रीना दीदी और मेरा सिक्रेट-3

Naraaz didi sharabi hui

पिछला भाग पढ़े:- रीना दीदी और मेरा सिक्रेट-2

भाई-बहन सेक्स कहानी अब आगे-

रीना दीदी रोती हुई कमरे से बाहर चली गई जब मैंने उनकी पैंटी बाजू फेंकी। मेरे हाथ कांप रहे थे। दिमाग बिल्कुल खाली हो गया था। मैंने जल्दी से अपनी पैंट पहनी और नीचे भागा, लेकिन तब तक वह टैक्सी लेकर जा चुकी थी।

मैंने तुरंत उन्हें कॉल करना शुरू किया… एक बार, दो बार, बार-बार… लेकिन उन्होंने मेरा एक भी कॉल रिसीव नहीं किया। हर रिंग के साथ मेरा दिल और तेज धड़क रहा था। मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि मैंने क्या कर दिया… और अब क्या करूं।

मैं वापस अपने कमरे में आकर बेड पर बैठ गया। सिर दोनों हाथों में पकड़ कर बस एक ही बात सोच रहा था — काश वह जल्दी वापस आ जाएं। हर मिनट घंटों जैसा लग रहा था।

पांच घंटे बाद गेट की आवाज आई। मैं तुरंत उठ कर नीचे गया। रीना दीदी वापस आ चुकी थी… लेकिन उनका चेहरा देखते ही मेरा दिल बैठ गया।

उनकी आंखें पूरी लाल हो चुकी थी, जैसे वह पूरे समय रोती रही हों। उन्होंने मेरी तरफ देखा भी नहीं। सीधा अपने कमरे में चली गई। मैं धीरे-धीरे उनके पीछे गया। दरवाज़ा आधा खुला था। अंदर देखा तो वह बिना कुछ बोले अपने कपड़े बैग में पैक करने लगी।

मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। मैं तुरंत अंदर गया और बोला, “दीदी…” लेकिन उन्होंने मुझे पूरी तरह नजर-अंदाज कर दिया।

मैं उनके पास गया, कुछ बोलने की कोशिश की… तभी उन्होंने बिना मेरी तरफ देखे सख्त आवाज़ में कहा, “शर्म आनी चाहिए तुम्हें गोलू, तुम अपनी बड़ी बहन के कपड़ों के साथ गंदी हरकत कर रहे थे, तुम अपनी बड़ी बहन को चोदने की सोच रहे थे। शर्म आनी चाहिए तुम्हें!”

मेरे शरीर में जैसे जान ही नहीं रही। मैं वहीं खड़ा रह गया… कुछ बोलने की हिम्मत ही नहीं हुई। उन्होंने पैकिंग जारी रखी, जैसे मैं वहां मौजूद ही ना हूं। कमरे में सिर्फ बैग की चेन की आवाज और मेरी तेज धड़कनों की आवाज गूंज रही थी।

कुछ ही देर बाद उन्होंने बैग बंद किया, उसे उठाया और बिना मेरी तरफ देखे बाहर निकल गई। मैं उनके पीछे-पीछे भागा, लेकिन उन्होंने एक बार भी मुड़ कर नहीं देखा।

गेट के बाहर जाकर उन्होंने एक टैक्सी रोकी, अपना बैग रखा और उसमें बैठ गई। मैं वहीं खड़ा रह गया… जैसे मेरे पैरों में जान ही नहीं थी। टैक्सी धीरे-धीरे आगे बढ़ी… और फिर मेरी आंखों के सामने से गायब हो गई।

मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि अब क्या करूं। दिमाग सुन्न पड़ चुका था। मैंने घबरा कर उनका फोन मिलाया, लेकिन इस बार भी कोई जवाब नहीं मिला। कुछ सोच कर मैंने उनकी एक दोस्त को कॉल किया। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। फोन बजा… और इस बार कॉल उठ गया।
मैं कुछ बोलता उससे पहले ही उधर से आवाज आई, “गोलू… रीना ने मुझे कॉल किया था… वो कह रही थी कि वो मेरे पास रहना चाहती है… और वो रो रही थी।” मेरे हाथ से फोन लगभग छूट ही गया।

फिर उसने पूछा, “क्या हुआ तुम दोनों के बीच?”

