पत्नी की सेक्सी सहेली के साथ एक रात

xxx chut kahani

Xxx चूत कहानी में मेरी बीवी बहुत मस्त माल है. हम खूब चुदाई करते हैं. एक दिन उसकी एक सेक्सी सहेली पति से लड़ कर हमारे घर आ गयी. मैंने बीवी की सहेली को चोदा.

फ्रेंड्स, आशा करता हूँ कि आप सब ठीक ही होंगे।
मेरा नाम सुनील है और मैं मुंबई में रहता हूँ। मेरी उम्र 32 साल है और मेरी शादी को 7 साल हो चुके हैं।

मैं दोबारा आप सबका मन बहलाने के लिए एक और सच्ची कहानी लेकर आया हूँ, आशा करता हूँ कि आपको पसंद आएगी!
यह एक सच्ची कहानी है, मेरे और मेरे पत्नी की सहेली के बीच हुई एक घटना के बारे में।

मैं अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता हूँ।
मेरी पत्नी का नाम नीलम है, वह एक भरे हुए हुस्न की मालकिन है और हम बहुत अच्छे से सेक्स का आनंद लेते हैं।

हमारा एक छोटा 3 साल का बेटा भी है।

हम दोनों वर्किंग हैं, तो मेरा बेटा उसकी नानी के घर पर ही रहता है।

तो अब आते हैं असली Xxx चूत कहानी पर।

एक दिन नीलम यानी मेरी पत्नी किसी से फ़ोन पर बात कर रही थी।
फ़ोन पर वह सामने वाले को कुछ समझा रही थी।

फ़ोन रखने के बाद उसने बताया कि उसके ऑफिस की फ्रेंड स्वाति थी, जिसे मैं भी जानता था और वह मेरी पत्नी की अच्छी फ्रेंड भी है।
उसने कहा- स्वाति हमारे घर आने वाली है, उसके और उसके पति के बीच कुछ झगड़े चल रहे हैं तो वह कुछ दिनों के लिए हमारे घर आना चाहती है।

मुझे इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी।
मैंने भी कह दिया- कोई बात नहीं, उसका भी मन थोड़ा बहल जाएगा।

तभी मैंने मेरी पत्नी से पूछा- क्या बात हो गयी दोनों में, सब कुछ तो सही चल रहा था!
तो मेरी पत्नी ने कहा, “स्वाति के पति का शायद बाहर किसी और से अफेयर चल रहा है, और इसी वजह से उन दोनों में झगड़े चल रहे हैं!”

मैं समझ गया कि क्या मामला है, तो मैंने इस बात पर कुछ नहीं कहा।

अब मैं आपको स्वाति के बारे में बताता हूँ।
स्वाति एकदम शुद्ध देसी माल है!
उसका शरीर एकदम भरा हुआ है— 34-30-38।
अब आप ही सोचो कि क्या कयामत लगती होगी!
उसका रंग भी एकदम गोरा है मानो किसी विदेशी लड़की की तरह।

पर मेरा उसके प्रति कभी कोई गलत इरादा नहीं था क्योंकि मेरी पत्नी भी किसी से कम नहीं है और वो मुझे पूरा सेक्स का मजा देती है।
इसलिए मेरी पत्नी को भी कभी मुझपे शक नहीं आता।

अगले दिन स्वाति और मेरी पत्नी दोनों साथ ही ऑफिस के बाद हमारे घर पर आ गए।
मैं रात को थोड़ा लेट आया तब मुझे पता चला कि स्वाति घर पर आ गयी है।

तो मैंने स्वाति को वेलकम किया और इसे अपना ही घर समझ के रहने के लिए बोल दिया!

