेरे अंडकोष को सहलाने लगी और दबाने लगी.
लंड की चमड़ी को उसने पूरा पीछे खींच दिया और ध्यान से देखने लगी.
मैंने पूछा- पहले कभी देखा है?
उसने कहा- एक बार देखा है बस, अपने कजिन का … मेरा बहुत मन होता है.
हम दोनों ही अनजान से एक-दूसरे को देख रहे थे, छू रहे थे.
मैंने लावण्या को गले लगा लिया, उसके छोटे-छोटे संतरे जैसे स्तन पकड़ कर चूमे और निपल्स को चूसने लगा.
उसके निप्पल पेंसिल की नोक जैसे होने लगे थे.
हम दोनों ही एक-दूसरे में गुँथ गए थे और बेतहाशा एक-दूसरे को चूमने लगे थे.
हम दोनों का ही यह चुंबन का पहला अनुभव था. बिल्कुल शहद जैसा स्वाद था.
लावण्या गर्म होने लगी थी और बोलने लगी- कुछ और करते हैं!
मैंने कहा- तुम बोलो, क्या करना है?
उस ज़माने में कंडोम आदि इतनी आसानी से नहीं मिलते थे और इतनी रात को मिलते भी नहीं थे, सो हमने मुख-मैथुन करना शुरू किया.
इंसान शायद प्रकृति से सीखकर आता है कि इस मौके पर क्या करना होता है.
हम दोनों अपने आप ही 69 पोजीशन में आ गए.
लावण्या मेरे लौड़े को हिलाती हुई चूसने लगी.
मेरे लंड का सुपारा मशरूम जैसा हो गया था और वह लपलप करती हुई लौड़े को अपने मुँह में लेकर हाथ से अंडकोष दबा रही थी.
वह कभी मेरी जांघों पर हाथ लगा रही थी.
मैंने भी उसकी योनि की पंखुड़ियां खोल दी थीं और छोटे काले छेद से लेकर झांट के बालों तक की पिच चूस कर गीली कर दी थी.
एक अजीब सी खुशबू से लावण्या की चूत महक रही थी.
कुछ देर बाद वह अकड़ने लगी थी और ढेर सारी मलाई निकालने लगी थी, जिसे मैंने थूक दिया.
मुझे हस्तमैथुन का पूरा ज्ञान तो था, पर एथलीट होने की वजह से मुठ मारने से परहेज़ करता था.
लावण्या ने मेरे लौड़े को चूस कर बहुत गर्म और बड़ा कर दिया था.
देखते ही देखते मेरे लंड से रस की फुहार निकल गई.
मुझे आश्चर्य इस बात का हुआ कि लावण्या ने सब पी लिया.
मैंने पूछा- ऐसा क्यों किया?
वह बोली- मुझे स्वाद अच्छा लगा और मैं इसे बुरा नहीं मानती.
हमारी संस्कृति और समाज में सेक्स को लेकर बहुत संकुचित सोच है.
लोग अपने ही लंड चुत को गंदा मानते हैं.
लावण्या ने सिखाया कि कुछ भी गंदा नहीं होता, मन साफ़ होना चाहिए.
हम दोनों ही बहुत थक गए थे और पूरी तरह पसीने में थे.
मैंने देखा कि लावण्या मुस्कुरा रही थी.
उसने मुझे अपने कंधे पर लेकर बोली- अब सो जाओ. तुम बहुत अच्छे और स्वादिष्ट हो!
मैं उसे और पाने की नजर से देख रहा था.
उसने धक्का दिया और कहा- आज से तुम मेरे मगरमच्छ बन गए हो.
मैंने कहा- कैसा लगा?
उसने कहा- मैंने भी इतना ज्यादा नहीं सोचा था, जितना हो गया. तुम मेरे बॉयफ्रेंड बन सकते हो. मैं अपनी क्लास के लोगों को संभाल लूँगी!
मैं बहुत खुश हुआ और उसे एक चुंबन देकर बोला- अगर ऐसा है तो क्या हम साथ सो सकते हैं?
वह इतना हंसी और बोली- परमिशन लेने की ज़रूरत नहीं है, बस सुबह अपने कमरे में चले जाना!
मैंने हामी भरी और उसके साथ चिपक गया.
हम दोनों की स्थिति भूसे और आग के समान थी.
कुछ ही देर में वासना की लपटों ने भयानक रूप ले लिया और हम दोनों एक दूसरे के होंठों से होंठ जोड़ कर एक दूसरे के मुँह में अपनी जीभ देने लगे थे.
उस वक्त तक मेरा लंड अपनी पूरी औकात में आ गया था और लावण्या की चुत में टक्कर मारने लगा था.
लावण्या ने अचानक से मुझे धक्का दिया और मैं चित हो गया.
अगले ही पल वह मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे लौड़े को मुँह में लेकर चूसने लगी.
मैं भी मस्ती से उस नटखट लौंडिया को अपने लंड से खेलने दे रहा था.
