मैंने दादी की 4 लंड से गैंगबैंग चुदाई

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मैं इंदौर वापस आकर अपनी पढ़ाई में लग गया, लेकिन मेरा मन हर वक्त दादी की यादों में खोया रहता था।

उनके मोटे दूध, उनकी गुलाबी बुर, और उनकी मोटी गांड की याद मुझे रातों को नींद नहीं आने देती थी।

मैंने दादी से फोन पर बात करना जारी रखा और हर बातचीत में हम दोनों एक-दूसरे को याद करते थे।

{अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी है की दादी मस्ती के साथ मुझसे चुदवाई तो पढ़ ले ताकि आप ज्यादा मजा ले सकें}

तीन महीने बीत गए। मेरी छुट्टियाँ फिर से शुरू होने वाली थीं। इस बार मैंने सोचा कि क्यों ना दादी के लिए कुछ खास किया जाए।

मैंने सोचा कि दादी अकेली हैं और उन्हें और मजा दिलाया जा सकता है।

मेरे दोस्त अमित, विकास और सुरेश भी मुझसे दादी के बारे में पूछते रहते थे क्योंकि मैंने उन्हें बताया था कि मेरी दादी बहुत सुंदर हैं।

मैंने एक योजना बनाई। मैंने अपने तीनों दोस्तों को बुलाया और कहा, “भाइयों, मैं तुम्हें एक ऐसी जगह लेकर जा रहा हूँ जहाँ तुम्हें जन्नत का मजा मिलेगा।”

“क्या बात है राहुल?” अमित ने पूछा, “कुछ तो खास होगा।”

“मेरी दादी हैं ना,” मैंने कहा, “वो बहुत सुंदर हैं और उन्हें भी मजा चाहिए। तुम सब मिलकर उन्हें खुश करोगे।”

मेरे दोस्त पहले तो हैरान हुए, लेकिन फिर वे भी राजी हो गए।

हमने प्लान बनाया कि हम सब मोटरसाइकिल पर जाएँगे और दो दिन वहाँ रुकेंगे।

एक शुक्रवार की सुबह हम चारों मोटरसाइकिल पर निकल पड़े।

मैंने दादी को फोन करके बता दिया था कि मैं अपने दोस्तों के साथ आ रहा हूँ, लेकिन मैंने उन्हें पूरी योजना नहीं बताई थी। दोपहर को हम गाँव पहुँचे।

दादी ने हमें देखकर बहुत खुशी जताई। उन्होंने उस दिन एक हल्की पीली साड़ी पहनी हुई थी जो उनके गेहुँआने बदन पर बहुत सुंदर लग रही थी।

उनका ब्लाउज थोड़ा टाइट था और उनके मोटे स्तन बाहर को निकले हुए थे। मेरे दोस्त दादी को देखकर ही दंग रह गए।

“यह तुम्हारी दादी हैं?” विकास ने मुझसे धीरे से पूछा।

“हाँ,” मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “कैसी लगीं?”

“बहुत मस्त हैं,” सुरेश ने कहा, “उम्र कितनी है इनकी?”

“साठ की हैं,” मैंने कहा, “लेकिन देखने में कम लगती हैं।”

दादी ने हमारे लिए खाना बनाया। खाते समय मेरे दोस्त बार-बार दादी को देख रहे थे।

दादी भी समझदार थीं, उन्हें पता चल गया कि ये लड़के उन्हें कैसी नजरों से देख रहे हैं।

शाम को जब मैं दादी से अकेले में मिला, तो मैंने उन्हें सब कुछ बता दिया। “दादी, मैंने इन दोस्तों को इसलिए बुलाया है क्योंकि मैं चाहता हूँ कि आपको और मजा मिले। एक से ज़्यादा लंड से आपकी प्यास बुझेगी।”

दादी पहले तो शर्माईं, लेकिन फिर उन्होंने कहा, “बेटा, तू जो चाहे वो कर। मैं तैयार हूँ। मुझे भी जानना है कि एक साथ कई लंड लेने में कैसा मजा आता है।”

