गे, लेस्बियन, पति की अदला-बदली सेक्स- 4

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गांडू गांडू Xxx कहानी में दो दोस्तों की बीवियां मायके गयी तो दोनों को सेक्स की तलब लगी. तब उन्होंने एक और दोस्त के साथ मिल कर अनल सेक्स का मजा लिया.

दोस्तो, मैं रतन दत्त आपको एक ग्रुप सेक्स कहानी लिख रहा था.
कहानी के तीसरे भाग
पतियों की अदला बदली करके चुदाई का मजा
में अब तक आपने पढ़ा था कि हिमांशु और संजीव पुराने दोस्त थे उन्होंने अपनी अपनी बीवियों की अदला बदली करके चुदाई का मजा ले लिया था.
इसमें उनके तीसरे दोस्त शर्माजी शामिल नहीं थे, जबकि शर्मा जी की बीवी उषा उन दोनों की बीवियों संजना और हेमलता के साथ लेस्बियन सेक्स में शामिल थी.

उस दिन की चुदाई के बाद से हर शनिवार की रात को हिमांशु अपनी प्रेमिका संजना के साथ बिताने लगा था.

संजीव अपनी प्रेमिका हेमलता के साथ मस्ती करने लगा था.
अदला-बदली किसी एक के फ्लैट में होती, दोनों जोड़े अलग अलग बेडरूम में सेक्स का आनन्द लेते.

ऐसा हम लोग सावधानी के लिए करते थे कि यदि कोई आ गया तो दरवाज़ा खोलते समय हम अपने पति के साथ हैं, ऐसा लगे.

अब आगे की गांडू गांडू Xxx कहानी आप संजना से सुनें :

मैं और हेमलता इस बात का ख्याल रखतीं कि अपने पतियों के सामने अपने प्रेमी के साथ चूमा चाटी आदि नहीं करें और अपने प्रेमी के साथ लिए यौन आनन्द की चर्चा पति से नहीं करें.
दोनों मर्द भी अपनी अपनी प्रेमिका के साथ लिए यौन आनन्द के बारे में बात नहीं करते थे.

शनिवार के अलावा बाकी किसी रात में जब हम दोनों सहेलियों का मूड होता, तो हम अपने पति के साथ यौन आनन्द ले लेतीं.
इस अदला बदली के कारण हम पति पत्नी के यौन जीवन में नई ऊर्जा आ गयी थी.

उषा के साथ मेरा और हेमलता का लेस्बियन सेक्स भी चालू था.

इसके अलावा और भी बहुत कुछ था जो हम चारों को अदला बदली से मिला.

संजीव सिर्फ गर्म पानी से नहाता था, मैं ठंडे पानी से, इसलिए हम साथ में नहीं नहाते थे.
जबकि हिमांशु ठंडे पानी से नहाता था, हेमलता गर्म पानी से.

जब मैं और हिमांशु शनिवार रात भर साथ होते, तब रविवार सुबह साथ में ही नहाते.
इसी तरह हेमलता, संजीव रविवार सुबह साथ नहाते.

हेमलता की फैंटेसी थी मूत्र पीना पिलाना.
एक बार उसने अपने पति हिमांशु को कहा भी था मगर हिमांशु ने उसे मना कर दिया था.

जब हेमलता ने संजीव को अपनी फैंटेसी बतायी तो संजीव ने कहा कि उसकी भी ऐसी इच्छा है.

नहाने से पहले हेमलता बाथरूम में दीवार पर पीठ टिकाकर पैर फैलाकर खड़ी हो गई.
संजीव ने उसकी चूत पर मुँह लगाया, हेमलता मूतने लगी और संजीव पीता गया.

उसके बाद हेमलता फर्श पर मुँह खोलकर बैठ गई और संजीव ने उसके मुँह में मूतना शुरू कर दिया.
हेमलता सारा मूत पीती गई.

संजीव जब अपनी मुझको घोड़ी बनाकर चोदता था, तो मैं अपने कूल्हों पर थप्पड़ मारकर संजीव को उकसाती थी कि वह और जोर जोर से कूल्हों पर थप्पड़ मारे, पर संजीव को इस तरह का रफ़ सेक्स पसन्द नहीं था.
जब मैं हिमांशु के साथ रात बिताती, हिमांशु मुझको घोड़ी बनाकर चोदता.