मेरे गले में जैसे शब्द अटक गए। मैं सच बताना चाहता था… लेकिन हिम्मत ही नहीं हुई। मैंने खुद को संभालते हुए धीरे से कहा, “कुछ खास नहीं… बस थोड़ा सा झगड़ा हो गया था।”

कुछ सेकंड के लिए उधर खामोशी छा गई, फिर उसने कहा, “देखो गोलू, अभी मेरी रूममेट कुछ दिनों के लिए गांव गई हुई है। तब तक रीना मेरे साथ रह सकती है। लेकिन उसके आने से पहले तुम्हें ये सब सुलझाना पड़ेगा…”

मैंने बस “ठीक है” कहा और कॉल काट दिया।

उस रात मैं बिस्तर पर लेटा रहा। लेकिन मुझे नींद ही नहीं आई। मैं करवटें बदलता रहा, छत को घूरता रहा और दिमाग में बस वही सब घूमता रहा जो हुआ था। हर बार आंखें बंद करता तो रीना दीदी का रोता हुआ चेहरा सामने आ जाता… उनकी लाल आंखें… उनका दर्द… उनके शब्द। मुझे अपने आप पर गुस्सा आ रहा था। बार-बार एक ही बात दिमाग में आ रही थी — काश मैं खुद को रोक लेता। काश मैंने अपनी गलत सोच को कंट्रोल कर लिया होता, तो आज ये सब नहीं होता।

अगले दिन मैंने कॉलेज जाने का सोचा भी नहीं। मेरा दिमाग कहीं और ही अटका हुआ था। मुझे बस एक ही बात समझ आ रही थी — अगर आज भी मैंने उनसे बात नहीं की, तो शायद सब हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। मैं सीधे उनकी कंपनी के बाहर पहुंच गया। मुझे पता था वो मुझे घर पर नजरअंदाज कर सकती हैं, फोन पर भी, लेकिन यहां नहीं। यहां वो मुझसे भाग नहीं पाएंगी।

मैं लॉबी में खड़ा था। सामने कांच के काउंटर पर बैठी महिला ने उनका नाम सुन कर उन्हें फोन किया। मैं वहीं खड़ा इंतजार करता रहा। हर सेकंड भारी लग रहा था।
कुछ मिनट बाद वह लॉबी में आई।

उन्होंने काली स्कर्ट और सफेद शर्ट पहनी हुई थी। सफेद शर्ट उनके शरीर से इतनी चिपकी हुई थी कि कपड़े के नीचे का हर उभार साफ दिख रहा था। उनका सीना शर्ट के अंदर भरा हुआ और उभरा हुआ लग रहा था, जैसे कपड़ा उसे पूरी तरह संभाल नहीं पा रहा हो। हर कदम के साथ उनके सीने में हल्की-हल्की हरकत हो रही थी, और शर्ट उस हरकत को छुपा नहीं पा रही थी। ऐसा लग रहा था जैसे कपड़े के अंदर सब कुछ जिंदा हो, सांसों के साथ ऊपर-नीचे होता हुआ।

वह धीरे-धीरे मेरे पास आई और बिल्कुल करीब आकर रुकी। फिर उन्होंने थोड़ा झुककर धीमी लेकिन गुस्से भरी आवाज़ में कहा, “तुम यहां क्यों आए हो?”

मैंने उनकी आंखों में देखते हुए धीमी आवाज़ में कहा, “दीदी, मेरे साथ वापस चलिए। आपको अपने दोस्तों के पास रहने की जरूरत नहीं है।”

उन्होंने तुरंत और ज्यादा गुस्से में मेरी तरफ झुक कर कहा, “क्यों? ताकि तुम मुझे चोद सको?”

