slutty mom story
स्लट्टी मॅाम स्टोरी में मेरी मम्मी बहुत सेक्सी हैं पर पापा बाहर रहते हैं तो उनकी चूत की प्यास नहीं बुझती. उनके बॉयफ्रेंड भी थे पर वे दोनों भी चले गए थे. तो मैंने अपनी मॅाम के लिए लंड का इंतजाम किया.
मेरा नाम अभिषेक है. मैं मुंबई का रहने वाला हूँ.
मेरे पापा दुबई में काम करते हैं और मम्मी एक बड़े मेडिकल स्टोर में कैशियर हैं.
पैसे की कोई कमी नहीं है लेकिन मम्मी को अपना समय व्यतीत करने के लिए यह जॉब बड़ा रास आ रहा था.
मेरी मम्मी का नाम रूपाली है.
वे 40 साल की हैं, पर लगती हैं 30 की.
उनका कद औसत से कुछ कम है. वे सिर्फ चार फुट नौ इंच लंबाई की हैं.
उनका बदन बहुत गोरा है.
मम्मी का फिगर 36-32-38 है.
उन्हें देखकर किसी का भी मन करे कि वह उनके साथ बिस्तर पर सेक्स का मजा ले ले.
मम्मी के बाल काफी लंबे हैं, जो उनकी गांड पर लहराते हैं. वे बहुत ज़्यादा सेक्सी हैं.
यह स्लट्टी मॅाम स्टोरी उस वक्त की है, जब मैं बारहवीं क्लास में था.
मम्मी बहुत अकेली महसूस करती थीं.
वे अपनी जॉब से आतीं और घर पर बस रोती रहतीं.
पहले मम्मी के दो बॉयफ्रेंड थे पर अब वे दोनों भी चले गए थे.
एक दिन मैंने मम्मी से कहा- आप ऐसे चिंता मत किया करो, मैं आपके लिए कुछ करता हूँ.
मम्मी यह जानती थीं कि मेरे कहने का आशय क्या है क्योंकि जब उनके ब्वॉयफ्रेंड उनके कमरे में रात रात भर रहते थे तो मैं समझ जाता था कि मम्मी को पापा की कमी महसूस होती है और इसी लिए वे गैर मर्द से अपनी प्यास बुझाती हैं.
मैंने सोचा कि मैं खुद अपनी मम्मी के साथ तो वह सब नहीं कर सकता हूँ, पर किसी और को तो ला ही सकता हूँ.
उस दिन मम्मी ऑफिस जाने वाली थीं तो कुछ सोच कर मैं भी उनके साथ में चला गया.
मैंने देखा कि मम्मी के ऑफिस के रास्ते में एक ब्रिज आता है, वह लगभग खाली सा रहता है.
मम्मी उसी ब्रिज से रोजाना जाती थीं.
उधर मेरी नजर एक भिखारी पर जा पड़ी, जो वहीं पड़ा सोता रहता था.
वह आने जाने वालों से भीख मांगता था.
उस दिन मैंने देखा कि उस भिखारी ने जैसे ही मेरी मम्मी को आते देखा, उसने अपना लंड निकाल लिया और हिलाते हुए मम्मी को दिखाने लगा.
मम्मी ने उसके लौड़े को देखा और मुँह फेर लिया.
हालांकि मम्मी ने उसके खड़े लंड को दो तीन बार कनखियों से देखा था.
मेरी नजर भी उस भिखारी के लौड़े पर पड़ी तो मैं हतप्रभ रह गया उसका लंड सच में बड़ा ही खतरनाक किस्म का खूंटा टाइप का लंड दिखाई दे रहा था.
बस उसके लौड़े के चारों ओर बड़ी बड़ी झांटें उगी हुई थीं, जिससे लंड गंदा लग रहा था.
मेरे दिमाग में उसी समय एक आइडिया आया और मैंने मम्मी को ऑफिस छोड़ कर वापस घर आकर योजना बनाई.
मैंने शाम होने का इंतज़ार किया.
