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अंजली के जाने के बाद वीरेंद्र जी बहुत अकेले हो गए थे।
उन्हें अंजली की याद आती थी और उसके साथ बिताए पलों की याद में वह उत्तेजित हो जाते थे।
लेकिन उनकी उम्र हो चुकी थी और हर रोज़ इतनी ऊर्जा नहीं रहती थी।
{अगर आपने नहीं पढ़ा की कैसे मेरे दादा जी मुझे चोदे तो पढ़ लें}
एक दिन उन्होंने सोचा कि क्यों ना अंजली को और मजा दिलाया जाए।
उनके चार दोस्त थे गाँव में – रहीम खान, सुरेंद्र यादव, राजेश शर्मा और श्याम लाल।
ये सभी सेवानिवृत्त थे और उनकी उम्र साठ से पैंसठ के बीच थी। सभी के परिवार शहरों में रहते थे और ये अकेले थे।
वीरेंद्र जी ने सोचा कि अगर ये सब मिलकर अंजली को चोदें तो उसे बहुत मजा आएगा। उन्होंने अंजली को फोन किया।
“बच्ची, अगले महीने आ सकती हो?” वीरेंद्र जी ने पूछा।
“जी दादा, जरूर आऊँगी,” अंजली ने खुशी से कहा।
“इस बार मैं तुम्हें एक खास सरप्राइज दूँगा,” वीरेंद्र जी ने कहा।
“क्या सरप्राइज दादा?” अंजली ने उत्सुकता से पूछा।
“आओगी तो पता चलेगा,” वीरेंद्र जी ने मुस्कुराते हुए कहा।
फिर वीरेंद्र जी ने अपने चारों दोस्तों को बुलाया। वे सभी हवेली के आंगन में बैठे थे।
“भाइयों, मैंने तुम सबको क्यों बुलाया है यह बताता हूँ,” वीरेंद्र जी ने कहा।
“बोलो वीरेंद्र, क्या बात है?” रहीम खान ने पूछा।
“मेरी पोती अंजली आ रही है,” वीरेंद्र जी ने कहा, “वह बहुत सुंदर है और बहुत ही मस्त है। मैं चाहता हूँ कि हम सब मिलकर उसे खुश करें।”
चारों दोस्त पहले तो हैरान हुए। लेकिन फिर सुरेंद्र यादव ने कहा, “वीरेंद्र, यह कैसी बात कर रहे हो? वह तो तुम्हारी पोती है।”
“हाँ, लेकिन वह मुझसे चुदवाती है और उसे और मजा चाहिए,” वीरेंद्र जी ने कहा, “तुम सब भी तो अकेले हो। क्यों ना मिलकर उसे चोदें?”
राजेश शर्मा ने कहा, “अगर वह राजी है तो मुझे कोई परेशानी नहीं है।”
श्याम लाल ने भी हामी भरी। रहीम खान थोड़ा हिचकिचाए लेकिन फिर राजी हो गए।
“ठीक है, लेकिन वह मान जाएगी?” रहीम ने पूछा।
“मैं उससे बात कर लूँगा,” वीरेंद्र जी ने कहा।
अगले महीने अंजली फिर से हवेली आई।
इस बार उसने एक खास लाल रंग की साड़ी पहनी थी जो बहुत पारदर्शी थी। उसके बदन का हर उभार साफ झलक रहा था।
वीरेंद्र जी उसे देखकर ही उत्तेजित हो गए। उन्होंने उसे गले लगाया और उसके स्तनों को दबाया।
“दादा, आपका सरप्राइज क्या है?” अंजली ने पूछा।
“आज रात पता चलेगा बच्ची,” वीरेंद्र जी ने कहा।
शाम को वीरेंद्र जी ने अंजली को अपने कमरे में बुलाया। उन्होंने उसे अपनी गोद में बिठाया और उसके होंठों पर चूमा।
“बच्ची, मैंने तुम्हारे लिए कुछ खास सोचा है,” वीरेंद्र जी ने कहा।
“क्या दादा?” अंजली ने पूछा।
“मेरे चार दोस्त हैं – रहीम, सुरेंद्र, राजेश और श्याम,” वीरेंद्र जी ने कहा, “वे सब अकेले हैं और उन्हें भी मजा चाहिए। क्या तुम उन सबको खुश कर सकती हो?”
