driver bhabhi sex story
मेरा नाम निर्मला है। मैं 35 साल की एक गदराए बदन की खूबसूरत, सेक्सी और हॉट महिला हूँ।
मैं पढ़ी-लिखी हूँ, इंग्लिश फर्राटेदार बोलती हूँ और बोल्ड हूँ।
मुझे सेक्स का जबरदस्त शौक है। सेक्स ही मेरी ज़िन्दगी है।
आज मैं आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुना रही हूँ।
जब मैं यंग थी, तब खूब मस्ती किया करती थी।
अपनी फ्रेंड्स के साथ खूब एन्जॉय करती थी।
मुझे अश्लील बातें करने का बड़ा शौक था और आज भी है।
जब तक मेरे मुंह से लण्ड, बुर, चूत, भोसड़ा, बहनचोद, मादरचोद, भोसड़ी वाले नहीं निकलता, तब तक मुझे मज़ा नहीं आता था।
इन्हीं सब बातों से मैं अपने कॉलेज में बड़ी मशहूर हो गई थी और लड़के अक्सर मेरे आगे-पीछे घूमा करते थे।
मैं इतनी बोल्ड थी की मैं सेक्स करने का कोई भी मौका बर्बाद नहीं करती थी, बल्कि उसका पूरा-पूरा फायदा उठाती थी।
मुझे यह बताने में कोई शर्म नहीं है कि मैं शादी के पहले खूब चुदी हुई थी।
मुझे लण्ड पकड़ने का जबरदस्त शौक हो गया था।
शादी के बाद ही मैं दिल्ली चली आई और अपने पति के साथ रहने लगी।
इसी बीच मेरी तरक्की भी हो गयी। मेरा आना-जाना और बढ़ गया।
मैं अक्सर अपने ऑफिस के काम से गुरुग्राम जाने लगी।
वहां से मैं अक्सर बस से आना-जाना करती थी।
एक बार मेरी नज़र एक बस ड्राइवर पर पड़ी।
वह बस ड्राइवर मुझे बड़ा सेक्सी और हॉट लगा। उसे देखकर मेरी चूत में पानी आ गया।
मैंने उसे देखा – वह करीब 30 साल का जवान मर्द था, गोरा रंग, लंबा-चौड़ा बदन, और हाथों में इतनी ताकत कि स्टीयरिंग को जैसे प्यार से पकड़े हुए था। मैंने बस में चढ़ते वक्त उससे पूछा, “कहाँ तक जाएगी ये बस?”
वह मुड़कर मुझे देखा और बोला, “मैडम, ये बस गुरुग्राम तक जाएगी।”
मैंने कहा, “और क्या नाम है तुम्हारा?”
वह बोला, “श्याम है मेरा नाम। मैं इसी रूट पर 5 साल से बस चला रहा हूँ।”
मैंने कहा, “और क्या करते हो श्याम?”
उसने कहा, “सिर्फ बस ही चलाता हूँ मैडम।”
मुझे उसका गोरा, तंदुरुस्त बदन बड़ा अच्छा लग रहा था।
उसकी मस्त भुजाएं और चौड़ी छाती मेरा मन मोह रही थी। मैंने पूछा, “तेरी उम्र क्या है और आपकी शादी हुई कि नहीं?”
वह बोला, “मैं 30 साल का हूँ, जिम करता हूँ और अभी कुंवारा हूँ।”
यह सुनकर मेरी चूत, बुर चोदी चुलबुलाने लगी।
मैं बस में बैठी-बैठी उसके लण्ड के बारे में सोचने लगी।
मैंने अनुमान लगाया कि बन्दे का लण्ड बड़ा जबरदस्त होगा; मिल जाए तो मज़ा आ जाए!
मैं इसी उधेड़बुन में चली जा रही थी कि तभी अचानक बस एक स्टैंड पर रुक गयी।
मैंने पूछा तो श्याम बोला, “मैडम, बस ख़राब हो गयी है। लगता है इंजन में कुछ प्रॉब्लम है।”
मैंने कहा, “अच्छा, तुम बस ठीक करवा लो, मैं यहीं इसी होटल में रुक जाती हूँ।”
मैंने होटल में चेक-इन किया और बिस्तर पर लेट गई।
करीब 2 घंटे के बाद वह आया और बोला, “मैडम चलिए, बस ठीक हो गयी है।”
मैंने कहा, “नहीं श्याम! अब आज नहीं जाऊंगी, मेरा मूड नहीं है। रात में यहीं रुकूंगी, कल सवेरे चलूंगी। मैंने बगल में तेरे लिए रूम बुक करा दिया है। तुम भी आराम करो।”
वह अपने कमरे में चला गया।
कुछ देर बाद मैंने उसे बुलाया और कहा, “श्याम, यहाँ कोई मालिश करने वाला मिलेगा? मेरी कमर में बड़ा दर्द हो रहा है।”
वह बोला, “यहाँ तो कोई नहीं मिलेगा मैडम, वैसे कहो तो मैं मालिश कर दूँ?”
