रात में चाची की प्यास बुझाने लगा भतीजा

aunty nephew chudai kahani

गर्मियों की वो रात थी। गांव में बिजली गुल हो चुकी थी, पंखा रुका हुआ था और हवा में उमस भरी थी। मैं, विकास, 22 साल का जवान लड़का, शहर से छुट्टियां मनाने चाचा के घर आया था। चाचा को काम से बाहर जाना पड़ा था, तो घर में सिर्फ मैं और चाची थीं। Aunty Nephew Chudai Kahani

चाची का नाम रौशनी था। उम्र करीब 35 साल, लेकिन देखने में ऐसी लगती थीं जैसे अभी-अभी जवानी के पूरे रंग में हों। गोरा रंग, लंबे काले बाल, भरी हुई बॉडी – कमर पतली, कूल्हे चौड़े और छाती ऐसी कि ब्लाउज हमेशा तना रहता। गांव में वो साड़ी पहनती थीं, और साड़ी का पल्लू जब हल्का सा सरकता, तो मन डोल जाता।

मैं बचपन से उन्हें देखता आया था, लेकिन इस बार कुछ अलग था। शायद मैं बड़ा हो चुका था, या शायद चाची की नजरें भी अब मुझ पर कुछ ज्यादा देर तक ठहरने लगी थीं। रात का खाना खाकर हम दोनों छत पर आ गए। नीचे कमरे में घुटन थी, ऊपर थोड़ी हवा चल रही थी।

चाची ने चारपाई बिछाई, एक ही चारपाई पर हम दोनों लेट गए। दूर-दूर। बीच में थोड़ी सी जगह। चांदनी रात थी, हल्की रोशनी में चाची का चेहरा चमक रहा था। वो साड़ी में थीं, पेटीकोट और ब्लाउज। लेटते ही साड़ी थोड़ी ऊपर सरक गई, गोरी जांघें दिखने लगीं। मैंने नजरें फेर लीं, लेकिन दिल तेज धड़कने लगा।

“विकास, नींद नहीं आ रही क्या?” चाची ने धीमी आवाज में पूछा। उनकी आवाज में कुछ मिठास थी, कुछ नरमी।

“हां चाची, गर्मी बहुत है।” मैंने कहा और करवट बदल ली। अब मैं उनका सामना कर रहा था।

वो मुस्कुराईं। “हां, इस बार गर्मी ज्यादा है ना। तू शहर में तो एसी में रहता है, यहां सहन नहीं होता होगा।”

बातें शुरू हुईं। पहले आम बातें – मेरी पढ़ाई, शहर की जिंदगी, उनकी घर-गृहस्थी। फिर धीरे-धीरे बातें पर्सनल हो गईं। चाची ने बताया कि चाचा अक्सर बाहर रहते हैं, घर में अकेलापन लगता है। उनकी आंखों में कुछ उदासी थी, लेकिन साथ में कुछ और भी – जैसे कोई चाहत जो सालों से दबी हुई हो।

“तू बड़ा हो गया है विकास,” चाची ने कहा और मेरे कंधे पर हाथ रखा। उनका स्पर्श गर्म था। “पहले छोटा सा था, अब तो जवान मर्द लगता है।”

मेरा दिल जोर से धड़का। मैंने हिम्मत करके कहा, “चाची, आप भी तो वैसी ही हैं जैसे पहले। और भी ज्यादा खूबसूरत।”

वो हल्का सा शरमाईं, लेकिन मुस्कुराहट नहीं गई। “अच्छा जी? तुझे तेरी चाची अच्छी लगती है?”

