delhi sexy girl chudai
दोस्तों, मेरा नाम राजीव है और मैं नॉएडा में रहता हूँ। उस वक्त मैं 24 साल का था, कद 5 फुट 7 इंच, औसत कद-काठी वाला लड़का।
ये कहानी मेरी ज़िंदगी की उस खास घटना की है, जब मैंने एक BPO जॉब जॉइन की थी और वहाँ नम्रता नाम की एक लड़की से मुलाकात हुई।
ये पूरी तरह सच्ची है, हर पल आज भी ताज़ा लगता है। Delhi Sexy Girl Chudai
ट्रेनिंग खत्म होने के बाद मैं फ्लोर पर कॉल्स हैंडल करने लगा। कुछ दिनों बाद नया बैच आया, जिसमें ज़्यादातर लड़कियाँ थीं।
मेरी नज़र नम्रता पर ठहर गई। वो दिल्ली से थी – गोरी, स्लिम फिगर, लंबे काले बाल जो कमर तक लहराते थे।
उसका चेहरा इतना मासूम और आकर्षक था कि देखते ही दिल धड़कने लगता।
आँखें बड़ी-बड़ी, होंठ गुलाबी और भरे हुए। ब्रेस्ट परफेक्ट शेप के, करीब 32 साइज़ के, जो उसकी टाइट टी-शर्ट में साफ नज़र आते।
कमर पतली, कूल्हे गोलाकार – कुल मिलाकर वो किसी की भी तमन्ना जगाने वाली थी। मैंने सोचा, इससे बात कैसे शुरू करूँ।
सीनियर होने का फायदा उठाया और उसके बैच के कुछ लड़कों से दोस्ती कर ली।
उनसे पता चला कि नम्रता दिल्ली की है, अकेली रहती है। धीरे-धीरे नम्रता से भी हाय-हेलो शुरू हुआ।
BPO में लड़कियाँ काफी ओपन होती हैं, इसलिए बातें जल्दी आगे बढ़ीं।
नंबर एक्सचेंज हो गए, लंच साथ करने लगे, ब्रेक में कॉफी पीते और हँसी-मज़ाक करते।
फोन पर रात-रात भर बातें होने लगीं – पर्सनल लाइफ, सपने, सब कुछ। बस 15-20 दिनों में हम अच्छे दोस्त बन गए।
हमारी शिफ्ट दोपहर 2 बजे से रात 10 बजे तक थी। एक रात उसका कॉल आया।
हिम्मत जुटाकर मैंने प्रपोज़ कर दिया – कहा कि तुम्हारे बिना जी नहीं लगता, आई लव यू नम्रता, तुम मेरी हो जाओ। सारे रोमांटिक डायलॉग मार दिए।
वो चुप रही, फिर हल्के से हँसी। अगले दिन ऑफिस में मिला तो मैंने सॉरी बोल दिया – कल ड्रिंक कर ली थी, जो कहा वो भूल जाओ।
उसने मुस्कुराकर कहा, “इट्स ओके, राजीव।” मुझे लगा ग्रीन सिग्नल मिल गया।
शाम को फिर बात रखी तो उसने शरमाते हुए हाँ कह दिया। खुशी से पागल हो गया मैं!
