जीजा जी ने मेरी कुंवारी चुत को चोद दिया- 2

college girl hot kahani

कॉलेज गर्ल हॉट कहानी में मेरे जीजू मेरू कुंवारी बुर की सील तोड़ने की चाह मेरे दीदी को बता चुके थे. मैं भी अपने पहले सेक्स का मजा जीजू से लेना चाहती थी.

फ्रेंड्स, मैं अन्नू आपको अपनी एक पाठिका सुमन उर्फ पिंकी की जुबानी उसके जीजा जी की चुदाई को लेकर इस रसभरी सेक्स कहानी को सुना रहा था.

कहानी के पहले भाग जीजू ने मेरे कुंवारे बदन से खेली सेक्सी होली में अब तक आपने पिंकी की कलम से ही सुना था कि उसके जीजा जी ने उसे होली के दिन खूब मसल मसल कर रंग लगाया था, जिससे वह भी अपने जीजा जी से मुहब्बत करने लगी थी.

अब आगे कॉलेज गर्ल हॉट कहानी पुनः पिंकी की कलम से ही सुनें :

एक दिन मैं अपनी कॉपी ढूंढ रही थी, पर मुझे नहीं मिल रही थी.
फिर मुझे याद आया कि परसों दीदी ने मुझसे कोई कागज मांगा था तो मैंने वही कॉपी दीदी को दे दी थी.

मैंने दीदी को आवाज लगाई- दीदी, वह मेरी कॉपी कहां है, जो मैंने परसों आपको दी थी?
निकिता दीदी- पिंकी, तू देख ले. शायद मैंने तेरे जीजू के सामान में रख दी है!

मैं नीचे आकर जीजू के कमरे में उनकी दराज में अपनी कॉपी ढूंढने लगी.
पर मुझे अपनी कॉपी नहीं मिल रही थी.

मैंने नीचे दराज में देखा तो वहां एक काले रंग की डायरी रखी थी.
मैंने वह डायरी उठाई और ऐसे ही उसे खोलकर देखने लगी.

डायरी के पहले पेज पर बड़े से अक्षरों में मेरा नाम लिखा था- पिंकी डार्लिंग.

मैंने उत्सुकता वश दूसरा पेज खोला तो उस पर लिखा था:

‘मेरी प्यारी पिंकी, मुझे तो अहसास ही नहीं था कि इतनी मस्त जवानी मेरे घर में ही है और मुझे पता ही नहीं. होली वाले दिन से ही तेरे इस शरीर की खुशबू मेरे दिल और दिमाग में बस गई है. जब से तेरे ये … ये मस्त बूब्स छुए हैं, पता नहीं क्या हो रहा है. तेरे इन मस्त बूब्स को चूसने का दिल कर रहा है. मेरी पिंकी बस हर वक्त तुझे चोदने का ही मन करता रहता है. तेरी ये हिलती हुई मस्त गांड ने मुझे तेरा दीवाना बना दिया है. बस मुझे तुझे चोदना है, तेरी इस मस्त जवानी का रस पीना है … मेरी पिंकी!’

जीजू की डायरी में अपनी प्रति इन बातों को पढ़कर मैं अचंभित रह गई.
मैं जीजू की मंशा जान गई थी.
नई-नई जवान होती मैं अब भी जीजू से घुलने-मिलने लगी थी.

फिर अगले दिन रात को मुझे प्यास लगी.
मेरे कमरे में पानी की बोतल में पानी खत्म हो गया था और फ्रिज नीचे था.

नीचे वाले पोर्शन में एक दीदी-जीजा का बेडरूम था, एक गेस्ट रूम था और एक रसोई थी.
वहीं पर फ्रिज रखा हुआ था.
रसोई दीदी-जीजा के बेडरूम के बराबर में ही थी.

मैं जैसे ही नीचे पानी लेने आई, तो दीदी-जीजा के कमरे से बड़ी ही कामुक आवाजें आ रही थीं.
जीजा जी दीदी को बहुत ही धांसू तरीके से चोद रहे थे.

