garam bhabhi fuck story
गरम भाभी फक स्टोरी में मेरी पड़ोसन भाभी हमेशा सजी संवरी रहती थी. मैं उन्हें देखता था तो वे आँखों में आँखें डाल कर देखती थी. एक दिन उन्होंने मुझे अपना फोन नम्बर दिया.
मेरा नाम राज है।
मेरे घर के बगल में एक भाभी रहती थीं, जो बहुत सेक्सी थीं।
उनका फिगर साइज 38-36-40 था, जो मुझे उनकी ब्रा-पैंटी से पता चला।
अच्छा दोस्तो, बिना पकाए अब आप लोगों को सीधी बात बताता हूँ इस गरम भाभी फक स्टोरी में!
एक्चुअली में वो भाभी हर समय बहुत सजी-सवारी रहती थीं लेकिन सबके सामने इतनी सीधी कि पूछो मत।
मैं उन्हें हमेशा देखता था।
लेकिन करीब छह महीने पहले मुझे लगा कि वो भी मुझे देखती हैं।
फिर धीरे-धीरे हमारा देखने का सिलसिला चलता रहा।
हमारी आँखें एक-दूसरे को हर पल खोजने लगीं।
फिर एक दिन मैं एक ब.च्ची को गोद में उठाकर टहल रहा था।
वो भी सामने थीं।
मैं उन्हें देखते हुए ब.च्ची के गाल पर किस कर दिया।
वो मुझे देखकर हंसने लगीं।
और फिर हमारा सिलसिला शुरू हो गया।
दूसरे दिन वो बोलीं, “मुझे मंदिर के रास्ते पर मिलो।”
वो रोज मंदिर जाती थीं।
मैं वहाँ गया।
उन्होंने मुझे अपना मोबाइल नंबर दिया।
मैंने मिस कॉल कर दिया।
मुझे रात 11 बजे उसी नंबर से कॉल आया।
फिर हमारी बात हुई।
बहुत सी सेक्सी बातें हुईं।
मुझे तब पता चला कि वो कितनी सेक्सी हैं।
फिर मैं शाम को ड्यूटी से घर गया तो वो छत पर टहल रही थीं।
मैंने उनको इशारा किया तो वो मुझे फ्लाइंग किस देने लगीं।
वो बार-बार इधर-उधर देखकर चेक करतीं कि कोई देख तो नहीं रहा, और फिर किस दे देतीं।
मैंने उन्हें इशारा किया कि मुझे तुम्हारी पैंटी चाहिए।
उन्होंने थोड़ी देर इधर-उधर देखा, अपनी पैंटी निकाली और नीचे फेंक दी।
मैंने उसे उठाकर बाथरूम में जाकर मूठ मारी, उनके याद में अपना माल गिराया और बाद में बाहर आकर उन्हें वापस कर दी।
दूसरे दिन मैंने उनसे पूछा, “पैंटी का क्या किया?”
उन्होंने बोला, “कुछ चीजें बताई नहीं जाती।”
फिर बहुत सी सेक्सी बातें हुईं।
मैंने कहा, “अब रहा नहीं जाता। कैसे होगी चुदाई?”
उन्होंने बोला, “मैंने सोच के रखा है। ठंड में करेंगे।”
मैंने पूछा, “क्यों?”
उन्होंने जवाब दिया, “सुबह 4 बजे उस समय सब सोए रहेंगे।”
ऐसे ही देखते-देखते एक महीना निकल गया और ठंड आ गई।
फिर सुबह मिलने का तय हुआ।
उस रात मैं सोया ही नहीं।
सुबह साढ़े तीन बजे से बाहर खड़ा हो गया।
ठीक चार बजे उनका दरवाजा खुला।
उन्होंने मुझे देखा और मुस्कुराते हुए घर के अंदर बुलाया।
चुप रहने का इशारा करके सीधे सीढ़ी पर ले गईं और मुझे पागलों की तरह किस करने लगीं।
वे फिर सीढ़ी पर बैठकर मेरे लोअर से लंड निकालकर चूसने लगीं।
फिर बोलीं, “नीचे बैठो!”