उनकी ये बात सुन कर मेरे अंदर भी गुस्सा आ गया। मैंने दबी हुई आवाज़ में लेकिन सख्ती से कहा, “ऐसा मत बोलिए दीदी। मुझे पता है मुझसे गलती हुई है… लेकिन मैं सिर्फ आपको चोदना नहीं चाहता। मैं आपको पसंद करता हूं और मैं आपके साथ रहना चाहता हूं।”

इतना सुनते ही उन्होंने गुस्से में हाथ उठाया, जैसे मुझे थप्पड़ मारने वाली हों। लेकिन आस-पास लोगों की नज़र पड़ते ही उन्होंने अपना हाथ बीच में ही रोक लिया।
वह दांत भींच कर धीरे से बोली, “तुम ऐसे कैसे सोच सकते हो गोलू? मैं तुम्हारी बड़ी बहन हूं।”

उनकी ये बात सुन कर मैं कुछ सेकंड चुप रहा। फिर मैंने धीरे लेकिन साफ आवाज़ में कहा, “लेकिन दीदी… मैं आपको हमेशा से पसंद करता हूं। सिर्फ आज से नहीं… बहुत पहले से।”

मैंने एक गहरी सांस ली और आगे कहा, “दुनिया में और भी लड़कियां हैं। मैं उनसे बात कर सकता हूं। उनके साथ समय बिता सकता हूं।‌ लेकिन मैं ऐसा नहीं चाहता। मैं बस आपके साथ रहना चाहता हूं। आपके साथ समय बिताना चाहता हूं।”

मेरी बात सुनते ही वह कुछ सेकंड तक मुझे घूरती रही। फिर उनके चेहरे पर और गुस्सा आ गया।

उन्होंने सख्त आवाज़ में कहा, “तुम पागल हो गए हो गोलू? अगर तुम फिर कभी यहां आए ना, तो मैं मम्मी-पापा को सब बता दूंगी!” इतना कह कर उन्होंने मेरी तरफ देखना भी बंद कर दिया और बिना कुछ और बोले वापस मुड़ कर अपने काम की तरफ चली गई।

मैं वहीं खड़ा रह गया, जैसे मेरे अंदर सब कुछ टूट गया हो। उस पल के बाद मुझे समझ ही नहीं आ रहा था कि उनका गुस्सा कैसे कम करूं। मैंने हालात को और भी खराब कर दिया था। जितना सोचता, उतना ही लगता कि अब शायद वह मुझसे कभी बात नहीं करेंगी।

मैंने उन्हें मैसेज करने की कोशिश की बार-बार माफी मांगने के लिए, लेकिन हर बार सिर्फ एक ही जवाब मिला — कोई जवाब नहीं। कुछ देर बाद मुझे एहसास हुआ कि उन्होंने मेरा नंबर ब्लॉक कर दिया था।

मेरे अंदर जैसे सब कुछ खाली हो गया। अब तो उनसे बात करने का भी कोई तरीका नहीं बचा था। मैं बस यही सोचने लगा कि क्या वो कभी मुझसे फिर बात करेंगी भी या नहीं। या सब कुछ यहीं खत्म हो गया था?

दो दिन ऐसे ही गुजर गए… बिना किसी उम्मीद के। लेकिन दूसरे दिन रात को अचानक मेरा फोन बजा। मैंने स्क्रीन देखी… यह उनकी दोस्त का कॉल था।
मैंने तुरंत कॉल उठाया।

उधर से जल्दी-जल्दी आवाज आई, “गोलू, मेरी रूममेट वापस आ गई है, और अगर मकान मालिक को पता चल गया कि हम तीन लोग यहां रह रहे हैं, तो वो हमें निकाल देगा। क्या तुम आ सकते हो और रीना को अपने साथ ले जा सकते हो?”