हमारा घर 3 कमरे का है तो एक कमरे में स्वाति को रहने के लिए बोल दिया और बगल वाले कमरे में मैं और मेरी पत्नी सोते थे।

मेरा और मेरी पत्नी का हफ्ते में दो-तीन बार तो सेक्स हो ही जाता है.
और साथ ही में हम दोनों ड्रिंक्स भी करते हैं क्योंकि ड्रिंक करने के बाद सेक्स करने का मजा ही कुछ और है!
फिर मैं और मेरी पत्नी एकदम हार्डकोर वाला सेक्स करते हैं और अलग-अलग पोजीशंस में भी चुदाई करते हैं।

उस दिन मेरी पत्नी ने डिनर का प्लान किया था हमारे घर में ताकि स्वाति भी कम्फर्टेबल हो जाये, और ड्रिंक्स तो हमारे घर में हमेशा होती थी।
स्वाति भी कभी-कभी ड्रिंक्स करती थी तो उसे भी कोई दिक्कत नहीं थी।

हम डिनर टेबल पर बैठे और मैंने सबके लिए ड्रिंक्स बनायीं और सबने टोस्ट करके अपना-अपना ड्रिंक पीना शुरू किया।

स्वाति टेंशन में थी तो उसने एक घूँट में ही पूरा गिलास खाली कर दिया!
मैं और मेरी पत्नी तो देखते ही रह गए।

स्वाति ने फिर से ड्रिंक बनाने बोल दिया और मैंने उसे ड्रिंक बना के दिया।
दूसरा ड्रिंक भी उसने एक घूँट में खाली कर दिया और गिलास नीचे रखकर रोने लगी।

मैं समझ गया तो मैंने मेरी पत्नी को कहा, “जरा स्वाति को सम्भालो!”

फिर उसने स्वाति को सहारा दिया।
तब तक स्वाति को चढ़ गयी थी और वो कुछ बड़बड़ा रही थी, शायद अपने पति को गालियां दे रही थी।

तो नीलम उसे अपने कमरे में ले जा के सुलाने लगी, उसका खाना भी वही पर खिला दिया और फिर उसे सोने को कह दिया।

काफी देर बाद नीलम हमारे रूम में आ गयी।
उसे स्वाति की बहुत फ़िक्र हो रही थी लेकिन मेरा मूड कुछ और ही था।

मेरा अब चुदाई का मन हो रहा था!
हमने भी अपने गिलास खाली कर दिए थे तो उसका भी चुदाई का मन हो रहा था।

मैंने उसे अपनी बाहों में लिया और चूमने लगा।
फिर हम दोनों नंगे होकर 69 की पोजीशन में आकर एक दूसरे को चूसने लगे।

नीलम ने मेरा खड़ा लंड अपने मुँह में भर लिया और मैं उसकी गीली चूत चाटने लगा।
नीलम मेरा लंड पूरे गले के अंदर तक लेके चूस रही थी और मैं अपनी जीभ से उसकी चूत छोड़ रहा था।

फिर मैंने नीलम को कुतिया बनाया और पीछे से उसके चूत में लंड डालकर छोड़ने लगा।
उसकी चूत में मेरा 6 इंच का लंड खुदाई कर रहा था!

फिर नीलम मेरे ऊपर आकर अपनी चिकनी चूत चुदवाने लगी।
उसके बूब्स हवा में झूल रहे थे जो मुझे अच्छे लग रहे थे।

हम दोनों सेक्स में इतना खो गए थे कि हम भूल गए थे कि स्वाति भी हमारे घर में ही है और हमारे रूम का दरवाजा भी पूरा बंद नहीं हुआ था!

अब मैं झड़ने वाला था तो नीलम को मैंने घुटने के बल बिठाया और उसके मुँह में मेरा लंड दे के छोड़ने लगा और फिर उसके मुँह में ही मेरा सारा पानी निकाल दिया!

ये सब चल रहा था जो स्वाति दरवाजे के पीछे से देख रही थी।
यह मुझे महसूस हो गया पर नशे में होने के कारण मैंने अनदेखा किया और फिर अपना सारा पानी नीलम के मुँह में छोड़कर हम दोनों सो गए।

अगले सुबह नीलम और स्वाति ऑफिस के लिए निकल गए और मैं भी तैयार होकर चला गया।

ऐसे ही दो दिन गुजर गए।
तीसरे दिन नीलम के घर से फ़ोन आया था कि उसकी माँ की तबियत ठीक नहीं है और उसे तुरंत ही बुलाया है।

तो नीलम ऑफिस के बाद ही अपने घर चली गयी जो मुंबई से थोड़ी दूर ही था।
उसने मुझे फ़ोन करके बोला कि कल सुबह तक आ जाएगी।
तो मैंने ओके कह दिया।

मैं शाम को घर आ गया देखा तो स्वाति मेरे पहले ही घर पहुँच गयी थी।

मैंने स्वाति से कहा- अगर तुम चाहो तो अपने घर जा सकती हो।
इस पर स्वाति ने कहा, “कोई बात नहीं, कल सुबह तो नीलम भी आ जाएगी तो कोई दिक्कत नहीं है, मैं यही रुक जाऊंगी!”

