radha ki group mein chudai story
राधा देवी की उम्र छत्तीस साल की थी। वह एक छोटे से गाँव की सबसे अमीर औरत थीं।
उनके पति रामेश्वर सिंह एक बड़े जमींदार थे और शहर में अपना व्यापार चलाते थे। वह महीने में सिर्फ एक बार गाँव आते थे और वह भी सिर्फ दो-तीन दिन के लिए।
राधा की शादी अठारह साल की उम्र में हो गई थी। तब वह बहुत सुंदर थीं और आज भी उनकी सुंदरता में कोई कमी नहीं आई थी।
उनकी लंबी काली चोटी, गोरा चेहरा, हरी-भरी आँखें, और वो भरा-पूरा बदन – हर कोई उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो जाता था।
राधा की कोई संतान नहीं थी।
उनके पति उम्र में उनसे बीस साल बड़े थे और अब उनमें वो जोश नहीं रहा था जो एक औरत की ज़रूरत होती है। राधा की शादीशुदा ज़िंदगी में एक खालीपन था जो उन्हें रातों को जगाए रखता था।
उनकी हवेली गाँव के बीच में थी – दो मंजिला इमारत, बड़ा आंगन, और पीछे एक बगीचा।
हवेली में कई नौकर-चाकर थे लेकिन राधा का दिल नहीं लगता था। वह दिन भर अकेली रहती थीं और शाम को बस इंतज़ार करती थीं कि रात आए और गुज़र जाए।
अर्जुन मेरा नाम है। मैं एक युवा लेखक हूँ जो ग्रामीण जीवन पर किताबें लिखता हूँ।
मेरी उम्र अभी सिर्फ छब्बीस साल है और मैं शारीरिक रूप से बहुत फिट हूँ। मेरा लंड करीब नौ इंच लंबा और काफी मोटा है, जिसपर मैं गर्व करता हूँ।
मैं इस गाँव में आया था अपनी नई किताब के लिए रिसर्च करने। मेरे एक दोस्त ने मुझे इस गाँव के बारे में बताया था। मैंने सोचा कि यहाँ कुछ दिन रहकर ग्रामीण जीवन को करीब से देखूँगा।
मैं गाँव में एक छोटे से किराए के कमरे में रहने लगा। मेरे मकान मालिक ने मुझे राधा देवी के बारे में बताया। “वो हमारे गाँव की रानी हैं,” उन्होंने कहा, “बहुत अमीर हैं लेकिन बहुत अकेली भी।”
मेरी जिज्ञासा जागी। मैंने सोचा कि क्यों ना उनसे मिलूँ। शायद मेरी किताब के लिए कुछ मदद मिल जाए।
मैं एक शाम राधा देवी की हवेली गया। दरवाज़े पर एक नौकर ने मुझे रोका। मैंने अपना परिचय दिया और कहा कि मैं एक लेखक हूँ और राधा देवी से मिलना चाहता हूँ।
कुछ देर बाद नौकर ने मुझे अंदर बुलाया। मैं आंगन से होकर अंदर गया। वहाँ एक बड़ा आंगन था जिसमें फूलों के पौधे लगे थे। बीच में एक बड़ा पीपल का पेड़ था।
मुझे एक कमरे में बिठाया गया। कुछ देर बाद राधा देवी आईं। मैं उन्हें देखकर दंग रह गया।
उन्होंने हल्की गुलाबी रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गोरे बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी। उनके बाल खुले थे और उनके स्तनों का उभार साफ दिख रहा था।
“नमस्ते, आप लेखक हैं?” राधा ने मुस्कुराते हुए पूछा।
“जी हाँ, मेरा नाम अर्जुन है,” मैंने कहा।
“बैठिए,” राधा ने कहा और मेरे सामने कुर्सी पर बैठ गईं।