मैंने अपने दोस्तों को बुलाया और उन्हें दादी के सामने परिचय कराया। “भाइयों, आज रात हम सब मिलकर दादी की सेवा करेंगे।”

मेरे दोस्त बहुत उत्तेजित हो गए।

अमित ने कहा, “दादी जी, हम आपको बहुत मजा देंगे।”

दादी ने शरमाते हुए कहा, “देखो बेटा, मेरी उम्र हो गई है, लेकिन मेरे अंदर अभी भी जोश है। तुम सब मिलकर मेरी प्यास बुझाना।”

रात के करीब ग्यारह बजे थे। हमने छत पर एक बड़ा बिस्तर बिछाया था।

दादी ने एक खास लाल रंग की साड़ी पहनी थी जो बहुत पारदर्शी थी।

उनका बदन उसमें से साफ झलक रहा था। मेरे चारों दोस्त नंगे हो चुके थे और उनके लंड खड़े हो रहे थे।

अमित का लंड सबसे मोटा था, करीब नौ इंच लंबा और काफी मोटा। विकास का लंड थोड़ा झुका हुआ था लेकिन बहुत कड़क।

सुरेश का लंड मेरे जैसा ही था, साढ़े आठ इंच का। और मेरा लंड भी पूरी तरह से खड़ा था।

दादी हम सबको देखकर मुस्कुराईं। “वाह बेटा, सबके लंड बहुत मस्त हैं,” उन्होंने कहा, “आज तो मेरी बुर और गांड दोनों की खुशी हो जाएगी।”

मैंने कहा, “दादी, पहले आप अपने कपड़े उतारो।”

दादी ने धीरे-धीरे अपनी साड़ी खोलनी शुरू की। वह एक-एक करके पल्लू खोलती गईं।

फिर उन्होंने अपना ब्लाउज उतार दिया। उनके मोटे स्तन बाहर आ गए। उनके निप्पल कड़क हो रहे थे।

“वाह दादी जी,” अमित ने कहा, “क्या मस्त मम्मे हैं आपके।”

दादी ने मुस्कुराते हुए अपनी ब्रा भी खोल दी। उनके स्तन पूरी तरह से नंगे हो गए।

फिर उन्होंने अपनी पेटीकोट उतारी। अंदर वह पैंटी में थीं। वह भी उतार दीं।

अब दादी पूरी तरह से नंगी थीं। उनका बदन चाँदनी में चमक रहा था।

उनके बुर के बाल सफेद थे लेकिन झड़े हुए थे। उनकी चूत की फाँकें गुलाबी थीं और गीली लग रही थीं।

“आओ बेटा,” दादी ने कहा, “आज मेरी सारी हदें पार कर दो।”

हम चारों दादी के पास गए। अमित पहले उनके पास पहुँचा और उनके स्तनों को पकड़ लिया। “दादी जी, इतने मोटे मम्मे,” उसने कहा।

दादी ने अमित का लंड पकड़ा और सहलाने लगीं। “बेटा, तेरा लंड तो बहुत मोटा है।”

विकास और सुरेश दादी की पीछे गए। विकास ने दादी की गांड को सहलाया और सुरेश ने उनकी बुर पर हाथ फेरा।

मैं दादी के सामने खड़ा था और उनका चेहरा देख रहा था।

“ओह बेटा, चारों तरफ से मजा आ रहा है,” दादी ने कहा।

अमित ने दादी के एक स्तन को अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगा।

वह जोर-जोर से चूस रहा था और दादी के निप्पल को काट रहा था। दादी की साँसें तेज़ हो गईं।

विकास ने दादी की गांड के छेद पर अपनी उँगली रखी और धीरे से अंदर डाल दी।

दादी चौंकीं लेकिन मुस्कुराईं। “ऐसे ही बेटा, और अंदर करो।”

सुरेश ने दादी की बुर में दो उँगलियाँ डाल दीं। वह अंदर-बाहर करने लगा। दादी की बुर गीली हो चुकी थी और उसमें से पानी निकलने लगा था।

