बारिश की रात में भाभी की चुदाई

barsaat ki raat mein bhabhi ki chudai

मेरा नाम स्नेहा है। उम्र २७ साल। शादी को ढाई साल हो चुके हैं। मेरे पति राहुल एक अच्छे इंसान हैं, लेकिन बेडरूम में वो पूरी तरह फेल हैं। वो मुश्किल से तीन-चार मिनट में झड़ जाते हैं और फिर सो जाते हैं। मेरी चूत हर रात तड़पती रहती है। मैं अकेले में उँगलियाँ डालकर खुद को राहत देती, लेकिन वो खालीपन कभी नहीं भरता।

घर में राहुल का छोटा भाई विकाश भी रहता है। विकाश २४ साल का है, जिम का दीवाना, लंबा कद, चौड़ी छाती, मोटी बाहें और पेट पर सिक्स पैक। जब वो घर में सिर्फ शॉर्ट्स पहनकर घूमता है तो उसका मोटा, भारी लंड का उभार साफ दिखता है। उसकी नजरें मेरी चूचियों, कमर और गांड पर देर तक अटकी रहती हैं।

उस दिन पूरा आसमान काला छा गया था। मॉनसून की तेज बारिश शुरू हो चुकी थी। राहुल सुबह ही हैदराबाद के लिए निकल गया था और बोला था कि चार दिन बाद लौटेगा। घर में सिर्फ मैं और विकाश थे। शाम होते-होते बारिश मूसलाधार हो गई। बिजली चली गई। पूरा घर अंधेरे में डूब गया।

मैं लिविंग रूम में तीन मोमबत्तियाँ जलाकर बैठी थी। मेरी हल्की गुलाबी नाइट सूट बारिश की छींटों से भीग चुकी थी। कपड़ा मेरे बदन से चिपक गया था। मेरी भारी ३६ साइज की चूचियाँ और काली पैंटी का निशान साफ दिख रहा था।

विकाश अंदर आया। उसके बाल भीगे हुए थे। उसने सिर्फ काली शॉर्ट्स पहनी हुई थी। उसकी छाती पर बारिश की बूँदें चमक रही थीं। मसल्स पानी से और भी चमकदार लग रहे थे।

“भाभी, बहुत ठंड हो रही है। पास आ जाओ,” उसने गहरी आवाज में कहा।

मैं हिचकिचाई, लेकिन ठंड के मारे उसके पास सरक गई। विकाश ने मुझे अपनी मजबूत बाहों में खींच लिया। मेरे भीगे बदन से उसकी गर्म छाती टकराई। मेरी चूचियाँ उसके सीने से दब रही थीं। उसकी साँसें मेरे गले पर गर्म-गर्म पड़ रही थीं।

“भाभी… आपकी ये गीली नाइट सूट… बहुत खतरनाक लग रही है,” उसने मेरे कान में फुसफुसाया।

मैं काँप उठी। “विकाश… ये गलत है… मैं तुम्हारी भाभी हूँ…”

लेकिन विकाश ने मेरे होंठों पर अपना मुंह रख दिया। उसका किस जंगली था। उसकी जीभ मेरे मुंह में घुसकर मेरी जीभ को चूसने लगी। मैं पहले विरोध करती रही, लेकिन धीरे-धीरे मैं भी उसके किस का जवाब देने लगी। उसकी उँगलियाँ मेरी पीठ पर घूम रही थीं, फिर नीचे मेरी गांड पर आ गईं। उसने मेरी गांड को जोर से दबाया।

विकाश ने मुझे उठाकर सीधे बेडरूम में ले गया। मोमबत्तियों की हल्की पीली रोशनी में उसने मेरी नाइट सूट का टॉप ऊपर कर दिया। मैंने ब्रा नहीं पहनी थी। मेरी भारी, गोरी चूचियाँ बाहर आ गईं। निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे।

विकाश ने एक चूची मुंह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा। उसकी जीभ निप्पल के चारों तरफ घूम रही थी, कभी हल्का काट रहा था। “आह… विकाश… धीरे… आह… बहुत मजा आ रहा है… चूसो और जोर से…” मैं सिसकार रही थी।

उसने दूसरी चूची को हाथ से मसलते हुए चूसा। मेरी चूत अब पूरी तरह गीली हो चुकी थी। विकाश ने मेरी नाइट सूट पूरी तरह उतार दी। मैं सिर्फ पैंटी में थी। उसने पैंटी भी खींचकर उतार दी। मेरी साफ, गुलाबी चूत बारिश की ठंडी हवा में खुली पड़ी थी।

विकाश घुटनों पर बैठ गया। उसने मेरी जाँघें फैलाईं और अपना मुंह मेरी चूत पर रख दिया। उसकी गर्म जीभ मेरी चूत की फाँक में घुस गई। वो जोर-जोर से चाटने लगा — ऊपर से नीचे तक, क्लिट को चूसता, अंदर जीभ डालकर चक्कर काटता।

