गाँव की कमसिन लड़की की जवानी का मजा

young desi girl kahani

यंग देसी गर्ल कहानी में मैं एक गाँव में कैम्प में गया. वहां की एक लड़की मुझे लाइन देने लगी. वो माल चीज थी तो मैं भी उसे चोदने के चक्कर में पड़ गया.

दोस्तो, यह तब की बात है जब मैं 12वीं क्लास में था और NSS के एक शिविर नायक के रूप में पास के एक गाँव में कैम्प में गया था।

वहाँ पर हम लोग 10 दिन तक गाँव की सफाई और लोगों को जागरूक करने के लिए गए थे।

हम पूरे 100 लोग थे और मुझे सबको काम बाँटना और देखरेख करना होता था।
हम लोगों को रहने के लिए गाँव वालों ने एक स्कूल में जगह दी थी।

जिस दिन हम लोग वहाँ पहुँचे, उस दिन हमें पहुँचते और सभी सामान व्यवस्थित करते-करते ही सारा समय बीत गया।

फिर अगले दिन की योजना बनाते और सबके सोने की व्यवस्थाओं की देखरेख करते हुए मैं और मेरा एक दोस्त जग रहे थे।
हम दोनों स्कूल के बाहर आए।

रात के 9 बजे का समय था।
जब हम लोग स्कूल के बाहर आए, तो हमने देखा कि कुछ लड़कियाँ पास के घर के बाहर बैठकर बातें कर रही थीं।

उनमें से एक, जो बहुत ही खूबसूरत लग रही थी, उस पर मेरी नज़र टिक गई।
शायद वह भी तिरछी नजरों से मुझे देखे जा रही थी और कुछ-कुछ बातें करके सभी हँस रही थीं।
लेकिन उसी समय हम लोगों को अंदर जाना पड़ा।

सुबह मैं 4 बजे उठा और सभी लोगों को ग्रुप में काम बाँटकर उन्हें काम पर भेज दिया।
फिर मैं खाना बनाने के लिए पानी की व्यवस्था देखने पास के हैंडपंप पर गया।

वहाँ पहुँचते ही मैंने देखा कि वही लड़की पानी लेने आई हुई थी।
उसे देखकर तो मेरा लंठ कपड़े में ही तम्बू बनकर खड़ा हो गया!
वह देखने में इतनी खूबसूरत थी कि कोई नामर्द भी उसे देख ले, तो उसका लंठ खड़ा हो जाए।

रात में दिखने वाली सामान्य सी लड़की, दिन के उजाले में बला की खूबसूरत लग रही थी।
मैं उसे देखता ही रह गया।

मेरी यंग देसी गर्ल कहानी बन रही थी.

मुझे तब होश आया जब उसने कहा, “रास्ते से जरा हटेंगे क्या!”

वह मुझसे महज़ 2 फीट की दूरी पर ही खड़ी थी।
मेरा तो मन कर रहा था कि यहीं उसे पटक कर चोद दूँ!

मेरी नजरों से वासना की लार टपकने लगी थी, यह शायद वह भी समझ चुकी थी।
उसने शायद कपड़े में लंठ से बना तम्बू भी देख लिया था।

मैं थोड़ा सा किनारे हुआ और वह मुस्कुराते हुए चली गई।

उसी समय उस हैंडपंप पर एक छोटी लड़की आई।
शायद वह मुझे जानती थी। उसने मुझसे कहा कि मेरे पड़ोस के भैया उसकी बुआ के दामाद हैं।
फिर मैंने उस छोटी लड़की से उस लड़की के बारे में पूछा, तब मुझे पता चला कि उसका नाम नीरा है और वह सामने के घर में रहती है।

मैंने उसको बोला, “क्या तुम मेरा उससे परिचय करवा सकती हो?”
उसने हाँ कर दिया और फिर वह छोटी लड़की वहाँ से चली गई।

उसी रात हम लोगों ने डांस का प्रोग्राम रखा था, जिसमें बहुत सारे कार्यक्रम हुए।
मंच संचालन मैंने ही किया था।

अंत में मेरा डांस था और वह इतना प्रभावशाली था कि सभी लोगों को बहुत पसंद आया।

दूसरे दिन सुबह मैंने सभी को उनके काम बाँटकर जल्दी से उसी हैंडपंप के पास पहुँचा।
मैंने देखा कि वह आज भी वहीं पर थी।
मुझे लगा कि वह शायद मेरा ही इंतज़ार कर रही थी।

जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा, मैं उसे देखकर पागल सा होने लगा।
मेरा लन्ड उसको सलामी देने लगा!

मैं कुछ कहता, उससे पहले ही उसने मुझसे कहा, “आप बहुत अच्छा डांस करते हो!”
मैंने उससे कहा, “थैंक्यू नीरा!”

जैसे ही मैंने उसको नाम से पुकारा, वह शर्मा गई।
मैंने चारों तरफ देखा कि कोई है तो नहीं, मुझे कोई नहीं दिखा।
मैंने तुरंत उसका हाथ पकड़कर कह दिया, “I love you!”