मैंने अपना लंड दादी के मुँह के सामने कर दिया। “चूसो दादी,” मैंने कहा।

दादी ने मेरा लंड अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया।

वह बहुत अनुभवी थीं। उनके गरम होंठ मेरे लंड को चूस रहे थे।

“ओह दादी, बहुत मजा आ रहा है,” मैंने कहा।

अमित दादी के दूसरे स्तन को चूस रहा था।

विकास ने अपनी उँगली दादी की गांड से बाहर निकाली और अपना लंड उनकी गांड पर रख दिया।

“दादी जी, मैं डालूं?” विकास ने पूछा।

“हाँ बेटा, डाल दे,” दादी ने कहा, “लेकिन धीरे से, मेरी गांड पहली बार मरवा रही है इतने मोटे लंड से।”

विकास ने धीरे से धक्का लगाया। उसका लंड का टोपा दादी की गांड में चला गया।

दादी की साँसें फूल गईं लेकिन उन्होंने मेरा लंड मुँह से बाहर नहीं निकाला।

“और अंदर करो बेटा,” दादी ने कहा।

विकास ने एक जोर का धक्का लगाया और उसका पूरा लंड दादी की गांड में चला गया।

दादी की आँखें बड़ी हो गईं लेकिन वह मुस्कुरा रही थीं।

“बहुत मजा आ रहा है,” दादी ने कहा।

सुरेश ने भी अपना लंड दादी की बुर में डाल दिया। अब दादी की बुर और गांड दोनों में लंड थे। वह बीच में थीं और मेरा लंड चूस रही थीं। अमित उनके स्तन चूस रहा था।

“ओह हाँ, ऐसे ही करो,” दादी चिल्लाईं, “चारों मिलकर मुझे चोदो। मेरी हर छेद को भर दो।”

विकास और सुरेश ने धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया। दादी की बुर और गांड दोनों से आवाज़ें आ रही थीं। मैंने भी अपना लंड उनके मुँह में जोर से डाल दिया।

“ओह बेटा, बहुत अंदर जा रहा है,” दादी ने कहा।

अमित ने दादी के स्तनों को छोड़कर अपना लंड उनके हाथ में दे दिया। दादी ने एक हाथ से अमित का लंड सहलाना शुरू किया और दूसरे हाथ से सुरेश की गांड सहला रही थीं।

हम चारों मिलकर दादी को चोद रहे थे। वह बीच में थीं और हर तरफ से मजा ले रही थीं। उनका शरीर पसीने में तर था और वह पूरी तरह से उत्तेजित थीं।

“और जोर से करो,” दादी ने कहा, “मुझे फाड़ दो अपने लंडों से।”

विकास ने दादी की गांड में जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। उसके लंड से दादी की गांड की आवाज़ आ रही थी। सुरेश भी दादी की बुर में पूरा लंड डालकर चोद रहा था।

मैंने दादी के मुँह से अपना लंड बाहर निकाला और कहा, “दादी, अब मैं भी आपकी बुर में आता हूँ।”

मैंने सुरेश को रुकने का इशारा किया। सुरेश ने अपना लंड बाहर निकाल लिया। मैंने दादी की बुर में अपना लंड डाल दिया। वह पहले से ही गीली थी और मेरा लंड आसानी से अंदर चला गया।

“ओह राहुल, तेरा लंड तो इन सबसे अच्छा है,” दादी ने कहा।

मैंने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। अब मैं दादी की बुर में था और विकास उनकी गांड में। हम दोनों एक साथ धक्के लगा रहे थे। दादी की चीखें निकल रही थीं।

“मेरी बुर फट जाएगी,” दादी ने कहा, “लेकिन बहुत मजा आ रहा है।”

अमित और सुरेश दादी के स्तन चूस रहे थे। वह दोनों एक-एक स्तन को अपने मुँह में लेकर चूस रहे थे। दादी के निप्पल कड़क हो गए थे।

कुछ देर बाद विकास ने कहा, “मैं झड़ने वाला हूँ।”

“अंदर ही निकाल दे बेटा,” दादी ने कहा।

विकास ने जोर से धक्के लगाए और अपना सारा माल दादी की गांड में छोड़ दिया। फिर उसने अपना लंड बाहर निकाला। दादी की गांड से वीर्य बहने लगा।

