young girl sex kahani
यंग गर्ल सेक्स कहानी में पड़ोस की दूकान पर एक लड़की बैठती थी. वह मेरे साथ मजाक करती रहती थी. एक बार उसने मुझे दूकान के अंदर बुला लिया.
हाय, मेरा नाम राहुल है. मैं 22 साल का एक हैंडसम लड़का हूँ.
मैं लुधियाना का रहने वाला हूँ.
मैं एक कंपनी में जॉब करता हूँ.
मेरे लंड का साइज़ 7 इंच लंबा और 4 इंच मोटा है.
किसी भी लड़की को, भाभी को या आंटी को कैसे संतुष्ट करना है, मुझे अच्छे से पता है.
मैं इस साइट का नियमित पाठक हूँ, तो सोचा अपनी कहानी भी यहां बता दी जाए.
ये यंग गर्ल सेक्स कहानी कुछ दिन पहले की है.
मेरे ही घर के पास की एक दुकान वाली की लड़की की है.
उस लड़की का नाम अंजलि है.
वह 21 साल की है.
वह दिखने में बहुत सुंदर है. उसका फिगर 28-24-30 का है.
मैं उसकी दुकान पर रोज़ सामान लेने जाता हूँ.
जब वह लड़की मुझे सामान देती थी तो मुझसे बहुत हंसी-मज़ाक करती थी.
मैं भी उसके साथ हंसी-मज़ाक करने लगा था.
हम दोनों के बीच होने वाला ये हंसी-मज़ाक धीरे-धीरे अंतरंगता में बदलता जा रहा था.
वह मुझे पसंद करने लग गई थी और मुझे अश्लील कमेंट करने लग गई थी.
मैं भी बदले में उसे जवाब दे देता था.
एक दिन अंजलि ने कहा- आजकल गर्मी में भी ठंडे चल रहे हो?
मैं- हमारी गर्मी का अभी तुम्हें अंदाज़ा कहां है!
अंजलि- अच्छा तो कभी दिखाओगे गर्मी? तभी तो पता चलेगा.
मैं- कोई बात नहीं, दिखा दूंगा … बस मौका आने दो, आपको गर्मी का पूरा अंदाज़ा हो जाएगा.
इतना कहकर मैं वहां से चला गया.
एक दिन मैं दुकान पर सामान लेने गया.
उसने मुझे कामुक भरी नज़रों से देखा और सामान देते हुए मेरा हाथ पकड़ लिया.
मैंने कहा- ये क्या कर रही है? हाथ छोड़ो मेरा!
अंजलि- आज मौका भी है और दस्तूर भी है … आज गर्मी दिखा ही दो, कितनी गर्मी है?
मैं हंसते हुए- हां तो देखो बाहर 50 डिग्री है इतनी गर्मी बहुत है और कितनी गर्मी चाहिए?
अंजलि- मैं मौसम की नहीं, आपकी गर्मी की बात कर रही हूँ, नहीं तो दुकान के अन्दर तो गर्मी है ही नहीं!
मैं- मेरी गर्मी आप बर्दाश्त नहीं कर पाओगी मैडम, आप एसी में रहने वाले लोग कहां गर्मी बर्दाश्त कर सकोगे!
अंजलि- अरे दिखाओ तो सही, तभी तो पता चलेगा कि गर्मी है भी आप में … या नहीं!
मैं- हाथ तो छोड़ो मेरा, गर्मी का क्या है, आपको हाथ से ही पता चल रहा होगा!
अंजलि- नहीं, आज मैं तुझे अपनी मन की बात बता कर ही रहूँगी.
मैं- बोलो, पर मेरा हाथ तो छोड़ो.
अंजलि- मैं आपसे प्यार करती हूँ.
मैं- ठीक है.
‘क्या ठीक है?’
दोस्तो, कहीं न कहीं मुझे भी वह पसंद थी.
मगर मैं नाटक करते हुए बोला- पर ये सब ग़लत है!
अंजलि- कुछ ग़लत नहीं है, आप बस अन्दर आओ दुकान के.
मैं- अभी कोई आ जाएगा, फिर कभी.
अंजलि- घर वाले सभी बाहर गए हैं, शाम तक आएंगे. अन्दर आओ, दुकान बंद कर देती हूँ.
बस इतना कहते ही उसने मेरा हाथ खींच लिया.
मैं फिर क्या रुकने वाला था. फ्री की जवान चूत मिल रही थी.
मैं भी देर न करते हुए अन्दर गया और दुकान बाहर से बंद कर दी.
वैसे भी गर्मी का मौसम था, दोपहर में कोई आने वाला नहीं था.
