my sister and old man sex story
एक शाम जब किशोर और आलिया छत पर बैठे तारे देख रहे थे, आलिया ने अपने दिल की एक गहरी इच्छा बताई… वो बचपन से ही किसी बुज़ुर्ग, अनुभवी आदमी के साथ अपने शरीर को सौंपना चाहती थी। किशोर ने न सिर्फ़ ये सुना, बल्कि एक ऐसे बुज़ुर्ग को ढूंढा जो समझदार था, अनुभवी था, और जो इस पल को यादगार बना सके। पढ़िए कैसे आलिया की बचपन की ख्वाहिश एक सुनहरी शाम में पूरी हुई, और उसने पाया कि प्यार और हवस की कोई उम्र नहीं होती…
मई की एक गर्म शाम थी। माँ-पापा अपने पुराने दोस्त के यहाँ गए हुए थे और घर पर सिर्फ़ मैं और आलिया थे।
दिन भर की गर्मी के बाद शाम को हल्की हवा चल रही थी।
हम दोनों छत पर बैठे थे, चाय पी रहे थे, और आसमान में उगते तारों को देख रहे थे।
आलिया ने सफ़ेद रंग की साड़ी पहनी हुई थी जो हवा में लहरा रही थी।
उसके बाल खुले थे, और चेहरे पर कोई मेकअप नहीं था, फिर भी वो इतनी खूबसूरत लग रही थी कि मेरी नज़रें उससे हट नहीं रही थीं।
{अगर आपने पिछली कहानी नहीं पढ़ी है तो पहले वह पढ़ लें की कैसे मेरी बहन आलिया के इच्छा पर ग्रुप चुदाई करवाया}
“किकू…” आलिया ने धीरे से मुझे पुकारा।
“हाँ…” मैंने कहा, उसकी तरफ देखे बिना, क्योंकि मैं उसके हाथों में चाय का कप देख रहा था जो हल्का कांप रहा था।
“मुझे तुमसे कुछ बात करनी है… बहुत पुरानी, बहुत गहरी…” उसकी आवाज़ में एक अजीब सी संजीदगी थी।
मैंने उसकी तरफ देखा। उसकी आँखों में कुछ था… एक बच्ची की शर्मिंदगी और एक औरत की हिम्मत का अजीब सा मिश्रण।
“क्या हुआ? सब ठीक तो है?” मैंने चिंता से पूछा।
“हाँ… सब ठीक है… बस… मुझे नहीं पता कि तुम समझोगे या नहीं… लेकिन मुझे लगता है कि तुम्हें बताना चाहिए… क्योंकि तुमने मेरी हर ख्वाहिश पूरी की है…” वो रुकी, साँस ली, और फिर बोली, “मुझे बचपन से ही… मतलब जब मैं करीब 16-17 साल की थी… तब से एक अजीब सी सोच है मन में…”
मैं चुपचाप सुन रहा था। आलिया ने अपने कप नीचे रखे और अपने हाथों को देखने लगी।
“मुझे याद है, हमारे पड़ोस में रमेश काका रहते थे… वो करीब 55-60 साल के थे… बहुत पढ़े-लिखे, बहुत शालीन… उनकी पत्नी की कई साल पहले मृत्यु हो गई थी। वो अक्सर शाम को अपने बगीचे में कुर्सी पर बैठकर किताब पढ़ते थे। मैं उनसे बहुत प्रभावित थी… उनके सफ़ेद बाल, उनकी आँखों में छुपा हुआ ज्ञान, उनकी बातों में वो गहराई…”
आलिया ने रुककर मेरी तरफ देखा। मैंने उसे प्रोत्साहित करने के लिए हल्का सा मुस्कुराते हुए सिर हिलाया।
“एक दिन… मैं उनके घर गई थी कुछ काम से… वो अपने कमरे में थे, दरवाज़ा हल्का सा खुला था… मैंने अनजाने में झाँका… और मैंने देखा कि वो… वो अपने आप को हल्का सा सहला रहे थे… उनके चेहरे पर एक अजीब सा भाव था… एक अकेलापन, एक तड़प… मैं वहाँ से चुपचाप चली आई… लेकिन उस रात से… मुझे नहीं पता क्यों… मैंने सोचना शुरू कर दिया कि… कि मैं उनके साथ… मतलब…”
वो शर्म से लाल हो गई। मैंने उसका हाथ पकड़ा। “तुम ये कहना चाह रही हो कि तुम किसी बुज़ुर्ग, अनुभवी आदमी के साथ… सेक्स करना चाहती हो?”
