antahvasna reader chudai story
अन्तःवासना कहानी रीडर स्टोरी में लेखक ने अपनी एक पाठिका भाभी के साथ आपबीती बताई है. शादी के दस साल बाद जब सेक्स लाइफ रसहीन होने लगी तो भाभी की सहेली ने ऑनलाइन कहानी पढ़ने की राय दी.
दोस्तो, मैं आपका साथी अनुराग अग्रवाल उर्फ अन्नू एक बार फिर से नई सेक्स कहानी के साथ हाजिर हूँ.
प्यारे-प्यारे दोस्तो और मेरी प्यारी-प्यारी लंड की रानियो, मेरी प्यारी-प्यारी हसीनाओ … जिन्दगी के हर एक पल का भरपूर आनन्द लो, क्योंकि मेरी ये टैग लाईन ‘जिन्दगी ना मिलेगी दोबारा.’ बहुत कुछ कहती है.
आपको तो पता ही है कि मैं उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले का रहने वाला हूँ.
मेरे पास बहुत सारे पाठकों के मेल आते हैं. कोई मुझे अपनी कहानी लिखने के लिए कहता है, कोई अपनी समस्याओं के समाधान के लिए मुझसे सलाह मांगता है.
मैं भी पूरी कोशिश करता हूँ कि उनकी समस्याओं के बारे में उनका उचित मार्ग दर्शन कर सकूं.
इधर प्रकाशित ज्यादातर कहानियां मेरे निजी अनुभव पर आधारित हैं और कुछ कहानियां मेरे पाठकों के निजी अनुभवों पर आधारित हैं, जो मेरे द्वारा ही भेजी गई हैं.
थोड़ा बहुत मसाला मैंने अपनी कल्पना के आधार पर अन्तःवासना कहानी रीडर स्टोरी को और अधिक कामुक और सेक्सी बनाने के लिए डाला हुआ है.
‘हो सके तो कुछ मुस्कुराहट बांटिये,
रिश्तों में कुछ सरसराहट बांटिए,
नीरस सी हो चली है जिन्दगी बहुत,
थोड़ी सी इसमें शरारत बांटिए,
सब यूं ही भाग रहे परछाईयों के पीछे,
अब सुकून की आदत डालिए;
जिन्दगी यूं ही ना बीत जाए गिले शिकवों में …
बेचैनियों को कुछ राहत में बांटिए,
थोड़ी सी कुछ शरारत बांटिए, थोड़ी सी कुछ शरारत बांटिए.
आप सब सदैव खुश और आनन्दित रहें.
वैसे दोस्तो सेक्स को देखने का हर किसी का अलग नजरिया होता है.
मेरे विचार से यह हमारे जीवन में होने वाली एक आम प्रक्रिया है, जैसे हम भूख लगने पर खाना खाते हैं, प्यास लगने पर पानी पीते हैं, वैसे ही सेक्स की इच्छा होने पर सेक्स करते हैं.
आप मानो या ना मानो सेक्स हमारे जीवन का एक बहुत अहम हिस्सा है.
सेक्स करते रहने से हम डिप्रेशन, तनाव, अवसाद से काफी हद तक निजात पाते हैं और सेक्स ना कर पाने के कारण हम अन्दर ही अन्दर कुंठित और अवसाद ग्रस्त हो जाते हैं.
अब सेक्स कैसे करें और कैसे ना करें, ये सब आपके अपने नजरिये पर निर्भर करता है … जो सम्भोग से बहुत भिन्न है.
खुद को खुश रखने के लिए एक स्त्री और एक पुरुष के साथ भोग करने को सेक्स कहते हैं.
दूसरा होता है सम्भोग- सम+भोग यानि समान रूप से भोगना, जिसमें भोग देह से नहीं बल्कि भावनाओं के स्तर पर तन मन और आत्माओं के साथ जुड़ाव का होता है.
सम्भोग प्रेम की वह समाधि है, जिसमें प्रेमी और प्रेमिका एक दूसरे में परस्पर लीन हो जाते हैं.