और खुद अपनी पैंटी निकालकर मुझे लिटा दिया।
फिर खुद ऊपर बैठकर चुदने लगीं।
अपने ऊपर के चूचे मेरे मुंह में जबरदस्ती डालकर बोलीं, “पियो! और जोर से चोदो राज! जोर से!”
उसके बाद उन्होंने मुझे खड़ा होने को कहा।
खड़े-खड़े ही एक पैर ऊपर करके बोलीं, “डालो!”
मैं भी मजे से चोदने लगा।
इतना तेज कि मेरी आवाज आने लगी।
उन्होंने कहा, “आराम से! कोई उठ जाएगा!”
फिर पीछे घूमकर झुककर बोलीं, “ऐसे भी करो मेरे राजा, लेकिन गलत छेद में मत डालना!”
मैंने फिर घोड़ी बनाकर उनकी चुदाई की।
वो भी मस्त चुद रही थीं।
कसम से, मैंने इतनी सेक्सी औरत इससे पहले नहीं चोदी थी।
मजा आ गया था।
उसके बाद मैं झड़ गया।
वो भी झड़ गईं।
एक घंटे बाद वो नहा-धोकर आईं और मुझे देखकर स्माइल करने लगीं।
और फिर दूसरे दिन मिलने का इशारा किया।
दूसरे दिन मैं उठ नहीं पाया।
फिर दो दिन बाद उन्होंने बनावटी गुस्सा करते हुए इशारा किया, “कल सुबह मिलना!”
दूसरे दिन सुबह मैं तैयार था लेकिन उनके घर जाने से फट रही थी।
तो मैंने उन्हें मेरे घर आने को कहा।
मैंने बाउंड्री में चटाई बिछा दी।
वो आ गयी.
पहले तो मैंने किस करना आराम से शुरू किया।
फिर धीरे-धीरे उनकी नाइटी ऊपर उठाते हुए उनकी गांड आराम से सहलाने लगा।
फिर उनकी नाइटी को ऊपर से नीचे करके उनके चूचे चूसने लगा, साथ में बड़बड़ाने लगा, “वाह! क्या चीज हो! क्या मस्त है चूत तुम्हारी!”
चूची पीते-पीते उनकी चूत में उंगली करने लगा।
वो पूरी तड़पने लगीं और सिसियाने लगीं।
उनकी सिसकारियों से मेरा भी फुल तंबू बन गया था।
उन्हें मेरा लंड पता नहीं क्यों बहुत पसंद आता था।
बोलीं, “ऐसा लंड मुझे मस्त कर देता है! जबसे तुमसे चुदी हूँ, बस क्या ही बोलूँ। बस चुदने का मन ही होता है। तुम्हारा बहुत टाइम भी लग जाता है, जरा जल्दी किया करो, नहीं तो कोई उठ जाएगा!”
तो फिर क्या था! इतना सुनते ही मैंने तुरंत उनकी पैंटी नीचे की।
उनकी चूत की खुशबू ली और फिर चाटने भी लगा।
उससे रहा नहीं गया और वो तड़पने लगीं, बोलीं, “जल्दी चोदो राज! जल्दी चोदो!”
मैंने भी दोनों पाँव फैलाकर अपने कंधे पर लेते हुए उनकी चूत में लंड डाल दिया।
वो तो एकदम पागल सी हो जा रही थीं।
बार-बार मेरा सिर चूचों पर लगाए जा रही थीं और बहुत मस्त चुदाई करवा रही थीं।
बस फिर क्या था! हमारी चुदाई का सिलसिला चल पड़ा।
सबके बचाव-बचाव के अब तक मैंने उनसे पाँच बार से ज्यादा चोद दिया है।
और अब जब भी मौका मिलेगा तो और चोदूँगा।
जल्दी में लिख रहा हूँ, कुछ ऊपर-नीचे हुआ होगा तो देख लेना।
आप सबके रिप्लाई का इंतजार रहेगा।
यह मेरी एक सच्ची कहानी है।
अगर इस गरम भाभी फक स्टोरी में प्यार मिला तो आगे और सच्ची कहानियाँ लिखूँगा।
नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।