छुट्टियों में चाची, भाभी और बहन को चोदा

chachi bhabhi bahan chudai kahani

मेरा नाम किशन है।

मैं 19 साल का हूँ और यह कहानी उस वक्त की है जब मैंने अपने गाँव की छुट्टियों में अपनी बहन, भाभी और चाची को चोदा।

मेरी फैमिली में माताजी, पिताजी, मैं और मेरी बहन नीहा है, जो मुझसे दो साल छोटी है।

उम्र का फासला कम होने से मैं और नीहा काफी करीब हैं — भाई-बहन के बजाय दोस्त की तरह।

बचपन से ही हम एक-दूसरे के साथ खुलकर बातें करते हैं और अपनी बातें बताते हैं।

पिताजी बड़े शहर में हाई स्कूल में टीचर हैं।

साल में दो बार वेकेशन में हम सब अपने गांव जाते हैं।

उधर हमारा एक कजिन था, आमिर, 24 साल का।

आमिर की पत्नी रुबी 22 साल की थी। वो बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी थी।

उसका फिगर 36-30-38 था और वो हर कपड़े में मस्त लगती थी।

मेरे पिताजी के छोटे भाई श्याम, यानी मेरे चाचा, उनकी पत्नी रिहाना चाची 35 साल की थीं।

रिहाना चाची बहुत ही गजब की माल थीं। उनका फिगर 38-32-40 था और वो अपनी उम्र से कम लगती थीं।

उनकी कोई संतान नहीं थी इसलिए वो हमेशा उदास रहती थीं।

हर साल की तरह मई के महीने में हम सब अपने गांव गए हुए थे।

कड़ी धूप पड़ रही थी और दोपहर का खाना खाकर सब सोए हुए थे।

मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैंने देखा कि नीहा भी सोई नहीं थी।

नीहा ने कहा, “चलो भैया, रुबी भाभी के घर चलें। ताश खेलेंगे।”

हम दोनों आमिर के घर गए।

रुबी कुछ काम कर रही थी, आमिर दिखाई नहीं दे रहा था।

मैंने पूछा, “भैया नहीं हैं? कहां गए?”

रुबी ने कहा, “क्यों? मैं नहीं हूं क्या? भैया बिना नहीं चलेगा?”

नीहा ने कहा, “क्यों नहीं चलेगा? हम तो ताश खेलने की सोच रहे थे, इसी लिए पूछा।”

मैंने कहा, “इतनी धूप में कहां गए भैया?”

रुबी ने कहा, “और कहां? वो भले उनके खेत।”

कहते-कहते रुबी का चेहरा उदास हो गया।

नीहा ने कहा, “क्या है भाभी? उदास दिख रही हो, क्या बात है?”

रुबी ने कहा, “जाने भी दीजिए। ये तो हर रोज का मामला है। आप क्या करोगे?”

मैंने कहा, “बता तो सही। दिल हल्का हो जाएगा।”

रुबी की आंखें भर आईं।

मैं और नीहा चारपाई पर बैठे थे।

हमारे बीच जमीन पर वह बैठ गई और नीहा की गोद में सर रखकर रो पड़ी।

मैंने उसकी पीठ सहलाई और आश्वासन दिया। उसने सारी बात बताई।

हुआ ऐसा था कि आमिर उससे शादी के बाद से ही खुश नहीं था।

उसे शक था कि रुबी के पहले किसी और के साथ संबंध थे। बस तब से आमिर रुबी से खूब नाराज था।

नीहा ने कहा, “क्या सचमुच तूने पहले किसी के साथ कुछ किया था?”

रुबी ने कहा, “नहीं तो। मैं तो कुंवारी थी। लेकिन आमिर को शक है।”

मैंने पूछा, “अब क्या करते हैं भैया?”

