jiju sali xxx chudai
जीजू साली Xxx चुदाई कहानी में जीजू ने मेरी दीदी को मुझे जीजा साली सेक्स के लिए तैयार करने को कहा. मैं तो पहले से अपनी चूत की सील तुड़वाने को आतुर हो रही थी.
दोस्तो, मैं अन्नू आपको कहानी के दूसरे भाग जीजू दीदी की चुदाई देख मैं गर्म हो गयी में अपनी पाठिका पिंकी की उसके जीजा जी के साथ होने वाली चुदाई की सेक्स कहानी सुना रहा था.
उस दिन क्या हुआ था … वह पिंकी से ही जीजू साली Xxx चुदाई कहानी में सुनें.
उस दिन मैं छुप छुप कर दीदी और जीजा जी की चुदाई देख रही थी कि तभी मेरा संतुलन बिगड़ा और आवाज हो गई. मैं डर कर अपने कमरे में आ गई.
अगले दिन मैं अपने कॉलेज चली गई और दीदी अपनी जॉब पर.
आज मैं अपने कॉलेज से जल्दी आ गई थी.
जैसा कि मैंने आपको बताया था कि जीजा जी दोपहर को खाने के लिए घर ही आते थे.
मैं लगभग 3 बजे कॉलेज से आती थी, पर उस दिन मैं 1 बजे ही घर पर आ गई थी.
घर की एक-एक चाबी हम तीनों के पास ही रहती थी.
मैंने अपनी चाबी से घर का लॉक खोला और अन्दर आ गई.
जैसे ही मैं जीजा जी के बेडरूम के पास पहुंची, जीजू बिल्कुल नंग-धड़ंग थे और अपने हाथ में अपने मूसल लंड को लेकर मेरा नाम लेकर बड़बड़ा रहे थे ‘मेरी पिंकी … आह पिंकी … अपने इस लंड से तुझे चोदना है … बहनचोद, मुझे पता है तू मुझे अपनी दीदी की चुदाई करते हुए देख रही है … रात भी दरवाजे पर तू ही थी मेरी रानी!’
जीजू के मुँह से ऐसी बात सुनकर मैं अन्दर ही अन्दर आश्चर्यचकित और विस्मित थी.
जीजू की बातों ने मेरे तन-बदन में आग लगा दी थी.
एक बार तो मेरा मन हुआ कि अभी जीजू के लंड के नीचे लेट जाऊं और जीजू के इस मोटे लंड को अपनी चूत की गहराई में उतार लूँ.
पर फिर मैं कुछ और सोचकर घर से बाहर आ गई और घर का दरवाजा दोबारा से लॉक कर दिया.
अब मैंने बाहर से घर की बेल बजाई.
दो तीन बार बेल बजाने के बाद जीजू ने घर का दरवाजा खोला.
जीजू मुझे देखकर बोले- पिंकी, क्या बात? आज कॉलेज से जल्दी आ गई?
पिंकी- हां जीजू, आज कॉलेज में लेक्चर नहीं था.
जीजू- अच्छा, चल ठीक है.
मैं ऊपर अपने कमरे में चली गई.
थोड़ी देर बाद जीजू मेरे कमरे में आए और मेरे पास बेड पर बैठ गए.
वे बोले- तेरी पढ़ाई-लिखाई कैसी चल रही है पिंकी?
पिंकी- जीजू, बढ़िया चल रही है.
जीजू ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया और मेरी ओर देखते हुए बोले- पिंकी, एक बात पूछूँ?
पिंकी- जी, पूछो जीजू.
जीजू- पिंकी, तुझे अकेले में मुझसे डर तो नहीं लगता?
पिंकी- कैसा डर जीजू?
जीजू- मान लो किसी दिन मेरे अन्दर का शैतान जाग गया और तुम्हारे साथ भी तुम्हारी दीदी जैसा संबंध बना लिया तो?
मैं वासना में बह कर बोली- तो क्या हुआ जीजू? आखिर आप मेरे जीजू ही तो हो.