उस समय वह मेरे कूल्हों पर मस्त थप्पड़ मारता, इससे मुझको और जोश आ जाता.

मैं, हेमलता, उषा आपस में लेस्बियन सेक्स करती हैं, यह बात हमने अभी तक संजीव, हिमांशु, शर्माजी को नहीं बताई थी.

हर साल मैं, हेमलता, उषा अपने बच्चे के साथ गर्मियों की छुट्टियों में मायके जाती थीं.

पिछले साल जब हम तीनों पत्नियां बच्चों के साथ मायके गईं तो हमारे पतियों ने हमें ख़ुशी ख़ुशी जाने दिया था.
हमारे वापस आने के बाद बताया कि हमारे जाने के बाद तीनों के पतियों ने साथ खाना पकाया और पार्टी की.

इस बार जब पत्नियां मायके जा रही थीं, तो हिमांशु ने हेमलता को और संजीव ने मुझको रोकने की कोशिश की क्योंकि उनके यौन जीवन में हरियाली जो लौट आयी थी.
पर हम सब पत्नियां चली गईं.

आगे की कहानी आप संजीव की जुबानी सुनें.

संजना, हेमलता के जाने के बाद एक रात मैं और हिमांशु उसके फ्लैट में चर्चा कर रहे थे कि पत्नियों की बहुत याद आ रही है.

दरअसल मुझे हेमलता के साथ लिए यौन आनन्द की याद आ रही थी, हिमांशु को भी संजना के साथ यौन आनन्द की बात याद आ रही थी.

शर्माजी अपनी पत्नी को छोड़ने ससुराल गए थे इसलिए उनके न होने से हम दोनों आपस में बिंदास चर्चा कर रहे थे.

मैं और हिमांशु व्हिस्की पीने बैठे.

मैं- यार हिमांशु एक महीने बिना सेक्स के रहना मुश्किल होगा.

हिमांशु- संजीव तुझे याद है जब शादी के पहले मैं तेरे साथ खजुराहो गया था, तब हमने वहां की मूर्तियों की फोटो की किताब खरीदी थी. होटल में आकर हम किताब के गे सेक्स की फोटोज देखकर उत्तेजित हो गए थे. मैंने तेरे चूचे दबाकर तुझे चूम लिया था, फिर मैंने तेरी गांड मारी थी, हम दोनों को मजा आया था. हमारे सात दिन के टूर में हमने रोज सेक्स किया था. आज फिर हो जाए?

मैंने सर हिलाकर हां कहा.

हिमांशु तेल की शीशी ले आया, हम दोनों नंगे हो गए.
हिमांशु मेरे चूचे दबाने लगा, होंठ चूमने लगा.

मैंने पेट के बल लेटकर हाथ से अपने कूल्हे गांड की छेद से दूर कर दिए.
हिमांशु ने अपने लम्बे लंड पर तेल लगाया, मेरी गांड में लंड पेलकर मेरे ऊपर लेट गया.

मैं बहुत साल बाद गांड मरवा रहा था, तो मेरी गांड टाइट हो गयी थी.
मुझे जोर का दर्द हुआ तो मैंने हिमांशु से लंड बाहर निकालने को कहा, मगर हिमांशु नहीं माना. वह मेरे ऊपर लेटा रहा.

कुछ देर बाद दर्द कम हुआ, मैंने हिमांशु को बताया, तो हिमांशु मेरी गांड मारने लगा और जल्द झड़ गया.

मैं बोला- इतनी जल्दी झड़ गया, मुझे तो अभी मजा आना शुरू ही हुआ था … मैं पूरा आनन्द ले ही नहीं पाया!
हिमांशु- यार, तेरी गांड बहुत टाइट है, उसके मुकाबले पत्नी की चूत ढीली है, इसलिए खुद को संभाल ही नहीं पाया.