दीदी की कामुक सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं ‘आह … विशाल … उह … आहसी … अउहह … उह उह … आहसी … अउहह … उह सी … सईइउह … आहसी … अउहह … उह …’

दीदी की मादक सिसकारियों ने मेरे तन-बदन में आग लगा दी थी.
मेरे एक हाथ में पानी की बोतल थी और मेरा दूसरा हाथ अनायास ही मेरी चूत पर चला गया.
मैं अपनी चूत को अपने एक हाथ से ऊपर से रगड़ने लगी.

दीदी की मादक सिसकारियां लगातार आ रही थीं.
मैंने सोचा क्यों न देखा जाए कि जीजा जी क्या कर रहे हैं.

मैंने गेस्ट रूम से एक बड़ा सा स्टूल उठाया और दीदी-जीजा जी के बेडरूम के बाहर आराम से रखा और उस पर चढ़ गई.

जीजा जी के बेडरूम के ऊपर एक छोटा सा रोशनदान था.
मैंने उसमें से झांककर देखा तो मेरी दीदी बिल्कुल आदमजात नंगी बिस्तर पर लेटी थी.
दीदी अपने ही दोनों हाथों से अपनी ही चूचियों को सहला रही थीं और जीजा जी दीदी की एकदम क्लीन चूत को चाट रहे थे.

जीजा जी अपनी जीभ से लगातार दीदी की चूत को चूस रहे थे.

दीदी ने आंखें बंद की हुई थीं और लगातार मदभरी सिसकारियां निकाल रही थीं.
यह नजारा देखकर मैं तो एकदम विस्मित हो गई और आंखें फाड़-फाड़ कर देखने लगी थी.

वैसे तो मैंने कई पोर्न फिल्में देखी थीं, पर साक्षात किसी की चुदाई पहली बार ही देख रही थी … वह भी अपनी ही दीदी की.

निकिता दीदी की सिसकारियां और तेज होने लगीं ‘उह … आहसी … अउहह … उह उह … आहसी … अउहह … उह सी … सईइउह … आहसी … अउहह … उह … चोदो ना विशाल … तुमने तो मेरी चूत में आग लगा दी है … चोदो विशाल अपने मूसल लंड से … अब और मत तड़पाओ विशाल अपने इस लंड से मेरी चूत की प्यास बुझाओ … विशाल!’

जीजू- हां अभी ले मेरी जान!

तभी जीजू उठे और अपना लंबा सा लंड दीदी की चूत पर लगा दिया.
उन्होंने अपने मुँह से बहुत सारा थूक निकाला और दीदी की चूत पर रगड़ दिया.
अपने लंड पर भी थोड़ा सा थूक लगाया और लंड चुत में पेल कर ताबड़तोड़ जोरदार धक्के मारने शुरू कर दिए.

मैं रोशनदान से सब कुछ बड़े ही आश्चर्य से देख रही थी.
मेरी जिंदगी का यह पहला अनुभव था, जब मैं पहली बार सामने से किसी मर्द को औरत को चोदते हुए देख रही थी.

दीदी ने अपनी आंखें बंद की हुई थीं और वे बहुत जोर-जोर से चिल्ला रही थीं. उन्होंने अपने दोनों हाथों से जीजा जी के सिर को पकड़ लिया था.

‘आह … विशाल … उह … आहसी … अउहह … उह उह … आहसी … अउहह … उह … मर गई विशाल … चोदो विशाल … आह … उहह … ऐसे ही चोदो विशाल चोदो मुझे … मैं तुम्हारी रांड हूँ!’
उधर जीजा जी भी ‘हूँ हुं ले आह.’ करते हुए दीदी की ले रहे थे.

दीदी- चोदो विशाल ऐसे ही … तुम्हारे लंड में पता नहीं क्या जादू है. जब तक साला मेरी चूत में नहीं जाता, तब तक मेरे दिल को चैन नहीं आता है … चोदो विशाल और जोर-जोर से चोदो मुझे विशाल चोदो!
जीजू- मेरी कुतिया, मेरी रांड आह … तेरी ये चूत … कितनी हसीन चूत है तेरी आह … उहह … कुतिया … मेरी जान … मेरी निकिता तुझे चोदने में मुझे बहुत आनन्द आता है, मेरी जानू … आह बस दिल करता है कि बस ऐसे ही तुझे दिन-रात चोदता रहूँ!’