अब तक मेरे मन में स्वाति को लेकर कोई गलत ख्याल नहीं था।
फिर मैंने नीलम से फ़ोन पर बात की तो उसने कहा- आज खाना बाहर से मँगवा लो आपके और स्वाति के लिए, मैं कल सुबह आ जाऊंगी। तो मैंने उसे ओके बोल दिया।

फिर मैंने स्वाति से पूछा, “तुम क्या खाओगी?”
स्वाति ने बोला, “जो भी तुम मँगवा लो मैं खा लूंगी!”

तो मैंने चिकन और राइस आर्डर किया।
अब मैं ड्राइंग रूम में बैठकर टीवी देख रहा था और साथ में ड्रिंक भी कर रहा था।

इतने में स्वाति आयी।
उसने बोला, “अकेले अकेले पी रहे हो? मुझे नहीं बुलाओगे क्या!”

तो मैंने स्वाति से सॉरी कहा और उसके लिए भी ड्रिंक बनायीं और उसके हाथ में गिलास दे दिया।

अब स्वाति भी ड्रिंक पीते हुए टीवी देख रही थी।
मैंने ऐसे ही स्वाति से पूछा कि तुम्हारा झगड़ा ख़त्म हुआ या नहीं।

इस पर स्वाति ने मुँह टेढ़ा किया और कहा, “नहीं अभी नहीं! और मुझे इसके बारे में बात ही नहीं करनी!”
तो मैंने ज्यादा जोर नहीं दिया।

थोड़ी देर में स्वाति का गिलास खाली हो गया तो मैंने पूछा, “एक और ड्रिंक बनाऊँ?”
उसने झट से गिलास आगे किया।
मैंने उसका गिलास भर दिया और मेरा भी।

ऐसे करते करते हम दोनों के 4-4 पेग ख़त्म हो गए।

मुझे अब नशा हो रहा था और स्वाति तो आलरेडी नशे में लग रही थी।
तो मैंने स्वाति को कहा, “तुम्हें ज्यादा हो गयी है तो तुम अब सो जाओ!”

स्वाति अपने रूम में जाने लगी.
पर ज्यादा ड्रिंक करने के वजह से उससे चला भी नहीं जा रहा था।

तो मैंने उसे पकड़ लिया और उसे रूम में जाने के लिए मदत करने लगा।

स्वाति का नशा अब उसपे भारी हो रहा था।
जैसे तैसे मैंने उसे उसके बेड पर लिटा दिया।

उस वक्त स्वाति ने एक ढीला पजामा और टी-शर्ट पहना था लेकिन अंदर उसने ब्रा नहीं पहनी थी।
उसके बूब्स ज्यादा हिल रहे थे और मुझे भी नशा हो गया था तो मेरा भी मन हो रहा था कि इसे अभी इधर ही चोद दूँ!

पर मैं ऐसा नहीं कर सकता था.
तो मैंने उसे वही छोड़ दिया और अपने रूम में जाकर सो गया।

थोड़ी देर बाद मुझे किचन में से कुछ गिरने की आवाज आयी तो मैं देखने किचन में गया।
वहां स्वाति खड़ी थी और उसे पानी चाहिए था.

लेकिन नशे में होने के कारण उसके हाथ से गिलास गिर गया।
मैंने उसे पानी पिलाया और उसे दोबारा उसके कमरे में छोड़ने चला गया।

इस बार स्वाति ने अपना एक हाथ मेरे कंधे पर रखा था जिस कारण उसके बूब्स बिलकुल मेरे चेहरे के सामने आ गए थे!

