चाचा की दोनों बेटियों को चोद दिया

virgin cousin bahan chudai

नमस्ते दोस्तों, आज मैं आपको अपनी एक रियल और बेहद हॉट स्टोरी सुना रहा हूँ, जो इतनी गरम है कि पढ़ते-पढ़ते आपका लंड खड़ा हो जाएगा। उस वक्त मेरी उम्र करीब 25 साल की थी। मैं अपने चाचा जी के गाँव के घर में रह रहा था, काम के सिलसिले में। चाचा जी की चार बेटियाँ थीं। Virgin Cousin Bahan Chudai

सबसे बड़ी थीं रंगोली, उम्र लगभग 20 साल, फिर कंगना 18 की, और बाकी दोनों में 2-2 साल का फर्क। घर का माहौल हमेशा हँसी-मजाक भरा रहता, लेकिन मेरी नजरें हमेशा इन बहनों पर टिकी रहतीं। रंगोली तो बस कमाल की थी – 5 फीट 3 इंच लंबी, गोरी चिट्टी, सेक्सी फिगर वाली हसीना।

उसके होंठ गुलाबी, आँखें काजल सी काली, और कमर इतनी पतली कि हाथ में आ जाए। उसके बूब्स 34 के गोल-गोल, टाइट ब्लाउज में उभरे रहते। गांड गोल-मटोल, टाइट सलवार में लहराती। वो खुलकर मुझसे बातें करती, हँसती-खेलती, कभी-कभी जानबूझकर मेरे सामने झुक जाती ताकि उसके चूचे झलक जाएँ। मुझे सेक्सी बुक्स पढ़ने का शौक था, और सेक्स में तो मैं एक्सपर्ट था।

जब घर पर हम अकेले होते, तो मैं उसे ऐसी बुक्स दिखाता – जिनमें चुदाई के सीन, चूत चाटना, लंड चूसना सब डिटेल में। वो पढ़ते-पढ़ते गरम हो जाती, साँसें तेज हो जातीं, आहें भरने लगती। मैं उसके पास बैठ जाता, धीरे से उसके कंधे पर हाथ रखता, फिर नीचे सरकाकर उसके मुलायम बूब्स को जोर-जोर से दबाता।

“आह्ह भैया… क्या कर रहे हो?” वो शरमाती, लेकिन हाथ हटाती नहीं। मैं उसकी सलवार में हाथ डालकर चूत में उंगली डालकर हिलाता। उसकी चूत टाइट, गर्म, रस से भीगी। उंगली अंदर-बाहर करते ही वो काँप उठती, “ओह्ह… भैया, मत करो ना… किसी ने छुआ नहीं अभी तक।”

लेकिन उसकी चूत से रस टपकने लगता, कमर अपने आप हिलने लगती। मैं उसके होंठ चूसता, जीभ अंदर डालकर किस करता। लेकिन वो आगे बढ़ने नहीं देती, कहती, “बस इतना ही भैया, अभी शादी नहीं हुई।” यही सिलसिला हफ्तों चलता रहा, मेरी हड्डियाँ जल रही थीं। एक दिन चाचा-चाची शादी में गए, घर पर सिर्फ हम थे।

मैंने कहा, “रंगोली, आज जब घर पर अकेले हैं, तो मैं तुझे सेक्स सिखाऊँगा। पूरा मज़ा दूँगा, तू राजकुमारी बनेगी!”