दीदी- हां चोद दो मुझे आह!
जीजा जी- बहनचोद, तेरी बहन पिंकी भी जवान होती जा रही है … किसी दिन उसकी जवानी का रस भी चखवा दे ना मेरी रांड पिंकी को चोदने में कितना मजा आएगा आह … बहनचोद… चुदवा दे किसी दिन अपनी उस रांड को भी … आह होली वाले दिन से जब से उसे देखा है, बहनचोद बस उसे ही चोदने के सपने आ रहे हैं!

दीदी चुपचाप जीजू की बातें सुन रही थीं.

फिर दीदी बोली- तुम पागल हो गए हो क्या … अभी तो वह बहुत छोटी है!
जीजू- बहन चोद, छोटी? छोटी नहीं है वह मेरी जान … वह अब जवान और रसीली माल हो गई है. होली वाले दिन मैंने उसकी जवानी देखी है. उसकी कमसिन चूत … पर छोटे-छोटे बाल … उसके मोटे-मोटे बूब्स पर काली-काली घुंडियों ने मेरी प्यास भड़का दी है बहनचोद!

दीदी अभी भी हतप्रभ थीं और उनकी कमर ने जीजू का लंड लेना अपनी तरफ से रोक सा दिया था.
बस जीजू ही मस्ती से उन्हें चोदे जा रहे थे.

जीजा जी- मेरी जान क्या कशिश है उसकी कड़कती चूचियों में … बोल कुतिया, चुदवाएगी ना उसको मुझसे?
दीदी- विशाल, तुम पागल हो गए हो कोई अपनी साली के लिए ऐसे बोलता है क्या? वह अभी ब.च्ची है.

जीजू- ब.च्ची नहीं है मेरी रांड वह … तू बस यह बता कि चुदवाएगी उसको मुझसे या नहीं?
दीदी- विशाल, तुम सुनो मेरी बात … मुझे चोदो, जैसे तुम्हारी मर्जी वैसे चोदो. मेरी गांड फाड़ो, मेरी चूत फाड़ो, मेरा मुँह चोदो जो भी तुम्हें करना है वैसा करो … पर देखो विशाल, तुम्हारे कहने पर मैंने सब कुछ किया … तुम्हारे कहने पर तुम्हारे सामने ही तुम्हारे दोस्त सतेन्द्र से चुदी … पर अभी पिंकी नहीं!

जीजू- बहनचोद, मुझे कुछ नहीं सुनना. मैं भी तुझे जब तक नहीं चोदूँगा, जब तक तू पिंकी को मुझसे चुदवाने के लिए हां नहीं बोलती!
दीदी- विशाल, ये कैसी जिद है?

जीजू- बस यही है मेरी जिद तुझे अच्छी तरह से मालूम है कि मुझे जिस चीज की तलब लग जाती है, मैं उसे हासिल करके ही रहता हूँ … या तो राज़ी से या फिर गैर-राज़ी से. अब तू बता … या तो उसे प्यार से मुझसे चुदवा दे, नहीं तो फिर मैं जबरदस्ती ही उसे चोद दूँगा … अब तुझे निर्णय करना है मेरी रांड!

निकिता दीदी- विशाल, तुम बहुत जिद्दी हो.
विशाल- हां मेरी कुतिया, वह तो मैं जन्म से ही हूँ … जिद्दी आह … बोल कि पिंकी को भी चोद लेना … और यह भी बोल कि मैं खुद तुम्हारे कमरे में पिंकी को छोड़कर जाऊंगी. जब तक तू हां नहीं बोलेगी तो तेरी भी चुदाई बंद … मैं तुझे भी नहीं चोदूँगा साली!

यह कह कर जीजू ने अपना लंड दीदी की चूत से बाहर निकाल लिया और पास में ही कुर्सी पर जाकर बैठ गए.

दीदी- नहीं विशाल, ऐसा नहीं करना … मैं तो तुम्हारे लंड की प्यासी हूँ. जब तक तुम्हारा ये मूसल लंड मेरी चूत की गहराइयों में नहीं उतर जाता, मेरे दिल को चैन नहीं आता है … तुमको ऐसा नहीं करना चाहिए विशाल प्लीज समझा करो!

