मैंने पड़ोसन भाभी को रात में 5 बार चोदा

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मेरा नाम अर्जुन है। मेरी उम्र 30 साल है और मैं एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर हूँ।

मेरा कद 6 फीट का है और मैं जिम रेगुलर जाता हूँ इसलिए मेरा शरीर एकदम फिट और मस्कुलर है।

मेरे लंड का साइज भी काफी अच्छा है, लगभग 7.5 इंच लंबा और 3 इंच मोटा, जो किसी भी औरत को संतुष्ट कर सकता है।

मेरी शादी को 3 साल हो चुके हैं। मेरी पत्नी प्रिया बहुत ही खूबसूरत है लेकिन वो अपने मायके गई हुई है एक हफ्ते के लिए।

उसके जाने के बाद मैं अकेला घर में रह रहा हूँ।

मेरे पड़ोस में राजेश भैया और नेहा भाभी रहते हैं। राजेश भैया एक बिजनेसमैन हैं और अक्सर टूर पर बाहर रहते हैं।

उनकी उम्र 38 साल है। नेहा भाभी उनसे 4 साल छोटी हैं, यानी 34 साल की हैं। वो एक हाउसवाइफ हैं लेकिन पहले टीचर थीं।

नेहा भाभी दिखने में बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी हैं। उनका फिगर 36-28-38 है।

उनके बूब्स बहुत मोटे और मस्त हैं, जो हर ब्लाउज में उभरते रहते हैं। उनकी गांड भी बहुत मोटी और आकर्षक है।

वो जब चलती हैं तो उनकी गांड ऐसे मटकती है कि किसी का भी लंड खड़ा हो जाए।

वो अक्सर साड़ी या सूट पहनती हैं और गहरे गले के ब्लाउज जिससे उनकी मोटी मोटी चूचियों का क्लीवेज दिखाई देता रहता है।

मैं अक्सर उनके घर जाता रहता था क्योंकि राजेश भैया बाहर रहते थे और भाभी अकेली रहती थीं।

हमारी दोस्ती हो गई थी। वो मुझे अपने छोटे भाई की तरह मानती थीं लेकिन मैं उन्हें देखकर हमेशा उत्तेजित हो जाता था।

मैं उनकी चूचियों को देखकर सोचता था कि काश इन मोटे मोटे बूब्स को एक बार हाथ लगा दूँ।

उनकी बुर के बारे में सोचकर मेरा लंड रात में खड़ा हो जाता था और मैं उनका नाम लेकर मुट्ठ मारता था।

एक दिन की बात है, मैं शाम को ऑफिस से आ रहा था तो देखा नेहा भाभी अपने दरवाजे पर खड़ी थीं।

उन्होंने गहरे गले का ब्लाउज पहना था जिसमें से उनकी आधी चूचियाँ दिख रही थीं। मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया।

भाभी ने मुझे देखकर बुलाया, “अर्जुन, आओ ना, थोड़ी देर बैठो। राजेश तो बाहर गए हैं, मुझे अकेले बोर हो रहा है।”

मैंने कहा, “ठीक है भाभी, आता हूँ।”

मैं घर पर कपड़े बदलकर उनके घर गया। भाभी ने मुझे लिविंग रूम में बैठाया और चाय बनाई।

वो मेरे सामने बैठ गईं और उनका पल्लू गिर गया। उनकी मोटी मोटी चूचियाँ मेरे सामने उभरने लगीं। मेरा लंड पैंट में खड़ा हो गया।

भाभी ने मेरी तरफ देखा और मुस्कुराईं। उन्होंने कहा, “अर्जुन, तुम कितने हैंडसम हो गए हो। तुम्हारी बीवी तो बहुत लकी है।”

मैंने शर्माते हुए कहा, “भाभी, आप भी बहुत खूबसूरत हैं।”

भाभी ने कहा, “अच्छा, तुम्हें मैं खूबसूरत लगती हूँ?”

मैंने कहा, “हाँ भाभी, बहुत।”

भाभी ने अपना हाथ मेरे हाथ पर रख दिया और कहा, “अर्जुन, मैं तुम्हें बहुत दिनों से पसंद करती हूँ। तुम्हारा बदन देखकर मेरी बुर में आग लग जाती है।”

ये सुनकर मेरा दिल धक-धक करने लगा। क्या भाभी वही कह रही थीं जो मैं सोच रहा था?