उसकी आँखें चमक उठीं, गाल लाल हो गए। बोली, “हाँ भैया, सिखाओ ना… मैं तैयार हूँ! लेकिन दर्द न हो।”
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हम एक ही रूम में सोते थे। रात को लाइट बंद की, मैंने अपनी पैंट उतारी और अपना 7 इंच का मोटा, काला लंड उसके हाथ में थमा दिया। वो डरते-डरते पकड़ा, “भैया… इतना बड़ा! हाथ में ही नहीं समा रहा।” मैंने कहा, “मसाज करो पहले, फिर चूसो!” पहले तो शरमाई, मुँह मोड़ लिया, लेकिन मैंने उसके सिर को दबाया।

लंड उसके नरम होंठों से सटा। वो धीरे से चाटने लगी, फिर मुँह में डाल लिया। “वाह भैया, कितना नमकीन है! गरमागर्म!” मैंने कहा, “चूसो ज़ोर से, जीभ घुमाओ!” साथ ही उसकी सलवार उतार दी, टाइट चूत में दो उँगलियाँ डाल दी, तेज़ी से हिलाने लगा। “आह्ह्ह… ओह्ह भैया… मार डालोगे!”

वो चीखने लगी, चूत भीगी हुई, रस मेरे हाथ पर बह रहा। बीच-बीच में उसके चूचियाँ दबाता, निप्पल चूसता – काटता। वो इतनी गरम हो गयी कि पागल सी हो रही थी, कमर उछाल रही, “भैया… कुछ हो रहा है… आह्ह्ह!” मेरा सब्र टूट गया। लंड उसके मुँह से निकाला, चूत के द्वार पर रखा। टिप पर रगड़ा, रस से चिकना हो गया।

एक ज़ोरदार झटका – 3 इंच अंदर! “आह्ह्ह… फाड़ दोगे क्या?! दर्द हो रहा भैया!” वो चीखी, नारस मेरी पीठ में गाड़ दिए। मैंने प्यार से कहा, “घबराओ मत रंगोली, पूरा डालूँगा तो और मज़ा आएगा। थोड़ा दर्द तो होगा ही, इतना बड़ा लंड तेरी कुंवारी टाइट चूत में! साँस ले।” फिर लंबा झटका – पूरा 7 इंच अंदर!

वो चिल्लाई, मैंने मुँह दबा दिया, जीभ चूस ली। अब तेज़ी से इन-आउट करने लगा – प्लॉम्प… प्लॉम्प! चूत की दीवारें लंड को चूसी जा रही थीं। जल्दी ही दर्द भूल गयी, मज़ा आने लगा। नीचे से कमर हिलाने लगी – “हाँ भैया… और ज़ोर से! चोदो मुझे… तेरी रंडी बन गयी!” मैंने उसके बूब्स चाटे, गांड में हाथ डाला।

20 मिनट तक जोरदार चुदाई चली – अलग-अलग पोज़ – डॉगी, मिशनरी। आखिर में गरम वीर्य से उसकी चूत भर गयी, बाहर बहने लगा। वो लिपटकर बोली, “भैया, आज जो मज़ा दिया, मैं खुश हूँ। अब जब मन करे, चोद लेना मुझे। आज से मैं तेरी हूँ! रोज़ रात को आना।”

हमारा ये रंग-रेलिया रोज़ चलती। सुबह चुपके से किस, दोपहर में उंगली, रात को पूरी चुदाई। कभी किचन में पीछे से, कभी छत पर। रंगोली की चूत ढीली होने लगी, लेकिन मज़ा दोगुना। अचानक एक दिन कंगना ने हमें रंगे हाथों पकड़ लिया। हम नंगे लेटे थे, मेरा लंड रंगोली की चूत में। “Virgin Cousin Bahan Chudai”

कंगना चिल्लाई, “ये क्या कर रहे हो भैया! मम्मी-पापा को बता दूँगी!” हम हड़बड़ा गये। रंगोली ने चादर ओढ़ ली। मैंने प्यार से बुलाया, “कंगना बिटिया, आ जा… किसी को मत बताना। तू भी मज़ा लेगी।” कंगना 18 की, 5 फीट 2 इंच, रंगोली से भी ज्यादा गोरी, बूब्स 36 के भारी। मैंने उसे गोद में बिठाया, उसके बूब्स दबाने लगा।

“छोड़ो भैया… शरम आ रही!” वो नखरे कर रही थी, लेकिन आँखों में चमक। मैंने धीरे से उसकी पैंटी में हाथ डाला, चूत गीली मिली। उंगली हिलाई, क्लिट पर रगड़ा। “ओह्ह… भैया… क्या कर रहे?” वो गरम होने लगी, सिसकारियाँ लेने लगी। बोली, “शरम नहीं आती? अपनी बहनों को चोद रहे हो!”

