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एक वित्तीय संकट से जूझ रहा परिवार जब अपने बड़े से बंगले को बचाने के लिए मजबूर हो जाता है तो उनके घर में एक अनोखा धंधा शुरू होता है। जानिए कैसे तीन पीढ़ियों की औरतें एक साथ मिलकर अपने घर को रंडी खाने में बदल देती हैं और क्यों वो अब इस नई ज़िंदगी से बेहद खुश हैं। यह कहानी वासना, मजबूरी और नई पहचान की है।
मेरा नाम निशा है। मैं अठाईस साल की जवान औरत हूँ और मेरे पति की मृत्यु को दो साल हो चुके हैं।
मेरे साथ मेरी सास अर्चना और उनकी सास लता रहती हैं। हम तीनों एक बड़े से बंगले में रहते थे जो शहर के सबसे पॉश इलाके में था।
मेरे पति के जाने के बाद हमारी आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई।
उनके बिजनेस में भारी नुकसान हुआ और हम पर करोड़ों का कर्ज़ हो गया।
बैंक वाले रोज़ आकर तंग करते थे और हमारे घर को नीलाम करने की धमकी दे रहे थे।
एक दिन हमारे पड़ोस में रहने वाले राजेंद्र आए।
वो इस इलाके के सबसे अमीर और पावरफुल आदमी थे।
उनकी उम्र पैंतालीस साल थी और वो रियल एस्टेट का बड़ा धंधा करते थे।
“निशा जी, मैंने सुना है तुम्हारी मुश्किलें बहुत बढ़ गई हैं। मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ,” उन्होंने कहा।
“कैसे राजेंद्र जी? हमारे पास तो कुछ बचा ही नहीं है,” मैंने रोते हुए कहा।
“मैं तुम्हारा यह बंगला खरीदना चाहता हूँ। लेकिन शर्त यह है कि तुम तीनों यहाँ रहोगी और मेरे लिए काम करोगी,” उन्होंने कहा।
“कैसा काम?” मेरी सास अर्चना ने पूछा।
“मैं चाहता हूँ कि तुम तीनों मेरी रंडी बनो। मैं इस घर को एक रंडी खाने में बदल दूँगा और तुम तीनों मेरे ग्राहकों की सेवा करोगी। बदले में मैं तुम्हारा सारा कर्ज़ उतार दूँगा और हर महीने तुम्हें खूब पैसे दूँगा,” राजेंद्र ने सीधे कहा।
हम तीनों हैरान रह गए। लेकिन हमारे पास कोई चारा नहीं था।
या तो हम अपना घर खो देते और सड़क पर आ जाते, या फिर यह रास्ता अपनाते।
हमने आपस में सलाह की और फैसला किया कि हम राजेंद्र की शर्त मान लेंगे।
“ठीक है राजेंद्र जी, हम तैयार हैं,” मैंने कहा।
“बस यही तो मुझे चाहिए था। अब से यह घर ‘रंडी खाना’ है और तुम तीनों इसकी रंडी,” वो मुस्कुराए।
पहली रात को राजेंद्र ने पूरे घर को तैयार किया।
सभी कमरों में बड़े-बड़े बिस्तर लगवाए गए, शीशे लगवाए गए और हर तरह की सुविधाएँ जुटाई गईं।
राजेंद्र ने कई अमीर दोस्तों को बुलाया था जो इस नए रंडी खाने की पहली रात का मज़ा लेंगे।
शाम को मैंने लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी जिसमें मेरे बड़े-बड़े दूध आधे बाहर निकले हुए थे।
मैंने ऊपर से पारदर्शी गाउन पहना। मेरी उम्र अठाईस साल थी और मेरा फिगर छत्तीस-अट्ठाईस-छत्तीस का था।
मेरे स्तन बड़े और गोल थे, मेरी कमर पतली और कूल्हे भरे हुए थे।
राजेंद्र मुझे पहले कमरे में ले गए। वो नंगे हो गए और उनका लंड आठ इंच लंबा और बहुत मोटा था।