अगली तीन रातों में हिमांशु ने मेरी गांड मारी, अब दर्द बहुत कम मजा ज्यादा आने लगा.

हिमांशु कोशिश करता कि वह जल्दी न झड़े. वह थोड़ी ज्यादा देर टिका भी, पर मुझे पूरा मजा नहीं आया.

चौथी रात मैं पेट के बल लेटा था, हिमांशु ने मेरे ऊपर चढ़कर मेरी गांड गांड मारी … फिर वह झड़ गया.

उसने पूछा- क्या इस बार पूरा मजा आया?
मैंने कहा- पहले से अच्छा है, पर थोड़ी और देर करते तो मुझे पूरा मजा आता.

इतने में किसी ने कहा- तुम लोग अकेले अकेले मजा कर रहे हो!
मैंने आवाज़ पहचानी, वह शर्माजी की आवाज़ थी.

हिमांशु मेरे ऊपर से उतर कर नीचे बैठ गया, मैं भी बैठ गया.
मैंने पूछा- आप कब आए?

शर्माजी ने बताया- मैं आज ही लौटा हूँ. मैंने फ्लैट की कॉल-बेल बजायी, पर लाइट नहीं थी तो घंटी बजी ही नहीं. हमारी पत्नियां मायके में थीं, तो मैंने निसंकोच चाबी से दरवाज़ा खोला और अन्दर आ गया.

हम तीनों के पास एक दूसरे की फ्लैट की चाभी थी.
उन्होंने हमारा गे सेक्स पूरा देखा.

शर्माजी- संजीव, मैंने सुना तुम्हें पूरा मजा नहीं आया, मुझे मौका दो मैं तुम्हें बाकी मजा का देने की कोशिश करूँगा.
वे अपना लंड पैंट के ऊपर से सहला रहे थे.

अब बात खुल चुकी थी, मेरी गांड की खुजली नहीं मिटी थी.
मैंने पेट के बल लेटकर कहा- मैं तैयार हूँ.

हिमांशु ने तेल की बोतल शर्माजी को दी, पलंग से उतर कर चेयर लेकर हिमांशु मेरे सर की तरफ बैठ गया.
हिमांशु शर्माजी को देख रहा था, शर्माजी मेरे पीछे थे, वे मुझे दिखाई नहीं दे रहे थे.

मैंने देखा कि हिमांशु की आंखें बड़ी हो गयी थीं.

शर्माजी ने मेरे कूल्हे पर थपकी देकर कहा- क्या तुम तैयार हो?
मैंने अपने कूल्हे हाथ से फैला कर गांड के छेद से दूर कर दिए.

शर्माजी ने तेल मेरी गांड की छेद में उंगली से लगाया तो मैंने गांड ढीली छोड़ दी.
फिर उनका बड़ा सा लंड मेरी गांड में घुसा, तो मुझे तेज दर्द हुआ.

शर्माजी ने मेरी पीठ पकड़ रखी थी, मैं उठ नहीं पाया.
मैंने हिमांशु को पूछा- इन्होंने मेरी गांड में क्या लंड ही डाला है या कुछ और?

हिमांशु- हां, शर्माजी ने अपना लंड ही डाला है. उनका लंड मेरे लंड से काफी बड़ा और मोटा है. उनका बड़ा लंड देखकर मेरी आंखें फ़ैल गयी थीं.
मैं- पूरा अन्दर चला गया क्या?
हिमांशु- नहीं अभी लगभग आधा ही गया है.

मुझे मालूम था कि एक बाद पुरुष चोदना शुरू करता है तो झड़ने से पहले नहीं रुकता.

मैंने कहा- शर्माजी जरा धीरे से करना … बहुत दुख रहा है.

शर्माजी ने एक और बार कमर हिलाकर झटका दिया, फिर से दर्द की लहर उठी.
शर्मा जी ने ‘अब पूरा चला गया है’ कहा और वे मेरे ऊपर लेट गए.

मैं उनके लम्बे और तगड़े शरीर के वजन से दबा था और दर्द से हाथ पटक रहा था.
मैं दर्द से आ आह कर रहा था.
शर्माजी शांति से लेटे थे.

