jawan ladki ki vasna
जवान लड़की की वासना उसके जीजू ने जगाई. वह पहले से ही जीजू को पसंद करती थी और होली वाले दिन तो जीजू ने उसकी चूचियों को रंग से सराबोर कर दिया.
दोस्तो, जो पति-पत्नी एक-दूसरे की सहमति से अपनी-अपनी फैंटेसी पूरी करना चाहते हैं, उन फैंटेसियों को पूरा करने की हिम्मत करके सफल हो जाते हैं, वे जिंदगी का असली आनन्द लेते हैं.
और जो नहीं कर पाते, वे अपनी जिंदगी ऐसे ही गुजार देते हैं.
मेरा तो मानना है कि जीवन में नया रोमांच पाने के लिए नई-नई रतिक्रियाएं अपनाइये और जीवन को खुशहाल बनाइए.
आप कहानी पढ़िए, मुझे आशा है कि आपको यह जवान लड़की की वासना की कहानी पसंद आएगी.
अगर मेरा कोई पाठक अपनी कोई स्टोरी मुझसे शेयर करना चाहे तो उसका स्वागत है.
दोस्तो, मेरी इस जवान लड़की की वासना की सेक्स कहानी की नायिका मेरी प्यारी सेक्सी पाठिका सुमन (पिंकी) है.
जिंदगी में नये-नये जवान होते लड़के-लड़कियों में सेक्स के प्रति बड़ी जिज्ञासा होती है.
वही सेक्स की जिज्ञासा मेरी प्यारी पिंकी आपके समक्ष प्रस्तुत करने जा रही है.
जीवन में कुछ रिश्ते ऐसे बन जाते हैं, जो बहुत ज्यादा कॉमन होते हैं.
जैसे जीजा-साली, देवर-भाभी, जीजा-सलहज, कजिन भाई-बहन, सौतेली मां और बेटे के बीच.
ऐसे रिश्तों में आम तौर पर एक-दूसरे के प्रति सेक्स की दीवानगी देखी जा सकती है.
जैसा कि मैंने अभी आपको पहले भी बताया है कि आजकल कोई भी किसी की भी फैंटेसी महसूस कर सकता है.
आजकल कुछ रिश्ते समय और परिस्थितियों के वश बन जाते हैं.
देवर-भाभी और जीजा-साली में सेक्स तो आमतौर पर हो ही जाता है.
एक बात और … जो सेक्स में होती है वह है प्यार, अपनापन और समर्पण, हंसी-खुशी की भावना कोई भी रिश्ता … पति-पत्नी, देवर-भाभी, जीजा-साली … सभी प्रेम और अपनेपन से होते हैं.
जिन रिश्तों में बॉन्डिंग बहुत अच्छी होती है, उनका सेक्स जीवन भी बहुत अच्छा होता है.
जिस रिश्ते की बॉन्डिंग अच्छी होगी, वहां सब कुछ अच्छा होगा … और जिस रिश्ते की बॉन्डिंग अच्छी नहीं होती, वहां केवल निराशा के अलावा कुछ नहीं होता.
वह फिर दूसरे में प्यार ढूंढने लग जाते हैं. ज्यादातर संबंधों में ऐसा ही होता है.
मैं अपनी कहानियों के माध्यम से आप सभी को खुश रहने के लिए प्रेरित करता हूँ.
जिंदगी बहुत छोटी सी है, इसलिए भूल जाओ उम्र को जिंदगी को महसूस करो, जिंदगी के हर एक पल का आनन्द लो. हर उस काम को करो, जिसे करने से दिल और दिमाग खुश रहे.
जैसा कि मैंने आपको बताया है, यह कहानी मेरी प्यारी पाठिका सुमन (पिंकी) की है जो एकदम सन्नी लियोनी की तरह दिखती है … हरा-भरा चेहरा, नीली आंखें, लंबे काले बाल, उसके 34 के बूब्स, 32 की कमर और 36 की गांड!
यानि वह एक चलती-फिरती आइटम बम है.
अगर आप भी कभी सुमन यानि पिंकी को देखोगे तो आपके लंड भी उसे देखकर खड़े हो जाएंगे और सलामी देने लगेंगे.