मैंने जैसे तैसे खुद को कण्ट्रोल किया और उसके रूम में पहुँच गए।
जैसे ही मैंने स्वाति को उसके बेड पर लिटाया और जाने लगा तो स्वाति ने मुझसे कहा, “आज यही सो जाओ! मैं बहुत बोर हो रही हूँ और आज नीलम भी नहीं है!”

मैं भी बस यही चाहता था तो मैं स्वाति के बगल में लेट गया और हम बाते करने लगे।

स्वाति ने मुझे पूछा, “अब तुम्हारी रात कैसे कटेगी? नीलम तो है नहीं!”
मैंने कहा- मैं कुछ समझा नहीं?
पर मैं सब समझ रहा था कि स्वाति क्या कहना चाहती है।

मैं जान गया था कि उस दिन स्वाति ने हमारी चुदाई देखी थी.
पर मैंने अनजान बनकर उससे कहा, “क्या मतलब है तुम्हारा?”

तो स्वाति ने बोला, “कुछ नहीं, चलो सो जाते है!”
मैंने थोड़ा जोर देके बोला, “तुम क्या बोल रही हो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा, जरा खुल कर बोलो!”
इस पर स्वाति हँसती हुई बोली, “आज तुमको ऐसे ही सोना पड़ेगा!”

मैं जानता था कि स्वाति नशे में होने के कारण यह बड़बड़ा रही है.
तो मैंने कुछ नहीं कहा और फिर हम दोनों सोने लगे।
स्वाति अब अपनी बड़ी सी गांड मेरी तरफ करके सोने लगी।

एक बात बताता हूँ दोस्तो, स्वाति जैसी लड़की के साथ सोने के सपने हर कोई देखता होगा, वो है ही इतनी कड़क आइटम!

अब उसकी गांड मेरी तरफ थी।
मन तो कर रहा था कि उसका पजामा फाड़ कर उसकी मोटी और गोरी गांड में अपना लंड डाल कर चुदाई करूँ, पर मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी।
और मैं भी सोने लगा।

थोड़ी देर बाद स्वाति मेरी तरफ मुड़ी और उसका हाथ मेरे सीने पर आ गया।
तो मैंने धीरे से उसका हाथ हटाया और सोने लगा।

स्वाति अब मेरे और पास आने लगी, शायद उसे लग रहा होगा की उसका पति ही सो रहा है बगल में।

मैं समझ गया था कि नशे के वजह से इसका भी मन कर रहा होगा चुदाई का।
इस बार मैंने अपना हाथ उसके बूब्स पर रखा और दिखाया कि मैं नींद में ये कर रहा हूँ।

पर स्वाति ने मेरा हाथ हटाया नहीं, बल्कि मेरे हाथ के ऊपर अपना हाथ रख दिया और अपने बूब्स दबवाने लगी!

शायद उसे भी नशे के वजह से सेक्स का मन कर रहा था।
उसने अब मेरी तरफ देखा तो मैं भी जग गया।

उसने मुझे कहा, “मैंने उस दिन तुम्हारी और नीलम की चुदाई देख ली थी! तुम दोनों बहुत अच्छी चुदाई करते हो!”
तो मैंने कहा, “हाँ, मुझे पता था कि तुम दरवाजे के पीछे से देख रही हो, पर मैंने नजर अंदाज कर दिया!”

इतना कहकर मैंने स्वाति के बूब्स को थोड़ा दबाया तो उसके मुँह से आह निकल गयी और वो खुद अपने हाथ से अपने बूब्स दबाने लगी।
अब हम दोनों भी सेक्स के लिए तैयार थे।

तो मैंने सीधे स्वाति के होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे किस करने लगा।

स्वाति भी मेरा साथ दे रही थी।

करीब 5 मिनट तक हम एक दूसरे के मुँह में मुँह डालकर चूस रहे थे।
अब स्वाति बहुत ज्यादा गरम हो गयी थी तो मैंने अपना हाथ उसके टी-शर्ट के अंदर डाला और उसके बूब्स और निप्पल को दबाने लगा।

तब स्वाति ने खुद ही अपना टी-शर्ट उतार दिया।
अब उसके गोरे गोरे और बड़े बड़े बूब्स मेरे सामने नंगे थे!
ऐसा लग रहा था कि कोई सफ़ेद परी मेरे सामने अपने बूब्स दिखा रही है।

