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वर्जिन बॉय वर्जिन गर्ल X स्टोरी में एक स्कूल के लड़के लड़कियां स्विमिंग टूर्नामेंट के लिए गए. एक लड़के लड़की की दोस्ती हो गयी. लड़की सेक्स के लिए आतुर हो रही थी.
ये मेरी पहली सेक्स कहानी है और मैं आशा करता हूँ कि ये आखिरी नहीं होगी क्योंकि मेरी उम्र तक आते-आते हर मर्द के पास अपनी कहानियों का एक भंडार हो जाता है.
मैं अपने उन दिनों की कहानियां सुनाने आया हूँ, जब मैंने सेक्स के बारे में अपनी आंखें खोली थीं. बहुत हसीन पलों की यादें हैं.
मैं एक उन्माद की अपेक्षा रखता हूँ और कोशिश करूँगा कि सब कुछ आप सुनने वालों की उम्मीदों पर खरा उतरूँ.
आज मैं 44 साल का हट्टा-कट्टा मर्द हूँ और मैंने हमेशा किसी भी महिला को उसकी उम्मीद से ज़्यादा प्यार दिया है.
मेरी पहली कहानी ‘वर्जिन बॉय वर्जिन गर्ल X स्टोरी’ उन दिनों की है जब मैं 18 साल की उम्र का था और अपने जैसलमेर शहर के स्कूल में स्विमिंग चैंपियन था.
लंबा कद, मजबूत बांहें, लड़कियों में कुछ मशहूर और सच कहूँ तो बहुत सीधा-सादा और मेहनती था.
स्कूल में विजय प्राप्त करके पहला डिस्ट्रिक्ट लेवल टूर्नामेंट खेलने की तैयारी में व्यस्त था.
हमारी स्कूल टीम से दो लड़के और एक लड़की का चयन हुआ था.
लावण्या केरल से थी और बहुत खूबसूरत थी.
सांवला रंग, लंबे बाल, तीखे नयन-नक्श और मोतियों जैसे खूबसूरत दांत.
उसकी हमेशा आधी इंग्लिश और आधी मलयालम में मज़ाक करने की आदत थी.
मुझे छेड़ने में उसे बहुत आनन्द आता था.
वह मछली की तरह पानी में तैरती थी.
उसने तैरना केरल की नदियों में सीखा था और बिल्कुल भी नहीं घबराती थी.
सीनियर होने के कारण प्रतियोगिता के दबाव को अच्छी तरह समझती थी.
मेरा पहला टूर्नामेंट था इसलिए वह मुझे बहुत सहायता करती और हंसाती रहती थी.
हम सब ट्रेन से अकेले गए.
रास्ते में उसने बहुत कुछ खिलाया-पिलाया और प्रतियोगिता के बारे में समझाती रही.
रात को उसने मुझे कंबल दिया और पता नहीं क्यों, गालों पर एक प्यारी सी पप्पी देकर ‘गुड नाइट’ बोलकर सो गई.
मुझे भी अजीब सा लगा, पर बहुत अच्छा भी लगा.
मैंने रात को एक-दो बार उठकर उसे देखा, पर वह सोई रही.
सुबह उठकर हम सीधे स्कूल गए, जहां रहने की व्यवस्था स्कूल में ही की गई थी.
वहां उसने अपने पुराने दोस्तों से, जिनसे वह पिछले साल मिली थी, मेरा परिचय कराया और सबको बताया कि मैं बहुत शर्मीला हूँ … पर तैरने में बड़ा माहिर हूँ.
एक लड़की ने कहा- देखते हैं कि ये मछली है या मगरमच्छ!
तो लावण्या ने कहा- अभी तो मछली है, मगरमच्छ हम बना देंगे!
यह कह कर वह खिलखिला कर हंस पड़ी.
उसके चमकते दांतों और आंखों में एक अजीब सा नशा था, जो मुझे उसकी ओर आकर्षित कर रहा था.
मैं जीवन में पहली बार ऐसा महसूस कर रहा था कि कोई मुझसे फ़्लर्ट कर रहा है और मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था.
खैर … दोपहर में दो राउंड में मैं जीत चुका था और अगले दिन की रेस के लिए चयनित हो गया था.
लावण्या भी चयनित हो चुकी थी और बहुत खुश थी.
हमने स्कूल प्रिंसिपल के ऑफिस से घर पर फोन करके सब बता दिया.
उस दौर में मोबाइल फोन नहीं थे, बस किसी तरह ट्रंक कॉल लगाकर खबर दे दी जाती थी.
पर जब घर वालों ने वापसी का पूछा, तो लावण्या ने एक दिन अधिक बता दिया और मुझे भी असमंजस में डाल दिया. मैं सोच में पड़ गया कि एक दिन अधिक क्यों रुकना है.
दूसरे दिन फाइनल था और हमारी टीम फर्स्ट आई थी.
सभी लोगों ने बहुत खुशी मनाई.
मेरे साथ आया दूसरा लड़का अपने मामा के यहां चला गया.
