मेरे पति ने 7 लौड़ों से मेरी चुदाई करायी

7 big black cock se chudwayi

शादी को 8 साल हो गए थे। महेश जी मुझे बहुत प्यार करते थे और मेरी हर इच्छा पूरी करते थे।

हमारी सेक्स लाइफ बहुत अच्छी चल रही थी। लेकिन एक दिन ऐसा हुआ जिसने मेरी जिंदगी फिर से बदल दी।

{अगर आपने मेरी पिछली कहानी अंकल ने ब्लैकमेल करके चोदा और पत्नी बनाया तो पहले इसे पढ़ ले फिर इसको पढ़ने में मजा आयेगा}

मैं अकेले घर पर थी। महेश जी ऑफिस गए हुए थे।

मैं उनके लैपटॉप पर कुछ काम कर रही थी तभी अचानत एक फोल्डर दिखाई दिया। “प्राइवेट वीडियो” नाम से।

मेरे मन में लालच आ गया। मैंने खोलकर देखने का फैसला किया।

पहला वीडियो चलाया तो मेरी आंखें खुली की खुली रह गईं।

स्क्रीन पर एक सफेद गोरी औरत को तीन-चार काले मोटे आदमी घेरे हुए थे।

उनके लंड… ओह माई गॉड… इतने बड़े-बड़े, मोटे-मोटे, काले-काले। जैसे कोई लोहे की मोटी रॉड हो।

वो औरत एक काले लंड को चूस रही थी, दूसरा उसकी चुत में था, और तीसरा उसकी गांड में।

वो चीख रही थी लेकिन उसके चेहरे पर मजा साफ दिख रहा था।

मैं देखती ही रह गई। मेरे शरीर में अजीब सी सनसनी दौड़ने लगी।

मेरी सांसें तेज हो गईं। जांघों के बीच गर्मपन फैलने लगा। मैंने अपना हाथ अपने कुर्ते के अंदर डाला। ब्रा के ऊपर से ही चूची दबाने लगी। निप्पल सख्त हो गए।

वीडियो देखते-देखते मैं अपने आप को उस औरत की जगह कल्पना करने लगी।

काश मैं भी इतने काले मोटे लंडों से एक साथ चुदवा पाती। मेरे मन में यह विचार आया तो मैं खुद ही शर्मा गई। लेकिन वो विचार बार-बार आ रहा था।

मैंने और वीडियो देखे। हर वीडियो में गोरी औरतें काले मर्दों से चुद रही थीं।

उनके लंड इतने लंबे और मोटे थे कि औरतों की चुतें पूरी फैली हुई दिख रही थीं।

कुछ वीडियो में तो एक साथ 6-7 काले आदमी एक औरत को चोद रहे थे। हर छेद में लंड था।

मैं बस देखती रही। मेरी चुत पूरी गीली हो चुकी थी। पैंटी पूरी भीग गई थी।

मैंने अपना हाथ पैंटी के अंदर डाला। उंगली चुत में डालकर मसलने लगी। आंखें वीडियो पर टिकी थीं।

“आह्ह्ह… क्या मजा आ रहा होगा उन औरतों को,” मैंने सोचा।

मेरी उंगली तेजी से अंदर-बाहर होने लगी। मैं झड़ने वाली थी। वीडियो में वो औरत चीख रही थी, “और जोर से चोदो… फाड़ दो मेरी चुत…”

मैं भी उसी के साथ झड़ गई। पैर फैलाकर कुर्सी पर ही बैठी-बैठी झड़ गई।

पानी उंगली पर लगा हुआ था। मैंने उंगली चाट ली। नमकीन स्वाद था।

उस दिन के बाद मैं रोज वो वीडियो देखने लगी। महेश जी को भी मैंने वो वीडियो दिखाए।

उन्होंने पहले तो मुझे डांटा, “तुम यह सब देखती हो?”

मैंने शर्माते हुए कहा, “जी… मुझे अच्छा लगता है देखना…”

महेश जी ने मुझे पास बुलाया। मेरे सिर पर हाथ फेरा। “क्या तुम भी ऐसा करना चाहती हो?”