वह शर्मा गई और नजरें झुका लीं।
उसने अपना हाथ छुड़ाने का कोई विरोध नहीं किया तो मैं समझ गया कि बात बन गई है।

फिर मैंने उससे मिलने की बात कही।
उसी समय किसी के पास आने की आहट सुनाई दी और वह वहाँ से चली गई।

दूसरे दिन वह छोटी लड़की मेरे पास आई और उसने एक कागज का टुकड़ा मुझे दिया।

वहाँ पर मेरे कुछ साथी लोग थे इसलिए मैंने बाद में उस कागज के टुकड़े को देखा।

उसे नीरा ने भेजा था और उसमें लिखा था कि दोपहर में उसके घर में कोई नहीं होता है, उस समय मैं मिलने आ सकता हूँ।

मैं समझ गया कि नीरा भी मिलने के लिए बेकरार हो रही है।
मुझे बहुत खुशी हुई कि उसने मुझे मिलने के लिए बुलाया है।

अब मेरे दिमाग में नीरा को चोदने के अलावा और कुछ नहीं सूझ रहा था।

फिर मैंने अपने एक साथी को आज के सभी काम समझा दिए, अच्छे से तैयार हुआ और ठीक 12 बजे उसके घर पहुँच गया।

मैं जैसे ही उसके घर पहुँचा, तो देखा कि उसका बड़ा भाई घर से बाहर जाने के लिए निकल रहा था।

जैसे ही मैंने उनके घर में प्रवेश किया, उन्होंने मुझसे पूछा, “आप कौन हैं और यहाँ क्या कर रहे हैं?”
तभी मैंने सहज रूप से उनके सवालों के जवाब देते हुए कहा, “मैं एक NSS कार्यकर्त्ता हूँ और आपके गाँव में कैम्प लगा है, उसमें आया हूँ। कुछ सामग्री की आवश्यकता होने पर आपके घर से लेने आया हूँ।”

फिर उन्होंने अपनी बहन को आवाज लगाई और कहा, “इन्हें जो भी चाहिए, उनको दे देना!”

यह कहकर वह घर से बाहर चले गए।
फिर नीरा कमरे से बाहर आई और मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी।

उसने घर से बाहर निकलकर इधर-उधर देखा और झटके से दरवाजा बंद कर दिया।

मुझे इतना तो समझ आ गया था कि घर में हम दोनों के अलावा और कोई नहीं है।

दरवाजे के बंद होते ही मैंने उसे अपनी बाहों में खींचकर लिपटा लिया।
उसके वक्ष मेरे सीने से टकरा रहे थे और मेरा लौड़ा कपड़े के अंदर खड़ा होकर बिल की तलाश में लग गया।

यह नीरा भी समझ चुकी थी और वह भी छटपटाने लगी।

मैं नीरा के पूरे शरीर पर अपने हाथ फेरने लगा और उसके होंठों को आम की तरह चूसने लगा।
वह भी मेरा बराबर साथ देने लगी थी।

मैं अपने दोनों हाथों से उसके कूल्हे को सहला रहा था।

मेरा खड़ा लन्ड दोनों टांगों के बीच से उसकी चूत में टकरा कर उसे और जोश दिला रहा था कि अचानक दरवाजे पर किसी के खटखटाने की आवाज सुनाई दी!
हम दोनों घबराकर एक-दूसरे से अलग हो गए।

नीरा ने मुझे अपने रूम में रहने को कहा और फिर वह दरवाजे की तरफ जाने लगी।
मैं उसके रूम से छिपकर डरते हुए देख रहा था कि कौन आ गया।

फिर नीरा ने दरवाजा खोला तो देखा कि वही छोटी लड़की थी, जो मुझे उसका लेटर देने आई थी।

जब वह चली गई, तो मैं निश्चिंत होकर उसके बेड पर बैठ गया।

थोड़ी देर बाद नीरा वापस दरवाजे को बंद करके लौट आई।

उसके आते ही मैंने उसे गोद में उठाकर बेड पर लिटा दिया और तेजी से उसके पूरे शरीर को चूमने लगा।
वह भी मुझे चूमने लगी।

मैंने चूमने के साथ-साथ उसके दोनों वक्षों को तेजी से दबाना शुरू किया, जिससे वह आहें भरने लगी।
उसके मुँह से ‘आआ आआ, ईईई, उउउउ’ जैसे मादक स्वर निकल रहे थे।

मैंने देर न करते हुए उसके टॉप को झटके से निकाल दिया।
अब उसकी गुलाबी रंग की ब्रा में बूब्स बहुत ही प्यारे लग रहे थे।

फिर मैंने उसके जींस को भी झटके से निकाल फेंका।
अब वह गुलाबी रंग की पैंटी और ब्रा में एकदम मस्त लग रही थी।
फिर मैंने अपने सारे कपड़े एक-एक करके उतार दिए और सिर्फ अंडरवियर में रह गया।