जीजू- तो इसका मतलब तुम तैयार हो?
पिंकी- आप करके तो देखो!
इसके बाद जीजू ने मुझे अपने आलिंगन में ले लिया और मेरे होंठों से अपने होंठ लगा दिए.
वे मुझे किस करने लगे.
मेरे होंठों को अपने मुँह में लेकर, मेरी गर्दन पर जोरदार तरीके से किस करने लगे.
मेरी गर्दन पर तो इतने जोर से किस किया कि मेरी गर्दन पर निशान भी पड़ गया.
जीजू- पिंकी मेरी जान, तैयार हो जा तेरी चुदाई का समय आ गया है. अब जल्दी ही मैं तेरी चुत फाड़ दूंगा.
मुझसे यह कहकर जीजू अपने ऑफिस चले गए.
मुझे अपनी चुत में जीजू के बड़े लंड का अहसास होने लगा और मन में गुदगुदी होने लगी.
शाम को दीदी और मैं किचन में खाना बना रहे थे.
रात 9 बजे जीजू आए और ड्राइंग रूम में जाकर टी.वी. देखने लगे.
फिर उन्होंने आवाज देकर दीदी को बुलाया.
दीदी किचन छोड़कर जीजू के पास गईं.
मैं भी उत्सुकतावश दीदी के पीछे ही दूर से देखने लगी.
जीजू दीदी को एक ब्रा और पैंटी देते हुए बोले- आज रात तुझे केवल यही पहनकर रहना है.
एक पल रुकने के बाद वे एक लाल रंग की ब्रा-पैंटी का सैट दीदी को देते हुए बोले कि ये पिंकी को दे देना … और ध्यान से सुन ले मेरी रांड, मेरी कुतिया तू … कल शनिवार है, कल पिंकी की चुदाई का दिन है. ये नया ब्रा-पैंटी का सैट पिंकी को दे देना. ठीक है? और पिंकी को सब समझा देना.
फिर जीजू खड़े खड़े ही दीदी के बूब्स को चूसने लगे.
मैं पीछे से सब कुछ देख और सुन रही थी.
कुछ देर बाद जीजू उनसे अलग हो गए.
दीदी अपने हाथ में वह ब्रा और पैंटी का सैट लेकर किचन में वापस आ गईं.
मैं भी वापस किचन में आकर खड़ी हो गई.
मैं अनजान बनती हुई दीदी से पूछने लगी- दीदी, जीजू क्या कह रहे थे?
निकिता दीदी- कुछ नहीं पिंकी … अच्छा देख तेरे जीजू तेरे लिए एक गिफ्ट लाए हैं. ये लाल रंग का ब्रा-पैंटी का सैट. और तुझे कल ये ब्रा-पैंटी का सैट पहन कर कल जीजू के पास जाना है!’
मैंने अनजान बनते हुए कहा- दीदी … ये क्या कह रही हो? ये पहनकर जीजू के पास?
दीदी- हां मेरी पिंकी.
एक बात और यहां बताने वाली है कि अब जीजू दीदी को घर में ब्रा और पैंटी नहीं पहनने देते थे ताकि जब भी मूड बन जाए, तो वे दीदी को झट से चोद सकें.
मैं दीदी के हाथ से ब्रा-पैंटी का सैट लेकर अपने कमरे में जाने लगी.
तभी जीजू किचन की ओर आने लगे और मुझे देखकर मुस्कुराने लगे.
मैं रेड कलर की वह ब्रा-पैंटी अपने कमरे में रखकर नीचे आकर डाइनिंग टेबल पर बैठ गई.
खाना खाते वक्त डाइनिंग टेबल पर जीजू मुझे देखते हुए निकिता दीदी से बोले- क्यों निकिता, पिंकी को बता दिया कल के बारे में?
दीदी- हां, और मैं कल इसको समझा दूंगी.
मेरी ओर देखकर जीजू ने मुझे आंख मार दी और दीदी से बोले- चल खाना खा ले और आज रात के लिए तैयार हो जा!
