slut women fuck story
उस हफ़्ते के बाद मौसी ने हमें फ़ोन किया और कहा, “वेद, सोनू, आज शाम को आ जाओ। मेरी एक सहेली आ रही है, सुनीता। पुरानी सहेली है, बहुत दिनों से मिलने नहीं आई। तुम दोनों भी मिल लेना।” उसकी आवाज़ में वही पुरानी शातिर हँसी थी, जिसका मतलब हम दोनों अच्छी तरह समझ चुके थे।
अगर आपने मेरी पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पढ़े की मौसी और उनकी बेटी एक साथ ग्रुप में चुदी
सोनू ने फ़ोन रखते ही कहा, “साला, मौसी की सहेली भी आ रही है। अब तो पूरा अड्डा बन गया है।”
मैं हँसा, “तेरा लंड तो दस इंच का है, तुझे क्या डर? जा, तैयार हो।”
शाम को हम पहुँचे तो मौसी के आँगन में एक औरत बैठी थी। उम्र पैंतालीस के आसपास, कद ठीक-ठाक, रंग गोरा, बदन भरा हुआ और औरत जैसा — एकदम मौसी के उलट।
मौसी पतली कमर वाली, बदन पर कसी हुई; ये औरत गोल-मटोल, गद्देदार, दूध और गांड से भरी हुई। उसकी चूचियाँ भारी-भारी थीं, ऐसी कि ब्लाउज़ उन्हें सँभाल नहीं पा रहा था।
और उसकी गांड गोल, बड़ी और झूलती हुई — जैसे किसी गाय की हो। चलने में वो हर क़दम पर हिलती थी। निपल्स कपड़े के नीचे साफ़ उभरे हुए थे, मोटे और कुछ काले।
मौसी ने हमें देखकर कहा, “आओ, आओ। ये मेरी सहेली सुनीता है। सुनीता, ये वेद है, मेरा भाँजा, और ये सोनू, इसका दोस्त। दोनों जवान मर्द हैं, दोनों भाई जैसे हैं।”
सुनीता ने हमें नज़र भरकर देखा और मुस्कुरा दी, “हाँ, तो ये दोनों हैं। नीलम, तूने तो कहा था कि दोनों तगड़े हैं। सच में तगड़े हैं।” और वो हँस पड़ी। उसकी हँसी में एक हल्का-सा कसैलापन था, जैसे बहुत दिनों से भूखी हो।
बातों-बातों में पता चला कि सुनीता विधवा है। उसका पति चार साल पहले चल बसा था, और तब से वो अकेली।
एक बेटी है, पूजा, उन्नीस साल की, जो शहर में कॉलेज पढ़ती है और हॉस्टल में रहती है।
सुनीता अकेले रहती थी, और उसके चेहरे से साफ़ पढ़ा जा सकता था कि उस अकेलेपन ने उसके बदन को किस तरह तरसा दिया था।
मौसी ने हमें चाय पिलाई और फिर धीरे से इशारा किया कि हम अंदर चलें। सुनीता और मौसी अंदर बातें करने लगीं, और हम दोनों आँगन में बैठकर सुनते रहे।
सुनीता ने धीरे से कहा, “नीलम, तू तो किस्मत वाली है। तेरे पास तो दो जवान मर्द आते हैं। मेरे पास कौन है? चार साल से मेरी चूत सूखी पड़ी है। हाथ से ही काम चलाती हूँ।”
मौसी हँसी, “तो आज क्यों नहीं चलेगा हाथ?”
सुनीता ने आँखें बड़ी करके पूछा, “मतलब?”