मैंने बिना एक सेकंड सोचे हां कहा और तुरंत निकल पड़ा। मैंने जल्दी से बाइक निकाली और सीधे उनके दिए हुए पते पर पहुंच गया।

रीना दीदी पहले से ही बिल्डिंग के गेट के सामने खड़ी थी। उनके साथ उनकी दोस्त भी थी। उनके हाथ में बैग था, चेहरा अब भी सख्त था।

मैं बिना कुछ बोले उनके सामने रुका। उन्होंने एक सेकंड के लिए मेरी तरफ देखा। फिर बिना कुछ कहे बाइक पर बैठ गई और अपना बैग संभाल लिया।

मैंने भी कुछ नहीं कहा। बस बाइक स्टार्ट की और वहां से निकल गया। पूरे रास्ते हम दोनों के बीच खामोशी थी। सिर्फ हवा की आवाज और बाइक की गूंज… लेकिन मेरे दिमाग में हजारों बातें चल रही थी।

मैं यही सोच रहा था कि अब सब कैसे ठीक करूं? क्या बोलूं? कैसे उनका गुस्सा कम करूं? हम अभी आधे रास्ते तक ही पहुंचे थे कि अचानक पीछे से उनकी आवाज आई, “गोलू… बाइक रोको।”

मैंने तुरंत ब्रेक लगाया। दिल एक-दम जोर से धड़कने लगा, जैसे अब कुछ बहुत बड़ा होने वाला हो। वो बाइक से उतर कर मेरे सामने आकर खड़ी हो गई। मैं अब भी बाइक पर बैठा हुआ था, और उन्हें देख रहा था।

उन्होंने मेरी तरफ सीधा देखते हुए सख्त आवाज़ में कहा, “मैं तुम्हारे साथ तुम्हारे फ्लैट नहीं जाना चाहती, गोलू।”

मैंने जल्दी से कहा, “दीदी… मैं वही गलती दोबारा नहीं करूंगा।”

उन्होंने तुरंत मेरी बात काटते हुए और ज्यादा सख्त आवाज़ में कहा, “मैं तुम पर भरोसा कैसे करूं, गोलू? पिछली बार भी तुमने वादा किया था, और फिर वही किया। अब मैं तुम पर कैसे भरोसा करूं?”

मैं कुछ सेकंड चुप रहा। फिर धीरे से उनकी आंखों में देखते हुए कहा, “मुझ पर भरोसा मत कीजिए दीदी। बस इस बार मेरे साथ चलिए। जब आपको नया फ्लैट मिल जाए, आप वहां चली जाना। लेकिन अभी के लिए मेरे साथ चलिए।”

मैं लगभग आधे घंटे तक उन्हें समझाता रहा… बार-बार… हर तरीके से। उनकी आंखों में अब भी गुस्सा था, लेकिन धीरे-धीरे वह थोड़ा शांत होने लगी।
आखिरकार उन्होंने गहरी सांस ली और कहा,”ठीक है, मैं तुम्हारे साथ चलती हूं, लेकिन एक शर्त पर।”

मैंने तुरंत कहा, “जो भी कहेंगी दीदी।”

उन्होंने सख्त आवाज़ में कहा, “तुम हॉल में सोओगे और मैं बेडरूम में सोऊंगी, और बिना मेरी इजाज़त के अंदर आने की कोशिश भी मत करना।”

मैंने तुरंत सिर हिलाया, “ठीक है दीदी, जैसा आप कहें।”

फिर हम दोनों वापस बाइक पर बैठे और इस बार बिना कुछ बोले सीधे मेरे फ्लैट की तरफ चल पड़े। जब हम फ्लैट पहुंचे, मैंने दरवाज़ा खोला। वह बिना मेरी तरफ देखे सीधे अंदर गई, अपना बैग उठाया और सीधे बेडरूम में चली गई और फिर अंदर से लॉक कर लिया।

मैं वहीं हॉल में खड़ा रह गया। कुछ सेकंड तक मैं दरवाज़े को देखता रहा, जैसे उम्मीद कर रहा हूं कि शायद वह वापस बाहर आएंगी। लेकिन अंदर से कोई आवाज नहीं आई।