दीदी उठकर ऐसे ही नंगी-धड़ंग जीजू के पास आकर जीजू के होंठों पर किस करती हुई उनके लंड को सहलाने लगीं- विशाल, तुम बहुत जिद्दी हो … मेरे पति परमेश्वर … तुम जैसा चाहोगे, वैसा ही होगा!
जीजू- अब आई ना लाइन पर मेरी रांड कुतिया बहनचोद!
दीदी- मैं पिंकी की चूत की सील तुमसे ही तुड़वाऊंगी … पर अब मेरी चूत की प्यास तो बुझाओ मेरे राजा.

जीजू ने कुर्सी पर बैठे-बैठे ही दीदी से कहा- तूने खुश कर दिया मेरी जान … कुंवारी चूत को चोदने का मजा ही अलग होता है ना … याद कर वह दिन जब कॉलेज के रूम में तुझे मैंने पहली बार चोदा था … बहनचोद, जब से तेरी बहन की कड़क चूचियां मसली हैं ना, बस पिंकी को ही चोदने का दिल कर रहा है. बस तू मुझे उसकी चूत दिलवा दे मेरी जान … फिर मैं तुम दोनों का गुलाम बन जाऊंगा. चल मादरचोद … अब जल्दी से कुतिया बन जा … आज तेरी चूत का भोसड़ा बनाना है. आज तुझे ऐसे चोदूँगा कि तू भी याद करेगी आज पहले तेरी गांड फाड़ूँगा … बहनचोद, तेरी गांड में लंड डाले भी बहुत दिन हो गए … बहन की लौड़ी, कुतिया साली!

यह कह कर उन्होंने वापस चुदाई चालू कर दी.

दीदी- आह … मेरे राजा … फाड़ दो ना … मैंने कब मना किया है … जब तक चुदाई में दर्द नहीं होता, मजा ही नहीं आता है … मेरे चोदू राजा … लो चोद लो … जैसे तुम चाहो!

जीजा जी वापस अपने लंड से दीदी को लगातार चोदने लगे थे.
दीदी भी खूब उछल-उछल कर अपनी चूत चुदवा रही थीं.

जीजू के मुँह से मेरी चुदाई की बातें सुनकर मेरी भी हालत खराब हो रही थी.
अनायास ही मेरा हाथ मेरी पैंटी के अन्दर चला गया और मैं वहीं स्टूल पर खड़ी खड़ी ही अपनी चूत पर उंगली फेरने लगी.

मैं अब स्टूल से उतरकर पानी लेकर सीधे ऊपर अपने कमरे में आ गई.

बहुत देर तक वह दीदी की सिसकारियां, दीदी की आवाजें ‘चोदो विशाल … जोर-जोर से चोदो…’ मेरे मन-मस्तिष्क में सुनाई दे रही थीं.

मैंने अपनी एक छोटी उंगली धीरे-धीरे से अपनी चूत में अन्दर-बाहर करनी शुरू कर दी और फिर अचानक ढेर सारा जूस मेरी चूत से चूने लगा.
मेरा शरीर अकड़ गया और मुझे एक मीठा-मीठा सा संतोष हो गया और न जाने कब मुझे नींद आ गई … कुछ होश ही न रहा.

फिर तो मैं हर रोज ही दीदी और जीजा के कमरे में झांकने लगी.
जीजा जी हर 2-3 दिन में दीदी की नये-नये तरीके से मस्त चुदाई करते.

एक दिन जीजा जी दीदी को बड़े ही वाइल्ड तरीके से चोद रहे थे.
दीदी की आंखों पर पट्टी बंधी थी.
जीजा जी ने दीदी को नंगी ही खड़ी किया हुआ था और दीदी के दोनों हाथों को दीदी की साड़ी से ऊपर की ओर बांध दिए थे, खुद नीचे बैठकर जीजा जी दीदी की चूत को नीचे से अपने मुँह से चोद रहे थे.

दीदी की आंखें बंद थीं, पर उनको कितना मजा आ रहा है, उनकी सिसकारियां बयान कर रही थीं कि वे जीजा जी की जीभ से चुदाई का कितना मजा ले रही हैं.

दीदी- आह … उह … सई सिस्स… उह … आह … विशाल … तुम कितना मजा देते हो … मैं जीवन भर तुम्हारी रंडी बनकर तुमसे चुदती रहूँगी विशाल मुझे ऐसे ही चोदते रहना विशाल!