मैंने हँसकर कहा, “तूने मेरा लंड देख लिया ना? इतना मोटा, अब चोदूँगा भी! मज़ा आएगा।”

वो शरमाई, “नहीं… चुदवाऊँगी नहीं, लेकिन चूस लूँगी। बस!”

हमारी जान में जान आ गयी! मैंने लंड निकाला – अभी भी सीधा, चमचमाता। उसके मुँह में ठूँस दिया। कंगना लॉलीपॉप की तरह चूसने लगी – चख-चख! जीभ घुमाती, गेंदें चाटती। “मम्म्म… स्वादिष्ट!” मैंने रंगोली को इशारा किया, “इसकी चूत चाट, उंगली डाल!” रंगोली ने कंगना की टांगें फैलाईं, जीभ से चूत चाटना शुरू किया।

कंगना का रस टपक रहा था, कमर उछल रही। “आह्ह रंगोली दीदी… मार डालो!” मैं मजे ले रहा, दोनों बहनों की सेवा। कंगना ने पहली बार सारा सीमेन गटक लिया – गरम, गाढ़ा। बोली, “कितना गर्मागर्म और टेस्टी! रोज़ पिलाओ भैया।” मैंने पूछा, “चूसना इतना अच्छा लगता क्यों?”

बोली, “मम्मी रोज़ पापा का चूसती हैं रात को, मैंने छुपकर देखा! कभी चूत में लेती भी देखी।”

लंड फिर खड़ा हो गया – और मोटा। मैंने कहा, “चाची चूसने के बाद चूत में भी लेती होंगी, और मज़ा आता है! तू भी ले।”

कंगना बोली, “धीरे-धीरे डालना, दर्द न हो! कुंवारी हूँ ना।”

मैंने उसे लिटाया, गर्म लंड उसकी चूत पर रगड़ा – क्लिट पर घुमाया। वो सिसक रही, “डालो ना भैया…” ज़ोरदार झटका! 4 इंच अंदर। “आह्ह्ह… ओओओ भैया, फट रही चूत!” “घबराओ मत, अब मज़ा ले!” दूसरा लंबा झटका – पूरा अंदर! “ओह्ह्ह… मार डालोगे! रस निकल आया!”

मैंने अनसुना किया, पिस्टन की तरह चोदने लगा – धड़-धड़! चूत टाइट रस बह रहे। रंगोली उसके बूब्स चूस रही। 30 मिनट की जोरदार चुदाई – अलग पोज़, ऊपर बैठाकर उछाल-उछाल। आखिर में चूत पानी से भर दी, कंगना तीन बार झड़ी। वो थककर लिपट गयी, “भैया, अब रोज़ चोदना। दीदी के साथ शेयर करूँगी।”

कुछ दिन कंगना की चाल ही बदल गयी – कमर लचकाने लगी, नजरें लंड पर। फिर जब तक वहाँ रहा, दोनों बहनों को बारी-बारी चोदता रहा। कभी रंगोली को डॉगी स्टाइल में पीछे से, कंगना मुँह में। कभी तीनों मिलकर थ्रीसम करते – एक चूत चाटते, दूसरी चूसते, लंड पर वार-वार। बेड गीला, कमरा चुदाई की महक से भरा।

छोटी बहनों को भी छेड़ा, लेकिन वो डर गयीं। रंगोली और कंगना आज भी मेरी रंडियाँ हैं। जब भी गाँव जाता हूँ, चुदाई का दौर शुरू – होटल में, खेतों में, कार में। कभी एनल भी ट्राय किया, दोनों की गांड फाड़ी। क्या मज़ा है यार…

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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