मैंने तुरंत उसका एक बूब अपने मुँह में लिया और उसके भूरे निप्पल को चूसने लगा और उसके दूसरे बूब को दबाने लगा।
अब मैं उसके निप्पल को चाटने लगा और बीच बीच में काटने लगा तो वो और जोर से सांस लेने लगी और मुझे अपने बूब पिलाने लगी।

अब वो मुझे अपने दूसरे वाले बूब को चुसवाने लगी।

अपना निप्पल खुद ही पकड़कर वह मेरे मुँह में देने लगी और मैं भी उसे किसी बच्चे की तरह चूस रहा था।

अब मैंने मेरा हाथ उसके पेट से ले जा के उसके पाजामे के अंदर डाल दिया और उसकी पैंटी के ऊपर से ही उसकी चूत को सहलाने लगा।

जैसे ही मेरा हाथ उसकी चूत पर लगा, वो अचानक सहम गयी और उसकी सांस और तेज होने लगी।

अब मैंने उसका पजामा भी उतार दिया और उसकी पैंटी भी उतार दी।
उसने भी मेरा पूरा साथ दिया और पैंटी निकालते ही उसने अपने पैरों को फैला दिया, मानो किसी जन्नत का दरवाजा खुल गया हो!

मैं तो उसकी चूत देख के पागल हो जा रहा था।
एकदम गोरी गोरी चूत और बीच में गुलाबी गुलाबी पंखुड़ियां!

मैंने पहले उसकी चूत पर हाथ फिराया और फिर धीरे से अपनी एक उंगली उसकी चूत में घुसेड़ी।
स्वाति चहक उठी और बिन पानी की मछली की तरह तड़पने लगी।

अब मैंने उसकी चूत के सामने अपना मुँह रख दिया और उसकी चूत को सूंघने लगा।
कमाल की खुशबू थी उसकी चूत की!

अब मैंने धीरे से अपनी जीभ उसकी चूत पर रख दी और उसके दाने को रगड़ने लगा।
स्वाति अब पागल हुई जा रही थी,

मैंने बिना देरी किए उसकी चूत को अपने मुँह में भर लिया और चूसने लगा, मानो उसकी पूरी चूत ही खा जाऊंगा!

स्वाति को बहुत मजा आ रहा था, वह मेरा सर पकड़ कर अपनी चूत पर दबाने लगी।

मुझे मजा जल्दी ख़त्म नहीं करना था तो मैंने चूत चाटना बंद किया और अब स्वाति को उठाया और उसे बेड पर बिठाया और कहा, “अब मेरे लंड को भी थोड़ा मजा लेने दो!”

स्वाति समझ गयी और उसने मेरी लोअर नीचे कर दी।
मेरा 6 इंच का लंड उसके सामने सलामी दे रहा था!

उसने पहले तो मेरे लंड को अच्छी तरह से चाटा, फिर मेरे सुपाड़े को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी और अपने एक हाथ से मेरी गोटिया भी मसल रही थी।

वो लंड चूसने में शायद माहिर थी, उसने मेरे गोते भी अपने मुँह में लेके चूसने लगी।
मुझे बहुत मजा आ रहा था।

अब वो मेरा पूरा का पूरा लंड अपने मुँह में ले रही थी।
मैं तो मानो सातवे आसमान में चला गया था।

अब वो पूरे जोर से मेरे लंड को अपने मुँह से चोद रही थी।
उसकी लार अब मेरे लंड पर गिर रही थी और एक हाथ से मेरे टट्टे मसल रही थी।

अब मैं आने वाला था तो स्वाति समझ गयी, तो उसने मेरा लंड अपने होंठों में दबा दिया और जोर जोर से चूसने लगी मानो सारा माल निकाल रही हो!

वो जोर जोर से चूसने लगी और मेरा पानी निकल गया।
लेकिन स्वाति ने मेरा लंड बाहर नहीं निकाला बल्कि जब तक मैं पूरी तरह से झड़ नहीं गया वो मेरे लंड को चूस रही थी और मेरा पानी निगल रही थी!