वो मेरे पास आए और मेरे गाउन को खींचकर उतार दिया।
“वाह निशा, तुम तो बहुत ही मस्त माल हो। आज से तुम मेरी रंडी हो,” उन्होंने कहा और मेरे ब्रा के ऊपर से ही मेरे दूध दबाने लगे।
मेरे निप्पल कड़े हो गए। उन्होंने मेरी ब्रा खोल दी और मेरे स्तन बाहर आ गए।
उन्होंने एक स्तन को मुँह में ले लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसने लगे।
वो मेरे निप्पल को काट-काट कर खेल रहे थे और दूसरे स्तन को हाथ से मसल रहे थे।
“आहह राजेंद्र जी… धीरे… दर्द हो रहा है…” मैंने कहा।
“रंडी को दर्द नहीं मज़ा आता है। आज से तुम मेरी रंडी हो और मैं जैसे चाहूँगा वैसे चोदूँगा,” उन्होंने कहा और और ज़ोर से चूसने लगे।
फिर वो नीचे गए और मेरी पैंटी खींचकर उतार दी। मेरी गुलाबी बुर उनके सामने थी।
उन्होंने मेरी टाँगें फैलाईं और चूत पर जीभ लगाई।
“ओह… यह क्या कर रहे हो…” मैं काँप उठी।
“तुम्हारी बुर को चाट रहा हूँ मेरी रंडी,” उन्होंने कहा और मेरी बुर की दरार में जीभ घुसा दी।
वो मेरी क्लिटोरिस को चूस रहे थे और मैं पागल हो रही थी।
उन्होंने दो उँगलियाँ मेरी बुर में डाल दीं और ज़ोर-ज़ोर से हिलाने लगे।
“आहह… और ज़ोर से… मैं झड़ने वाली हूँ…” मैंने कहा।
मैं झड़ गई और मेरी बुर से पानी निकलकर उनके मुँह में आया जिसे उन्होंने पी लिया।
अब उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया। मैं घुटनों और हाथों के बल हो गई।
उन्होंने मेरी बुर में थूक लगाया और अपने लंड का सुपड़ा मेरी बुर के मुँह पर रखा। एक ही धक्के में आधा लंड अंदर चला गया।
“आहह… दर्द हो रहा है… रुको…” मैं चीखी।
“रुकूँगा नहीं रंडी। आज तुम्हें मैं पूरी तरह से चोदूँगा,” उन्होंने कहा और एक और ज़ोरदार धक्का दिया।
पूरा लंड मेरी बुर में समा गया। मेरी आँखों से आँसू निकल आए।
उन्होंने मेरे बाल पकड़े और पीछे से ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाने शुरू कर दिए। पूरा कमरा “पच पच” चुदाई की आवाज़ों से गूँज उठा।
“आहह… हाँ… और ज़ोर से चोदो… फाड़ दो मेरी बुर को…साले चुदक्कड़ राजेंद्र, भडुआ तू और सही से चोद साले, तुझे चोदना नहीं आता है, तुझे नहीं पता की रंडी को खुश कैसे करते हैं।” मैं चिल्ला रही थी।
“साली छिनाल, रंडी …. आज मैं तुझे चोदकर सबक सिखाऊँगा … आजा साली रांड तेरे बुर को चोदकर भोसड़ा बनता हूँ ……..साली रंडी..” राजेंद्र जी मुझे गाली देते हुए चोदे जा रहे थे, मेरे उकसाने पर वो और तेज़ी से चोद रहे थे।
वो बीस मिनट तक मुझे इसी पोज़िशन में चोदते रहे। फिर उन्होंने मुझे लिटाया और मिशनरी पोज़िशन में आ गए। उन्होंने मेरे पैर अपने कंधों पर रखे और फिर से चोदना शुरू किया। उन्होंने मेरे दूध को मसलते हुए चोदना जारी रखा।
“आज मैं तुझे साली रंडी बना के छोडूंगा…” राजेंद्र जी चोदते हुए बोले जा रहे थे।
“बनवो साले राजेंद्र, बना मुझे भोसड़ी वाले रंडी, बना तू..” मैंने कहा।
थोड़ी देर बाद उन्होंने कहा, “मैं झड़ने वाला हूँ… कहाँ निकालूँ?”