बनाने वाली की बनाई इस सृष्टि में प्रजनन का होना अति आवश्यक है … और सम्भोग प्रजनन का मूल आधार है.
बिना प्रजनन के किसी भी जीव जाति की उत्पत्ति संभव नहीं है.
इस सृष्टि में कोई चिर स्थायी नहीं है इसलिए प्रजनन के द्वारा नयी-नयी प्रजातियां उत्पन्न होती हैं और हमारी वंश बेला को आगे बढ़ाने का काम करती हैं.
औरत वही निखरती है, जो मर्द की बांहों में बेहिचक बिखरती है.
टांगें फैलाकर जब मर्द अपनी जीभ रगड़-रगड़ कर औरत की चूत को चूसता है, तो औरत की चुत से अमृत झर-झर कर निकलता है और मर्द उस रस को पीकर उन्मत्त हो जाता है.
फिर वह औरत के ऊपर चढ़ कर उसके जिस्म को मदमस्त तरीके से चोदता है.
उस वक्त चुदाई में जो मजा औरत को आता है, बस वही जीवन का असली आनन्द होता है.
एक औरत हमेशा ही इसी आनन्द में डूबने के लिए लालायित रहती है. इसी आनन्द को पाकर उसका जिस्म भर जाता है और उसके रूप और रंग में एक अलग प्रकार का निखार आता है.
इसका प्रत्यक्ष उदाहरण आप देख सकते हैं कि जब स्त्री शादी के बाद अपने पीहर आती है तो उसकी खूबसूरती का लावण्य अगल ही दिखाई देता है, जिसे मेरी भाषा में कह सकते हैं कि जलेबी शीरा पी गई.
मैंने अपनी पिछली कहानियों में अलग अलग किस्म की फंतासियों के बारे में बताया था कि आजकल लोगों की क्या-क्या मस्त-मस्त फंतासियां होती हैं.
कभी-कभी रास्ते में, रेस्टोरेंट में, सिनेमा हॉल में, किसी पार्क में या किसी शादी व अन्य किसी ऐसी जगह जहां औरतें या लड़कियां मिल जाती हैं, उनका जादुई फिगर, उनकी मस्त कसी हुई चूचियां, बलखाती कमर और थिरकती गांड जो उनकी टाइट ड्रेस से उन्हें और भी ज्यादा सेक्सी बना देती है.
उनके मस्त बूब्स मर्दों के दिलों में घंटी बजा देते हैं.
उस वक्त मर्दों का दिल और दिमाग इसी मादक विचार से भर जाता है कि काश ये सुन्दर औरत या लड़की उसके लंड के नीचे होती.
मर्दों का दिल और दिमाग बस बार-बार उसे ही देखना चाहता है, उसके बारे में ही सोचने लगता है.
ऐसा ही औरतों और लड़कियों के साथ भी होता है, वे भी किसी हैंडसम और कसरती लड़के को देखकर खुद ब खुद उसके लंड के नीचे आने के लिए सोचने लगती हैं.
आप में से बहुत सारे दोस्तों के साथ भी क्या कभी ऐसा महसूस हुआ है? जरूर बताएं.
यह सब लिखने का आशय यह था कि मेरे पास मेरे बहुत सारे पाठकों की ऐसी ही मस्त-मस्त कल्पनाएं लिख कर आती हैं, जिन्हें मैं अपनी कहानियों में बताने का प्रयास भी करता रहता हूँ.
इसी तरह की रसभरी कल्पनाओं से प्रेरित होकर मैं अपनी सभी कहानियों में आपको जीवन के इस मधुर रस को चखने की सलाह देता हूँ और हमेशा सेक्स करके खुश रहने के लिए आपको प्रेरित भी करता रहता हूँ.
मेरी आज की इस सेक्स कहानी की नायिका अदिति भार्गव हैं.
अन्तःवासना कहानी रीडर अदिति के साथ घटी यह एक सच्ची घटना है, जो शायद मेरे कारण ही उसके साथ हो गयी.
लगभग एक वर्ष पहले की बात है.
रायगढ़ से मेरे पास एक ईमेल आया.
यह ईमेल एक 34 साल की बेहद हसीन, खूबसूरत औरत का था, उसी का नाम अदिति भार्गव था.