फिर कुछ देर बाद उसने मेरा लंड अपने मुँह से निकाला और उसे पूरा का पूरा चाट के साफ़ कर दिया।
ऐसा अहसास मुझे पहले कभी नहीं हुआ था।

अब स्वाति खुद बेड पर लेट गयी तो मैं समझ गया कि जो काम अधूरा छोड़ा था उसे अब पूरा करना है।
तो मैं भी लपक कर उसकी चूत पर अपना मुँह लगा दिया और उसकी चूत को चाटने लगा।

मैंने अपनी दो उंगलिया उसकी Xxx चूत में डाली और जीभ से उसके दाने को कुरेदने लगा।
स्वाति तो मानो पागल हुई जा रही थी।

अब मैंने अपनी उंगली और जीभ दोनों की स्पीड बढ़ा दी और स्वाति को झड़ने पर मजबूर कर दिया।

कुछ ही मिनट में स्वाति झड़ने लगी तो उसने मेरा सर अपनी चूत पर दबाये रखा और झड़ने लगी।
उसकी चूत से पानी बहने लगा और मैंने भी उसका पूरा का पूरा पानी चाटकर उसकी चूत को चिकना कर दिया।

स्वाति की साँसें फूल रही थी।
हम दोनों भी इस ओरल सेक्स की वजह से थक गए थे लेकिन हम दोनों भी जानते थे की असली काम तो अभी बाकी है!

फिर मैंने अपना एक हाथ स्वाति के बूब्स पर रखकर उसे सहलाने लगा और स्वाति ने भी अपना हाथ मेरे लंड पर रख कर उसे हिलाने लगी।

ऐसे ही थोड़ी ही देर में मेरा लंड पूरा खड़ा हो गया।
मैंने स्वाति को अपने ऊपर खींच लिया।

स्वाति अब मेरे ऊपर थी तो उसने पहले तो मेरे सीने पर अपने बूब्स को रगड़ने लगी और फिर धीरे धीरे नीचे जाने लगी।
पहले तो उसने मेरे निप्पल को चाटा और फिर मेरे लंड को दोबारा मुँह में लेकर चूसने लगी।

थोड़ी देर लंड चूसने के बाद वो मेरे लंड के ऊपर बैठ गयी और अपनी चूत से मेरे लंड को रगड़ने लगी।
मेरा सेक्स का भूत अब और चढ़ने लगा।
स्वाति ने काफी देर तक अपनी Xxx चूत को मेरे लंड पर रगड़ा और मैं उसके बूब्स दबा रहा था।

अब स्वाति से रहा नहीं जा रहा था, उसने मेरे लंड को पकड़ कर अपनी चूत पर सेट किया और उस पे बैठने लगी।

मेरा लंड थोड़ा मोटा है तो उसे थोड़ा दर्द हो रहा था.
पर उसने बिना कुछ सोचे पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में ले लिया और उसके मुँह से आह निकल गयी!
और मैं भी मचल रहा था।

अब स्वाति अपनी गांड को हिला हिला कर मेरे लंड को अपनी चूत में सेट कर रही थी.
और फिर उसने अपनी गांड उठा उठा कर मेरा पूरा का पूरा लंड अपनी चूत में समा लिया।

उसके दोनों बूब्स मेरे हाथ में थे, और स्वाति अपनी गांड हिला हिला कर मेरे लंड का मजा लेने लगी।
अब वो पूरी जोश के साथ मेरे लंड के ऊपर कूद रही थी!
मुझे भी बहुत मजा आ रहा था।

उसके हर झटके के साथ उसके बूब्स भी हवा में झूल रहे थे जो मुझे बहुत मादक लग रहे थे।
मैं उसके बूब्स दबा रहा था और स्वाति अपनी गांड उठा उठा कर मेरे लंड पर कूद रही थी।

कुछ मिनट के बाद मैंने स्वाति को अपने से अलग किया और अब मैं उसके ऊपर चढ़ गया।
मैंने उसके दोनों पैर हवा में उठा दिए और अपने लंड को उसकी चूत पर सेट करके जोर का धक्का दिया और उसकी चूत को चोदने लगा।
स्वाति अब सेक्स का मजा ले रही थी और ‘आह आह’ कर रही थी!