अन्दर जाते ही मैं उसके पास बैठ गया.
दुकान का माहौल एसी की वजह से पूरा ठंडा था.
मैं उससे कुछ बोल पाता, उससे पहले ही उसने अपने होंठ मेरे होंठों पर रख दिए और चूसने लगी.
मैंने अपने होंठ हटाए और कहा- अरे ये आप क्या कर रही हो?
वह बोली- चुम्मी ले रही हूँ. क्यों आपकी फट रही है क्या?
मैंने सोचा कि साली अजीब चुदक्कड़ लड़की है. जब इसको कोई शर्म नहीं है तो मुझे क्या डर?
मैंने उससे पूछा- क्या आपके घर के लोग आज वापस नहीं आएंगे?
वह बोली- यह तो नहीं मालूम कि आएंगे या नहीं … पर इतना जरूर मालूम है कि अभी चार घंटे तक कोई नहीं आने वाला है.
मैं चुप रहा.
वह बोली- डर लग रहा है क्या?
मैंने कहा- अरे डर वाली बात नहीं है. मेरा क्या बिगड़ेगा … बस ये है कि यदि कोई आ गया तो मैं बदनाम हो जाऊंगा.
वह बोली- और मेरे बारे में कुछ नहीं सोच रहे हो कि मैं बदनाम नहीं हो जाऊंगी?
मैं चुप रह गया.
उसने मेरा हाथ पकड़ कर अपने दूध पर लगाया और बोली- देखो न मेरा दिल कितना जोर जोर से धड़क रहा है.
यह कह कर उसने मेरे हाथ से अपने दूध को मसल सा दिया.
मैंने भी गर्म होने लगा और उसके दूध को पकड़ कर दबाने लगा.
वह बोली- हम्म … मतलब मजा आ रहा है न आपको?
मैंने एक झटके से उसे अपने करीब खींच लिया और उसके होंठों पर अपने होंठ जमा कर उसे चूसने चूमने लगा.
वह भी मेरे साथ चूमाचाटी में लग गई.
करीब पांच मिनट तक हम दोनों एक दूसरे में खोए रहे और इस बीच हम दोनों ने एक दूसरे की जीभ को चूसना चालू कर दिया था.
वह जब मुझसे अलग हुई तो हांफ रही थी. उसकी आंखों में न.शा था.
वह चुदासी आवाज में बोली- तुम तो मर्द निकले!
मैंने कहा- क्यों हिजड़ा समझ रही थी क्या?
वह हंस दी और मेरे लंड को पकड़ कर बोली- हरकतों से तो वैसे ही लग रहे थे!
मैंने उसे वापस अपनी गोदी में खींचा और उसके दूध मसलते हुए कहा- आज तुमको मेरी गर्मी देखनी है न!
वह बोली- हां कैसे दिखाओगे?
मैंने कहा- चोद कर … चुदना है?
वह बोली- हां … यदि तुम चाहो तो.
मैंने उसकी कुर्ती को ऊपर उठाया और उसके एक दूध को अपने मुँह में भर लिया.
वह कामुक भाव से सिसकार उठी- आह!
मैंने दूध के निप्पल को अपने होंठों से पकड़ कर खींचते हुए छोड़ दिया तो वह मीठे दर्द से कराह उठी.
वह बोली- आह राहुल तुम मस्त चूस रहे हो … प्लीज खा लो मुझे आज!
मैंने कहा- और मजा लेना है?
वह बोली- हां लेना है!
मैंने उसकी दुकान में देखा तो शहद की शीशी दिखाई दी.
मैंने एक छोटी शीशी उठा ली और उसे खोल कर उसके मम्मों पर टपका कर चूसने लगा.
वह बोली- आह राहुल … मुझे नंगी कर दो. फिर तसल्ली से चूसो.
मैंने उसको ऊपर से पूरी नंगी कर दिया और उसके मम्मों पर शहद टपका कर दस मिनट तक चूसता रहा.
मैं अपने एक हाथ से कभी उसके बूब्स को दबाता, तो कभी चूत सहलाता.
वह भी पूरी गर्म हो गई.
उसने मेरी शर्ट और पैंट उतार दी.
अब मैं बस अंडरवियर में था.
मेरा लंड पूरा रॉड की तरह अकड़ कर बाहर आने को तड़प रहा था.
फिर मैंने उसका लोअर भी उतार कर फेंक दिया.
वह मुँह छुपाकर शर्माने लगी.
मैंने कहा- अब शर्माने का क्या फायदा मेरी जान … अब तो बस मज़े करो!
फिर मैंने उसकी ब्रा और पैंटी भी उतार दी. उसकी क्लीन शेव चूत क्या लग रही थी.