निकिता दीदी ने भी मेरी ओर देखते हुए जीजू को आंख मार दी और बोली- मेरे राजा बाबू, मैं तो हर वक्त रेडी रहती हूँ.
खाना खाकर जीजू अपने रूम में चले गए.
दीदी मेरे पास आईं और मुझे प्यार से सहलाने लगीं- मेरी प्यारी पिंकी … हर लड़की की जिंदगी में एक दिन आता है जब उसे जिंदगी के इस नैसर्गिक आनन्द का मजा लेना होता है और एक कली से फूल बन जाना होता है. अब तेरी जिंदगी में भी कल वह दिन आने वाला है मेरी प्यारी बहन!
मैं चुपचाप दीदी की बातों को सुन रही थी और हां में अपना सिर हिला रही थी.
पर दीदी को नहीं मालूम था कि मैं तो रोज छिप-छिपकर दीदी और जीजू की चुदाई देखती थी.
दीदी की बातों को सुनकर मैं ऊपर अपने कमरे में चली गई और अपने आपको शीशे के सामने निहारने लगी, एक-एक करके अपने कपड़े उतारने लगी.
मैं बहुत एक्साइटेड हो रही थी.
मैंने अपनी सलवार, अपना सूट उतार दिया और मैं केवल ब्रा-पैंटी में ही रह गई. शीशे में अपने आपको ब्रा-पैंटी में निहार रही थी.
मैंने अपनी छोटी-छोटी चूचियों को अपनी ब्रा से आजाद कर दिया और पहली बार मैं अपने सुंदर शरीर को, अपनी छोटी-छोटी मस्त चूचियों को शीशे में निहारकर एक्साइटेड हो रही थी.
मेरी छोटी-छोटी चूचियों पर काले रंग के मस्त उभार मेरे शरीर को सुंदर बना रहे थे.
फिर मैंने धीरे से अपनी पैंटी भी उतार दी.
मेरी चूत पर छोटे-छोटे काले बाल मेरी चूत की सुंदरता को बढ़ा रहे थे और मुझे एक्साइटेड कर रहे थे.
मैं आने वाले कल के बारे में सोच-सोचकर ही उत्तेजना से भरी जा रही थी.
मेरी चूत अपने आप गीली होने लगी थी.
मैंने अपनी चूत पर अपना हाथ फेरा और मुझे अपनी चूत पर गीलापन महसूस हुआ.
मैंने रेड ब्रा और पैंटी का पैकेट उठाया जो जीजू मेरे लिए लाए थे.
वह एक इम्पोर्टेड ब्रा-पैंटी का सैट था.
मैंने वह पैकेट खोला, जिसमें डार्क रेड कलर की ब्रा-पैंटी थी.
मैंने ब्रा और पैंटी निकाली और पहन ली और फिर से शीशे के सामने खड़ी होकर अपने हुस्न को निहारने लगी.
मुझे अपने कमरे में आए लगभग 2 घंटे हो गए थे.
रात के 12 बज चुके थे.
मैं ऐसे ही ब्रा-पैंटी में अपने बिस्तर पर लेट गई और न जाने कब मैं नींद के आगोश में खो गई.
सुबह … दीदी मेरे सामने खड़ी थीं और मैं ऐसे ही ब्रा-पैंटी में अपने बिस्तर पर पड़ी थी.
निकिता दीदी- पिंकी … पिंकी … अरी, ऐसे ही सोती रहेगी? उठ जा, अब दिन निकल गया है. मेरी प्यारी पिंकी आज तेरी सुहागरात है मेरी प्यारी पिंकी.
मैं अंगड़ाई लेती हुई दीदी को देखकर शर्मा गई और पास पड़ी चादर से अपने शरीर को ढक लिया.
दीदी- अरी पगली, मुझसे क्या शर्माना!
दीदी ने चादर हटाकर एक प्यारी सी पप्पी मेरे माथे पर दे दी और दूसरे ही पल मेरे एक बूब को अपनी मुँह में भरकर मेरी चूची को चूसने लगीं.