अंजली पहले तो शर्माई, लेकिन फिर उसकी आँखों में एक चमक आई। “दादा, आप चाहते हैं कि मैं उन सबके साथ…?”
“हाँ बच्ची, हम सब मिलकर तुम्हें चोदेंगे,” वीरेंद्र जी ने कहा, “पाँच लौड़े एक साथ तुम्हारी बुर में, गांड में, और मुँह में।”
अंजली ने सोचा और फिर कहा, “ठीक है दादा, लेकिन वे सब मुझे प्यार से चोदेंगे ना?”
“बिल्कुल बच्ची,” वीरेंद्र जी ने कहा।
रात को आठ बजे वीरेंद्र जी के चारों दोस्त आए। वे सभी अपने घर से तैयार होकर आए थे।
रहीम खान ने सफेद कुर्ता पहना था, सुरेंद्र यादव ने चेक शर्ट, राजेश शर्मा ने पोलो टी-शर्ट, और श्याम लाल ने साधारण कपड़े।
अंजली ने उनके सामने पानी और नाश्ता परोसा। वे सभी अंजली को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। वह इतनी सुंदर और जवान थी।
“वाह वीरेंद्र, तुम्हारी पोती तो बहुत मस्त है,” रहीम खान ने कहा।
“हाँ, और बहुत ही मस्त है,” वीरेंद्र जी ने मुस्कुराते हुए कहा।
अंजली शर्मा रही थी। वीरेंद्र जी ने उसे अपने पास बुलाया और कहा, “बच्ची, इन सबको अपना दादा समझो। ये सब तुमसे बहुत प्यार करेंगे।”
अंजली ने सिर झुकाकर नमस्ते की। फिर वीरेंद्र जी ने कहा, “चलो, छत पर चलते हैं। वहाँ अच्छी हवा है।”
छत पर एक बड़ा बिस्तर बिछाया गया था। चाँदनी रात थी और मौसम सुहाना था। अंजली को बीच में बिठाया गया और पाँचों बुजुर्ग उसके चारों ओर बैठ गए।
“बच्ची, शुरू करें?” वीरेंद्र जी ने पूछा।
“जी दादा,” अंजली ने धीरे से कहा।
रहीम खान पहले उठे। उन्होंने अंजली का चेहरा उठाया और उसके होंठों पर चूमा।
अंजली ने भी प्रतिक्रिया दी। रहीम खान के होंठ मोटे थे और उनकी मूँछें अंजली के चेहरे पर खुजला रही थीं।
फिर सुरेंद्र यादव ने अंजली के स्तनों को पकड़ लिया। वह उन्हें बाहर से ही दबा रहे थे।
राजेश शर्मा उसके पैरों को सहला रहे थे और श्याम लाल उसकी पीठ को।
वीरेंद्र जी ने अंजली की साड़ी खोलनी शुरू की। धीरे-धीरे वह नंगी हो गई। पाँचों बुजुर्ग उसे देखकर उत्तेजित हो गए।
“वाह, क्या बदन है इसका,” राजेश शर्मा ने कहा।
“बिल्कुल दूध जैसी,” श्याम लाल ने कहा।
अंजली अब सिर्फ ब्रा और पैंटी में थी।
रहीम खान ने उसकी ब्रा खोली और उसके स्तन बाहर निकल आए। वह गोरे और कोमल थे।
“इन दूधों को चूसने दो,” रहीम खान ने कहा और एक स्तन अपने मुँह में ले लिया।
सुरेंद्र यादव ने दूसरा स्तन पकड़ लिया। दोनों बारी-बारी से उसके स्तन चूस रहे थे। अंजली की साँसें तेज़ हो गईं।
तभी वीरेंद्र जी ने उसकी पैंटी उतार दी। उसकी बुर दिख गई। वह गीली हो चुकी थी।
“इस बुर को भी तो चाटना है,” श्याम लाल ने कहा।
उन्होंने अंजली की टाँगें फैलाई और अपना मुँह उसकी बुर पर रख दिया। वह चूसने लगे। अंजली की कमर उठ गई।
“ओह, बहुत मजा आ रहा है,” अंजली ने कहा।
अब सभी ने अपने कपड़े उतार दिए। पाँचों बुजुर्ग नंगे हो गए। उनके लौड़े खड़े हो रहे थे।
रहीम खान का लौड़ा सबसे मोटा था – करीब आठ इंच लंबा और काला।
सुरेंद्र यादव का लौड़ा थोड़ा झुका हुआ था। राजेश शर्मा का लौड़ा लंबा और पतला था।
श्याम लाल का लौड़ा छोटा लेकिन कड़क था। और वीरेंद्र जी का लौड़ा भी पूरी तरह से खड़ा था।
अंजली उन्हें देखकर चौंकी। “दादा, इतने सारे लौड़े?”