अब मैं दादी की बुर में था। मैंने भी जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। दादी की बुर बहुत टाइट थी और मेरे लंड को कस रही थी।

“ओह दादी, आपकी बुर बहुत मस्त है,” मैंने कहा।

“चोद मुझे बेटा,” दादी ने कहा, “पूरा माल मेरी बुर में छोड़ दे।”

मैंने और जोर से चोदना जारी रखा। अमित और सुरेश अब दादी के पास आ गए थे। उन्होंने अपने लंड दादी के हाथों में दे दिए। दादी दोनों लंडों को एक साथ सहला रही थीं।

कुछ ही देर में मैं झड़ गया। मैंने अपना सारा माल दादी की बुर में छोड़ दिया। वह गरम-गरम वीर्य उनकी चूत में भर गया। मैंने अपना लंड बाहर निकाला।

अब दादी की बुर और गांड दोनों से वीर्य बह रहा था। लेकिन वह अभी भी उत्तेजित थीं।

“अभी तो मजा शुरू हुआ है,” दादी ने कहा, “अब तुम तीनों मिलकर मुझे और चोदो।”

अमित ने कहा, “दादी जी, मैं आपकी बुर चाटना चाहता हूँ।”

दादी लेट गईं और अपनी टाँगें फैला दीं। उनकी बुर से मेरा और विकास का वीर्य बह रहा था। अमित ने अपना मुँह दादी की बुर पर रख दिया और चूसना शुरू कर दिया।

“ओह बेटा, वो क्या कर रहा है?” दादी ने कहा।

“आपका रस पी रहा हूँ दादी जी,” अमित ने कहा।

अमित ने दादी की बुर को अपनी जीभ से चाटना शुरू किया। वह मेरे और विकास के वीर्य को चूस रहा था और दादी की चूत का रस भी पी रहा था। दादी बहुत उत्तेजित हो गईं।

सुरेश ने दादी के स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें दबाने लगा। मैंने दादी के मुँह में अपना लंड डाल दिया जो फिर से खड़ा हो गया था।

“चूसो दादी,” मैंने कहा।

दादी ने मेरा लंड चूसना शुरू कर दिया। वह अब पूरी तरह से वेश्या बन चुकी थीं। उन्हें चार लंडों से चुदवाने का बहुत मजा आ रहा था।

अमित ने दादी की बुर चाटकर साफ कर दी। अब वह फिर से चुदने के लिए तैयार थी। अमित ने अपना मोटा लंड दादी की बुर के मुँह पर रखा।

“दादी जी, मेरा लंड बहुत मोटा है,” अमित ने कहा, “सहन कर पाओगी?”

“डालो बेटा,” दादी ने कहा, “मैं तैयार हूँ।”

अमित ने धीरे से धक्का लगाया। उसका लंड बहुत मोटा था। दादी की बुर फैल गई और लंड अंदर चला गया। दादी की चीख निकल गई।

“ओह, फाड़ दिया,” दादी ने कहा।

अमित ने धीरे-धीरे अपने लंड को अंदर-बाहर करना शुरू किया। दादी को धीरे-धीरे मजा आने लगा। वह अपनी कमर उठा-उठाकर अमित का साथ देने लगीं।

सुरेश ने अपना लंड दादी के मुँह में डाल दिया। अब दादी की बुर में अमित का लंड और मुँह में सुरेश का लंड था। मैं और विकास उनके स्तनों और बाकी जगहों को चूस रहे थे।

“ओह हाँ, ऐसे ही,” दादी चिल्लाईं, “दो लंड एक साथ। बहुत मजा आ रहा है।”

अमित ने अपनी स्पीड बढ़ा दी। वह जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। दादी की बुर से आवाज़ें आ रही थीं। सुरेश भी दादी के मुँह में अपना लंड पेल रहा था।

कुछ देर बाद अमित ने कहा, “मैं झड़ने वाला हूँ।”