“मतलब ये कि आज इन दोनों से तेरी चूत भी भर जाएगी। देख, दोनों जवान हैं, दोनों ठीक हैं। और तेरा पति चल बसा, तो क्या तू औरत नहीं रही? आज तेरे बदन को भी मज़ा मिलेगा।”
सुनीता ने शरमाकर कहा, “पर नीलम, मैं तो… मैं तो इतने दिनों से चुदी ही नहीं। सूख गई होऊँगी अंदर से।”
मौसी ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “सूखे पे भी चोदा जाता है। और फिर तेरी बुर तो बच्चा जनने के बाद की है, फैली हुई है। इनके लंड आराम से समा जाएँगे।”
यह सुनकर सुनीता की आँखों में चमक आ गई। उसने हम दोनों की तरफ़ देखा, और उसकी नज़र कुछ देर सोनू की पैंट पर टिकी रही। मुझे लगा कि उसने कहीं से सोनू के बड़े लंड की बात सुनी थी।
रात हुई, खाना खाया, और मौसी ने आज फिर बिस्तर नीचे ही लगवाया।
रानू ने भी साथ बैठकर सब देखा — वो अब पक्की चेली बन चुकी थी और उसकी आँखों में यह देखने की उत्सुकता थी कि उसकी माँ की सहेली को कैसे चोदा जाता है।
सुनीता ने आज एक पतली सी साड़ी पहनी थी, जिसमें उसका गोल-मटोल बदन और भारी चूचियाँ साफ़ दिख रही थीं।
उसकी गांड साड़ी के नीचे गोल उभरी हुई थी। वो बार-बार शरमाकर साड़ी का पल्लू सँभाल रही थी, लेकिन जैसे-जैसे रात बढ़ी, उसकी झिझक कम होती गई।
मौसी ने पहला क़दम उठाया। उसने सुनीता के पास बैठकर उसका हाथ पकड़ा और कहा, “सुनीता, पहले तू इन दोनों को अपने हाथ से देख ले। फिर जैसा तेरा मन करे।” और उसने मेरी और सोनू की पैंट खुलवा दी।
मेरा सात इंच का लंड और सोनू का दस इंच का लंड — दोनों बाहर निकले।
सुनीता ने देखकर अपने होठों को दबा लिया और एक लंबी साँस छोड़ी, “हाय भगवान, इतने बड़े? और ये सोनू का तो… ये तो बैल का है। नीलम, तूने तो कहा भी नहीं।”
मौसी हँसी, “तूने पूछा भी नहीं था। अब देख, दोनों ठीक हैं। और दोनों तेरी चूत को आज पूरा भर देंगे।”
सुनीता ने हिम्मत करके पहले मेरा लंड पकड़ा। उसके हाथ नरम और गरम थे। उसने धीरे-धीरे मेरा लंड सहलाया, फिर उसे हिलाने लगी।
फिर उसने सोनू का मोटा लंड पकड़ा और उसे सहलाया। उसकी आँखों में पानी-सा आ गया, “चार साल बाद पहली बार किसी मर्द का लंड हाथ में लिया है।”
मौसी ने कहा, “अब बस हाथ ही नहीं, पूरा जिस्म लगा।” और उसने सुनीता का पल्लू खींचकर उसका ब्लाउज़ खोल दिया।
सुनीता की चूचियाँ बाहर निकलीं — भारी, गद्देदार, थोड़ी लटकती हुईं, और निपल्स मोटे-मोटे, कुछ काले।
मौसी ने उन्हें देखकर कहा, “सुनीता, तेरी चूचियाँ तो मेरी से भी भारी हैं।” और वो हँसने लगी।
सुनीता ने शरमाकर हाथों से ढकने की कोशिश की, लेकिन मौसी ने हाथ हटा दिए और खुद सुनीता की एक चूची दबाकर उसका निप्पल चूसने लगी।
सुनीता ने “आह” करके आँखें बंद कर लीं, “आह नीलम… चार साल बाद… किसी का मुँह मेरे दूध पर… अच्छा लग रहा है…” और उसकी देह काँपने लगी।