हम दोनों बातें करने लगे। मैंने उन्हें अपनी किताब के बारे में बताया।
राधा बहुत समझदार थीं और उनकी बोलने की शैली बहुत अच्छी थी। हम दोनों की बातें बहुत देर तक चलती रहीं।
अगले कुछ दिन मैं रोज़ राधा देवी से मिलने जाता रहा। हम दोनों में एक अनोखी दोस्ती हो गई।
राधा मुझे अपनी हवेली में आज़ादी से आने-जाने की अनुमति दे चुकी थीं।
एक दिन शाम को जब हम बगीचे में टहल रहे थे, तो राधा ने अचानक कहा, “अर्जुन, तुम बहुत हैंडसम हो।”
मैं शर्मा गया। “धन्यवाद राधा जी,” मैंने कहा।
“मुझे राधा जी मत कहो, बस राधा कहो,” उन्होंने कहा।
“ठीक है राधा,” मैंने कहा।
उस दिन रात को राधा ने मुझे खाने पर बुलाया। हम दोनों अकेले थे। नौकरों को छुट्टी दे दी गई थी। हम छत पर बैठकर खाना खा रहे थे।
राधा ने थोड़ी शराब पी थी और उनके चेहरे पर एक अजीब सी लाली थी। वह मुझे बार-बार देख रही थीं और मुस्कुरा रही थीं।
“अर्जुन, क्या तुम मुझे अकेली समझते हो?” राधा ने पूछा।
“क्या मतलब?” मैंने पूछा।
“मेरा मतलब है कि मैं अमीर हूँ, सुंदर हूँ, लेकिन मेरे अंदर एक खालीपन है जो कोई नहीं समझता,” राधा ने कहा।
मैं समझ गया। मैंने उनका हाथ पकड़ा और कहा, “राधा, मैं समझ सकता हूँ।”
राधा ने मेरे हाथ को कसकर पकड़ लिया। उनकी आँखों में आँसू थे। “मेरे पति मुझे समय नहीं देते। मैं अकेली हूँ अर्जुन,” उन्होंने कहा।
मैंने उन्हें गले लगा लिया। वह मेरी बाहों में रोने लगीं। मैंने उनके बालों को सहलाया। धीरे-धीरे उनका रोना बंद हुआ और वह मेरी बाहों में शांत हो गईं।
उस रात राधा ने मुझे रुकने के लिए कहा। मैं हवेली में ही रुक गया। रात को जब मैं अपने कमरे में लेटा हुआ था, तो दरवाज़े पर हल्की सी आहट हुई।
मैंने दरवाज़ा खोला तो राधा खड़ी थीं। उन्होंने एक हल्की नाइटी पहनी हुई थी जो पारदर्शी थी। उनका बदन उसमें से साफ झलक रहा था।
“क्या मैं अंदर आ सकती हूँ?” राधा ने पूछा।
“जी जरूर,” मैंने कहा।
राधा अंदर आईं और दरवाज़ा बंद कर दिया। वह मेरे पास आईं और मुझे देखने लगीं।
“अर्जुन, क्या तुम मुझे प्यार करते हो?” राधा ने पूछा।
“हाँ राधा, बहुत,” मैंने कहा।
राधा ने अपने हाथ मेरे सीने पर रखे। मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा। उन्होंने धीरे से अपने होंठ मेरे होंठों पर रखे।
वह मुझे चूमने लगीं। मैंने भी प्रतिक्रिया दी। हम दोनों एक-दूसरे को कसकर गले लगा लिए। राधा के स्तन मेरी छाती से दबे हुए थे।
“अर्जुन, मुझे आज वो दो जो मेरे पति नहीं दे पाते,” राधा ने कहा।
मैंने उन्हें उठाया और बिस्तर पर लिटा दिया।
राधा बिस्तर पर लेटी हुई थीं और मैं उनके ऊपर था। मैंने उनकी नाइटी उतार दी। वह नंगी हो गईं। उनका बदन चाँदनी में चमक रहा था।
