ट्रक के सफर में ड्राइवर से गांड चुदवाई

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ड्राईवर सेक्स कहानी में मुझे गांड मरवाने की लत लग गई थी. मैं बॉटम था पर मेरा टॉप विदेश चला गया. मेरी गांड को लंड नहीं मिल रहा था. तो मैंने एक ड्राईवर से गांड मरवाई.

फ्रेंड्स, मैं रत्न दत्त अपने एक पाठक राहुल की जुबानी उसी की गे सेक्स कहानी स्कूल के दोस्त से गांड मरवाकर गांडू बन गया आपको सुना रहा था.

अब तक आप पढ़ चुके थे कि मैंने (राहुल) अपने साथी मदन के साथ रह कर गे सेक्स का खूब आनन्द लिया था और अभी भी ले रहा था.

फिर एक दिन मैंने फैक्ट्री के ट्रक ड्राइवर बलवंत को उसके अपने क्लीनर की गांड मारते हुए देख लिया तो मैं उसके साथ भी सेक्स की सोचने लगा.

अब आगे ड्राईवर सेक्स कहानी:

मदन के जाने के बाद बिना लंड लिए ऐसे ही दो महीने बीत गए.
मेरी गांड की खुजली बढ़ने लगी.

मैं गांड में मोमबती डालकर लंड की कल्पना कर मुठ मारता, उसमें गांड मरवाने जितना मजा नहीं आता.

उसी बीच एक अजीब बात हुई.
जब मैं लंड की कल्पना करता, मुझे ड्राइवर बलवंत का लंड याद आ जाता.

मैंने बलवंत का लंड उस वक्त देखा था, जब वह क्लीनर की गांड मार रहा था.

मैंने सोचा कि बलवंत जुबान का पक्का और भरोसे का आदमी है.
यदि उसने वादा किया कि वह हमारे संबंध के बारे में किसी को नहीं बताएगा, तो नहीं बताएगा.

अब मैंने बलवंत को पटाने की सोची.

उससे गांड चुदवाने के लिए मैंने ढेर सारे कंडोम के पैकेट और एक के-वाई जैल का बड़ा ट्यूब खरीद लिया.

अब मैंने बलवंत को फ़ोन करके पूछा- किधर हो?
उसने बताया कि वह तीन दिन बाद हमारे शहर आ रहा है.
मैंने पूरे बदन की वैक्सिंग कराई.

जब बलवंत आया तो मैं उससे मिला.
उसने बताया कि वह अगले दिन के लिए बाहर रहेगा. अपने ट्रक में सामान लेकर दूसरे शहर जाएगा, तीन दिन का सफर है, वहां एक दिन रूककर ट्रक लेकर वापस अपने शहर आएगा.

मेरे और ज्यादा पूछने पर उसने बताया कि उसका क्लीनर लड़का छुट्टी पर है, वह अकेला जाएगा.

मैंने सोचा कि यही सही मौका है- बलवंत, क्या तुम मुझे ट्रक में ले चलोगे?
बलवंत- मुझे तो अच्छा लगेगा. पर राहुल साहब, आपको ट्रक के सफर में तकलीफ होगी. इससे अच्छा तो आप किसी और साधन से निकल जाएं.

उसे लगा था कि मैं ट्रक से उसके साथ किसी जगह जाने की कह रहा हूँ.
मैंने उसे बताया- नहीं, मुझे सिर्फ ट्रक का सफर करके देखना है कि कैसा अनुभव होता है.

वह कुछ नहीं बोला.

मैंने उससे आगे कहा- देखो बलवंत, मैं तुम्हें दोस्त समझता हूँ, सफर में तुम मुझे अपना दोस्त मानकर मेरे नाम राहुल से बुलाना.

उसने खुशी जाहिर की और हम दोनों ने ट्रक का सफर एक साथ तय करने का प्रोग्राम पक्का कर लिया.

मैं अपने पूरे बदन की वैक्सिंग करा ही चुका था, तो मैंने बलवंत के साथ गे सेक्स का प्रोग्राम बना लिया.
बलवंत के साथ जाने के लिए मैंने ऑफिस से दस दिन की छुट्टी ले ली.

