xxx teacher chudai story
Xxx टीचर चुदाई स्टोरी में स्कूल की अध्यापिका से दोस्ती हुई, सेक्स की बातें हुई और एक दिन हम दोनों मौज मस्ती करने होटल में चले गए. वहां उस टीचर की चूत मैंने मारी.
दोस्तो, मैं सूरज आपको अपनी सेक्स कहानी के पहले भाग स्कूल की चालू मैडम से सेक्सी दोस्ती में सुना रहा था कि किस तरह से मैंने शकीरा मैडम को होटल के कमरे में लाकर नंगी कर दिया था.
हम दोनों एक दूसरे के साथ लिपट कर गर्म गर्म बातें करके मजा ले रहे थे.
अब आगे Xxx टीचर चुदाई स्टोरी:
कुछ देर बाद मैंने मैडम की आंखों में आंखें डाल दीं और उन्हें प्यार से निहारने लगा.
वे भी मुझे प्यार से निहार रही थीं.
कुछ पल के बाद मैं दोबारा उनके होंठों से लग गया और हम दोनों होंठों का रस पीने लगे.
मेरा लंड उनकी चुत का चुम्मा लेने में लगा था और वे भी अपनी टांगों को जुंबिश देती हुई लंड को चुत से रगड़ रही थीं.
मैंने कहा- मजा आ रहा है शकीरा?
वे लंड को चुत से रगड़ती हुई बोलीं- तुम्हारा बल्ला मेरी पिच को बार बार ठोक सा रहा है.
मैंने लंड को उनकी चुत से घिसा और कहा- अभी किधर ठोक रहा है मैडम … अभी जब ये अन्दर घुस कर आपकी चुत को ठोकेगा, तब कहना कि कैसा लग रहा है.
वे अपने हाथ से मेरे लौड़े को पकड़ कर बोलीं- हां है तो मस्त लंड तुम्हारा!
मैंने कहा- अब तक कितना लंबा और मोटा ले चुकी हो?
वे बोलीं- ऐसा क्यों पूछ रहे हो … क्या मैं तुम्हें ऐसी वैसी लड़की लगती हूँ!
मैंने उन्हें उस लड़की का नाम लेते हुए बताया- सारिका कह रही थी कि आप लंड लेती रहती हैं.
वे हंस दीं और बोलीं- हां यार, मुझे एक खूँटे से बंध कर रहने में मजा नहीं आता है.
मैंने उनके दूध को मसलते हुए कहा- आप जैसी लड़कियों के कारण तो मुझ जैसे लड़कों के लंड का भला होता रहता है.
वे हंस दीं और बोलीं- सारिका की ली या नहीं?
मैंने कहा- मैं जब तक किसी को टच नहीं करता हूँ, जब तक उसकी तरफ से कोई सिग्नल न मिले.
वे बोलीं- जब वह छिनाल तुमसे मेरे बारे में इस तरह की बात कर सकती है तो क्या तुमको समझ में नहीं आया कि ये कुतिया रंडी है!
मैंने कहा- मैंने उससे कहा तो था लेकिन उसने स्पष्ट मना कर दिया था.
वे बोलीं- मैं कह दूँगी उससे कि सूरज से चुदवा लो … तो वह तुम्हारे लौड़े के नीचे आ जाएगी.
हम दोनों के बीच इसी तरह की कामुक बातें होती रहीं.
मैं उन्हें लिपकिस करने लगा था तो वे भी मुझे साथ दे रही थीं.
कुछ पल बाद मैंने शकीरा मैडम के होंठों से अपने होंठ हटाए और उनके एक चूचे को अपने मुँह में भर लिया.
मैं उनके निप्पल को होंठों में दबा कर खींचते हुए चूसने लगा.
मैं अपने एक हाथ से उनके दूसरे चूचे को दबाने लगा और दूसरे हाथ से उनकी उठी हुई गांड को दबाने लगा.
मैं बीच-बीच में मैडम की गांड के छेद में उंगली भी डाल दे रहा था, जिससे उनकी हल्की सी चीख निकल जा रही थी.
‘उंह उधर नहीं … आंह मत करो न सूरज!’
वे कह जरूर रही थीं लेकिन मुझे समझ में आ रहा था कि वे अपनी टांगों को खोल कर एक साथ दो काम करने की कोशिश कर रही थीं.
एक तो वे अपनी गांड के छेद को खोल कर मेरी उंगली से कुरेदवा रही थीं और आगे चुत में मेरे लौड़े को गप्प कर लेने की कोशिश कर रही थीं.
मेरे लंड से भी लार टपकने लगी थी जो उनकी चुत को गीला करने लगी थी.
वे बस मदमस्त होकर मेरे ऊपर गिरी जा रही थीं.
तभी मैंने उन्हें बेड पर लिटाया और उनकी दोनों टांगों के बीच में आकर उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने और कुरेदने लगा.
इससे उनकी कामेच्छा और ज्यादा बढ़ने लगी.