फिर अपना एक हाथ मेरी चूत पर रखकर चुत को सहलाने लगीं.
मैं भी अपने दोनों हाथ दीदी के गले में डालकर उनके होंठों को चूसने लगी.
मैं और दीदी इतनी एक्साइटेड हो गए थे कि निकिता दीदी ने अपनी मैक्सी उतार दी और मुझे अपने गोद में उठाकर सामने रखे स्टूल पर बैठा दिया.
वे अब मेरी चूत को चूसने लगी.
मैंने अपनी दोनों टांगों को उनके गले में डाल दिया.
हम दोनों बहनें आपस में ही एक-दूसरे से लिपट गईं.
कभी दीदी मेरे बूब्स और मेरी चूत चूस रही थीं, तो कभी मैं दीदी के बूब्स और उनकी चूत चूस रही थी.
उस दिन पहली बार मैंने और दीदी ने एक-दूसरे के शरीर का आनन्द लिया.
पहली बार मेरी चूत ने इतना सारा जूस छोड़ा कि मैं बयान भी नहीं कर सकती.
आधा घंटा तक हम दोनों बहनें एक-दूसरे के शरीर से खेलती रहीं.
तभी जीजू ने दीदी को आवाज लगाई- निकिता … निकिता …
दीदी- हां विशाल … मैं ऊपर पिंकी को उठा रही हूँ, बस आई.
दीदी ने फटाफट से अपनी मैक्सी पहनी और मेरे माथे पर एक जोरदार किस करती हुई बोलीं- मेरी प्यारी पिंकी, यही जिंदगी का असली आनन्द है. अब जल्दी से तू भी तैयार होकर नीचे आ जा.
मैं दीदी के इस रूप को देखकर आश्चर्य और विस्मित थी और मन ही मन प्रसन्न हो रही थी.
मैं भी कपड़े पहनकर नीचे आ गई.
जीजू और दीदी दोनों को ही ऑफिस जाना होता था इसलिए दोनों ही अपने-अपने ऑफिस के लिए रेडी हो रहे थे और मुझे भी कॉलेज के लिए निकलना था.
जीजू ने ऑफिस जाते हुए मुझे आंख मार दी और बोले- मेरी पिंकी रानी, आज रात … धकाधक … हूँ …
बस इतना कहकर वह अपने ऑफिस के लिए निकल गए.
दीदी भी मेरी ओर देख-देखकर मुस्कुरा रही थीं.
वे भी अपने ऑफिस के लिए निकल गईं.
उनके बाद मैं भी कॉलेज के लिए निकल गई.
आज न जाने क्यों मेरा कॉलेज में मन ही नहीं लग रहा था.
मुझे भी बेसब्री से रात का इंतजार हो रहा था.
मुझे बार-बार आज सुबह दीदी के साथ हुआ वह प्यारा सेक्स याद आ रहा था.
जैसे-तैसे मैंने कॉलेज में अपना समय पूरा किया और घर वापस आ गई.
घर में मैं अकेली थी.
आज लंच के लिए जीजू भी घर नहीं आए थे.
शायद किसी क्लाइंट के साथ उनकी मीटिंग थी.
मैं अपने आप को शीशे के सामने खड़ी होकर निहारने लगी.
फिर धीरे-धीरे अपने सारे कपड़े उतारकर नंगी ही शीशे के सामने खड़ी हो गई.
मैंने अपनी चूत पर निकले हुए छोटे-छोटे बालों को निहारा.
फिर दीदी की अलमारी से हेयर रिमूवर क्रीम निकालकर अपने चूत के छोटे-छोटे बालों को खत्म कर दिया.
अपने आप को शीशे के सामने खड़े होकर निहारने में मुझे बहुत ही आनन्द आ रहा था.
मैंने खड़ी खड़ी ही अपनी छोटी उंगली अपनी चूत की दरार में धीरे धीरे डालनी शुरू कर दी.