मैंने सिर झुकाया। शर्म से चेहरा लाल हो गया। धीरे से हां में सिर हिलाया।

“सच्ची बताओ,” महेश जी ने पूछा।

“जी… मन करता है… एक बार जानना है… कैसा लगता है… इतने बड़े-बड़े काले लंड…” मेरी आवाज धीमी थी।

महेश जी ने मुझे अपनी गोद में बिठाया। “अगर तुम चाहती हो तो मैं इंतजाम कर सकता हूं। लेकिन डर तो नहीं लगेगा?”

“थोड़ा लगेगा… लेकिन आप साथ रहेंगे ना?” मैंने पूछा।

“हां… मैं साथ रहूंगा… देखूंगा तुम्हें…”

अगले हफ्ते महेश जी ने मुझे बताया कि उन्होंने सात काले आदमियों का इंतजाम कर लिया है।

वो सब अफ्रीकन थे, मुंबई में काम करते थे। उनके पास बुलाया गया था।

“सात?” मैंने घबराहट से पूछा।

“हां… तुमने तो वीडियो में देखा था ना… एक साथ कई लंड…”

मैंने हां में सिर हिलाया। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था।

सात काले लंड… मेरी चुत और गांड में… मुझे डर भी लग रहा था और उत्साह भी हो रहा था।

उस दिन रात को मैं सो नहीं पाई। बस सोचती रही कि कल क्या होगा। महेश जी ने फार्महाउस बुक किया था। वहां कोई डिस्टर्ब नहीं करेगा।

शनिवार की सुबह थी। महेश जी ने मुझे एक खास लाल रंग की साड़ी पहनने को कहा।

ब्लाउज बहुत छोटा था, आधी चूची बाहर निकली हुई थी। साड़ी भी बहुत पतली, पेट और नाभि साफ दिख रही थी।

मैंने खुद को शीशे में देखा। मैं बहुत सेक्सी लग रही थी। मेरा फिगर 34-30-36 हो चुका था।

शादी के बाद और भी भरा-पूरा लग रहा था।

फार्महाउस पहुंचे तो शाम हो चुकी थी। बड़ा सा बंगला, बीच में बड़ा हॉल।

महेश जी ने मुझे सोफे पर बिठाया। फोन किया। आधे घंटे बाद दरवाजे की घंटी बजी।

मेरा दिल मुंह में आ गया। वो आ गए।

सात काले आदमी अंदर आए। वो सब लगभग 6 फीट से ऊंचे थे। शरीर पर मोटी मांसपेशियां।

और उनके पैंट के अंदर… ओह गॉड… उभार इतना बड़ा कि पैंट फटने को थी।

महेश जी ने उनसे हाथ मिलाया। फिर मेरी तरफ इशारा किया। “यह मेरी बीवी है। आज इसकी चाहत पूरी करनी है।”

वो सातों मुझे देखकर मुस्कुराए। उनकी आंखों में वासना की आग थी। मुझे देखकर उनके पैंट के उभार और बड़े हो गए।

“हैलो ब्यूटी,” एक ने कहा। उसकी आवाज भारी थी।

मैंने हाथ हिलाया। शर्म से मेरी आंखें नीचे झुक गईं।

महेश जी ने मुझे कहा, “जाओ… तैयार हो जाओ… हम लोग बेडरूम में इंतजार करते हैं।”

मैं बेडरूम में गई। अंदर एक बहुत बड़ा बेड था। पूरे कमरे में मोमबत्तियां जल रही थीं।

शीशे लगे थे हर तरफ। मैं देख सकूंगी कि मुझे कैसे चोदा जा रहा है।

मैंने साड़ी उतारी। ब्लाउज भी। सिर्फ पैंटी और ब्रा में थी। फिर सोचा कि यह भी उतार देती हूं। पूरी नंगी हो गई।

कुछ देर बाद दरवाजा खुला। सातों काले मर्द अंदर आए।

उन्होंने अपने कपड़े उतारने शुरू किए। जैसे-जैसे उनके कपड़े उतरे, मेरी आंखें बड़ी-बड़ी होती गईं।

