step mom fuck kahani
स्टेप मॅाम फक स्टोरी में मेरी दूसरी मम्मी बहुत सेक्सी हैं. पापा अक्सर बाहर रहते हैं तो घर में हम दोनों ही होते हैं. मॅाम मुझे अक्सर गले लगाकर अपनी चूचियों ने दबा लेती थी.
दोस्तो, मेरा नाम अंकित है और आज मैं अपनी सौतेली मॉम की एक कामुक कर देने वाली चुदाई की घटना स्टेप मॅाम फक स्टोरी में बताने जा रहा हूँ.
मेरी सौतेली मॉम का नाम निशा है.
पापा दुबई में काम करते हैं और घर में हम दोनों ही रहते हैं.
मेरी सौतेली मॉम की उम्र 42 साल की है और मेरी उम्र 19 साल की है.
जब मैं चार साल का था, तभी मेरी मॉम के गुजर जाने से पापा ने दूसरी शादी कर ली थी.
मेरी ये मॉम रिश्ते में मेरी दूर की मौसी भी लगती थीं मगर मैं उन्हें अपनी मॉम ही मानता हूँ.
मैं उस टाइम बहुत कसरत करता था तो मेरा जिस्म किसी हट्टे कट्टे पहलवान के जैसा हो गया था.
मेरा लंड भी खड़े होने पर काफी बड़ा कड़क और मोटा हो जाता है.
मेरी मॉम के पास पैसे की कोई कमी नहीं है इसलिए वे एक क्लब गर्ल की मस्त और बिंदास लाइफ जीती हैं.
मॉम मुझे बहुत प्यार करती हैं.
मैं भी मॉम को बहुत प्यार करता था.
वे मेरे सामने ही कपड़े बदल लेती थीं तो मुझे उन्हें ब्रा पैंटी में देख कर या कभी कभी तो सिर्फ पैंटी में ही देख कर बहुत कामुक हो जाता था.
मेरा लंड फूलने लगता था और मेरी टांगों के बीच लंड का उभार साफ साफ दिखने लगता था.
शायद मॉम भी मेरे फूलते लौड़े को और मेरी आंखों में खुद के लिए वासना देख लेती थीं, तो वे हंस भर देती थीं.
बाद में वे मुझे अपने सीने से लगा कर चूमतीं और कहतीं- तू जवान हो गया है. देख न … कितना हट्टा-कट्टा हो गया है.
जब मॉम मुझे अपने सीने से लगातीं, तो उनके दूध मुझे मेरे सीने में गड़ते हुए से लगते थे और मैं बस कसमसा कर रह जाता था.
एक दिन मेरी मॉम को सूट सिलवाना था तो वे सतबंत सिंह सरदार नाम के टेलर को अपना नाप देने गईं.
सतबंत सिंह सरदार ने दो दिन बाद सूट ले जाने को कहा.
दो दिन बाद करवा चौथ का त्योहार था. मॉम को उसी त्योहार पर सूट पहनना था.
दो दिन बाद जब मॉम उससे अपना सूट लेकर घर आईं और उसे पहन कर देखा, तो टेलर से सूट ढीला सिल दिया था.
उस दिन त्योहार था तो मेरी मॉम को बहुत गुस्सा आया कि वे अब क्या पहनें!
सतबंत सिंह टेलर ने ऐन वक्त पर सब गड़बड़ कर दिया था.
उस दिन सारे दिन से मॉम व्रत के कारण भूखी प्यासी थीं और उनको पूजा के लिए देर भी हो रही थी.
तभी मॉम ने मुझसे कहा- तू जरा मेरे साथ उस टेलर की दुकान तक चल.
मैंने ओके कहा और मॉम के साथ उस सतबंत सिंह टेलर के पास आ गया.
दुकान पर पहुंचते ही मॉम गुस्से में सतबंत सिंह को हड़काने लगीं.
मैं चुपचाप देख रहा था.
उस दिन मॉम ने ब्लैक साड़ी और स्लीवलेस ब्लाउज (येलो कलर का) पहना था, माथे पर रेड सिंदूर और उनके दोनों तने हुए खरबूजों के बीच मंगलसूत्र लटक रहा था.
मॉम सतबंत सिंह को बहुत उल्टा-सीधा बोल रही थीं.
