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हॉट प्ले विद सेक्सी भाभी की कहानी में मेरे पड़ोस में रहने वाली मस्त भाभी मेरी बीवी की सहेली है. लॉकडाउन में मैं अपने घर में अकेला, वो अपने घर में अकेली फंस गयी.
फ्रेंड्स, मैं राहुल!
मैं 30 साल का मैरिड युवक हूँ और दिल्ली में एक सोसाइटी की एक बिल्डिंग के फ्लैट में अपनी वाइफ के साथ रहता हूँ.
हमारी शादी को 2 साल हुए थे.
मैं एक प्राइवेट कंपनी में जॉब करता हूँ.
मैं आपको एक सच्ची हॉट प्ले विद सेक्सी भाभी की कहानी सुना रहा हूँ.
मार्च 2020 में मेरी वाइफ अपने मायके चली गई थी और लॉक डाउन लग गया था.
हमारे फ्लैट के सामने वाले फ्लैट में एक भाभी रहती थीं, वे 25 साल के आस-पास की रही होंगी.
भाभी पंजाब से थीं.
भाभी की एक 2 साल की बेटी भी थी.
उनके पति मेरी ही कंपनी में जॉब करते थे.
लॉकडाउन में उनके पति कंपनी के काम से बाहर गए थे और वहीं फंस गए.
हमारे फ्लोर के 4 फ्लैट्स में से 2 फ्लैट वाले लोकल होने के कारण घर चले गए.
उस बिल्डिंग में बस हम दो लोग ही बच गए थे.
भाभी से मेरी वाइफ रेणु की बहुत अच्छी फ्रेंडशिप हो गई थी इसलिए मेरा भी उनसे थोड़ी बहुत हैलो-हाय हो जाती थी.
भाभी दिखने में एक बहुत ही खूबसूरत महिला थीं.
उनके दूध तो ऐसे, मानो उनमें दुनिया का हर मर्द खो जाए, चूचों से नजर हट कर उनकी गांड पर ना जाए, ऐसा हो ही नहीं सकता था.
भाभी की गांड भी जबरदस्त हाहाकारी थी.
जब वे अपनी गांड को ठुमका कर निकलती थीं तो उन्हें देखने वाले अपने लौड़े को न सहलाएं, ऐसा होना नामुमकिन था.
वैसे पहले मैंने उनके बारे में कभी ऐसा कुछ नहीं सोचा था.
बात उस दिन की ही है, जिस दिन लॉकडाउन के पहले जनता कर्फ्यू लगाया गया था.
मैं जनता कर्फ्यू के अगले दिन ऑफिस गया और उधर से 8 बजे शाम को वापस आया और टीवी में देखा तो पता चला कि अब अगले 24 दिन तक सब बंद कर दिया गया था.
मैंने फ़ोन से मालूम किया तो पता चला कि ऑफिस की भी छुट्टी हो गई है.
अब मैंने भी सोचा कि मैं भी घर चला जाता हूँ.
मैंने जल्दी जल्दी सामान पैक कर लिया और सुबह सुबह ही मैंने जाने की तैयारी कर ली.
इस बार कुछ ज्यादा सामान हो गया था क्योंकि कुछ जरूरत का सामान भी ले लिया था.
तभी वाइफ का फ़ोन आया और उसने कहा कि जो खराब होने वाला सामान है, वह सब प्राक्षी (भाभी का नाम) को दे दो, मार्केट बंद रहेगा … तो उसके काम में आ जाएगा.
मैंने मॉर्निंग में भाभी के फ्लैट की बेल बजाई.
उस वक्त 5 बजे का समय था.
भाभी नाइटी में ही बाहर आईं.
क्या कयामत लग रही थीं, उनकी दोनों चूचियां बिना ब्रा के ऐसे हिल रही थीं कि मेरा मन हुआ कि अभी के अभी भाभी को लिटा कर उनके दूध पी जाऊं.
मैंने उन्हें सामान दिया और घर जाने की कहकर निकल गया.
मेरी वाइफ ने प्राक्षी भाभी को बता दिया था कि मैं सामान देने आऊंगा तो उन्होंने कुछ ज्यादा पूछताछ नहीं की.
मैं कुछ ही दूर गया था कि पुलिस वालों ने बॉर्डर पर जाने से मना कर दिया.
एक इंस्पेक्टर ने कहा कि 21 दिन घर से बाहर नहीं निकलना, नहीं तो पीटे जाओगे.
अब मैं अपने फ्लैट पर वापस आ गया.
मैंने वापस से भाभी के फ्लैट की बेल बजाई.
इस बार भाभी ने काफी देर बाद दरवाजा खोला.
मुझे आया देख कर भाभी ने हैरानी से पूछा- क्या हुआ? आप तो जा रहे थे!
मैं- पुलिस वाले नहीं जाने दे रहे.