उनके लंड… ओह माई गॉड… वो सब 10-12 इंच के थे। मोटे… इतने मोटे कि मेरी कलाई जितने। काले… चमकदार… नसें फूली हुई… गोटे भारी-भारी…

मैं डर गई। सच में डर गई। “महेश जी… यह तो बहुत बड़े हैं…” मैंने कहा।

“डरो मत… धीरे-धीरे ले लोगी…” महेश जी ने मुझे दिलासा दिया। वो एक कोने में कुर्सी पर बैठ गए। देखने के लिए।

पहला काला मेरे पास आया। उसने मेरे बाल पकड़े और मुझे खींचकर खड़ा किया।

मेरे चूचियों को दबाना शुरू किया। उसके हाथ बहुत बड़े थे। मेरी पूरी चूची उसकी हथेली में समा गई।

“ब्यूटीफुल टिट्स,” वो बोला।

दूसरा मेरे पीछे आ गया। उसने मेरी गांड को सहलाया। उसका लंड मेरी कमर पर टिका हुआ था। इतना गर्म और कठोर।

“और यह गांड… वेरी नाइस,” वो बोला।

तीसरे ने मेरा हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया। वो लंड कांप रहा था। गर्म था। कठोर था। मैं उसे पकड़ नहीं पा रही थी। इतना मोटा था।

“चूसो,” उसने कहा।

मैंने घुटनों पर बैठने की कोशिश की। लेकिन वो मुझे खींचकर बेड पर लिटा दिया।

“पहले इसकी चुत देखें,” एक ने कहा।

वो सातों मेरे चारों ओर खड़े हो गए। मेरी टांगें फैला दी गईं। एक ने अपनी उंगली मेरी चुत में डाली।

“वेरी टाइट… यह तो कुँवारी लग रही है,” वो हंसा।

“मेरे पति हैं… दो साल से चुद रही हूं,” मैंने कहा।

“तो फिर तो यह मोटा लंड ले लेगी,” कहते हुए उसने अपना लंड मेरी चुत पर रगड़ना शुरू किया।

मेरी चुत पूरी गीली हो चुकी थी। डर के साथ-साथ उत्साह भी था। मैंने महेश जी की तरफ देखा। वो मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने हाथ हिलाया। “जाने दो… मजे लो…”

पहले काले ने अपने लंड का सिरा मेरी चुत पर लगाया। वो इतना मोटा था कि मुहाना पूरा फैल गया। उसने धीरे से धक्का दिया।

“आह्ह्ह्ह… बहुत दर्द हो रहा है…” मैं चीखी।

“शांत रहो… अभी तो आधा ही अंदर गया है,” वो बोला।

आधा? मैंने नीचे देखा तो सच में आधा से ज्यादा बाहर था। और अंदर जो था वो मेरी चुत को फाड़ रहा था।

“प्लीज… धीरे…”

“धीरे से क्या मजा… तुम्हें तो जोर-जोर से चोदना है,” कहते हुए उसने एक जोरदार धक्का मारा।

पूरा लंड अंदर घुस गया। मेरी चीख पूरे कमरे में गूंजी। “आह्ह्ह्ह्ह्ह्ह… मर गई… निकालो… बहुत दर्द हो रहा है…”

वो रुका नहीं। उसने ताबड़तोड़ धक्के लगाने शुरू कर दिए।

हर धक्के के साथ बेड हिल रहा था। मेरी चुत पूरी फैली हुई थी। उसका मोटा काला लंड अंदर-बाहर हो रहा था।

“फच्च… फच्च… फच्च…” की आवाजें आ रही थीं।

दूसरा काला मेरे मुंह के पास आया। उसने अपना लंड मेरे होठों पर रगड़ा। “चूसो…”

मैंने मुंह खोला। वो इतना मोटा था कि मुंह में घुस ही नहीं रहा था। उसने जोर से धक्का दिया। आधा लंड मुंह में घुस गया। मेरी जीभ उसकी नसों को महसूस कर रही थी।

“चूसो… जोर से…”

