पति को मूर्ख बना देवर से चुदवाया-2

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PART 1: पति को मूर्ख बना देवर से चुदवाया-1

दिवाली से ठीक दो दिन पहले राहुल का फोन आया। प्रिया फोन उठाते ही उसका चेहरा उतर गया। अर्जुन, जो उस समय रसोई में था, उसके चेहरे के भाव देखकर समझ गया कि कोई बड़ी खबर है।

“क्या हुआ, भाभी?” अर्जुन ने पूछा।

“तुम्हारे भैया आ रहे हैं। दिवाली पर। परसों शाम तक पहुंच जाएंगे,” प्रिया ने धीरे से कहा।

अर्जुन का चेहरा पीला पड़ गया। उसने कल रात ही प्रिया के साथ बिताई थी, और अब यह खबर। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो कैसे रिएक्ट करे।

“तो… अब क्या होगा?” अर्जुन ने पूछा।

प्रिया ने गहरी सांस ली। “अब हमें बहुत सावधान रहना होगा, अर्जुन। तुम्हारे भैया के सामने कुछ भी गलत नहीं होना चाहिए। वो एक साल बाद आ रहे हैं। अगर उन्हें कुछ भी शक हुआ, तो सब खत्म हो जाएगा।”

अर्जुन ने सिर हिलाया। “मैं समझता हूं। लेकिन भाभी, मैं आपको छू भी नहीं पाऊंगा। एक साल तक…”

“मैं जानती हूं,” प्रिया ने उसका हाथ पकड़ा। “लेकिन हम मजबूर हैं। कम से कम तब तक तो नहीं, जब तक वो यहां हैं।”

अगले दो दिन, प्रिया और अर्जुन ने एक-दूसरे से दूरी बना ली। वो एक-दूसरे को देखते, लेकिन छू नहीं पाते। रात को अर्जुन नीचे अपने कमरे में सोता, और प्रिया ऊपर अकेली। दोनों की आंखों में नींद नहीं थी, दोनों एक-दूसरे को याद कर रहे थे।

दिवाली वाले दिन शाम को, राहुल आ गए। वो एक साल में काफी बदल गए थे—थोड़ा मोटे, थोड़े थके हुए। लेकिन प्रिया को देखकर उनकी आंखें चमक उठीं।

“प्रिया! कैसी हो तुम?” राहुल ने उसे गले लगाया।

प्रिया ने उन्हें गले लगाया, लेकिन उसका दिल अर्जुन के लिए धड़क रहा था। वो अपने आप को गुनाहगार महसूस कर रही थी, लेकिन साथ ही वो अर्जुन को भी याद कर रही थी।

“भैया!” अर्जुन ने आकर राहुल को गले लगाया। उसका चेहरा सामान्य था, लेकिन अंदर ही अंदर वो तड़प रहा था।

रात को, पूरे घर में दिवाली की तरह रौनक थी। प्रिया ने खास खाना बनाया था, राहुल के लिए उनकी पसंद की सब्जियां। तीनों ने साथ में खाना खाया—राहुल, प्रिया और अर्जुन। रोहन भी अपनी मां की गोद में बैठा था।

खाने के बाद, राहुल ने कहा, “आज बहुत थक गया हूं। प्रिया, चलो, सोते हैं।”

प्रिया का दिल जोर से धड़का। वो अर्जुन की तरफ देखा, लेकिन अर्जुन ने नजरें झुका लीं। वो जानता था कि रात को क्या होने वाला था—राहुल प्रिया के साथ वो करेंगे जो वो खुद करता था।

“हां, आते हैं,” प्रिया ने कहा और राहुल के साथ ऊपर चली गई।

अर्जुन नीचे बैठा रहा। उसके कान ऊपर की तरफ थे। वो सुन सकता था—राहुल की आवाजें, प्रिया की हल्की सांसें। उसे पता था कि ऊपर क्या चल रहा था। उसका दिल जल रहा था, लेकिन वो कुछ नहीं कर सकता था।

ऊपर के कमरे में, राहुल ने प्रिया को अपनी बांहों में लिया। “एक साल हो गया, प्रिया। मैंने तुम्हें बहुत याद किया।”