सच में आप उसी पल से उसे चोदने के सपने देखने लगोगे.
सुमन ने मेरी कहानियां पढ़कर मुझे मेल किया और मुझसे बातें करने के बाद मुझसे अपनी कहानी लिखने के लिए कहा.
सुमन की कहानी अब उसके शब्दों में आपके सामने प्रस्तुत है.
फ्रेंड्स, नाम तो आपको पता ही है कि मैं सुमन हूँ, प्यार से सभी घर में मुझे पिंकी कहकर बुलाते हैं.
मैं 5 फुट 4 इंच की लंबी हूँ, रंग गोरा, गोल चेहरा, भरा हुआ बदन, नीली आंखें, 34 के बूब्स, 32 की कमर और 36 की मेरी ठुमकती-मचलती मस्त गांड है.
यह सेक्स कहानी मेरी और मेरे दीदी-जीजा जी की है.
दीदी के सहयोग से जीजा जी ने मुझे चोद-चोद कर एक चलती-फिरती आइटम बम बना दिया.
यहां एक बात और गौर करने की है कि मस्त चुदाई औरत को और भी हसीन बना देती है.
उसके चेहरे का निखार बयान करता है कि वास्तव में उसकी कितनी अच्छी तरह से चुदाई हो रही है.
इसका एक बहुत बढ़िया उदाहरण किसी नई लड़की की शादी के 5-6 दिन बाद महसूस किया जा सकता है.
उसके चेहरे में एक अलग तरह की चमक बताती है कि वास्तव में उस लड़की की कितनी बढ़िया तरीके से चुदाई हो रही है.
मुझे बड़ा अच्छा लगता है जब लड़के कहते हैं कि यार क्या मस्त माल है … साली की गांड देख, क्या गजब ढा रही है!
यह सेक्स कहानी कुछ समय पहले की है, जब मैं स्कूल में हायर सेकेंडरी में पढ़ती थी.
घर में मेरी दीदी निकिता और मेरी मां लता ही थीं.
मेरे पिताजी का एक हादसे में देहांत हो गया था.
हादसा क्या, बस यूं कहिए कि उन्हें शराब पीने की इतनी लत थी कि जिस कारण उनका लीवर खराब होने से उनकी मृत्यु हो गई.
इसलिए घर में मां ही थीं और हम दो बहनें.
दीदी कॉलेज में पढ़ती थीं और साथ में घर पर कुछ ट्यूशन लिया करती थी जिससे घर का कुछ खर्चा भी निकल जाए और कुछ समय भी व्यतीत हो जाए.
आप सभी जानते हैं कि पिताजी के जाने के बाद सभी का कैसा रवैया हो जाता है.
जब घर में तीन-तीन औरतें हों तो सभी की निगाह गिद्ध जैसी होती है और सभी उन्हें नोंचने के चक्कर में लगे रहते हैं.
मेरी दीदी भी बहुत सुंदर हैं.
कॉलेज में दीदी को एक लड़का विशाल लाइक करता था.
धीरे-धीरे विशाल और दीदी एक-दूसरे को चाहने लगे.
फिर एक दिन दीदी ने मम्मी को बताया कि उन्हें एक लड़के से प्यार हो गया है और वह शादी भी उसी लड़के से करना चाहती हैं.
विशाल भी पढ़ाई में अच्छे थे और वह सी.ए. की तैयारी कर रहे थे.
दीदी ने जब मां को ये बताया तो मैंने दीदी से पूछा- दीदी, ये विशाल कौन है?
तब निकिता दीदी ने मुझे बताया- हम दोनों की मुलाकात कॉलेज के वार्षिक फंक्शन में हुई थी, जहां मैंने एक गाने पर जबरदस्त डांस परफॉर्मेंस दी थी. विशाल को मेरा वह डांस इतना पसंद आया कि उसने तो वहीं कॉलेज में मुझको प्रपोज कर दिया था.
मैंने कहा- वाह दीदी यह स्टोरी आप उसी वक्त को सामने रख कर सुनाओ न!