भाभी यह सुनकर खुश हो गईं और हंसती हुई बोलीं- बहुत अच्छा हुआ. मैं तो अपनी बेटी रूही के साथ घर में अकेली ही रह गई थी … तो मुझे बड़ा डर लग रहा था. अच्छा हुआ कि आप वापस आ गए.
मैं उन्हें देख रहा था और उनकी लेने की सोच रहा था.
उन्होंने मुझसे अन्दर आने को कहा.
मैं आया तो वे बोलीं- आज नाश्ता यहीं कर लो.
मैंने मना किया, लेकिन वे नहीं मानीं.
भाभी बोलीं- आपने तो सुबह सामान दे दिया, अब कैसे बनाओगे? यहीं खा लो. वैसे भी कोई काम नहीं बचा. अब खाना और सोना ही है. मैं तो हूँ ही खाली … सब कुछ काम कर लूँगी.
मैं चुप रहा.
भाभी किचन में जाने उपक्रम करती हुई बोलीं- ओके, मैं नाश्ता बनाती हूँ, आप बैठिए.
मैंने कहा- नहीं … आप जब तक नाश्ता बनाएं, मैं फ्रेश होकर आता हूँ.
उन्होंने ओके कहते हुए कहा- दरवाजा यूं ही उड़का कर चले जाइएगा.
मैंने हां में सर हिलाया और अपने फ्लैट में जाकर रेडी हो गया.
भाभी ने मुझे फ़ोन करके बुलाया- नाश्ता बन गया!
मैं आ गया और हम दोनों ने एक साथ बैठ कर नाश्ता किया.
फिर बहुत देर तक इधर-उधर की बातें होती रहीं.
कुछ देर बाद उनकी बेटी रूही उठ गई.
भाभी ने रूही को रेडी किया और कहा- आप इसको देखिए, मैं नहा कर आती हूँ.
मैं और रूही खेलने लगे.
भाभी नहा कर आईं और बातें करने लगीं.
फिर 11 बजे मैं भी अपने रूम में जाकर नहा कर काम में लग गया.
एक बजे भाभी ने मुझे फ़ोन करके खाना खाने के लिए बुलाया.
खाना खाने के बाद रूही को सुलाकर हम दोनों टीवी देखने लगे.
इधर उधर की बातों को करते करते ही हम दोनों एक दूसरे से काफी अच्छी तरह से घुल-मिल गए.
मैं- आपके पति की आपसे कैसी बॉन्डिंग है?
भाभी हंस कर बोलीं- ये रूही इसका रिजल्ट है. कैसी बॉन्डिंग लगती है आपको?
मैं- हम्म … फिर तो बहुत अच्छी बॉन्डिंग है!
भाभी- कैसे?
मैं- शादी के तुरंत बाद हो गई ना … ज़्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी.
भाभी हंसने लगीं.
भाभी ने हल्की हंसी के साथ पूछा- आप कब से स्टार्ट कर रहे हो .. आहा हह.
मैं उनकी उन्मुक्त हंसी सुनकर जरा विचलित हो गया था, मैंने पूछा- स्टार्ट मतलब?
भाभी- सॉरी प्लानिंग को लेकर तो मुझे रेणु (मेरी वाइफ) ने बताया था.
मैं- क्या?
भाभी इस बार और जोर से हंसती हुई बोलीं- यही कि निशाना सही नहीं लग रहा .. हा हा हा.
मैंने मज़े लेते हुए पूछा- कौन सा निशाना?
भाभी- वही जो संडे को 3-3 बार लगाते हो … हा हा हा!
मैं- रेणु ये सब भी बताती है क्या?
भाभी- नहीं .. मुझे काला जादू आता है हा हा हा.
मैं- बाप रे, आप लोग कैसी कैसी बातें करती हो .. हा हा हा.
भाभी- रेणु ने तो मुझे और भी कुछ बताया था!
तभी मेरा कॉल आ गया.
मैं उठ कर अपने रूम में चला गया.
दिन के 3 बज गए थे, तो मैं सो गया.
फिर मैं सीधे 7 बजे उठा तो भाभी ने बेल बजाई.
मैं- आइए, मैं चाय पिलाता हूँ … ओह पर दूध तो आपके पास है .. हह सॉरी, आपके यहां रखा है.
भाभी- अच्छा कौन सा चाहिए .. लाती हूँ निकाल कर … फ्रिज से .. हा हा हा!
मैं- हा हा हा … ले आइए फ्रिज से!
भाभी हंसती हुई बोलीं- भैया आप भी काफी मज़ाक कर लेते हो!
मैं- आपको देखकर हंसना आ जाता है.
भाभी- क्यों मुझमें ऐसा क्या है? हा हा हा!
इसी हंसी मजाक में समय अच्छा पास हो रहा था.
फिर 8 बजे भाभी खाना बनाने लगीं.
करीब 9 बजे खाना खाकर हम दोनों छत पर घूम रहे थे.
रूही वहां खेलने लगी और कुछ देर बाद वह उधर ही सो गई.