मैं आगे बढ़ा और सुनीता के चेहरे को अपने हाथों में लिया। उसका चेहरा गरम था, आँखें नम और चमकती हुईं।
मैंने धीरे से अपने होंठ उसके होंठों पर रखे। सुनीता ने पहले तो झिझकी — चार साल बाद पहला चुंबन था — फिर उसने अपने होंठ खोल दिए और मेरी जीभ को अंदर आने दिया।
दोनों की जीभें एक-दूसरे से लिपट गईं। “म्म्म… स्मूच…” की आवाज़ें कमरे में गूँजने लगीं। सुनीता मेरे होंठ चूसने लगी, जैसे किसी सूखे खेत को पानी मिल गया हो।
कुछ देर चूमने के बाद उसने मेरे होंठ छोड़कर कहा, “चार साल… चार साल बाद किसी ने मेरे होंठ नहीं चूमे थे।” और उसकी आँखों से एक बूँद बह निकली।
मैंने उसे पोंछकर फिर चूमा, और फिर नीचे उतरकर उसकी गर्दन, कंधे और उसकी भारी चूचियों तक पहुँचा।
मैंने उसकी एक चूची अपने हाथ में ली — इतनी भारी थी कि पूरी हाथ में नहीं आती थी। मैंने उसे दबाया, ऊपर-नीचे किया, और फिर उसके मोटे निप्पल को अपने मुँह में ले लिया।
निपल मुँह में आते ही ऐसा लगा जैसे किसी रसीले फल का सिरा हो।
मैं चूसने लगा, जीभ से उसे सहलाने लगा, और सुनीता पूरी तरह पिघल गई, “आह वेद… ऐसे ही चूस… मेरे निप्पल… मेरे दूध… बहुत दिनों से तरस रही थी…” वो मेरा सिर पकड़कर मेरे मुँह को अपने दूध से दबाने लगी।
मैं बारी-बारी से दोनों निपल्स चूसता, और जब एक को छोड़कर दूसरे पर जाता, तो सुनीता पूरी देह हिला देती।
इधर सोनू ने सुनीता के पीछे जाकर उसकी गांड पकड़ ली। वो गांड बड़ी, गोल और गद्देदार थी, हर झटके पर लहराती हुई।
सोनू उसे दबाते-दबाते झुककर उस पर होंठ लगाने लगा, “आह सुनीता आंटी, तेरी गांड तो मखन जैसी है। इसे तो चूम-चूम कर खा जाऊँ।” और सुनीता हँसकर कहती, “खा ले सोनू, आज सब कुछ तुम्हारा है। चार साल से पड़ी हूँ, आज जितना चाहो ले लो।”
मौसी ने भी सुनीता की दूसरी चूची चूसनी शुरू कर दी, और रानू पास बैठकर सब देख रही थी।
मौसी ने रानू को बुलाया और कहा, “बिटिया, तू भी आ जा। सुनीता आंटी को चूम।” रानू शरमाते हुए आई और सुनीता की गर्दन और गाल चूमने लगी।
सुनीता ने आँखें खोलकर रानू को देखा और मुस्कुराकर उसका चेहरा अपने हाथों में लिया, “अरे रानू, तू तो बड़ी हो गई। इतनी सुंदर! और अब तू भी चुदने लगी है?”
रानू ने शरमाकर सिर हिलाया। सुनीता ने हँसकर उसे अपने होंठों पर चूम लिया और कहा, “तो चल, आज आंटी भी तेरी तरह मज़ा लेती है।”
अब मैंने सुनीता को चारपाई पर लिटाया और उसकी साड़ी खोल दी।
उसकी चूत के बाल घने और कुछ सफ़ेद हो चुके थे, और उसकी बुर भरी हुई, बड़ी और गहरी थी — एक बच्चा जनने के बाद की बुर।
मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और उसकी बुर को गौर से देखा।
सुनीता ने शरमाकर कहा, “वेद, बुर तो अब ढीली हो गई होगी। इतने साल से अकेली पड़ी है।”