मैं धीरे-धीरे जाकर सोफे के पास खड़ा हो गया। फिर वहीं रुक गया। बैठने का भी मन नहीं हो रहा था। घर में अजीब सी खामोशी थी। सिर्फ मेरी सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी।

मैंने सिर झुका लिया और बस सोचने लगा अब मैं उनका गुस्सा कैसे कम करूं? कैसे उन्हें यकीन दिलाऊं कि मैं फिर वही गलती नहीं करूंगा? कैसे सब कुछ थोड़ा सा ठीक हो सकता है? मेरे दिमाग में बस यही चलता रहा, बार-बार, बिना किसी जवाब के।

चार महीने बीत चुके थे, लेकिन उसने मुझे अभी तक माफ़ नहीं किया था। मैं कई बार उससे बात करने की कोशिश करता, पर वो हर बार मुझे नज़र-अंदाज़ कर देती। उसकी खामोशी अब आदत बन चुकी थी— सिर्फ उतनी ही बात करती जितनी ज़रूरी हो। कभी कुछ ढूंढ नहीं मिलता तो पूछ लेती, या फिर जब खाना तैयार होता तो बस इतना कहती कि आ जाओ।

हम एक ही टेबल पर बैठ कर खाना खाते, लेकिन हमारे बीच जैसे कोई अदृश्य दीवार खड़ी हो। पहले जहां हर छोटी बात पर हंसी होती थी, अब वहां सिर्फ चम्मच की हल्की आवाज़ सुनाई देती थी। मैं उसे चुप-चाप देखता रहता, और वो नज़रें झुका कर जल्दी-जल्दी खाना खत्म कर देती।

लेकिन इन सब के बावजूद, मैं हर दिन एक मौका ढूंढता, एक ऐसा पल जब मैं उसके थोड़ा और करीब जा सकूं। वो जानती थी कि मैं उसे पसंद करता था, शायद बहुत पहले से। फिर भी वो मेरे साथ उसी घर में रह रही थी, और यही बात मेरे अंदर एक उम्मीद जगा देती थी।

फिर एक रात सब कुछ थोड़ा अलग हो गया। करीब आधी रात थी, मैं लिविंग रूम में अकेला बैठा था कि तभी मेरा फोन बजा। स्क्रीन पर उसका नाम देख कर मेरा दिल एक पल के लिए रुक सा गया। मैंने तुरंत कॉल उठाई।

उसकी आवाज़ सुनते ही मुझे समझ आ गया कि वो नशे में थी। उसकी सांसें थोड़ी भारी थी, और शब्द हल्के-हल्के लड़खड़ा रहे थे।

मैंने धीरे से पूछा, “क्या हुआ दीदी?”

कुछ सेकंड तक वो चुप रही। जैसे कुछ सोच रही हो, या शायद हिम्मत जुटा रही हो। फिर हल्की झिझक के साथ उसने कहा, “गोलू… क्या तुम मुझे यहां से लेने आ सकते हो? मुझे घर आना है।”

मैंने बिना कुछ सोचे तुरंत हाँ कहा और टैक्सी लेकर उस क्लब की तरफ निकल गया जहां वह अपने दोस्तों के साथ गई थी। जब मैं वहां पहुँचा, तो वह बाहर खड़ी थी। लेकिन उनकी हालत देखकर साफ था कि वह ठीक से चल भी नहीं पा रही थी। मैं जल्दी से उनके पास गया और उन्हें सहारा देकर टैक्सी तक लाया। पूरा रास्ता वह चुप रहीं, बस कभी-कभी सिर सीट से टिका कर आँखें बंद कर लेती।

घर पहुँचने के बाद वह मुश्किल से चल पा रही थी। इसलिए मैंने उन्हें पकड़ कर अंदर लाया और लिविंग रूम के सोफे पर बैठा दिया। मैं किचन में गया, उनके लिए पानी का एक गिलास लेकर आया और उनके हाथ में दिया। उन्होंने धीरे-धीरे पानी पिया, जैसे खुद को संभालने की कोशिश कर रही हों।

कुछ पल की खामोशी के बाद उन्होंने मेरी तरफ देखा। उनकी आँखों में नशा था, लेकिन उनके पीछे जैसे कई दबे हुए सवाल थे। वह धीमी आवाज़ में बोली, “गोलू उस दिन जब तुमने कहा था कि तुम्हें मैं पसंद हूँ। वो सच था या तुमने बस इसलिए कहा था क्योंकि तुम मुझे चोदना चाहते थे?”