मैंने पूछा, “तुम्हें मालिश करना आता है?”
वह बोला, “जी हाँ, आता है! पहले मैं एक बस कंपनी के मालिक के यहाँ काम करता था और तब उसकी बीवी की मालिश भी करता था।”
मैंने कहा, “अरे वाह! तो फिर तुम ही मालिश कर दो।”
वह आगे बढ़ा तो मैंने टोका, “नहीं-नहीं, ऐसे नहीं! पहले अपने कपड़े उतारो, क्योंकि तेरे कपड़े मेरे बदन पर चुभेंगे। नीचे चड्डी पहने हो न?”
वह बोला, “हाँ, पहना हूँ।”
मैं बोली, “फिर क्या, सारे कपड़े उतारकर, चड्ढी पहने-पहने मेरी मालिश करो!”
उसने जब कपड़े उतारे, तो मैं उसका गोरा-गोरा नंगा बदन देखकर उस पर मोहित हो गयी।
उसकी चौड़ी छाती और उस पर बाल बड़े सेक्सी लग रहे थे।
मैंने तेल की शीशी थमा दी और अपना पेटीकोट थोड़ा नीचे खसकाकर बोली, “लो, अब करो मालिश।”
मैं ऊपर केवल ब्रा पहने हुई थी।
वह तेल हथेली में लेकर मेरी कमर की मालिश करने लगा।
उसके मालिश करते ही मेरी चूत साली अपने आप गीली हो गयी।
उसने जिस तरह शुरू किया, मैं समझ गयी कि इसे मालिश करने का तज़ुर्बा है।
मैं धीरे-धीरे अपना पेटीकोट नीचे खसकाती गयी और मज़ा लेती गयी।
फिर क्या, वह मेरे चूतड़ों तक पहुँच गया।
मेरी नज़र उसकी चड्डी पर पड़ी। चड्ढी का उभार साफ़-साफ़ बता रहा था कि उसका लण्ड अंदर ही अंदर कसमसा रहा है और बाहर निकलने के लिए छटपटा रहा है।
मेरा उत्साह बढ़ने लगा।
मैं पेट के बल लेट गयी और बोली, “यार श्याम! मेरी ब्रा का हुक खोलकर मेरी पीठ पर भी मालिश करो!”
वह वैसा ही करने लगा। फिर मैंने खुद ही अपना पेटीकोट खोलकर रख दिया।
मैं पूरी नंगी पेट के बल लेटी रही। उसे सिर्फ मेरे चूतड़ दिख रहे थे।
न मेरी चूत, न मेरी चूचियाँ और न मेरी गांड का छेद उसे दिख रहा था। फिर भी वह बहुत एक्साइटेड हो चुका था।
इधर मैं भी बहुत उत्तेजित हो गई थी।
मेरा तो मन उसके लण्ड पर लगा था कि वह जल्दी से मेरे हाथ में आ जाए, मेरे मुंह में आए और फिर मेरी चूत में! इसलिए मैं फ़ौरन उठ बैठी।
उसने मेरी दोनों तनी हुई नंगी चूँचियाँ देखीं, तो उसके होश उड़ गए! वह बोला, “बहुत बड़ी-बड़ी हैं आपकी, मैडम!”
मैंने कहा, “हाँ, बड़ी-बड़ी हैं! इन्हें मालिश करके और बड़ा करो, श्याम!”
वह सच में मेरी चूँचियों पर चिकनाई लगाकर मालिश करने लगा, उन्हें बड़े प्यार से मसलने लगा और मैं एन्जॉय करने लगी।
मैंने पूछा, “श्याम, सच-सच बताओ, तुमने उस बस मालिक की बीवी की मालिश ही की थी या कुछ और भी किया था?”
वह बोला, “मैडम, अब आपसे क्या छुपाना! वो मुझसे मालिश के बाद पेलने को कहती थीं। मानती ही नहीं थीं! कहती थीं कि बिना पेलवाए मैं तुम्हें यहाँ से जाने नहीं दूंगी। फिर मुझे पेलना ही पड़ता था, मैडम!”
मैंने कहा, “अच्छा! तो तुम खूब मस्ती से पेलते होंगे?”
उसने बताया, “हाँ, फिर मैं भी मज़ा ले-लेकर पेलने लगा। सच बात यह है कि उसने ही मुझे पेलना सिखाया था। लगभग हर रोज़ पेलवाती थी मुझसे!”