भाभी ने उसके लिए एक गद्दा पहले से ही बिछाया था.
अब भाभी ने मुझे चिढ़ाया- भैया, रेणु की याद तो नहीं आ रही … हा हा हा?
मैं- आप हो तो खाना-नाश्ता-सुबह तो मिल रहा है.
भाभी- अरे सुबह शाम की नहीं … मैं तो ये कह रही थी कि छत पर घूमते-घूमते जो आप लोग अंधेरे में फायदा उठाते थे … वह सब याद तो नहीं आ रहा है हा हा हा..
मैंने चूतिया बनते हुए पूछा- कौन सा फायदा?
भाभी ने आंखें नचाते हुए कहा- हम्म … मुझे रेणु ने सब बताया है.
मैं- सच में?
भाभी- हां कि आप हूर कुरकुरा पूरा होने पर एक … वाला गेम खेलते हो.. हह
मैं- रेणु भी ना … पूरी पागल है.
भाभी- चलो ना हम भी खेलते हैं वही खेल … हा हा हा
मैं एकदम से यह सुनकर अवाक रह गया था कि रसभरी जलेबी खुद मेरे मुँह में आने को मचल रही है.
भाभी- चलो न खेलते हैं!
मैं- नहीं, आप बुरा मान जाओगी.
भाभी- नहीं भैया, वैसे भी 20 दिन हमको अकेले ही रहना है. इसमें क्या बुरा मानना?
मैं- नहीं यार भाभी!
भाभी- प्लीज़ ना प्लीज़ ना.
मैं- ओके चलो भागो, मैं आपको पकड़ूँगा. अंधेरे में 30 सेकंड कुछ भी कर सकते हो बस … इसमें हिलना नहीं है. यदि हिलीं तो आप गेम हार जाओगी. यही रूल मुझ पर भी चलेगा.
भाभी- ओके.
अब भाभी भागीं.
अंधेरे में मैं कुछ भी नहीं कर पाया.
भाभी- देखा .. हा हा हा मैं जीत गई. रेणु तो ऐसे ही जानबूझ कर हार जाती होगी आपसे हा हा हा.
मैं- ओके इस बार मैं भागता हूँ.
मैं भागा और जानबूझ कर अंधेरे में भाभी के हाथ में आ गया.
भाभी ने जोर से मेरे पेट पर गुदगुदी की. मैं कूदने लगा, इससे मैं हिल गया और हार गया.
भाभी- मैं जीत गई … या …
मैं- ओके. अब आपकी बारी.
भाभी भागीं और मैंने इस बार बिना किसी लाग लपेट के उन्हें पकड़ लिया.
मैंने उनको बैक साइड से पकड़ लिया था और उनके पेट पर गुदगुदी की.
वे एकदम से स्टैचू सी बनकर 30 सेकंड खड़ी रहीं.
मतलब खेल में मैंने गुदगुदी की और वे नहीं हिलीं तो उनकी जीत हो गई.
भाभी- लो 30 सेकंड हो गए, मैं जीत गई … हह एएएए. मैं 3 बार जीत गई … चलो अब आपका टर्न.
मैं- ओके.
मैं हॉट प्ले विद सेक्सी भाभी के लिए भागा.
भाभी ने पकड़ लिया और वे मेरा शॉर्ट नीचे करने लगीं. मैंने रोकने का प्रयास किया तो मैं हिल गया और हार गया.
भाभी- ये … मैं जीत गई .. हह. बेचारी रेणु जाने कैसे हार जाती है … इतनी सी छत में मैं 3-3 बार जीत गई!
मैं- अच्छा जी, तो आप चाहती हैं कि मैं रेणु जैसे खेलूँ!
भाभी- तो वह आपकी मर्ज़ी … आप बस मुझे हरा कर दिखाओ!
मैं- ओके, चलो इस बार देखता हूँ.
भाभी- हां अब मेरी बारी है.
भाभी ने दौड़ लगाई. मैं उन्हें पकड़ने के लिए दौड़ा और अंधेरे में पकड़ लिया.
मैं- अब?
भाभी- आपकी मर्ज़ी!
मैंने दोनों हाथों को गर्दन से बूब्स पर ले गया. वह स्टैचू बनी खड़ी रहीं.
मेरा लंड एकदम भाभी के चूतड़ों की दरार में घुस कर टक्कर मार रहा था.
भाभी तीस सेकंड तक जरा भी नहीं हिलीं और मैं हार गया. लेकिन भाभी ने अपनी जीत की घोषणा करते हुए मेरे लौड़े को अपनी गांड से रगड़ दिया था, जो कि एक चुदने का सिग्नल था.
दोस्तो, आगे क्या हुआ … वह मैं हॉट प्ले विद सेक्सी भाभी की कहानी के अगले भाग में लिखूँगा.
हॉट प्ले विद सेक्सी भाभी की कहानी का अगला भाग: लॉकडाउन में पत्नी की सहेली की चूत चोदी- 2
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