मैंने होंठ गोल किए और खींचना शुरू किया। वो लंड कांप रहा था। नमकीन स्वाद था।

तीसरा मेरे हाथ में लंड देकर खड़ा हो गया। मैंने उसे भी हिलाना शुरू किया।

अब मैं तीन लंडों से एक साथ काम कर रही थी। एक चुत में, एक मुंह में, एक हाथ में।

चौथा मेरे चूचियों के बीच आ गया। उसने लंड मेरी चूचियों के बीच रखा और दबाने लगा। मेरी चूचियां पूरी दब गईं। वो उनके बीच में अपना लंड रगड़ रहा था।

पांचवां और छठा मेरे हाथों में लंड देकर खड़े हो गए। मैं दोनों हाथों से उन्हें हिला रही थी।

सातवां मेरे पीछे गया। उसने मेरी गांड पर थूका। फिर उंगली से मलना शुरू किया।

“नहीं… गांड में मत डालना… बहुत दर्द होगा…” मैंने कहा।

“आज तो हर छेद में लंड जाएगा,” वो बोला।

पहला जो चुत में था वो झड़ने वाला था। उसने गति तेज कर दी।

मेरी चुत में उसका लंड पूरी तरह घुस-बाहर हो रहा था। मेरी चीखें निकल रही थीं।

“आह्ह्ह्ह… और जोर से… चोदो मुझे… फाड़ दो…” मैं खुद ही बोलने लगी। मस्ती में मैं भूल गई थी कि मैं क्या कह रही हूं।

वो झड़ गया। ढेर सारा गर्म वीर्य मेरी चुत में भर दिया। वो इतना ज्यादा था कि बाहर बहने लगा।

जैसे ही वो निकला, दूसरा तुरंत उसकी जगह ले लिया। उसका लंड और भी मोटा था।

उसने बिना रुके एक ही धक्के में पूरा लंड अंदर डाल दिया।

“आह्ह्ह्ह्ह्ह… मां… मर गई…” मैं चीखी।

वो और जोर-जोर से चोदने लगा। मेरी चुत पहले वाले के वीर्य से भरी हुई थी। गीली हो चुकी थी। इसलिए दर्द कम था लेकिन फिर भी उसका लंड बहुत मोटा था।

मैं अभी भी दो लंडों को हाथ से हिला रही थी और एक को मुंह में लिए हुए थी।

मुंह वाला झड़ने वाला था। उसने मेरा सर पकड़ा और जोर से अपना लंड मुंह में पेल दिया। वो मेरी गले तक घुस गया।

“उग्ग्ग्ग… उग्ग्ग्ग…” मैं उल्टी की तरह कांप रही थी।

वो झड़ गया। ढेर सारा वीर्य सीधे मेरे गले में उतर गया। मैं खांसने लगी। वो निकला तो मेरे मुंह से वीर्य बह रहा था।

तीसरा मेरे मुंह में आ गया। इस बार मैंने खुद चूसना शुरू किया। उसका लंड चाटा।

सिरे को चूसा। वो मस्त होकर मेरी चूचियों को दबाने लगा।

दूसरा जो चुत में था वो भी झड़ गया। अब मेरी चुत दो लोगों के वीर्य से भरी हुई थी। बाहर बह रहा था।

तीसरा चुत में आया। उसने मुझे डॉगी स्टाइल में कर दिया। अब मैं घुटनों और हाथों पर थी। उसने पीछे से अपना लंड मेरी चुत में डाला।

“आह्ह्ह्ह… पीछे से और ज्यादा अंदर जा रहा है…” मैंने महसूस किया।

वो मेरी कमर पकड़कर जोर-जोर से धक्के लगा रहा था। मेरे चूचियां हिल रहे थे। चौथा मेरे नीचे आ गया।

उसने मेरे मुंह में अपना लंड दे दिया। अब मैं चुत में भी ले रही थी और मुंह में भी।

पांचवां मेरे हाथ में आ गया। मैं उसे हिला रही थी। छठे ने मेरी गांड पर थूका और अपना लंड वहां लगा दिया।

“नहीं… प्लीज… गांड में मत…” मैंने मुंह से कहने की कोशिश की लेकिन मुंह में लंड था।