उस मेल में लिखा था कि अनुराग जी आपकी कहानियां पढ़-पढ़ कर मेरी चूत कुलबुलाने लगती है, रस बहने लगता है. मुझे सेक्स की इतनी तलब लगने लगती है कि जब तक मैं अपनी चूत में खीरा, बैगन या मूली ना दे लूं, मेरी चूत शांत ही नहीं होती है.
उसने आगे मेरी एक सेक्स कहानी का हवाला देते हुए लिखा था कि जिस तरह से आपने दिशा का गैंग-बैंग करवाया है, कभी-कभी मेरा मन भी करता है कि 2-3 आदमी मुझे रगड़-रगड़ कर चोदें.
अंत में उसने लिखा था कि मैं चाहती हूँ कि आप मेरी कोई कहानी लिखें.
इसी तरह से 8-10 दिन तक ई-मेल पर बात करते-करते हम दोनों अच्छे मित्र बन गए थे और एक दूसरे से हर तरह का मजाक, सेक्स चैट करने लगे थे.
एक दिन अदिति मेरे साथ अपने लैपटॉप पर मुझसे सेक्स चैट कर रही थी.
उसी दौरान उसके साथ एक रियल घटना हो गई, जो उसने मुझे बाद में भेजी थी.
उसने अपनी वह घटना मुझे लिख कर भेजते हुए कहा था कि मैं इस सच्ची घटना को एक सेक्स कहानी के रूप में लिखूं.
दोस्तो, अदिति का उपनाम हनी भी है.
उसने जो कहानी मुझे भेजी, मैं जस की तस आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहा हूँ.
आशा है कि मेरी पिछली कहानियों की तरह आपकी यह सेक्स कहानी भी बहुत पसंद आएगी … और आपका प्यार मुझे मिलता रहेगा.
आप हनी की कलम से उसकी सेक्स कहानी को सुनें.
हैलो फ्रेंड्स, मैं अदिति भार्गव हूँ. सब लोग प्यार से मुझे हनी कह कर भी पुकारते हैं.
मैं 34 साल की खूबसूरत सेक्सी औरत हूँ.
औरत के जिन अंगों को देखकर पके हुए पुरुष और जवान लड़के आहें भरते हैं, वे अंग मुख्यतः चूचियां और भरी हुई गांड ही होती है.
मेरी उभरी हुई 34 इंच की चूचियां और 36 इंच की उठी हुई गांड, दोनों ही मेरे शरीर की जान हैं.
मेरी उभरी हुई चूचियों और मेरी गांड को देखकर सभी मुझे कातिल निगाहों से निहारते रहते हैं.
आज जब मैं यह कहानी लिख रही हूँ, तो वासना से मेरे हाथ कांप रहे हैं.
एक अजब सी सनसनी मेरे सारे बदन में दौड़ रही है.
इस सेक्स कहानी में मेरे पति ने गुस्से में मेरे साथ क्या-क्या किया, उस सबका वर्णन मैंने किया है.
आप तो जानते ही हैं कि शादी के 3-4 साल तक तो हर कपल में बहुत जोश होता है, जो हम दोनों में भी था.
मैंने अपने पति सुरेश के साथ लंड और चूत का बहुत खेल खेला.
हमारे घर का कोई हिस्सा ऐसा हम दोनों ने नहीं छोड़ा था जहां हम दोनों ने जबरदस्त सेक्स ना किया हो.
किचन में, खुली छत पर सब जगह सुरेश और मैंने सेक्स का मजा लिया था.
मतलब अपनी शुरूआती जिन्दगी में चुदाई का भरपूर मजा लिया.
सुरेश मुझ पर इस कदर से लट्टू थे कि वे मेरे लिए कुछ भी करने के लिए तैयार रहते थे.
मैं भी अपने पति की हर ख्वाहिश पूरी करती थी.
जैसा वे कहते थे, मैं वैसा सब कुछ करने के लिए हर समय तैयार रहती थी.
हर रात हम दोनों ही चुदाई के कम से कम 2 या 3 राउंड लगा लिया करते थे.
