पड़ोसन भाभी ने शरीफ लड़का समझ कर चुदवाया

desi Bhabhi Chudai story

देसी भाभी चुदाई स्टोरी में मेरे पड़ोस में एक सेक्सी भाभी थी. मैं उसे चोदना चाहता था तो मैंने उनसे दोस्ती कर ली. एक दिन भाभी ने मुझे सनी लियोनी की फिल्म दिखाने को कहा.

दोस्तो, कैसे हैं आप? उम्मीद है अच्छे होंगे
मेरा नाम विशु है. मैं हरियाणा में कुरुक्षेत्र के एक गांव में रहता हूँ.
मैं 25 साल का हरियाणवी छोरा हूँ. मेरी हाइट 5 फुट 9 इंच है, शरीर भरा हुआ है, रंग गेहुंआ है.

इस देसी भाभी चुदाई स्टोरी में मैंने लिखा है कि कैसे मैंने एक शरीफ आदमी बनकर पड़ोसन भाभी को पटाया और चोदा.

मेरे घर से कुछ ही दूरी पर भाभी का घर एक गली में था. उसी गली एक सिरे पर मेरा घर था.

भाभी का नाम मंजू था.
वे 30 साल की थीं.

भाभी दिखने में बहुत ही सुंदर थीं.
उनकी हाइट 5 फुट 4 इंच की थी और उनके मम्मों का साइज़ 36 इंच का था.
भाभी की गांड तो ऐसी थी मानो गांड के ऊपर दो मटके चिपका दिए हों. एकदम गोल मदमस्त गांड थी.

जब भी भाभी घर से निकलतीं तो वे अपनी गांड को ऐसे मटका कर चलतीं कि कोई भैन का लौड़ा नामर्द ही होगा … जो उनकी मतवाली गांड से अपनी नजर हटा पाए.
वर्ना सब उनकी गांड को चोदने की नजर से देखते हुए अपने अपने लौड़े सहलाने लगते थे.

भाभी का मेरे परिवार में आना-जाना लगा रहता था.

मैं जब भी उन्हें देखता, मेरा लंड मेरे आंडों को खींचकर आसमान की तरफ मुँह करके खड़ा हो जाता.

पहले कभी मैंने उनसे बात नहीं की थी पर मेरा उनसे बात करने का बड़ा मन करता था.

जब भी हम सारे दोस्त इकट्ठा होते तो उनका जिक्र ना हो, ऐसा हो नहीं सकता.
मेरे कई दोस्तों ने भी उन पर ट्राई तो की थी, पर भाभी किसी को भाव ही नहीं देती थीं.

अब मैंने उन्हें पटाने का प्लान तैयार किया.

भाभी जब भी मुझे दिखतीं, मैं भाभी को नमस्ते करने लगा.
दो-चार दिन ऐसे ही बीते.

फिर जब भी मैं उनके घर की तरफ जाता और अगर वे दिख जातीं तो उधर ही रुक कर उनसे बातें करने लगता.
मेरी बातों में एकदम शराफत झलकती थी तो भाभी को विश्वास हो गया था कि मैं अच्छा लड़का हूँ.

एक बार बात करते समय कुछ ऐसी चर्चा चली कि उसमें मैंने भाभी से मोबाइल के सुधरवाने का जिक्र कर दिया.
भाभी को मेरी वह बात याद रही.

दो दिन बाद ही भाभी का की-पैड वाला मोबाइल खराब हो गया था तो उन्होंने मुझसे कहा कि तुम परसों मोबाइल सुधरवाने की बात कर रहे थे. तभी शायद मेरे मोबाइल को भी बुखार सा चढ़ गया. यह काम ही नहीं कर रहा है, प्लीज तुम इसे भी ठीक करवा दो.

मैं उनकी बात सुनकर हंस पड़ा क्योंकि उन्होंने बड़े ही मजाकिया अंदाज में अपनी बात कही थी.
मैंने उन्हें हां कहते हुए उनका मोबाइल ले लिया और उधर से आ गया.