“अंदर ही डाल दो… साले” मैंने कहा।
उन्होंने और तेज़ धक्के लगाए और अपना सारा वीर्य मेरी बुर में ही छोड़ दिया। मैं भी उनके साथ झड़ गई।
अगले दिन से घर में ग्राहकों का आगमन शुरू हो गया। मेरी सास अर्चना की उम्र पैंतालीस साल थी लेकिन वो बहुत ही खूबसूरत थीं। उनके स्तन बड़े और लटकते हुए थे, कमर थोड़ी मोटी लेकिन कूल्हे बहुत भरे हुए थे।
पहला ग्राहक गौतम था जो एक बड़ा बिजनेसमैन था। उसने अर्चना को चुना। वो अर्चना को एक कमरे में ले गया।
“आज मैं तुम्हें जमकर चोदूँगा,” गौतम ने कहा।
“हाँ साहब, मैं तैयार हूँ। मेरी बुर आपका इंतज़ार कर रही है,” अर्चना ने कहा।
गौतम ने अर्चना के कपड़े उतार दिए। उनके बड़े-बड़े दूध बाहर आ गए। गौतम ने एक स्तन को मुँह में लेकर चूसना शुरू किया और दूसरे को हाथ से मसलने लगा।
“क्या मस्त दूध हैं तुम्हारे। मैं इन्हें रोज़ चूसूँगा,” गौतम ने कहा।
फिर वो नीचे गया और अर्चना की बुर को चाटने लगा। अर्चना पागल हो रही थीं। उनकी बुर से पानी निकल रहा था।
“आहह… और ज़ोर से चाटो… मज़ा आ रहा है…” अर्चना कराहीं।
गौतम ने अपने कपड़े उतारे और उसका लंड नौ इंच लंबा था। उसने अर्चना को घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी बुर में लंड पेल दिया।
“आहह… मर गई… इतना बड़ा…” अर्चना चीखीं।
गौतम ने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाए। पूरा कमरा “फच फच” की आवाज़ों से गूँज उठा। अर्चना की गांड थपथपा रही थी।
“आहह… हाँ… और ज़ोर से चोदो… मेरी बुर फाड़ दो…” अर्चना चिल्ला रही थीं।
गौतम ने तीस मिनट तक उन्हें चोदा और फिर उनकी बुर में ही झड़ गया।
लता सबसे बड़ी थीं। उनकी उम्र पचपन साल थी लेकिन वो अभी भी बहुत ही खूबसूरत थीं। उनके बाल सफेद हो गए थे लेकिन चेहरे पर कम झुर्रियाँ थीं। उनके स्तन बहुत बड़े थे और कूल्हे भी भरे हुए थे।
एक युवा ग्राहक रणवीर आया जो पच्चीस साल का था। उसने लता को चुना क्योंकि उसे बड़ी उम्र की औरतों के साथ सेक्स करना पसंद था।
“आंटी जी, मैं आपको आज जमकर चोदूँगा,” रणवीर ने कहा।
“आओ बेटा, मेरी बुर तुम्हारा इंतज़ार कर रही है,” लता ने कहा।
रणवीर ने लता के कपड़े उतार दिए। उनके बहुत बड़े दूध बाहर आ गए। रणवीर ने दोनों स्तनों को मुँह में लेकर बारी-बारी से चूसना शुरू किया।
“क्या मस्त दूध हैं आंटी जी। मैं इन्हें रोज़ चूसूँगा,” रणवीर ने कहा।
फिर वो नीचे गया और लता की बुर को चाटने लगा। लता की बुर में थोड़ी सी झाँटें थीं लेकिन गुलाबी और चिकनी थी।
“आहह… और ज़ोर से चाटो बेटा… मैं झड़ने वाली हूँ…” लता कराहीं।
रणवीर ने अपने कपड़े उतारे और उसका लंड सात इंच लंबा था। उसने लता को लिटाया और उनके पैर अपने कंधों पर रखे। फिर उसने अपना लंड लता की बुर में डाल दिया।
“आहह… हाँ बेटा… और ज़ोर से चोदो… मेरी बुर फाड़ दो…” लता चिल्लाईं।
रणवीर ने ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाए। वो लता के दूध को मसलते हुए चोद रहा था। पंद्रह मिनट बाद वो लता की बुर में ही झड़ गया।
एक हफ्ते बाद राजेंद्र ने एक बड़ी पार्टी रखी। उसने अपने दस दोस्तों को बुलाया था और तीनों हम औरतों को उनके सामने प्रस्तुत किया।