प्रिया ने उन्हें गले लगाया, लेकिन उसका दिमाग अर्जुन के पास था। जब राहुल ने उसे चूमना शुरू किया, तो प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं। वो अपने आप को अर्जुन की यादों में खोने लगी।

राहुल ने उसकी साड़ी खोलनी शुरू की। प्रिया ने उनकी मदद की, लेकिन उसका दिल नहीं था इसमें। राहुल जल्दी में थे—एक साल की भूख थी उनमें। उन्होंने प्रिया को बिस्तर पर लिटाया और अपने कपड़े उतारने लगे।

“राहुल, आज थोड़ा धीरे,” प्रिया ने कहा।

“नहीं, प्रिया, मैं और नहीं रुक सकता,” राहुल ने कहा और उन पर झपट पड़े।

कुछ ही मिनटों में, राहुल ने अपना काम खत्म कर लिया। वो थककर प्रिया के बगल में लेट गए। प्रिया ने कुछ नहीं कहा—उसे पता था कि राहुल हमेशा ऐसे ही थे। जल्दी में, अपनी संतुष्टि में।

“सो जाओ, प्रिया,” राहुल ने कहा और खर्राटे लेने लगे।

प्रिया छत की तरफ देखती रही। उसे अर्जुन की याद आ रही थी—कैसे वो उसे छूता था, कैसे उसकी परवाह करता था, कैसे वो हर पल को महसूस करता था। राहुल के साथ तो सब कुछ यांत्रिक लगता था, कोई भावना नहीं थी।

नीचे, अर्जुन अपने कमरे में लेटा था। उसकी आंखों में आंसू थे। वो सोच रहा था कि प्रिया अब राहुल के साथ है, और वो यहां अकेला है। उसे दर्द हो रहा था, लेकिन वो कुछ नहीं कर सकता था।

अगले दिन, पूरा घर व्यस्त था। दिवाली की तैयारियां, पटाखे, मिठाइयां। प्रिया रसोई में व्यस्त थी, राहुल बाहर दोस्तों से मिलने गए थे, और अर्जुन कॉलेज से लौटकर अपने कमरे में था।

शाम को, जब राहुल वापस आए, तो उन्होंने कहा, “आज रात को हम लोग एक साथ सोते हैं। अर्जुन, तू भी ऊपर आ जाना। बड़ा बिस्तर है, तीनों आराम से सो सकते हैं।”

प्रिया का दिल जोर से धड़का। वो अर्जुन की तरफ देखी, लेकिन अर्जुन ने कुछ नहीं कहा।

“ठीक है, भैया,” अर्जुन ने कहा।

रात को, तीनों ऊपर के कमरे में थे। रोहन छोटे बिस्तर पर सो रहा था। राहुल बीच में, एक तरफ प्रिया, दूसरी तरफ अर्जुन। लाइट बंद हो गई।

अंधेरे में, प्रिया सो नहीं पा रही थी। वो अर्जुन को महसूस कर सकती थी—उसकी सांसें, उसकी गर्मी। वो जानती थी कि अर्जुन भी जाग रहा है।

राहुल की खर्राटों की आवाज आने लगी। वो गहरी नींद में सो रहे थे।

प्रिया ने धीरे से अपना हाथ बढ़ाया। उसने अर्जुन का हाथ छुआ। अर्जुन ने हाथ पीछे खींचा—वो डर रहा था।

प्रिया ने फिर हाथ बढ़ाया। इस बार उसने अर्जुन का हाथ पकड़ लिया। अर्जुन ने प्रिया की तरफ देखा—अंधेरे में भी वो उसकी आंखें देख सकता था।

प्रिया ने उसका हाथ अपनी कमर पर रखा। अर्जुन का दिल तेजी से धड़कने लगा। वो जानता था कि यह गलत था—राहुल सिर्फ कुछ इंच दूर थे। लेकिन वो खुद को रोक नहीं पा रहा था।

प्रिया ने अर्जुन का हाथ अपनी साड़ी के नीचे ले जाया। अर्जुन ने उसकी गर्म त्वचा को छुआ—वो कांप रहा था। प्रिया ने अपनी उंगलियों से उसके हाथ पर दबाव डाला, उसे अपने शरीर की गोलाई पर घुमाया।