दीदी ने सुनाना शुरू कर दिया.
जब विशाल ने मुझसे अपना प्यार जताया तो मैंने उनसे पूछा- क्या आप मुझसे शादी करेंगे?
उन्होंने हामी भर दी.
इस तरह से दीदी ने जीजा जी को लेकर अपनी प्रेम कहानी विस्तार से सुनाई.
मेरी दीदी को भी विशाल जीजू बहुत पसंद आए.
वे दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे थे.
विशाल जीजू देखने में बहुत सुंदर थे.
जब पहली बार मैंने जीजा जी को देखा तो मैं उन्हें देखती ही रह गई थी.
जवान, हैंडसम, कसरती बॉडी, लंबे तगड़े कद-काठी के इंसान थे.
पर जीजू के घर वालों को यह रिश्ता मंजूर नहीं था.
शायद इसका कारण हमारी आर्थिक स्थिति थी और घर में हम दोनों बहनें थीं.
पर जीजू ने अपने घर वालों की मर्जी के खिलाफ जाकर निकिता दीदी से शादी कर ली थी.
मैं निकिता दीदी की शादी से बहुत खुश थी.
दीदी और जीजू मेरा पूरा ख्याल रखते थे.
मेरी प्यारी दीदी मेरी छोटी से छोटी जरूरतों का ध्यान रखती थी.
मैं भी अब स्कूल पास करके कॉलेज में आ गई थी.
जीजू वैसे तो बहुत ही शांत स्वभाव के थे पर बहुत ही गंभीर किस्म के इंसान थे.
हठी और जिद्दी भी छोटे बच्चों की तरह … अगर उन्हें कोई बात अच्छी नहीं लगती थी तो दीदी को और मुझे भी जोर से डाँट दिया करते थे.
और जो भी उन्हें अच्छा लगता या कोई चीज उन्हें चाहिए होती थी तो उसे पूरा करके ही उन्हें सब्र आता था.
पर मुझे नहीं पता था कि वह इतने बड़े चोदू और रसिक मिजाज के इंसान भी हैं कि कल को मेरी जवानी पर भी अपनी कामुक नजरों को जमा देंगे.
वे मेरी छोटी-छोटी बातों का भी बहुत ध्यान रखते थे, तो मैं उनकी सोच को पढ़ ही न सकी.
बस एक अच्छे जीजू की तरह उनकी इस सोच को इज्जत से देखती रही.
वे सी.ए. बन चुके थे और उनकी अपनी प्रैक्टिस थी.
दीदी भी जॉब करती थीं.
दीदी सुबह जाकर शाम को आती थीं और जीजा जी दोपहर को खाने के लिए घर आते थे.
दो घंटे आराम करने के बाद ही अपने ऑफिस वापस जाते थे.
बात उन दिनों की है, जब मैं कॉलेज में आ गई थी और दीदी के यहां रहकर अपनी पढ़ाई कर रही थी.
जीजू के यहां बस दीदी और जीजा जी ही थे.
दीदी के यहां एक कमरा ऊपर था, मैंने उसे अपना ही कमरा बना लिया था और वहां पढ़ा करती थी.
जीजा जी के प्रति मेरा नजरिया वैसा तो कुछ खास नहीं था.
पर होली पर एक ऐसी घटना घट गई, जिससे जीजा जी के प्रति मेरा नजरिया धीरे-धीरे बदलने लगा था.
वह होली का दिन था.
सभी एक-दूसरे को रंग लगा रहे थे.
मैं होली पर रंगों से होली नहीं खेलती थी क्योंकि मेरी स्किन पर होली के रंगों से एलर्जी हो जाती थी.
इसलिए मैं केवल गुलाल ही लगाया करती थी.
उस दिन मैं अपने कमरे में ही थी, ऊपर.
सभी मुझे नीचे बुला रहे थे.
निकिता दीदी ने मुझे आवाज लगाई- पिंकी नीचे आ जा, देख सभी होली खेल रहे हैं. आ जा, तू भी होली का आनन्द ले ले!