स्कूल वालों ने शाम को हमें विदाई दे दी और अब एक रात और एक दिन हमारे पास रह गया था.
ट्रेन रिजर्वेशन लावण्या ने पहले से ही एक दिन बाद की ट्रेन का करवा रखा था.
मैंने पूछा कि अब हम कहां जाएंगे?
मैं अकेले किसी होटल में नहीं रह सकता था क्योंकि मेरे पास पैसे भी नहीं थे और समझ भी नहीं थी.
उस वक्त मैं थोड़ा डरा हुआ था, पर लड़की के सामने अपना डर ज़ाहिर भी नहीं कर सकता था.
उसने कहा- चिंता मत करो, हम दोनों मेरे दोस्तों के यहां रुकने वाले हैं और तुम्हें बहुत मज़ा आएगा.
हमने ऑटो पकड़ा और 5 किमी दूर एक कॉलोनी में गए, जहां एक सर्किट हाउस में हमारा इंतज़ाम उसके दोस्तों ने करवा रखा था.
वहां पहुंच कर देखा कि कुछ लड़के-लड़कियां उधर पहले से मौजूद थे.
सबने पहले खाना खाया और गाने गाए.
माहौल बहुत हसीन था और मैं भी धीरे-धीरे खुलने लगा था.
सबने साथ दिया तो मैंने भी गाया और सबने मेरी बहुत तारीफ की.
लावण्या के साथ मैंने डांस भी किया और पहली बार किसी लड़की से गले मिला.
रात होते-होते ये सब अपने-अपने घर जाने लगे और अगले दिन स्कूल होने की वजह से बोलकर गए कि वे अगले दिन शाम को ही आ पाएंगे और हमें स्टेशन छोड़ देंगे.
मैंने भी गुड नाइट कहा और अपने कमरे में आ गया.
कुर्ता-पायजामा पहन कर सोने की तैयारी करने लगा.
मैंने अपनी डायरी में लिखने का इरादा किया और आज के बारे में लिखने लगा.
मैं पहली बार घर से दूर बिना बताए एक अनजान गेस्ट हाउस में रुका था.
एक भय और रोमांच से भरा हुआ किशोर.
बस जीत की खुशी मन में छाई थी और बंक मारने का रोमांच.
तब तक नहीं पता था कि रात आगे और क्या दिखाने वाली है.
लावण्या ने कुछ देर बाद दरवाजा खटखटाया और चिढ़ाते हुए पूछा- नन्हे बालक, डर तो नहीं लग रहा अकेले में?
मैंने जवाब दिया- मैं कोई नन्हा बालक नहीं हूँ और अगर तुम्हें डर लगे तो बता देना, मैं हिफाजत कर लूँगा तुम्हारी!
वह बोली- दरवाजा खोलो मुझे हिफाजत की ज़रूरत नहीं है, पर अगर मैं कुछ देर बात करना चाहती हूँ तो उसके पास आ सकता हूँ. वापस घर जाने के बाद इतना खुलकर नहीं रहा जा सकता.
मैंने भी यही सोचा कि वापस घर जाने के बाद लावण्या से बहुत दूर हो जाऊंगा.
उसकी क्लास के लड़के अगर उनकी क्लास की लड़कियों से किसी को भी बात करते देखते तो हंगामा कर देते थे और लावण्या तो सबकी चहेती थी.
मैंने कहा- मैं कपड़े बदलकर आता हूँ.
वह बोली- अरे यार, ऐसे ही आ जाओ … मैंने भी नाइट सूट पहना हुआ है. हम गार्डन में चलेंगे और बातें करेंगे.
वह रात पूरे चाँद की थी और बहुत मस्त मंद मंद हवा चल रही थी.
हम दोनों गार्डन में एक बेंच पर बैठकर बतियाने लगे.
वह बोली- अपने बारे में बताओ, सब कुछ!
ऐसा कुछ खास नहीं था, पर जो भी था मैंने सब कुछ बताया.
पहली बार किसी लड़की से मैं इतना खुलकर बातें कर रहा था और बहुत मज़ा आ रहा था.
मैंने उसे अपनी क्लास के सीक्रेट्स भी बताए कि कौन किसका क्रश है और भी जाने क्या-क्या मैं बोलता गया.
कुछ देर बाद लावण्या ने मेरा हाथ पकड़ कर कहा- मेरे बुद्धू, कितना बोलते हो तुम मैंने कभी सोचा नहीं था कि तुम इतना बोल भी सकते हो.
हम दोनों ही हंस दिए और सच में मुझे शर्म सी आ गई.
उस दिन पता चला मुझे कि लड़कियों को गबरू इतना पसंद नहीं होते, जितने कि खुलकर बात करने वाले इमोशनल लड़के.
जबकि उस उम्र में सब यही सोचते हैं कि लड़कियां बस लंबे-चौड़े गबरू टाइप लड़कों को पसंद करती हैं.
जबकि होता उसका उल्टा ही है.
खैर … अब मच्छर काटने लगे थे और हल्की नींद भी आने लगी थी.