उसकी बात सुनकर मैं पागल हो गई।
मैं भूल गई कि मैं एक ऑफिसर हूँ और वह एक बस ड्राइवर है।
बस यह याद रहा कि वह एक मस्त जवान मर्द है और मैं एक चुदासी जवान औरत!
मैंने फिर झर्र से उसकी चड्डी उतारकर फेंक दी।
उसका टन-टनाता हुआ लण्ड पकड़कर कहा, “इसे ही पेलते थे न तुम! अपना लण्ड पेलते थे न तुम उसकी चूत में! आज तुम अपना लण्ड मेरी चूत में पेलो! अब मैं तुम्हें सिखाऊंगी कि कैसे पेला जाता है लण्ड मेरी जैसी किसी मस्त जवान औरत की चूत में!”
बस, मैंने पहले तो लण्ड चूमा, फिर मस्ती से थोड़ा आगे-पीछे किया और फिर सीधे मुंह में भर लिया।
अभी तक वह मेरी चूत देख नहीं पाया था। मैं बैठी थी और वह खड़ा था।
मेरी नज़र उसके लण्ड से हट ही नहीं रही थी।
लण्ड बहनचोद बड़ा मोटा और लम्बा था! ऐसा लण्ड मुझे बहुत दिनों के बाद मिला था, तो मैं लण्ड का पूरा मज़ा लेने में जुट गई।
फिर एकाएक मैंने चित लिटा दिया और उसके ऊपर नंगी ही चढ़ बैठी।
अपनी चूत उसके मुंह पर रख दी और आगे थोड़ा झुककर मैं उसका लण्ड चाटने-चूसने लगी, बालों का जूड़ा मैंने पहले ही बना लिया था।
हम दोनों 69 बनकर सेक्स का मज़ा लेने लगे। श्याम बोला, “मैडम, आपकी चिकनी चूत बड़ी स्वादिष्ट है! मुझे चाटने में बड़ा मज़ा आ रहा है।”
उसने ज़बान मेरी चूत में घुसा दी और ज़बान से ही मेरी चूत चोदने लगा।
मैं मादरचोद ऐसे में बड़ी उत्तेजित हो गयी।
मैंने मन में कहा— आज मिला है मुझे मेरे मन का मर्द, जो मेरी चूत सही तरीके से चाट रहा है!
मेरी सिसकारियां निकलने लगीं। मैं सारी दुनिया भूल चुकी थी और लण्ड में बुरी तरह खो चुकी थी।
यह सच है कि बहुत दिनों बाद मुझे मेरे मन का लण्ड मिला था।
लण्ड का सुपाड़ा बिलकुल लाल टमाटर जैसा था और लण्ड बहनचोद लोहे की तरह सख्त था!
कुछ देर बाद मैं पलट गयी। मैं नीचे हो गयी और वह ऊपर।
मेरे मुंह में लण्ड घुसा था और उसके मुंह में मेरी चूत।
वह लण्ड से मेरा मुंह चोदने लगा और अपनी ज़बान से मेरी चूत। मुझे ऐसा करने में बड़ा मज़ा आने लगा था।
ऐसे में न मैं कुछ बोल पा रही थी और न वह कुछ बोल पा रहा था।
पर हाँ, लण्ड चूसने में मैं बिजी थी, तो चूत चाटने में वह।
अचानक मेरे मुंह से अपने आप निकला, “श्याम! अब तुम मुझे चोदो, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा है! पेल दो अपना ये हक्कानी लण्ड मेरी चूत में!”
उसने कहा, “मैडम…”
मैं बीच में ही बोल पड़ी, “मैडम की माँ का भोसड़ा! मैडम की माँ की चूत! अब कुछ बोलो नहीं मादरचोद श्याम! अब तो बस पेल दो लण्ड जल्दी से!”
उसने मुझे बेड पर पटका, खुद नंगा ही नीचे खड़ा हो गया, मेरी टाँगें पकड़कर अपनी तरफ घसीटा और मेरी गांड़ के नीचे एक तकिया लगा दिया, जिससे मेरी गांड ऊपर उठ गयी।
फिर उसने लण्ड चूत के सामने किया और लण्ड का टोपा मेरी चूत पर रगड़ने लगा।
मुझे अपार आनंद आने लगा।
फिर एकाएक लण्ड गच्च से पूरा अंदर घुसा दिया! ऐसा लग रहा था जैसे कोई सांप अपने बिल में घुस रहा हो।
मैं तो चुदी हुई थी, तो दर्द तो मुझे नहीं हुआ,
मगर चीख ज़रूर मेरे मुंह से निकल पड़ी, “उई माँ! मर गई मैं! बड़ा मोटा लण्ड है तेरा भोसड़ी के श्याम! धीरे-धीरे पेलो यार, ये मेरी चूत है, तेरी बस मालकिन का भोसड़ा नहीं है!”