पिंकी- नहीं दीदी, मैं नहीं आ रही हूँ कोई भी मुझे रंग लगा देगा और फिर बहुत दिन तक मुझे एलर्जी होती रहेगी. मुझे नहीं पसंद ये कलर लगाना!
निकिता दीदी- अरे पगली कोई तुझे रंग नहीं लगाएगा. देख, तेरे जीजू तो अपने दोस्तों के साथ बाहर गए हैं और मैं ही हूँ … और पड़ोस की आरती है बस. और कोई नहीं है. तू नीचे आ जा!
पिंकी- दीदी, सच बोल रही हो?
निकिता दीदी- अरे हां, चल अब नीचे आ जा … और कुछ खा-पी ले. मैंने तेरे लिए ही स्पेशल दही बड़े बनाए हैं. तुझे पसंद हैं ना मेरी गुड़िया!
‘अच्छा ठीक है दीदी.
मैं अपने कमरे से नीचे आ गई.
तभी अचानक जीजू अपने एक दोस्त सतेन्द्र के साथ घर पर आ गए.
दीदी रसोई में थी.
जीजू के दोस्त सतेन्द्र ने मुझे पीछे से पकड़ लिया और जीजू ने मुझे आगे से पकड़ लिया.
दोनों ने मुझे इतना कसकर पकड़ रखा था कि मैं कुछ भी नहीं कर पा रही थी.
दोनों ही मेरे शरीर के हर हिस्से का नाप अपने हाथों से ले रहे थे.
जीजा जी ने मेरे मुँह पर, मेरी गर्दन पर, मेरे बालों पर, मेरी कमर पर, मेरी चूचियों पर और यहां तक कि मेरी पैंटी में भी अपना हाथ घुसाकर मेरी चूत पर भी रंग लगा दिया था.
मैं विस्मित सी अपनी आंखें बंद किए खड़ी हुई थी.
ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने किसी मोटी रस्सी से मुझे बांध दिया हो.
सतेन्द्र और जीजू की पकड़ इतनी टाइट थी कि मेरे हाथों में दर्द होने लगा.
मेरी आंखों से आंसुओं की धारा निकलने लगी.
मैं जोर-जोर से रोने लगी और दीदी को आवाज लगाने लगी- दीदी … दीदी!
मैंने किसी तरह खुद को छुड़ाया और भागकर बाथरूम में घुस गई.
पर मेरे पीछे-पीछे जीजा जी भी बाथरूम में घुस गए.
जीजा जी ने फिर से अपने दोनों हाथों से मुझे पीछे से पकड़ लिया और मेरे मुँह पर, मेरी कमर में, गर्दन में हरा गाढ़ा रंग लगाने लगे.
मैं जोर-जोर से चिल्ला रही थी.
पिंकी- दीदी बचाओ मुझे. जीजा जी मुझे रंग लगा रहे हैं निकिता दीदी … दीदी बचाओ … दीदी बचाओ मुझे … दीदी!
दीदी ने रसोई से ही आवाज लगाई- विशाल क्या कर रहे हो? बेचारी को क्यों तंग कर रहे हो? उसे रंगों से एलर्जी हो जाती है … उसे पक्का रंग मत लगाओ प्लीज!
विशाल जीजू- हां हां, आज ना छोड़ूँगा इसे … आज तो पिंकी को जबरदस्त रंग लगाऊंगा!
जीजू ने मुझे बाथरूम में मेरा मुँह दीवार की ओर करके पीछे से अपना मूसल लंड मेरी गांड की दरार में लगा दिया.
जीजू का वह मूसल लंड मुझे अपनी गांड में घुसता हुआ महसूस हो रहा था.
जीजू ने अपना एक हाथ मेरी टी-शर्ट के अन्दर डाल दिया और अपने बलशाली हाथों से मेरी चूचियों पर रंग लगाने लगे, साथ ही मेरी गर्दन को चूमने लगे.
वे अपने हाथों से मेरी चूचियों का मर्दन कर रहे थे.
जीजा जी ने मुझे इतनी कसकर पकड़ रखा था कि मैं हिल-डुल भी नहीं पा रही थी.