शाम को मैं उस भिखारी के पास गया तो देखा उधर एकदम सुनसान पड़ा था.
वैसे भी वह ब्रिज बहुत पुराना था और वहां कोई नहीं आता जाता था.
मैं उस भिखारी के पास गया और उसे एक दारू की बोतल के साथ कुछ खाना दिया.
वह दारू की बोतल देख कर बड़ा खुश हो गया. उसने मेरे सामने ही बोतल को मुँह से लगाया और गट गट करके दारू पीने लगा.
मैं समझ गया कि ये पुराना पियक्कड़ है इसीलिए इसे नीट दारू पीने की आदत है.
पूरा हाफ खत्म करने के बाद वह मुझे देख कर बोला- सुबह तुम ही गाड़ी से निकले थे … उस औरत के साथ!
मैं हैरान रह गया कि इसको मेरी मम्मी की बड़ी याद रही.
मैंने उससे पूछा कि तुमको वह सब कैसे याद है?
वह हंस कर बोला- वह औरत मुझे रोज देखती है और मुझे उसकी याद भी आती है, वह बहुत सेक्सी माल लगती है.
अब मैं समझ गया कि मेरी मम्मी को यह आदमी पसंद आ गया है.
मैंने कहा- सुबह तुम अपना लंड दिखा रहे थे तो क्या हमेशा उस औरत को अपना लंड दिखाते हो?
वह हंस कर बोला- वह भी तो मुझे अपनी चूचियां दिखाती है!
मैंने कहा- और क्या क्या करती है वह?
वह हंस कर बोला- इससे ज्यादा कुछ नहीं करती है. क्या तुम मुझे उसकी चुत दिलवा सकते हो?
मैंने कहा- हां दिला सकता हूँ लेकिन उसके लिए पहले तुम्हें अपना हुलिया बदलना पड़ेगा. ऐसे गंदे रहोगे तो वह तुमको लिफ्ट नहीं देगी.
वह हंस कर बोला- तुझे पता नहीं है, जब औरत की चुत में आग लगती है न तो वह कीचड़ में सने मर्द से भी चुदने के लिए रेडी हो जाती है!
मैं भी उसकी बात से सहमत था.
मैंने कहा- चलो कल रात को तुम्हारा लंड उस औरत की चुत में घुसेगा.
वह बोला- क्या कह रहे हो यार!
मैंने कहा- हां.
वह बड़ा खुश हो गया.
दूसरे दिन रात को डिनर के बाद मैंने मम्मी से कहा- आज आपके लिए एक गिफ्ट है, आप रेडी हो जाओ.
वे मेरी तरफ देखने लगीं कि मैं कौन सी गिफ्ट देने वाला हूँ!
तभी मैंने उन्हें आंख दबा कर इशारा किया और कहा- आपको वह भिखारी तो याद है न!
भिखारी का नाम सुनते ही मेरी मम्मी समझ गईं कि मैं क्या कहना चाहता हूँ.
वे शर्मा गईं मगर अन्दर ही अन्दर एक्साइटेड भी हो गईं.
मैंने कहा- रेडी हो जाओ न!
वे बोलीं- रेडी होकर कहीं जाना है क्या?
मैंने मम्मी से कहा- पहले आप अच्छे से रेडी हो जाओ, एकदम स्टाइल में … बाकी सब बाद में बताऊंगा.
मम्मी ने ओके कहा और कमरे में चली गईं.
उन्होंने एक डीप कट ब्लैक ब्लाउज़ पहना, जिसमें से उनके आधे बूब्स बाहर को निकलते हुए दिख रहे थे.
ब्लैक कलर की नेट वाली साड़ी पहनी थी, जिसमें मम्मी एकदम सेक्सी व हॉट माल लग रही थीं.
मम्मी ने अपने बाल भी खुले रखे थे.
वे ऐसी लग रही थीं जैसे वे कोई सेक्स की मलिका हों.
मैंने गाड़ी निकाली और मम्मी को साथ लेकर ब्रिज के पास आ गया.
मैंने देखा कि वह भिखारी अभी वहीं सोया था.