मस्ती करने के लिए अपना खुद का बनाया हुआ नर्म चाबुक, कपड़े, दर्द निवारक दवाइयां आदि बैग में रख लीं और बलवंत के साथ उसके ट्रक में अपनी गांड चुदाई के सफर पर निकल पड़ा.

अब सबसे पहले मुझे बलवंत को उकसाना था.

जब हम लोग सुनसान हाईवे पर थे तो मैंने बलवंत से कहा- मुझे पेशाब लगी है, कहीं रोको!
बलवंत ने ट्रक रोका.

मैं ट्रक से उतर कर पैंट नीचे करके मूतने लगा.
बलवंत भी मेरे पास खड़े होकर मूत रहा था.
वह मेरे भरे चिकने गोरे कूल्हे देख रहा था. उसकी आंखों में वासना की चमक आ गई थी.

फिर लंच के लिए बलवंत ने ढाबे पर ट्रक रोका.

खाना खाते समय मैंने उससे बात शुरू की- तुम्हारी शादी हो गयी है?
बलवंत- हां, पर बीबी से मिलना दो तीन महीनों बाद ही होता है. राहुल साब, आपकी शादी हो गयी है?

जबाव में मैंने कहा- जो बात मैं तुम्हें बताऊंगा, वादा करो किसी को नहीं बताओगे!
बलवंत ने वादा किया.

मैं- मुझे शादी की जरूरत नहीं, मैं अपने दोस्त के साथ रहता था, उसी से मेरी जरूरत पूरी हो जाती थी. अभी वह दो महीने पहले विदेश चला गया है.
बलवंत- शादी की जरूरत नहीं इसका मतलब?

मैं- रात मैं जब दोस्त के साथ रहता था, तो अपने आप को लड़की महसूस करता था. दोस्त मुझे प्यार करता था, मुझे चूमता, मेरे चूचे दबाता था, फिर वह करता था जो तुम अपने क्लीनर के साथ करते हो. सच में मुझे वह साब करवाने में बड़ा मजा आता था. मैंने तुम्हें क्लीनर के साथ करते देखा है, गोदाम के पीछे .. तुम्हारा सामान भी मस्त है!

यह कह कर मैंने आंख दबा दी.

बलवंत समझ गया कि मैं उसके लौड़े की बात कर रहा हूं.
अब वह बोला- मुझे अपने क्लीनर लौंडे की बड़ी याद आ रही है. वह 15 दिन बाद आएगा.
मैं- मुझे भी दोस्त की याद आती है, वह दो महीने पहले चला गया.

हम दोनों में एक अनकही रजामंदी दिखने लगी थी.
मगर मुँह से न ही उसने कुछ कहा और न ही मैंने.

खाने के बाद मैं ढाबे के पीछे जाकर फुल पैंट उतार कर काली हाफ पैंट पहन कर आ गया.
हम दोनों ट्रक में आ बैठे.

ट्रक चलाते समय बलवंत मेरी वैक्सिंग से गेहुंए रंग की चिकनी मांसल जांघों को देख रहा था.
मैंने एक पैर गियर के पास रख दिया.

बलवंत अब गियर बदलते समय हथेली के पिछले हिस्से से मेरी जांघ छू रहा था.
जब भी वह मुझे छूता, मैं किसी चुदासी लड़की के जैसे सी सी की सिसकारी लेता.

हम दोनों की आंखों में वासना भर गई थी.
बलवंत मेरी जांघ सहलाने लगा, उसका लंड लुंगी में तम्बू बन गया.

कुछ देर के बाद सड़क के किनारे घना जंगल दिखा.

बलवंत बोला- यहां रुकते हैं, जंगल में मजे करेंगे!
मैंने मुस्कुरा कर हां में सर हिलाया.

फिर मैंने बैग से पाउच निकाला, उसी में मैंने अपने काम का सारा सामान रखा हुआ था.

बलवंत के साथ मैं जंगल के अन्दर गया.
उधर मैंने पाउच से कंडोम निकाल कर बलवंत को दे दिया.

फिर अपनी पैंट उतार कर गांड के अन्दर के-वाई जैल लगा ली.
बलवंत ने लुंगी उतार कर कंडोम पहन लिया.