तभी सतबंत सिंह मुझे देखता हुआ बोला- भाभी जी, आप अन्दर चलकर दोबारा से नाप दे दो, अभी सही करवा देता हूँ.
मॉम लगातार बड़बड़ा रही थीं.
इससे सतबंत सिंह अन्दर से खीझ भी गया था क्योंकि दुकान पर और भी लोग थे और मॉम ने उसकी बेइज्जती कर दी थी.
मॉम अन्दर जाने लगीं, तो मैं भी उनके साथ अन्दर जाने लगा.
तभी दुकान पर काम कर रहे एक लड़के ने मुझे अन्दर जाने से रोका.
सतबंत सिंह बोला- आने दे … आज इसके सामने इसकी मॉम के कपड़े सिलूँगा.
मैं कुछ समझ नहीं पाया. मैं अन्दर गया और स्टूल पर बैठ गया.
तभी सतबंत सिंह मेरी मॉम के पास आकर उन्हें गुस्से में देख रहा था.
मॉम बोलीं- देख क्या रहे हो? जल्दी से मेरा नाप लो.
तभी सतबंत सिंह ने मॉम की कमर को दोनों तरफ से बुरी तरह पकड़ लिया और उनकी गर्दन को बुरी तरह चूसने लगा.
मॉम- अरे … सर्स्दार जी … क्या कर रहे हो? छोड़ो मुझे!
सतबंत सिंह- चुप साली कुतिया … आज तेरी सारी गर्मी निकालता हूँ. बहन की लौड़ी बाहर बहुत चुदुर चुदुर कर रही थी!
मॉम ने सतबंत सिंह से मेरी तरफ उंगली करके इशारा करते हुए कहा- सरदार जी, ये सब बाद में करना यार, अभी मेरा बेटा साथ में है.
सतबंत सिंह ने कुछ नहीं सुना
तो मॉम मुझसे बोलीं- बेटा तू बाहर जा, मैं इसको अभी नाप देकर आती हूँ.
सतबंत सिंह- रुक मादरचोद तू यहीं रुक … और देख आज मैं तेरी मॉम की जवानी को कैसे लूटता हूँ.
मुझे एकदम से गुस्सा आ गया लेकिन मॉम ने मुझे चुप रहने का इशारा कर दिया, तो मैं चुप रहा.
मॉम कसमसाती हुई बोलीं- सतबंत सिंह, प्लीज आज ऐसा मत कर यार, मेरे बेटे के सामने प्लीज यूँ न करो. प्लीज छोड़ दो.
सतबंत सिंह ने मॉम के दोनों हाथ उठाकर उनकी आर्मपिट्स चूसने शुरू कर दिए.
मेरी सौतेली मॉम की आर्मपिट्स में गर्मी के कारण छोटी-छोटी पसीने की बूंदें आ गई थीं.
सतबंत सिंह बुरी तरह से चूस रहा था.
मॉम- प्लीज ऐसा मत करो, मुझे माफ़ कर दो!
सतबंत सिंह- चुप रह कुतिया … आज तेरा रस पीऊंगा और तेरा व्रत है ना आज … सारा रस चुसवा कर तेरा व्रत तोड़ दूंगा.
मॉम- ऊँह प्लीज छोड़ो न!
सतबंत सिंह- बोल पहले जो पूछा वह बता … व्रत है ना?
मॉम- हां!
इतना बोलते ही सतबंत सिंह ने मॉम को घुटनों के बल बैठा दिया और अपना काला लंड निकाल कर मॉम के मुँह में पूरा घुसेड़ दिया.
अब शायद मॉम को समझ में आ गया था कि ये सरदार उनको चोदे बिना छोड़ने वाला नहीं है, तो वे भी सरदार के मूसल लंड को मुँह में लपलप करके चूसने लगीं.
मॉम लगभग 10 मिनट तक उसके लंड को अपने मुँह में लेकर चूसती रहीं और आखिर में सतबंत सिंह ने मेरी मॉम के मुँह में अपना माल भर दिया.
मॉम सरदार का वीर्य खाती हुई मेरी तरफ देखकर बोलीं- बेटा तू आंखें बंद कर ले.
लेकिन मेरा लंड हिल रहा था.
मेरा मन नहीं करता था, फिर भी मॉम को दिखाने के लिए मैंने झूठमूठ आंखें बंद कर लीं.
कुछ पल बाद मैंने आंखें खोल लीं.