अब हम बॉयफ्रेंड-गर्लफ्रेंड की तरह बात करने लगे। फोन पर फ्लर्टिंग, गुड मॉर्निंग-गुड नाइट किसेस। एक दिन मूवी का प्लान बनाया।
उसने तुरंत हाँ कह दिया। हमने हाफ डे ले लिया और सीधे मल्टीप्लेक्स पहुँच गए।
मैंने जानबूझकर पुरानी मूवी चुनी थी ताकि हॉल खाली हो, लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया – उस दिन भीड़ थी।
मूवी शुरू हुई। अंधेरा होते ही मैंने उसका हाथ थामा। उसकी उँगलियाँ नरम और गर्म थीं।
मैंने धीरे-धीरे उसकी हथेली पर सर्कल बनाए।
वो शरमाई, फुसफुसाई, “क्या कर रहे हो?” मैंने कान में कहा, “तुम्हें किस करना चाहता हूँ।”
पहले तो मना करती रही, लेकिन मैंने प्यार से मनाया – आँखों में देखकर कहा कि तुम बहुत खूबसूरत हो।
आखिर वो मान गई। मैंने उसे बाहों में खींचा और होंठों पर होंठ रख दिए।
किस गहरा होता गया – मेरी जीभ उसके मुँह में, उसकी जीभ से खेलते हुए। स्वाद मीठा था, साँसें मिल रही थीं।
दो मिनट बाद मेरा हाथ उसकी टी-शर्ट के नीचे सरका और ब्रेस्ट पर पहुँचा। ब्रा के ऊपर से दबाया।
वो सिहर उठी, हाथ हटाने की कोशिश की। मैंने नहीं छोड़ा। आखिर वो थोड़ा नाराज़ हो गई और सब रोक दिया।
उस दिन बस इतना ही। अगले दिन से हम और करीब आ गए।
वो अपनी इंटीमेट बातें शेयर करने लगी – पीरियड्स की डेट्स, बॉडी के चेंजेस, सब। फोन पर सेक्सी बातें शुरू हुईं – फोन सेक्स।
मैं उसे बताता कि तुम्हारे बारे में सोचकर क्या करता हूँ, वो हाँफते हुए सुनती। कुछ दिन बाद फिर मूवी प्लान।
इस बार हॉल काफी खाली था। कॉर्नर सीट्स लीं। मूवी शुरू होते ही किस शुरू।
मैंने उसकी टी-शर्ट के अंदर हाथ डाला, ब्रा ऊपर की और निप्पल्स को उँगलियों से सहलाया।
वो गर्म होने लगी, सिसकारियाँ निकलने लगीं – “आह… राजीव…” पहले रोका, लेकिन जब मैं नाराज़ होने का नाटक किया तो खुद मान गई।
मैंने निप्पल्स को हल्के से पिंच किया, चूसा। फिर पैंट की ज़िप खोली और पैंटी के ऊपर से चूत पर हाथ फेरा। वो तड़प उठी, कमर ऊपर उठाई।
लेकिन फिर रोक दिया – बोली, “अगर ऐसा किया तो मैं चली जाऊँगी।” उस दिन भी बस ब्रेस्ट और किस तक रहा।
दो-तीन दिन बाद रात को उसका मैसेज आया – घरवाले दो दिन के लिए बाहर जा रहे हैं, सुबह 9 बजे निकलेंगे।
फिर बोली, “कल 10 बजे आ जाना, साथ ऑफिस चलेंगे। लेकिन बाइक कॉलोनी के बाहर पार्क करना, किसी को शक न हो।”
मेरा दिल ज़ोरों से धड़का। रात भर नींद नहीं आई। सुबह तैयार हुआ, घरवालों से कहा कि ऑफिस जल्दी बुलाया है।
रास्ते में मेडिकल स्टोर से डॉटेड कंडोम का पैकेट ले लिया – तीन पीस। मन में ठान लिया था कि आज नम्रता के साथ सब कुछ करूँगा।
कॉलोनी के बाहर बाइक खड़ी की और उसके फ्लैट पर पहुँचा। डोरबेल बजाई। दरवाज़ा खुला तो नम्रता खड़ी थी – रेड कलर की टाइट टी-शर्ट और ब्लैक लोअर में।
ब्रेस्ट का शेप साफ दिख रहा था, कमर नज़र आ रही। देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया। मैंने मुस्कुराकर कहा, “मेरा सोना कैसा है?”