मैं पेड़ के सहारे झुककर खड़ा हो गया.
बलवंत ने मेरे भरे चिकने कूल्हों पर हाथ फेरकर कहा- तुम्हारे कूल्हे मस्त हैं!

उसने हल्की सी चपत लगाई तो मैं चिहुंका, उसी वक्त उसने एक झटके में पूरा लंड गांड में पेल दिया.

मैंने दो महीने से गांड नहीं मरवाई थी, गांड थोड़ी टाइट हो गयी थी.
बलवंत का लंड मेरे आशिक मदन से बड़ा था, मैं दर्द से आ आ कर उठा.

बलवंत मेरी गांड मारने लगा.

उसके झटके जोरदार थे, मैं हर झटके के साथ हिल रहा था.
मुझे अब दर्द कम हो रहा था और मजा ज्यादा आ रहा था.

मैं आ आ करके उसका लंड अन्दर तक ले रहा था.

काफी देर मेरी गांड चोदने के बाद बलवंत का लंड मेरी गांड में फूलने लगा, मैं समझ गया कि अब पिचकारी छूटने वाली है. उसने कंडोम पहना हुआ था तो वीर्य गांड में नहीं आना था.

कुछ ही झटकों के बाद वह हुंकार भरकर कंडोम में झड़ गया.

बलवंत लंबी सांस भरते हुए बोला- आह बहुत मजा आया!
मैं- मुझे भी. अगली बार से तुम मेरे चूचे दबाकर चूसकर मुझे गर्म करना … उससे और ज्यादा मजा आएगा.
वह बोला- हां और अगर तुम चाहो तो मेरे लंड को भी चूस लेना.

मैंने सिर्फ मुस्कान दे दी.
अब हम दोनों ने कपड़े पहने और ट्रक में वापस आ गए.

बलवंत ट्रक चलाने लगा.
अब हम दोनों मस्ती भरी बातें कर रहे थे.
हमारे बीच से संकोच खत्म हो गया था.

उस सफर में बलवंत ने मेरी कई मर्तबा गांड मारी.
उसके साथ एक बार मैंने के-वाई जैल गांड में लगाया और बैग से चाबुक निकाला.

वह मुलायम चाबुक बलवंत को देकर मैंने उससे कहा- इसे मेरे कूल्हों पर मारना, पर ज्यादा जोर से नहीं … मुझे इसकी रगड़ से गांड मरवाने में मजा आता है.

मैं पेड़ की डाल पकड़ कर झुककर खड़ा हुआ, बलवंत ने मेरे हाथ पेड़ से बांध दिए.
उसने मेरे कूल्हों को चूमा और थपथपाया, फिर चाबुक मेरे कूल्हों पर मारने लगा.

फिर बलवंत ने लंड पेल कर मेरी गांड घमासान मारी और लंड बाहर निकाल लिया.
मैं और देर तक गांड मरवाने को तरस रहा था, तो कहने लगा- और मत तरसाओ.

बलवंत चुपचाप खड़ा था.
मैं पैर फैलाये थक गया था, हाथ बंधे थे.
मैं अपने दोनों पैर पास पास लाया.

बलवंत ने चाबुक कूल्हे पर मारकर कहा- पैर फैला, नहीं तो गांड कैसे मारूंगा.
मैंने पैर फैला लिया.

बलवंत वापस गांड मारने लगा.
ऐसा उसने कई बार किया, मुझे इस खेल में मजा आने लगा.

फिर गांड चुदाई के बाद हम दोनों कपड़े पहन कर ट्रक में आ पहुंचे, बलवंत वापस ड्राइव करने लगा.

रात को ट्रक के अन्दर चूमा चाटी के बाद मैंने बलवंत के लंड पर कंडोम पहनाया, लंड चूसा और पेट के बल लेटकर अपने कूल्हे हाथ से फैला दिए.
बलवंत मेरे ऊपर चढ़कर गांड मारने लगा.

कुछ देर बाद हम दोनों झड़ गए और थकान के कारण नींद आने लगी, तो हम दोनों सो गए.