जीजू- मेरी रांड … मेरी कुतिया … तेरी इस चूत का तो मैं कॉलेज से ही दीवाना हूँ … बहनचोद … तेरी बहन पिंकी ने भी मेरा दिल-दिमाग पागल कर रखा है … अब मुझसे सब्र नहीं हो रहा है. अब या तो तू खुद उसे मुझसे चुदवा दे … नहीं तो किसी दिन मैं खुद ही उसका खेल कर दूँगा बहनचोद … कुतिया साली, रंडी!

जीजू ने अब अपनी जीभ दीदी की चूत से बाहर निकाल ली और अपनी दो उंगलियों से दीदी की चूत की चुदाई करना शुरू कर दिया.
वे अपनी दोनों उंगलियां जोर-जोर से अन्दर-बाहर करने लगे.

दीदी- विशाल … आह … उह … ऐसे ही विशाल … उह … आह … उहह … हिस्स… उह … विशाल चोदो मुझे … ऐसे ही … विशाल.
जीजू- बोल कुतिया … क्या विचार है तेरा? तू चुदवाएगी उसे … या मैं ही किसी दिन चोद दूँ उस कुतिया को?
दीदी- हां … हां … विशाल … मैं चुदवाऊंगी उसे … तुम्हारे जैसा मस्त लौड़ा नहीं मिलेगा उसे!

दीदी की चूत बहुत सारा जूस छोड़ने लगी.
जीजू ने अपना मुँह दीदी की चूत पर ऐसे लगा लिया कि सारा का सारा चूत रस जीजू के मुँह में ही चला गया. जो थोड़ा बहुत दीदी की टांगों पर चू गया था, उसे जीजा जी ने अपनी जीभ से चाट लिया.

क्या सुंदर सीन था!
मेरा मन कर रहा था कि मैं भी अभी खुद जाकर दीदी और जीजू के इस खेल में शामिल हो जाऊं.

दोस्तो, एक नई-नई जवान होती लड़की जब ऐसी कामक्रीड़ा देखती है, वह भी अपनी दीदी और जीजू के बीच … और जब उसी का जिक्र हो रहा हो, तो उसकी इच्छा भी चुदने की हो जाती है.

जीजा जी के मुँह से अपनी चुदाई की बातें सुन-सुनकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.
मैं अपनी चूत में वहीं स्टूल पर खड़ी खड़ी ही उंगली करने लगी.

तभी अचानक से मेरे स्टूल का बैलेंस डगमगा गया और मैं गिरते-गिरते बची.
मेरा हाथ दीदी-जीजू के दरवाजे पर लग गया, जिससे एक जोर की आवाज हुई और जीजू ने तुरंत रोशनदान की ओर देखा.

मैं तुरंत स्टूल से उतरकर स्टूल को वहीं साइड में रख दिया और फटाफट से ऊपर बने अपने कमरे की ओर भाग गई.

मैंने अपने कमरे में आकर दरवाजे से झांककर देखा.

जीजू नंगे ही अपने लंड को हाथ में लेकर अपने कमरे से बाहर आकर चारों ओर देखने लगे.

मेरे दिल की धड़कन बड़े ही जोरों से चल रही थी. सांस ऊपर-नीचे हो रही थी.
जीजू अब ऊपर मेरे कमरे की ओर ही देख रहे थे.

जीजू वहीं बहुत देर तक नीचे खड़े, अपने लंड को हाथ में लेकर बार-बार मेरे कमरे की ओर ही देखते रहे.

मैं भी अपने कमरे के झरोखे से उसी ओर देख रही थी.

बहुत देर तक मेरा दिल ऐसे ही जोर-जोर से धड़कता रहा.
मुझे ऐसा महसूस हो रहा था जैसे कि मेरी चोरी पकड़ी गई हो.
मुझे उस रात ठीक से नींद भी नहीं आई.

दोस्तो, कॉलेज गर्ल हॉट कहानी के अगले भाग में मैं लिखूँगी कि किस तरह से दीदी और जीजा जी ने मिलकर मेरी कुंवारी चुत की ओपनिंग करते हुए चोद दिया.

कॉलेज गर्ल हॉट कहानी का अगला भाग: जीजा जी ने मेरी कुंवारी चुत को चोद दिया- 3

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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