मैंने कहा, “आंटी, ढीली नहीं है, बस गरम है। और गरम चूत का अपना ही मज़ा होता है।”
मैंने पहले अपनी उँगली से उसकी बुर के होंठों को सहलाया। सुनीता की साँस फूल गई। फिर मैंने अपनी जीभ निकालकर धीरे से उसकी बुर पर लगाई।
पहला स्पर्श — सुनीता की पूरी देह ऐंठ गई और वो चीख पड़ी, “आआह… वेद… चार साल बाद… किसी की जीभ… हाय राम… अच्छा लग रहा है… और करो…” मैंने जीभ से उसकी बुर चाटनी शुरू की। ऊपर से नीचे, धीरे-धीरे, और फिर अंदर तक।
सुनीता की बुर से रस आने लगा, और जैसे-जैसे मैं चाटता गया, वो और भीगती गई। मैंने बुर को चूसना शुरू किया, होंठों में भरकर खींचा, और जीभ से ऊपर के दाने को सहलाया।
सुनीता की कमर चारपाई से उठने लगी और वो मेरे सिर को अपनी जाँघों से दबाने लगी, “आह वेद… ऐसे ही चूस… ऐसे ही… मेरी बुर को चाट… और अंदर जीभ डाल… हाँ वहीं… वहीं…”
इधर सोनू ने सुनीता की गांड के गड्ढे पर अपनी जीभ लगाई और उसे सहलाने लगा।
सुनीता अब दो तरफ़ से चाटी जा रही थी — आगे बुर पर मेरी जीभ, पीछे गांड पर सोनू की जीभ।
मौसी उसकी चूचियाँ चूस रही थी और रानू उसके होंठ चूम रही थी। इस तरह सुनीता चार मुँहों से एक साथ चूमी जा रही थी।
कुछ देर बाद सुनीता ने हाँफते हुए कहा, “बस वेद… अब अंदर आओ… मेरी चूत में लंड डालो… बहुत दिन हो गए…” और उसने मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया।
मैंने अपना लंड उसकी गीली, गरम चूत के मुँह पर रखा और धीरे-धीरे धकेला। सुनीता की चूत में लंड आसानी से अंदर चला गया, क्योंकि वो पहले से ही बच्चा जन चुकी थी।
सुनीता ने लंबी साँस छोड़ी, “आह… अंदर है… पूरा अंदर… चार साल बाद कोई मेरी चूत में… हाय भगवान… अच्छा लग रहा है…” और उसकी आँखें भर आईं।
मैं ठोकने लगा — पहले धीरे-धीरे, फिर थोड़ा तेज़। “थप-थप” की आवाज़ें होने लगीं।
सुनीता की भारी चूचियाँ हर झटके पर झूलतीं और उसकी गोल गांड लहराती।
मैंने ठोकते-ठोकते झुककर उसके होंठ चूमे, स्मूच किए, और बीच-बीच में उसकी चूचियाँ दबाईं और निपल्स चूसे।
सुनीता अब पूरी तरह चुद रही थी और उसके मुँह से बेबाक बातें निकलने लगी थीं, “आह वेद… और ठोको… ऐसे ही… मेरी चूत फाड़ दो… चार साल की भूख है… मत रुको… ज़ोर से ठोको…” और मैं जवाब देता, “ले आंटी, ले… तेरी चूत कितनी गरम है… ले-ले…”
कुछ देर ठोकने के बाद मैंने सुनीता को घुमाकर डॉगी स्टाइल में कर दिया। उसकी गोल, बड़ी गांड ऊपर उठी, और मैंने पीछे से पकड़कर ठोकना शुरू किया।
इस बार और गहरा जाता था, और सुनीता पूरी तरह झुककर कराह रही थी। मैंने उसकी गांड पर हाथ रखकर, झुक-झुक कर उसकी गर्दन और कान चूमे।
फिर सोनू आगे आया। सुनीता ने उसका दस इंच का लंड देखकर फिर साँस रोक ली, “सोनू, ये तो बहुत बड़ा है। मेरी चूत में जाएगा?”