आलिया ने हाँ में सिर हिलाया।
“मुझे पता है ये अजीब लगेगा… लेकिन मुझे लगता है कि एक बुज़ुर्ग आदमी… जिसने ज़िंदगी देखी हो… जो समझदार हो… वो एक लड़की को… एक औरत को… किसी नौजवान से ज़्यादा समझ सकता है… वो जल्दबाज़ी नहीं करेगा… वो हर पल को महसूस करेगा… और मुझे लगता है कि मेरे शरीर को… मेरी आत्मा को… एक बुज़ुर्ग की छुअन ज़्यादा सूट करेगी…”
मैंने गहरी साँस ली।
ये सच में अलग ख्वाहिश थी। लेकिन देखा जाए तो इसमें कोई बुराई नहीं थी।
आलिया वयस्क थी, अपनी मर्ज़ी से फैसला कर सकती थी। और मैं… मैं उसकी खुशी चाहता था।
“तुम्हें पता है ये कितना मुश्किल होगा?” मैंने कहा, “एक ऐसा आदमी ढूंढना जो विश्वासयोग्य हो, जो समझदार हो, जो इसे सिर्फ़ एक शरीर की भूख न समझे… बल्कि एक पल का सम्मान करे…”
“मुझे पता है… इसीलिए मैंने कभी किसी से नहीं कहा… लेकिन तुमसे… तुमसे कहने का मन किया…” आलिया ने कहा।
मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा। “मैं कोशिश करूँगा… लेकिन ये वक्त लगेगा… और मुझे पूरी तरह यकीन होना चाहिए कि वो आदमी सही है…”
आलिया ने मेरी तरफ देखा। उसकी आँखों में आँसू थे। “सच? तुम मेरी इस ख्वाहिश को भी…?”
“हाँ… लेकिन धीरे-धीरे… समझदारी से…” मैंने कहा।
अगले कुछ हफ्तों मैंने इस बारे में सोचा।
मुझे एक ऐसा आदमी ढूंढना था जो 60 साल के आसपास का हो, शिक्षित हो, अकेला हो, और समझदार हो।
मैंने अपने दोस्तों से पूछा, अपने कॉलेज के प्रोफेसरों से बात की, लेकिन कोई सही नहीं लगा।
फिर एक दिन मैं एक पार्क में घूमने गया।
वहाँ एक बुज़ुर्ग आदमी बेंच पर बैठे किताब पढ़ रहे थे।
उनके सफ़ेद बाल थे, चश्मा लगा हुआ था, और वो सूट में थे।
उनके पास एक ब्रीफकेस रखा था।
मैंने देखा कि वो अकेले थे, और उनके चेहरे पर एक अकेलापन था जो मैंने आलिया की बातों में सुना था।
मैंने हिम्मत की और उनके पास जाकर बैठ गया।
“माफ़ कीजिएगा… क्या ये सीट खाली है?” मैंने पूछा।
उन्होंने ऊपर देखा और मुस्कुराए। “हाँ बेटा… बैठो…”
मैंने उनसे बातचीत शुरू की। पता चला उनका नाम अशोक शर्मा था।
वो रिटायर्ड प्रोफेसर थे, अंग्रेज़ी साहित्य के। उनकी पत्नी की पाँच साल पहले मृत्यु हो चुकी थी।
उनके कोई बच्चे नहीं थे। वो अकेले रहते थे और शाम को इस पार्क में आकर किताबें पढ़ते थे।
हमारी बातचीत शुरू हुई साहित्य से, फिर ज़िंदगी के अनुभवों पर आई।
अशोक सर बहुत समझदार थे। उनकी बातों में वो गहराई थी जो आलिया ढूंढ रही थी।
मैंने सोचा… क्या यही वो आदमी हैं?