अगले दिन शाम को भाभी का फोन आया।

उन्होंने कहा, “अर्जुन, राजेश तीन दिन के लिए दिल्ली गए हैं। क्या तुम आज रात मेरे यहाँ रुक सकते हो? मुझे अकेले डर लगता है।”

मैंने कहा, “ठीक है भाभी, मैं आ जाऊँगा।”

रात के 8 बजे मैं भाभी के घर पहुँचा। भाभी ने रेड वाइन तैयार रखी थी। उन्होंने कहा, “आज हम दोनों पिएंगे और मजे करेंगे।”

हम दोनों ने शराब पी। धीरे-धीरे भाभी नशे में होने लगीं।

उन्होंने अपना पल्लू गिरा दिया और उनकी मोटी मोटी चूचियाँ मेरे सामने उभरने लगीं।

उनके निप्पल ब्लाउज के अंदर से खड़े हो रहे थे।

भाभी ने कहा, “अर्जुन, मैं तुम्हें बहुत दिनों से चाहती हूँ। आज मुझे चोदो। मेरी बुर की प्यास बुझाओ।”

मैंने हिम्मत करके उनका हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया।

उन्होंने मेरे लंड को पकड़कर सहलाया और बोलीं, “वाह, कितना मोटा और बड़ा लंड है तुम्हारा। आज इसी से मेरी बुर की आग बुझाना।”

मैंने भाभी को अपनी बाहों में भर लिया और उनके होंठों पर किस करने लगा।

वो भी मेरा पूरा साथ दे रही थीं। मैंने उनकी साड़ी खोलनी शुरू की और वो जमीन पर गिर गई।

फिर मैंने उनका ब्लाउज खोला और ब्रा भी उतार दी। उनके मोटे मोटे बूब्स बाहर आ गए।

मैं उन पर टूट पड़ा और जोर-जोर से चूसने लगा।

“आह्ह्ह… अर्जुन… और जोर से चूसो… मेरी चूचियाँ बहुत दिनों से तरस रही हैं…” भाभी सिसक रही थीं।

मैंने एक चूची को मुँह में लिया और जोर से चूसा। दूसरे हाथ से दूसरी चूची दबा रहा था।

भाभी के निप्प्स बहुत मोटे थे, मैं उन्हें काट-काटकर चूस रहा था।

फिर मैंने उनका पेटीकोट और पैंटी भी उतार दी। उनकी बुर दिख गई।

उन्होंने अपनी बुर के बाल साफ किए हुए थे और वो एकदम गुलाबी दिख रही थी। मैंने उनकी बुर पर हाथ फेरा और कहा, “क्या मस्त बुर है भाभी आपकी।”

भाभी ने शर्माते हुए कहा, “आज इसी बुर में अपना लंड डालो। मेरी बुर तुम्हारे लंड के लिए तरस रही है।”

मैंने उनकी बुर में उंगली डाली। वो पूरी गीली हो चुकी थी।

मेरी उंगली आसानी से अंदर-बाहर हो रही थी। भाभी आहें भर रही थीं।

फिर मैंने अपने कपड़े उतारे और अपना लंड बाहर निकाला।

भाभी ने देखा और हैरान हो गईं। “वाह अर्जुन, तुम्हारा लंड तो राजेश से भी बड़ा है। ये तो 7.5 इंच का लग रहा है।”

मैंने कहा, “हाँ भाभी, और ये पूरा आपके लिए है।”

भाभी ने मेरे लंड को पकड़ा और अपने मुँह में ले लिया। वो उसे चूसने लगीं।

उनकी जीभ मेरे लंड के टोपे पर घूम रही थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। वो मेरे लंड की गोलियां भी चूस रही थीं।

“भाभी… अब रुक जाइए… नहीं तो मैं झड़ जाऊँगा…” मैंने कहा।

भाभी ने मेरा लंड मुँह से निकाला और बोलीं, “अब मेरी बुर में डालो अपना लंड।”

मैंने भाभी को सोफे पर लेटा दिया और उनके पैर फैलाए।

उनकी बुर पूरी तरह से खुली हुई थी और गीली हो चुकी थी। मैंने अपना लंड उनकी बुर के मुँह पर रखा।

“धीरे से डालो अर्जुन… पहले थोड़ा दर्द होगा…” भाभी ने कहा।

मैंने एक धक्का मारा और मेरा लंड का टोपा अंदर चला गया। भाभी की बुर बहुत टाइट थी।

मैंने एक और जोरदार झटका मारा और आधा लंड अंदर घुसा दिया।

“आह्ह्ह… हाए माँ… बहुत मोटा है तुम्हारा लंड… मेरी बुर फट रही है…” भाभी चीख उठीं।

मैंने रुककर उनकी कमर सहलाई। फिर मैंने एक और जोरदार धक्का मारा और पूरा लंड अंदर उतार दिया।