अचानक से वह मेरे ऊपर चढ़ गई और मेरे लंड पर अपनी चुत लगा कर रगड़ने लगी.
उसने मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चुत की फांक में घिसना शुरू कर दिया.
लंड घुसने में आनाकानी कर रहा था.
लावण्या ने मेरे सीने पर झुक कर अपने एक दूध को मेरे मुँह में दे दिया और बोली- लो दूध पी लो और पावर गेन करके मेरे अन्दर अपने टूल को घुसेड़ दो!
मैंने हंसते हुए उसके दोनों दूध बारी बारी से चुसकने चालू कर दिए.
मेरे लंड को लावण्या अपने हाथ से पकड़ कर सहला रही थी.
उसका हाथ पीछे को था तो दूध आगे को हो गए थे.
कुछ कुछ देर में वह अपने हाथ से मेरे लौड़े को पकड़ कर अपनी चुत पर लगाती और कोशिश करती कि लंड चुत में घुस जाए.
मेरे लौड़े ने भी उसकी चुत में अपने सर घुसाना चालू कर दिया था.
लेकिन लावण्या की चुत एकदम संकरी थी तो लंड ने अन्दर जाने में अपनी असफलता जता दी.
मगर मैं उसके मम्मों के साथ खेल कर अब अति कामुक हो गया था और उसकी चुत में लंड पेलने को आतुर हो गया था.
मैंने उसे फूल के जैसे उठा कर अपने नीचे ले लिया और उसकी चुत में लंड लगा कर पेलने की कोशिश करने लगा.
हम दोनों जिम्नास्ट थे, तो लावण्या ने अपनी दोनों टांगों को अतिरेकता से फैला लिया था.
उसने अपने हाथ से लंड को पकड़ कर चुत के छेद का रास्ता दिखाया, तो मैंने ताकत से उसकी चुत में अपने लंड को पेल दिया.
आह की आवाज उसके कंठ से निकली और ठीक उसी वक्त मेरे कंठ से भी एक कराह निकल गई.
हम दोनों ने ही पहली बार सेक्स किया था तो हम दोनों ही दर्द को महसूस कर रहे थे.
वह बोली- दर्द ज्यादा हो रहा है लेकिन मैं झेल लूँगी … तुम क्यों चीखे?
मैंने कहा- मुझे नहीं मालूम पर ऐसा लगा जैसे मेरा कुछ कट गया है.
वह हंस कर बोली- देख लो बेटा … कहीं तुम्हारा लंड टूट तो नहीं गया?
मैं उसकी बात सुनकर सच में एक बार को तो डर गया था कि क्या सच में लंड टूट सकता है.
मैंने लंड की तरफ देखा तो वह हंस पड़ी और मेरे गाल पर एक चपत मारती हुई बोली- बिल्कुल चूतिया हो क्या?
मैंने कहा- क्यों?
वह बोली- क्या देख रहे हो?
मैंने कहा- लंड …वह बोली- क्यों टूट न गया हो, यह देख रहा है क्या?
मेरे मुँह से पहले तो हां निकल गया, फिर मैं खुद ही शर्मा गया.
वह हंसने लगी और बोली- तेरी चमड़ी में कट लगा होगा, इसलिए तेरी आवाज निकली होगी?
मैंने कहा- क्यों कट लग गया होगा?
वह बोली- पहली बार पेल रहा है न!
मैंने कहा- हां … तो?
वह ऐसे बोली, जैसे बहुत बड़ी जानकार हो- पहली बार में सबको दर्द होता है!
मैंने कहा- तुझे कैसे मालूम?
वह हंस दी और बोली- साले किताबें नहीं पढ़ता है क्या मस्तराम वाली?
तब मुझे ख्याल आया कि लावण्या को कैसे मालूम है.
हम दोनों वापस से चुदाई में ध्यान देने लगे.
हम दोनों का ही कसरती जिस्म था और थकान जैसी कोई बात होने का सवाल ही नहीं उठता था.
बस दर्द हो रहा था तो उसे झेलते हुए हम दोनों मस्ती में चुदाई करने लगे.
कुछ देर बाद मजा आने लगा और अब सच में एक दूसरे के जिस्म से आग की लपटें उठती और भी तेज होती सी दिखने लगी थी.
कुछ बीस मिनट तक धकापेल चुदाई के बाद हम दोनों चरम पर आ गए और हमारा झड़ना शुरू होने को हो गया था.
तभी लावण्या ने कहा- जान, बाहर निकलना प्लीज!
मुझे एकदम से होश आया और मैंने अपना लंड खींच कर बाहर झड़ना चालू कर दिया.
वह मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी और हम दोनों एक दूसरे से वापस चिपक गए.
उस रात पहली बार मैंने किसी लड़की के साथ संभोग किया था, सो उससे अलग होने का मन ही नहीं हो रहा था. हम दोनों ऐसी ही गंदी हालत में चिपक कर सो गए.
सच कह रहा हूँ कि ऐसी सुकून की नींद पहली बार आई थी.
आपको मेरी यह सच्ची वर्जिन कपल सेक्स कहानी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।