मैं भाभी के मोबाइल को लेकर निकल गया और अपने एक दोस्त से उसे ठीक करवा कर उसे भाभी को वापस दे दिया.

भाभी बहुत खुश हो गईं और मुझसे अन्दर आने को कहती हुई चाय पीने के लिए बोलीं.

मैंने कहा- मैं चाय नहीं पीता.
भाभी इतरा कर बोलीं- तो फिर क्या पीते हो?

उन्होंने यह हल्की मुस्कान के साथ पूछा था, तो मैं सकपका सा गया था.
मैंने पुनः मना किया- नहीं रहने दो, आप परेशान न हों.

भाभी अड़ सी गईं और दुबारा बोलीं- अरे बताओ न क्या पीना पसंद करते हो?

एक दो पल बाद मैं- भाभी, मैं सिर्फ दूध पीता हूँ.
भाभी ने हंसते हुए कहा- आ जा, दूध भी पिला दूँगी.

मैंने समझ गया कि भाभी मेरी खिंचाई करने के मूड में आ गई हैं तो मैंने भी शर्माने का ड्रामा करते हुए कहा- अरे नहीं भाभी, फिर कभी आता हूँ!
यह कह कर मैं तेज कदमों से अपने घर चला गया.

मैंने मन ही मन सोचा कि भाभी मुझसे मजाक करना सस्ता नहीं पड़ेगा आपको … आपकी लेकर ही रहूँगा.
अभी इतनी जल्दी तो नहीं लूँगा, पर एक दिन आपका दूध भी मैं जरूर पियूँगा और आपकी चुत में लंड भी पेलूँगा.

फिर कुछ ऐसा हुआ कि कई दिन तक मैं भाभी से बात नहीं कर पाया.

एक दिन उनका फोन आया- कितने दिन हो गए, ना तो दिखा, ना बात हुई. कहां रहता है? क्या याद नहीं आती मेरी?

मैंने पूछा- मेरा नंबर कैसे मिला?
भाभी- तू तो मिलता नहीं, तो मैंने तेरे चाचा के लड़के से तेरा नंबर तुझसे बात करने के लिए लिया है.

मैं समझ गया कि भाभी को मैं पसंद आ गया हूँ.

उस दिन मेरी भाभी से एक घंटा बात हुई.
उसके बाद तो भाभी कभी भी फोन कर देतीं और उन्हें कोई काम होता तो घर बुला लेती थीं.

एक दिन भाभी ने मुझे घर बुलाया.
मैं उनके घर आ गया, उस दिन उनके घर पर कोई नहीं था.

मैंने उन्हें देखा तो उनकी आंखों में एक अलग सी चमक दिख रही थी.
मैंने उन्हें देखते हुए सर को हिला कर इशारे से पूछा- हूँ … क्या काम है?

भाभी ने सीधे सीधे मुझसे कहा- तुम मुझे अच्छे लगते हो और मैं तुमसे प्यार करती हूँ!

यह सुनकर मैं एकदम से अचकचा गया कि भाभी तो एकदम से देने को रेडी हो गई हैं!

अब पसंद तो मैं भी भाभी को बहुत करता था.
पर मैंने कहा- प्लीज भाभी … मैं इन चक्करों में नहीं पड़ता और मैं ऐसा नहीं सोचता. भाभी, आप बहुत अच्छी लगती हो और मुझे आपसे बात करके अच्छा भी लगता है. पर भाभी हम दोनों अच्छे दोस्त हैं बस यही सही है!

ऐसी बात मैंने भाभी का विश्वास जीतने के लिए कही थी ताकि भाभी पर मेरा अच्छा प्रभाव पड़े.

भाभी भी मेरी बात समझ गईं और उन्हें मुझ पर और ज्यादा विश्वास हो गया कि मैं अच्छा लड़का हूँ.