मुझे बहुत ही आनन्द आ रहा था.
मैंने अपनी उंगली की रफ्तार बढ़ाई.
अनायास ही बहुत सारा जूस मेरी चूत से भराभरा कर निकल गया.
कितना मदहोश और मस्त कर देने वाला अहसास होता है, जब चूत से जूस निकलता है … है न!
शाम को दीदी और जीजू घर आ गए थे.
ड्राइंग रूम में मैंने दीदी और जीजू को पानी लाकर दिया.
जीजू इतने एक्साइटेड थे कि एक हाथ से गिलास पकड़े रखा और दूसरे हाथ से मुझे पकड़ लिया.
दीदी के सामने ही मुझे अपनी एक जांघ पर बिठा लिया और दीदी के सामने ही वे मेरे होंठों को चूसने लगे.
पानी का गिलास रखकर, उन्होंने अपने दूसरे हाथ से दीदी को पकड़ कर अपनी दूसरी जांघ पर बिठा लिया.
दीदी भी आज पूरे मूड में लग रही थीं.
उन्होंने भी जीजू की जिप खोली और जीजू के सांप जैसे लंड को उनकी पैंट से बाहर निकाल कर ऊपर-नीचे करने लगीं.
दीदी जीजू का हाथ छुड़ाकर नीचे बैठ गई और जीजू के मूसल लंड को अपने मुँह में लेकर लॉलीपॉप की तरह चूसने लगीं.
जीजू मेरे होंठ चूस रहे थे और दीदी जीजू का लंड … क्या मस्त सीन था हम तीनों में ही इतनी जबरदस्त वासना भरी हुई थी कि 2 मिनट में ही हम तीनों के कपड़े हमारे तन-बदन से अलग हो गए थे.
दीदी- लो विशाल आज तुम दो-दो हसीनाओं की चूत का आनन्द लो ले पिंकी, पकड़ और चूस इस लंड को … आज हम दोनों इस लंड से खेलेंगे… क्या मस्त लंड है तेरे जीजू का!
मैंने जीजू के लंड को हाथ लगा दिया.
दीदी- मैं तो कॉलेज में ही मर मिटी थी इस लंड पर … कॉलेज के रूम में ही इस लंड की सवारी कर ली थी मैंने, जब से आज तक तेरे जीजू के इस लंड की दीवानी हूँ.
जीजू ने दीदी को चूम लिया.
दीदी- पिंकी … आज से तू भी इस लंड की दीवानी हो जाएगी, मेरी प्यारी पिंकी!
दीदी जीजू के लंड से खेल रही थीं और जीजू मेरी चूचियों से!
दीदी ने जीजू के लंड को मेरे हाथ में देते हुए कहा- ले, खेल इस लंड से मेरी पिंकी डार्लिंग.
जीजू के हाथ मेरी चूचियों से खेलने लगे.
मैंने अपने एक हाथ से जीजू के लंड को पकड़ कर दबाना शुरू कर दिया.
मर्द का कड़क लंड दबाने में मुझे बड़ा आनन्द आ रहा था.
मैं जीजू के लंड को साक्षात इतने करीब से देखकर आश्चर्य और विस्मित थी.
जीजू का मूसल लंड लगभग 8 इंच लंबा और 2 इंच मोटा था.
मैंने पहली बार किसी मर्द का लंड अपने हाथ में लिया था.
मैं प्यार से उनके लंड के सुपाड़े पर धीरे-धीरे हाथ फेरने लगी.
अचानक ही जीजू ने मेरी चूचियों को बहुत जोरों से मरोड़ दिया.
मेरी एक जोर की चीख निकल गई और चूत में एक चिंगारी सी सुलग उठी.
मैंने भी जीजू के लंड को टाइट पकड़ लिया और लंड की खाल को आगे-पीछे करते-करते कोने तक ऐंठ दिया.
फिर उनके लंड के सुपाड़े पर अपनी जीभ फेरने लगी.
जीजू भी मस्ती में अपने नितंबों को आगे-पीछे करने लगे.