अगले दिन सुबह ट्रक चलाते बलवंत बोला- आज मुझे ट्रक में रखा सामान पहुंचाना है, वादा किया है. हम रास्ते में सिर्फ खाना खाने रुकेंगे. कल आराम का दिन है, कल मैं तुम्हें टायर वाली चुदाई का मजा दूंगा.
बलवंत अब खुल कर मुझे आप से तुम कहने लगा था, जो मुझे अच्छा लग रहा था.

जब हम ढाबे पर रुके बलवंत का दोस्त सनी जो ट्रक ड्राइवर था, वह मिला.
बलवंत ने मेरा परिचय क्लीनर करके दिया.

सनी मुझे किसी लड़की के जैसे देखता हुआ बोला- तुम्हारा क्लीनर मस्त चिकना माल है!
बलवंत समझ गया कि इसका दिल आ गया है मगर वह मुझे किसी दूसरे के साथ साझा नहीं करना चाहता था तो उसने इशारे से मना कर दिया.

हम शाम को उस फैक्ट्री में पहुंचे, जहां सामान अनलोड करना था.
वहां ट्रक की लम्बी लाइन थी.

बलवंत- ट्रक अनलोडिंग कल सुबह होगी. लगता है राहुल तुम थक गए हो, इधर पास के एक होटल में तुम कमरा ले लो और आराम करो.

मैंने होटल में कमरा ले लिया.

सुबह मैंने बलवंत को फ़ोन किया और पूछा- क्या हुआ?
उसने बताया- ट्रक अनलोड हो गया है, मैं तुम्हें लेने आ रहा हूँ.

मैंने सामान समेटा और होटल का बिल चुका कर बाहर आ गया.
बलवंत ट्रक लेकर आया और मुझे लेकर शहर के बाहर एक ढाबे में आ गया.

बलवंत- इस ढाबे में सिर्फ ड्राइवर को कमरा मिलता है, आज रात हम यहीं रुकेंगे. मैं थका हूँ इसलिए खाना खाकर आराम करूंगा. शाम को सब साथ में दारू पिएंगे और मजा करेंगे.
वह मुझे लेकर ढाबे के पीछे एक कमरे में आ गया.

उधर बलवंत ने नहाकर मेरे साथ खाना खाया और सो गया.
मैं कमरे से बाहर आया. कमरों के सामने खुली जगह थी, बड़े बड़े पेड़ थे, उसके नीचे खाट बिछी थी. कंपाउंड वाल के पीछे घाटी थी.

मैंने देखा कि जैसे ट्रक के पिछले चक्कों में दो दो टायर होते हैं, उसी प्रकार दो टायर आपस में बंधे पेड़ से लटक रहे थे.
टायर के अन्दर चादर बिछी थी.

ऐसे बहुत से टायर लटके थे. बलवंत ने मुझसे टायर चुदाई का जिक्र किया था. मैंने वीडियो देखा था, जिसमें रस्सी से लटके टायर में लिटाकर चोदा जा रहा था.
मैं समझ बलवंत मुझे टायर में लटका कर मेरी गांड मारेगा.

मेरी गांड में झुरझुरी होने लगी.
थोड़ी देर में मैं कमरे में जाकर सो गया.

शाम को सब उठे, चाय पीकर फ्रेश हुए.
रात होते ही ढाबे का लड़का शराब गिलास चखना दे गया.

हम लोग ढाबे के पीछे बैठे थे.
ढाबे के सामने से पीछे आने का दरवाज़ा बंद कर दिया.

सभी पीने लगे, बलवंत ने मुझे एक बड़ा पैग पिला दिया.
ड्राइवर लोग अपने अपने क्लीनर को लेकर लटके टायरों के पास आ गए.

मैंने एक को देखा, उसने अपने क्लीनर को नंगा करके स्टूल पर खड़ा करके टायर के अन्दर पेट के बल लिटाया और स्टूल हटा दिया.
फिर वह ड्राइवर कंडोम पहन कर उस पर के-वाई जैल लगाकर क्लीनर की गांड मारने लगा.

मैं समझ गया कि बलवंत ने ही इसे इस तरह से गांड चुदाई के लिए बताया है.