सोनू हँसा, “आंटी, आराम से जाएगा। तू पहले से खुली हुई है, डर मत।” और उसने अपना लंड सुनीता की बुर पर रखा।
सुनीता की चूत मेरे लंड से गीली और खुली थी, इसलिए सोनू का लंड आसानी से अंदर चला गया।
लेकिन जब आधे से ज़्यादा अंदर गया, तो सुनीता ने कराहकर कहा, “आह… ये तो बहुत मोटा है… अंदर कहाँ जा रहा है… मेरी चूत छोटी है सोनू…”
सोनू ने धीरे से धक्का दिया, और पूरा लंड अंदर चला गया।
सुनीता ने ज़ोर से चीख पड़ी, “आआआह… मर गई… इतना अंदर… पेट तक लग रहा है… हाय राम…” मौसी ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “साँस ले सुनीता, साँस ले। पूरा अंदर है, अब आराम हो जाएगा।”
कुछ पल रुककर सोनू ठोकने लगा। सुनीता की देह झूलने लगी, उसकी चूचियाँ लटककर झूलतीं, और हर ठोकर पर उसके मुँह से गहरी कराह निकलती।
सोनू भी बेबाक होकर बोलने लगा, “ले सुनीता, ले मेरा लंड… तेरी चूत कितनी गरम है… ऐसी चूत तो कम देखी… ले-ले-ले…”
सुनीता जवाब देती, “और ठोक सोनू… और ठोक… मेरी चूत फाड़ दो… चार साल की भूख निकाल दो… मैं भी अब रंडी हूँ…”
इधर मैंने सुनीता के सामने जाकर उसकी चूचियाँ दबाईं और निपल्स चूसे, और उसके होंठ चूमे।
मौसी पीछे बैठी सब देख रही थी और बीच-बीच में सुनीता की गांड पर हाथ फेर रही थी।
सुनीता अब दो आदमियों के बीच पूरी तरह फँसी हुई थी — पीछे से सोनू का दस इंच, आगे से मेरा मुँह और हाथ।
अब सोनू ने सुनीता को निकालकर उसकी गांड के गड्ढे पर अपना लंड रखा। सुनीता ने घबराकर पूछा, “सोनू, गांड में भी?”
सोनू हँसा, “हाँ आंटी, आज पूरा ले। गांड भी।”
सुनीता ने मौसी की तरफ़ देखा। मौसी ने सिर हिलाया, “ले सुनीता, आज पूरी ले। तेरे पति के बाद पहली बार है, तो पूरा मज़ा ले।” और सुनीता ने हाँ कर दी।
सोनू ने सुनीता की गांड पर थूका, उसे चिकना किया, और अपना लंड गड्ढे पर रखा। सुनीता ने गहरी साँस ली और सोनू ने धीरे-धीरे धकेला।
पहले गड्ढा कसा हुआ था, लेकिन जैसे ही लंड अंदर गया, सुनीता की आँखें बंद हो गईं, “आआह… गांड में भी… हाय राम… कितना मोटा है… पूरा भर गया… ऐसे ही ठोक सोनू… ऐसे ही…”
सोनू ठोकने लगा और सुनीता की गांड पर दोनों हाथ रखकर ज़ोर-ज़ोर से पेलने लगा।
सुनीता की गांड हर झटके पर लहराती और उसकी चूचियाँ झूलतीं।
मैंने सामने से सुनीता की चूत में अपना लंड घुसा दिया — अब सुनीता दोनों तरफ़ से भरी हुई थी, आगे मेरा लंड चूत में, पीछे सोनू का लंड गांड में। सुनीता दोनों जगह एक साथ चुद रही थी।
“हाय राम… दोनों जगह… पूरी भर गई… वेद, तू भी ठोक… और सोनू तू भी… मुझे फाड़ दो दोनों तरफ़ से…” सुनीता बेबाक होकर चीख रही थी।
उसकी चूत और गांड दोनों एक साथ भरी हुईं, और हर ठोकर पर उसकी पूरी देह काँपती।
मैं झुककर उसके होंठ चूमता, उसकी चूचियाँ दबाता, निपल्स चूसता, और सोनू पीछे से उसकी गांड को ज़ोर से ठोकता।
मौसी और रानू यह सब देखकर पागल हो रही थीं।
मौसी ने रानू को बुलाकर कहा, “देख बिटिया, सुनीता आंटी भी कैसे चुद रही है। औरत को हमेशा चाहिए। बस एक बार मिल जाए, फिर भूख बढ़ती ही जाती है।” रानू ने सिर हिलाया और अपनी बुर पर हाथ फेरने लगी।
उसी रात, करीब ग्यारह बजे, दरवाज़े पर दस्तक हुई। सबने ठहरकर देखा।
मौसी ने चादर ओढ़कर दरवाज़ा खोला — और बाहर खड़ी थी एक लड़की, बैग के साथ, थोड़ी थकी हुई।
“मौसी, नमस्ते! मैं पूजा, सुनीता मम्मी की बेटी। मम्मी यहीं है ना? मेरा हॉस्टल का काम थोड़ा जल्दी खत्म हो गया, तो सीधे आ गई।” वो बोली।
सुनीता बिस्तर से उठी, चादर लपेटकर, और दौड़कर दरवाज़े पर गई, “अरे पूजा! तू अचानक? और मैं तो यहाँ हूँ ही। आ जा अंदर।”
पूजा अंदर आई और उसने आँगन में बिखरे कपड़े, चादरें और चप्पलें देखकर पूछा, “मम्मी, यहाँ कुछ हो रहा था क्या? इतना सामान बिखरा है?”