रुबी ने कहा, “कुछ नहीं। सुबह होते ही खेत में चले जाते हैं और रात को आते हैं। खाना खाकर झट-पट सो जाते हैं। न बात, न चीत, कुछ नहीं।”

नीहा ने मेरी जांघ पर चपत लगाई और बोली, “भैया, तुम्हें तो डॉक्टर बनना है, तुम्हीं कुछ करो ना।”

रुबी का चेहरा शर्म से लाल हो गया।

नीहा ने फिर से रुबी को किस करना शुरू कर दिया।

मैं देखता ही रह गया। उनकी किस लंबी चली।

मेरे लौड़े में जान आने लगी।

चुंबन छोड़कर नीहा ने मेरा हाथ पकड़कर रुबी के स्तन पर रख दिए और बोली, “उस दिन तू कहता था न कि तुझे स्तन सहलाने का दिल हो जाता है, तो आज शुरू कर।”

मैंने रुबी के स्तन दबाने शुरू किए। वो बहुत मोटे-मोटे और नरम थे।

नीहा ने मेरा लंड टटोला। “आई, भाई का…का…उसको बहन नहीं छूती,” मैंने कहा।

जवाब दिए बिना नीहा फिर से रुबी को किस करने लगी और मेरे लंड को मुट्ठी में लेकर दबोच लिया।

मैंने एक हाथ रुबी के स्तन पर रखते हुए दूसरे से नीहा का स्तन पकड़ा और दबाया। इस बार उसने विरोध नहीं किया।

अचानक उसने सोनम का मुंह छोड़कर मेरे मुंह पर अपने होंठ टिका दिए।

ये मेरा पहला किस था। मेरे बदन में झुरझुरी फैल गई।

अब रुबी ने मेरा सर पकड़कर अपनी ओर खींचा और किस करने लगी। नीहा ने मेरा लंड फिर से पकड़ा और घिसने लगी।

मैंने जब नीहा की कुर्ती के बटन पर हाथ लगाए तब उसने मेरे हाथ झटक दिए और खुद ने कुरती खोल दी।

उसने ब्रा पहनी नहीं थी। उसके नंगे स्तन देखकर मैं ताज्जुब रह गया।

बड़े संतरे के साइज के उसके स्तन गोरे-गोरे थे।

नीहा ने कहा, “भैया, तुम मेरे पीछे आ जाओ,” कहकर नीहा रुबी की जांघ पर बैठ गई।

नाड़ी खोलकर उसने अपनी सलवार उतारी और आगे झुककर अपनी बुर से रुबी की बुर को रगड़ने लगी। मैंने पीछे से उसके स्तन पकड़े और घुटनों को मसलने लगा।

आगे झुकी हुई होने से उसके खुली हुई गांड मेरे सामने थी। मैंने झट से पजामे की नाड़ी खोलकर लंड बाहर निकाला और नीहा के चूतड़ के बीच घिसने लगा।

“अभी ठहरो जरा, भैया। तुम्हें पहले भाभी को चोदना है, मुझे बाद में,” कहकर वह जरा आगे सरकी।

रुबी ने जांघें चौड़ी कीं और मेरा लंड उसकी बुर तक पहुंच गया।

रुबी और नीहा काफी उत्तेजित हो गए थे। दोनों की बुर गीली-गीली हो गई थी।

एक हाथ से लंड पकड़कर मैंने लंड का मुट्ठा रुबी की चूत में डाल दिया। दूसरे हाथ से नीहा की क्लिटोरिस को टटोलता रहा।

एक धक्का जोर से लगाया कि लंड भाभी की चूत में उतर गया। रुबी ने जांघें ऊपर उठाकर सहारा दिया।

नीहा उसके ऊपर झुकी हुई किस करती रही थी। रुबी के हिप्स हिलने लगे और चूत में फट-फट-फटाके होने लगे।