उसने एक जोरदार धक्का मारा। उसका मोटा लंड मेरी गांड में घुस गया।

मैं चीख नहीं पा रही थी। मुंह में लंड होने के कारण सिर्फ “उम्म्म्म्म… उम्म्म्म्म…” की आवाज निकल रही थी।

अब मैं तीन लंडों से एक साथ भरी हुई थी। चुत में एक, मुंह में एक, गांड में एक। और दो हाथों में भी। मतलब पांच लंडों से एक साथ।

मेरा शरीर झुलस रहा था। हर छेद में आग लगी हुई थी। लेकिन साथ ही असीम मजा भी आ रहा था। मैं झड़ने वाली थी।

“आह्ह्ह्ह… मैं झड़ने वाली हूं…” मैंने सोचा।

और फिर मैं झड़ गई। पहली बार इतने लंडों से चुदवाते हुए। मेरी चुत ने ढेर सारा पानी छोड़ा। गांड भी सिकुड़ रही थी। मुंह में लंड था इसलिए चीख नहीं पाई।

वो सब रुके नहीं। वो बदल-बदल कर मुझे चोदते रहे। जो चुत में था वो झड़कर निकला तो दूसरा आ गया। जो गांड में था वो निकला तो तीसरा आ गया।

मेरी चुत और गांड दोनों फैली हुई थीं। दोनों से वीर्य और खून मिलकर बह रहा था। मेरी चूचियां लाल हो गई थीं। निप्पल सूजे हुए थे।

उन्होंने मुझे हर पोजीशन में चोदा। मिशनरी में, डॉगी में, काउगर्ल में, स्पून में।

कभी एक साथ दो लंड चुत में डालने की कोशिश की तो मैं चीख पड़ी। इतनी फैल गई मेरी चुत कि दोनों लंड आधे-आधे अंदर चले गए।

“आह्ह्ह्ह… मर गई… फाड़ दी मेरी चुत…” मैं रो रही थी लेकिन मजा भी आ रहा था।

महेश जी कोने में बैठे-बैठे देख रहे थे। उनका लंड भी खड़ा था। वो अपने हाथ से हिला रहे थे। मुझे देखकर वो भी मस्त हो रहे थे।

“चोदो मेरी बीवी को… फाड़ दो उसकी चुत…” वो चिल्ला रहे थे।

उनकी बात सुनकर वो और जोश में आ गए। सातों ने मुझे बारी-बारी से चोदा।

कुछ ने दो बार भी किया। मेरी चुत में कम से कम बारह बार वीर्य गिरा। गांड में पांच बार। मुंह में भी पांच-छह बार।

रात के दो बजे तक यह सिलसिला चला। मैं पूरी तरह थक चुकी थी।

मेरा शरीर कांप रहा था। चुत और गांड दोनों से सफेद वीर्य बह रहा था। मेरी चाल बदल गई थी। चल नहीं पा रही थी सही से।

महेश जी ने मुझे गोद में उठाया। बाथरूम में ले गए। गर्म पानी से मेरी चुत और गांड धोई। बहुत दर्द हो रहा था। मैं रो रही थी लेकिन खुश भी थी।

“कैसा लगा?” महेश जी ने पूछा।

“बहुत दर्द हुआ… लेकिन… बहुत मजा भी आया…” मैंने कहा।

“चाहो तो अगली बार फिर करवा दूंगा,” उन्होंने कहा।

मैंने हां में सिर हिलाया। वो सातों काले मर्द वहीं रुके हुए थे। सुबह उन्होंने फिर मुझे चोदा। इस बार और जोर-जोर से। मेरी चुत पूरी लाल हो गई थी। सूज गई थी।

उसके बाद महेश जी ने उन्हें पैसे दिए और विदा किया।

मैं एक हफ्ते तक ठीक से चल नहीं पाई। लेकिन वो यादें… वो सात काले लंड… आज भी मुझे मस्त कर देते हैं।

कभी-कभी महेश जी उनको फोन करके बुला लेते हैं।

और मैं फिर से उन सातों से चुदवा लेती हूं।

अब तो मेरी आदत सी हो गई है।

बिना काले लंड के मजा नहीं आता।

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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