भाभी मुझसे अब रोजाना बात करने लगी थीं और हमारे बीच धीरे धीरे सभी किस्म की बातें होने लगी थीं.

वे अपने पति से साथ होने वाली चुदाई की बातें मुझे बताने लगी थीं और उनके साथ सेक्स करने पर उन्हें क्या होता है, वह सब भी वे बताने लगी थीं.

मैं भी भाभी से फोन पर सेक्स करने लगा और उन्हें चुदाई की बातें करके गर्म कर देता.

एक दो बार मैंने भाभी से कहा- आप भैया के साथ घोड़ी बन कर सेक्स किया करो … मैंने देखा है कि उस तरह से सेक्स करने में बड़ा मजा आता है!

भाभी बोलीं- तूने किधर देखा?
मैंने आंख दबाते हुए कहा- मैंने सनी लियोनी की ब्लू-फिल्म देखी है … आप कहें तो आपको भी क्लिप भेज दूँ?

भाभी बोलीं- अरे मेरे पास तो की-पैड वाला फोन है, इसमें कैसे आएगी वह क्लिप?
मैं चुप हो गया.

फिर वे बोलीं- ऐसा कर न … तू मेरे घर आकर मुझे दिखा दे अपने मोबाइल पर!

मैं समझ गया कि जब चुदासी भाभी के साथ बैठ कर सनी लियोनी की चुदाई की वीडियो देखूँगा तो पक्के में भाभी नंगी होकर मुझसे चुदने के लिए तड़प उठेंगी.
मैंने हामी भर दी- ठीक है भाभी आता हूँ एकाध दिन में.

भाभी भी बोलीं- हां तेरे भैया का एक दो दिन में ही गांव जाने का प्रोग्राम बनने वाला है, मैं तुझे बता दूँगी. तब आ जाना!

अब मैं उनके फोन आने का इंतजार कर रहा था और मैंने मस्त मस्त से सेक्स वीडियो डाउनलोड कर ली थीं ताकि इंटरनेट में बफरिंग का लफड़ा न हो!

फिर वह सुहानी रात आ ही गई जब हम दोनों की टांगें एक दूसरे में फँसने वाली थीं.

भाभी के पति को एक रात में अपने गांव के खेत में पानी लगवाने जाना था और वे एक या दो दिन तक घर से बाहर रहने वाले थे.

जिस दिन भैया को गांव जाना था, उसी रात भाभी का फोन आया कि मैं आज घर पर अकेली हूँ, मुझे नींद नहीं आ रही थी तो मैंने सोचा कि तुझसे बात कर लूँ.

मैंने कहा- बच्चे कहां हैं?
उन्होंने कहा- स्कूल की छुट्टी हो गई है तो वे एक महीने के लिए मामा के घर गए हैं.

मैंने कहा- मैं आ जाऊं क्या? वह वीडियो भी दिखा दूंगा!
भाभी- मगर तू तो डरता है, कहीं मैं तुझे अपने पास ही ना रख लूँ!

मैं- अरे यार भाभी मेरी फटती है .. कहीं आपके पति वापस आ गए तो क्या होगा?
भाभी ने मुझे ताव दिलाने के अंदाज में कहा- हां तेरे भैया एक या दो दिन के लिए गांव गए हैं. मगर तेरी तो फटती है, तू आ ही नहीं सकता!
मैंने कहा- अच्छा ऐसी बात है … चलो मैं आ रहा हूँ … आप दरवाजा खोल कर रखो!

बस मैं बात करता-करता भाभी के घर के पास पहुंच गया.

मैंने कहा- भाभी, मैं आपके घर के पास आ गया हूँ.
भाभी हंसने लगीं- अरे रहने दे … तू मज़ाक कर रहा है.

मैंने कहा- आप दरवाजा तो खोलो.
इस पर भाभी मुझे चिढ़ाने लगीं कि तेरी फटती है .. तू आ ही नहीं सकता!