“हाँ बच्ची, आज तुम इन सबका मजा लेना,” वीरेंद्र जी ने कहा।
रहीम खान पहले आगे आए। उन्होंने अंजली को लेटाया और उसकी टाँगें फैलाईं।
उनका मोटा लौड़ा अंजली की बुर के मुँह पर टिका था।
“बेटी, धीरे से डालूँगा,” रहीम खान ने कहा।
“जी अंकल,” अंजली ने कहा।
रहीम खान ने धीरे से धक्का लगाया। उनका मोटा लौड़ा अंजली की बुर में घुस गया। अंजली की चीख निकल गई।
“ओह, बहुत मोटा है,” अंजली ने कहा।
रहीम खान ने धीरे-धीरे धक्के लगाने शुरू किए। वह जोर-जोर से चोद रहे थे। अंजली की बुर फैल गई थी।
तभी सुरेंद्र यादव ने अपना लौड़ा अंजली के मुँह के सामने कर दिया। “इसे चूसो बेटी।”
अंजली ने उनका लौड़ा अपने मुँह में ले लिया और चूसने लगी। अब उसकी बुर में रहीम खान का लौड़ा और मुँह में सुरेंद्र यादव का लौड़ा था।
रहीम खान ने लगभग दस मिनट तक अंजली की बुर चोदी। फिर उन्होंने अपना लौड़ा बाहर निकाला और सुरेंद्र यादव ने उसकी जगह ली।
सुरेंद्र यादव ने अपना लौड़ा अंजली की बुर में डाला। उनका लौड़ा झुका हुआ था और अंजली की बुर के अंदर एक अलग कोना छू रहा था।
“ओह, यह तो अलग ही मजा दे रहा है,” अंजली ने कहा।
राजेश शर्मा ने अपना लौड़ा अंजली के मुँह में डाल दिया। वह लंबा था और उसके गले तक जा रहा था।
अंजली अब बीच में थी और तीन लौड़े उसे चोद रहे थे। वीरेंद्र जी और श्याम लाल उसके स्तनों और बाकी जगहों को चूस रहे थे।
“बहुत मजा आ रहा है,” अंजली चिल्लाई।
सुरेंद्र यादव झड़ गए। उन्होंने अपना माल अंजली की बुर में ही छोड़ दिया। फिर राजेश शर्मा ने उनकी जगह ली।
राजेश शर्मा ने अंजली को घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी बुर में अपना लौड़ा डाला। वह जोर-जोर से धक्के लगा रहे थे।
“ओह, पीछे से भी बहुत मजा आता है,” अंजली ने कहा।
अब श्याम लाल ने कहा, “मैं इसकी गांड मारना चाहता हूँ।”
“ठीक है, लेकिन धीरे से,” वीरेंद्र जी ने कहा।
अंजली को घोड़ी बनाया गया। रहीम खान ने उसके मुँह में अपना लौड़ा डाल दिया और श्याम लाल ने उसकी गांड पर तेल लगाया।
“बेटी, थोड़ा दर्द होगा लेकिन बाद में मजा आएगा,” श्याम लाल ने कहा।
उन्होंने अपना लौड़ा अंजली की गांड के छेद पर रखा और धीरे से धक्का लगाया। अंजली की चीख निकल गई लेकिन रहीम खान के लौड़े के कारण दब गई।
“आह, बहुत मोटा है,” अंजली ने कहा।
श्याम लाल ने धीरे-धीरे अपना लौड़ा अंदर डाला। अंजली की गांड बहुत टाइट थी। फिर उन्होंने धक्के लगाने शुरू किए।
अब अंजली की गांड में श्याम लाल का लौड़ा और मुँह में रहीम खान का लौड़ा था। वीरेंद्र जी ने उसकी बुर में अपनी उँगलियाँ डाल दीं।
“ओह, तीन जगह से मजा आ रहा है,” अंजली ने कहा।
अब वीरेंद्र जी ने कहा, “मैं इसकी बुर में आता हूँ।”