सुरेश मेरी चूत को और मैं उनके लंड को चूस-चूस कर ही लाल कर दिया करते थे.
पर दोस्तो, समय के साथ-साथ और बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण धीरे-धीरे सभी के बीच का यह खेल नीरस होता जाता है.
मेरी शादी को भी लगभग 10 साल हो गए थे, बच्चे अपने स्कूलों में व्यस्त थे.
मेरे पति सुरेश अपने व्यापार में और मैं अपनी घर-गृहस्थी में.
अक्सर घर का काम निपटा कर मैं घर में बैठी-बैठी बोर हो जाया करती थी.
एक दिन बाजार में मुझे मेरी पुरानी सहेली सिमरन दिखाई दी.
मैं और सिमरन कॉलेज की सहेलियां थीं और हमने कॉलेज में साथ-साथ बहुत मजे किए थे.
सिमरन को देखते ही मैं पुरानी यादों में खो गई.
वे भी क्या दिन थे.
कॉलेज टाइम में एक अलग खुमारी दिल और दिमाग पर चढ़ी रहती थी.
कॉलेज के लड़के, मेरे और सिमरन के आगे पीछे घूमा करते थे और हर तरीके से हमें इम्प्रेस करने की कोशिश किया करते थे.
हम दोनों उन्हें चिढ़ाया करती थीं.
मैं और सिमरन दोनों ही लड़कों से बहुत मजे किया करती थीं.
बातों बातों में सिमरन ने मुझे अन्तःवासना सेक्स कहानी साईट के बारे में बताया और कहा- जब भी मैं बोर होती हूं, तो ये सेक्सी कहानियां पढ़कर अपना समय गुजारती हूँ.
मुझे भी सिमरन का आईडिया बहुत पसंद आया.
अब जब भी मैं बोर होती या खाली होती तो मैं अपने लैपटॉप पर कहानियां पढ़ने लगती.
एक दिन मैं ऐसे ही खाली बैठी थी, तो सोचा क्या करूं.
मैंने अन्तःवासना कहानी साईट पर सेक्सी कहानियां पढ़नी चालू कर दीं.
इधर अनुराग जी कुछ कहानियां प्रकाशित थीं, मैंने उनकी कहानियां पढ़कर उन्हें मेल किया.
दो दिन बाद उनका मैसेज आया … और हमारी एक दूसरे से हाय-हैलो होने लगी.
अगले कुछ ही दिन में ही हम एक दूसरे के दोस्त बन गए और हमारी गुफ्तगू का सिलसिला चल निकला.
हमारी बातों का टॉपिक ज्यादातर सेक्स को लेकर ही होता था.
अब मैं उनसे हैंग आउट पर भी बातें करने लगी थी.
सेक्स में अपनी पसंद नापसंद और अपनी सेक्सी फोटोज भी अनुराग जी के साथ शेयर करने लगी थी.
एक दिन उनकी
ऑफिस सहकर्मी की रसीली बीवी
सेक्स कहानी पढ़कर तो मेरी चूत एकदम से लंड लंड करती हुई खड़ी हो गई.
अब आप कहोगे कि यार ये क्या बकवास कर रही है, लुल्ली खड़ी होती है, लंड खड़ा होता है, ये साली चूत कैसे खड़ी होने लगी?
दोस्तो, आप इस कहानी को ध्यान से पढ़ोगे तो आप भी जान जाओगे कि चूत कैसे खड़ी होती है!
घर पर ही किसी बात को लेकर मेरा मूड खराब था.
मेरी चूत को लंड लिए बहुत दिन हो गए थे.
जैसा मैंने ऊपर बताया कि समय-समय के साथ पति पत्नी में एक नीरसता आ जाती है. ठीक उसी तरह से सुरेश अपने व्यापार में ही इतने व्यस्त रहने लगे थे कि वे मेरी ओर ध्यान ही नहीं देते थे.
जबकि मेरी चूत हर समय प्यासी रहती थी.
अनुराग जी की हॉट और चूत फाड़ कहानियां पढ़कर मेरी चूत में आग लग जाती थी और मेरी चूत खड़ी हो जाती थी.