अर्जुन का सांस फूल रहा था। वो चाहता था कि वो प्रिया को अपनी बांहों में भर ले, लेकिन डर था—राहुल उठ न जाएं।

प्रिया ने धीरे से अर्जुन का हाथ अपनी छाती पर ले गई। अर्जुन ने महसूस किया—उसकी हथेलियों में प्रिया की धड़कन थी। वो धीरे-धीरे दबाने लगा, जैसे प्रिया को पसंद था।

प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं। वो राहुल की तरफ मुड़ी हुई थी, लेकिन उसका ध्यान पूरी तरह अर्जुन पर था। उसने अर्जुन के हाथ को अपनी साड़ी के नीचे और नीचे ले जाने का इशारा किया।

अर्जुन समझ गया। उसने अपना हाथ धीरे से नीचे ले गया, प्रिया की पेटीकोट के नीचे। उसने महसूस किया—गर्मी, नमी, उत्तेजना।

प्रिया ने अपने होठ काट लिए ताकि आवाज न निकले। अर्जुन की उंगलियां उसे छू रही थीं, धीरे-धीरे, बहुत सावधानी से। राहुल की खर्राटें अभी भी आ रही थीं।

अर्जुन ने प्रिया को छूना शुरू किया—जिस तरह वो पहले करता था, लेकिन अब और भी सावधानी से। प्रिया ने अपनी कमर थोड़ी उठाई ताकि अर्जुन को और जगह मिल सके।

अर्जुन ने महसूस किया कि प्रिया तड़प रही है—उसकी सांसें तेज हो गई थीं, उसका शरीर कांप रहा था। लेकिन वो खुद भी उसी हालत में था। उसका लिंग पूरी तरह खड़ा था, और वो चाहता था कि वो प्रिया के अंदर हो।

प्रिया ने अर्जुन का हाथ पकड़ा और उसे अपने ऊपर से हटाया। फिर उसने धीरे से अर्जुन की ओर मुड़ने का इशारा किया। अर्जुन समझ गया—वो अपनी पीठ राहुल की तरफ करके प्रिया की ओर मुड़ गया।

अब दोनों आमने-सामने थे, सिर्फ कुछ इंच की दूरी पर। राहुल उनकी पीठ की तरफ सो रहे थे। अंधेरे में, प्रिया ने अर्जुन के चेहरे को अपने हाथों में लिया और उसके होठों पर चुंबन किया।

वो एक लंबा, गहरा चुंबन था—जिसमें एक साल की दूरी, एक हफ्ते की तड़प, और एक रात का डर सब समाया हुआ था। अर्जुन ने प्रिया को अपनी बांहों में खींच लिया, जितना धीरे से हो सकता था।

प्रिया ने अर्जुन के कान में धीरे से कहा, “मुझे चाहिए। अभी।”

अर्जुन ने कहा, “लेकिन भैया…”

“सो रहे हैं। धीरे से।”

प्रिया ने अर्जुन के कपड़ों को ढीला किया। अर्जुन ने भी प्रिया की साड़ी और पेटीकोट को ऊपर उठाया। अब दोनों के बीच कोई बाधा नहीं थी।

अर्जुन ने धीरे से अपना लिंग प्रिया की योनि के मुंह पर रखा। प्रिया ने अपनी कमर थोड़ी आगे की तरफ की, और अर्जुन ने एक हल्का सा धक्का दिया।

वो अंदर चला गया—गर्म, नम, कसा हुआ। अर्जुन ने अपनी आंखें बंद कर लीं। यह स्वर्ग जैसा था—प्रिया के अंदर होना, उसकी गर्मी महसूस करना, उसकी सांसें सुनना।

प्रिया ने अपने होठ कसकर बंद कर लिए। वो चिल्लाना चाहती थी, आवाज निकालना चाहती थी, लेकिन राहुल की वजह से वो चुप थी। उसने अर्जुन के कंधों को पकड़ा और उसे अपनी ओर खींचा।