मैंने हां में सिर हिलाया। अब हम करीब आ गए थे। चारपाई पर जगह कम थी, हमारे बदन छूने लगे। चाची की छाती मेरे सीने से सटी थी। उनकी सांसें गर्म मेरे गाल पर लग रही थीं। “विकास…” चाची ने धीरे से मेरा नाम लिया और मेरे चेहरे की तरफ देखा। उनकी आंखों में चमक थी, होंठ हल्के से खुले थे। मैं समझ गया।

मैंने धीरे से अपना हाथ उनकी कमर पर रखा। वो सिहर उठीं, लेकिन पीछे नहीं हटीं। बल्कि करीब और खिंच आईं। मैंने उनके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। पहले हल्का सा, फिर गहरा किस। चाची ने भी साथ दिया। उनकी जीभ मेरी जीभ से मिली, दोनों के मुंह में एक-दूसरे का रस घुलने लगा।

किस करते-करते मेरा हाथ उनकी पीठ पर फिरने लगा, फिर कमर पर, फिर कूल्हों पर। चाची के कूल्हे मुलायम थे, भरे हुए। मैंने उन्हें दबाया तो वो सिसकारी सी ली, लेकिन किस नहीं तोड़ा। काफी देर तक हम ऐसे ही किस करते रहे। चाची की सांसें तेज हो गई थीं। मैंने धीरे से उनका पल्लू सरकाया।

ब्लाउज के ऊपर से उनकी छाती दबाने लगा। वो इतनी बड़ी और नरम थी कि हाथ में समाती नहीं थी। चाची ने खुद अपना ब्लाउज खोल दिया। अंदर लाल ब्रा थी। मैंने ब्रा के हुक खोले और उनकी छातियां बाहर आ गईं। गोरी-गोरी, गुलाबी निप्पल। मैंने एक को मुंह में लिया, चूसने लगा।

चाची की सिसकारियां तेज हो गईं। “आह… विकास… कितना अच्छा लग रहा है…” चाची ने भी मेरा शर्ट उतारा, फिर पैंट। मेरा लंड अब पूरी तरह तन चुका था। चाची ने उसे हाथ में लिया और सहलाने लगीं। “वाह विकास, कितना बड़ा और मोटा है तेरा…”

वो मुस्कुराईं और नीचे झुककर उसे मुंह में ले लिया। गर्म, गीला मुंह। जीभ फिर रही थी ऊपर। मैं तो स्वर्ग में पहुंच गया। फिर मैंने चाची की साड़ी पूरी उतारी। सिर्फ पेटीकोट और पैंटी बची। मैंने पेटीकोट का नाड़ा खींचा, वो नीचे गिर गया। अब चाची सिर्फ लाल पैंटी में थीं।

उनकी चूत पर हल्के बाल थे, पैंटी गीली हो चुकी थी। मैंने पैंटी उतारी और चाची पूरी नंगी हो गईं। उनकी चूत गुलाबी, रस से भरी हुई। मैंने उंगली डाली, अंदर गर्म और चिकना था। चाची ने आंखें बंद कर लीं और कमर उछालने लगीं। “विकास… अब नहीं सहन होता… अंदर डाल ना…” चाची ने धीमी, कामुक आवाज में कहा।

मैं उनके ऊपर आ गया। लंड को चूत के मुंह पर रखा और धीरे से दबाया। अंदर सरकता गया। चाची की चूत टाइट थी, गर्म थी, रस से भरी। पूरा अंदर गया तो चाची ने जोर से सिसकारी ली। “आह… कितना अच्छा लग रहा है विकास… कितने दिन बाद…”

मैं धीरे-धीरे धक्के मारने लगा। चाची भी कमर उठा-उठाकर साथ दे रही थीं। चारपाई चरमराने लगी। चाची की छातियां उछल रही थीं, मैं उन्हें दबाता जा रहा था। चाची की आंखें बंद थीं, मुंह से सिसकारियां और छोटी-छोटी चीखें निकल रही थीं। “हां विकास… और जोर से… आह… मजा आ रहा है…”

हमारा रिदम बढ़ता गया। पसीना छूट रहा था, लेकिन मजा अलग लेवल का था। चाची ने मुझे कसकर पकड़ लिया, नाखून मेरी पीठ पर फिर रहे थे, लेकिन हल्के से, कोई दर्द नहीं। सिर्फ प्यार और चाहत। फिर चाची ऊपर आ गईं। वो मेरे ऊपर सवार हो गईं और लंड को फिर से अंदर लिया।