कुछ देर बाद बलवंत ने भी मुझे नंगा कर दिया.
कुछ देर मेरे चूचे दबाये चूसे, फिर मुझे टायर के अन्दर लिटा दिया.

मेरी छाती और पेट टायर के अन्दर थे.
हाथ और पैर टायर के बाहर लटक रहे थे.

बलवंत मेरी गांड मारने लगा.
यह नया अनुभव था, गांड चुदवाने में मजा आ रहा था.
वातावरण में आ आ थप थप की आवाज़ आ रही थी.

मैंने देखा बलवंत का दोस्त सनी पास के टायर में अपने क्लीनर को लटकाकर उसकी गांड मार रहा था.
उसका क्लीनर कुछ ज्यादा ही चीख रहा था.

जो ड्राइवर झड़ जाता, वह बैठकर शराब पीने लगता, पर क्लीनर टायर में लटका रहता था.
मैं झड़ गया, बलवंत भी थोड़ी देर में झड़ गया.

वह सनी के पास बैठकर बात करने लगा, मैं लटका था.

सनी- यार बलवंत, मेरा दिल तेरे चिकने क्लीनर पर आ गया है, मुझे उसकी गांड मारने दे … तू मेरे क्लीनर की गांड मार ले.
बलवंत दारू के न.शे में बोला- चल यार, आज जश्न की रात है, तू भी कर ले मजा!

बलवंत मेरे पास आकर बोला- मेरे दोस्त को खुश कर दे, यहां की यही प्रथा है.
मैंने देखा सनी का क्लीनर मुस्कुरा रहा था.

मैं- मुझे जोश नहीं आ रहा.
बलवंत- अभी जोश दिलाता हूँ.

यह कहकर कमरे से चाबुक लाकर बोला- पीटने से तुम्हें जोश आता है.
वह मेरे कूल्हों पर चाबुक से मारने लगा.

थोड़ी देर में मुझे जोश आ गया तो मैंने कहा- अब पीटना बंद करो. मुझे जोश आ गया है.

सनी मेरे सामने खड़ा अपने खड़े लंड पर कंडोम पहन रहा था.
मैंने देखा कि उसका लंड गधे के लंड जैसा मोटा और बलवंत के लंड से लम्बा था. मैं समझ गया कि सनी का क्लीनर क्यों चीख रहा था.

फिर जब सनी ने मेरी गांड मारने की बात की तो वह क्यों मुस्कुरा रहा था.
मैं असहाय सा लटक रहा था.

मैं बलवंत को बोलने लगा कि मेरी गांड फट जाएगी. सनी का बहुत बड़ा है, मैं नहीं ले पाऊंगा!

पर अब तक देर हो चुकी थी.
बलवंत ने सनी के क्लीनर की गांड मारना शुरू कर दिया था.

बलवंत स्टूल पर रखी चाबुक की और इशारा कर सनी से बोला- इससे राहुल को राजी कर!
सनी चाबुक से मेरे कूल्हों और लटके पैरो को पीटने लगा और कहने लगा- गांड ढीली छोड़ भोसड़ी के!

कुछ देर बाद जब मैं मार बर्दाश्त नहीं कर सका तो मैं बोला- मार लो, पर थोड़ा प्यार से, ज्यादा लुब्रिकेशन लगाना.
सनी- मेरी चिकनी रानी, प्यार से ही करूँगा.

मैंने देखा बलवंत सनी के क्लीनर की गांड मार कर निपट गया था और खाट पर बैठा दारू पी रहा था.

सनी ने एक झटके में पूरा लंड मेरी गांड में पेल दिया, मेरी गांड और रीढ़ में दर्द की तेज लहर उठी.
मुझे लगा मेरे दो टुकड़े हो जाएंगे, मैं जोर से चीख उठा.

सनी धीरे धीरे मेरी गांड मारने लगा, दर्द से मैं अर्ध बेहोश हो गया.
सनी का क्लीनर अभी भी टायर में लटका था, उसने कहा- उस्ताद ये चिकना तुम्हें नहीं झेल पाएगा, तुम मेरी मार लो.