कुछ देर बाद दर्द थोड़ा कम हुआ तो मैं शांत होकर लेट गया.

शर्माजी- गांड ढीली छोड़ो, मैं शुरू कर रहा हूँ!
मरता क्या न करता, मैंने गांड ढीली छोड़ दी.

शर्मा जी धीमी गति से गांड मारने लगे, मुझे दर्द ज्यादा, मजा कम आ रहा था.

फिर कुछ देर बाद मुझे मजा ज्यादा आने लगा, मैं अपना लंड बिना छुए ही झड़ गया.
मैंने कहा- मेरा हो गया है.

शर्माजी ने गांड मारने की गति बढ़ा दी.
कमरे के मेरे कूल्हों पर शर्माजी की कमर टकराने की थप थप और मेरी आ आ की आवाज़ आ रही थी.

कुछ देर बाद शर्माजी ने मेरी गांड वीर्य से भर दी, उनका लंड सिकुड़ कर पक्क की आवाज़ के साथ गांड से बाहर निकल गया.

वे मेरे ऊपर से उतर गए.

मैं अपनी गांड सहला कर कहने लगा- अभी भी दुःख रहा है.
शर्माजी फ्रिज से बर्फ ले आए, रूमाल में बर्फ बांधकर मेरी गांड सेकने लगे.

मुझे थोड़ा आराम मिला.
फिर शर्माजी ने मुझसे पूछा- दर्द निवारक टेबलेट है घर में?

मैंने कहा- हां है.
फिर दवा कहां रखी है, यह बताया.

हिमांशु टेबलेट ले आया और मुझे पानी के साथ दवा दे दी.
मैं दवा खाकर लेट गया.

शर्माजी बर्फ से मेरी गांड की सिकाई करने लगे.
मेरा दर्द कम हुआ तो मैं उठकर बाथरूम जाने लगा.

उस वक्त मुझे चलने में मुश्किल हो रही थी, शर्माजी मुझे सहारा देकर बाथरूम ले गए.

बाद में शर्माजी ने बताया कि जब उन्होंने पत्नी के साथ पहली बार सम्भोग किया था, तो पत्नी को बहुत दर्द हुआ था. गुप्तांग पर बर्फ की सेक और दवा खाने से दर्द कम हो गया था.

दूसरे दिन भी मुझे दुकान में चलने में थोड़ी तकलीफ हुई, मैंने उस रात हिमांशु से कहा कि आज कुछ नहीं करेंगे.
मैंने आराम किया.

तीसरी रात मेरी गांड में खुजली होने लगी, मैंने हिमांशु से कहा- आज मजे करते है.
हिमांशु ने मुझे चूमकर मेरे चूचे दबाकर गर्म किया.

मैं पेट के बल लेटा था, हिमांशु मेरी गांड मार रहा था.
मैं सोच रहा था कि शर्माजी का खड़ा लंड कितना बड़ा है, मैं देख नहीं पाया … जिससे मुझे इतना दर्द हुआ.

जब शर्माजी ने मेरी गांड मारकर मेरे ऊपर से उतरे थे, उनका लंड झड़कर सिकुड़ गया था.

हिमांशु इस बार भी जल्द झड़ गया, मैं बाथरूम से फ्रेश होकर आया.

हिमांशु के पूछने पर मैंने बताया कि पूरा मजा नहीं आया.

जब शर्माजी ने काफी देर तक मेरी गांड मारी थी, तो पहले तो मुझे बहुत दर्द हुआ था, फिर मजा आने लगा था.
मैं अपना लंड बिना छुए ही झड़ गया था.

जिन पाठकों ने गांड मरवाई है, उन्हें पता होगा कि गांड मरवाने की शुरुआत में जो दर्द होता है, उसका भी अलग मजा है .. बाद में आनन्द ही आनन्द.

हिमांशु- तो शर्माजी को बुला लूँ?
मैंने भी मुस्कुरा कर हां कह दिया.

हिमांशु शर्माजी के फ्लैट में जाकर उन्हें ले आया, मैं नंगा बैठा था.