यंग देसी गर्ल नीरा शर्मा रही थी और अपने हाथ से अपने चेहरे को छुपाने की कोशिश कर रही थी।

मैंने नीरा को सीधा किया और उसके चूचे को ब्रा से आजाद कर दिया और उसे अपने मुँह में लेकर चूसने लगा।

नीरा धीरे-धीरे गर्म होने लगी और मेरे सर को पकड़कर चूचे की ओर दबाने लगी।

तभी मैंने अपने एक हाथ से उसकी पैन्टी को नीचे की ओर खिसका कर निकाल दिया और चुम्बन करते हुए उसकी नाभि से होते हुए उसकी चूत पर जा पहुँचा।

मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चाटने लगा।
नीरा और भी गर्म होने लगी।

मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा और वह मस्त होकर मेरे सिर को अपनी चूत में दबाने लगी; वह ऐसा कर रही थी जैसे मेरे सर को चूत में ही घुसा देगी!

10 मिनट चूत चाटने के बाद नीरा का शरीर अकड़ने लगा और उसने मेरे मुँह में ही झाड़ दिया, जिसे मैं पूरा चाटकर साफ़ कर गया।
उसकी चूत का रस बहुत ही स्वादिष्ट था।

नीरा बहुत जोश में थी, तभी मैंने अपना अंडरवियर निकाल कर अपना लौड़ा उसके मुँह के पास ले गया।

नीरा ने जब मेरा लौड़ा देखा तो वह एकदम से डर गई क्योंकि मेरा लौड़ा 8 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा था!

मेरे बार-बार बोलने पर नीरा ने मेरे लौड़े को मुँह में ले लिया।
उसके होंठ इतने संकरे थे कि वह मुश्किल से मेरा लौड़ा चूस पा रही थी.
और मैं भी इतने जोश में था कि उसके मुँह को ही गपागप चोदने लगा।

जब झटके से मेरा लौड़ा उसके मुँह के अन्दर जाता, वह छटपटाने लगती और ‘ओओअ ओओ, आह आआ, उम्मउ, ऊऊऊ’ करने लगती।

15 मिनट में ही मैंने उसके मुँह में सारा रस भर दिया और वह सारा रस पी गई।

थोड़ी देर उसके जिस्म से खेलने के बाद मेरा लौड़ा फिर से सनसना उठा।
फिर मैंने नीरा के दोनों पैरों को ऊपर आसमान की ओर उठा दिया और उसकी दोनों टांगों के बीच उसकी चूत में अपना लौड़ा सेट करके धीरे-धीरे धक्का लगाने लगा, लेकिन लौड़ा घुस ही नहीं रहा था।

फिर मैंने नीरा के चूत का पानी अपने लौड़े पर लगाया और फिर से चूत पर लन्ड सेट करके एक जोर का धक्का दिया!

मेरा आधा लन्ड नीरा की चूत में घुस गया।
नीरा छटपटाने लगी, लेकिन मैंने उसके कुछ करने से पहले ही एक और तेज़ धक्का लगा दिया और लन्ड पूरा चूत में धंस गया!
मैंने थोड़ी देर इंतजार किया।

फिर जब नीरा शांत हो गई, तो मैंने धीरे-धीरे चोदना शुरू कर दिया।

अब नीरा को भी मज़ा आने लगा था, तो मैंने स्पीड बढ़ा दी और भूखे शेर की तरह दे-दनादन चोदने लगा।

25 मिनट की लगातार चुदाई के बाद मैं नीरा की चूत में ही झड़ गया, और तब तक नीरा भी 2 बार झड़ चुकी थी।

उस दिन मैंने नीरा को अलग-अलग पोजीशन में 4 घंटे तक चोदा—आगे से, पीछे से, घोड़ी बनाकर तो कभी ऊपर चढ़ाकर।

शाम को 4 बजे मैं उसके घर से बाहर निकल आया।
जब रात को हम लोग टहलने निकले थे, तो वह लड़खड़ा कर चल रही थी।
हम लोग उस गाँव में 10 दिन रहे और मैंने कुल 4 दिन उसकी खूब चुदाई की।

इसके बाद भी नीरा दो बार मेरे घर आई थी, जब मेरे घर में कोई नहीं था, और अपनी चुदाई करवा कर गई थी।
एक बार तो वह मेरे साथ रात में भी रुकी थी, जिसमें मैंने उसे रात भर चोदा था और उसकी गांड भी बजाई थी।

यंग देसी गर्ल कहानी कैसी लगी?

नोट: यहां पोस्ट की गई सभी कहानियां केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रस्तुत की गई हैं। कृपया इन्हें वास्तविक जीवन से जोड़कर न देखें। कहानी में दर्शाए गए किसी भी दृश्य, घटना या चित्र का वास्तविक जीवन में प्रयोग करना हानिकारक हो सकता है। इसके लिए न तो कहानी के लेखक और न ही प्रस्तुतकर्ता जिम्मेदार होंगे। इसलिए कृपया अपनी समझ, बुद्धि और विवेक का उपयोग करें।

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