“ऊई… मर गई… इतना अंदर… हाए राम…” भाभी की सांसें फूल रही थीं।

मैंने उनके बाल पकड़े और पीछे की तरफ खींचा।

फिर मैं जोर-जोर से धक्के मारने लगा। सोफा हिल रहा था और आवाज आ रही थी “चर्र्र… चर्र्र…”

“क्या मजा आ रहा है भाभी?” मैंने पूछा।

“बहुत मजा आ रहा है… तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है… और जोर से चोदो… सोफे पर चुदवाने का अलग ही आनंद है…” भाभी कह रही थीं।

मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से पेलना शुरू किया।

मेरा पूरा लंड उनकी बुर में अंदर-बाहर हो रहा था। उनकी बुर से फच-फच की आवाजें आ रही थीं।

“आह्ह्ह… अर्जुन… फाड़ दो मेरी बुर… इतने दिनों से यही चाहती थी मैं… एक मोटे लंड से अपनी बुर की चुदाई…” भाभी चिल्ला रही थीं।

मैंने लगभग 25 मिनट तक उन्हें सोफे पर चोदा। वो दो बार झड़ चुकी थीं। उनकी बुर से पानी निकल रहा था जो सोफे पर गिर रहा था।

फिर मैं झड़ने वाला था। मैंने पूछा, “भाभी, मैं निकालने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?”

भाभी ने कहा, “अंदर ही निकाल दो… मुझे तुम्हारे लंड का दूध पीना है… मेरी बुर में ही अपना सारा दूध छोड़ दो…”

मैंने जोर-जोर से धक्के मारे और फिर अपना सारा वीर्य उनकी बुर में छोड़ दिया। मैं पूरा झड़ गया और उनके ऊपर गिर पड़ा।

ये थी पहली चुदाई सोफे पर।

कुछ देर आराम करने के बाद, भाभी ने कहा, “अर्जुन, अभी तो चार बार और बाकी हैं। चलो, अब बेडरूम में चलते हैं। वहाँ और मजा आएगा।”

हम बेडरूम में गए। भाभी ने मुझे बेड पर लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर चढ़ गईं।

उन्होंने अपने पैर फैलाए और मेरे लंड को अपने हाथ से पकड़कर अपनी बुर में डाल लिया।

“आह्ह्ह… ये पोजीशन भी बहुत अच्छी है…” भाभी कह रही थीं।

वो मेरे ऊपर उछल-उछलकर चुदवा रही थीं। उनके मोटे मोटे बूब्स हिल रहे थे। मैंने उनके बूब्स पकड़ लिए और उन्हें दबाने लगा।

“तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है अर्जुन… मेरी बुर में पूरी तरह समा जाता है…” भाभी कह रही थीं।

मैंने उनके निप्प्स कसकर पकड़े और खींचे। वो दर्द से चीख उठीं लेकिन मजा भी ले रही थीं।

“काटो मेरे निप्प्स… और जोर से चोदो… मैं झड़ने वाली हूँ…” भाभी चिल्लाईं।

मैंने और तेज़ धक्के मारे। भाभी झड़ गईं और उनकी बुर ने पानी छोड़ दिया जो मेरे पेट पर गिरा।

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और भाभी के मुँह के पास ले गया।

उन्होंने बिना कहे ही मेरा लंड मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।

“मेरा दूध पी जाओ भाभी…” मैंने कहा।

भाभी ने मेरा लंड चूसा और मैं उनके मुँह में ही झड़ गया।

उन्होंने मेरा सारा दूध पी लिया और बचा हुआ चाटकर साफ कर दिया।

ये थी दूसरी चुदाई बेड पर।

अब रात के 12 बज चुके थे। भाभी ने कहा, “अर्जुन, चलो नहाते हैं। फिर बाथरूम में भी एक बार करते हैं।”

हम बाथरूम में गए। भाभी ने शावर चालू किया और हम दोनों गीले हो गए।

भाभी ने मेरा लंड साबुन से साफ किया और फिर अपने मुँह में ले लिया।

“तुम्हारा लंड तो साबुन से भी ज्यादा स्वादिष्ट है…” भाभी ने कहा।

फिर वो खड़ी हो गईं और दीवार से सटकर अपने पैर फैला दिए। मैंने पीछे से आकर अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया।

“आह्ह्ह… हाँ… इसी तरह… और जोर से…” भाभी कह रही थीं।

मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए।

उनकी गांड की थप-थप की आवाज बाथरूम में गूंज रही थी।

“तुम्हारी गांड बहुत मोटी है भाभी… मजा आ रहा है…” मैंने कहा।

“हाँ अर्जुन… मारो मेरी गांड… थप्पड़ भी मारो… मुझे दर्द में भी मजा आता है…” भाभी कह रही थीं।