शर्माजी अन्दर आए, उन्होंने अपने कपड़े उतार दिए सिर्फ फ्रैंची चड्डी पहने रहे.
उन्होंने मुझे हाथ पकड़ कर खड़ा किया और मेरे होंठ चूमने लगे.

मेरे चूचे दबाने के बाद दोनों चूचों को बारी बारी से चूसा तो मैं उत्तेजित हो गया और मेरी गांड कुलबुलाने लगी.

मैं शर्माजी के चड्डी में कैद उभरे लंड को देखकर लंड के साइज का अंदाज लगा रहा था.

शर्माजी ने तकिया फर्श पर फेंककर कहा- तकिए पर घुटनों के बल बैठ जाओ!
उनकी आवाज से लगा कि वे मुझे हुक्म दे रहे हों, सच में मुझे अच्छा लगा.

मैं घुटनों के बल बैठ गया.

शर्माजी ने चड्डी उतार दी अब उनका खड़ा लंड मेरे सामने था.
उनका लंड करीब 7 इंच लम्बा और काफी मोटा था.

मैं उनके लंड को हाथ से पकड़ कर देख रहा था और सोच रहा था कि मैंने इतना बड़ा लंड कैसे अपनी गांड में ले लिया.
मुझे उनके लंड को वापस से अपनी गांड में लेने की इच्छा हो रही थी, पर डर भी लग रहा था.

शर्माजी ने हुक्म दिया- लंड चूसो!
मैंने कभी लंड नहीं चूसा था, पत्नी और प्रेमिका से अपना लंड चुसवाया था.

मैंने लंड को चूमा, फिर धीरे से लंड चूसने लगा.
उनका बड़ा था थोड़ा सा लंड ही मुँह में ले पा रहा था.

शर्माजी ने मुझे रोका और मेरा हाथ पकड़ कर खड़ा किया.
तकिया पलंग के किनारे रखकर मुझे तकिए पर बिठा दिया और तेल की शीशी मेरे हाथ देकर बोले- लो मेरे लंड पर तेल लगाओ.

मैंने बहुत सा तेल लंड पर लगाया.
शर्माजी ने मुझे प्यार से चित लेटा दिया, मेरी कमर तक का हिस्सा पलंग पर था, पांव फर्श पर.

शर्माजी ने मुझे अपने पांव छाती की तरफ करके पकड़ने को कहा, मैंने किया.
वे फर्श पर खड़े होकर लंड मेरे गांड के छेद में घिसने लगे, मैं गांड ढीली छोड़कर लंड अन्दर जाने का इन्तजार कर रहा था.

शर्माजी धीरे धीरे लंड गांड में डालने लगे. मेरी गांड फ़ैल रही थी, दर्द भी हो रहा था, पर पहली बार से कम.
मैं आ आ कर रहा था, सर झटक रहा था और शर्माजी मुस्कुरा रहे थे.

उनको मेरी दर्द और तड़फ देखकर मजा आ रहा था.
मुझे महसूस हो रहा था कि उनका मोटा लंड अन्दर घुसता जा रहा है.

शर्माजी ने अब मेरे पांव अपने कंधों पर रख लिए.
मैंने अपने पांव छोड़ दिए, गांड पर हाथ लगाकर महसूस किया कि लंड पूरा अन्दर चला गया है.

शर्माजी मेरे होंठ चूमने लगे, निप्पल मरोड़ने लगे तो मुझे फिर से जोश आ गया.
मैंने कमर हिलायी, तो शर्माजी समझ गए और वे तन्मयता से मेरी गांड मारने लगे.

गांड में मिलने वाले आनन्द से मैं सिसकारी ले रहा था.
शर्माजी इत्मीनान से गांड मार रहे थे.

कुछ देर बाद मेरी कमर दुखने लगी तो मैंने शर्माजी को बताया.
शर्माजी ने मुझे घोड़ी बनाकर पलंग के किनारे खड़ा किया, गांड में लंड डाला मेरी कमर पकड़ कर चोदने लगे, साथ कूल्हों पर चांटे मारने लगे.

मुझे बहुत मजा आ रहा था, मैं अपना लंड रगड़ने लगा और झड़ गया.