मैं जीभ से लंड चाट रही थी, तो कभी टोपा चूसकर जीजू के लंड की चुसाई का आनन्द ले रही थी.
मेरे मुँह से लार टपकने लगी.
अचानक से मैंने मचल कर पूरा का पूरा लौड़ा अपने मुँह में घुसा लिया.
जीजू का वह लंड मेरी गर्दन तक पहुंच गया.
वे अब अपने लंड से मेरे मुँह को चोदे जा रहे थे.
जीजू ने दोनों हाथों से मेरे सिर और बाल पकड़ लिए और दनादन-दनादन मेरे मुँह में अपने लंड राजा को जोर-जोर से आगे-पीछे करने लगे.
मेरी सांसें उखड़ने लगीं, शरीर में तपन महसूस होने लगी.
एक मिनट की इस मुँह चुदाई ने मेरा बुरा हाल कर दिया.
मुझे अपनी गर्दन में ऐसा लग रहा था जैसे मेरी गर्दन छिल गई हो.
मेरे मुँह से आवाज आनी बंद हो गई और उस एक पल ऐसा महसूस हुआ कि मेरी सांसें बंद होने लगी हैं.
मैंने गूँगूँ… करते हुए बड़ी मुश्किल से जीजू के लंड को अपने मुँह से बाहर किया.
फिर दीदी ने जीजू के लंड को मेरे हाथ से लेते हुए कहा- अब चल खेल शुरू करते इस लंड से मेरी पिंकी.
जीजू ने मुझे और दीदी को ऐसे लिटा दिया, अपना लौड़ा दीदी की चूत में डाल दिया और ऊपर होकर मेरी चूत को चूसने लगे.
आह … सच में मुझे चुत चुसवाने में बहुत ही ज्यादा मजा आ रहा था.
फिर जीजा जी उठे और दीदी से बोले- अब पिंकी की सील तोड़ने का समय आ गया है. तू इसका सर अपनी गोद में रखकर बैठ जा!
इसके बाद नीचे आकर उन्होंने मेरी टांगों को फैलाया और थोड़ा सा थूक मेरी चूत पर मल कर चुत को लिसलिसा कर दिया.
फिर जीजाजी ने अपना मूसल लंड मेरी चूत के मुँह पर रखकर सुपारे को चुत की फांक में फंसा दिया.
मैं उनके लौड़े के गर्म सुपारे के स्पर्श से मैं एकदम से सिहर उठी. अभी में कुछ समझ पाती कि जीजू ने एक जोरदार धक्का दे मारा.
उनके इस बम पिलाट झटके में उनका मूसल लंड मेरी चूत की फांक को चीरता फाड़ता हुआ अन्दर धंस गया.
मैं दर्द से इतनी ज्यादा कष्ट में आ गई थी कि मेरे मुँह से आवाज ही निकल पा रही थी.
उधर उनका लंड एकदम सरपट दौड़ता हुआ मेरी बच्चेदानी से जा लगा.
तभी मेरी आवाज वापस आ गई और मैं बहुत जोर से चिल्ला पड़ी- मर गई … आह मर गई दीदी!
उसी पल दीदी ने मेरे मुँह पर अपना मुँह रख दिया.
मुझे ऐसा महसूस हुआ जैसे किसी ने मेरी चूत में आग लगा दी हो.
जीजा जी के ताबड़तोड़ धक्कों ने मेरे पूरे शरीर को हिला दिया था.
वे बिना रुके ताबड़तोड़ तरीके से मुझे चोद रहे थे.
मेरे मुँह से लगातार सिसकारियां निकल रही थीं- उई … आह … उह … उह … जीजा जी … उह … उह … सईस … उहह … आह … मार दिया … उहहह!
दीदी मेरे मुँह में अपनी जीभ से मुझे चूस रही थीं, कभी मेरी चूचियों को चूस रही थीं.
वे मेरा दर्द कम करने में मेरा साथ दे रही थीं.