श्याम बिना कुछ बोले धच्च-धच्च धक्के मारने लगा और मुझे जन्नत का मज़ा आने लगा। मेरी चूत माँ की लौड़ी यही चाहती थी!
श्याम हचक-हचक के धक्के मारे जा रहा था। मेरी दोनों टाँगें उसके कंधे पर थीं और लण्ड उसका पूरा मेरी चूत में। लण्ड बहनचोद पिस्टन की तरह अंदर-बाहर आ-जा रहा था।
अचानक उसने मुझे फिर अपनी तरफ घसीटा और मेरे चूतड़ उठाकर पेलने लगा।
उसका इस तरह पेलना मुझे दूना मज़ा देने लगा और मैं सिसकारियां मार-मार के चुदवाने लगी, “ओहह… उफ्फ… आहहह! बड़ा मज़ा आ रहा है! और चोदो भोसड़ी के मेरी चूत! फाड़ डालो मेरी चूत ससुरी! आहहह… हीहीही… उउउउ! तू माँ का लौड़ा बड़ा छुपा रुस्तम निकला! मुझे नहीं मालूम था कि तू इतनी अच्छी तरह मेरी चूत की धज्जियाँ उड़ाएगा! साले कुत्ते, तेरी माँ का भोसड़ा, तेरी बहन की बुर! आज मेरी चूत फाड़ के ही दम लेना! मुझे पहली बार कोई मर्द मिला है मेरी चूत के छक्के छुड़ाने वाला!”
मेरी ललकार से उसका जोश बढ़ने लगा और मेरी उत्तेजना भी बढ़ने लगी।
मैं सातवें आसमान की सैर करने लगी। इतनी बढ़िया चुदाई मेरी पहले कभी नहीं हुई थी!
इतने में उसने मुझे पलट दिया, मेरी गांड उसके सामने आ गयी। उसने मेरे दोनों चूतड़ फैला दिए और लण्ड मेरी गांड के छेद पर सेट कर दिया, फिर एक ही धक्के में ठोंक दिया लण्ड मेरी गांड में!
मेरे मुंह से निकला, “उफ्फ्!” फिर मैं भी मजे से गांड मरवाने लगी।
मेरी गांड बहुत चुदी हुई थी इसलिए मुझे दर्द नहीं हुआ बल्कि ज्यादा मज़ा आने लगा।
उसके मोटे लण्ड से मुझे गांड़ चुदवाने में एक नया मज़ा आ रहा था। अब वह मुझे पीछे से चोदने का मज़ा लूटने लगा। बीच-बीच में लण्ड चूत में भी पेल देता था।
इस तरह चूत और गांड एक साथ चुदवाने का यह मेरा पहला मौका था और मैं इस मौके का पूरा फायदा उठा रही थी।
मुझे लगा कि मैं खलास हो जाऊंगी, पर श्याम बहनचोद चोदे ही जा रहा था!
उसका लण्ड झड़ने का नाम ही नहीं ले रहा था। मैं उसके लण्ड की गुलाम होती जा रही थी।
फिर अचानक वह चित लेट गया और मुझे अपने लण्ड पर बिठा लिया। मेरे बैठते ही लण्ड पूरा मेरी चूत में घुस गया। वह नीचे से धक्के मारने लगा और मैं ऊपर से।
मुझे भी उसके ऊपर चढ़कर उसका लण्ड चोदने में मज़ा आने लगा क्योंकि मैं अपने चूतड़ बार-बार उठा-उठाकर उसके लण्ड पर पटक रही थी।
फिर क्या, मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया। मैं खलास हो चुकी थी। उसके बाद वह भी झड़ गया और मैंने उसका झड़ता हुआ लण्ड बड़ी मस्ती से चाटा।
उसके बाद हम दोनों ने नंगे-नंगे ही खाना खाया और नंगे-नंगे ही एक ही बेड पर सो गए।
सवेरे उठकर एक बार फिर उसने मुझे चोदा। उसके बाद नाश्ता करके हम दोनों बस स्टैंड के लिए निकल पड़े।
अब तो मैं रोज श्याम से मिलती हूँ। वह मुझे अपनी बस में बिठाकर कहीं भी ले जाता है और वहीं होटल में मुझे जमकर चोदता है।
मेरी चूत अब उसी के लण्ड की दीवानी हो गई है।
मैं उससे हर रोज चुदवाती हूँ और मज़ा लेती हूँ।
यही मेरी जिंदगी है और इसमें मैं बहुत खुश हूँ।
अगले कहानी में पढ़ें की कैसे मैं 5 लंड से ग्रुप में चुदवाई ….
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नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।
Kya mast chudai kiya bhai aapne, main chhapra se hun agr aap kabhi chhapra aao to mujhe bhi chod dena.