sexy malkin ki chudai
पिछला भाग पढ़े:- मालिक की बीवी की चुदाई की-3
हिंदी सेक्स कहानी अब आगे-
अमृता इतनी ज्यादा गर्म हो चुकी थी कि पानी उसकी चूत में से ऐसे निकल रहा था, मानो लीकेज हो गया हो अंदर। वह झड़ चुकी थी एक बार। उसका शरीर बुरी तरीके से काँप पर रहा था। जाहिर था कि काफी दिनों बाद उसे इस तरीके का आनंद प्राप्त हुआ था। तुरंत उसने मेरे गर्दन को पकड़ा, मुझे ऊपर की ओर खींचा और मेरे लंड पर अपना हाथ लगाया। फिर उसे अपनी चूत के ऊपर सेट करने लगी।
मैंने भी अब समय ना ज़ाया करते हुए अपने लंड को उसकी चूत के अंदर हल्का सा घुसाया। मेरा अभी टोपा ही अंदर गया होगा कि उसकी सिसकारी निकली-
अमृता: अय्य्यीइइइइइइ निकाल इसे।
उसने बड़ी जोर से मेरी चूतड़ों को दबा दिया। मैं तो यह जानता ही था कि मेरा लंड मोटा और लंबाई में भी ज्यादा ही है अमित से। मैं जानता था कि आज तो अमृता को मैं जन्नत के नज़ारे दिखाने वाला था।
धीरे-धीरे उसकी गीली चूत में मैंने अपना आधा लंड घुसा दिया था।
उसकी सिसकारी और चेहरे से यह साफ जाहिर था कि मेरा पूरा लंड लेने के बाद उसको जो आनंद की अनुभूति होगी, उससे वो अपने पति के लंड को सदा के लिए ही भूल जाएगी।
धीरे-धीरे करके मैंने अपने पूरा का पूरा लंड उसकी चूत के अंदर घुसा दिया। मैं लंड पूरा बाहर निकालता, पूरा अंदर घुसाता। अंदर घुसते ही अमृता की सिसकारी निकल पड़ती थी, और मुझे बहुत मज़ा आ जाता था। अमृता ने मेरी पीठ पर हाथ रख दिया था और मेरी पीठ पर अपने नाखूनों का निशान देने शुरू कर दिए थे। पच पच की आवाज से कमरा गूंज उठा था। हमें ऐसा लग रहा था मानो हमारी इस चुदाई की आवाज कमरों से बाहर ना जा रही हो।
उस पूरे घर में सिर्फ हमें लोग थे। जितनी मर्जी जोर से अमृता चिल्ला सकती थी। वह इतनी ज़ोर से चिल्ला रही थी, मैं उसकी चुदाई उसी तरीके से कर रहा था।
लंड का सिर्फ अगला भाग चूत के अंदर था। बाकी सारा बाहर। और एक ही झटके के अंदर सब कुछ अंदर। इस तरीके से मैं अमृता की चूत को चोदना शुरू किया।
उसकी टाइट चूत मेरे लंड को जकड़ के रखी हुई थी। मगर मेरी चुदाई की स्पीड से जो घर्षण पैदा हो रहा था उसे अमृता की चूत और पानी छोड़ रही थी, ताकि लंड के लिए अच्छे से रास्ता बन सके।
अह्ह्ह्ह उन्न्नध्ह्हह्ह बहुत मजा आ रहा है। तुम्हारे इस मोटे लंड से चुद कर तो मुझे बहुत अच्छा लग रहा है। मुझे और जोर से चोदो। राइट देयर, वहीं पर बस चोदते रहो। अह्हह्ह्ह्ह ahhhhhhhhhh मेरे पति से बड़ा लंड है तुम्हारा। मेरे बच्चेदानी तक महसूस हो रहा है। चोद मुझे रगड़ के।
मैं अमृता को इस पोजीशन में करीब 15 मिनट तक चोदा था। हर धक्के के साथ मुझे अपना लंड और अंदर जाता हूं महसूस हो रहा था। फिर अमृता का शरीर अकड़ने लगा। उसने अपनी चूतड़ों को ऊपर उठाना शुरू कर दिया था। मैं समझ गया था कि वह अब चरम पर थी। मैंने अपनी गति को थोड़ा सा तेज किया, ताकि उसको जल्दी से झाड़ सकूं।
एक बार जब वह झड़ गई, उसका शरीर कांपने लगा। उसकी टांगे अब वैसे ही ज़मीन पर पड़ी हुई थी। मेरा लंड अभी भी उसकी चूत के अंदर था और उसको चोद रहा था। चूत में बहुत ज्यादा कपकपी की वजह से उसे अब गुदगुदी होने लगी थी। मगर मैंने उसके हाथों को जकड़ लिया और जोर से चोदता रहा। थोड़ी देर की चुदाई के बाद एक बार फिर से उसका माल गिर गया था।
मैं चौंक गया और पूछा: क्या बीना ने यह सब बता दिया है?