मम्मी ने उसे देखा और बोलीं- मुझे यहां क्यों लाए हो?
मैं- मम्मी, पहले हम दोनों यहां एक गेम खेलते हैं.
मम्मी- गेम यहां क्यों? और क्या?
मैं- अरे वही, ट्रुथ एंड डेयर वाला गेम … वही खेलते हैं.
मम्मी- ठीक है.
फिर मम्मी का पहले डेयर आया.
मैंने मम्मी से कहा- आप उस भिखारी के पास जाकर उसकी चादर में लेट जाओ!
मम्मी ने मना किया.
मैंने गुस्सा किया तो मम्मी उसके पास चली गईं.
मम्मी को बहुत बदबू आ रही थी, पर फिर भी वे गईं और मुँह बनाती हुई उस भिखारी की चादर के अन्दर लेट गईं.
मम्मी के लेटते ही वह भिखारी जाग गया और डर गया.
वह उधर से उठ कर अलग सा होने लगा.
उसने अपना हाथ-पैर आगे-पीछे किए तो उसका एक हाथ मम्मी के बड़े-बड़े जूसी बूब्स पर जा पड़ा.
वह समझ गया कि कोई औरत उसके पास आई है.
उसने मम्मी के बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाना शुरू कर दिया.
मम्मी ने कुछ नहीं बोला.
मम्मी के मुँह से बस ‘आह.. आह्ह.. आह्ह्ह्.’ की आवाज़ आ रही थी.
फिर वह मम्मी की साड़ी में हाथ डालकर कुछ खोजने लगा.
उसका हाथ मम्मी की पैंटी पर आ गया तो उसने मम्मी की पैंटी पकड़ ली और हाथ से चुत को मसलने लगा.
मम्मी पागल हो गई थीं और ज़ोर-ज़ोर से झटके खाने लगी थीं.
तभी मैं वहां पहुंचा और दोनों को अलग किया.
मम्मी होश में आ गईं.
पर मम्मी का मूड अभी भी तगड़ा बना हुआ था.
वह भिखारी मम्मी को देखते ही खड़ा हो गया और उसने मम्मी के पैर पकड़ लिए- सेक्स कर लेने दो प्लीज़.
मैंने उन दोनों को कार में बिठाया.
मम्मी पीछे बैठीं और भिखारी को आगे बिठाया.
वह बार-बार मम्मी को देख रहा था.
मैंने उससे नाम पूछा.
उसका नाम हरनाम था.
वह मम्मी को रोज़ देखता था और अपना लंड हिलाते हुए सोचता था कि काश ऐसी औरत चोदने को मिल जाए.
मैंने उससे मम्मी से बात करने को बोला.
मम्मी ने उसे अपना नाम बताया- मेरा नाम रूपाली है.
वह नाम सुनकर गिड़गिड़ाने लगा और मम्मी को बोलने लगा- सेक्स कर दो रूपाली जी प्लीज़.
हम लोग कुछ ही देर में हरनाम को साथ लेकर घर आ गए.
मैंने उसे अपने घर के हॉल में ही बिठा दिया, बेडरूम तक नहीं आने दिया.
मम्मी ने उसका खाना दिया और नहाने चली गईं.
हरनाम ने फटाफट खाना खत्म किया और बाथरूम के सामने खड़ा हो गया.
मम्मी जैसे ही बाहर आईं, उसने मम्मी को हग कर लिया.
तभी मम्मी ने उसका मुँह अपने बूब्स पर रख दिया और उसका मुँह वहां ही दबा दिया.
मम्मी सिर्फ़ ब्रा और पैंटी में थीं.
काली ब्रा में मम्मी क्या लग रही थीं.
उसने किस करना शुरू कर दिया.
मम्मी ने भी किस बैक किया और वे दोनों 20 मिनट तक किस करते रहे.
हरनाम ने मम्मी को नंगी करके निप्पलों को काटना शुरू कर दिया और एक हाथ से चूत पकड़ ली.
वह मेरी मम्मी की चुत में उंगली करने लगा.