जीजा जी बड़बड़ाते हुए मुझे बेतहाशा चोदे जा रहे थे- पिंकी … आह मेरी जान पिंकी … क्या मस्त चूत है तेरी … आह पिंकी!
कुछ देर की पीढ़ा के बाद अब मुझे भी थोड़ा-थोड़ा अच्छा लगने लगा था.
‘आह … उह …’
मैंने अपने दोनों हाथों से जीजा जी की कमर को कसकर पकड़ लिया.
अब जीजा जी के हर एक धक्के से मुझे बड़ी आत्म-संतुष्टि मिल रही थी.
जीजा जी- पिंकी आह … क्या मस्त चूत है साली साहिबा तुम्हारी आह … मजा आ रहा है तुम्हें चोदकर!
जीजा जी ने अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा दी और वे लगातार नॉन स्टॉप मुझे चोदे जा रहे थे.
अचानक उन्होंने अपना मूसल लंड मेरी चूत से निकाल कर मेरे पास बैठी दीदी के मुँह में लगाकर दीदी की गर्दन तक घुसा दिया.
दो मिनट में ही जोरदार ‘गर … गर … आह … आह …’ की आवाज के साथ जीजा जी ने अपना गर्म-गर्म लावा दीदी के गले की गहराई में उतार दिया.
दीदी जीजा जी का लंड तब तक चूसती रहीं, जब तक उसकी एक-एक बूंद उन्होंने अपने गले में नहीं उतार ली.
जीजू साली Xxx चुदाई करके जीजू मेरे ऊपर निढाल होकर गिर गए.
सच में उस दिन मजा ही आ गया — पहले चूत चुदाई, फिर गांड की मस्त ठुकाई और अब गर्म-गर्म मलाई.
जीजा जी ने उस दिन हम दोनों बहनों के साथ इतनी जबरदस्त चुदाई की थी कि दीदी और मेरे शरीर के सारे जोड़ खुल गए थे.
मेरी और दीदी की चूत, गांड और चूचियों में इतना दर्द हो रहा था कि हम दोनों से उठा भी नहीं जा रहा था.
ऐसा लग रहा था किसी ने पकड़ कर हमें बहुत सारे ईंट पत्थर दे कर दो मंजिल ऊपर चढ़वा कर मेहनत करवाई हो.
लगभग 3 घंटे तक लगातार हमारी काम लीला चलती रही.
पता नहीं उस दिन जीजा जी क्या खाकर आए थे.
उन्होंने हम दोनों को इतना चोदा, इतना चोदा कि मैं आपको बयान नहीं कर सकती.
पर वह मीठा-मीठा दर्द मेरे जीवन के सबसे यादगार पलों में से एक बन गया था.
दोस्तो, इसके बाद तो जब कभी हमारा मन करता, हम तीनों एक-दूसरे की बांहों में खो जाते और जीवन के इन हसीन पलों का असीम आनन्द उठाते.
जब कभी दीदी और मेरा मूड होता तो हम दोनों आपस में एक-दूसरे को खुश कर देती थीं.
दो साल तक मैं दीदी और जीजू के साथ रहकर ऐसे ही जीवन का आनन्द उठाती रही.
इसके बाद मेरी चंडीगढ़ जॉब लग गई.
मैं चंडीगढ़ आ गई.
अब जब कभी मुझे मौका मिलता है, मैं जीजू और दीदी के पास जाकर जीवन के हसीन पलों का आनन्द उठा लेती हूँ.
मेरे प्यारे दोस्तो, आप सबको बहुत-बहुत धन्यवाद अपनी सेक्स कहानी शेयर करके मुझे बहुत अच्छा लगा.
सच पूछो तो सेक्स ही जीवन को सही आनन्द देता है.
मेरा तो मानना है कि जीवन की दुष्वारियां कभी कम नहीं होंगी.
इसलिए जीवन के हर पल का आनन्द उठाना चाहिए … जिस भी तरीके से आप जीवन का आनन्द ले सकते हो.
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।