उनके बलशाली हाथों ने मेरी चूचियों को इतनी जोर से जकड़ रखा था कि मेरी चूचियों में दर्द महसूस हो रहा था.
मेरी आंखों में फिर से आंसू आ गए.
मैंने अपनी पूरी ताकत इकट्ठी करके जीजू को पीछे की ओर धक्का दिया और रोती हुई जोर से चिल्लाने लगी.
पिंकी- दीदी … दीदी … बचाओ मुझे … उहह हाहा हाह … हउ हा हा हाह … दीदी दीदी … दीदी … बचाओ मुझे … जीजा जी ने मुझे रंग लगा दिया!
निकिता दीदी- अरे विशाल तुम भी हठी हो … जब इसे रंग पसंद नहीं है तो क्यों रंग लगा रहे हो?
जीजू मेरे सामने ही दीदी से बोले- मेरी जान, चल तो तू ही आ जा!
मेरे सामने ही जीजू और उनके दोस्त सतेन्द्र ने दीदी को पकड़ लिया और दीदी के गाल, कमर, उनकी चूचियों पर भी जबरदस्त रंग लगाने लगे.
मैं विस्मित होकर जीजू के इस रूप को देख रही थी.
जीजू ने उस दिन मेरे सामने ही दीदी की ब्लाउज के अन्दर हाथ डालकर उनकी चूचियों को रगड़ना शुरू कर दिया.
मुझे सब कुछ बड़ा अप्रत्याशित सा लग रहा था … पर मैं चुपचाप बाथरूम में खड़ी सब कुछ देख रही थी.
पहली बार उस दिन मुझे बड़ा अजीब सा महसूस हो रहा था
उस दिन पहली बार मुझे अपनी चूत में गीलापन महसूस हुआ.
निकिता दीदी- विशाल तुम क्या कर रहे हो यार? तुम में शर्म-हया कुछ है या नहीं? सामने पिंकी खड़ी है यार!
जीजू- मेरी जान, तू तो नाराज हो रही है. इसको भी तो कुछ सीखने दे … ऐसी ही सीखेगी ये. किसी दिन तेरे सामने ही इसकी नथ उतारूँगा!
दीदी अपने आप को विशाल से छुड़ाते हुए बोली- विशाल, तुम भी आज तुम होश में नहीं हो. क्या अनाप-शनाप बके जा रहे हो? तुम्हें पता है तुम क्या बक रहे हो?
दीदी ने अपने आप को जीजू से छुड़ाया और अपने कमरे में चली गईं.
जीजा जी और सतेन्द्र दोनों ही दीदी के पीछे-पीछे कमरे में चले गए.
उन्होंने कमरे का दरवाजा थोड़ा सा बंद कर लिया.
अन्दर से दीदी की आवाजें आ रही थीं- विशाल … विशाल मान जाओ ना … अब नहीं … विशाल … कोई आ जाएगा … जो करना है रात को करना … विशाल मान जाओ … विशाल … विशाल!
मुझे बाथरूम तक दीदी की ये आवाजें आ रही थीं.
जीजू ने उस दिन सच में बहुत सारी शराब पी ली थी.
मैंने अपने आप को कुछ देर के लिए बाथरूम में बंद कर लिया और अपने सारे कपड़े उतारकर अपने रंग लगे शरीर को शीशे में निहारने लगी.
मेरी चूचियों में मीठा-मीठा सा दर्द हो रहा था.
होली के उस प्रकरण के बाद जीजू का नजरिया मेरे प्रति कुछ बदलने लगा था.
वे भी अब आते-आते हर समय मुझे छेड़ते रहते थे.
हर वक्त मुझे रिझाने की कोशिश करने लगे थे, कभी भी मुझे कहीं भी टच कर दिया करते थे.
मैं भी अब कुछ-कुछ जीजा जी में रुचि लेने लगी थी.
दोस्तो, मेरी इस जवान लड़की की वासना की कहानी में आपको मजा आ रहा होगा.
जवान लड़की की वासना की कहानी का अगला भाग: जीजा जी ने मेरी कुंवारी चुत को चोद दिया- 2
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