अर्जुन ने धीरे-धीरे हिलना शुरू किया—बहुत धीरे, बहुत सावधानी से। हर धक्के पर बिस्तर थोड़ा सा हिलता, लेकिन राहुल की खर्राटें बंद नहीं हुईं।

प्रिया ने अर्जुन के कान में कहा, “तेज। थोड़ा तेज।”

अर्जुन ने गति थोड़ी बढ़ाई। वो अब थोड़ा तेज हो रहा था, लेकिन फिर भी बहुत धीरे। प्रिया की सांसें तेज हो गईं, उसका शरीर कांपने लगा। वो अपने आप को रोकने की कोशिश कर रही थी, लेकिन वो झड़ने वाली थी।

“रुको,” प्रिया ने धीरे से कहा।

अर्जुन रुक गया, सांस फूंकता हुआ। प्रिया ने अपने आप को संभाला, फिर कहा, “चलो।”

अर्जुन ने फिर से हिलना शुरू किया। इस बार वो और भी तेज था, और प्रिया के लिए यह बहुत था। उसने अपना मुंह अर्जुन के कंधे पर दबाया और एक लंबी सांस ली जैसे वो झड़ी।

अर्जुन ने महसूस किया—प्रिया के शरीर की स्पंदन, उसकी योनि की सिकुड़न। वो खुद भी झड़ने वाला था। उसने प्रिया को कसकर पकड़ा और अपना वीर्य उसके अंदर छोड़ दिया।

दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे, सांस फूंकते हुए, पसीने में लथपथ। राहुल अभी भी सो रहे थे, बेखबर।

कुछ देर बाद, अर्जुन ने अपने आप को प्रिया से अलग किया। प्रिया ने उसके चेहरे पर हाथ फेरा। “मैं तुमसे प्यार करती हूं,” उसने धीरे से कहा।

अर्जुन ने उसके माथे पर चुंबन किया। “मैं भी।”

दोनों ने अपने कपड़े ठीक किए और अपनी-अपनी जगह पर लेट गए। प्रिया राहुल की ओर मुड़ गई, और अर्जुन उनकी पीठ की तरफ। लेकिन दोनों के हाथ अभी भी एक-दूसरे को छू रहे थे—बिस्तर के नीचे, छुपकर।

अगली सुबह, राहुल जल्दी उठ गए। उन्हें बाजार जाना था। प्रिया और अर्जज सो रहे थे—या ऐसा दिख रहे थे।

जब राहुल चले गए, तो प्रिया ने आंखें खोलीं। अर्जुन भी जाग गया। दोनों ने एक-दूसरे को देखा और मुस्कुराए।

“रात को क्या हुआ?” प्रिया ने पूछा।

“सब कुछ,” अर्जुन ने कहा।

प्रिया ने उसे गले लगाया। “तुम्हें पता है, यह बहुत खतरनाक है।”

“मुझे पता है। लेकिन मैं रुक नहीं पाता।”

प्रिया ने उसके चेहरे को अपने हाथों में लिया। “सुनो, राहुल यहां एक हफ्ते के लिए हैं। हमें बहुत सावधान रहना होगा। लेकिन मैं तुम्हें यह बताना चाहती थी कि मैं तुम्हारे बिना नहीं रह सकती।”

“मैं भी,” अर्जुन ने कहा।

उस दिन, जब राहुल वापस आए, तो उन्होंने कुछ अजीब सा महसूस किया। प्रिया और अर्जुन के बीच एक अजीब सी केमिस्ट्री थी—वो एक-दूसरे को देखते थे, लेकिन फिर नजरें झुका लेते थे। राहुल को लगा कि शायद वो ज्यादा सोच रहे हैं।

रात को, फिर वही स्थिति—तीनों एक बिस्तर पर। राहुल बीच में, प्रिया और अर्जुन दोनों तरफ। राहुल को नींद आ रही थी, लेकिन प्रिया और अर्जुन जाग रहे थे।

प्रिया ने फिर अर्जुन का हाथ पकड़ा। इस बार अर्जुन ने ज्यादा देर नहीं की—उसने तुरंत प्रिया की ओर मुड़ लिया। राहुल की पीठ अभी भी उनकी तरफ थी।