श्याम लाल ने अपना लौड़ा गांड में ही रखा और वीरेंद्र जी ने अंजली की बुर में अपना लौड़ा डाल दिया। अब अंजली की बुर और गांड दोनों में लौड़े थे।
“ओह दादा, बहुत फट जाएगी,” अंजली चीखी।
“सहन करो बच्ची,” वीरेंद्र जी ने कहा।
दोनों ने एक साथ धक्के लगाने शुरू किए। अंजली की चीखें गूँज रही थीं। लेकिन धीरे-धीरे उसे मजा आने लगा।
“ओह हाँ, ऐसे ही,” अंजली चिल्लाई, “दोनों तरफ से चोदो मुझे।”
राजेश शर्मा और सुरेंद्र यादव ने उसके स्तन चूसने शुरू कर दिए। अब पाँचों बुजुर्ग अंजली को चोद रहे थे।
कुछ देर बाद श्याम लाल झड़ गए। उन्होंने अपना माल अंजली की गांड में छोड़ दिया। फिर वीरेंद्र जी भी झड़ गए और उन्होंने अपना माल बुर में छोड़ दिया।
अब रहीम खान ने अंजली को लेटाया और उसकी बुर में अपना मोटा लौड़ा डाला। वह जोर-जोर से चोदने लगे। अंजली की बुर से पिछला वीर्य बाहर निकल रहा था।
“ओह, बहुत गहराई तक जा रहा है,” अंजली ने कहा।
रहीम खान ने लगभग पंद्रह मिनट तक उसे चोदा। फिर वे भी झड़ गए और उन्होंने अपना गाढ़ा वीर्य अंजली की बुर में भर दिया।
अब सिर्फ राजेश शर्मा और सुरेंद्र यादव बचे थे। उन्होंने अंजली को घोड़ी बनाया और एक ने बुर में और एक ने मुँह में अपना लौड़ा डाला।
दोनों ने एक साथ धक्के लगाए और एक साथ झड़ गए। अंजली की बुर और मुँह दोनों वीर्य से भर गए।
थोड़ी देर आराम करने के बाद सभी फिर से तैयार हो गए। इस बार अंजली ने कहा, “मैं सबको एक साथ चूसना चाहती हूँ।”
वह घुटनों के बल बैठ गई और पाँचों लौड़े उसके सामने थे। वह एक-एक करके सबको चूसने लगी।
पहले रहीम खान का मोटा लौड़ा, फिर सुरेंद्र यादव का झुका हुआ, फिर राजेश शर्मा का लंबा, फिर श्याम लाल का छोटा, और फिर दादा का लौड़ा।
वह सबको बारी-बारी से चूस रही थी। पाँचों बुजुर्ग उत्तेजित हो रहे थे।
“वाह, क्या मुँह है इसका,” राजेश शर्मा ने कहा।
“बिल्कुल रंडी की तरह चूसती है,” सुरेंद्र यादव ने कहा।
अंजली ने सबके लौड़े चूसे और फिर कहा, “अब मैं सबसे एक साथ चुदना चाहती हूँ।”
छत पर एक पुरानी लकड़ी की मेज़ थी। अंजली को उस पर लेटाया गया। उसकी बुर मेज़ के किनारे से बाहर थी।
रहीम खान और सुरेंद्र यादव ने उसकी टाँगें पकड़ी।
राजेश शर्मा ने उसके मुँह में अपना लौड़ा डाला। श्याम लाल और वीरेंद्र जी उसके स्तन चूस रहे थे।
पहले रहीम खान ने उसकी बुर में अपना लौड़ा डाला और चोदना शुरू किया।
फिर उन्होंने बाहर निकाला और सुरेंद्र यादव ने डाला। फिर राजेश शर्मा ने, फिर श्याम लाल ने, और फिर वीरेंद्र जी ने।
एक-एक करके सभी ने उसकी बुर चोदी। अंजली की बुर से वीर्य बह रहा था और मेज़ पर गिर रहा था।
“ओह, बहुत मजा आ रहा है,” अंजली चिल्लाई।
फिर उसे एक कुर्सी पर बिठाया गया। रहीम खान नीचे बैठ गए और अंजली उनके ऊपर बैठ गई। उनका मोटा लौड़ा उसकी बुर में चला गया।