मैंने धक्कों की रफ्तार बढ़ाई। रुबी जोर से झड़ पड़ी और शिथिल हो गई।

मैंने उसकी चूत का रस से गीला लंड निकाला।

नीहा ने अपने हिप्स थोड़े उठाए और थोड़ा पीछे की तरफ खिसकी।

अब लंड का मुट्ठा नीहा की योनि के मुंह में लग गया।

लेकिन रुबी की चूत और नीहा की चूत में काफी फर्क था।

जबकि भाभी की चूत में जाने में लंड को कोई तकलीफ नहीं हुई थी, नीहा के कुमारी होने से लंड जल्दी से घुसा नहीं।

अकेला मुट्ठा योनि पटल तक गया। मैंने थोड़ा लंड बाहर निकाला और फिर से डाला।

सी-सी आवाज करते हुए नीहा बोली, “फिकर मत करना भैया, डाल दो अपना लंड।”

मैंने एक इंच सा लंड को इस्तेमाल करते हुए दस बार धक्के लगाए और नीहा की चूत को चुदा होने दिया।

आखिर योनि पटल तोड़ना ही था। मैंने नीहा के चूतड़ पकड़े और एक जोर का धक्का लगाया।

योनि पटल तोड़कर लंड चूत में पैठा। नीहा के मुंह से चीख निकल गई।

मैं थोड़ी देर रुका लेकिन मेरा लंड थुमक-थुमक करता था और ज्यादा मोटा होकर चूत को भी ज्यादा चौड़ी करता था।

खुद नीहा ने कहा, “अब दर्द कम हो गया है, भैया, अब आराम से चोदिए।”

मैंने धीरे से धक्के लगाने शुरू किए। उधर आगे झुककर नीहा ने अपने स्तन रुबी के मुंह के पास रख दिए थे।

रुबी नीहा की निप्पलों को चाट रही थी और चूस रही थी।

उसका एक हाथ नीहा की क्लिटोरिस से खेल रहा था।

जब नीहा की चूत फट-फट करने लगी तब मैंने धक्कों की रफ्तार और गहराई बढ़ा दी।

नीहा ने कहा, “भैया, भाभी को भी मजा चखाते रहना।”

रुबी की चूत दूर कहां थी?

नीहा की चूत से निकालकर मैंने रुबी की चूत में लंड डाल दिया और चोदने लगा।

रुबी बोली, “देवर जी, मैं तो एक बार झड़ चुकी हूं। नीहा बहन का ख्याल रखिएगा।”

मैंने लंड निकालकर फिर से नीहा की चूत में डाला और चोदने लगा।

ऐसे चार-पांच बार चूत बदलते-बदलते मैंने उन दोनों को एक साथ चोदा।

आधे घंटे की चुदाई के बाद मैं रुबी की योनि में झड़ा। दरमियान नीहा एक बार और रुबी दो बार झड़ीं।

दोनों ने उठकर मेरा लंड साफ किया। नर्म होते हुए लंड को हाथ में पकड़कर नीहा ने पूछा, “भैया, एतराज न हो तो मैं… मुंह में लूं तुम्हारा लंड?”

मुझे क्या था? मैं चारपाई पर लेट रहा और नीहा ने लंड की टोपी खिसकाकर मुट्ठा खुला किया और जीभ से चाटा।

तुरंत ही लंड तन गया। मुंह में लेने के लिए नीहा को अपना मुंह पूरा खोलना पड़ा, फिर भी मुश्किल से वह लंड को मुंह में ले पाई।

जब लंड पैठा तब ताज्जुब से उसकी आंखें चौड़ी हो गईं।

लंड का मुट्ठा मुंह में ही पकड़े हुए उसने हाथ से लंड को घिसना शुरू किया। मेरे लंड से पानी छूटने लगा।

अपना सर हिलाकर नीहा लंड को अंदर-बाहर करने लगी, साथ-साथ जीभ से टटोलने लगी।

रुबी उसके पीछे बैठकर एक हाथ से स्तन सहलाती थी और दूसरे हाथ से क्लिटोरिस।

नीहा की उत्तेजना काफी बढ़ गई। तब मैंने लंड छुड़ाया और तेजी से उसे जमीन पर लिटा दिया।