मैं एक पल के लिए चुप रह गया। मैं जानता था कि वह ये सब नशे में कह रही थी, और शायद सुबह होने तक उन्हें ये बात-चीत याद भी ना रहे।

मैंने उन्हें देखते हुए हल्की सी मुस्कान दी। मैं उनके साथ एक गंदा मजाक करना चाहता था इसलिए मैं बोला, “बिल्कुल मैं आपको पसंद करता हूँ दीदी, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि मैं आपको चोदना नहीं चाहता। जब भी मैं आपके बूब्स देखता हूँ, मैं उन्हें दबाना चाहता हूँ। मैं अपना लंड आपकी चुत में डाल कर आपको जितना ज़ोर से हो सके चोदना चाहता हूँ।”

उन्होंने मेरा चेहरा ध्यान से देखा… और हल्की सी मुस्कान उनके होंठों पर आ गई। मैं जैसा सोच रहा था वैसे ही उनको मेरी बातें समझ नहीं आ रही थी, लेकिन फिर अचानक सब बदल गया।

अगले ही पल उन्होंने अपनी टी-शर्ट पकड़ कर ऊपर खींचनी शुरू की। पहले कपड़ा उनके पेट से ऊपर उठा। फिर धीरे-धीरे छाती तक आया। वह थोड़ा लड़खड़ा रही थी, इसलिए एक हाथ से उन्होंने संतुलन बनाए रखा और दूसरे हाथ से टी-शर्ट को सिर के ऊपर से निकाल दिया।

टी-शर्ट हटते ही उनके ऊपर काला ब्रा साफ दिखाई दे रहा था। कुछ सेकंड तक वह बैठी रही, फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने हाथ पीछे ले जाए। उनकी उंगलियाँ ब्रा की हुक तक पहुंचने की कोशिश कर रही थी। थोड़ी देर तक उन्हें हुक ढूंढने में दिक्कत हुई। फिर आखिरकार उनकी उंगलियाँ सही जगह पर पहुंची। उन्होंने धीरे से उसे खोल दिया। जैसे ही हुक खुला, ब्रा ढीली पड़ गई। उन्होंने उसे आगे की तरफ खींचा, कंधों से सरकाया और पूरी तरह उतार कर एक तरफ गिरा दिया।

अब वह मेरे सामने थी… और उनके स्तन साफ दिखाई दे रहे थे। मैं बस उन्हें देखता रह गया। उनके स्तन भरे हुए और गोल थे, जैसे पूरी तरह आकार में भरे हो। उनकी त्वचा साफ और मुलायम दिख रही थी, जिस पर हल्की रोशनी पड़ते ही एक अलग सा चमक आ रहा था।

उनकी साँसों के साथ उनके स्तन धीरे-धीरे ऊपर उठते और फिर नीचे आते, जिससे हर बार उनका आकार और भी साफ दिखता। नशे की वजह से उनका शरीर ढीला था, इसलिए उनमें एक हल्की सी नरमी थी, जो हर छोटी हरकत के साथ महसूस हो रही थी। जब वह हल्का सा हिलती या संतुलन बनाने की कोशिश करती, तो उनके स्तन भी धीरे से हिल जाते थे। वह कोई जल्दी में नहीं थी, बस आराम से बैठी थी… जैसे उन्हें किसी चीज़ की परवाह ही नहीं हो।

फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने हाथ फैलाए…“गोलू आओ, अपनी दीदी के बूब्स को जितना ज़ोर से चाहो दबाओ।”

अगला भाग पढ़े:- रीना दीदी और मेरा सिक्रेट-4

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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