कई दिनों तक मैं उनसे मिलता रहा।
हमारी दोस्ती हो गई। एक दिन मैंने हिम्मत की और उनसे सीधी बात की।
“सर… मुझे आपसे कुछ अजीब सी बात करनी है… लेकिन मुझे विश्वास है कि आप समझेंगे…” मैंने कहा।
उन्होंने अपनी किताब नीचे रखी और मेरी तरफ देखा। “बोलो बेटा…”
मैंने आलिया की इच्छा के बारे में बताया… ये नहीं बताया कि वो मेरी बहन थी, बस इतना कहा कि एक युवा औरत जो उन जैसे समझदार, अनुभवी आदमी के साथ वक्त बिताना चाहती है… जो सिर्फ़ शारीरिक संबंध नहीं, बल्कि एक भावनात्मक जुड़ाव भी चाहती है…
अशोक सर चुप रहे। काफी देर तक।
फिर उन्होंने कहा, “बेटा… मैंने 10 साल से किसी को छुआ भी नहीं… मेरी पत्नी के बाद… मैंने सोचा भी नहीं था कि… लेकिन… मैं समझ सकता हूँ उस औरत की भावना… एक बुज़ुर्ग आदमी में वो सहजता होती है… वो धैर्य होता है… जो नौजवानों में कम देखा जाता…”
“तो आप…?” मैंने पूछा।
“मैं तैयार हूँ… लेकिन शर्त है… वो मुझसे पहले मिले… एक कॉफ़ी पर… अगर उसे लगे कि मैं सही हूँ… तभी आगे बढ़ेंगे… और ये सिर्फ़ एक रात का खेल नहीं होगा… ये एक यादगार शाम होगी… जिसे वो हमेशा याद रखे…”
मैंने उनका हाथ छुआ। “धन्यवाद सर…”
अगले दिन मैंने आलिया को बताया।
उसकी आँखों में खुशी और घबराहट दोनों थी। “सच में? तुमने ढूंढ लिया?”
“हाँ… और वो तुमसे पहले मिलना चाहते हैं… अगर तुम्हें वो पसंद आए… तभी…”
“मैं तैयार हूँ…” आलिया ने कहा।
हमने एक शनिवार का दिन चुना।
अशोक सर ने एक अच्छे कैफे का नाम बताया।
मैं आलिया को वहाँ छोड़कर दूर बैठ गया।
मैंने देखा… आलिया अंदर गई… अशोक सर उठे, मुस्कुराए, उसके लिए कुर्सी खींची… वो दोनों बैठे… बातचीत शुरू हुई…
दो घंटे बीत गए। मेरी घबराहट बढ़ रही थी।
फिर आलिया का मैसेज आया, “वो बहुत अच्छे हैं… हम जा रहे हैं एक साथ… तुम घर जाओ… मैं रात को आऊँगी… या शायद कल सुबह…”
मैंने राहत की साँस ली। लेकिन फिर मुझे लगा कि मुझे वहाँ होना चाहिए… शायद दूर से ही सही… लेकिन आलिया को अकेला नहीं छोड़ना चाहिए…
मैंने उन्हें फॉलो किया। वो एक अच्छे होटल की तरफ गए।
मैंने भी वहीं एक कमरा ले लिया, अलग फ्लोर पर।
शाम ढल रही थी। मैंने आलिया को मैसेज किया, “कहाँ हो?”