उनके कंठ से निकलने वाली कामुक सिसकारियां अब और ज़ोर से कमरे के माहौल को गर्म करने लगी थीं ‘आआआह … आआह … सूरज आह … प्लीज और अन्दर तक चूसो आह … उम्म … यू आर डूइंग अमेजिंग … आह ऐसे ही करते रहो जान .. आह मैं मर गई.’
यह सुनते ही मैंने उन्हें तड़फाने का सोचा और उनकी चुत से जीभ को हटा लिया.
फिर मैं अपने दोनों हाथों से उनके चूचों को दबाने लगा.
वे मेरे सर को पकड़ कर वापस अपनी चुत पर ले आईं और गाली देती हुई बोलीं- चूस साले … बीच में मत छोड़ कमीने!
उस वक्त उनके दोनों पैर आधे मुड़े हुए थे और मैं वापस अपनी जीभ से उनकी चूत को चोदने में लग गया था.
वैसे भी मुझे झांट रहित चिकनी चूत चाटना बहुत पसंद है.
कुछ देर बाद उन्होंने मुझे अपने ऊपर खींचा और बोलीं- अकेले-अकेले ही मज़े लोगे? मुझे भी तो कुछ करने दो!
इतना कहकर उन्होंने बिना पोज बदले मेरा लंड पकड़ लिया और उसे मुँह में डालकर चूसने लगीं.
फिर मैंने उन्हें 69 की अवस्था में आने का इशारा किया, तो वे झट से लेट गईं.
मैं उनके ऊपर इस तरह से लेट गया, जिससे मेरा लंड उनके मुँह में और मेरा मुँह उनकी चूत पर हो गया.
मैं काफी देर तक उनकी चूत को चाटता रहा. इस बीच वह एक बार झड़ भी गईं और मैं उनका सारा पानी पी गया.
उस वक्त मुझे उनकी चुदाई का सुरूर चढ़ा हुआ था या उनकी चूत का स्वाद ही इतना अच्छा था कि मैं खुद को रोक ही नहीं पाया.
मैं उनकी चुत से निकले रस को पूरी तरह से चाट गया.
खैर … जो भी रहा हो, मजा बहुत आया.
मैडम भी इतनी अच्छी तरह से लंड को चूस रही थीं कि मुझे लग रहा था मानो मैं जन्नत में हूँ.
मैं खुद को रोक नहीं पाया और मैं भी उनके मुँह में झड़ गया.
मैंने अपना सारा पानी उनके मुँह में गिरा दिया.
वे भी बेहिचक मेरा सारा पानी पी गईं.
कुछ देर यूं ही पड़े रहने के बाद हम दोनों 69 के आसन से हट गए और सामान्य अवस्था में लेटकर दोबारा किसिंग करने लगे.
कुछ देर किसिंग और फिंगरिंग करने के बाद हम दोनों चुदाई के लिए बिल्कुल तैयार थे.
चुदाई का आसन कुछ इस प्रकार था कि वे पीठ के बल लेटी हुई थीं.
उनकी कड़क चूचियां ऊपर छत की ओर थीं और उनके दोनों पैर हवा में उठे हुए थे.
मैंने अपने हाथों से उनके दोनों पैरों को पकड़ा हुआ था.
फिर मैंने उन्हें इशारा किया तो उन्होंने अपने एक हाथ से मेरे लंड को अपनी चुत के छेद में सैट कर दिया.
वे अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर उसके सुपारे से अपनी चुत की फांक को रगड़ रही थीं, जिससे उन्हें और मुझे बड़ा मीठा सुख मिल रहा था.
हमारी आंखें एक दूसरे को वासना से देख रही थीं.
तभी मैंने अपनी कमर को झटका दिया और एक कड़क धक्के से पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया.
एकदम से लंड घुसेड़ देने से उन्होंने थोड़ी सी असहजता दिखाई.
उनकी ‘आह मर गई’ की आवाज निकली … मगर अगले ही पल वे सामान्य हो गईं.
लंड चुत में धंसा हुआ था और मेरी कमर आगे पीछे हो रही थी.
उस वक्त मेरा लंड उनकी चुत की गर्मी का मजा ले रहा था.
वे भी अपनी चुदास को मेरे लौड़े से ठंडी करने की कोशिश कर रही थीं.
कुछ ही देर में चुदाई की गति बढ़ गई.
मेरे हाथों में उनकी दोनों टांगें थीं, जो ऊपर हवा में थीं.
मेरा लंड बड़े प्यार से उनकी चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था.
उनके मुँह से गर्म सिसकारियां निकल रही थीं- आहह … आह … हम्म … सूरज ऐसे ही करते रहो … आह और अन्दर तक पेलो!
उनकी आंखें बंद हो गई थीं.
मैंने उनकी टांगों को छोड़ा और उनके चूचों को पकड़ कर दोनों हाथों से दबाने लगा, साथ में उनके होंठों पर अपने होंठ रखकर उनका रस पीने लगा.
हम दोनों के बीच चल रही चूत और लंड की लड़ाई में अब हमारी जीभें भी शामिल हो गई थीं.
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला और दोबारा से उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा.