अंधेरे में, प्रिया ने अर्जुन के कपड़े उतारने शुरू किए। अर्जुन ने भी प्रिया की साड़ी खोलनी शुरू की। दोनों जल्दी में थे—पता नहीं कब राहुल उठ जाएं।

कुछ ही मिनटों में, दोनों नंगे थे—बिस्तर पर, राहुल के बगल में। अर्जुन ने प्रिया को अपनी ओर खींचा और उसके ऊपर आ गया। प्रिया ने अपने पैर फैलाए और अर्जुन को अपने अंदर ले लिया।

इस बार कोई धीमेपन की जरूरत नहीं थी—दोनों जानते थे कि उनके पास सीमित समय है। अर्जुन ने तेजी से हिलना शुरू किया, और प्रिया ने अपने होठ काट लिए। वो अपने आप को चुप रखने की कोशिश कर रही थी, लेकिन यह मुश्किल था।

अर्जुन ने प्रिया के मुंह पर अपना हाथ रख दिया ताकि उसकी आवाज न निकले। प्रिया ने उसका हाथ काटा, लेकिन फिर समझ गई—वो खुद को चुप रखने की कोशिश कर रहा था।

दोनों तेजी से हिल रहे थे। बिस्तर थोड़ा सा हिल रहा था, लेकिन राहुल गहरी नींद में थे। अर्जुन ने प्रिया की छातियों को अपने हाथों में भर लिया और उन्हें दबाने लगा।

प्रिया झड़ने वाली थी। उसने अर्जुन को कसकर पकड़ा और अपने शरीर को उछाल दिया। वो झड़ी—इस बार और भी तेज, क्योंकि खतरा था, क्योंकि राहुल पास थे।

अर्जुन ने भी अपने आप को नहीं रोका। उसने प्रिया के अंदर अपना सब कुछ छोड़ दिया। दोनों एक-दूसरे में खोए हुए थे, सांस फूंकते हुए, राहुल के बगल में।

जब दोनों ने अपने आप को अलग किया, तो प्रिया ने अर्जुन के कान में कहा, “कल रात, जब राहुल सो जाएं, तो मैं तुम्हारे कमरे में आऊंगी।”

अर्जुन ने हां में सिर हिलाया।

अगली रात, राहुल के सो जाने के बाद, प्रिया धीरे से नीचे उतरी। उसने अर्जुन के कमरे का दरवाजा खोला—अर्जुन जाग रहा था, उसे पता था कि प्रिया आएगी।

प्रिया ने दरवाजा बंद किया और अर्जुन के पास गई। “आज, मैं चाहती हूं कि तुम मुझे वो करो जो तुमने पहले कभी नहीं किया,” प्रिया ने कहा।

“क्या?” अर्जुन ने पूछा।

“मेरे मुंह में। मैं तुम्हें चूसना चाहती हूं।”

अर्जुन ने कभी ऐसा अनुभव नहीं किया था। प्रिया ने उसे बिस्तर पर लिटाया और उसके ऊपर झुक गई। उसने अर्जुन के लिंग को अपने हाथ में लिया और उसे चूमना शुरू किया।

अर्जुन ने अपनी आंखें बंद कर लीं। यह एक नया अनुभव था—प्रिया का गर्म मुंह उस पर, उसकी जीभ उसे छू रही थी। उसने प्रिया के बालों को सहलाया।

प्रिया ने धीरे-धीरे अर्जुन के पूरे लिंग को अपने मुंह में ले लिया। वो ऊपर-नीचे करने लगी, अपनी जीभ से उसे चाटती हुई। अर्जुन का शरीर कांप रहा था—उसे ऐसा लग रहा था जैसे वो स्वर्ग में हो।

“रुको, मैं झड़ जाऊंगा,” अर्जुन ने कहा।

प्रिया ने उसे छोड़ दिया और ऊपर आ गई। “अभी नहीं। पहले मुझे चाहिए।”

उसने अर्जुन को अपने ऊपर खींचा और उसे अपने अंदर ले लिया। अब कोई रोक-टोक नहीं थी—राहुल ऊपर सो रहे थे, और उनके कमरे में दरवाजा बंद था। दोनों आजाद थे।