मैंने उनकी गांड पर थप्पड़ मारे और धक्के मारता रहा।

उनकी बुर अब पूरी तरह से ढीली हो चुकी थी लेकिन फिर भी मजा आ रहा था।

“मैं झड़ने वाली हूँ… और जोर से चोदो… अपनी भाभी को चोदो…” भाभी चिल्लाईं।

मैंने और तेज़ धक्के मारे। भाभी झड़ गईं और उनकी बुर ने पानी छोड़ दिया।

मैंने भी अपना लंड बाहर निकाला और भाभी की गांड पर अपना दूध छोड़ दिया।

ये थी तीसरी चुदाई बाथरूम में।

अब सुबह के 3 बज चुके थे। भाभी ने कहा, “अर्जुन, भूख लगी है। चलो किचन में कुछ बनाते हैं।”

हम किचन में गए। भाभी ने फ्रिज खोला और दूध का पैकेट निकाला।

उन्होंने कहा, “देखो अर्जुन, तुम्हारे लंड ने मुझे बहुत दूध दिया है। अब मैं तुम्हें असली दूध पिलाती हूँ।”

भाभी ने गिलास में दूध डाला और पीने लगीं। फिर उन्होंने मुझे भी दूध पिलाया।

दूध पीते समय उन्होंने मेरा लंड फिर से खड़ा कर दिया।

“चलो, अब किचन में ही करते हैं…” भाभी ने कहा।

उन्होंने किचन के काउंटर पर बैठ गईं और अपने पैर फैला दिए। मैंने अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया।

“आह्ह्ह… ये भी बहुत अच्छा है…” भाभी कह रही थीं।

मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए।

किचन में फच-फच की आवाज गूंज रही थी।

“और जोर से चोदो… मेरी बुर को फाड़ दो…” भाभी चिल्ला रही थीं।

मैंने लगभग 20 मिनट तक उन्हें किचन में चोदा। फिर मैं झड़ गया और उनकी बुर में ही अपना दूध छोड़ दिया।

ये थी चौथी चुदाई किचन में।

अब सुबह के 6 बज चुके थे। भाभी ने कहा, “अर्जुन, अब एक बार और। इस बार बेड पर घोड़ी बनकर चुदवाऊंगी।”

हम बेडरूम में गए। भाभी ने घोड़ी बनकर खड़ी हो गईं।

उनकी गांड बहुत मोटी दिख रही थी। मैंने पीछे से आकर अपना लंड उनकी बुर में डाल दिया।

“आह्ह्ह… हाँ… इसी तरह… और जोर से…” भाभी कह रही थीं।

मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के मारने शुरू किए।

उनकी गांड की थप-थप की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी।

“मारो अर्जुन… मारो… मेरी बुर को तहस-नहस कर दो… मैं तुम्हारी रांड हूँ… चोदो मुझे…” भाभी पागल हो रही थीं।

मैंने लगभग 30 मिनट तक उन्हें घोड़ी बनाकर चोदा। वो तीन बार झड़ चुकी थीं।

फिर मैं झड़ गया और उनकी बुर में ही अपना दूध छोड़ दिया।

ये थी पांचवीं और आखिरी चुदाई।

हम दोनों बहुत थक चुके थे। भाभी की बुर पूरी तरह से लाल हो चुकी थी और थोड़ी सूजी भी हुई थी।

उनके चलने में तकलीफ हो रही थी।

भाभी ने मुझे गले लगाया और कहा, “अर्जुन, आज तुमने मुझे बहुत खुश किया। तुम्हारा लंड बहुत अच्छा है। आज से मैं तुम्हारी बीवी हूँ। जब भी तुम कहोगे, मैं तुम्हें अपनी बुर दूँगी।”

मैंने कहा, “भाभी, मैं भी हमेशा तुम्हारी सेवा में तैयार रहूँगा।”

भाभी ने कहा, “और हाँ, ये बात राजेश को बिल्कुल मत बताना। वो तो छोटे लंड वाला है, उसे पता चलेगा तो उसकी इंसल्ट होगी।”

मैंने हाँ में सिर हिलाया।

उस रात के बाद, मैं अक्सर भाभी के घर जाता रहता था।

जब भी राजेश भैया बाहर जाते, मैं भाभी को चोदता।

कभी-कभी तो हम दिन में भी पांच-पांच बार चुदाई करते।

भाभी अब हमेशा खुश रहती थीं।

उनकी बुर हमेशा मेरे लंड की प्यासी रहती थी।

और मैं, मैं तो हमेशा तैयार रहता था अपनी भाभी की बुर को अपने लंड से भरने के लिए।

यही थी मेरी कहानी – कैसे मैंने अपनी पड़ोसन भाभी को रात में 5 बार चोदा।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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