“होटल में… उन्होंने एक सुंदर सूट बुक किया है… मैं बहुत खुश हूँ किकू… वो बहुत समझदार हैं… हम अभी बातें कर रहे हैं… वाइन पी रहे हैं… मुझे लग रहा है जैसे मैं किसी राजकुमार के साथ हूँ…”
मैंने मुस्कुराते हुए रिप्लाई किया, “एन्जॉय करो… मैं यहीं हूँ अगर कुछ चाहिए तो…”
रात के करीब नौ बजे आलिया का मैसेज आया, “अब शुरू होने वाला है… मैं थोड़ा नर्वस हूँ… लेकिन वो मुझे बहुत कंफर्टेबल महसूस करा रहे हैं…”
मैंने कहा, “जस्ट रिलैक्स… एन्जॉय द मोमेंट…”
मैं सो नहीं पा रहा था। मैं सोच रहा था कि ऊपर क्या चल रहा होगा…
ऊपर सूट में, अशोक सर ने आलिया के लिए एक रोमांटिक माहौल बनाया था।
हल्की सी शराब, सॉफ्ट म्यूजिक, और कमरे में गुलाब की खुशबू। वो आलिया से बातें कर रहे थे… उसके सपनों के बारे में, उसकी ख्वाहिशों के बारे में…
“तुम बहुत खूबसूरत हो…” अशोक सर ने कहा, “तुम्हारी आँखों में वो चमक है जो मुझे याद दिलाती है मेरी जवानी की…”
आलिया ने शर्माते हुए कहा, “आप भी… मतलब… आप बहुत हैंडसम हैं… आपकी उम्र के लोगों में मैंने इतना आकर्षण कभी नहीं देखा…”
अशोक सर ने हाथ बढ़ाया और आलिया के हाथ को छुआ। “क्या मैं…?”
आलिया ने हाँ में सिर हिलाया।
अशोक सर धीरे से उसके करीब आए।
उनके हाथ आलिया के चेहरे पर थे… उसके गालों को सहला रहे थे… फिर उन्होंने धीरे से उसके होठों पर एक चूमा दिया… वो एक हल्का, प्यार भरा चुंबन था…
आलिया ने आँखें बंद कर लीं। उसे लगा जैसे समय थम गया हो…
अशोक सर ने उसे खड़ा किया… धीरे से उसकी साड़ी का पल्लू नीचे किया… फिर उसकी ब्लाउज के बटन खोलने लगे… एक-एक करके… बहुत धीरे… बहुत प्यार से…
आलिया की साँसें तेज़ हो रही थीं… उसका दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था…
जब आलिया पूरी तरह नंगी हो गई, अशोक सर ने उसे एक पल के लिए देखा… जैसे कोई कलाकार अपनी कलाकृति को देखता है…
“बेमिसाल…” उन्होंने धीरे से कहा…
फिर उन्होंने खुद कपड़े उतारने शुरू किए… उनका शरीर उम्र के साथ ढीला पड़ गया था… लेकिन आलिया के लिए वो सबसे खूबसूरत शरीर था…
वो दोनों बेड पर आ गए… अशोक सर ने आलिया को अपनी बाँहों में भर लिया… उसके बालों को सहलाया… उसके गालों को चूमा…
“डरो मत…” उन्होंने कहा, “आज रात सिर्फ़ तुम्हारी है…”
उन्होंने धीरे से आलिया की टांगें खोलीं… और अपनी उँगली उसकी चूत पर फेरने लगे… बहुत धीरे… बहुत प्यार से…
आलिया ने आँखें बंद कर लीं… वो उस पल को महसूस कर रही थी… जिसका उसने सपना देखा था बचपन से…
अशोक सर ने उसकी चूत को चूमना शुरू किया… धीरे-धीरे… जीभ से चाटना शुरू किया… आलिया की कराह निकल गई… “आह…”
“पसंद आ रहा है?” अशोक सर ने पूछा।
“हाँ… बहुत…” आलिया ने कहा।
अशोक सर ने उसकी चूत में अपनी जीभ डाली… वो अंदर-बाहर करने लगे… आलिया की कमर उठने लगी… वो मचलने लगी…
फिर अशोक सर ऊपर आए… उन्होंने अपना लंड आलिया के हाथ में दिया… वो मोटा नहीं था, लेकिन काफी लंबा था… और अनुभवी…