उनके स्तन बहुत मोटे थे। गोल, भारी, और गुलाबी निप्पलों वाले। मैंने एक स्तन अपने हाथ में लिया और दबाया।
“ओह अर्जुन, बहुत मजा आ रहा है,” राधा ने कहा।
मैंने उस स्तन को अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। राधा की साँसें तेज़ हो गईं। मैंने दूसरे स्तन को भी चूसा। उनके दूध मेरे मुँह में भर गए।
“अर्जुन, और चूसो,” राधा ने कहा।
मैं उनके स्तनों को चूसता रहा। फिर मैं नीचे गया। उनकी बुर दिख गई। वह पूरी तरह से साफ शेव की हुई थी और गुलाबी रंग की थी। उनकी बुर की फाँकें बंद थीं।
“क्या सुंदर बुर है तुम्हारी,” मैंने कहा।
मैंने अपनी उँगली उनकी बुर पर रखी। वह पहले से ही गीली थी। मैंने धीरे से उँगली अंदर डाली। राधा की कमर उठ गई।
“ओह अर्जुन, और अंदर करो,” राधा ने कहा।
मैंने अपनी उँगली को अंदर-बाहर करना शुरू किया। राधा की बुर से पानी निकलने लगा था। फिर मैंने अपना मुँह उनकी बुर पर रख दिया।
“यह क्या कर रहे हो?” राधा ने शर्माते हुए पूछा।
“तुम्हारी बुर चाट रहा हूँ,” मैंने कहा।
मैंने अपनी जीभ निकाली और उनकी बुर पर लगाई। राधा की साँसें फूल गईं। मैंने उनकी बुर के दाने को चाटा। वह बहुत मोटा था।
“ओह हाँ, ऐसे ही,” राधा चिल्लाईं।
मैंने उनकी बुर को अपने होंठों से पकड़ा और चूसना शुरू कर दिया। मेरी जीभ उनकी चूत के अंदर-बाहर हो रही थी। राधा पागल हो रही थीं।
“मैं झड़ने वाली हूँ,” राधा ने कहा।
“झड़ जाओ,” मैंने कहा।
राधा झड़ गईं। उनकी बुर से पानी निकला और मैंने उसे पी लिया।
अब मैंने अपने कपड़े उतारे। मेरा लंड पूरी तरह से खड़ा था। राधा ने उसे देखकर चौंकीं।
“बाप रे, इतना बड़ा लंड?” राधा ने कहा।
“क्या तुम सहन कर पाओगी?” मैंने पूछा।
“कोशिश करती हूँ,” राधा ने कहा।
राधा उठकर बैठ गईं। उन्होंने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और सहलाया। फिर उन्होंने उसे अपने मुँह में ले लिया।
“ओह राधा, बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।
राधा मेरे लंड को चूसने लगीं। वह बहुत अनुभवी थीं। उन्होंने मेरे लंड के टोपे को जीभ से चाटा और फिर पूरा अंदर ले लिया।
“गला खोलो,” मैंने कहा।
राधा ने पूरी कोशिश की और मेरा आधा लंड अपने गले तक ले लिया। मैंने उनके सिर को पकड़ा और अपना लंड उनके मुँह में पेलना शुरू किया।
कुछ देर बाद मैंने अपना लंड बाहर निकाला। राधा लेट गईं और अपनी टाँगें फैला दीं।
“अब डालो अपना लंड,” राधा ने कहा।
मैंने अपने लंड को उनकी बुर के मुँह पर रखा और धीरे से धक्का लगाया। मेरा लंड का टोपा अंदर चला गया। राधा की साँसें फूल गईं।
“ओह, बहुत मोटा है,” राधा ने कहा।
मैंने थोड़ा और धक्का लगाया और आधा लंड अंदर चला गया। राधा की बुर बहुत टाइट थी।
“थोड़ा रुको,” राधा ने कहा।