उस दिन मैं अनुराग से चैट कर रही थी.
मैंने अनुराग से कहा- तुम्हारी इस कहानी ने तो मेरी चूत में आग लगा दी है अनुराग … मेरी चूत खड़ी हो गई है!
अनुराग- तो मेरी जान, अपनी इसी खड़ी चूत को शांत करो ना. तुम कहो तो मैं आकर तुम्हारी इस खड़ी चूत में अपना लंड पेल कर इसकी आग को शांत कर दूँ?
मैं- तुम भी यार अनुराग … मेरे पास अपनी चूत को शांत करने का उपाय है. चलो तुमसे शाम को बात करूंगी. अभी पहले मैं अपनी चूत की गर्मी निकालती हूँ!
मेरी चूत में ऐसी आग लगी कि मैं लैपटॉप को ऐसे ही खुला छोड़कर तुरंत किचन में गई, फ्रिज खोला और अन्दर कुछ ढूंढने लगी.
तभी मुझे एक खीरा दिखाई दिया, मैंने वह खीरा उठाया और बाथरूम में चली गई.
वहां जाकर मैंने अपने सारे कपड़े उतारे और एक टांग कमोड पर रखकर मैंने वह खीरा अपनी चूत में ले लिया.
खीरा ठंडा था तो अन्दर तक मेरी चूत को उसने सुन्न कर दिया.
मगर मैं तो पूरी गर्म थी.
मैं सामने बड़े शीशे में अपने नंगे बदन को देख-देखकर अपनी चूत में खीरा अन्दर बाहर करने लगी.
मेरी रफ्तार और मजा दोनों ही बढ़ने लगे.
तभी पता चला सफेद रंग के पानी की धार मेरी चूत से चू गई और मेरी गुदाज चिकनी जांघों से होती हुई मेरे पांव तक जा पहुंची.
चुत से पानी झड़ जाने के बाद भी मैं कुछ देर तक ऐसे ही खीरा अपनी चूत में लिए खड़ी रही.
जब मेरी चूत पूरी तरह से ठंडी हो गई, तो मैं पहले नहाई और गाउन पहन कर बाहर आ गई.
मैं वापिस हॉल में आई तो देखा कि मेरे पति सुरेश मेरा लैपटाप लिए बैठे हैं.
मुझे देखते ही उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया.
अपना लैपटाप उनके हाथ में देखकर मेरी तो गांड ही फट गई.
मैं मन ही मन सोचने लगी कि मैंने ये क्या अनर्थ कर दिया!
इससे पहले कि मैं कुछ कहती, वे बिफर पड़े- हरामजादी, कुतिया, बहनचोद … कब से चल रहा है ये सब … बहनचोद मेरे पीछे ये क्या गुल खिला रही है तू मादरचोद?
आज तक सुरेश ने कभी भी मुझसे ऐसे बात नहीं की थी.
सुरेश की भाव भंगिमा देखकर लग रहा था कि सुरेश को कुछ ज्यादा ही गुस्सा आ गया था.
मैं चुपचाप नीचे मुँह करके सुरेश के सामने खड़ी थी.
सुरेश मेरी ओर देखते हुए बोले- कुतिया बता ये अनुराग कौन है? बहनचोद … जिससे तू ऐसी चैट कर रही है कि तेरी चूत में आग लगी है … बहनचोद इससे चुदवा रही है रंडी साली!
यह सब सुनकर मेरी तो आंखों से आंसू निकल पड़े.
मैं रूंधे गले से बोली- सुरेश, ऐसा कुछ नहीं है जैसा तुम सोच रहे हो … मेरा किसी से कोई चक्कर नहीं है. मैं आज तक इससे मिली भी नहीं हूं, बस कभी-कभी हैंग आउट पर ही चैट करती हूँ!
उन्होंने हाथ में लिया हुआ मेरा लैपटाप बेड पर फेंका और उठकर मेरे पास आ गए.