“आज तुम तीनों इन दस लोगों की रंडी बनोगी। एक-एक करके सबको खुश करना,” राजेंद्र ने कहा।
हम तीनों तैयार थे। मैंने लाल बिकिनी पहनी थी, अर्चना ने काली और लता ने सफेद। हम तीनों एक बड़े कमरे में आ गए जहाँ दस मर्द इंतज़ार कर रहे थे।
पहले दो मर्दों ने मुझे पकड़ लिया। एक ने मेरे मुँह में लंड दे दिया और दूसरा मेरी बुर में घुस गया। मैं दोनों तरफ से चुद रही थी। मुँह में लंड चूस रही थी और बुर में भी लंड ले रही थी।
“आहह… हाँ… और ज़ोर से चोदो…” मैं मुँह भरवां बोली।
फिर दो और मर्द आए और उन्होंने अर्चना को पकड़ लिया। एक ने उनकी बुर चाटना शुरू किया और दूसरा उनके दूध चूसने लगा।
“आहह… मज़ा आ रहा है…” अर्चना कराहीं।
फिर दो मर्दों ने लता को पकड़ लिया। उन्होंने लता को घोड़ी बनाया और एक ने उनकी बुर में लंड डाल दिया और दूसरा उनकी गांड में।
“आहह… मर गई… दोनों छेदों में…” लता चीखीं।
पूरा कमरा “फच फच”, “पच पच” और कराहियों की आवाज़ों से गूँज रहा था। हम तीनों रंडियों की तरह चुद रही थीं और मज़े ले रही थीं।
रणवीर ने मुझे अपने पास बुलाया और मुझे अपने ऊपर बैठाया। मैं उनके लंड पर कूदने लगी। वो मेरे दूध को मसल रहे थे और मैं ऊपर-नीचे कूद रही थी।
“क्या मस्त चूत है इसकी। बहुत टाइट है,” रणवीर बोला।
फिर गौतम ने अर्चना को घोड़ी बनाया और पीछे से उनकी बुर में लंड पेल दिया। वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगा रहा था।
“आहह… और ज़ोर से… फाड़ दो…” अर्चना चिल्लाईं।
फिर राजेंद्र ने लता को लिटाया और उनके पैर अपने कंधों पर रखे। उसने अपना लंड लता की बुर में डाल दिया और ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा।
“आहह… राजेंद्र जी… मर गई…” लता कराहीं।
हम तीनों एक साथ झड़ गए और मर्दों ने भी हमारे अंदर अपना वीर्य छोड़ दिया।
अब हमारा घर पूरी तरह से “रंडी खाना” बन चुका था। हर रात यहाँ पार्टियाँ होती थीं और अमीर-अमीर लोग आते थे। हम तीनों उनकी सेवा करती थीं और उन्हें खुश करती थीं।
राजेंद्र ने हमारा सारा कर्ज़ उतार दिया था और हमें हर महीने लाखों रुपये देता था। हम अब बहुत खुश थे। हमें सेक्स का पूरा मज़ा मिल रहा था और पैसे भी मिल रहे थे।
मैं रोज़ नए-नए लंड लेती थी और मज़े करती थी। मेरी बुर अब हमेशा गीली रहती थी और मुझे हर वक़्त चुदवाने का मन करता था।
अर्चना भी बहुत खुश थीं। उन्हें युवा लंड मिल रहे थे जो उनकी बुर को अच्छी तरह से चोदते थे।
लता भी बहुत खुश थीं। उन्हें अपनी उम्र से आधी उम्र के लंड मिल रहे थे जो उनकी बुर और गांड दोनों की जमकर चुदाई करते थे।
हम तीनों अब एक खुशहाल परिवार थे। हमारा घर अब एक प्रसिद्ध “रंडी खाना” बन चुका था जहाँ हर कोई आना चाहता था।
राजेंद्र ने हमारे घर का नाम भी बदल दिया था। अब यह “निशा का रंडी खाना” के नाम से प्रसिद्ध था।
हम तीनों अब गर्व से कह सकते थे कि हम रंडी हैं और हमें अपने काम पर गर्व है। हम हर रात नए-नए लंड लेते हैं और मज़े करते हैं।
यह हमारी नई ज़िंदगी है और हम इससे बहुत खुश हैं।
- अंकल ने ब्लैकमेल करके चोदा और पत्नी बनाया
- लंगड़ी बहन चुदवाने के लिए रंडी बनी
- दोस्त की माँ को चोदकर मजा दिया
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