सुनीता शरमाकर बोली, “कुछ नहीं, बस… बैठे थे।” लेकिन उसकी आँखें बता रही थीं।
पूजा उन्नीस साल की, दुबली-पतली, कॉलेज जैसी लड़की थी — जींस और टॉप में, बाल खुले, चेहरे पर स्मार्टनेस।
उसकी चूचियाँ छोटी लेकिन कसी हुईं, कमर पतली और गांड गोल। रानू से थोड़ी बड़ी, लेकिन उससे ज़्यादा पढ़ी-लिखी और आत्मविश्वासी।
मौसी ने आग्रह किया, “पूजा, तू भी बैठ, चाय पी। रात बहुत है।” और पूजा बैठ गई। लेकिन जैसे ही वो बैठी, उसकी नज़र सोनू की पैंट पर पड़ी, जो अभी भी खुली थी और लंड बाहर लटक रहा था। पूजा की आँखें फैल गईं।
“मम्मी! ये… ये क्या है?” उसने पूछा।
सुनीता ने हँसते हुए कहा, “ये लंड है बेटा। और ये सोनू है, और ये वेद। दोनों मौसी के भाँजे और उसके दोस्त हैं।”
पूजा ने शरमाकर मुँह फेर लिया, “अरे, तो मम्मी, तुम यहाँ… मतलब तुम इनके साथ…?”
सुनीता ने गर्दन हिलाई, “हाँ बेटा, चार साल बाद। तेरे पापा के बाद। और आज इन दोनों ने मेरी चूत और गांड दोनों भर दीं।”
पूजा हँसने लगी, “मम्मी, तुम तो बड़ी निकलीं।” और फिर उसने हम दोनों को घूरकर देखा, जैसे तौल रही हो।
मौसी ने मौक़ा देखकर कहा, “पूजा, तू भी अब बड़ी हो गई है। बता, तेरा कोई है कॉलेज में?”
पूजा ने शरमाकर कहा, “है तो… पर वो दूर है। और अब तक… कुछ ख़ास नहीं हुआ।”
मौसी की आँखों में फिर वही शातिर चमक आ गई, “तो आज हो जाए। देख, तेरी मम्मी भी यहीं है। तू भी बैठ। आज रात यहीं सो जा।”
पूजा ने एक बार हम दोनों को देखा, फिर सुनीता को, और धीरे से मुस्कुरा दी।
मौसी ने सुनीता को इशारा किया, और सुनीता ने पूजा को बगल के कमरे में ले जाकर कपड़े बदलवा दिए — एक ढीली सी नाइटी।
जब पूजा लौटी, तो उसकी छोटी-छोटी चूचियाँ नाइटी के नीचे साफ़ दिख रही थीं, निपल्स उभरे हुए, और उसकी गोल गांड नाइटी से चिपकी हुई। सुनीता ने उसे बिस्तर पर बैठाया और खुद उसके पास बैठ गई।
मौसी ने हमें इशारा किया — पहले पूजा से शुरुआत करो।
सुनीता ने पूजा का हाथ पकड़कर कहा, “बेटा, पहली बार है, तो आराम से। वेद पहले करेगा, वो नरम है।” और उसने मेरी तरफ़ देखा।
मैं पूजा के पास बैठा। उसने शरमाकर नज़र नीची कर ली। मैंने उसका चेहरा उठाकर उसके होंठों पर अपने होंठ रखे।
पूजा ने पहले झिझकी, फिर धीरे-धीरे जवाब दिया। “म्म्म… स्मूच…” की आवाज़ें हुईं। उसकी जीभ नरम और ताज़ी थी, जैसे कच्ची कली। मैंने उसे धीरे-धीरे चूमा, और वो भी मेरी गर्दन पकड़कर चूमने लगी।
फिर मैंने उसकी नाइटी के तार खोल दिए। पूजा की चूचियाँ बाहर निकलीं — छोटी, कसी, गुलाबी निपल्स वाली।