मैंने कहा- चलो अब सोते हैं.
तो लावण्या बहुत ज़ोर से हंसी और बोली- अरे कल स्कूल नहीं जाना है, पूरा दिन पड़ा है सोने के लिए. चलो ना, कुछ देर और बातें करते हैं!
मैंने कहा- यहां बहुत मच्छर हैं.
तो उसने कहा- चलो मेरे कमरे में, वहीं बैठना कुछ देर.
मैंने पहले ज़रा ना-नुकुर की, पर तैयार हो गया.
पहली बार किसी अनजान लड़की के कमरे में गया था मैं.
लावण्या ने कहा कि वह मुझे उसके बारे में, उसके घर के बारे में सब कुछ बताएगी.
कमरे में पहुंच कर उसने मुझे सोफे पर बिठाया और खुद बिस्तर पर बैठ गई.
ना टीवी था, ना कोई शोर, बस हम दोनों ही थे … एक-दूसरे के साथ.
उसने अपने केरल के गांव के बारे में, बारहवीं के बाद डॉक्टर बनने के बारे में और मन की ढेर सारी बातें बताईं.
मैंने पूछा- मुझे ये सब क्यों बता रही हो?
तो उसने कहा- शुरुआत में मैंने तुमको एक सीधा सादा लड़का समझती थी, पर अभी तुमसे बात करके मैं समझ गई हूँ कि तुम्हारे व्यक्तित्व में बहुत गहराई है.
मैं चुप रहा.
उसने पूछा- क्या तुम कभी किसी लड़की के बारे में सोचते हो या नहीं?
मैंने कह दिया- मैं पढ़ाई और खेल को बहुत तवज्जो देता हूँ और लड़कियों के लिए मेरे जीवन में अभी कोई जगह नहीं है. उसका एक कारण ये भी था कि मैं बहुत शर्मीला हूँ और मुझे लड़कियों से बात करने में असुविधाजनक महसूस होता है.
उसने कहा- चलो, मैं आज तुम्हारी सारी समस्या का समाधान कर देती हूँ.
मैं उसे देखने लगा.
उसने पूछा कि आखिर डर किस बात का लगता है.
मैंने कहा- डर नहीं लगता, पर मैं उनको जानता नहीं, समझता नहीं. वे क्यों बात-बात पर खी-खी करती रहती हैं, तिरछी निगाहों से देखती हैं, कुछ समझ नहीं आता. सो मैं उनसे दूर ही रहता हूँ.
लावण्या हंस पड़ी और बिस्तर से उठकर मेरे पास आकर बैठ गई.
वह बोली- देखो मुझे पास से क्या अलग है लड़कियों में? कितना ज़्यादा सोचते हो तुम?
ये बोलते हुए उसने मुझे गले लगा लिया.
मैं बहुत असमंजस में था और शिथिल हो गया.
पर धीरे-धीरे लावण्या की गर्माहट ने मुझे पिघला दिया.
यह मेरा पहला आलिंगन था और तब तक मेरे अन्दर कामवासना जगी भी नहीं थी.
पहली बार एक बंद कमरे में एक साल बड़ी मंजी हुई तैराक के साथ आलिंगन ने मेरे अन्दर तूफान ला दिया था.
मैंने कहा- मुझे बहुत अच्छा लग रहा है. और क्या मैं कुछ देर और गले लगा रह सकता हूँ?
लावण्या ने हंसकर कहा- ये परमिशन लेने वाली बात मुझे बहुत पसंद आई.
उसने मुझे फिर से गले लगाया और मेरे एक गाल पर पप्पी भी दे दी.
पहली बार मेरा मन मचल उठा था और मैंने कसके लावण्या को गले लगा लिया.
वह मुस्कुराते हुए बोली- चलो अब सो जाओ, नहीं तो बात बढ़ जाएगी.
हिम्मत करके मैंने कहा- अब बढ़ जाने दो मुझे पूरा ज्ञान दो अब!
लावण्या ने कहा- पहले वादा करो किसी से कुछ कहोगे नहीं और मुझे भविष्य में परेशान नहीं करोगे!
मैंने वादा किया.
उसने पूछा- मैंने कभी किसी को बिना कपड़ों के देखा है?
मैंने कहा- आज तक नहीं, बस पढ़ा है बायोलॉजी में … और कहीं चित्र भी देखा है.
वह वापस हंसे बिना नहीं रह पाई.
एक बहुत ही अबोध लड़का उसके साथ था, पर मैं भी इच्छुक था जानने का कि क्यों लड़के दीवाने हो जाते हैं लड़कियों के.
लावण्या ने कहा कि मैं तुमको आज की रात सब सिखाऊंगी.
मैं मुस्कुरा दिया.
दोस्तो, मेरी इस वर्जिन बॉय वर्जिन गर्ल X स्टोरी के अगले भाग में आपको विस्तार से कुंवारी चुत में कुंवारे लंड के घुसने की दास्तान लिखूँगा.
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अगला भाग: कुंवारी तैराक जोड़ी ने चुदाई का मजा लिया- 2
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