मैंने रुककर उनके स्तनों को सहलाया। फिर मैंने एक जोर का धक्का लगाया और पूरा लंड अंदर घुसा दिया।
“आह!” राधा चीखीं।
मैंने रुककर उनके होंठों पर चूमा। फिर मैंने अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया।
मैं राधा को बिस्तर पर चोद रहा था। बिस्तर की चरपराहट गूँज रही थी। राधा की बुर से आवाज़ें आ रही थीं – “फच्… फच्… फच्…”
“ओह अर्जुन, बहुत मजा आ रहा है,” राधा चिल्लाईं, “और जोर से चोदो।”
मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी। मैं जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। राधा की टाँगें हवा में थीं और मैं उनके बीच में था।
“तुम्हारी बुर बहुत टाइट है,” मैंने कहा।
“और तुम्हारा लंड बहुत मोटा है,” राधा ने कहा।
मैंने लगभग तीस मिनट तक उन्हें बिस्तर पर चोदा। राधा दो बार झड़ चुकी थीं। अब मैं झड़ने वाला था।
“मैं झड़ने वाला हूँ,” मैंने कहा।
“अंदर ही निकालो,” राधा ने कहा।
मैंने जोर से धक्के लगाए और अपना सारा वीर्य राधा की बुर में छोड़ दिया। वह गरम-गरम वीर्य उनकी बुर में भर गया। मैं थककर उनके ऊपर गिर पड़ा।
अगली सुबह जब मैं उठा तो राधा पहले से ही तैयार थीं। उन्होंने एक खास लाल रंग की साड़ी पहनी थी जो बहुत पारदर्शी थी।
“अर्जुन, आज मैं तुम्हें एक नई जगह पर चोदवाऊँगी,” राधा ने कहा।
“कहाँ?” मैंने पूछा।
“खाने की मेज़ पर,” राधा ने कहा।
हम खाने वाले कमरे में गए। वहाँ एक बड़ी लकड़ी की मेज़ थी। राधा ने अपनी साड़ी उतार दी। वह नंगी हो गईं। फिर वह मेज़ पर लेट गईं।
मैं उनके पास गया। उन्होंने अपनी टाँगें मेज़ के किनारे पर रख दीं। उनकी बुर मेज़ के ऊपर थी।
मैंने अपना लंड उनकी बुर पर रखा और धक्का लगाया। मेरा लंड आसानी से अंदर चला गया क्योंकि अब उनकी बुर थोड़ी खुल चुकी थी।
“ओह, इस पोजीशन में और भी मजा आ रहा है,” राधा ने कहा।
मैं खड़े होकर उन्हें चोद रहा था। मेरे धक्के जोरदार थे। राधा की कमर मेज़ पर टिकी हुई थी।
“मेरे दूध पकड़ो,” राधा ने कहा।
मैंने झुककर उनके स्तनों को पकड़ लिया। मैं उन्हें दबाते हुए चोद रहा था।
“ओह हाँ, ऐसे ही,” राधा चिल्लाईं, “मेज़ पर फाड़ दो मेरी बुर को।”
मैंने और जोर से धक्के लगाए। मेज़ हिल रही थी। राधा की बुर से पानी निकल रहा था।
“मैं झड़ने वाली हूँ,” राधा ने कहा।
“मैं भी,” मैंने कहा।
हम दोनों एक साथ झड़ गए। मैंने अपना माल उनकी बुर में छोड़ दिया।
दोपहर को जब बहुत गर्मी थी, तो हम छत पर गए। वहाँ हवा चल रही थी।
“आज खड़े-खड़े चुदाई करते हैं,” राधा ने कहा।
राधा दीवार के पास गईं और अपने हाथ दीवार पर रखे। उन्होंने अपनी टाँगें थोड़ी फैला दीं और अपनी कमर पीछे को उठा दी। उनकी गोरी गांड और बुर दिख रही थी।
मैं उनके पीछे गया। मैंने अपना लंड उनकी बुर पर रखा और एक जोर का धक्का लगाया। मेरा पूरा लंड एक ही बार में अंदर चला गया।