“आह… विकाश… और चाटो… मेरी चूत को चूसो… हाँ… वहीं… आह… तुम्हारी जीभ जादू कर रही है…” मैं कमर उठा-उठाकर चीख रही थी।

विकाश ने दो मोटी उँगलियाँ मेरी चूत में डाल दीं और तेजी से अंदर-बाहर करने लगा। उसकी जीभ मेरी क्लिट को तेजी से चूस रही थी। कुछ ही मिनटों में मैं पहली बार झड़ गई। मेरा गर्म रस उसके मुंह और चेहरे पर फैल गया। विकाश ने सब चाट लिया।

अब विकाश खड़ा हो गया। उसने शॉर्ट्स उतारी। उसका मोटा लंड बाहर आया — ८ इंच लंबा, बहुत मोटा, नसें फूली हुईं, सिर लाल और चमकदार। मैंने उसे हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी।

“विकाश… कितना मोटा और भारी है तेरा लंड… मेरी चूत फाड़ देगा…”

विकाश ने मुझे बेड पर लिटाया, मेरी टाँगें अपने कंधों पर रखीं और अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रख दिया। धीरे से दबाया। सिर अंदर गया। फिर एक जोरदार धक्का — पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया।

“आआह… फट गई मेरी चूत… विकाश… बहुत मोटा है… आह… धीरे… आह…” मैं चीखी।

विकाश ने धीरे-धीरे धक्के मारने शुरू किए। हर धक्के पर उसके अंडे मेरी गांड से टकरा रहे थे। बारिश की तेज आवाज के साथ फच-फच की आवाज पूरे कमरे में गूँज रही थी।

“भाभी… आपकी चूत बहुत तंग और गरम है… मेरे लंड को निचोड़ रही है… आह… कितनी अच्छी लग रही है…”

वो धीरे-धीरे तेज होता गया। मैं अपनी टाँगें उसके कमर पर लपेटकर चीख रही थी — “हाँ विकाश… और जोर से… फाड़ दो मेरी चूत… राहुल कभी नहीं भर पाता… तेरा मोटा लंड ही मेरी चूत का असली मालिक है… आह… और तेज… चोदो अपनी भाभी को…”

विकाश ने मेरी चूचियों को जोर से दबाया, निप्पल्स को चूसा और काटा। वो लगातार २५ मिनट तक मुझे चोदता रहा। मैं तीन बार झड़ चुकी थी। आखिर में उसने जोर-जोर से धक्के मारे और मेरी चूत के अंदर गरम-गरम पानी छोड़ दिया।

लेकिन विकाश अभी थका नहीं था। उसने मुझे पलटकर डॉगी स्टाइल में किया। मेरी गोल गांड ऊपर थी। उसने गांड पर जोरदार थप्पड़ मारे और फिर से लंड अंदर डाल दिया।

“भाभी… आपकी गांड बहुत सॉफ्ट और गोल है… आज तो चूत को ही फाड़ता हूँ… आह…”

वो मेरी कमर पकड़कर पीछे से तेज-तेज धक्के मार रहा था। हर धक्के पर मेरी चूचियाँ झूल रही थीं। मैं तकिए में मुँह दबाकर चीख रही थी। विकाश ने इस बार मुझे पूरे ३० मिनट चोदा। मैं चार बार झड़ गई।

फिर उसने मुझे गोद में उठा लिया। मैं उसकी गोद में बैठकर उछलने लगी। उसका मोटा लंड मेरी चूत में पूरी तरह अंदर-बाहर हो रहा था। मेरी चूचियाँ उसके मुँह के सामने उछल रही थीं। वो उन्हें चूसता और मेरी गांड पर थप्पड़ मारता।

“विकाश… मैं तेरी हूँ… तेरी रंडी हूँ… चोद मुझे पूरी रात… आह… हाँ… और तेज… मेरी चूत फाड़ दो…”

बारिश रात भर तेज होती रही। विकाश ने मुझे पूरे चार बार चोदा — हर बार लंबी, जोरदार और गहरी चुदाई। मेरी चूत सूज गई थी, लेकिन खुशी से भरी हुई थी।

सुबह होने से पहले हम थके हुए लेटे थे। मैं विकाश के सीने पर सिर रखे लेटी थी। उसका लंड अभी भी मेरी जाँघ से सटा हुआ था।

“विकाश… बारिश की इस रात तूने मुझे वो खुशी दी जो राहुल कभी नहीं दे पाया। अब हर बारिश की रात तू मुझे चोदना,” मैंने कहा।

विकाश ने मेरी चूत पर हाथ फेरा और बोला, “भाभी, अब हर बारिश में आपकी चूत मेरे मोटे लंड से भरी रहेगी।”

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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