मैंने देखा तो सतबंत सिंह मेरी मॉम की चूत को एक हैवान की तरह चूस रहा था.
मॉम की चूत की फांकों को वह खींच खींच कर चूस रहा था.
सतबंत सिंह मेरी तरफ देखकर बोला- आजा देख ले पट्ठे … अपनी मॉम की चूत .. मस्त चुदवाती है ये रंडी!
मॉम- अरे नहीं सतबंत, प्लीज उसे मत बुलाओ.
सतबंत सिंह ने मुझे बुलाकर मॉम की चूत की स्मेल सुँघाई- कैसी है स्मेल तेरी मॉम की चूत की?
मैं चुप रहा.
सतबंत सिंह ने मुझे एक चपत मारते हुए कहा- बोल बे … कैसी है इसकी चुत की खुशबू?
मैं बोल उठा- बहुत अच्छी है.
मॉम बस मेरी तरफ देखती रहीं.
तभी सतबंत सिंह बोला- रंडी, बोल अपने बेटे को कि बेटा मैं सतबंत सिंह की रंडी हूँ.
मॉम हंस कर बोलीं- बेटा … मैं सतबंत सिंह की रंडी हूँ.
मॉम अब पूरी तरह बदल चुकी थीं क्योंकि वे अब अपने बेटे के सामने गैर मर्द के सामने टांगें फैलाकर अपनी चूत चुदवा रही थीं.
जब लंड चूस लिया था तो अब चुदने में क्या शर्म बाकी बची थी तो वे भी बिंदास हो गई थीं.
मैं मॉम के पास बैठ गया और उन्हें प्यार से सहलाने लगा.
मॉम मेरी आंखों में देख रही थीं, अपने होंठों को काटती हुई वे सतबंत सिंह के झटकों के कारण ऊपर-नीचे हो रही थीं.
‘आह … आह … आह … आन्ह …’ मेरी सौतेली मॉम चुदवा रही थीं और वे मदभरी सिसकारियां भर रही थीं.
इधर सतबंत सिंह मॉम की चूत को अपने मोटे लंड से ड्रिल कर रहा था.
मैंने भी अपने लौड़े को मसलना शुरू कर दिया था.
सतबंत सिंह ने मॉम को इशारा करते हुए कहा- देख रंडी … तेरा लौंडा लंड मसल रहा है.
मॉम ने मुझे देखा और प्यार से कहा- बेटा अब तू भी अपना लंड मेरे मुँह में डाल दे.
मैं तो कब से तैयार था, मैंने झट से अपना लंड निकाला और मॉम के मुँह की तरफ बढ़ाता हुआ बोला- लो मॉम.
मॉम ने मेरे लवड़े को देखा और बोलीं- वाह तेरा तो इस कुत्ते के लंड से भी बड़ा है.
यह कह कर मॉम ने मेरे लंड को पकड़ा और उसे अपने मुँह में भर लिया.
वे मेरे लंड को ‘उम्म्म्म … आह्ह्ह … उम्म्म्म.’ करती हुई चूसने लगीं.
मॉम ने मेरा लंड इतनी बुरी तरह से चूसा कि मैं जल्दी ही झड़ गया.
सतबंत सिंह हँसता हुआ मॉम के दूध मसलता हुआ बोला- साली रंडी, अपने बेटे का लंड चूस रही है … मस्त है तू!
मॉम भी लौड़े को मुठियाती हुई बोलीं- तो इसमें गलत क्या है? आज से तो मैं इसके लंड को ही चूसकर इससे चुदवाऊंगी. थैंक्स सतबंत, आज तूने मेरे बेटे को मेरी चुत के लिए ओपन कर दिया है.
सतबंत सिंह- साली, मुझे नहीं पता था तू इतनी बड़ी रंडी निकलेगी. दिखने में तो बहुत संस्कारी है.
मॉम- तुम क्या जानो, संस्कारी अन्दर से कितनी बड़ी रंडी होती है.
सतबंत सिंह- उफ्फ्फ़ मेरी रानी … क्या मस्त बात कही है तूने.
यह कह कर वह मेरी मॉम को बुरी तरह किस करने लगा.
सतबंत सिंह ने चुत से लंड निकाल कर मॉम के मुँह में देते हुए कहा- ले रानी अब मेरा भी चूस अच्छे से!