वो शरमाते हुए बोली, “फाइन हूँ, माय डियर लवर।” मैं अंदर गया, दरवाज़ा बंद किया और उसे बाहों में भर लिया।
पहले हल्का किस, फिर गहरा। मेरी जीभ उसके मुँह में, साँसें तेज़। लंड उसके पेट से टकरा रहा था।
मैंने किस करते हुए लोअर के अंदर हाथ डाला। पैंटी गीली थी।
चूत पर उँगलियाँ फेरीं तो उसके मुँह से सिसकारी निकली – “आयययय… राजीव…” लेकिन उसने हाथ खींच लिया, बोली, “ये सब नहीं अभी।”
मैं रुक नहीं सका। टी-शर्ट ऊपर की तो देखा ब्रा नहीं पहनी थी। गुलाबी निप्पल्स खड़े थे। मैंने एक ब्रेस्ट मुँह में लिया, चूसने लगा। जीभ से निप्पल घुमाया।
पहले वो रोकी, “प्लीज़ मत करो…” लेकिन जल्दी ही उसकी साँसें तेज़ हो गईं,
आहें निकलने लगीं – “आह… उफ़्फ़… राजीव…” शरीर ढीला पड़ गया। वो भी गरम हो चुकी थी।
मैंने उसका लोअर और पैंटी नीचे सरका दी। वो पूरी नंगी थी – चूत पर हल्के बाल, गुलाबी और चमकदार।
उसे बेड पर लिटाया, ऊपर चढ़ गया। होंठ चूमते रहे, एक हाथ निप्पल्स मसलता रहा, दूसरे से चूत सहलाता रहा।
वो बहुत गीली थी। उंगली अंदर डाली – टाइट, गर्म और रसभरी। उसे थोड़ा दर्द हुआ, लेकिन अब मना नहीं कर रही थी।
सिर्फ आहें भर रही थी। मैंने जल्दी से कपड़े उतारे। लंड पूरी तरह खड़ा था। कंडोम लगाया।
वो मुझे देख रही थी, आँखों में चाहत और थोड़ा डर। मैंने उसके पैर फैलाए, लंड चूत पर रखा और धीरे धक्का दिया।
वो चिल्लाई – “आयययय… दर्द हो रहा है…” लेकिन वर्जिन नहीं थी, बस बहुत टाइट। मैं रुका, फिर धीरे-धीरे अंदर गया।
गर्माहट ने मुझे पागल कर दिया। रिदम पकड़ा – धीरे फिर तेज़।
उसके निप्पल्स काटे, जीभ मुँह में डाली। उसकी सिसकारियाँ कमरे में गूँज रही थीं – “आह… राजीव… और ज़ोर से…”
15 मिनट बाद हम दोनों साथ झड़े। मैं उसके ऊपर लेट गया, माथा चूमा। उसकी आँखों में संतुष्टि थी।
वो फ्रेश होने बाथरूम गई। मैं भी पीछे-पीछे। कपड़े पहने तो वो मुझे देख मुस्कुराई, हाथ पकड़ा और खींचकर बेड पर ले गई। “Delhi Sexy Girl Chudai”
शरारत भरी नज़रों से मेरे कपड़े उतार दिए। मुझे धक्का देकर लिटाया और ऊपर चढ़ गई।
लंड हाथ में लिया, ऊपर से चूमा, फिर मुँह में लिया। गर्म, नरम एहसास – मुझे करंट सा लगा। वो चूस रही थी, जीभ घुमा रही थी।
फिर हम 69 पोज़िशन में आ गए। मैं उसकी चूत चाट रहा था – रस मीठा-नमकीन, वो मेरा लंड चूस रही थी। दोनों पागल हो रहे थे।
फिर मैं ऊपर आया। उसे जोर-जोर से चोदा। वो चिल्ला रही थी – “आह… फक मी हार्ड…” वो पहले झड़ गई, शरीर काँपा।
मैंने उसे पलटा, डॉगी स्टाइल में लिया। कूल्हे पकड़े और पीछे से धक्के मारे। उसकी आहें और तेज़।
15 मिनट बाद मैं भी झड़ गया। हम बेड पर गिर पड़े, पसीने से तर, एक-दूसरे को बाहों में भरकर।
थोड़ी देर बाद वो हँसकर बोली, “तुम्हारा तो छोटा है ना?”
मैंने मुस्कुराकर कहा, “नॉर्मल ही है बेबी, 6 इंच। ब्लू फिल्मों में सब बड़ा दिखाते हैं।”
फिर पूछा, “तेरी सील तो पहले से टूटी हुई थी?”
वो शरमा गई, बोली, “हाँ, खुद उंगली से कर लिया था कभी-कभी।”
फिर हम साथ नहाए। शावर के नीचे एक और राउंड हो गया – दीवार से सटाकर, पानी गिरता हुआ।
उसके बाद कपड़े पहने और ऑफिस के लिए निकले।
वो दिन आज भी याद आता है – प्यार, रोमांस और भरपूर सेक्स से भरा। ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत दिन।
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