तब मैंने कहा- अपने घर की खिड़की खोलकर तो देखो और अपना गेट जल्दी से खोल कर रखो … मैं अभी अन्दर आता हूँ.

भाभी ने खिड़की खोलकर मुझे देखा और अन्दर बुला लिया.
भाभी मुझे अन्दर आया देखकर बेहद खुश हुईं और हंसती हुई बोलीं- वाह तू तो सच में आ गया!

अब मैं और भाभी बिस्तर पर बैठकर बातें करने लगे.

मैंने कहा- चलो भाभी, अब आपको मैं अपना दम दिखाता हूँ. फोन पर तो आप बहुत मचल रही थीं!
यह सुनकर भाभी चुप सी हो गईं और मुझे प्यार से देखने लगीं.

मैंने धीरे से भाभी को ‘आई लव यू’ कहा और उनके होंठों की तरफ अपने होंठ बढ़ा दिए.

भाभी ने भी अपने होंठ आगे कर दिए तो मैं उनको किस करने लगा.
भाभी मेरा साथ देने लगीं.

हम दोनों एकदम करीब हो गए और मस्ती से एक दूसरे के होंठों के रस के साथ साथ जीभ का रस भी आपस में साझा करने लगे.

हम दोनों ही हीट पर आ गए थे तो मैंने अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर भाभी के मम्मों पर रख दिया और उनके एक दूध को हाथ से पकड़ कर मसलने लगा.

भाभी आह आह करती हुई मुझसे अपने दूध मिंजवाने लगीं.

कुछ ही पल हुए थे कि वे मेरी शर्ट के बटन खोलने लगीं और जल्दी जल्दी मेरे सारे कपड़े उतारने लगीं.

मैंने भी भाभी के कपड़े उतार फेंके.
फिर हम दोनों ऐसे चिपक गए, जैसे पेड़ से बेल चिपक जाती है.

उनके मुँह से कामुक आवाजें निकल रही थीं- कितने दिन तड़फाया मुझे तूने … अब रहा नहीं जाता … आह आज मुझे खराब कर दे!

मैं भाभी की चूचियों से खेल रहा था और उनकी एक चूची को मुँह में दबा कर पी रहा था.
वे भी अपने हाथ से मुझे अपने दूध का मजा दे रही थीं.

उनकी कामुक आवाजों से और मस्त चूचे को चूसने से मेरा मन तो करने लगा था कि आज भाभी का पूरा दूध खा ही जाऊं.

कुछ देर बाद भाभी मेरे नीचे आ गईं और मैं उनके ऊपर चढ़ गया था.

मैंने दस मिनट तक उन्हें किस किया और अपने लौड़े को भाभी की चुत से रगड़ने लगा.
भाभी ने अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ लिया था और वे अपने बालिश्त से मेरे लंड का नाप ले रही थीं.

वे मुझे चूमती हुई बोलीं- तेरा तो बहुत बड़ा है … मारोगे क्या आज? सच में बड़ी तमन्ना थी कि बड़े लंड से चुद जाऊं … अब मुझसे रहा नहीं जाता, कर दे इस मेरे अन्दर जल्दी से!

मैंने उनकी दोनों टांगें चौड़ी कीं और भाभी की चूत पर अपने लंड को सैट कर दिया.
वे मुझे प्यार से देख रही थीं और मैं भी उन्हें वासना से देख रहा था.

उसी समय मेरे लंड में जोश आया और मैंने एक ही झटके में अपना 6 इंच का लंड भाभी की चूत में पेल दिया.
एकदम से लौड़ा अन्दर गया तो भाभी की चीख निकल गई.

मैंने कहा- क्या हुआ भाभी?
भाभी ने कहा- आराम से चोद न … सारी रात बाकी है अभी.