मैं अपनी जीभ को जितना ज्यादा अन्दर ले जा सकता था, ले जा रहा था.
कभी-कभी मैं उनकी चूत के दाने को अपनी जीभ से सहलाता और कभी हल्का सा काट भी लेता, जिससे उनकी ‘आहह’ निकल जाती.
फिर मैं उन्हें बेड के किनारे पर घसीट लाया और दोनों पैर मेरी कमर में बांधने का इशारा किया.
वे झट से अपने दोनों पैर खोलकर किसी बाजारू रांड सी लेट गईं और उन्होंने मुझे लौड़े को चुत के अन्दर पेलने का न्योता दे दिया.
मैंने अपने लंड को फिर एक बार उनकी चूत में उतार दिया.
उन्होंने अपने दोनों पैर मेरी कमर में बांध लिए और मुझे अपनी ओर खींचकर मेरे होंठों को पीने लगीं.
मैंने चुदाई जारी रखी.
कुछ देर बाद आसन बदलते हुए मैंने उन्हें घोड़ी बनने को कहा.
तो वे बेड के किनारे को पकड़ कर घोड़ी बन गईं.
मैंने अपने लंड पर कंडोम लगाया और एक बार फिर उनकी चुदाई के लिए लंड को उनकी चूत में उतार दिया.
इस बार वे खुद ही बड़ी तेज़ी से आगे-पीछे होने लगी थीं जिससे ये पता चल रहा था कि अब उनका होने वाला है.
मैंने भी देरी न करते हुए अपनी स्पीड बढ़ा दी.
करीब 8-10 धक्कों के बाद उन्होंने अपनी गर्दन बेड पर टिकाई और अपने दोनों हाथों को पीछे करके मुझे अपनी ओर खींच लिया.
मैं भी कुछ देर के लिए रुक गया.
उनका पूरा माल निकल गया और वे तेज़ तेज़ सांसें लेने लगीं.
मैंने उनकी चुदाई पुनः शुरू कर दी.
कुछ देर और इसी आसन में चुदाई करने के बाद मैंने उन्हें मेरे ऊपर आने को बोला.
अब मैं बेड पर लेट गया और वे मेरी ओर अपना चेहरा करके मेरे लंड पर बैठ गईं.
वे लौड़े पर ऊपर-नीचे होने लगीं.
वे सिर्फ अपनी गांड हिला रही थीं, ठीक वैसे … जैसे हम लोग पोर्न वीडियो में देखते हैं.
कमाल का अहसास था वह.
मैं दोनों हाथों से उनके चूचों को दबा रहा था, वे मेरे लंड की सवारी कर रही थीं.
उनका कामरस मेरे लंड से होता हुआ मेरे अंडकोष तक पहुंचने लगा था.
चूत में कामरस होने की वजह से उसमें से ‘फच् … फच्च् …’ की आवाज़ आ रही थी. मेरा लंड बड़े आराम से अन्दर-बाहर हो रहा था.
अब मेरा भी समय होने वाला था, तो मैंने उन्हें वापस बेड पर लिटाया और उनकी दोनों टांगों के बीच आकर उनकी चुदाई करने लगा.
करीब दो मिनट और हमारी चुदाई चली होगी.
मैंने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी.
Xxx टीचर चुदाई में नीचे से मेरा पूरा साथ दे रही थीं.
मैंने उन्हें किस करना शुरू किया.
वे भी पूरे जोश में थीं.
सिर्फ 8-10 धक्के और लगाने के बाद मैं झड़ने लगा और वे भी मेरे साथ ही एक बार और झड़ गईं.
वीर्य कंडोम में निकला था, तो कोई चिंता की बात नहीं थी.
झड़ने के बाद उसी अवस्था में हम दोनों 5-7 मिनट तक पड़े रहे और किस करते रहे.
फिर हम दोनों उठे और वॉशरूम में जाकर एक-दूसरे को साफ करने लगे.
बाहर आकर मैंने कुछ खाने का मंगवाया और हम दोनों ने खाना खाया.
फिर साथ में बैठकर कुछ देर रोमांटिक बातें कीं.
हम दोनों गाने सुनते रहे.
कुछ देर बाद फिर से एक और बार चुदाई का दौर चला जिसमें हम दोनों ने इसी तरह अलग-अलग आसनों में मस्त चुदाई की.
उसके बाद हम दोनों अपने-अपने घर चले गए.
इस चुदाई के बाद हम दोनों को जब भी मौका मिलता, हम लोग चुदाई कर लिया करते.
मैंने कई बार उनके घर जाकर भी उनकी चुदाई की.
उन्हें मेरा लंड और मेरी चुदाई का अंदाज़ दोनों बहुत पसंद आए.
आगे चलकर उन्होंने अपनी एक सहेली और सारिका को भी मुझसे मिलवाया.
उन दोनों की भी चुदाई की कहानी आपको बहुत जल्दी लिखूँगा.
आप इसी तरह मुझे प्यार देते रहिए.
मेरी सेक्स कहानी पढ़ने के लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद!
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।