“अंदर निकालो बेटा,” दादी ने कहा।

अमित ने जोर से धक्के लगाए और अपना सारा माल दादी की बुर में छोड़ दिया। उसका वीर्य बहुत गाढ़ा था और दादी की चूत भर गई।

अमित ने अपना लंड बाहर निकाला। सुरेश ने भी अपना लंड दादी के मुँह से बाहर निकाला और उनकी बुर में डाल दिया।

“अब मेरी बारी है,” सुरेश ने कहा।

सुरेश ने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। दादी की बुर अब पूरी तरह से खुली हुई थी और वीर्य से भरी हुई थी। सुरेश का लंड आसानी से अंदर-बाहर हो रहा था।

“ओह बेटा, बहुत अच्छा कर रहा है,” दादी ने कहा।

मैंने दादी के स्तनों को चूसना शुरू कर दिया। विकास ने दादी की गांड को सहलाया और फिर उसमें अपनी दो उँगलियाँ डाल दीं।

“ओह, गांड में भी चाहिए,” दादी ने कहा।

विकास ने अपना लंड दादी की गांड में डाल दिया। अब दादी की बुर में सुरेश का लंड और गांड में विकास का लंड था। दोनों एक साथ धक्के लगा रहे थे।

“मेरी बुर और गांड दोनों फट जाएंगी,” दादी चिल्लाईं, “लेकिन बहुत मजा आ रहा है।”

हमने पोजीशन बदली। दादी को घोड़ी बनाया गया। सुरेश उनकी बुर में लेटकर अंदर-बाहर कर रहा था और विकास उनकी गांड में पीछे से। मैं दादी के मुँह में अपना लंड डालकर चूसवा रहा था। अमित उनके नीचे लेटकर उनके स्तनों को चूस रहा था।

“ओह हाँ, चारों तरफ से चुदवा रही हूँ,” दादी ने कहा, “यही तो मुझे चाहिए था।”

हम चारों मिलकर दादी को चोद रहे थे। उनका शरीर पसीने और वीर्य से तर था। वह पूरी तरह से संतुष्ट दिख रही थीं।

कुछ देर बाद सुरेश और विकास एक साथ झड़ गए। उन्होंने अपना सारा माल दादी की बुर और गांड में छोड़ दिया। दादी भी झड़ गईं। उनका पानी सुरेश के लंड पर निकला।

अब मेरा लंड दादी के मुँह में था। मैंने जोर से उनके मुँह में धक्के लगाने शुरू किए। दादी ने मेरे लंड को गले तक ले लिया।

“ओह दादी, आप तो बहुत अच्छा चूसती हैं,” मैंने कहा।

दादी ने मेरे लंड को और गहराई तक लिया। उनका गला मेरे लंड को कस रहा था। मैंने जोर से धक्के लगाए और अपना सारा माल उनके मुँह में छोड़ दिया।

दादी ने मेरा सारा वीर्य पी लिया। उन्होंने एक भी बूँद बर्बाद नहीं होने दी। फिर उन्होंने मेरे लंड को चूसकर साफ किया।

हम सब थोड़ी देर आराम करने लगे। दादी ने हम सबके लिए शरबत बनाया। हमने शरबत पिया और फिर से तैयार हो गए।

“अब क्या करें दादी जी?” अमित ने पूछा।

“अब मैं तुम सबको एक-एक करके चूसना चाहती हूँ,” दादी ने कहा।

दादी पहले अमित के पास गईं। उन्होंने उसका लंड अपने हाथ में लिया और सहलाया। फिर उन्होंने उसे अपने मुँह में ले लिया और चूसना शुरू कर दिया। अमित का लंड फिर से खड़ा हो गया था।

दादी बहुत अनुभवी तरीके से चूस रही थीं। वह अमित के लंड के टोपे को जीभ से चाट रही थीं और फिर पूरा अंदर ले रही थीं। अमित की आँखें बंद हो गईं।

“ओह दादी जी, बहुत मजा आ रहा है,” अमित ने कहा।

दादी ने अमित के अंडकोश भी चूसे। फिर वह विकास के पास गईं और उसका लंड चूसने लगीं। वह एक-एक करके हम सबके लंड चूस रही थीं।

मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था। दादी ने मेरा लंड भी चूसा और फिर कहा, “अब मैं तुम सबसे एक साथ चुदना चाहती हूँ।”

हमने दादी को बिस्तर पर लेटाया। मैं उनकी बुर में आया, अमित उनकी गांड में, और विकास और सुरेश उनके मुँह में बारी-बारी से। हम चारों मिलकर दादी को चोद रहे थे।

“ओह हाँ, ऐसे ही,” दादी चिल्लाईं, “मुझे फाड़ दो।”

मैंने जोर-जोर से धक्के लगाने शुरू किए। दादी की बुर अब पूरी तरह से खुली हुई थी और वीर्य से भरी हुई थी। लेकिन फिर भी टाइट थी।

हम सब बहुत उत्तेजित थे। हमने अपनी स्पीड बढ़ा दी। दादी की चीखें गूँज रही थीं। वह पूरी तरह से पागल हो चुकी थीं।

“मैं झड़ने वाली हूँ,” दादी ने कहा, “सब एक साथ झड़ जाओ।”

हम सबने और जोर से धक्के लगाए। एक साथ हम सब झड़ गए। मैंने दादी की बुर में, अमित ने गांड में, और विकास ने मुँह में अपना माल छोड़ दिया। दादी भी झड़ गईं।

हम सब एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े। दादी की साँसें फूल रही थीं लेकिन उनके चेहरे पर संतुष्टि की मुस्कान थी।

“बहुत मजा आया बेटा,” दादी ने कहा, “तुम चारों ने मेरी सारी प्यास बुझा दी।”

हम सबने आराम किया। फिर हमने दादी को साफ किया। उनकी बुर और गांड से वीर्य बह रहा था। हमने उन्हें गरम पानी से धोया।

अगली सुबह जब मैं उठा तो दादी पहले से ही जाग चुकी थीं। उन्होंने नहा लिया था और ताज़ी साड़ी पहनी थी। वह बहुत खुश दिख रही थीं।

“कैसी हैं दादी?” मैंने पूछा।

“बहुत अच्छा महसूस कर रही हूँ बेटा,” दादी ने कहा, “रात बहुत मजा आया।”

मेरे दोस्त भी उठ चुके थे। हमने नाश्ता किया और फिर दादी ने हम सबके सामने अपनी साड़ी उठा दी।

“एक बार और कर लो बेटा,” दादी ने कहा, “फिर तुम लोग चले जाना।”

हम चारों फिर से तैयार हो गए। इस बार हमने दादी को खड़ा करके चोदा। मैंने उनकी बुर में लंड डाला और अमित ने गांड में। विकास और सुरेश उनके स्तन चूस रहे थे।

“ओह हाँ, खड़े-खड़े चुदवा रही हूँ,” दादी ने कहा, “बहुत मजा आ रहा है।”

हमने जोर-जोर से धक्के लगाए। दादी की कमर हमारे साथ मिल रही थी। कुछ ही देर में हम सब झड़ गए।

दोपहर को हम चारों वापस जाने के लिए तैयार हुए। दादी ने हम सबको गले लगाया और हमारे लंडों को सहलाया।

“फिर आना बेटा,” दादी ने कहा, “मैं तुम्हारा इंतजार करूँगी।”

“जरूर दादी,” मैंने कहा, “अगली बार और दोस्तों को लाऊँगा।”

दादी मुस्कुराईं और कहा, “जितने लाओगे, उतना मजा आएगा।”

हम मोटरसाइकिल पर बैठकर निकल पड़े। पीछे मुड़कर देखा तो दादी हाथ हिला रही थीं। मैंने सोचा कि अगली बार और दोस्तों को लेकर आऊँगा और दादी की और ज़्यादा चुदाई करवाऊँगा।

हम गाँव से बाहर निकल गए। मेरे दोस्त बहुत खुश थे। अमित ने कहा, “राहुल, तुम्हारी दादी बहुत मस्त हैं।”

“हाँ,” मैंने कहा, “अगली बार और मजा दिलवाएँगे।”

हम सब हँसने लगे और अपने रास्ते पर चल पड़े।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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