अब वो खुद कमर हिलाने लगीं। ऊपर-नीचे, गोल-गोल। उनकी छातियां मेरे मुंह के सामने लटक रही थीं, मैं उन्हें चूस रहा था। चाची की सांसें तेज, आवाजें कामुक। “विकास… तू कमाल का है… तेरी चाची को स्वर्ग दिखा रहा है…” काफी देर तक ऐसे चलता रहा। चाची पहले झड़ीं।

उनकी चूत ने लंड को जोर से जकड़ा, रस छूट गया। वो कांपने लगीं, आंखें बंद, मुंह से लंबी सिसकारी। “आह… आ गया… आ गया मेरा…” फिर मैंने उन्हें फिर से नीचे किया और तेज-तेज धक्के मारे। अब मेरा भी आने वाला था। चाची ने पैरों से मुझे कस लिया। “अंदर ही छोड़ दे विकास… कोई बात नहीं…”

मैं झड़ा। गर्म वीर्य चाची की चूत के अंदर छूट गया। दोनों थककर एक-दूसरे के ऊपर गिर गए। पसीने से तर, सांसें तेज। चाची ने मुझे किस किया और मुस्कुराईं। “विकास, ये रात मेरी जिंदगी की सबसे अच्छी रात थी।” हम ऐसे ही लेटे रहे। चांदनी में एक-दूसरे को देखते, सहलाते। “Aunty Nephew Chudai Kahani”

थोड़ी देर बाद चाची फिर शरारत करने लगीं। उनका हाथ फिर मेरे लंड पर गया। “अभी और मजा चाहिए?” मैं मुस्कुराया। “जितना तुम चाहो चाची।” दूसरा राउंड शुरू हुआ। इस बार और धीरे, और प्यार से। मैंने चाची की चूत को जीभ से चाटा। वो पागल हो गईं। “आह विकास… ये क्या कर रहा है… कितना अच्छा लग रहा है…”

मैंने उनकी गांड भी सहलाई, उंगली डाली, लेकिन सब हल्के से, सिर्फ मजा देने के लिए। चाची ने भी मेरा लंड चूसा, गले तक लिया। फिर मैंने उन्हें घोड़ी बनाया। पीछे से अंदर डाला। चाची के कूल्हे इतने मुलायम थे कि धक्के मारते मजा ही आ रहा था। मैं उनके बाल पकड़कर हल्के से खींचता, वो और जोर से कमर पीछे करतीं। “हां विकास… ऐसे ही… तेरी चाची तेरी है आज…”

तीसरा राउंड हमने साइड में लेटकर किया। मैं पीछे से, चाची का एक पैर ऊपर उठाकर। ऐसे हम बातें भी करते रहे। चाची ने बताया कि वो मुझे काफी समय से चाहती थीं, लेकिन हिम्मत नहीं हुई। मैंने कहा कि मैं भी उन्हें हमेशा से पसंद करता था।

सारी रात हमने चार-पांच बार सेक्स किया। हर बार नया तरीका, नया मजा। कभी तेज, कभी धीरे। कभी चाची ऊपर, कभी मैं। सुबह होने तक हम थक चुके थे, लेकिन खुश। चाची मेरे सीने पर सिर रखकर सो गईं। मैं उनके बालों में उंगलियां फिराता रहा।

सुबह जब आंख खुली तो चाची मुस्कुरा रही थीं। “विकास, ये राज हमारा राज रहेगा ना?” मैंने उन्हें किस किया। “हमेशा चाची। और ऐसी रातें और आएंगी।” चाची ने शरमाते हुए हां कहा। उस दिन से हमारी जिंदगी बदल गई। जब भी मौका मिलता, हम एक-दूसरे में खो जाते। प्यार, चाहत और सेक्स का वो रिश्ता जो किसी को पता नहीं चला। बस हम दोनों जानते थे कि वो रात कितनी खास थी।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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