मेरे बाल पकड़ कर बोले- सच-सच बता कुतिया, तूने कितने यार बना रखे हैं! बहनचोद, मेरे पीछे से अपने किस-किस यार के साथ रंगरेलियां मना रही है तू … कुतिया, छिनाल, साली मुझे सच-सच बता दे … नहीं तो तेरे साथ ऐसा करूंगा कि तू जीवन भर याद रखेगी!
मैं सुरेश के आगे बहुत रोई, गिड़गिड़ाई, बहुत सारी कसमें खाईं, पर सुरेश पर मेरी बातों का कोई असर नहीं हुआ.
मेरे पति के दिल और दिमाग में यही बात बैठ गयी थी कि मेरा जरूर अनुराग के साथ सम्बन्ध है.
मेरी एक गलती … लैपटाप खुला छोड़ने भर से, मेरी सारी घर-गृहस्थी, मेरी इज्जत, मेरा मान सम्मान सभी कुछ दांव पर लग गया था.
दो दिन तक हमारे बीच कोई बातचीत नहीं हुई.
मैंने बहुत कोशिश की, बार-बार सुरेश से माफी मांगी, बार-बार उन्हें समझाया, बार-बार विनती की.
उनसे कहा- जान ऐसा कुछ नहीं है. ये बस में टाइम पास करने के लिए चैट कर रही थी!
सुरेश अपनी गुस्सा में थे- बहनचोद, कुतिया, हरामजादी … टाइम पास करने के लिए कोई क्या अपनी नंगी नंगी फोटो भेजता है? चूत में आग लगी है … ऐसा बोलता है क्या … कुतिया, साली, छिनाल.. तू जरूर उस हरामजादे अनुराग से चुदवा रही है. मैंने तेरी चैट पढ़ी है हरामजादी. मुझे चूतिया समझती है क्या तू?
मेरी अनुराग जी से चैट पढ़कर सुरेश को ऐसा लगा, जैसे मैं कोई लंड की प्यासी एक अति कामुक औरत हूँ.
वैसे तो सुरेश और मैं बहुत ही खुले थे, आपस में सब कुछ शेयर किया करते थे और एक बार हनीमून पर ही गोवा में एक क्लब में हम दोनों ने ही शराब के न.शे में दूसरे कपल के साथ एक दूसरे को शेयर कर लिया था. पर वह सुरेश के सामने था.
सुरेश मुझसे इस बात से ज्यादा नाराज हो गए थे कि मैं उसके पीठ पीछे गुलछर्रे उड़ा रही हूँ.
रात को सोने के समय, मैंने सुरेश को शांत करने के लिए उनके लंड पर हाथ फेरना शुरू कर दिया और अपने पति के लंड को मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया.
पर सुरेश के ऊपर गुस्सा अभी तक हावी था, उन्होंने मुझे अपने लंड से दूर कर दिया … और मुझसे बोले- दूर हट मेरे लंड से … कुतिया साली … छिनाल! बहन की लवड़ी बाहर निकल मेरे बेडरूम से तू … देख कल मैं तेरे साथ क्या करता हूँ?
मैं फिर से रोने लगी, सुरेश के पैर पकड़ कर गिड़गिड़ाने लगी- सुरेश मुझे माफ कर दो … तुम जो भी बोलोगे मैं वह सब कुछ करूंगी … कुछ भी सुरेश … पर मेरे साथ ऐसा व्यवहार मत करो!
‘दूर हट छिनाल …’
मैं रोती हुई दूसरे कमरे में चली गई और रोती हुई सोचने लगी कि कल सुरेश मेरे साथ क्या करेंगे.
कहीं वे मुझे तलाक देने के बारे में तो नहीं सोच रहे हैं!
यही सब सोचते-सोचते न जाने कब मेरी आंख लग गई.
दोस्तो, इस सेक्स कहानी में मैं आपको एक मर्द की वासना की हद लिखना चाह रही हूँ कि वह क्या क्या चाहता है.
मेरी इसअन्तःवासना कहानी रीडर स्टोरी के आगे के भागों में आपको मर्द की सोच समझ में आएगी.
हॉट कॉलगर्ल और वाइफ कहानी का अगला भाग: पति ने रंडी के सामने मुझे नंगी किया- 2
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