दारू के नशे के कारण मैं जल्दी नहीं झड़ने वाला था तो मैंने स्वाति को कुतिया बनने को कहा।
तो वो झट से मान गयी और कुतिया बन गयी।

अब मेरे सामने उसकी बड़ी सी और गोरी गोरी गांड थी जिसमे उसके गांड का छेद भी साफ़ दिख रहा था!
मन तो कर रहा था कि उसकी गांड में ही लंड पेल दूँ.

पर सोचा वो फिर कभी, फ़िलहाल उसकी चूत का मजा ले लिया जाये।

अब मैंने पीछे से उसकी चूत में लंड डाल दिया और उसकी चुदाई करने लगा।
मैंने अपने दो हाथों से उसकी गांड को पकड़ कर चोद रहा था.
लेकिन उसकी गांड का छेद मुझे बहुत ललचा रहा था।

मैंने बाजू में ही रखी तेल की बोतल उठा ली और उसकी पूरी गांड के ऊपर तेल डाल दिया और उसकी पूरी गांड को चिकना कर दिया।

स्वाति ऑलरेडी नशे में थी तो वो बस मजे ले रही थी चुदाई का।

मैंने अब अपनी एक उंगली उसकी गांड के छेद पर घुमाना चालू किया और उसकी चूत की चुदाई भी कर रहा था।

स्वाति को मजा आ रहा था, वो बीच बीच में बोल रही थी, “फक मी हार्ड! फक मी हार्ड!”

अब मैंने हल्के से उसकी गांड के छेद में अपनी उंगली डाल दी तो स्वाति चहक उठी पर कुछ बोली नहीं।
अब मैं उसकी गांड में उंगली अंदर बाहर करने लगा और उसकी चूत भी चोद रहा था।
मुझे बहुत मजा आ रहा था।

पर अब मेरा काम होने वाला था तो मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी और स्वाति की कमर को पकड़कर जोर जोर से उसकी चूत में शॉट मार रहा था।

मैंने स्वाती को कहा, “मेरा होने वाला है!”
तो स्वाति बोली, “मेरे अंदर मत निकालना, चाहे तो मेरे मुँह के अंदर डालो अपना सारा माल!”

और स्वाति झट से मेरे नीचे आ गयी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी, और अपने हाथ से मेरा लंड हिलाने लगी।

अगले ही पल मेरा पानी निकल गया तो स्वाति ने मेरा पानी अपने बूब्स और चेहरे के ऊपर गिराया और मेरा लंड चाट कर साफ़ कर दिया।
उसने अपने बूब्स पर गिरे हुए पानी को भी हाथ से चाटकर साफ़ किया।

अब हम दोनों भी बेड पर एक दूसरे के बाहों में सोने लगे।

तब स्वाति ने कहा, “बहुत मजा आया, ऐसा मजा मुझे पहले कभी नहीं आया!”
मैंने भी स्वाति से कहा, “मुझे भी बहुत मजा आया!”

स्वाति ने कहा, “तुम मेरी गांड के अंदर क्यों उंगली कर रहे थे? मुझे दर्द हो रहा था!”
तो मैंने कहा, “तुम्हारी गांड इतनी सुन्दर है कि मेरा मन तुम्हारी गांड के छेद पर आ गया और मैंने अपनी उंगली तुम्हारी गांड में डाली। अगर मेरी उंगली से तुम्हारी ये हालत है तो कैसे अपनी गांड में लंड लोगी मेरा!”

इस पर स्वाति मुस्कुराकर बोली, “नहीं! मेरी गांड अभी कुवारी है, और वहां दर्द भी होता है तो मैं अपनी गांड कभी नहीं मरवाउंगी!”
तो मैंने भी हँसते हुए कहा, “देखते है कि कब तक अपनी गांड को कुंवारी रखोगी, एक न एक दिन तो तुम्हारी गांड मारके ही रहूँगा!”

और हम दोनों हँसने लगे।

फिर मैंने स्वाति को एक किस किया और उसे सोने बोल दिया क्योंकि अगले दिन मेरी पत्नी आने वाली थी।
तो हम अपने अपने कमरे में जाकर सो गए।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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