मैंने उन्हें हाथों में लिया और दबाया, और फिर उसके एक निप्पल को मुँह में लेकर चूसने लगा।
पूजा ने “आह” करके मेरा सिर पकड़ लिया, “आह भैया… अच्छा लग रहा है…” मैंने दूसरा निप्पल भी चूसा, और उसकी चूचियों को चूमता-चूमता नीचे उतरा।
मैंने उसकी नाइटी नीचे सरकाई और उसकी बुर को देखा। पूजा की बुर छोटी, कसी और गुलाबी थी, घनी झाँट से ढकी।
मैंने उसकी टाँगें फैलाईं और जीभ निकालकर उसकी बुर पर लगाई। पूजा की देह ऐंठ गई, “हाय… ये क्या… अच्छा… बहुत अच्छा…” और वो मेरे सिर को जाँघों से दबाने लगी।
मैंने उसकी बुर चाटी, चूसी, और जीभ अंदर तक डाली। पूजा का रस मीठा था, और वो जल्दी ही पूरी गीली हो गई।
सुनीता पास बैठकर अपनी बेटी को चुदते देख रही थी, और उसकी आँखों में खुशी थी। मौसी और रानू भी पास आकर बैठ गईं और पूजा की चूचियाँ सहलाने लगीं।
फिर मैंने अपना लंड पूजा की बुर पर रखा और धीरे-धीरे धकेला।
पूजा ने गहरी साँस ली, “आह… ज़रा दर्द है…” मैंने धीरे से पूरा अंदर किया। पूजा की बुर कसी हुई थी, लेकिन पहला लंड आसानी से अंदर चला गया।
पूजा की आँखों से पानी की बूँद निकली, “आह… अंदर है… पूरा…” और सुनीता ने उसका हाथ पकड़कर कहा, “हो गया बेटा, अब मज़ा आएगा।”
मैं ठोकने लगा — धीरे-धीरे, फिर थोड़ा तेज़। पूजा की छोटी चूचियाँ झूलतीं और उसकी गांड लहराती। मैं ठोकते-ठोकते उसके होंठ चूमता, चूचियाँ दबाता, निपल्स चूसता।
पूजा कराहती, “आह वेद… और ठोको… मेरी चूत फाड़ दो… अच्छा लग रहा है… मम्मी सच कह रही थीं…”
अब मौसी ने पूरा दृश्य बदल दिया। उसने सुनीता और पूजा को एक-दूसरे के सामने लिटा दिया — दोनों की टाँगें फैली हुईं, दोनों की बुरें खुली और गीली। माँ और बेटी एक-दूसरे की तरफ़ मुँह करके लेट गईं।
सुनीता ने पूजा का चेहरा अपने हाथों में लिया और उसके होंठ चूमे। पूजा ने भी माँ के होंठ चूमे। दोनों की जीभें लिपट गईं।
फिर सुनीता ने पूजा की छोटी चूचियाँ चूसीं और पूजा ने सुनीता की भारी दूध वाली चूचियाँ चूसीं।
सुनीता के बड़े-बड़े निपल्स पूजा के मुँह में थे, और पूजा के छोटे गुलाबी निपल्स सुनीता के मुँह में।
“बेटा, तेरी चूचियाँ कितनी मीठी हैं,” सुनीता ने चूसते-चूसते कहा।
“मम्मी, आपकी तो बहुत बड़ी हैं। दूध से भरी,” पूजा ने मुँह भरे हुए कहा।
मौसी यह देखकर हँसी, “अरे सुनीता, तूने तो अपनी बेटी को भी अपनी तरह बना दिया।” और सुनीता ने हँसकर कहा, “क्यों नहीं? औरत की चूत एक बार खुल जाए तो बेटी-माँ का फ़र्क़ क्या रह जाता है?”