मम्मी पागल होने लगीं और हरनाम को बोलने लगीं- प्लीज़ मेरी चूत चोदो आह … अब रहा नहीं जाता!
हरनाम ने मम्मी के मुँह में लंड दे दिया और उसने जोर जोर से अपने लौड़े से मम्मी के मुँह को चोदा.
फिर उसने मम्मी को गुलाबी चूत चाटी.
मम्मी और ज्यादा पागल हो गईं.
फिर उसने मम्मी को सोफे पर बिठाया और घोड़ी बनाकर चुदाई करना शुरू की.
कुछ देर बाद वह खुद सोफे पर बैठ गया और मम्मी को अपनी तरफ़ फेस करके बिठा लिया.
उस भिखारी ने अब मम्मी की चूत नीचे से चोदनी शुरू कर दी.
चूत के साथ-साथ वह मेरी मम्मी के दूध भी दबा रहा था.
मम्मी- हरनाम ओह्ह्ह येस्स्सा … प्लीज़ फ़क मी … येस्स्साह.
हरनाम- आह मेरी रूपाली रंडी … आह्ह्ह साली रांड … ले लौड़ा खा अपनी चुत में आह्ह्ह!
करीब आधा घंटा बाद हरनाम ने अपना लंड मां की चूत से निकाला और मम्मी के मुँह पर लंड रख दिया.
मम्मी ने मुँह से लौड़े को हटा कर अपने बूब्स में दबा लिया और अपने बूब्स को रगड़ने लगीं.
मम्मी के बूब्स के साथ-साथ हरनाम का लंड भी रगड़ खा रहा था.
कुछ देर बाद हरनाम ने अपना माल मम्मी के बूब्स पर गिरा दिया.
वह शनिवार की रात थी, तो मम्मी को अगले दिन कहीं जाना नहीं था.
उन दोनों ने शनिवार की रात, रविवार का पूरा दिन और रविवार की पूरी रात बहुत चुदाई की.
अब वे दोनों बहुत खुश थे.
सोमवार की सुबह मम्मी के साथ हरनाम भी नहाने गया.
वहां भी उसने मम्मी को पेल दिया.
मम्मी ऑफिस के लिए लेट हो गईं.
मैंने उन दोनों को गाड़ी में बिठाया और पहले मम्मी को ऑफिस छोड़ा.
बाद में हरनाम को मैंने ब्रिज के पास ड्रॉप किया.
मम्मी और हरनाम ने गाड़ी में खूब किस किया और दुबारा मिलने का वादा किया.
रात को जब मम्मी घर आ रही थीं तो हरनाम ब्रिज पर नहीं दिखा.
मम्मी घर आईं तो हरनाम ने दरवाज़ा खोला और उसने मम्मी को अन्दर खींच लिया.
मेरी स्लट्टी मॅाम तो उसे देखते ही अपनी सारी थकान भूल गई थीं.
हरनाम ने मम्मी को नंगी करके उधर फर्श पर ही चोदना शुरू कर दिया.
अब हरनाम मेरे घर पर काम करने लगा है.
वह पापा को दिखाने के लिए कर्मचारी बन गया है, पर उसने मेरी मम्मी को किचन से लेकर हॉल, रूम, बाथरूम, फ्लैट टेरेस से लेकर बारिश में भी चोदा है.
कभी-कभी हरनाम मम्मी को ब्रिज के नीचे ले जाकर चोदता है तो कभी-कभी वह मेरी मम्मी को रंडी बाज़ार में ले जाकर किसी रंडी के साथ एक रात के लिए एक्सचेंज करता है.
उधर मम्मी को किसी दूसरे मर्द से चुदना पड़ता है, तो उससे होने वाली कमाई उस रंडी को मिलती है और हरनाम रंडी को चोद कर मजा ले लेता है.
मम्मी को भी अब ये सब पसंद आने लगा है.
आपको मेरी यह काल्पनिक स्लट्टी मॅाम स्टोरी कैसी लगी, प्लीज जरूर बताएं.
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