अर्जुन ने पूरी गति से हिलना शुरू किया। प्रिया ने आवाजें निकालनी शुरू कर दीं—हल्की-हल्की, लेकिन साफ। वो चाहती थी कि अर्जुन सुने, कि वो जाने कि वो उसे कितना पसंद करती है।

“हां, अर्जुन, हां,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन और तेज हो गया। उसने प्रिया के पैर अपने कंधों पर रख दिए और और गहराई से उसे चोदने लगा। प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं—यह अनुभव अविश्वसनीय था।

“मैं झड़ने वाला हूं,” अर्जुन ने कहा।

“मेरे अंदर। छोड़ दो सब कुछ,” प्रिया ने कहा।

अर्जुन ने एक आखिरी धक्का मारा और प्रिया के अंदर झड़ गया। दोनों थककर एक-दूसरे पर गिर पड़े।

कुछ देर बाद, प्रिया ने कहा, “मुझे जाना चाहिए। सुबह होने वाली है।”

अर्जुन ने उसे रोका। “एक मिनट और।”

उसने प्रिया को अपनी बांहों में भर लिया और उसके माथे पर चुंबन किया। “मैं तुमसे प्यार करता हूं, प्रिया।”

“मैं भी,” प्रिया ने कहा।

वो वापस ऊपर चली गई। राहुल अभी भी सो रहे थे। उसने बिस्तर पर लेट गई और सोचने लगी—क्या यह सही था? क्या वो गलत कर रही थी?

लेकिन फिर उसे अर्जुन की याद आई—उसकी आंखें, उसकी मुस्कान, उसका प्यार। वो जानती थी कि यह प्यार था, चाहे दुनिया कुछ भी कहे।

अगले दिन, राहुल ने कुछ अजीब नोटिस किया। प्रिया और अर्जुन के बीच एक अजीब सी नजदीकी थी—वो एक-दूसरे को समझते थे बिना कुछ कहे। लेकिन राहुल ने इसे अनदेखा कर दिया। वो अपनी पत्नी से प्यार करता था, और उसे अपने भाई पर भरोसा था।

रात को, राहुल ने प्रिया से कहा, “कल मैं वापस कोलकाता जा रहा हूं। ऑफिस का काम है।”

प्रिया का दिल एक तरफ उदास हुआ—राहुल जा रहे थे, लेकिन दूसरी तरफ खुश भी—अर्जुन उसके पास रहेगा।

“ठीक है,” उसने कहा।

“तुम उदास नहीं हो?” राहुल ने पूछा।

“नहीं, बस थकी हुई हूं,” प्रिया ने कहा।

उस रात, राहुल ने प्रिया के साथ सेक्स किया। प्रिया ने अपनी आंखें बंद कर लीं और अर्जुन की यादों में खो गई। राहुल के लिए यह सामान्य था, लेकिन प्रिया के लिए यह एक कर्तव्य था।

अगली सुबह, राहुल चले गए। घर में फिर से प्रिया, अर्जुन और रोहन थे।

जैसे ही राहुल गए, अर्जुन ने प्रिया को अपनी बांहों में भर लिया। “अब हम फिर से एक साथ हैं,” उसने कहा।

“हां,” प्रिया ने मुस्कुराते हुए कहा। “लेकिन अब और भी सावधान रहना होगा। राहुल को शक हो सकता है।”

“मैं जानता हूं,” अर्जुन ने कहा। “लेकिन मैं तुम्हें छोड़कर नहीं जा सकता।”

प्रिया ने उसे चुमा। “मैं भी नहीं।”

उस रात से, दोनों का रिश्ता और भी गहरा हो गया। वो अब सिर्फ शारीरिक साथी नहीं थे—वो एक-दूसरे से प्यार करते थे। और वो जानते थे कि इस रिश्ते को छुपाना होगा, इसे दुनिया से बचाना होगा।

लेकिन वो तैयार थे—क्योंकि उनका प्यार उनके लिए सब कुछ था।

NEXT PART: पति को मूर्ख बना देवर से चुदवाया-3

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

2 thoughts on “पति को मूर्ख बना देवर से चुदवाया-2”

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