उसने अपनी जांघें उठाईं और चौड़ी पकड़ रखी। खुली हुई बुर में मैंने झट से लंड डाल दिया और तेजी से उसे चोदने लगा।

दस-पंद्रह धक्कों में हम दोनों एक साथ झड़े।

“भैया, मुंह में लंड लेने की मजा चूत में लाने जैसा ही है। भाभी, तू भी ट्राई कर लेना,” नीहा ने कहा।

मैंने कहा, “अब मेरे लंड में चोदने की ताकत नहीं है।”

“देखूं तो,” कहकर रुबी ने मेरे नर्म लौड़े को मुंह में लिया और चूसने लगी।

थोड़ी देर लगी लेकिन लंड खड़ा तो हो ही गया। पंद्रह मिनट की एक और चुदाई हो गई।

रुबी ने आग्रह करके मुझे मुंह में झड़ाया। लंड ने जो वीर्य छोड़ा, यह सारा वो पी गई।

हम तीनों थके हुए थे। कपड़े पहनकर सो गए। शाम को जब हम उठे तो रिहाना चाची आईं। वो बहुत परेशान दिख रही थीं।

मैंने पूछा, “क्या हुआ चाची?”

रिहाना चाची ने कहा, “किशन, तुम्हारे चाचा तो दो दिन से घर नहीं आए। कहां गए हैं पता नहीं।”

नीहा ने कहा, “चाची, चाचा जी तो शहर गए हैं। काम से गए हैं, परसों आ जाएंगे।”

रिहाना चाची ने कहा, “अकेले रहने में बड़ा डर लगता है। क्या मैं आज रात यहीं रुक सकती हूँ?”

मैंने कहा, “जरूर चाची, आप यहीं रुकिए।”

रात को खाना खाने के बाद सब सो गए।

मैं, नीहा, रुबी और रिहाना चाची एक कमरे में थे क्योंकि घर में जगह की कमी थी।

रुबी और नीहा चारपाई पर लेटी थीं। मैं जमीन पर गद्दे पर था और रिहाना चाची मेरे पास ही एक दूसरे गद्दे पर लेटी थीं।

रात को करीब 12 बजे, रिहाना चाची मुझे जगाने आईं।

वो बोलीं, “किशन, मुझे नींद नहीं आ रही। बातें करो ना।”

मैं उठकर बैठ गया। रिहाना चाची भी बैठ गईं। अंधेरे में मैंने देखा कि चाची ने सिर्फ पेटीकोट और ब्लाउज पहना था।

उनके बड़े-बड़े स्तन ब्लाउज से बाहर निकलने को तरस रहे थे।

रिहाना चाची ने कहा, “किशन, तुम बड़े हो गए हो। तुम्हारे चाचा तो मुझे कभी संतुष्ट नहीं करते। तुम्हें पता है, मेरी शादी को 15 साल हो गए हैं और मैंने कभी मज़ा नहीं लिया।”

मैंने कहा, “चाची, आप क्या कह रही हैं?”

रिहाना चाची ने मेरा हाथ अपने स्तन पर रख दिया और कहा, “आज तुम मुझे चोदो। मैं तुम्हारी रंडी बनूंगी।”

मेरा लंड तुरंत खड़ा हो गया। मैंने चाची के स्तन दबाने शुरू किए।

वो मोटे-मोटे और नरम थे। रिहाना चाची ने मुझे किस करना शुरू कर दिया। उनकी जीभ मेरे मुँह में घुस गई।

इतने में नीहा और रुबी भी जाग गईं।

वो देखकर चौंकीं लेकिन फिर समझ गईं।

नीहा ने कहा, “वाह चाची, आप भी हमारे साथ शामिल हो गईं।”

रुबी ने कहा, “चाची, किशन का लंड बहुत मस्त है। आज आप भी मजा लीजिए।”

रिहाना चाची ने कहा, “तुम दोनों को पता है? तुम दोनों भी इससे चुदती हो?”