उसने मेरा अंडरवियर निकाल कर लंड को आज़ाद कर दिया.
लंड देखते ही उसका मुँह खुल गया और बोली- हाय दइया … इतना बड़ा लंड! ये मेरी चूत में कैसे जाएगा?
मैंने कहा- सब जाएगा, पहले इसे मुँह में तो लो!
वह एक बार में ही लंड मुँह में लेकर चूसने लगी.
मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था.
मैंने भी उससे 69 पोजीशन में आने को कहा.
अब वह मेरा लंड चूस रही थी, मैं उसकी चूत पर जीभ फेरता हुआ चूत चाट रहा था.
वह सिसकारी भरती हुई मस्त आवाज निकाल रही थी- आह आह आह बहुत मज़ा आ रहा है.
मैंने कहा- अभी तो खेल शुरू हुआ है मेरी जान!
अंजलि- हां राहुल आज मेरी चूत को अच्छे से चाटो … खा जाओ इसे!
मैं- हां जान, आज तुमको जन्नत की सैर करा दूँगा.
अंजलि की चुत से पानी टपकने लगा और वह ज़्यादा मस्ती में आ गई- उठो, अब मुझे तुम्हारा लंड अच्छे से चूसना है. उस 69 में सही से नहीं चूस पाई.
मुझे भी अपना लंड चुसवाने में बहुत मज़ा आता है, तो मैं उसके सामने अपना लंड हिलाता हुआ आ गया.
मैं अपने लंड को उसके मुँह के पास ले गया.
वह भी लॉलीपॉप की तरह लंड पूरा अन्दर तक लेकर आगे-पीछे होने लगी.
मैं सातवें आसमान पर था.
मैं- अंजलि, मेरा पानी निकलने वाला है!
अंजलि ने हाथ के इशारे से कहा कि मेरे मुँह के अन्दर ही निकाल दो.
मैंने भी पूरा का पूरा पानी उसके मुँह में निकाल दिया.
अंजलि ने पूरा लंड अच्छे से चूसकर साफ़ कर दिया.
अब मैं उसके बूब्स से खेलने लगा और वह दोबारा मेरे लंड को मुँह में लेकर चूसने लगी.
दस मिनट बाद मेरा लंड फिर से हरकत में आने लगा.
उधर अंजलि की चूत में भी खुजली होने लगी.
मैं फिर से अंजलि की चूत चाटने लगा और वह भी मेरा सिर अपनी चूत के अन्दर दबाने लगी.
अब वह कहने लगी- जल्दी से अपने लंड को मेरी चूत में डालो.
मैं उठा और पोज बना कर उसकी टांगों को कंधे पर रखते हुए लंड को चूत पर रगड़ने लगा.
वह मछली की तरह तड़प रही थी ‘जान डाल दो ना अन्दर!’
मैंने भी देर न करते हुए एक धक्का मारा.
मेरा आधा लंड उसकी चिकनी चुत में अन्दर घुसता चला गया.
अंजलि चिल्लाई- आह मर गई … बाहर निकलो इसे!
मैं उसके होंठ चूसने लगा.
दो मिनट बाद वह शांत हुई.
फिर मैंने दूसरा धक्का मारा और पूरा लंड अन्दर चला गया.
अंजलि दर्द से तड़पने लगी और रोने लगी- आह बाहर निकाल लो, मैं मर जाऊंगी!
मैंने कहा- रुको मेरी जान अभी तो तुझे मेरी गर्मी का मज़ा आएगा!
कुछ पल बाद वह शांत हो गई और कहने लगी- आह चोदो जान … और तेज़ तेज़ चोदो … आह मज़ा आ रहा है.
मैंने भी अपनी स्पीड बढ़ा दी.
इस बीच वह एक बार और झड़ गई थी.
अब मेरा भी पानी निकलने वाला था.
मैंने पूछा- कहां निकालूँ?
वह बोली- अन्दर ही निकाल दो!
बस फिर क्या था, मैंने स्पीड बढ़ाई और उसकी चुत के अन्दर ही झड़ गया.
झड़ कर मैं उसके ऊपर ही लेट गया. पांच मिनट बाद हम दोनों अलग हुए और हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहन लिए.
अंजलि के चेहरे पर मुस्कान थी और खुशी भी.
उसके बाद मैं रात को उसे होटल में ले गया और उधर मैंने पूरी रात उसकी जमकर चुदाई की.
वह सब कैसे हुआ था, यह आपके मेल मिलने के बाद अगली कहानी में बताऊंगा.
आपको मेरी यह सेक्स कहानी कैसी लगी?
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