“ओह, बहुत अंदर चला गया,” राधा ने कहा।
मैंने उनकी कमर पकड़ी और जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। राधा दीवार से सटी हुई थीं और मैं उन्हें पीछे से चोद रहा था।
“ओह हाँ, ऐसे ही चोदो,” राधा चिल्लाईं, “पीछे से फाड़ दो मेरी बुर को।”
मैंने और जोर से धक्के लगाए। राधा के स्तन हिल रहे थे। मैंने एक हाथ से उन्हें पकड़ लिया।
“मेरे दूध दबाओ,” राधा ने कहा।
मैंने झुककर उनके स्तनों को पकड़ लिया और चोदते हुए उन्हें दबाने लगा।
“मैं झड़ने वाली हूँ,” राधा ने कहा।
“मैं भी,” मैंने कहा।
हम दोनों एक साथ झड़ गए।
शाम को राधा ने कहा, “आज मैं तुम्हारी गोद में बैठकर चुदवाऊँगी।”
हम बिस्तर पर आए। मैं बैठ गया और राधा मेरी गोद में आकर बैठ गईं। उन्होंने अपनी टाँगें मेरे दोनों तरफ फैला दीं।
मैंने अपना लंड उनकी बुर में डाला। वह मेरी गोद में थीं और मैं उन्हें चोद रहा था।
“ओह, इस पोजीशन में तुम्हारा लंड बहुत अंदर जा रहा है,” राधा ने कहा।
मैंने उनकी कमर पकड़ी और उन्हें ऊपर-नीचे उछालने लगा। राधा के स्तन मेरे चेहरे के सामने थे। मैंने उन्हें चूसना शुरू कर दिया।
“ओह हाँ, दूध चूसो,” राधा ने कहा।
मैं उनके स्तनों को चूसता रहा और उन्हें ऊपर-नीचे उछालता रहा। राधा की बुर मेरे लंड को कस रही थी।
“बहुत मजा आ रहा है,” राधा ने कहा।
मैंने और जोर से उछालना शुरू किया। राधा की चीखें निकल रही थीं।
कुछ दिनों तक हम दोनों रोज़ चुदाई करते रहे। एक दिन राधा ने कहा, “अर्जुन, मुझे एक बात कहनी है।”
“क्या?” मैंने पूछा।
“मुझे एक लंड से मन नहीं भरता,” राधा ने कहा, “मैं और मजा चाहती हूँ।”
“क्या मतलब?” मैंने पूछा।
“मैं चाहती हूँ कि और भी लंड मुझे चोदें,” राधा ने कहा, “क्या तुम मेरी मदद करोगे?”
मैं समझ गया। “तुम चाहती हो कि मैं और लोगों को बुलाऊँ?”
“हाँ,” राधा ने कहा, “कम से कम उन्नीस और लंड चाहिए मुझे। तुम मिलाकर बीस लोगों से मेरी चुदाई करवाओ।”
मैंने सोचा और फिर कहा, “ठीक है, मैं व्यवस्था करता हूँ।”
मैंने गाँव में उन्नीस जवान लड़कों को चुना। वे सभी किसान, मजदूर, और नौकर थे। उनकी उम्र बीस से तीस साल के बीच थी। मैंने उन सबसे बात की और उन्हें राधा के बारे में बताया।
सभी राजी हो गए। राधा की सुंदरता के बारे में सबने सुना था और सब उसे चोदना चाहते थे।
मैंने राधा से कहा, “कल रात। हवेली में। तुम तैयार रहो।”
राधा बहुत उत्तेजित थीं। उन्होंने एक खास सफेद रंग की पारदर्शी साड़ी मंगवाई जिसमें से सब कुछ दिखता था।
रात को आठ बजे उन्नीस लड़के हवेली में आए। मैंने उन्हें छत पर ले जाया जहाँ एक बड़ा बिस्तर बिछाया गया था।
राधा आईं। उन्होंने वो सफेद साड़ी पहनी थी। सब लड़के उन्हें देखकर दंग रह गए। वह इतनी सुंदर थीं।