अब सोनू आगे आया और उसने पूजा की बुर में अपना दस इंच का लंड डाल दिया।
पूजा ने चीख पड़ी, “आआआह… इतना बड़ा… मम्मी… पकड़ो मेरा हाथ…” और सुनीता ने उसका हाथ पकड़ लिया, “साँस ले बेटा, अब मज़ा आएगा।” सोनू ठोकने लगा और सुनीता सामने से पूजा की चूचियाँ चूसने लगी।
इधर मैंने सुनीता की चूत में अपना लंड डालकर ठोकना शुरू किया।
मौसी ने सुनीता की गांड में रोहन काका के लिए जगह बनाई — क्योंकि उस रात रोहन काका भी आ गए थे, सब देख-सुनकर।
और अब सुनीता की गांड में रोहन का मोटा लंड और चूत में मेरा लंड — दोनों एक साथ ठोक रहे थे।
सुनीता कराह रही थी, “हाय राम… दोनों जगह… पूरी भर गई… वेद तू भी ठोक… रोहन तू भी… मुझे फाड़ दो…”
और रानू बीच में खड़ी होकर मौसी की चूचियाँ दबा रही थी और मौसी रानू की चूत में उँगली डालकर उसे गरम कर रही थी।
पूरा कमरा एक चुदाई का मंदिर बन गया था — चार औरतें, तीन मर्द, सब एक-दूसरे से जुड़े हुए।
रात बहुत बढ़ गई। सोनू ने पूजा की चूत में अपना सारा वीर्य डाल दिया, और पूजा कराह उठी, “आह… गरम… पूरी बुर भर गई…” रोहन काका ने सुनीता की गांड में डाला, और सुनीता ने लंबी साँस छोड़ते हुए कहा, “चार साल की भूख… आज पूरी निकल गई…” और मैंने सुनीता की चूत में अपना रस डाल दिया।
फिर मैं पूजा के पास गया, जो अभी भी हाँफ रही थी।
उसने मुझे देखकर मुस्कुराया और खुद अपनी टाँगें फैला दीं, “वेद, तू भी डाल… आज पूरी कर दे…” और मैंने उसकी चूत में अपना लंड डालकर ठोका, और अंत में उसकी चूचियों पर अपना वीर्य डाल दिया।
सब थके-हारे गद्दे पर लेट गए — तीन मर्द, चार औरतें। मौसी बीच में, उसके एक तरफ़ सुनीता और पूजा, दूसरी तरफ़ रानू।
मौसी ने सबके हाथ पकड़कर अपने बदन पर रख दिए और बोली, “ये घर अब तुम सबका है। माँ भी, बेटी भी, सहेली भी, सहेली की बेटी भी — सब तुम्हारी।”
सुनीता ने पूजा को गले लगाकर कहा, “बेटा, आज तुझे पता चला ना, औरत होना क्या होता है? अब तू भी मेरी तरह हो गई।”
पूजा ने शरमाकर मुस्कुराते हुए कहा, “मम्मी, अब तो हर हफ़्ते आऊँगी।” और सब हँस पड़े।
रात भर तारे चमकते रहे, और नीचे आँगन में कुत्ते सो रहे थे। ऊपर बंद कमरे में एक नई परंपरा बन चुकी थी — जहाँ एक बार कोई औरत आती, वो रंडी बनकर ही जाती।
अगले महीने पूजा अपनी कॉलेज की सहेली नेहा लाई — बीस की, काली-साँवली, मोटी गांड वाली। और रानू ने गाँव से अपनी सहेली मीना बुलाई। अब घर में छह औरतें थीं। उस रात सबने मिलकर हमें घेर लिया, और हम तीनों मर्द पूरी रात बारी-बारी सबको चोदते रहे। नेहा की बुर और मीना की गांड दोनों खुल गईं। अब ये घर एक पूरा “रंडी-कुंज” बन चुका था — जहाँ हर औरत हमारी थी।
NEXT PART: तीन मर्दों ने मिलकर छः औरतों को चोदकर रंडी बनाए
- मेरी बॉयफ्रेंड की वाइफ और मैं एक साथ ग्रुप में चुदी
- अपनी चचेरी चाची को पटाकर चोदा
- मेरी बहन की ओल्ड मैन से चुदवाने की इच्छा पूरी की
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mast randi chudayi. mujhe bhi randi banana hai. main kaise apane ghar se nikalun???????
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