मैं- मेरा पहली बार है, सॉरी … मैं धीरे धीरे नहीं कर पाऊंगा.
भाभी ने अपनी गांड को उचकाया और मेरे लौड़े को अपनी चुत से पुचकारती हुई बोलीं- चलो कोई बात नहीं मेरे प्यारे देवर जी … मैं सब सिखा दूँगी तुझे!
मैं- हां, आप चोदना सिखाओगी, तब तो मैं पक्का सीख जाऊंगा.

हम दोनों हंसने लगे.

फिर मैं स्पीड में धक्के लगाकर लंड अन्दर-बाहर करने लगा.

कुछ ही देर में भाभी एक बार झड़ चुकी थीं और मैं उन्हें चोदे जा रहा था.

कुछ देर बाद भाभी दुबारा झड़ने को हुईं तो वे बोलीं- अब तुम भी झड़ जाओ, मैं दूसरी बार आ रही हूँ.
मैंने ओके कहा और तेज तेज धक्के मारते हुए मैं भी उनके साथ में झड़ गया.

झड़ने के बाद मैं भाभी के ऊपर ही लेटा रहा.
उस वक्त तक रात का बज चुका था.

मैं और भाभी कुछ देर बाद फिर कुछ करने की सोचने लगे तो भाभी ने कहा- मैं एक फोन करके अपने पति से पूछ लेती हूँ कि वे कब तक आएंगे.

भाभी ने फोन किया.
तो उन्होंने कहा- मेरा कोई ठीक नहीं है, बिजली परेशान कर रही है. यदि आया तो 3 या 4 बजे तक आ जाऊंगा वर्ना कल आऊंगा. मैं फ़ोन कर दूंगा.

उनका उत्तर सुनकर हम दोनों फिर से चालू हो गए.
भाभी कहने लगीं- अब मैं तुझे सिखाती हूँ कि प्यार कैसे करते हैं!

भाभी इस बार मुझ पर टूट पड़ीं.
वे बेदर्दी से किस करने लगीं.
मैं भी उनका पूरा साथ देने लगा.

फिर जैसे ही भाभी ने लंड पकड़ा, तो मेरे मुर्दा लंड में जान आने लगी थी.
मेरा लंड जल्द ही खड़ा हो गया.

कुछ मिनट तक हम दोनों एक-दूसरे को चूमते रहे.

फिर भाभी मेरे ऊपर आ गईं और वे अपने हाथों से मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर रगड़ने लगीं.
उन्होंने चुत के छेद में लौड़े के सुपारे को सैट किया और उचक कर लंड पर बैठ गईं.

वे अपनी गांड को ऊपर-नीचे करने लगीं और उस वक्त उनके मुँह से ‘ऊं … आह … उउ उउ …’ की आवाजें निकल रही थीं.
मैं तो मानो जन्नत में था, मुझे बिना मेहनत के चुत चुदाई का मजा मिल रहा था क्योंकि भाभी बड़ी तेजी से लंड के ऊपर-नीचे हो रही थीं और इस बार मैं उनके दूध पी नहीं, खा रहा था.

फिर कुछ देर बाद भाभी झड़ गईं और देसी भाभी चुदाई के बाद मेरे ऊपर ही लेटी रहीं.
मेरा अभी नहीं निकला था.

मैंने भाभी को अपने नीचे लिया और उनके ऊपर आकर चुदाई करना शुरू कर दी.
आठ दस धक्कों के बाद मैंने एकदम से रफ्तार बढ़ा दी.
थोड़ी देर में मेरा भी निकल गया.

भाभी ने सारा पानी अपने अन्दर समा लिया. उनकी आंखों में संतुष्ट होने की चमक थी.

भाभी- आह … उउ उउ … तू तो बड़ी मस्त चुदाई करता है रे.

उस रात को मैं भाभी के साथ ही सोया रहा. फिर चार बजे मैं अपने घर आ गया.

उसके बाद तो मेरे और भाभी के बीच न जाने कितनी बार चुदाई हुई, गिनती ही नहीं है.

दोस्तो, आपको मेरी और पड़ोसन भाभी की चुदाई कैसी लगी?

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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