कुछ देर बाद शर्माजी का लंड फूलने लगा, वे भी मेरी गांड में झड़ गए.

इस तरह से करीब 20 रातों तक हिमांशु और शर्माजी ने मेरी गांड मारी, मेरी गांड ढीली हो गयी, अब मुझे लंड लेने में इतना दर्द नहीं होता.
शर्माजी अपनी पत्नी को वापस लाने ससुराल गए.

मेरी और हिमांशु की पत्नी 5 दिन बाद वापस आने वाली थी.
इन पांच रातों को हिमांशु ने मेरी गांड मारी.
मेरी गांड ढीली हो गयी थी.

उस रात को हिमांशु गांड मारते समय काफी देर टिका और उसने मुझे पूरा मजा दिया.

हमारी पत्नियां मायके से वापस आ गईं, हर शनिवार की रात मेरा और हिमांशु का पत्नियों की अदला बदली का खेल चलने लगा.

जब कभी मेरा हिमांशु का गे सेक्स का मन करता, उस रात दुकान बंद करने से पहले, नौकरों के जाने के बाद हम दोनों दुकान का शटर अन्दर से बंद करते और नंगे होकर चूमा चाटी करते.

फिर मैं टेबल पकड़ कर झुक जाता और हिमांशु से गांड मरवाता.

अब जब भी पत्नियों का जाना होता तो उनके जाने के बाद मैं हिमांशु, शर्माजी के साथ गे सेक्स का आनन्द लेते.
फिर शर्माजी की बदली हो गयी.

मेरा और हिमांशु का पत्नी बदला बदली का खेल चलता रहा.
हमने अपनी पत्नियों को अपने गे सेक्स के बारे में नहीं बताया था.

हमारी शादी की 25 वीं सालगिरह थी, मेरे और हिमांशु के बच्चे बड़े होकर हमारी दुकान सँभालने लगे थे.
हम चारों 25वीं सालगिरह मनाने खजुराहो गए.

खजुराहो की मूर्तियां हमारे सफल यौन जीवन का प्रेरणा श्रोत थीं.
मैं हिमांशु के साथ शादी से पहले खजुराहो गया था, हमारी पत्नियां संजना, हेमलता ने सिर्फ वहां की तस्वीरें देखी थीं.

हम चारों खजुराहो के एक होटल में दो दिन रहे.
सुबह हम सेक्स की मूर्तियों को ध्यान से देखते, दोपहर को होटल में आ जाते.

इधर मैं हेमलता और हिमांशु संजना के साथ उन आसनों को आजमाते.

शाम को फिर दूसरी मूर्तियां देखते, रात मैं अपनी पत्नी संजना और हिमांशु अपनी पत्नी हेमलता के साथ उसे आजमाते.
पत्नी व प्रेमिका के साथ सालों तक हमने नए सीखे आसन आजमाए.

जब हमारी उम्र 50 के करीब हो गई थी, हमारे बच्चों की शादी हो गयी.
शादी के बाद बच्चे हमारी सलाह पर अलग फ्लैट में रहने लगे.

उस समय घर में इंटरनेट आ गया था.
मैं हिमांशु संजना हेमलता सब साथ बैठकर सेक्स वीडियो देखते.

फिर कभी पत्नी अदला बदली कभी पत्नी के साथ यौन आनन्द लेते.

संजना और हेमलता का लेस्बियन संबंध भी चल रहा था, मेरा और हिमांशु का गे सेक्स भी चल रहा था.

जब हम 60 की उम्र में पहुंचे, तो हमें अन्तःवासना के बारे में पता चला, हम लोग अन्तःवासना में सेक्स कहानी पढ़ने लगे.

अब सेक्स हफ्ते में एक दो बार ही होता, पर होता मजेदार.
पत्नी अदला बदली भी चल रही थी.

उम्र बढ़ने के साथ हमारे बीच सम्भोग कम होने लगा, यौन क्रीड़ा, मुख मैथुन ही ज्यादातर होता.

आपको गांडू गांडू Xxx कहानी कैसी लगी, जरूर बताएं.

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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