“चाहो तो छोड़ सकती हो…” अशोक सर ने कहा।
“नहीं… मैं चाहती हूँ…” आलिया ने कहा और उसे अपने मुँह में ले लिया…
वो धीरे-धीरे चूसने लगी… अशोक सर ने उसके बालों को सहलाया… “बहुत अच्छा कर रही हो… बहुत अच्छा…”
कुछ देर बाद अशोक सर ने उसे रोका… और उसके ऊपर आ गए… उन्होंने अपना लंड आलिया की चूत पर रखा… और धीरे से अंदर डालने लगे…
बहुत धीरे… बहुत प्यार से…
आलिया को दर्द महसूस हुआ… लेकिन वो दर्द मीठा था… वो एक अनुभवी आदमी के अंदर महसूस कर रही थी…
“ठीक हो?” अशोक सर ने पूछा।
“हाँ… बहुत अच्छा लग रहा है…” आलिया ने कहा।
अशोक सर ने धीरे-धीरे झटके देने शुरू किए… वो कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहे थे… हर झटके के बीच रुकते… आलिया के चेहरे को देखते… उसके चूचियों को सहलाते…
आलिया उनकी बाहों में खोती जा रही थी… उसे वो सुरक्षा महसूस हो रही थी जिसकी उसे तलाश थी…
“तुम बहुत खूबसूरत हो…” अशोक सर बार-बार कह रहे थे…
वो दोनों एक दूसरे में लीन थे… समय का कोई होश नहीं था…
करीब आधे घंटे बाद अशोक सर ने स्पीड बढ़ाई… आलिया भी अब पूरी तरह गर्म हो चुकी थी… वो उनकी कमर को पकड़कर अपनी तरफ खींच रही थी…
“मैं… मैं झड़ने वाला हूँ…” अशोक सर ने कहा।
“मेरी अंदर ही… प्लीज़…” आलिया ने कहा…
अशोक सर ने ज़ोर से एक धक्का दिया और अपना सारा पानी आलिया की चूत में छोड़ दिया… वो गर्म था… और आलिया को बहुत अच्छा लगा…
वो दोनों एक दूसरे से लिपटकर लेट गए…
कुछ देर बाद अशोक सर ने कहा, “तुम्हारे लिए एक और सरप्राइज है…”
“क्या?” आलिया ने पूछा।
“मैंने सोचा था कि तुम्हारा भाई… माफ़ करना… मुझे पता चल गया था कि वो तुम्हारा भाई है… वो भी यहीं है… अगर तुम चाहो तो वो भी आ सकता है… मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं… मैं समझ सकता हूँ तुम्हारे रिश्ते को…”
आलिया हैरान रह गई… फिर मुस्कुराई… “आप सच में बहुत समझदार हैं…”
उसने मुझे मैसेज किया…
मैं ऊपर गया…
जब मैं कमरे में आया, तो आलिया अशोक सर की बाँहों में थी… दोनों नंगे… खुश…
मैं भी कपड़े उतारकर उनके पास आ गया…
उस रात हम तीनों ने मिलकर बहुत प्यार किया… अशोक सर ने हमें सिखाया कि प्यार की कोई उम्र नहीं… कोई सीमा नहीं…
सुबह जब हम उठे, तो अशोक सर ने कहा, “ये रात मैं हमेशा याद रखूँगा… तुम दोनों ने मेरी ज़िंदगी में रंग भर दिया…”
हमने उन्हें गले लगाया…
घर लौटते वक्त आलिया ने मुझसे कहा, “शुक्रिया किकू… तुमने मेरी हर ख्वाहिश पूरी की… मैं दुनिया की सबसे खुशनसीब लड़की हूँ…”
मैंने उसके हाथ को पकड़ा… “और मैं दुनिया का सबसे खुशनसीब भाई…”
हम दोनों मुस्कुराए… और घर की तरफ बढ़ गए… एक नई याद लेकर… एक नए अनुभव के साथ… जो हमेशा हमारे दिलों में बसा रहेगा…
अगले पार्ट में मैं बताऊँगा की कैसे आलिया चुपचाप हमारे मामा से चुदवाई….
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