अमृता बोली: बहनों में कुछ भी छुपाया नहीं जाता है। बीना ने मुझे अच्छे से बताया था कि किस तरीके से तुमने उसको संतुष्ट किया है। उस दिन के बाद से ही मैं तुम्हारा लंड लेना चाहती थी। मगर तुम थे कि मेरा कोई इशारा समझ ही नहीं रहे थे।
मैं: आप खुश हो ना मेरी इस चुदाई से? क्या मैं आपको संतुष्ट कर दिया है?
अमृता मेरी तरफ देखी और बोली: तुमने मुझे बहुत ज्यादा संतुष्ट कर दिया है। ऐसी ख़ुशी तो मुझे आज तक कभी भी नहीं हुई, जितना खुश आज तुमने मुझे किया है।
मैं खुश था।
अमृता कही: सुनो प्रतीक, लेकिन तुम मुझे बहुत पसंद हो। मगर मैं इस रिश्ते को कोई नाम नहीं देना चाहती हूं। मैं नहीं चाहती हूं कि तुम मेरे लिए कुछ अलग से करो। मैं नहीं चाहती हूं कि तुम मुझे अपनी कोई प्रेमिका या माशूका समझो। यह हमारे जिस्मों की जरूरत थी, जो हमने पूरी कर ली। मैं अपने पति के बेरुखी से दुखी थी और तुम शायद मेरे जिस्म से आकर्षित थे। बस यही एक रिश्ता था। मैं नहीं चाहती कि हमारे बीच में कोई परेशानी हो। मैं इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहती और उम्मीद करती हूं कि तुम्हें भी सिर्फ मेरे जिस्म से ज्यादा कुछ नहीं चाहिए होगा। क्योंकि मैं इससे ज्यादा कुछ तुमको नहीं दे पाऊंगी। क्योंकि प्यार तो मैं अपने पति से ही करती हूं।
उसकी यह बातें सुन कर मुझे गुस्सा आने लगा और मेरा लौड़ा एक बार फिर खड़ा हो गया। मैंने उसको बिस्तर पर वापस लिटा दिया। उसकी गर्दन पर अपने हाथों का निशान लगाने लगा और उसकी चूत पर अपने लंड को रख दिया। फिर जोर से मैंने उसकी चुदाई करना चालू किया।
वो बोली: आराम से प्रतीक, मुझे दर्द हो रहा है।
मैं बोला: साली तुझे क्या मैं कोई रांडा लगता हूं कि अपने जिस्म की प्यास बुझाने के लिए मेरा इस्तेमाल कर लिया? मैं तो तुझे सच में प्यार करता हूं। लेकिन शायद तुझे मेरे लंड की ही जरूरत है। अब मैं तुझे मेरे लंड की असली ताकत दिखाता हूं।
कह कर मैं बहुत जोर से उसकी चुदाई की
पूरा लंड बाहर पूरा लंड अंदर। उसके साथ भयंकर गति। मैंने अमृता की हालत खराब कर दी थी। मैं इतनी जोर से उसको चोद रहा था। उसके चेहरे पर दर्द सब झलक रहा था। मैंने उसको बहुत बेरहमी से चोदा। उसने करीब दो बार अपना पानी निकाल दिया था। मैं भी अपना पानी निकालने ही वाला था।
वह मुझे बोली: अंदर मत करो, बाहर निकालो।
मैंने बोला: नहीं रंडी, मैं बाहर नहीं निकलूंगा। अंदर ही करूंगा। क्योंकि अब तू मेरी रंडी बन चुकी है, समझी?
कह कर मैंने जोर से उसकी चुदाई चालू कर दी और भयंकर रूप से उसको चोद दिया। चोदने के बाद जाकर मेरा गुस्सा शांत हुआ। मैं अलग हटा और बैठ गया।
अमृता मेरी और आयी। उसकी चूत में से अभी भी मेरे द्वारा डाला हुआ वीर्य बह रहा था।
उसने मेरे गालों पर हाथ लगाया और बोली: मैं तो बस तुम्हारी परीक्षा ले रही थी। मुझे लगा कि तुम्हें सिर्फ मेरे जिस्म की जरूरत है। लेकिन अब मुझे समझ आ गया है तुम मुझसे प्यार करते हो। प्रतीक मैं भी तुमसे बहुत प्यार करती हू। तुम्हें भड़काया ताकि तुम मुझे अपनी बीवी समझ के प्यार करो ना की भाभी की तरह। अब मैं तन और मन से तुम्हारी हो चुकी हूं।
अमृता: लेकिन तुम जानते हो मैं घर की बहू हूं। इस घर की इज्जत है, और मेरी भी कुछ अपनी वजह है। मैं तुमसे यूं ही प्यार करती रहूंगी और तुम्हारा साथ हमेशा अंत तक देने का वादा करती हूं।
यह सुन कर मुझे अच्छा लगा। अमृता ने मुझे अपने गले के पास लगा लिया और मुझे अपने गले से लगा लिया। उस दिन के बाद से मैं अमृता को लगभग हर दिन में चोदता हूं।
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