सनी ने मेरी गांड से लंड निकाला और अपने क्लीनर की गांड मारने लगा.

बलवंत ने मुझे उतारा, मैं ठीक से चल नहीं पा रहा था.
वह मुझे सहारा देकर कमरे में ले गया, मेरी गांड की बर्फ से सिकाई की.
मैंने दर्द निवारक दवा ली और सो गया.

सुबह बलवंत ट्रक लोड कर लाया, हमारी वापस की यात्रा शुरू हुई.
उस दिन और रात मैं ट्रक में लेटा रहा, सिर्फ खाने के समय उठा.

दूसरे दिन मेरी गांड कुलबुलाने लगी, मैंने बलवंत को बताया- अब दर्द ठीक हो गया है.
बलवंत ट्रक चलाते हुए बोला- आज सफर का आखिरी दिन है, चल मजा करते हैं.

यह कह कर उसने सड़क के किनारे जंगल की तरफ इशारा करते हुए कहा- चलो जंगल में मंगल करने चलते हैं.
मैं राजी हो गया.

उसने जंगल में ले जाकर मुझे बहुत देर तक चूमा, चूचे दबाये, फिर घोड़ी बनाकर गांड मारी.

मैंने आज उसे रोका और अपने साथ लायी चादर बिछाकर बलवंत को लिटा दिया, उसके लंड की सवारी की, झुककर अपने चूचे पिलाये.

हम अगले दिन सुबह मेरे शहर पहुंच गए.
मैंने अपने फ्लैट में एक दिन आराम किया, अगली सुबह काम पर चला गया.

अब बलवंत जब भी मेरे शहर आता, एक रात मेरे फ्लैट में रुकता, हम यौन आनन्द लेते.
मुझे मजा तो बहुत आता, पर गांड चुदवाने के बाद कंडोम के कारण गांड में वीर्य भरने का सुख नहीं मिल पाता.

मैं बीमारी का खतरा नहीं ले सकता था, तो मेरी मजबूरी थी.
ऐसे ही 9 महीने बीत गए.

कहानी के शुरू में मैंने बताया है, मैं अपने दोस्त मदन के साथ रहता था, वह मेरी गांड मारा करता था.

मदन का एक दोस्त विजय दूसरे शहर में रहता था, कभी कभी हमारे शहर आता था हमारे फ्लैट में रुकता था.

विजय को मेरे और मदन के शारीरिक संबंध के बारे में पता था.
विजय ने कहा था कि शादी करने से अच्छा है, हमारी तरह रहना!

मदन तीन साल के लिए विदेश जाने वाला था, उसने मेरी सहमति से विजय से कहा था कि वह मेरे साथ रह सकता है.

विजय मेरे शहर में नौकरी की कोशिश कर रहा था.
मदन के विदेश जाने के 9 महीने बाद विजय को मेरे शहर में नौकरी मिल गयी. यह बात उसने फोन करके बताई.

विजय ने नयी नौकरी ज्वाइन की और मेरे फ्लैट में रहने लगा.
हम दोनों गांड चुदाई का यौन आनन्द लेने लगे.

विजय मुझे खूब प्यार करता, चूचे दबाता चूसकर कहता कि तुम्हारे चूचे और चिकना शरीर किसी लड़की से कम नहीं है.
मैंने मदन और बलवंत का लंड चूसा था, पर उन्होंने मेरा लंड नहीं चूसा था.

विजय मेरे चूचे दबाने चूसने के बाद मुझे 69 पोजीशन में लिटाता, मेरा लंड चूसता और मैं उसका.
इसमें अलग की मजा और जोश आता, गांड मरवाने में ज्यादा मजा आता.

जब विजय बिना कंडोम मेरी गांड मारकर गांड वीर्य से भर देता, तो मुझे बहुत संतुष्टि मिलती.
मैंने बलवंत को विजय के बारे में बता दिया और कहा- तुमसे अब संबंध नहीं रख पाऊंगा.

फिर जब भी मुझे खुले आसमान के नीचे बलवंत से गांड मरवाने की याद आती, मैं विजय को लेकर जंगल में आ जाता.
विजय को भी जंगल में मंगल का आनन्द आने लगा था.

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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