“यह राधा है,” मैंने कहा, “आज रात तुम सब इसे चोदोगे।”
राधा ने अपनी साड़ी उतार दी। वह नंगी हो गईं। उन्नीस लड़कों के सामने उनका गोरा बदन चमक रहा था।
“वाह, क्या माल है,” एक लड़का बोला।
“शांत रहो,” मैंने कहा, “एक-एक करके करोगे।”
पहले एक लड़का आगे आया। उसका लंड करीब सात इंच का था। राधा ने उसे बिस्तर पर लेटाया और उसके लंड को अपने मुँह में ले लिया।
“ओह, क्या मुँह है,” लड़का बोला।
राधा उसका लंड चूसने लगीं। फिर वह उस पर चढ़ गईं और अपनी बुर में उसका लंड डाल लिया।
“ओह, बहुत मजा आ रहा है,” लड़का बोला।
राधा ऊपर-नीचे उछलने लगीं। उनके स्तन हिल रहे थे। कुछ देर बाद लड़का झड़ गया।
अगला लड़का आया। उसने राधा को घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी बुर में लंड डाला।
“ओह, पीछे से भी बहुत मजा आता है,” राधा बोलीं।
एक-एक करके सभी लड़कों ने राधा को चोदा। कुछ ने बिस्तर पर, कुछ ने मेज़ पर, कुछ ने खड़े-खड़े, और कुछ ने अपनी गोद में बैठाकर।
मेज़ पर राधा को लेटाया गया। चार लड़के उसके चारों ओर खड़े थे। एक ने उसकी बुर में लंड डाला, दूसरे ने मुँह में, तीसरे ने हाथ में, और चौथे ने उसके स्तनों के बीच में अपना लंड रख दिया।
“ओह, चारों तरफ से मजा आ रहा है,” राधा चिल्लाईं।
चारों लड़के एक साथ धक्के लगा रहे थे। राधा की बुर, मुँह, और हाथ एक साथ चल रहे थे।
फिर राधा को खड़ा किया गया। वह दीवार से सटी हुई थीं। एक लड़के ने उनकी एक टाँग उठाई और अपना लंड बुर में डाला। दूसरे ने दूसरी टाँग उठाई और गांड में लंड डाला।
“ओह, दोनों छेदों में एक साथ,” राधा चीखीं।
दोनों लड़के एक साथ धक्के लगा रहे थे। राधा के मुँह में तीसरे लड़के का लंड था।
फिर राधा ने सबको अपनी गोद में बैठाकर चुदवाया। वह एक-एक करके हर लड़के की गोद में बैठीं और उनका लंड अपनी बुर में लेती गईं।
“ओह, हर किसी का लंड अलग मजा दे रहा है,” राधा बोलीं।
अंत में मेरी बारी आई। राधा थक चुकी थीं लेकिन फिर भी तैयार थीं।
“अर्जुन, तुमसे प्यार करती हूँ,” राधा ने कहा।
मैंने उन्हें अपनी गोद में बिठाया और अपना लंड उनकी बुर में डाला। वह मेरी गोद में थीं और मैं उन्हें चोद रहा था।
“ओह, तुम्हारा लंड सबसे अच्छा है,” राधा ने कहा।
मैंने और जोर से धक्के लगाए। राधा झड़ गईं और फिर मैं भी झड़ गया।
सभी उन्नीस लड़कों ने राधा को चोदा। उनकी बुर और गांड दोनों से वीर्य बह रहा था। राधा पूरी तरह से संतुष्ट थीं।
“बहुत मजा आया,” राधा ने कहा।
पर एक दिन मेरे हस्बैंड ने मुझे चुदते हुए देख लिया और फिर मुझे कॉलगर्ल बना दिया….. अगले पार्ट में पढ़े …
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wah radha ji mast
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