सुरेंद्र यादव ने उसकी गांड में अपना लौड़ा डाला। अब अंजली दो लौड़ों पर बैठी हुई थी – एक बुर में और एक गांड में।
राजेश शर्मा ने उसके मुँह में अपना लौड़ा डाला। श्याम लाल और वीरेंद्र जी उसके हाथों में अपने लौड़े देकर सहलवा रहे थे।
“ओह, पाँचों से मजा ले रही हूँ,” अंजली चीखी।
तीनों लौड़े एक साथ अंदर-बाहर हो रहे थे। अंजली की साँसें फूल रही थीं लेकिन वह पूरी तरह से संतुष्ट थी।
अब अंजली को खड़ा किया गया। वीरेंद्र जी ने उसकी एक टाँग उठाई और अपना लौड़ा बुर में डाला। रहीम खान ने दूसरी टाँग उठाई और उसकी गांड में अपना लौड़ा डाला।
सुरेंद्र यादव ने उसके एक स्तन को चूसना शुरू किया और राजेश शर्मा ने दूसरे को। श्याम लाल ने उसके मुँह में अपना लौड़ा डाल दिया।
अब अंजली पूरी तरह से भरी हुई थी। उसकी बुर में, गांड में, और मुँह में लौड़े थे। उसके स्तन चूसे जा रहे थे।
“ओह, मैं झड़ने वाली हूँ,” अंजली चीखी।
सभी ने एक साथ धक्के लगाए। अंजली झड़ गई और उसके बुर से पानी निकला।
अब सभी बहुत थक चुके थे लेकिन अभी एक बार और करना चाहते थे।
अंजली को बिस्तर पर लेटाया गया। पाँचों बुजुर्ग उसके चारों ओर खड़े थे।
“बच्ची, हम सब एक साथ झड़ेंगे तुम्हारे ऊपर,” वीरेंद्र जी ने कहा।
एक-एक करके सभी ने अंजली के शरीर पर अपना वीर्य गिराया। रहीम खान ने उसके स्तनों पर, सुरेंद्र यादव ने उसके पेट पर, राजेश शर्मा ने उसकी जांघों पर, श्याम लाल ने उसके चेहरे पर, और वीरेंद्र जी ने उसकी बुर पर अपना माल गिराया।
अंजली पूरी तरह से वीर्य से लथपथ थी। उसने उसे अपने हाथों से मला और अपने शरीर पर लगाया।
“बहुत मजा आया दादा,” अंजली ने कहा।
अगली सुबह सभी उठे। अंजली ने सबके लिए नाश्ता बनाया। पाँचों बुजुर्ग उसे देखकर फिर से उत्तेजित हो गए।
“आज फिर से करें?” रहीम खान ने पूछा।
“हाँ, लेकिन शाम को,” अंजली ने कहा।
पूरे दिन वे सब आराम करते रहे। शाम को फिर से वही दृश्य हुआ। इस बार अंजली ने और भी तरकीबें सिखाईं।
उसने उन्हें 69 की पोजीशन में चूसना सिखाया। वह रहीम खान के ऊपर लेटी और उनका लौड़ा चूसने लगी। वहीं सुरेंद्र यादव ने उसकी बुर चोदी।
फिर उसने सबको अपनी गांड मारने दी। एक-एक करके पाँचों ने उसकी गांड चोदी। उसकी गांड से वीर्य बह रहा था।
तीन दिन बीत चुके थे। अंजली को वापस जाना था। पाँचों बुजुर्ग उसे बहुत याद करने वाले थे।
अंतिम रात उन्होंने बहुत देर तक चुदाई की। हर पोजीशन में, हर जगह पर।
सुबह अंजली चली गई। वीरेंद्र जी ने उसे कहा, “हर महीने आना बच्ची।”
“जी दादा,” अंजली ने कहा, “और अगली बार और दोस्तों को लाइएगा।”
वीरेंद्र जी मुस्कुराए। “ठीक है बच्ची।”
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Nice story
maja aa gaya bhia is chudai ko padhkar