नीहा ने कहा, “हाँ चाची, हम तीनों रोज चुदाई करते हैं। आज आप भी हमारे साथ शामिल हो जाइए।”

रिहाना चाची ने अपना ब्लाउज उतार दिया। उनके बड़े-बड़े स्तन बाहर आ गए।

उनकी निप्पल बहुत बड़ी-बड़ी थीं। मैंने उन्हें पकड़कर चूसना शुरू कर दिया।

रुबी ने मेरा लंड बाहर निकाला और चूसने लगी।

नीहा ने रिहाना चाची की पेटीकोट उतार दी। चाची ने चूत में कुछ नहीं पहना था।

उनकी चूत बहुत बड़ी थी और उस पर घने बाल थे।

मैंने चाची की चूत में उंगली की। वो बहुत गीली थी।

रिहाना चाची कराह उठीं, “आह्ह… किशन… और अंदर डालो… मेरी चूत में आग लगी है…”

मैंने उन्हें लिटाया और अपना लंड उनकी चूत के मुँह पर रखा।

एक धक्के में पूरा लंड अंदर चला गया। चाची की चूत बहुत फैली हुई थी इसलिए आसानी से घुस गया।

“आह्ह… किशन… बहुत मज़ा आ रहा है… और चोदो… अपनी चाची को चोदो!” रिहाना चाची चीख रही थीं।

नीहा और रुबी एक-एक चूची चूस रही थीं। मैं चाची की चूत जोर-जोर से चोद रहा था।

“फच्च-फच्च-फच्च” की आवाजें कमरे में गूँज रही थीं।

करीब 20 मिनट तक चाची को चोदने के बाद मैंने अपना पानी उनकी चूत में छोड़ दिया। रिहाना चाची भी झड़ गईं।

अब मैंने कहा, “आज मैं तीनों को एक साथ चोदूँगा।”

फिर मैंने नीहा को लिटाया और उसकी चूत चोदी। रुबी ने मेरे मुँह में अपनी चूत रख दी और मैं उसे चाटने लगा। रिहाना चाची ने मेरी गांड में उंगली की।

इसके बाद मैंने रुबी को डॉगी स्टाइल में बिठाया और उसकी गांड मारी। नीहा उसके नीचे थी और उसकी चूत चाट रही थी। रिहाना चाची मेरे मुँह में अपनी चूत रखकर चुदवा रही थीं।

हम चारों ने पूरी रात चुदाई की। सुबह जब उठे तो सब के सब थके हुए थे लेकिन बहुत खुश थे।

रिहाना चाची ने कहा, “किशन, तुम तो बहुत मस्त लंड वाले हो। आज से मैं भी तुम्हारी रंडी हूँ। जब भी तुम्हारे चाचा घर न हों, मैं तुमसे चुदवाऊँगी।”

मैंने कहा, “जरूर चाची, मैं आपको हर रोज चोदूँगा।”

इसके बाद वेकेशन के बाकी दिनों में हम चारों ने मिलकर कई बार चुदाई का मजा लूटा।

कभी मैं नीहा को चोदता, कभी रुबी को, कभी रिहाना चाची को, और कभी तीनों को एक साथ।

एक दिन तो हमने खेत में भी चुदाई की।

रुबी, नीहा और रिहाना चाची तीनों ने मुझे खेत में घेर लिया और मुझसे एक-एक करके चुदवाया। मैंने तीनों की चूत और गांड की सील तोड़ी।

वेकेशन खत्म होने पर हम सब वापस शहर आ गए।

लेकिन मैं अब भी रुबी और रिहाना चाची से मिलता हूँ और उन्हें जमकर चोदता हूँ।

नीहा भी अब मेरी रंडी बन गई है और वो मुझसे हर रोज चुदवाती है।

यही मेरी जिंदगी है और इसमें मैं बहुत खुश हूँ।

मुझे अपनी बहन, भाभी और चाची तीनों को चोदने में बहुत मज़ा आता है।

तीनों की चूत और गांड अब मेरे लंड की गुलाम बन चुकी हैं।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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