मॉम- जो हुक्म मेरे राजा.
सतबंत सिंह- देख बेटा अपनी मॉम को आज … साली कितनी बड़ी रांड है.
मॉम हंस दीं.
सतबंत सिंह- आह्ह्ह … चूस साली.
मॉम- उम्म्ह … तेरा लंड तो दिनों दिन मोटा होता जा रहा है उम्म्म!
मेरी मॉम आइसक्रीम की सतबंत सिंह का लंड चूसती जा रही थीं.
तभी सतबंत सिंह ने मॉम के मुँह में सारा माल निकाल दिया और झड़ गया.
मॉम ने उसके लौड़े से निकला सारा वीर्य पी लिया.
सतबंत सिंह- व्रत तेरा आज मेरे लंड ने तोड़ दिया.
मॉम- ऐसे लंड मेरे सामने खुले हुए हों, तो मैं रोज ही व्रत तोड़ दूँगी.
मॉम ने मुझे बुलाया और बोलीं- बेटा अपने पापा से कुछ मत कहना कि मैं कितनी बड़ी रांड हूँ.
मॉम के होंठों पर सतबंत सिंह का माल लगा हुआ था.
उन्होंने उसी चिपचिपे होंठों से मुझे किस किया.
फिर सतबंत सिंह बाहर चला गया.
मैं मॉम के पास गया और उनकी चूत को छूकर देख रहा था.
तभी मॉम ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने ऊपर खींचा और मेरे लंड को अपनी चूत में ले लिया.
मॉम- बेटा, मेरी चूत में लंड अन्दर-बाहर कर.
मैं तेजी से मॉम की चुत चोदने लगा था.
मैंने कहा- मॉम कब से आपकी लेने का मन था!
मॉम भी बोलीं- हां मैं भी अब तुझसे ही चुदवाया करूंगी.
मैं तेज तेज धक्के लगाने लगा.
मॉम- आह्ह्ह … आह्ह्ह … बेटा राजा और अच्छे से चुदाई कर मेरी!
मेरा लंड अब झड़ने को होने लगा.
मॉम की चूत भी काफी गर्म हो गई थी.
तभी मॉम झड़ गईं.
मैं उनकी चुत से लंड निकाल कर हिलाने लगा.
मॉम ने झट से मुँह में लंड लेकर चूस कर उसे झाड़ दिया.
स्टेप मॅाम फक करने के बाद मैं संतुष्ट होकर अपने कपड़े सही करने लगा.
मेरी मॉम भी कपड़े पहनने लगीं.
तभी सतबंत सिंह अन्दर आया.
सतबंत सिंह- अरे रंडी, तू अभी तक यहीं गांड मरा रही है. चल जल्दी निकल यहां से. अब मेरे धंधे का टाइम है.
मॉम गुस्से में बोलीं- साले कुत्ते … चुत चोदने के बाद तुम तो एकदम से बदल जाते हो. मेरा सूट सही करवा दिया या नहीं?
सतबंत सिंह- अरे निकल न रंडी साली … अभी आना थोड़ी देर में … और सुन तेरी जैसी बीसियों आती रहती हैं मेरे लौड़े से चुदने के लिए … ज्यादा गुस्सा न दिखा, वरना फिर से चोद दूँगा. वैसे भी अब तो तू पक्की रंडी बन गई है. बहन की लौड़ी अपने बेटे के सामने चुद गई और बेटे का लंड भी चूस लिया तूने!
मॉम हंस रही थीं और बोली- ओके, ज्यादा न भड़क अभी मैं जा रही हूँ. एक घंटा में आती हूँ. सूट सही कर देना, नहीं तो दुकान के सामने ड्रामा करूंगी.
वह हंस दिया और उसने मॉम के गाल में एक चुम्मी ले ली.
दोस्तो, इस मस्त चुदाई लीला के बाद मैं और मॉम दुकान से बाहर निकल कर घर आ गए.
मेरी सौतेली मॉम मुझसे चुद कर काफी खुश थीं.
उस दिन के बाद से मैं अब कभी भी मॉम को चोद लेता हूँ.
पर शुरुआत वाली चुदाई के उस दिन को मैं आज भी याद करता हूँ … और मॉम को चोद लेता हूँ.
आपको मेरी स्टेप मॅाम फक स्टोरी कैसी लगी?
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